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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

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शनिवार, 24 जून 2023

जग के पालन हार बने कैसे ललना झूले नन्दलाल आज यशोदा के पलना- अजय त्रिपाठी

जग के पालन हार बने कैसे ललना
झूले नन्दलाल आज यशोदा के पलना

जिसके भरोसे ये जग सारा,1
मांग रहा मईया से दे दे सहारा-२
टुकुर टुकुर देख रहा पलने से ललना
झूले नन्दलाल आज यशोदा के पलना
जग के पालन हार बने कैसे ललना

पर्वत नदिया जिससे बनती,दया दृष्टि से दुनिया चलती-२
गिर गिर उठ उठ सिख रहा ललना
झूले नन्दलाल आज यशोदा के पलना
जग के पालन हार बने कैसे ललना

अजब रूप प्रभु अपना बनाये, रुदन करत कभी कभी मुस्काये-२
देती है मईया ला के खिलौना
झूले नन्दलाल आज यशोदा के पलना
जग के पालन हार बने कैसे ललना

गीत संगीत - अजय त्रिपाठी
युवराजपुर ग़ाज़ीपुर
उत्तर प्रदेश


गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों- गीत संगीत - श्री अजय त्रिपाठी

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-४
घर मे पधारों मेरे घर मे पधारों-२
काटो सकल क्लेश जी मेरे घर मे पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२

एक दन्त दया वंत चार भुजा धारी
माथे सिंदुर शोभे मुस की सवारी
सर्व सिद्ध सर्वेश जी मेरे घर मे पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२

मोदक प्रिय मुद मंगल दाता
विद्या वारि धी बुद्धि विधाता
गणपति पुत्र उमेश जी मेरे घर मे पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२

शंकर सुवन भवानी नन्दन
चरण कमल पर सत सत बन्दन
रिद्धि सिद्धि के प्राणेश जी मेरे घर में पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२

पधारों ---
काटो सकल क्लेश जी मेरे घर मे पधारों
गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर मे पधारों-२


गुरुवार, 22 जून 2023

गाँव बेचकर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई है। जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।

गाँव बेचकर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई है।
जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।

बेचा है ईमान धरम तब, घर में शानो शौकत आई है।
संतोष बेच, तृष्णा खरीदी, देखो कितनी मंहगाई है।। 

बीघा बेच स्कवायर फीट खरीदा, ये कैसी सौदाई है।  
संयुक्त परिवार के वट वृक्ष से टूटी, ये पीढ़ी मुरझाई है।।
  
रिश्तों में है भरी चालाकी, हर बात में दिखती चतुराई है।
कहीं गुम हो गई मिठास, जीवन से, हर जगह कड़वाहट भर आई है।।    

रस्सी की बुनी खाट बेच दी, मैट्रेस ने जगह बनाई है। 
अचार, मुरब्बे को धकेल कर, शो केस में सजी दवाई है।।  

माटी की सोंधी महक बेच के, रुम स्प्रे की खुशबू पाई है।  
मिट्टी का चुल्हा बेच दिया, आज गैस पे बेस्वाद सी खीर बनाई  है।।  

पांच पैसे का लेमनचूस बेचा, तब कैडबरी हमने पाई है।
बेच दिया भोलापन अपना, फिर मक्कारी पाई है।।
सैलून में अब बाल कट रहे, कहाँ घूमता घर- घर नाई है।
दोपहर में अम्मा के संग, गप्प मारने क्या कोई आती चाची ताई है।।  

मलाई बरफ के गोले बिक गये, तब कोक की बोतल आई है।  
मिट्टी के कितने घड़े बिक गये, तब फ्रिज में ठंढक आई है ।।
खपरैल बेच फॉल्स सीलिंग खरीदा, हमने अपनी नींद  उड़ाई है। 
बरकत के कई दीये बुझा कर, रौशनी बल्बों में आई है।।

गोबर से लिपे फर्श बेच दिये, तब टाईल्स में चमक आई है।
देहरी से गौ माता बेची, फिर संग लेटे कुत्ते ने पूँछ हिलाई है ।।
बेच दिये संस्कार सभी, और खरीदी हमने बेहयाई  है।
ब्लड प्रेशर, शुगर ने तो अब, हर घर में ली अंगड़ाई है।।  

दादी नानी की कहानियां हुईं झूठी, वेब सीरीज ने जगह बनाई है।
बहुत तनाव है जीवन में, ये कह के मम्मी ने दो पैग लगाई है।।
खोखले हुए हैं रिश्ते सारे, नहीं बची उनमें सच्चाई है।।

चमक रहे हैं बदन सभी के, दिल पे जमी गहरी काई है।

गाँव बेच कर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई  है।।
जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।।

सादर!

