
घर में दिया जलाओ अब की दीपावली में
तुम जश्न फिर मनाओ अब की दीपावली में
है चारो तरफ अंधेरा और पथ भी धूमिल है
कोई राह तो दिखाओ अब की दीपावली में
मेरे घर को फूंका कुछ शहर के दरिंदो ने
और खुशियां फिर मनाई अब की दीपावली में
कोई रोता है तो रोये इस बात कि ख़बर हैं
कोई हँसते को रुलाये अबकी दीपावली में
कोई मुझको मिला था एक रोज मोहब्बत में
फिर दे गया वो तोहमत अबकी दीपावली में
स्वरचित - लव तिवारी
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