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रविवार, 18 जनवरी 2026

ए आर रहमान यह कैसा संगीत- श्री माधव कृष्ण

ए आर रहमान: यह कैसा संगीत!

जिस रहमान साहब के ऑस्कर जीतने पर मैं झूम उठा था, हर भारतीय गर्व का अनुभव कर रहा था, जिनके हर संगीत पर हम तालियां बजाते थे, उन्होंने यह कैसा राग छेड़ दिया?

अभी बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में रहमान ने कहा था, 'पिछले 8 सालों में शायद सत्ता का बदलाव हुआ है और जो रचनात्मक नहीं हैं. वे फैसले ले रहे हैं. शायद साम्प्रदायिक बात भी रही हो लेकिन मेरे सामने किसी ने नहीं कहा.

हां, कुछ व्हिस्पर सुनाई देती हैं. जैसे आपको बुक किया था लेकिन दूसरी म्यूजिक कंपनी ने फिल्म फंड की, और अपने संगीतकार ले आए. मैं कहता हूं ठीक है. मैं आराम करूंगा.'

यह अच्छा हुआ कि, आज उन्होंने अपने वक्तव्य पर यू टर्न ले लिए लेकिन उनके पिछले बयान ने भारतीय क्रिकेट टीम के भूतपूर्व कप्तान और बाद में सांसद रहे मोहम्मद अजहरुद्दीन की याद दिला दी।

मैच फिक्सिंग में नाम आने के बाद उन्होंने कहा था कि, एक मुस्लिम होने के नाते उन्हें टारगेट किया जा रहा है। १० साल तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी जिन्हें भारत का डिप्लोमेट रहने का गौरव भी था, ने विदाई समारोह में कहा था कि, भारत में अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं।

हम सबके प्रिय अभिनेता थे आमिर खान ने २०१५ में वक्तव्य दिया था कि, उनकी पत्नी किरण राव को भारत में असुरक्षा के कारण भय लगता है और वह बच्चों के लिए भारत को छोड़ने का मन बना रही हैं।

इत्यादि। ये सभी बयान अखबारों में और न्यूज चैनल्स में प्रमुखता से प्रकाशित हुए थे। एक बार मेरे एक मुस्लिम बुद्धिजीवी मित्र ने कहा था कि, भारत में मुस्लिमों को हमेशा सिद्ध करना पड़ता रहेगा कि हम राष्ट्रभक्त हैं।

इन विषयों पर लिखना दुखद तो है, लेकिन लिखना भी पड़ेगा। उस मित्र के बयान को ही उल्टा करके यह भी सोचा जा सकता है कि, क्या भारत को भी हमेशा सिद्ध करना पड़ेगा कि भारत मुस्लिमों से भी उतना ही प्रेम करता है जितना हिन्दुओं से।

और मुझे लगता है कि रहमान, अंसारी, अजहर और आमिर जैसे कुछ गिने चुने लोगों की व्यक्तिगत भावनाओं के विरुद्ध इस देश में करोड़ों मुस्लिम भरे हुए हैं जो भारत में सुरक्षित हैं और भारत में रहना पसंद करते हैं।

हम भारत के लोग! इस देश ने हमें क्या दिया, यह सबका सामान्य प्रश्न होता है। लेकिन हम इस देश को क्या दे रहे हैं? अधिकार और कर्त्तव्य का यक्ष प्रश्न हमेशा बना रहेगा।

इस देश ने आपको क्या दिया, यदि यह हम भूल भी जाएं तो भी केवल दशमेश गुरु गोबिंद सिंह जी को याद रखें जिन्होंने जिस देश और जिन देशवासियों के लिए अपना सब कुछ खो दिया, उन लोगों ने उनके अंतिम समय में उनका साथ छोड़ दिया।

कोई ए आर रहमान तक स्वामी विवेकानंद का यह संदेश भेज दे:

धर्म के लिए, दलितों और पीड़ितों के लिए, अपना और अपने सबसे प्रिय और करीबी लोगों का रक्त बहाने के बाद, यहाँ तक कि उन लोगों द्वारा त्याग दिए जाने पर भी जिनके लिए यह रक्त बहाया गया था, उन्होंने अपने देश या अपने लोगों के खिलाफ एक शब्द भी शिकायत किए बिना, एक शब्द भी बड़बड़ाए बिना दक्षिण की ओर प्रस्थान किया।”

“भारत के पुनः गौरवान्वित होने के लिए, आप में से प्रत्येक को गुरु गोविंद सिंह बनना होगा – उनका सच्चा अनुयायी बनना होगा।”

माधव कृष्ण, १८.१.२६