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2015 ~ Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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सोमवार, 2 नवंबर 2015

Bulandi Der Tak Kis Shakhsh ke Hisse

बुलंदी देर तक किस शख्श के हिस्से में रहती है बुलंदी देर तक किस शख्श के हिस्से में रहती है बहुत ऊँची इमारत हर घडी खतरे में रहती है ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता, मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी माँ सज़दे में रहती है जी तो बहुत चाहता है इस कैद-ए-जान से निकल जाएँ हम तुम्हारी याद भी लेकिन इसी मलबे में रहती है अमीरी रेशम-ओ-कमख्वाब में नंगी नज़र आई गरीबी शान से एक टाट के परदे में रहती है मैं इंसान हूँ बहक जाना मेरी फितरत में शामिल है हवा भी उसको छू के देर तक नशे में रहती है मोहब्बत में परखने जांचने से फायदा क्या है कमी...

Maa Shayari By Munawwar Rana

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना Maine rote hue ponchhe the kisi din aansoo Muddaton Maa ne nahi dhoya dupatta apna ***** लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती Labon pe uske kabhi baddua nahi hoti Bas ek Maa hai jo kabhi khafa nahi hoti ***** अब भी चलती है जब आँधी कभी ग़म की ‘राना’ माँ की ममता मुझे बाहों में छुपा लेती है Ab bhi chalti...

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2015

यहाँ सुख मुझे दो जहाँ का मिला हैं मेरा गाव जाने कहाँ खो गया है- चंदन दास साहब और अनुराधा जी की आवाज़

ये सहेरे तमन्ना अमीरो की दुनियाये ख़ुदग़र्ज़ और बेज़मीरो की दुनियायहाँ सुख मुझे दो जहाँ का मिला हैंमेरा गाव जाने कहाँ खो गया है... वो गाव के बच्चे वो बच्चो की टोली वो भोली वो मासूम चाहत की बोली वो गुल्ली वो डंडा वो लड़ना वो जगड़नामगर हाथ फिर दोस्ती से पकड़नावो मंज़र हर एक याद फिर आ रहा हैंमेरा गाव जाने कहाँ खो गया है I वो चोपाल वो आल्हा रुदल के किससेवो गीतों की गंगा वो सावन के जुलेवो लूट ता हुआ प्यार वो ज़िंदगानीहैं मेरे लिए भूली बिसरी कहानीछलकती...

मंगलवार, 15 सितंबर 2015

Huyi Rah Mushkil To Kya Kar Chale हुई राह मुश्किल तो क्या कर चले

हुई राह मुश्किल तो क्या कर चले कदम-दर-कदम हौसला कर चले... उबरते रहे हादसों से सदा गिरे, फिर उठे, मुस्कुरा कर चले... लिखा जिंदगी पर फ़साना कभी कभी मौत पर गुनगुना कर चले... वो आये जो महफ़िल में मेरी, मुझे नजर में सभी की खुदा कर चले... बनाया, सजाया, सँवारा जिन्हें वही लोग हमको मिटा कर चले... उन्हें रूठने की है आदत पड़ी हमारी भी जिद है, मना कर चले... जो कमबख्त होता था अपना कभी उसी दिल को हम आपका कर चले... ...

गुरुवार, 3 सितंबर 2015

Badalate Dekha Hai - बदलते देखा है।

ज़रूर पढ़ें, बड़ी ही गहरी बात लिख दी है किसी शक्शियत नें ... बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में ,उसी देहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।सजाया गया था चमचमाते झालर से मस्जिद और चमकते चादर से दरगाह को,बाहर एक फ़कीर को भूख और ठंड से तड़प के मरते देखा है ।।लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार ,पर बहार एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हाल के लिए ,घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई...

