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नवंबर 2015 ~ Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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सोमवार, 2 नवंबर 2015

Bulandi Der Tak Kis Shakhsh ke Hisse

बुलंदी देर तक किस शख्श के हिस्से में रहती है बुलंदी देर तक किस शख्श के हिस्से में रहती है बहुत ऊँची इमारत हर घडी खतरे में रहती है ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता, मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी माँ सज़दे में रहती है जी तो बहुत चाहता है इस कैद-ए-जान से निकल जाएँ हम तुम्हारी याद भी लेकिन इसी मलबे में रहती है अमीरी रेशम-ओ-कमख्वाब में नंगी नज़र आई गरीबी शान से एक टाट के परदे में रहती है मैं इंसान हूँ बहक जाना मेरी फितरत में शामिल है हवा भी उसको छू के देर तक नशे में रहती है मोहब्बत में परखने जांचने से फायदा क्या है कमी...

Maa Shayari By Munawwar Rana

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना Maine rote hue ponchhe the kisi din aansoo Muddaton Maa ne nahi dhoya dupatta apna ***** लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती Labon pe uske kabhi baddua nahi hoti Bas ek Maa hai jo kabhi khafa nahi hoti ***** अब भी चलती है जब आँधी कभी ग़म की ‘राना’ माँ की ममता मुझे बाहों में छुपा लेती है Ab bhi chalti...