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2014 ~ Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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बुधवार, 26 नवंबर 2014

अपने स्कूलों से तो, पढ़कर मैं आया और कुछ, जिंदगी जब भी मिली, उसने सिखाया और कुछ!

अपने स्कूलों से तो, पढ़कर मैं आया और कुछ,जिंदगी जब भी मिली, उसने सिखाया और कुछ! सख्त असमंजश में हूँ बच्चों को क्या तालीम दूँ ,साथ लेकर कुछ चला था, काम आया और कुछ ! आज फिर मायूस होकर, उसकी महफ़िल से उठा,मुझको मेरी बेबसी ने, फिर रुलाया और कुछ ! इसको भोलापन कहूं या, उसकी होशियारी कहूँ?मैंने पूछा और कुछ, उसने बताया और कुछ! सब्र का फल हर समय मीठा ही हो, मुमकिन नहीं,मुझको वादे कुछ मिले थे, मैंने पाया और कुछ! आजकल 'विश्नोई' के, नग्मों की रंगत और है,शायद उसका दिल किसी ने फिर दुखाया और कुछ...

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी हैये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द मेंयहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिनहमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त हैहमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगेकिराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी मेंकिसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है...

बुधवार, 8 अक्टूबर 2014

देख कर तस्वीर तेरी जमाना भूल जाते है ,

देख कर तस्वीर तेरी जमाना भूल जाते है ,खुशी इतनी होती है कि मुस्कुराना भूल जाते है।। पोंछते रहते है बहते अश्क जमाने भर के ,अपनी आँखो के आँसू दिखाना भूल जाते है।। हजारो बाते समझाते रहते है दुनियाभर को ,बस अपने आप को समझाना भूल जाते है।। यह अँधेरा भी खुश रहता है रातो का मेरी ,चराग रखे रहते है और जलाना भूल जाते है।। आँधियो मे भी रौशन रहता है सदा वजूद मेरा ,दिल के जलते दिये तूफान मे बुझाना भूल जाते है।। वो समझ नही पाते मेरी नजरों की चाहत,मूझे उससे मोहब्बत है हम बताना भूल जाते है।।...

मंगलवार, 23 सितंबर 2014

एक था टाइगर

कृपया इस पोस्ट को पूरा जरुर पढ़े======================पिछले साल रिलीज हुई फिल्म "एक था टाइगर" ने बड़ेपरदे पर जबरदस्त धूम मचाई थी....इस फिल्म ने कमाई के सारे रिकार्ड तोड दिये थे औरफिल्म के हीरो सलमान खान ने भी खूब पैसा औरवाहवाही बटोरी थी...इस फोटो मेँ दिखाये गये ये शख्स "एक था टाइगर"फिल्म के सलमान खान की तरह बहुत मशहूर तो नहीँ हैऔर शायद ही कोई इनके बारे मेँजानता हो या किसी ने सुना हो? इनका नामथा रवीन्द्र कौशिक.... ये भारतकी जासूसी संस्था...

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

था मैं नींद में और मुझे इतना सजाया जा रहा था

था मैं नींद में और मुझे इतना सजाया जा रहा था.... . बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था.....ना जानेथा वो कौन सा अजब खेलमेरे घर में.....बच्चो की तरह मुझेकंधे पर उठाया जा रहा था.....था पास मेरा हर अपनाउस वक़्त.....फिर भी मैं हर किसी केमन सेभुलाया जा रहा था....जो कभी देखतेभी न थे मोहब्बत कीनिगाहों से.....उनके दिल से भी प्यार मुझपर लुटाया जा रहा था....मालूम नही क्योंहैरान था हर कोई मुझेसोते हुए देख कर.....जोर-जोर से रोकर मुझेजगाया जा रहा था....काँप उठीमेरी...

सोमवार, 25 अगस्त 2014

डोलि गइल पतइन के पात-पात मन, जब से छु गइल पवन -भोलानाथ गहमरी

डोलि गइल पतइन के पात-पात मन,  जब से छु गइल पवन पाँव के अलम नाहीं बाँह बे-सहारा, प्रान एक तिनिका पर टंगि गइल बेचारा, लागि गइल अइसे में बाह रे लगन रचि गइल सिंगार सरुज-चान आसमान, जिनगी के गीत लिखे रात भर बिहान, बाँचि गइल अनजाने में बेकल नयन। देह गइल परदेसी मोल कुछ पियार के, दर्द एक बसा गइल घरी-घरी निहार के, लुटि गइल जनम-जनम के हर सुघर सप...

