
कैसा मंजर, यह कैसा दृश्य है।यह कैसी आफत आयी है।घर से विदा होती जिस बहन कीअर्थी ने भी की रुसवाई है।।मानव में रही न मानवता डरी सहमी अब बच्चियां भीइन दरिंदो को क्या सज़ा देजो हवस का बना पुजारी है।।सत्ता के नेताओं को भीभाती अपनी राजनीति हीउनसे पूछो क्या हालत है।बेटी जिनकी जलाई है।।कब सुधरोंगे तुम दरिंदोकब होगा तुम्हारा मन निर्मलगंगा के इस देश मे तुमनेआज नरक नगरी बसाई है।।रचना - लव तिवारीदिनांक- १-अक्टूबर-२०२०ग़ाज़ीपुर उत्तर प्र...