रविवार, 28 जून 2015

Ye Alam Hai Ki Gum Ki Bhi- अब ये आलम है कि ग़म की भी

अब ये आलम है कि ग़म की भी ख़बर नहीं होती..! अश्क बह जाते हैं लेकिन आँख तर नहीं होती..! वो तो शायरों ने लफ़झों से सजा रखा है, वरना महोब्बत इतनी भी हसीं नहीं होती...! यकिन जानो.. मे तुम्हारे उन केदियों मे से हुँ..! जो खुले दरवाजे देखकर भी फरार नही होती...! फ़ासले तो बढ़ा रहे हो मगर इतना याद रखना, मुहब्बत बार बार इंसान पर मेहरबान नहीं होती..! फिर भी मैं हर बार रही मेहरबान तुम पर लेकिन ये कहावत सच ही है,, कुत्तों को कभी घी हज्म नहीं होती...!...

गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

Bekar Is Dil Ki Tu Aas Banke- बेकरार इस दिल की तू आस बनके

बेकरार इस दिल की तू आस बनके ,कहाँ छिप गया आँखों की प्यास बनके..में तरासी थी तुझे लाखों मे से चुन के , वो कौन जो ले गई तुझे, मुझसे छीन के..?कुछ तो बोल न तड़पा यूँ चुप रहेके , हुई क्या खता जो बदला ले रहा गिन गिन के...

Apani Tanhai Ki Tasvir Banakar Rakhu- अपनी तन्हाई की तस्वीर बनाकर रखूं

  अपनी तन्हाई की तस्वीर बनाकर रखूं   आईने को अपने रूबरू बिठाकर रखूं...   इन दीवारों से बनी कैद में जी लेती हूंइस तरह खुद को मैं दुनिया से बचाकर रखूं... चांद सितारों से भरे उस आस्मा की तरह अपने सीने में कई आग मैं जलाकर रखूं...    रोक लेती हूं दरिया को जब भी चाहूंअपनी आंखों में इसे झील मैं बनाकर रखूं...कहना चाहूँ भी तो ना कहे पाऊं बात दिल कीन चाहते हुए भी अपने दोस्तों से छुपाकर रखूं......

Sham To Rakh Liya Aab Raat -शाम तो रख लिया अब रात

शाम तो रख लिया अब रात को मैं कैसे रखूंइतने उदास लम्हों को एक दिल में कैसे रखूं...हाथ आए थे चंद अश्क, छिटक के भाग गएअपनी आंखों में उसे बांध कर भला कैसे रखूं...यादों के बयार संग मेरे दिल तक चले आए हैंइन गर्द गुबारों को इस जिगर में अब कैसे रखूं...बूंद बनकर जो मेरी आंखों से दर्द बहा ले गयाऐसे सावन को तेरे तोहफे के लिए मैं कैसे रखूं....

Gum Ki Nazar Se Dekhiye- गम की नजर से देखिए

गम की नजर से देखिए, दिल के असर से देखिएहै अश्क भी लाल रंग, खूने-जिगर से देखिए..तैराक भी कितने यहां प्यासे ही मर गएसंसार की नदी में भी जरा फिसल के देखिए..खुशबू से भीग जाएगी नाजुक सी उंगलियांमेरे दिए गुलाब को आप मसल के देखिए..ये हुस्न देखकर ही तो वो चांद परेशान हैवो जल रहा है हमसे, घर से निकल के देखिए...

Kabhi To Mujhase Kah Do कभी तो मुझसे ये कह दो कि तुम मेरे हो.

कभी तो मुझसे ये कह दो कि तुम मेरे हो..रूह में अहसास तो भर दो कि तुम मेरे हो..तन और मन का ना सही, तेरे दिल मेंबसने का मुझको पता दो , कि तुम मेरे हो..नहीं चाहिए तेरे किसी भी हिस्से की जिंदगीदो पल साथ देकर जता दो, कि तुम मेरे हो ..पुरे ज़माने से भले ही हमको छुपाना ..खुद के दिल को तो बता दो , कि तुम मेरे हो ..अपना मुझे कभी ना भी बनाना, लेकिनसुहाना सपना तो दिखा दो, कि तुम मेरे हो ...