
विवशता :::
चिड़िया
घर के सामने
पेड़ पर चीखती है
नारे लगाती है मेरे विरुद्ध
बच्चों के साथ चहचहा कर खेलती है
फुदक फुदक कर नाचती है
गड़ती है मेरी आंखों में
किरकिरी की तरह
मुझे हंसी क्यों नहीं आती
मेरे बच्चे मेरे साथ खेल क्यों नहीं पाते
आता है गुस्सा
चिढ़ाती है मुझको
मारता हूं ढेले भगाता हूं उसको
उड़-उड़ बार-बार बैठ जाती है
डरती क्यों नहीं चिड़िया
नहीं जानती
हूं कितना वहशी
बेदर्द स्वार्थी भय का प्रतीक
वह तो बस चिड़िया
जीभ का स्वाद...