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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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मंगलवार, 20 सितंबर 2022

एक अरबपति की दिव्यागों के प्रति सेवाभाव से प्राप्त खुशी की कहानी - लव तिवारी ग़ाज़ीपुर

जब एक टेलीफोन साक्षात्कार में नाइजीरियाई अरबपति फेमी ओटेडोला से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा:
"सर आपको क्या याद है कि आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली ?

फेमी ने कहा:"मैं जीवन में खुशी के चार चरणों से गुजरा हूं, और आखिरकार मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।"
1- पहला चरण धन और साधन संचय करना था।
लेकिन इस स्तर पर मुझे वह सुख नहीं मिला जो मैं चाहता था।

2-फिर क़ीमती सामान और वस्तुओं को इकट्ठा करने का दूसरा चरण आया। लेकिन मैंने महसूस किया कि इस चीज का असर भी अस्थायी होता है और कीमती चीजों की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती।

3-फिर आया बड़ा प्रोजेक्ट मिलने का तीसरा चरण।  वह तब था जब नाइजीरिया और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% मेरे पास था। मैं अफ्रीका और एशिया में सबसे बड़ा पोत मालिक भी था।  लेकिन यहां भी मुझे वो खुशी नहीं मिली जिसकी मैंने कल्पना की थी.

चौथा चरण वह समय था जब मेरे एक मित्र ने मुझे कुछ विकलांग बच्चों के लिए व्हीलचेयर खरीदने के लिए कहा। लगभग 200 बच्चे।दोस्त के कहने पर मैंने तुरंत व्हीलचेयर खरीद ली।

लेकिन दोस्त ने जिद की कि मैं उसके साथ जाऊं और बच्चों को व्हीलचेयर सौंप दूं।  मैं तैयार होकर उसके साथ चल दिया।वहाँ मैंने इन बच्चों को अपने हाथों से ये व्हील चेयर दी।  मैंने इन बच्चों के चेहरों पर खुशी की अजीब सी चमक देखी।  मैंने उन सभी को व्हीलचेयर पर बैठे, घूमते और मस्ती करते देखा।

यह ऐसा था जैसे वे किसी पिकनिक स्पॉट पर पहुंच गए हों, जहां वे जैकपॉट जीतकर शेयर कर रहे हों।
मुझे अपने अंदर असली खुशी महसूस हुई।  जब मैंने छोड़ने का फैसला किया तो बच्चों में से एक ने मेरी टांग पकड़ ली।मैंने धीरे से अपने पैरों को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन बच्चे ने मेरे चेहरे को देखा और मेरे पैरों को कस कर पकड़ लिया।

मैं झुक गया और बच्चे से पूछा: क्या तुम्हें कुछ और चाहिए? इस बच्चे ने मुझे जो जवाब दिया, उसने न केवल मुझे झकझोर दिया बल्कि जीवन के प्रति मेरे दृष्टिकोण को भी पूरी तरह से बदल दिया।इस बच्चे ने कहा: मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।

उपरोक्त शानदार कहानी का मर्म यह है कि हम सभी को अपने अंतर्मन में झांकना चाहिए और यह मनन अवश्य की आपको किस लिए याद किया जाएगा

लेखक Lav Tiwari खुद एक मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित है।।
🙏🙏🙏🙏🙏


सोमवार, 19 सितंबर 2022

विधायकों सासदों और मंत्रियों को बार बार पेंशन लेकिन जन्म से विकलांगता फिर 18 वर्ष के बाद ही विकलांगता पेंशन क्यो - लव तिवारी

जैसा कि आप सभी जानते हैं मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित खासकर डीएमडी वाले बच्चों का शरीर कम उम्र में काम करना बंद कर देता है परंतु सरकार की तरफ से 18 वर्ष से कम आयु तक उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती है।

इसी का विपरीत अगर राजनेताओं की बात करते हैं तो अगर एक व्यक्ति अपने जीवन में पांच बार विधायक दो बार सांसद तीन बार मिस्टर बनता है तो उसको 5 बार की अलग-अलग पेंशन के रूप में एक बड़ा वेतन भत्ता उसको दिया जाता है सरकार अपने मेनिफेस्टो में इस बात की घोषणा की हुई थी कि हम सरकार बनाते है तो हर विकलांग को 15 सो रुपए का पेंशन लेकिन सरकार बनने के बाद या पेंशन भी एक हजार के मामूली रकम पर आकर अटक गया। हम वर्तमान सरकार की तारीफ हम प्रशंसा करते हैं कि पिछले 20 सालों से जो 200 से ₹500 का पेंशन विकलांगों को दिया जाता था उसको सरकार पंद्रह  सौ रुपये की। लेकिन देने के नाम पर केवल 1एक हजार रुपये ही दे रही है हम सरकार से विनम्र निवेदन करते हैं कि सरकार अपने मेनिफेस्टो के अनुसार जल्द से जल्द प्रदेश में उपस्थित सभी विकलांगों को उनका पंद्रह सौ रुपये मासिक विकलांग पेंशन देने की कृपा करें।

साथ में सरकार से यह विनम्र अनुरोध करता हूं कि तेलगांना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के आधार पर हम दुर्लब बीमारियों से पीड़ित विकलांग जनों को 5 हजार से दस हजार रुपये की मासिक पेंशन देने की कृपा करें। जिससे हम लोग का गुजारा आसानी से हो सकें।