काँट –कुश से भरल डगरिया, धरीं बचा के पाँव रे- भोलानाथ गहमरी

काँट –कुश से भरल डगरिया, धरीं बचा के पाँव रे माटी ऊपर, छानी छप्पर, उहे हामरो गाँव रे….. चारों ओर सुहावन लागे, निर्मल ताल-तलैया, अमवा के डाली पर बैठल, गावे गीत कोइलिया, थकल-बटोही पल-भर बैठे, आ बगिया के छाँव रे… सनन –सनन सन बहे बायरिया, चरर-मरर बंसवरिया, घरर-घरर-घर मथनी बोले, दहिया के कंह्तरिया, साँझ सवेरे गइया बोले, बछरू बोले माँव रे……. चान-सुरुज जिनकर रखवारा, माटी जिनकर थाती, लहरे खेतन, बीच फसलीया, देख के लहरे छाती, घर-घर सबकर भूख मिटावे, नाहीं चाहे नाव रे……. निकसे पनिया के पनिघटवा, घूँघट काढ़ गुजरिया, मथवा पर धई चले डगरिया, दूई-दूई भरल गगरिया, सुधिया...

कवने खोंतवा में लुकाइलु, आहि रे बालम चिरई,-भोलानाथ गहमरी

कवने खोंतवा में लुकाइलु, आहि रे बालम चिरई, वन-वन ढूँढलीं, दर-दर ढूँढलीं, ढूँढलीं नदी के तीरे, साँझ के ढूँढलीं, रात के ढूँढलीं, ढूँढलीं होत फजीरे, मन में ढूँढलीं, जन में ढूँढलीं, ढूँढलीं बीच बजारे, हिया-हिया में पैंइठ के ढूँढलीं, ढूँढलीं विरह के मारे, कौने सुगना पे लुभइलु, आहि रे बालम चिरंई………. गीत के हम हर कड़ी से पूछलीं, पूछलीं राग मिलन से, छन्द-छन्द, लय ताल से पूछलीं, पूछलीं सुर के मन से, किरण-किरण से जाके पूछलीं, पूछलीं नील गगन से, धरती और पाताल से पूछलीं, पूछलीं मस्त पवन से, कौने अंतरे में समइलु, आहि रे बालम चिरई………… मन्दिर से मस्जिद तक...

बुधवार, 20 अगस्त 2014

आईने सा बिखरे पर पत्थर तरस नहीं खाते जिस्म ज़ख्मी है पर खंज़र तरस नहीं आते,

आईने सा बिखरे पर पत्थर तरस नहीं खातेजिस्म ज़ख्मी है पर खंज़र तरस नहीं आते, होते एक बराबर के तभी मिलता है मांगे सेसूखे हुए दरिया पर समंदर तरस नहीं खाते, लुटते लुटते बाकी रहा ना है कुछभी लेकिनभारत पे नेता रूपी सिकंदर तरस नहीं खाते, ख्वाबों में आके डरा देते हैं आज भी मुझकोदिल दुखाने वाले यह मंजर तरस नहीं खाते, कैसे बनता है आशियाँ बेघर हैं क्या जाने येघोंसला मिटाने में यह बंदर तरस नहीं खाते, चढ़वाकर खून ही बच पायी है ज़िंदगी उसकीमगर लहू पीने में ये मच्छर तरस नहीं खाते, पैसे सेही मिलती हमने ज़िंदगी देखी है खुदामुफ़लिस बीमारों पर डॉक्टर तरस नहीं खाते, रोज़...