मंगलवार, 20 जून 2023

ग़ाज़ीपुर संगीत के महान गुरु पं राम नरेश विश्वकर्मा जी का देहांत की खबर सुनकर मन व्यथीत है- लव तिवारी

मेरे संगीत के प्रथम गुरु पं॰ राम नरेश विश्वकर्मा जी का देहांत की खबर सुनकर मन व्यथीत हो गया है |अपने जीवन काल में गुरु जी ने हजारों शिष्य शिष्याओ को संगीत की शिक्षा प्रदान की |विगत कई दशकों से गुरुजी प्रयाग संगीत समिति की शाखा के द्वारा संगीत की शिक्षा दे रहे थे |आप लोगों को जानकर यह आश्चर्य होगा कि लगभग 100 वर्षों की आयु में भी वह संगीत की शिक्षा अपने शिष्यों को देते हुए मां सरस्वती के चरणों में विलीन हुए |अपने जीवन काल में मैंने ऐसे विलक्षण व्यक्ति को नहीं देखा जो तबला, सितार, गिटार, बांसुरी, जलतरंग, संतूर, हारमोनियम, माउथ ऑर्गन, इत्यादि वाद्य यंत्र कुशलता के साथ बजाते एवं सिखाते हो नृत्य की बारीकियां हो या गायन की चातुर्यता सभी कलाओं में गुरूजी प्रवीण एवं सिद्ध कलाकार थे |अपना गुरु मां सरस्वती को ही मानते थे इसी कारण से वे संगीत के उस शिखर पर पहुंच पाए जहां तक लोग सोच नहीं सकते हैं |बहुत ही ज्यादा यादें जुड़ी हुई हैं जो कि लिखकर बताया नहीं जा सकता है |भगवान गुरु जी के आत्मा को शांति प्रदान करें |ओम शांति शांति शांति 🙏🙏🙏🙏🙏



रविवार, 18 जून 2023

गाजीपुर की महान लेखिका एवं समाजिककार्यकर्ता डॉ विमला मिश्रा जी का संक्षिप्त परिचय एवं रचनाएं

प्रारूप
नाम : डॉ विमला मिश्रा
जन्मतिथि : ०१-१२-१९४९
माता का नाम : स्वर्गीय सुन्दरी देवी
पिता का नाम : स्वर्गीय राम सूरत मिश्र
जन्म स्थान : जिला ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश
शैक्षिक योग्यता : बी. ए., बीएड, एम. ए. संस्कृत पी.एच.डी
संप्रति (पेशा) : शिक्षण संप्रति अवकाश प्राप्त
विधाएं : काव्य विधा, कहानी लेख विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित
साहित्यिक गतिविधियां : सहित्यगोष्टी में प्रतिभाग, काव्यपाठ
प्रकाशित कृतियां : काव्य संकलन, कहानी संग्रह शीघ्र प्रकाशन
पुरस्कार सम्मान : युवा गौरव सम्मान, तहरी के मसावत समान, अनेक सम्मान।
संपर्क सूत्र : डॉक्टर विमला मिश्रा मुहल्ला नियाज़ी ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश २३३००१

मोबाइल न.- +91-9415887230, +91-7905372216
ईमेल - vimla22mishra@gmail.com

विशेष परिचय : डॉक्टर विमला मिश्रा जी राजकीय बालिका विद्यालय गाजीपुर में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत थी। अच्छी शिक्षक होने के साथ-साथ एक अच्छे समाजसेविका के रूप में गाजीपुर की जनता इन्हें जानती है। साथ-साथ गद्य लेखन, काव्य पाठ, विचार गोष्ठी तथा गाजीपुर की तमाम साहित्यिक मंच पर उनकी जज के रूप में एक बेहतरीन कार्य और सहभागिता देखी जाती है।।





शनिवार, 17 जून 2023

रुस्तमे हिंद भारत के प्रसिद्ध पहलवान मंगला राय ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश

