
हमसे दामन छुडाकर चल दिए,गम से मुझको मिलाकर चल दिए धोखा तो कई बार खाया है हमने,मगर अपनी बेवफाई से वो घायल करके चल दिए कहती थी जो खुद को सहारा मेरी जिंदगी काआज वो हाथ छुडाकर चल दिएनाजाने किस गुनाह की सजा मिली है आज मुझको की खुली है आँखे मेरी और वो कफ़न ओढाकर चल दिए...