साथ मे इस उत्तर प्रदेश सरकार  के इस विशेष योजना की भूरि भूरि प्रसंसा करता हूँ कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जो उत्तर प्रदेश सरकार की पेंशन के दायरे में नहीं आते हैं उनके लिए सरकार सर्वे कर रही है, जिससे उनके लिए कोई योजना या आर्थिक मदद दी जा सकें, अतः जो बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर हैं कृपया UDID Card (Disability Certificate) 80% या उससे ज्यादा ही बनवाए तथा अपने जिले के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में अपना नाम जरूर दे।

धन्यवाद-लेखक खुद मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित है- जन्म से विकलांगता फिर 18 वर्ष के बाद ही विकलांगता पेंशन क्यो - लव तिवारी

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी विकलांग प्रमाण पत्र बनाते समय किन बातों का रखें ध्यान- लव तिवारी ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश

इन दो आधार कार्ड के माध्यम से हम आप को समझाने की कोशिश करेंगे 

1-हर्षवर्धन जो मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित है और इनकी विकलांगता प्रमाण पत्र मस्कुलर डिस्ट्रॉफी में ही बनाई गई है, जो पूर्ण रूप से सही है। 

2-दूसरा शंकर विजय महाले जो डी एम डी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित है फिर भी डिसेबिलिटी टाइप फिजिकल इंपेयरमेंट इसका मतलब होता है शारीरिक हानि जो पूर्ण रूप से गलत है

जब हम दुर्लभ बीमारी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी टाइप में आते हैं तो हम उस टाइप में अपना रजिस्ट्रेशन ना करके फिजिकल इंप्लीमेंट और लोको मोटर डिसेबिलिटी में क्यों कर रहे है। इसी की वजह से सरकार के पास एक्चुअल डेटा मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ितो का नहीं पहुंच पा रहा है इसमें आप बताइए कि आप की ग़लती है या सरकार की हमने कई वीडियो बना कई बार व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से आप सभी को समझाना चाहा लेकिन आप सभी को बात समझ में नहीं आ रही है। यही नहीं लगभग 100 से ऊपर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ितों का मैंने रजिस्ट्रेशन करके उनका टाइप मस्कुलर डिस्ट्रॉफी ही रख कर मैंने रजिस्ट्रेशन करके उनके व्हाट्सएप पर  रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट भेजें है। जो समझदार और पढ़े लिखे हैं वह इस तरह की गलती ना करें।
धन्यवाद लेखक खुद मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित है Lav Tiwari 
#मस्कुलरडिस्ट्रॉफी #गंभीरसमस्या #सरकार #अभिवावक
#जागरूकता #अभियान #भारतसरकार

यह सही सर्टिफिकेट हैं- 👍👍👍


यह गलत बना सर्टिफिकेट है- 😢😢😢😢

शनिवार, 17 सितंबर 2022

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी विकलांग सर्टिफिकेट पूरी हकीकत को पढ़िए आपको क्या करना है समझ में आ जाएगा- लव तिवारी

अभी कुछ लोगों ने हमसे पूछा कि हमारा लड़का या मां पूर्ण रूप से विकलांग है तो हम विकलांग सर्टिफिकेट का आवेदन कैसे करें आप भारत स्वतंत्र भारत के देश में रहते हैं और उस भारत के संविधान में बहुत सी धाराएं हैं जो आप के स्वास्थ संबंधी और आपके जीवन के बेहतर बनाने के लिए लिखी गई है लेकिन भ्रष्ट नेताओं और राजनीतिक दलों की इस आधुनिक युग में आपको यह सब सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं आप को मैं यह सुझाव देता हूं अगर यह कारीगर रहा तो आप विकलांग सर्टिफिकेट का आवेदन आप आसानी से कर सकते हैं वह सुझाव यह है सबसे पहले तो आप अपने जिले के सरकारी अस्पताल में जाइए और जाकर जहाँ सर्टिफिकेट बनाता है उसे अपने पीड़ित बच्चे बृद्ध मां पिता का वीडियो दिखाइए उससे बताइये पूर्ण रूप से असमर्थ है सर वह आ नहीं सकते इसके बाद अगर वह नहीं मानते हैं तो आपको हार मानकर अपने बच्चे या वृद्ध माता जी जो असमर्थ है आपको ले जाना ही पड़ेगा एक छोटा सा उदाहरण में प्रस्तुत करता हूं गाजीपुर में एक गांव है गहमर जो एशिया का सबसे बड़ा गांव है वहां पर ओम प्रकाश शर्मा जी रहते हैं हैं वह सेना में कार्यरत हैं सेना के जवान हैं जो हम देशवाशियों की सीमा पर उपस्थित आतंकी गतिविधियों से सुरक्षा करते हैं उनका एक दिन फोन आया मेरे पास मेरा लड़का बड़ी भयानक बीमारी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित है मैंने उनकी लड़के का सारा डिटेल मंगा कर आवेदन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया।
आवेदन के बाद उनको गाजीपुर के डॉक्टर का नंबर दिया वह दो बार तीन बार बात की है कॅरोना काल की वजह से डॉक्टर भी बैठ नहीं पा रहे थे डॉक्टर उनको सही इंफॉर्मेशन दिया कि आज आप आइए आज मैं बैठ रहा हूं अपने बच्चे को फोर व्हीलर से लेकर आया साथ में तीन चार लड़कों को लेकर आए उनकी मदद कर सकती हैं हंड्रेड परसेंट सर्टिफिकेट परमानेंट उनका बन गया।
एक बार केवल एक बार आपको आना होता है आप ऐसे देश में नहीं रहते हैं कि आप चाहेंगे कि व्हाट्सएप के माध्यम और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डॉक्टर आपकी बातें सुन लेगा आप गलत है तो एक प्रतिशत डॉक्टर होंगे जो इस तरह की कार्यो को अपनाकर आप का सर्टिफिकेट बनाएंगे। मेरी बात सुने शर्मा जी उनका सर्टिफिकेट बन गया उनके लड़के ऑल इंडिया पीड़ित लोगों में नाम दर्ज हो गया भविष्य में अगर कोई उपचार आता है कोई दवा आता है तो उस लड़के को आसानी से मिल जाएगा एक और घटना एक बार बच्चें का व्हीलचेयर टूट गया मैंने ग़ाज़ीपुर के समाज कल्याण विभाग में सविता सिंह जी के माध्यम से बात किया उसको उसके सर्टिफिकेट की वजह से तुरंत व्हील चेयर मिलगया। उसके लिए कुछ परेशानी करके आपको काम करना ही पड़ेगा, अगर नहीं करेंगे सरकार के भरोसे रहेंगे आगे की न्यायिक लड़ाई भी नही लड़ सकते हैं, न संवैधानिक लड़ाई लड़ सकते हैं आपके अपने बच्चे का कोई काम भी नही करा सकते हैं तो आप लोग से हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है कि आप लोग सर्टिफिकेट बनवा के अपने बच्चे के बेहतर जीवन जीने में अपना योगदान प्रस्तुत करें। आवदेन के समय आप के पीड़ित का टाइप मस्कुलर डिस्ट्रॉफी होगा न लोकोमोटर डिसेबिलिटी। जब आप जन सेवा केंद्र पर जाएं और रजिस्ट्रेशन कराएं तो पूर्ण रूप से इस बात का ध्यान रखिएगा कि आपका मस्कुलर डिस्ट्रॉफी टाइप में ही हो।।
एक बात और यह लड़का मुझे बहुत प्रभावित किया था एक बार मैं इस से मिलने गया था लड़का बड़ा खुश रहता है टीवी देखता है इंजॉय करता है जिंदगी का जिंदगी को अच्छे लजिएगा तो जिंदगी आपकी बहुत बेहतर होगी। प्यारे नन्हे दोस्त को बेहतर भविष्य की कामना भगवान इसको जल्द स्वस्थ करें हमारी कुल देवी कामाख्या मां का आशीर्वाद भी इस पर बना रहे।।

