
तेरी तस्वीर को दिल से लगाकररात की तन्हाइयों में तुम्हें अपना बनाकरकई उलझे किस्सों को भी सुलझाकरगैरो से छीन कर तुम्हें अपना बनाकरमैं अक्सर तुम्हें सोचकर खुश हो लेता हूंआदमी में कैसा जो तुम्हारी याद में रो लेता हूँ।आदमी मैं कैसा...........आदत कैसे सुधारू तुम्हारे अपना बनाकरदिल की तड़प की हर हद में जाकरइस दौर में कोई अपना दूर रहता है क्याइस दर्द भरे बात को भी अपना मानकरमेरी अमानत तू किसी गैर के पास आज भी है।जहन में रखकर तुम्हारी तस्वीर को चूम लेता हूं।आदमी...