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जून 2020 ~ Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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गुरुवार, 11 जून 2020

एक थे लालूजी/एक हैं लालूजी (लालू यादव जन्म दिवस विशेष)- लव तिवारी

एक थे लालूजी एक हैं लालूजी वे और दिन थे, जब लालूजी बिहार के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। तब लालूजी का रुतबा किसी शहंशाह से कम नहीं होता था। जिसकी ओर आँख उठा कर देख लें वह भष्म हो जाय उत्तर प्रदेश में जब सुश्री मायावती मुख्यमंत्री थीं तो वे अपने सुरक्षाकर्मियों से जूती उठवाती थीं। बहुत कम लोग जानते होंगे कि यह महान परम्परा श्री लालूजी ने शुरू की थी। वे आईएस लोगों से खैनी मलवाते थे।उनके रुतबे की कुछ बड़ी कहानियां हैं। गोपालगंज के हथुआ में पहले 'भाकपा...

रविवार, 7 जून 2020

धनंजय मिश्रा के अंतिम संस्‍कार से जुड़ी कुछ अंदर की बातें, जिनका कहीं जिक्र नहींं किया जा रहा है - अज्ञात

धनंजय मिश्रा के अंतिम संस्‍कार से जुड़ी कुछ अंदर की बातें, जिनका कहीं जिक्र नहींं किया जा रहा है नेता और अभिनेता में कई चीजें एक जैसी होती हैं। दोनों जनता को बेवकूफ बनाना जानते हैं। दोनों अवसर को भुनाने की कला में माहिर होते हैं और काम किये बिना क्रेडिट कैसे लिया जाता है, ये दोनों बखूबी जानते हैं। यू ट्यूब देख लीजिए, ऐसे ऐसे लोगों को क्रेडिट दिया जा रहा है, जिन्होंने फोन करके यह जानना भी मुनासिब नहीं समझा कि धनंजय मिश्रा के साथ एकाएक इतना...

बुधवार, 3 जून 2020

पूर्वांचल के सबसे बड़े समाजसेवी है आदरणीय प्रवीण तिवारी पेड़ बाबा - लव तिवारी

गंगा की गोदी में पले बढ़े गौ माता के दूध का पान किया। जिसको दे दिया वचन समझो तन मन धन सब कुछ दान दिया।। कोरोना एक वैश्विक आपदा इस महामारी में लाखो करोड़ो लोगो को अपने चपेट में ले रखा है। बेरोजगारी, भूख , मजदूरों का शहर से घर की तरफ का पलायन , पैदल चलते रास्ते में बिना कुछ खाये पिये मजदूरों की कई दिन की पैदल यात्रा, कुछ तो सँघर्ष कर सही सलामत घर पहुँच गये और कुछ रास्ते मे भूख और धन के अभाव में दम तोड़ देते है। इनकी स्थिति परिस्थिति से रूबरू होकर...

मंगलवार, 2 जून 2020

दर्द क्या है इसका एहसास उसको ही पता है। जिंदगी का सफर जिसका मुश्किलों में रहा है- लव तिवारी

दर्द क्या है इसका एहसास उसको ही पता है। जिंदगी का सफर जिसका मुश्किलों में रहा है।। नाविक में बैठे उस आदमी को गहराई क्या अंदाजा। एक लाचार ही समझे जो तैर कर दरिया को पार किया है।। बातें कल जो करता था वो आज भी वही करेगा। मजदूर मौन होकर आज भी सैकड़ों दर्द को सहा है।। दिन जिसका नही रात तो उसकी काली ही होगी। ग़रीब ही मजदूरी कर रात मे सड़को पर सोता है। राजनीति आज भी हैं कल भी थी और हमेशा रहेगी। इस फ़जीहत में बाप बेटो ने अपने को ही डँसा है।। रचना...