शनिवार, 16 अगस्त 2014

फूल खिला दे शाखों पर, पेड़ों को फल दे मालिक,

फूल खिला दे शाखों पर, पेड़ों को फल दे मालिक,धरती जितनी प्यासी है, उतना तो जल दे मालिक, वक़्त बड़ा दुखदायक है, पापी है संसार बहुत, निर्धन को धनवान बना, दुर्बल को बल दे मालिक, कोहरा कोहरा सर्दी है, काँप रहा है पूरा गाँव, दिन को तपता सूरज दे, रात को कम्बल दे मालिक, बैलों को इक गठरी घास, इंसानों को दो रोटी, खेतों को भर गेहूँ से, काँधों को हल दे मालिक, हाथ सभी के काले हैं, नजरें सबकी पीली हैं, सीना ढाँप दुपट्टे से, सर को आँचल दे मालिक......

गुरुवार, 24 जुलाई 2014

दिल की बात लबों पर लाकर, अब तक हम दुख सहते हैं|

दिल की बात लबों पर लाकर, अब तक हम दुख सहते हैं| हम ने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं| बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदली, लेकिन इन प्यासी आँखों में अब तक आँसू बहते हैं| एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं, दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं| जिस की ख़ातिर शहर भी छोड़ा जिस के लिये बदनाम हुए, आज वही हम से बेगाने-बेगाने से रहते हैं| ...

बुधवार, 23 जुलाई 2014

सोचा नहीं अछा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं मांगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं

सोचा नहीं अछा बुरा देखा सुना कुछ भी नहींमांगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहींदेखा तुझे सोचा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझेमेरी ख़ता मेरी वफ़ा तेरी ख़ता कुछ भी नहींजिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाये रात भरभेजा वही काग़ज़ उसे हमने लिखा कुछ भी नहींइक शाम की दहलीज़ पर बैठे रहे वो देर तकआँखों से की बातें बहुत मूँह से कहा कुछ भी नहींदो चार दिन की बात है दिल ख़ाक में सो जायेगाजब आग पर काग़ज़ रखा बाकी बचा कुछ भी नहींअहसास की ख़ुश्बू कहाँ, आवाज़ के जुगनू कहाँख़ामोश यादों के सिवा, घर में रहा कुछ भी नह...

शनिवार, 19 जुलाई 2014

खुशियां कम और अरमान बहुत हैं

खुशियां कम और अरमान बहुत हैं, जिसे भी देखिए यहां हैरान बहुत हैं,,करीब से देखा तो है रेत का घर,दूर से मगर उनकी शान बहुत हैं,,कहते हैं सच का कोई सानी नहीं,आज तो झूठ की आन-बान बहुत हैं,,मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी,यूं तो कहने को इन्सान बहुत हैं,,तुम शौक से चलो राहें-वफा लेकिन,जरा संभल के चलना तूफान बहुत हैं,,वक्त पे न पहचाने कोई ये अलग बात,वैसे तो शहर में अपनी पहचान बहुत हैं...

ख़ाक से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती छोटी मोटी बात पे हिज़रत नहीं होती

ख़ाक से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती छोटी मोटी बात पे हिज़रत नहीं होती पहले दीप जलें तो चर्चे होते थे और अब शहर जलें तो हैरत नहीं होती तारीखों की पेशानी पर मोहर लगा ज़िंदा रहना कोई करामात नहीं होती सोच रहा हूँ आखिर कब तक जीना है मर जाता तो इतनी फुर्सत नहीं होती रोटी की गोलाई नापा करता है इसीलिए तो घर में बरकत नहीं होती हमने ही कुछ लिखना पढना छोड़ दिया वरना ग़ज़ल की इतनी किल्लत नहीं होती मिसवाकों से चाँद का चेहरा छूता है बेटा ......इतनी सस्ती जन्नत नहीं होती बाजारों में ढूंढ रहा हूँ वो चीज़े जिन चीजों की कोई...

गुरुवार, 10 जुलाई 2014

किसी को सीने से ना लगा, चलन है गला दबाने का

किसी को सीने से ना लगा, चलन है गला दबाने का कोई माने या ना माने, यही सच है, ज़माने का ! ज़माने में वही करता है, सबसे ज्यादा खर्च भीनही अनुभव जिसे है, एक भी पैसा कमाने का ! सुबह से शाम तक जिसने, घोटे हैं गले उसे ही मिलता है हक़ भी, ख़ुशी से गुनगुनाने का ! गंवारों को मिला है हक़, सबकी तकदीर लिखने का मदारी मान कर खुद को, रोज बन्दर नचाने का ! नहीं जिम्मा की सबकी रूहों को, तू पाक साफ़ करेसड़न से दूर रख खुद को, ज़मीर अपना बचाने का !...

