
मैं_गाजीपुर_हूं गाजीपुर की भी कुछ सुनिए"हटो व्योम के मेघ स्वर्ग लूटने हम आते हैंगौरव बलिदानी गाजीपुर तेरी कीर्ति गाते हैं"'सुनो तुम कब जानोगे कि मेरा हाल कैसा हैअभी मेरे कांधे से सारी दुनिया देखते हों |'भागीरथी की धारा और गोमती की लहरों के साथ लिपटे हुए श्वेत व चमकते रेत भण्डारों की भांति मैं कभी जल की धार में बहता रहा और कभी पवन की प्रबल वेग में पूरे पूर्वांचल की मिट्टी में अपने और तुमको भी चमकाता रहा हूं।तुम तो अभी भी बच्चे हो क्योंकि वैदिक...