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जनवरी 2014 ~ Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी यानी मांसपेशियों की दुर्बलता

कक्षा 7 में पढ़ने वाली मेधा ने एक दिन रिक्शा से उतरते समय महसूस किया कि उसे पैर नीचे रखने में दिक्कत हो रही है। उसने सोचा ऐसे ही पैर सो गया होगा। पर अगले दिन सीढ़िया चढ़ते समय उसे सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत हो रही है। सीढ़िया चढ़ते समय उसे पैर को हाथ से सहारा देना पड़ रहा है। स्कूल से लौट कर उसने यह बात अपने पापा को बताई। पापा उसे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने लक्षण समझने के बाद मस्कुलर डिस्ट्रॉफी होने की आशंका व्यक्त की। कुछ टेस्ट कराए। डेस्ट में आशंका सही साबित हुई। क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक आनुवांशिक बीमारी है। पर अनुवांशिक...

सोमवार, 13 जनवरी 2014

कठिन है रहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलो

कठिन है रहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलोबहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलोतमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता हैयह जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ चलोनशें में चूर हूँ मैं भी तुम्हें भी होश नहींबड़ा मज़ा हो अगर थोड़ी दूर साथ चलोयह एक शब् की मुलाक़ात भी गनीमत हैकिसे है कल की ख़बर थोड़ी दूर साथ चलोअभी तो जाग रहे हैं चिराग़ राहों केअभी है दूर सहर थोड़ी दूर साथ चलो ........अहमद फ़र...

रविवार, 12 जनवरी 2014

तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए और वो तुमसे खफ्फा होतो मज़ा आ जाए

तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए और वो तुमसे खफ्फा होतो मज़ा आ जाए और वो तुमसे खफ्फा होतो मज़ा आ जाए तू कोई नाम हथेली पे लिखे मेहंदी से और वो नाम मेरा होतो मज़ा आ जाए तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए मेरे शिकवे तुझे अच्छे नही लगते लेकिन तुझ को भी मुझसे गिल्ला होतो मज़ा आ जाए तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए तुझको एहसास होता मेरी बेचैनी का कोई तुझसे भी जुड़ा होतो मज़ा आ जाए तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए और वो तुमसे खफ्फा होतो मज़ा आ जाए ...

गुरुवार, 9 जनवरी 2014

दिल की दास्ताँ तुझे कैसे सुनाउ?

दिल की दास्ताँ दिल की दास्ताँ तुझे कैसे सुनाउ? व्यथा जो मन में है उसे कैसे दिखाऊ पास आओ थोडा सा तो कान में कुछ कह पाऊँ रोना चाहती हूँ सामने, पर रो ना पाऊँ। दिल कीदिल के जज्बात चूर चूर होकर रह गएजैसे ही आपने कुछ कहा वो सुन्न हो गएसुनने के वो आदि न थे पर सुन के रेह गएआपकी आदत से आहत होकर दर किनारा कर लिये। दिल कीरहेगी सदा बेबसी पर भुला न पाउंगीसर्द मौसम है ज्यादा फिर भी बर्दास्त कर लुंगीहर मौसम में अपने आपको ऐसे ही ढाल पाऊँगीपतझड़ आ जाएँ राह में, स्वागत भी कर पाउंगी। दिल कीगिला है ना शिकवा मन में, फिर भी दुःख क्यों है?मिटने को...

मंगलवार, 7 जनवरी 2014

कभी खुद पर, कभी हालत पर रोना आया । मुझे तेरी हर बात पे रोना आया ।

कभी खुद पर, कभी हालत पर रोना आया ।मुझे तेरी हर बात पे रोना आया ।गद्दार कहना भी तुझे खुद से गद्दारी है ।मुझे तेरे हालात पे रोना आया "धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती ,रात ढलती नहीं थम जाती है ,सर्द मौसम की एक दिक्कत है ,याद तक जम के बैठ जाती है.....!" खोये रहो तुम खयालों में ऐसे हीये गुलशन वीरान हो जायेगायूँ ही बैठे रहो तुम इंतज़ार में हीपूरा शहर ही शमशान हो जायेगाकब तलक तुम रहोगे उनके भरोसेजो करते भ्रमित, खुद भी रहते भ्रमिततोड़ों भ्रमों को और आगे बढ़ो तुमये गुलशन गुलज़ार हो जाये...

हमारा नाम लिखकर कागजों पर फिर उडा देना। भला सीखा कहाँ तुमने सितम को यूँ हवा देना॥

हमारा नाम लिखकर कागजों पर फिर उडा देना।भला सीखा कहाँ तुमने सितम को यूँ हवा देना॥हमे मालूम है तुम भी किसी से प्यार करते हो।तुम्हे भी इल्म है मेरा किसी पर मुस्कुरा देना॥मुहब्बत ग़म मे हो या खुशी मे दोनो बेहतर है।कहीं कोई मिले तुमको उसे यह मशविरा देना॥तुम अपने हक पे जायज हो हम अपने हक पे जायज हैं।कहाँ फिर बात आती है किसी का घर गिरा देना॥यॆ दुनियाँ है बडी काफिर तू इसकी बात पर मत आ।के इसका काम है ऊपर चढा कर फिर गिरा देना॥रीतेश रजवाणा"विभ...

आप को देख कर देखता रह गया, क्या कहूँ और कहने को क्या रह गया,

आप को देख कर देखता रह गया,क्या कहूँ और कहने को क्या रह गया,आते आते मेरा नाम सा रह गया,उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया,वो मेरे सामने ही गया और मैं,रास्ते की तरह देखता रह गया,झूठ वाले कहीं से कहीं बढ गये,और मैं था के सच बोलता रह गया,आंधियों के इरादे तो अच्छे ना थे,ये दिया कैसे जलता रह गया,लेखक ___वसीम बरेलवीगायक ___जगजीत सि...