आप सभी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ितों से अनुरोध है कि ऐसे ही वीडियो बनाकर 9458668566 नंबर पर टेलीग्राम व व्हाट्सएप पर भेजे । जिससे आप की समस्या को इसी तरह पोस्ट करके हम सरकार से अपनी कुछ मांग को सुनिश्चित कर सके।।


बुधवार, 14 सितंबर 2022

खूबसूरत ग़ज़लों के गायन की युगल जोड़ी जगजीत सिंह और चित्रा सिंह - लव तिवारी

आज मुझे चित्रा सिंह जी पर अपने विचार व्यक्त करने की आवश्यकता है और मुझे आशा है कि आप सभी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए कुछ समय निकालेंगे। मैं इतना छोटा हूँ कि मैं उस महान कलाकार के बारे में कुछ भी लिख या टिप्पणी नहीं कर सकता जो चित्रा जी हैं।  ग़ज़ल शैली में उनका योगदान अकल्पनीय है और इसे भुलाया नहीं जा सकता।  जगजीत जी की रचनाओं की उनकी प्रस्तुतियों में पूर्णता मंत्रमुग्ध कर देने वाली है।  वह अकेली हैं जो जगजीत जी की बारीकियों को समझने की गहराई तक गई और उनकी सबसे कठिन रचनाओं को गाया है।  बाबू (उनके इकलौते बेटे) की असामयिक मृत्यु ने न केवल परिवार की खुशी बल्कि ग़ज़ल की दुनिया से चित्रा जी को भी छीन लिया और हमने अपने समय की सबसे महान महिला ग़ज़ल गायिका को खो दिया।  उन्होंने गायन छोड़ दिया, लेकिन एक विरासत और काम की मात्रा का निर्माण किया है जो दुनिया में ग़ज़ल श्रोताओं तक रहेगा।  "सफ़र में धूप तो होगी", "लब-ए-कहमोश से", "दुनिया जिसे कहते हैं" और जगजीत जी के साथ चित्रा जी द्वारा गाए गए असंख्य युगल गीत कौन भूल सकता है।  इस जोड़ी ने ग़ज़ल की दुनिया को बहुत कुछ दिया है जबकि उन्होंने अपने निजी जीवन में सचमुच सब कुछ खो दिया है।  मैं चाहता हूं कि आप सभी नीचे टिप्पणी करें और चित्रा जी और ग़ज़ल शैली में उनके योगदान के लिए अपने प्यार का इजहार करें। और अपने पसन्दीदा गजलों के बारे में नीचे टिप्पणी करें। मुझे उनके द्वारा गाये हर ग़ज़ल पसंद है लेकिन सुदर्शन फ़क़ीर साहब द्वारा रचित The Latest ग़ज़ल एल्बम वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी, उस मोड़ से शुरू करें फिर हम ये जिंदगी मुझे बहुत ज्यादा पसंद है मुझे नहीं पता है कि ऐसे लोगों को मैंने कितनी बार सुना है
#ग़ज़ल #जगजीतसिंह #चित्रासिंह #ग़ाज़ीपुर




रविवार, 11 सितंबर 2022

डोले रसवंती बयरिया हो रामा-सगरी नगरिया- बसंती चइता

डोले रसवंती बयरिया हो रामा-सगरी नगरिया

चइता चतुर चित चुपके चोरवे
चंदा चहकि चाँदनी चटकावे
छल कलि रस के गगरिया हो रामा-सगरी नगरिया
डोले रसवंती बयरिया हो रामा-सगरी नगरिया