भारत के प्रख्यात पहलवान -5
_________________________
मंगला राय भारत के एक प्रसिद्ध पहलवान थे। मंगला राय का जन्म 24 जून 1916 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के जोगा मुसाहिब गांव में क्वार महीने में हुआ था। उनके पिता का नाम रामचंद्र राय था। रामचंद्र राय और उनके छोटे भाई राधा राय अपने जमाने के मशहूर पहलवान थे। उन्ही की तरह मंगला राय और उनके छोटे भाई कमला राय ने भी कुश्ती में काफी नाम और यश प्राप्त किया। रामचंद्र राय और राधा राय दोनों अपने जवानी के दिनों में जीविकोपार्जन के चलते म्यांमार (बर्मा) के रंगून में रहते थे जहाँ दोनों एक अखाड़े में रोजाना अभ्यास और कसरत करते थे। दोनो भाइयों में राधा राय ज्यादा कुशल पहलवान थे और उन्होंने ही अपने दोनों भतीजों को कुश्ती की पहली तालीम दी और दाव-पेंच के गुर सिखाए।
महान पहलवान रुस्तम-ए-हिंद मंगला राय का जन्म अक्टूबर, 1916 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जोगा मुसाहिब गांव के एक भूमिहार ब्राह्मण किसान परिवार में हुआ था।. उनके पिता रामचंद्र राय और उनके चाचा राधा राय भी प्रसिद्ध पहलवान थे। 16 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद वे सिपाही के रूप में पुलिस सेवाओं में शामिल हुए लेकिन उनकी नियति कुछ अलग और महत्वपूर्ण की प्रतीक्षा कर रही थी। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और बर्मा (म्यांमार) चले गए जहां उनके पिता और चाचा रह रहे थे और अपने पेशेवर करियर का पीछा कर रहे थे। रंगून में मंगला ने कुश्ती सीखना शुरू किया। उन दिनों बनारस के महान पहलवान शिव मूरत तिवारी भी रंगून के एक अखाड़े में अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने इस युवा आकांक्षी की काया को देखा और उसे प्रशिक्षित करना शुरू किया। शिव मूरत तिवारी ने मंगला को कुश्ती की दक्षिण-पूर्व एशियाई चालों का मास्टर बना दिया। कुछ वर्षों के बाद मंगला राय अपनी मातृभूमि वापस आ गए लेकिन वे अपने पहले गुरु को कभी नहीं भूले। उन्होंने अपने गुरु के प्रति आभार प्रकट करते हुए अपनी बड़ी पुत्री का नाम 'शिव मूरत' रखा।
मंगला राय ने व्यायाम के कठिन नियम का पालन किया। 9 किलोमीटर पैदल चलने के बाद वे चार हजार स्क्वैट्स और दो हजार पांच सौ पुशअप्स करते थे। कभी-कभी वे रोप ट्रेनिंग भी किया करते थे। मंगला राय की लंबाई 6 फीट 3 इंच और वजन 160 किलोग्राम था।
रंगून में फत्ते सिंह और ईशा नट के साथ अपनी पहली बाउट के ठीक बाद मंगला राय लोगों के ध्यान में आए। उन्होंने अपने मशहूर मूव 'गदाहलेट' से दोनों चैंपियंस को रिंग में धूल चटाई। 1933 में वे भारत वापस आए और इलाहाबाद के मुस्तफा पहलवान को चुनौती दी। मुस्तफा ने उन्हें नौसिखिए के तौर पर लिया लेकिन 5 मिनट में ही फिदा हो गए जब मंगला राय ने पूरी ताकत से बाहराली का इस्तेमाल किया। इस प्रसिद्ध मुकाबले के बाद भारत में कुश्ती के एक सितारे का जन्म हुआ।