मंगलवार, 1 जुलाई 2014

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे

महँगी से महँगी घड़ी पहन कर देख ली, वक़्त फिरभी मेरे हिसाब से कभी ना चला ...!!"-------------------------युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे ..पता नही था की, 'किमत चेहरों की होती है!!'-------------------------अगर खुदा नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यों ?? औरअगर खुदा हे तो फिर फिक्र क्यों ???------------------------"दो बातें इंसान को अपनों से दूर कर देती हैं, एकउसका 'अहम' और दूसरा उसका 'वहम'......------------------------" पैसे से सुख कभी खरीदा नहीं जाता और दुःखका कोई खरीदार नहीं होता।"------------------------मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं, पर सुना हैसादगी...

मंगलवार, 6 मई 2014

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा । इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा । इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा । हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ़ भी चल पड़ेगे, रास्ता हो जाएगा । कितना सच्चाई से, मुझसे ज़िंदगी ने कह दिया, तू नहीं मेरा तो कोई, दूसरा हो जाएगा । मैं खूदा का नाम लेकर, पी रहा हूँ दोस्तो, ज़हर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा । सब उसी के हैं, हवा, ख़ुश्बु, ज़मीनो-आस्माँ, मैं जहाँ भी जाऊँगा, उसको पता हो जाएगा...

मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन

मुँह की बात सुने हर कोईदिल के दर्द को जाने कौनआवाज़ों के बाज़ारों मेंख़ामोशी पहचाने कौन ।सदियों-सदियों वही तमाशारस्ता-रस्ता लम्बी खोजलेकिन जब हम मिल जाते हैंखो जाता है जाने कौन ।जाने क्या-क्या बोल रहा थासरहद, प्यार, किताबें, ख़ूनकल मेरी नींदों में छुपकरजाग रहा था जाने कौन ।मैं उसकी परछाई हूँ यावो मेरा आईना हैमेरे ही घर में रहता हैमेरे जैसा जाने कौन ।किरन-किरन अलसाता सूरजपलक-पलक खुलती नींदेंधीमे-धीमे बिखर रहा हैज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन...

शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी यानी मांसपेशियों की दुर्बलता

कक्षा 7 में पढ़ने वाली मेधा ने एक दिन रिक्शा से उतरते समय महसूस किया कि उसे पैर नीचे रखने में दिक्कत हो रही है। उसने सोचा ऐसे ही पैर सो गया होगा। पर अगले दिन सीढ़िया चढ़ते समय उसे सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत हो रही है। सीढ़िया चढ़ते समय उसे पैर को हाथ से सहारा देना पड़ रहा है। स्कूल से लौट कर उसने यह बात अपने पापा को बताई। पापा उसे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने लक्षण समझने के बाद मस्कुलर डिस्ट्रॉफी होने की आशंका व्यक्त की। कुछ टेस्ट कराए। डेस्ट में आशंका सही साबित हुई। क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक आनुवांशिक बीमारी है। पर अनुवांशिक...

सोमवार, 13 जनवरी 2014

कठिन है रहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलो

कठिन है रहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलोबहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलोतमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता हैयह जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ चलोनशें में चूर हूँ मैं भी तुम्हें भी होश नहींबड़ा मज़ा हो अगर थोड़ी दूर साथ चलोयह एक शब् की मुलाक़ात भी गनीमत हैकिसे है कल की ख़बर थोड़ी दूर साथ चलोअभी तो जाग रहे हैं चिराग़ राहों केअभी है दूर सहर थोड़ी दूर साथ चलो ........अहमद फ़र...