पिपरा के डारी लहरे कंचन पाती
निमिया झरेले जइसे लवंगहि लाची
खुली गइली गन्ध के गठरियाँ हो रामा- सगरी नगरिया
डोले रसवंती बयरिया हो रामा- सगरी नगरिया

ढंरकलि धरती के चढ़ली जवनियाँ
देखते देखते जैसे हो गईली जोगिनिया
ओढ़ी राम नामी चदरिया हो रामा-सगरी नगरिया
डोले रसवंती बयरिया हो रामा- सगरी नगरिया








प्यार दे कर जो हमसे विदा हुए संसार से,आओ उनका स्वागत करें आज हम संसार में


प्यार दे कर जो हमसे विदा हुए संसार से,
आओ उनका स्वागत करें आज हम संसार में

वो हुए पुरखो में शामिल जो कभी थे साथ में,
आज से नमन करेंगे हम मन हृदय के द्वार से।

पितर चरण में नमन करें,ध्यान धरें दिन रात।
कृपा दृष्टि हम पर करें, सिर पर धर दें हाथ।

ये कुटुम्ब है आपका, आपका ही परिवार है।
आपके आशिर्वाद से,फले - फूले संसार में।

भूल -चूक सब क्षमा करें,करें महर भरपूर।
सुख सम्पति से घर भरें, कष्ट करें सब दूर।

आप हमारे हृदय में,आपकी की हम संतान है।
आपके नाम से हैं जुड़ी, मेरी हर पहचान है।

सभी पितरो को सादर
नमन



शनिवार, 3 सितंबर 2022

दुनिया कहे बुरी हैं ये बोतल शराब की अपनी तो जिंदगी हैं ये बोतल शराब की- भूपेंदर सिंह ग़ज़ल

शेख कहता है मैं नहीं पीता हा वो अंगुर खूब खाता है
आ फ़र्क इतना है अश्क दोनो में हम तो पीते हैं वो चबाता है

 दुनिया कहे बुरी हैं, ये बोतल शराब की
 अपनी तो जिंदगी हैं, ये बोतल शराब की
 दुनिया कहे बुरी हैं, ये बोतल शराब की

 हमदम अमीर की हैं, न दुश्मन गरीब की-३
 सबसे, सबसे निभा रही है, ये बोतल शराब की-२
 दुनिया कहे बुरी हैं, ये बोतल शराब की

 ये बेवफा नहीं ना ही दिल तोड़ती हैं ये-२
 महबूब से भली है ये बोतल शराब की
 दुनिया कहे बुरी हैं, ये बोतल शराब की

 मानता हूं जनाब पीता हूं, ठीक है बेहिसाब पीता हूं
 लोग लोगो का ख़ून पीते हैं मैं तो फिर भी शराब पिता हूँ।।

 आई जो मौत भी तो मैं कह दूंगा मौत से-३
 ज़ालिम भारी पड़ी हैं, ये बोतल शराब की-२
 अपनी तो जिंदगी है ये बोतल शराब की
 दुनिया कहे बुरी हैं, ये बोतल शराब की-४



 

शम्मा जलाये रखना हये जब तक की मैं न आऊ- भूपेंदर सिंह और मिताली सिंह ग़ज़ल

शम्मा जलाये रखना हये जब तक की मैं न आऊ
खुद को बचाये रखना हये जब तक की मैं न आऊ

ज़िंदा दिलो से दुनिया, ज़िंदा सदा रही हैं
महफ़िल सजाये रखना, जब तक की मैं न आऊ

शम्मा जलाये रखना......................

खुद को बचाये................

ये वक़्त इन्तिहाँ है सब्र ओ करार दिल का
आंसू छुपाये रखना हये जब तक की मैं न आऊ

शम्मा जलाये रखना......................

खुद को बचाये................

हम तुम मिलेंगे ऐसे जैसे जुड़ा नहीं थे
सांसे बचाये रखना हये जब तक की मैं न आऊ

शम्मा जलाये रखना......................

खुद को बचाये................


 भूपेंदर सिंह और मिताली सिंह ग़ज़ल





शुक्रवार, 2 सितंबर 2022

बासी रोटी के लड्डू लन्दन की रोचक घटना - डॉ भीम राव अम्बेडकर

बासी रोटी के लड्डू लन्दन की रोचक घटना - डॉ भीम राव अम्बेडकर

जब परम पूज्य बाबा साहेब दूसरी बार लंदन गये थे तो उस समय बाबा साहेब की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय थी, जो कुछ धन था ,
उसमें से कुछ माता रमाबाई को देकर लंदन प्रस्थान किया,
माता रमा ने बाबा साहब को विदा करते समय एक पोटली दी जिसमें रात की बची रोटियों को सुखा कूट कर थोड़ी शक्कर मिला लड्डू वना दिये थे ।

बाबा साहब लंदन आकर अपनी थीसिस पूरी करने में लग गये ,
अध्ययन हेतु पूरे पूरे दिन लाइब्रेरी में पढ़ते ,
लंच के समय जब सब लोग कैंटीन जाते तब भी बाबा साहेब पढ़ते रहते जब देखते की लाईब्रेरी में कोई नहीं है 
तो चुपके कोट की जेब से दो तीन लड्डू निकाल कर भूख शान्त कर लेते थे।

