
समर में पीठ जो दिखावें उ सानी कईसनसर बाजार में लूट जाला उ पानी कईसनन हो जन जन की युगों की उ कहानी कईसनवतन के काम ना आवे उ जवानी कईसनचारों ओरिया नज़र फेर देखा ई शहीदन की खू की कमाईधन्य हउवे ई भारत के ललना, धन्य हउवी ई धरती माई।।बादल विपत्ति के जब राणा पे छा गये।घर वार छोड़कर वो जंगल में आ गये।।दिखती थी नदी और पहाड़ो की चोटियांबनने लगी हर शाम अब घासों की रोटियाँताज हिमगिरि बा इतना सलोना, कही लग जाएं ना जादू टोना।दाग लागिहे न माई के अचरा, कितनो घरिहे विपतिया...