
सूर्य वंदना :उदित हो मार्तंड अंधेरा हो खंड-खंडजागरण का धुन बजे काली रात की भीत परप्रकाश का मंच सजे टूटे निद्रा का घमंडउदित हो मार्तंडकलियों पर फूलों परहरित पर्ण शूलों पर उड़ चले बगूलों परउगो-उगो भास्करनाव के मस्तूलों परनदियों के उसूलों परदातून नीम बबूलों परजागो हे दिनमानभोर का फैले वितान तितलियों की आहट सेमधुबन में फिर हो हलचलमधुपों की गुनगुनाहट से पौधों से मिले किसानजागो हे दिनमानडाॅ एम डी स...