एक अंग्रेज़ मित्र जो बाबा साहब से आत्मीयता रखता था बाबा साहब के व्यवहार से परेशान था 
कि ये साहब हर समय पढ़ते ही रहते हैं ,
लंच तक नहीं करते साथ ही नोटिस भी कर रहा था।
   
एक दिन लंच के समय जब सब बाहर निकल गए केबल बाबा साहब ही लाइब्रेरी में रह गये, 
और लड्डू खाने को ही थे कि अंग्रेज मित्र ने रंगे हाथ पकड़ लिया और बोला तो भीम यह स्वादिष्ट लड्डू खाते हो लंच में सबसे छुपाकर।

और वह बाबा साहब से लड्डू छीनने लगा 
और बोला आज तो यह लड्डू मैं खाऊंगा ,
जरुर भाभीजी ने वना कर दिए है ,
बाबा साहब अवाक थे ,
उससे लड्डू न खाने का आग्रह कर रहे थे 
और बापस मांग रहे थे ,

अंग्रेज मित्र उनकी व्यग्रता को न समझ उन्हें चिड़ा रहा था 
कहने लगा जरुर ये लड्डू चमत्कारी हैं 
इन्हें खाकर ही तुम सबसे अधिक काविल हो जब बाबा साहब जान गये कि उनका मित्र मानने बाला नहीं है तो बोले,

मित्र ये लड्डू तुम्हारे खाने योग्य नहीं है ,
यह लड्डू #मेरी_विपन्नता_की_निशानी_है 
यह लड्डू मेरी पत्नी रमा ने रात की बची खुची रोटियां सुखाकर वनाये हैं ,
जिन्हें खाकर मैं अपनी क्षुदा शान्त करता हूँ 
मेरे पास इतना धन नहीं कि मैं तुम्हारे साथ कैंटीन में नाश्ता कर सकूं।

मेरे देश में कई करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें बची खुची रोटी भी नहीं मिलतीं ,
पानी नहीं मिलता ,
पढ़ने का अधिकार नहीं है ,
मेरा परिवार भी इन्ही समस्याओं से त्रस्त है।

मुझे मौका मिला है ,
तो मैं पढ़कर उनके अधिकारों की जंग लड़ना चाहता हूँ 
मैं ज्ञान के अस्त्र से उन्हें बेडियो से मुक्त करना चाहता हूं इसीलिए दोबारा पढ़ने आया हूंँ।
 
बाबा साहब की करुण कथा सुनकर अंग्रेज मित्र की आंखों में आंसू आ गए ,
अश्रु पोंछते हुए बोला ,
मैं धन्य हुआ कि इतने महान व्यक्ति की मित्रता का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।
मैं यदि कभी भारत आया तो उस देवी के चरणों की रज अपने माथे पर जरुर लगाऊंगा ,
जो उपले बेच बेच कर आपको धन भेज रही है।

धन्य है आप भीमराव आंबेडकर और 
धन्य है भाभी जी रमा वाई और 
धन्य है भारत देश जिसकी मिट्टी में आपका जन्म हुआ।
#मीडिया एवं #सोशल_मीडिया चारों तरफ नकारात्मक न्यूज़ का भरमार है,
इन सभी नकारात्मक खबरों ने माइंड को डिस्टर्ब कर दिया है ,

इसीलिए उस नकारात्मक ऊर्जा को काउंटर करने के लिए ,
पॉजिटिव एनर्जी का होना अत्यंत आवश्यक है ,
उसी पॉजिटिव ऊर्जा के संचार के लिए एक छोटी सी प्रस्तुति।



सोमवार, 29 अगस्त 2022

किस तरह से नमन मैं करूँ आपका स्वागतम स्वागतम स्वागतम आपका।

 किस तरह से नमन मैं करूँ आपका,

स्वागतम, स्वागतम, स्वागतम, आपका।


आप आए बड़ी उमर है आपकी,

बस अभी नाम मै लिया आपका,

किस तरह से नमन मैं करूँ आपका,

स्वागतम, स्वागतम, स्वागतम, आपका।


आपकी एक नज़र कर गई क्या असर,

मेरा दिल था मेरा हो गया आपका,

किस तरह से नमन मैं करूँ आपका,

स्वागतम, स्वागतम, स्वागतम, आपका।


डर है मुझको ना बदनाम कर दे कहीं,

इसतरह प्यार से देखना आपका,

किस तरह से नमन मैं करूँ आपका,

स्वागतम, स्वागतम, स्वागतम, आपका।





गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या धन दौलत तू पा भी लिया गर, चैन नहीं पाया तो क्या

 तर्ज – कसमें वादे प्यार वफा सब..........


गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या २

धन दौलत तू पा भी लिया गर, चैन नहीं पाया तो क्या

गुरु को ना पहचान............. २


बाहर से आडंबर कुछ है ,भीतर रूप न निखारा है २

गुरु गुरु में सीस गुरु ने, गुरु बनने का झगड़ा है १

ऐसे गुरु २ भला बोलो क्या शिष्य को राह दिखाएगा

गुरु को ना पहचान सके...............2


कहलाने को, भक्त बहुत है, लेकिन खोटा धंधा है २

माया ऐसे घेर लिया है रहते आंख भी अंधा है १

ऐसे भक्तो २ को प्रभु का दर्शन, कहो कैसे हो पाएगा

गुरु को ना पहचान सके...............२


डाल पकड़कर झूल रहा है, दुख का कहा निवारण है २

जगत गुरु को भूल ही जाना, सभी दुखो का कारण है 

सोच समझ कर २ गुरु करो तुम ,नही तो धोखा खाएगा 

गुरु को ना पहचान सके...............२


जो करना, वो खुद ही करना, ना कहना नाइंसाफी है २

भजन में शब्द नही है काफी ,भाव का होना काफी है

गाया नही २ गुरु का महिमा राग रसीला गाया क्या

गुरु को ना पहचान सके...............२


गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या २

धन दौलत तू पा भी लिया गर २ चैन नहीं पाया तो क्या

गुरु को ना पहचान............. २

जग जाना तो जाना........ ३


गीतकार –श्री फणिभूषण चौधरी

गायक – धीरजकांत



मंगलवार, 23 अगस्त 2022

कि आने जिसके हुआ है अलौकिक उजाला रचना- रविंद जैन गायन- सुरेश वाडेकर

अति बिराट ब्रम्हांड में धरती एक लघु कुंज

इसे प्रकाशित कर रहा दिव्य ज्योति का पुंज

मां भू देवी को मिला अति दुर्लभ सम्मान

नर बन कर आये यहाँ नारायण भगवान।।


ये किसका अभिनन्दन करती झुक झुक कोमल पुष्प लताएँ

कौन हैं वो जिसके स्वागत में सुमन शुलभ के कोश लुटाये।।

किसके दर्शन की तृष्णा में उड़ते पंक्षी रुक रुक जाए

किसके श्री चरणों मे प्राणी में सुध बुध भूले शीश झुकायें।।


जिसके रूप अनेक है अंगित जिसके नाम

शुभ दर्शन कल्याण कर दुःख हारे सुख धाम

यही है वो मोहन जन जन का मन हरने वाला

कि आने  जिसके हुआ है अलौकिक उजाला


मुस्कान से सबका मन मोह लेता है

आनंद घन अति सय आनंद देता है

चराचर पे जया दु मोहन की माया निराला

कि आने जिसके हुआ है अलौकिक उजाला


गोकुल की धरती पे त्रिभुवन का वैभव है

इस बाल लीला का वर्णन असंभव है

की श्रष्टि का पालक बना है यशोदा का लाला

कि आने जिसके हुआ है अलौकिक उजाला


रचना- रविंद जैन गायन- सुरेश वाडेकर










हुस्न पहाड़ों का क्या कहना की बारों महिने यहाँ मौसम जाड़े का- रवींद्र जैन

हुस्न पहाड़ों का क्या कहना की बारों महिने 

यहाँ मौसम जाड़े का

क्या कहना की बारों महिने यहाँ मौसम जाड़े का

रुत ये सुहानी हैं मेरी जाँ रुत ये सुहानी हैं
के सर्दी से डर कैसा संग गर्म जवानी हैं
के सर्दी से डर कैसा संग गर्म जवानी हैं..

खिले खिले फूलों से भरी भरी वादी
रात ही रात में किसने सजादी
लगता हैं जैसे यहाँ अपनी हो शादी
लगता हैं जैसे यहाँ अपनी हो शादी
क्या गुल बूटे हैं 
पहाड़ों में यह कहते हैं
परदेसी तो झूठे हैं..

तुम परदेसी किधर से आये
आते ही मेरे मन में समाये
करूँ क्या हाथों से मन निकला जाये
करूँ क्या हाथों से मन निकला जाये

छोटे छोटे झरने हैं
के झरनों का पानी छूके कुछ वादे करने हैं
झरने तो बहते हैं कसम ले पहाड़ों की
जो कायम रहते हैं

हो हाथ हैं हाथो में 
के रस्ता कट ही गया प्यार की बातों में
दुनिया ये गाती हैं
सुनो जी दुनिया ये गाती हैं
के प्यार से रस्ता तो क्या 
जिन्दगी कट जाती हैं
के प्यार से रस्ता तो क्या 
जिन्दगी कट जाती हैं..




शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

जगवा में हमही सयानी ये सखी जगवा में हमही सयानी- श्री मदन राय निर्गुण सम्राट

लाली मेरे लाल की जित देखू ती लाल
लाली देखन मैं चली मैं भी हो गई लाल

जगवा में हमही सयानी ये सखी
जगवा में हमही सयानी

पांच बियाह हम नइहर कइनी दस कइनी ससुरारी-२
कुल बियाह मीली पन्द्रह भइले तबो में बानी कुँवारी
जगवा में हमही सयानी ये सखी
जगवा में हमही सयानी...........

ससुरा के मोर पाटी में बंधनी देवरा के गोड़तारी-२
पियवा के मो लहंगा में बंधनी भसुरा से कईनी यारी
जगवा में हमही सयानी ये सखी
जगवा में हमही सयानी...........

कहत कबीर सुनो भाई साधु यह पद है निरबानी-२
जो ये पद के अर्थ लगहै मानी उनही के ज्ञानी
जगवा में हमही सयानी ये सखी
जगवा में हमही सयानी...........





छोड़ के परईल ये सवरू कैसे भवनवा रही हो राम- निर्गुण सम्राट श्री मदन राय जी

छोड़ के परईल ये सवरू कैसे भवनवा रही हो राम-२

जईहा से गईल पैठवल न बतियां रही रही याद आवे तोहरी सुरतिया-२
बिरही बनावल ये सवरू कैसे भवनवा रही हो राम


केवना स्वतीया से नेहिया लगवल हमरा के घर मे टिटिहरी बनवल
कटरी कटवल ये सवरू कैसे भवनवा रही हो राम

किरण जी अलगे बेकार बाटे अधिका कुबरी के आगे न नीक लग ह राधिका-२
लुगरी पैनघवल सवरू कैसे भवनवा रही हो राम

