
तुम्हीं से हमने किया मुहब्बत, तुम्हीं से लेकिन बता न पाया।चली गयी तुम कसम धराकर, कसम से मैं कसमसा न पाया।लिखे थे तुमने लहू से अपने, चुभा-चुभाकर कलम नसों में।जला चुका हूँ कई ख़तों को, तुम्हारे ख़त मैं जला न पाया।हमारी हसरत रही अधूरी, हमारे सपने रहे अधूरे।गुलाब लेकर खड़ा रहा पर, तुम्हारी ज़ुल्फ़ें सजा न पाया।नहीं है तुम सा कोई नगीना, हमारी किस्मत में ख़ाक ही है। तमाम कोशिश के बाद भी तो, मैं अपनी किस्मत जगा न पाया।तुम्हारी ख़िदमत में सर झुकाना, न थी इबादत...