मेरे गांव की एक परी
वह है तीन पंखों वाली
करती है अपनी मनमानी
मेरे गांव की परी
जहां देखो वहां मंडराती है
दिन हो या रात हो
अपनी मानसिक1 शैतानी करती उड़ती है पंख सारे मेरे गांव की एक परी
मेरे गांव की एक परी
वह है तीन पंखों वाली
करती है अपनी मनमानी
मेरे गांव की परी
जहां देखो वहां मंडराती है
दिन हो या रात हो
अपनी मानसिक1 शैतानी करती उड़ती है पंख सारे मेरे गांव की एक परी
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