छोड़ के परईल ये सवरू कैसे भवनवा रही हो राम-२





कहवाँ उड़ उड़ जाली चिरईया कहाँ उनकर गांव रे जब जब करेलें सोन पिजरवा लागे हिया में घांव रे-२

कहवाँ उड़ उड़ जाली चिरईया कहाँ उनकर गांव रे
जब जब करेलें सोन पिजरवा लागे हिया में घांव रे-२

पता न केवना देश से कब ई बगीया में आ गईली
वोही चदरिया कया के उन मनही मन मुस्कइली
जा से खेलली ओल्हा पाती आ जिनगी के दाव रे
जब जब करेलें सोन पिजरवा लागे हिया में घांव रे-२

देखी बदरिया ऊपर सूरज चांन बड़ा हरसैली
परदेशी परदेश में आ के आपन पता भुलइली
पवन बसन्ती के सुख पवली सहली धूप अ छांव रे
जब जब करेलें सोन पिजरवा लागे हिया में घांव रे-२

ना जाने एक दिन काहे के परमल नी खिसियली
मुहवा मोड़ के नेहिया तोड़ के खोतवा से उड़ गईल
केहू ना जाने उड़त चिरईया जईहे कौंन ठावँ रे
जब जब करेलें सोन पिजरवा लागे हिया में घांव रे-२

कहवाँ उड़ उड़ जाली चिरईया कहाँ उनकर गांव रे
जब जब करेलें सोन पिजरवा लागे हिया में घांव रे-२





सोमवार, 8 अगस्त 2022

मुझे रास आ गया है अब तेरे दर पे सर झुकाना तुझे मिल गई पुजारन और मुझे मिल गया ठिकाना

मुझे रास आ गया है अब तेरे दर पे सर झुकाना ३
तुझे मिल गई पुजारन २ और मुझे मिल गया ठिकाना
ओं प्रभु जी मुझे रास....................

मुझे कौन जानता था तेरी बंदगी से पहले २ २
तेरी याद ने बना दी ओ गिरधर तेरे भजन ने बना दी
मेरी जिंदगी बनाना
मुझे रास आ गया.............................

मुझे इसका गम नही है २ कि बदल गया ये ज़माना २
मेरी जिंदगी के मालिक कही तुम बदल ना जाना
मुझे रास आ..............

तेरी सावली सी सूरत, मेरे मन में बस गई है ओ गिरधर
मेरे सावरे कन्हैया २ मुझे और ना सतना २
मुझे रास आ......

मेरी आरजू यही है ,दम निकले तेरे दर पर
क्यों कि अभी सास चल रही ओ गिरधर
कही तुम चले ना जाना
मुझे रास आ..............

मुझे रस ........२
तुझे मिल.......२


तोहके चुनरी पैनाइब दूध भात हम खियाईब तानी चल जईह सैया जी के गांव बदरिया हो चल जईह सैया जी के गांव

तोहके चुनरी पैनाइब दूध भात हम खियाईब
तानी चल जईह सैया जी के गांव
बदरिया हो चल जईह सैया जी के गांव-२

देशे देश के जानेलु खबरिया
कौना नगर मोरा बसे ले सवारियां-२
कइके अकाज आपन घर भर बेलम के
अरज गरज मोरे कहिये बदरिया
तोहके चुनरी पैनाइब ..........
तानी चल जईह सैया..........
बदरिया हो चल जईह .........


उनका के मोर सखी याद परईयह
रोशन बलमुआँ के कसहू मनईह-२ हो...........
बिरह में तड़पत बानी दिन राती
अरे साफ साफ सजना कह समझईह
तोहके चुनरी पैनाइब ..........
तानी चल जईह सैया..........
बदरिया हो चल जईह .........


सपरे जहा तक जोर लगईह
हमरा करेजेउ के किरिया धरइह
करी नोहरा तोहसे आचरा पसार के
अरे केशरी लौउटीह त संगे लेले अइह
तोहके चुनरी पैनाइब ..........
तानी चल जईह सैया..........
बदरिया हो चल जईह .........

तोहके चुनरी पैनाइब दूध भात हम खियाईब
तानी चल जईह सैया जी के गांव
बदरिया हो चल जईह सैया जी के गांव-२

गायक कलाकार- श्री गोपाल राय









रविवार, 7 अगस्त 2022

गुरु को न पहचान सका तो जग जाना तो जाना क्या धन दौलत तू पा भी लिया गर चैन नहीं पाया तो क्या

तर्ज – कसमें वादे प्यार वफा सब..........

गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या २
धन दौलत तू पा भी लिया गर, चैन नहीं पाया तो क्या
गुरु को ना पहचान............. २

बाहर से आडंबर कुछ है ,भीतर रूप न निखारा है २
गुरु गुरु में सीस गुरु ने, गुरु बनने का झगड़ा है १
ऐसे गुरु २ भला बोलो क्या शिष्य को राह दिखाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............