रविवार, 12 जनवरी 2014

तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए और वो तुमसे खफ्फा होतो मज़ा आ जाए

तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए और वो तुमसे खफ्फा होतो मज़ा आ जाए और वो तुमसे खफ्फा होतो मज़ा आ जाए तू कोई नाम हथेली पे लिखे मेहंदी से और वो नाम मेरा होतो मज़ा आ जाए तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए मेरे शिकवे तुझे अच्छे नही लगते लेकिन तुझ को भी मुझसे गिल्ला होतो मज़ा आ जाए तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए तुझको एहसास होता मेरी बेचैनी का कोई तुझसे भी जुड़ा होतो मज़ा आ जाए तुम किसी गैर को चाहो तो मज़ा आ जाए और वो तुमसे खफ्फा होतो मज़ा आ जाए ...

गुरुवार, 9 जनवरी 2014

दिल की दास्ताँ तुझे कैसे सुनाउ?

दिल की दास्ताँ दिल की दास्ताँ तुझे कैसे सुनाउ? व्यथा जो मन में है उसे कैसे दिखाऊ पास आओ थोडा सा तो कान में कुछ कह पाऊँ रोना चाहती हूँ सामने, पर रो ना पाऊँ। दिल कीदिल के जज्बात चूर चूर होकर रह गएजैसे ही आपने कुछ कहा वो सुन्न हो गएसुनने के वो आदि न थे पर सुन के रेह गएआपकी आदत से आहत होकर दर किनारा कर लिये। दिल कीरहेगी सदा बेबसी पर भुला न पाउंगीसर्द मौसम है ज्यादा फिर भी बर्दास्त कर लुंगीहर मौसम में अपने आपको ऐसे ही ढाल पाऊँगीपतझड़ आ जाएँ राह में, स्वागत भी कर पाउंगी। दिल कीगिला है ना शिकवा मन में, फिर भी दुःख क्यों है?मिटने को...

मंगलवार, 7 जनवरी 2014

कभी खुद पर, कभी हालत पर रोना आया । मुझे तेरी हर बात पे रोना आया ।

कभी खुद पर, कभी हालत पर रोना आया ।मुझे तेरी हर बात पे रोना आया ।गद्दार कहना भी तुझे खुद से गद्दारी है ।मुझे तेरे हालात पे रोना आया "धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती ,रात ढलती नहीं थम जाती है ,सर्द मौसम की एक दिक्कत है ,याद तक जम के बैठ जाती है.....!" खोये रहो तुम खयालों में ऐसे हीये गुलशन वीरान हो जायेगायूँ ही बैठे रहो तुम इंतज़ार में हीपूरा शहर ही शमशान हो जायेगाकब तलक तुम रहोगे उनके भरोसेजो करते भ्रमित, खुद भी रहते भ्रमिततोड़ों भ्रमों को और आगे बढ़ो तुमये गुलशन गुलज़ार हो जाये...

हमारा नाम लिखकर कागजों पर फिर उडा देना। भला सीखा कहाँ तुमने सितम को यूँ हवा देना॥

हमारा नाम लिखकर कागजों पर फिर उडा देना।भला सीखा कहाँ तुमने सितम को यूँ हवा देना॥हमे मालूम है तुम भी किसी से प्यार करते हो।तुम्हे भी इल्म है मेरा किसी पर मुस्कुरा देना॥मुहब्बत ग़म मे हो या खुशी मे दोनो बेहतर है।कहीं कोई मिले तुमको उसे यह मशविरा देना॥तुम अपने हक पे जायज हो हम अपने हक पे जायज हैं।कहाँ फिर बात आती है किसी का घर गिरा देना॥यॆ दुनियाँ है बडी काफिर तू इसकी बात पर मत आ।के इसका काम है ऊपर चढा कर फिर गिरा देना॥रीतेश रजवाणा"विभ...

आप को देख कर देखता रह गया, क्या कहूँ और कहने को क्या रह गया,

आप को देख कर देखता रह गया,क्या कहूँ और कहने को क्या रह गया,आते आते मेरा नाम सा रह गया,उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया,वो मेरे सामने ही गया और मैं,रास्ते की तरह देखता रह गया,झूठ वाले कहीं से कहीं बढ गये,और मैं था के सच बोलता रह गया,आंधियों के इरादे तो अच्छे ना थे,ये दिया कैसे जलता रह गया,लेखक ___वसीम बरेलवीगायक ___जगजीत सि...