कहलाने को, भक्त बहुत है, लेकिन खोटा धंधा है २
माया ऐसे घेर लिया है रहते आंख भी अंधा है १
ऐसे भक्तो २ को प्रभु का दर्शन, कहो कैसे हो पाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............२

डाल पकड़कर झूल रहा है, दुख कहा निवारण है २
जगत गुरु को भूल ही जाना, सभी दुखो का कारण है
सोच समझ कर २ गुरु करो तुम ,नही तो धोखा खाएगा
गुरु को ना पहचान सके...............२

जो करना, वो खुद ही करना, ना कहना नाइंसाफी है २
भजन में शब्द नही है काफी ,भाव का होना काफी है
गाया नही २ गुरु का महिमा राग रसीला गाया क्या
गुरु को ना पहचान सके...............२

गुरु को न पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या २
धन दौलत तू पा भी लिया गर २ चैन नहीं पाया तो क्या
गुरु को ना पहचान............. २
जग जाना तो जाना........ ३


गीतकार –श्री फणिभूषण चौधरी
गायक – धीरजकांत



ना आईल परदेशी ना आईल जाने कहाँ लुकाईल ना आईल परदेशी ना आईल- गोपाल राय निर्गुण

ना आईल परदेशी ना आईल-४
जाने कहाँ लुकाईल
ना आईल परदेशी ना आईल-२

केतने अमावस पूरन मासी-३
बीतल सम्मत साल उदासी-२
पथरा पर फूल फुलाइल
ना आईल परदेशी ना आईल-२

लौवट लौवट के फागुन आईल-३
सावन मौसम में अंघुवाईल-२
पपीहा के बोल सुनाइल
ना आईल परदेशी ना आईल-२

पहिर के लाल चुनर नौ लखिया-३
गईली पिया घर संग की सखिया-२
कजरा मोर धोवाईल
ना आईल परदेशी ना आईल-२

सजना के विश्वास का कईली-३
नइहर ना सासु के भईली-२
बरसत नयन झुराइल
ना आईल परदेशी ना आईल-२

जाने कहाँ लुकाईल
ना आईल परदेशी ना आईल-२







खोल के ख़िरीकिया बैठे उचकी अटरिया सावर गोरिया मारे तिरछी नजरिया-

खोल के ख़िरीकिया बैठे उचकी अटरिया
सावर गोरिया मारे तिरछी नजरिया-२

लउके ला बीन ओर छोर के उकेर नीलकी चुनरी
नव नव मन काजल दूनों नयन में डाले सुनरी-२
लाल रे टुकुलिया देखी भागे रे अनरिया
सावर गोरिया मारे तिरछी नजरिया-२

ससिया लेत घुमावे मुहवा आवे रतीया कारी
केसवा लहरा देले सगरे हो जाले पनियरी-२
देहिया तोरे त चले अरे फागुन बयरिया
सावर गोरिया मारे तिरछी नजरिया-२

हाथवा मार के बोलावेले जब तब चमका के मुनरी
अखियां बचा के सबकर छट दे लटकावे ले रसरी
जाल जे उ लौउठे ना फेरु ये नगरिया
सावर गोरिया मारे तिरछी नजरिया-२

खोल के ख़िरीकिया बैठे उचकी अटरिया
सावर गोरिया मारे तिरछी नजरिया




अइसन पलंगिया बनइह बलमुआँ कि हीले कौनो अलंगिया हो राम-गोपाल राय निर्गुण

आया है सो जायेगा राजा रंक फ़क़ीर
कोई सिंहासन चढ़ चले कोई बधे जंजीर

अइसन पलंगिया बनइह बलमुआँ कि हीले कौनो अलंगिया हो राम-४

हरियर बसवा के पटिया बनईह
सुंदर बिछईह दसगिया
ता पर हम दुलार बन सोईब
उपरा से तानिह चननिया हो राम
अइसन पलंगिया बनइह बलमुआँ कि हीले कौनो अलंगिया हो राम-२

पहले त रेशम के चोली पहिरहीह
आ नकिया में सोने के नथुनिया
कैसे में भार सहे मोरे देहिया
मत दीह मोटकी कफनिया हो राम
अइसन पलंगिया बनइह बलमुआँ कि हीले कौनो अलंगिया हो राम-२

लाल गाल लाल होंठ राख होई जईहे
जर जैईह राख अस टुकुलिया
ठाड़े बलम बस देखत रहब
चली ना एको अलंगिया हो राम
अइसन पलंगिया बनइह बलमुआँ कि हीले कौनो अलंगिया हो राम-२

केकरा के तुहु पतिया पठयब
केकरा के कहब सजनिया
कौन पता तोहके बतलायी
अजब वो देश के चलनिया हो राम
अइसन पलंगिया बनइह बलमुआँ कि हीले कौनो अलंगिया हो राम-२










मंगलवार, 2 अगस्त 2022

गुरुवर चरणों में दे दे ठिकाना मुझे मैं भटकता हूँ राह दिखाना मुझे- फणीभूषण जी चौधरी

गुरुवर चरणों में दे दे ठिकाना मुझे,
मैं भटकता हूँ राह दिखाना मुझे,
राह दिखाना मुझे.....
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

मैं तो पूजा से जप तप से अंजान हूँ,
मतलबी लोग से मैं परेशान हूँ,
कितना भरमाया है ये जमाना मुझे,
ये जमाना मुझे,
गुरुवर चरणो में, दे दे ठिकाना मुझे।।

तन कही और है मन कही और है,
सुख की चाहत की भारी यहाँ दौड़ है,
इस समंदर में अब ना बहाना मुझे,
ना बहाना मुझे.....
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

ये है काजल का घर बचके कैसे रहूं,
अपनी आवाज़ दिल की मैं किससे कहूं,
इस मुसीबत से तू ही बचाना मुझे।
हा बचना मुझे........
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

अब फणी के हृदय से ना तू दूर है,
अब तेरा फ़ैसला मुझको मंजूर है,
तुझको भूलूँ वो दिन ना दिखना मुझे,
ना दिखाना मुझे.....
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

गुरुवर चरणों में दे दे ठिकाना मुझे,
मैं भटकता हूँ राह दिखाना मुझे,
राह दिखाना मुझे.....
गुरुवर चरणो में दे दे ठिकाना मुझे।।

रचना- फणी भूषण जी चौधरी
गायक- श्री धरीज कान्त जी