फख्र-ए-हिंद और रुस्तम-ए-पाकिस्तान गुलाम ग़ौस को हराने के बाद उन्होंने रुस्तम-ए-हिंद की उपाधि अर्जित की। अपने कैरियर के तीन दशकों में उन्होंने पचानवे प्रतिशत मुकाबलों में जीत हासिल की, जो लगभग एक जीवित मिथक बन गया। कुश्ती का यह दिग्गज इतना करिश्माई खिलाड़ी था कि वह पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहा। दुख हरण झा कुश्ती में परास्त होने के बाद इनके अनन्य भक्त हो गए ।
बनारस में गुलाम गौस को हराने के बाद भारत नरकेसरी मंगला राय ने जार्ज कांस्टेनटाइन की चुनौती स्वीकार की। रोमानियाई पहलवान जॉर्ज को 'यूरोप का टाइगर' कहा जाता था। यूरोप में अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को हराने के बाद उन्होंने कलकत्ता ( कोलकाता ) में डेरा डाला कि कोई भी उन्हें रिंग में चुनौती दे सकता है। उनकी चुनौती को स्वीकार करने के लिए प्रसिद्ध पूरन सिंह और केसर सिंह आगे आए। लेकिन महामल्ल मंगला राय ने न केवल उनका सामना किया बल्कि उन्हें धूल चटाई।
1963 के वर्ष में मंगला राय ने प्रसिद्ध पहलवान मेहरदीन के साथ कुश्ती के अपने अंतिम मुकाबले का सामना किया। मंगला राय 47 साल के थे जबकि मेहरदीन केवल 27 साल के थे, हालांकि मंगला राय ने अपने प्रसिद्ध बहारल्ली दाव का इस्तेमाल किया और मेहरद्दीन को रिंग से बाहर कर दिया गया। लेकिन बुढ़ाते रुस्तम-ए-हिंद की सहनशक्ति कम होने के कारण लड़ाई ड्रा घोषित कर दी गई। इस लड़ाई के बाद मंगला राय ने कुश्ती के कैरियर से संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने पैतृक गाँव में एक शांतिपूर्ण किसान का जीवन व्यतीत करना शुरू कर दिया। उन्होंने व्यायाम के कठिन आहार को बंद कर दिया और दुर्भाग्य से उन्हें मधुमेह हो गया। उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। मल्टी ऑर्गन फेलियर के कारण उन्होंने 24 जून 1976 को वाराणसी शहर में अंतिम सांस ली । मंगला राय का शरीर कितना बलिष्ट था उतना उनका शरीर सौष्टौ अद्भुत था । वे आपवादिक तौर पर खूबसूरत थे । लंबाई और गठा कसरती देह के कारण कही भी अलग से पहचाने जाते थे। इसी कारण इन्हें रुस्तमे हिंद कहा जाता था।


शुक्रवार, 16 जून 2023

एकलव्य ने अपना अंगूठा काटा था तो द्रोणाचार्य भी मात्र एक चुल्लू दूध के लिये तरसे -रामेश्वर शुक्ला

एकलव्य ने अपना अंगूठा काटा था तो द्रोणाचार्य भी मात्र एक चुल्लू दूध के लिये तरसे थे, अपमानित भी किये गये थे...
उस युग में एक ही अपराध के लिये ब्राह्मण को किसी शूद्र की अपेक्षा सोलह गुना अधिक दंड भी मिलता था... क्योंकि समझा जाता था कि ब्राह्मण ज्ञानी है और जानकर किया गया अपराध अज्ञानता में किये गये अपराध से अधिक दंडनीय है...
इस लिहाज से तो महाभारत काल ब्राह्मण विरोधी हो गया और "मनुस्मृति" भी ब्राह्मण विरोधी ही हुई फिर...!
उसी युग में एक मछुआरन की संतान "वेदव्यास" ने "महाभारत" लिखी थी, और "त्रेतायुग" में "वाल्मीकि" ने "रामायण" लिखी थी...!
जब एकलव्य की जाति बताते हो तो क्षत्रिय भीम की पत्नी हिडिम्बा की जाति भी बता दो और ये भी बता दो कि उसी हिडिम्बा के पोते "खाटू श्याम जी" (दलित) को साक्षात् श्रीकृष्ण भगवान् की तरह पूजा क्यों जाता है...?
न्याय-अन्याय हर युग में होते हैं और होते रहेंगे, अहंकार भी टकरायेंगे...कभी इनका तो कभी उनका...यह घटनायें दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं पर उससे भी दुर्भाग्यपूर्ण होता है इनको जातिगत रंग देकर उस पर विभाजन की राजनीति करके राष्ट्र को कमजोर करना...!
यदि किसी मूर्ख सवर्ण ने अगर भीमराव जी का अपमान किया था तो *किसी समझदार सवर्ण ने ही उनको पढ़ाया भी था और किसी सवर्ण ने अपना सरनेम आम्बेडकर भी दिया था तो किसी ने चुनाव हारने पर राज्यसभा भी पहुचाया...किसी एक घटना को अपने स्वार्थ के लिए बार-बार उछालना और बाकी घटनाओं पर मिट्टी डालना कौन सा चिंतन है ?
सवर्ण क्षत्रिय नंदवंश का समूल नाश कर चंद्रगुप्त नाम के शूद्र पुत्र को चक्रवर्ती सम्राट् बनाने वाला चाणक्य कौटिल्य नाम का ब्राह्मण ही था...!

यह दलित चिंतन नहीं है, यह केवल राष्ट्रद्रोहियों द्वारा थोपा हुआ दोगला चिंतन है जो बटवारे की राजनीति करते हैं...!

विवाद गढना, विवाद को हवा देना, वातावरण मलीन करना विरोध का विघातक तरीका है। जब दर्शन/दृष्टि ही नहीं है राष्ट्र के लिए तो समाज को बांटकर ही सत्ता संधान की कोशिश हो रही है। इस विधि से दशकों तक सत्ता का दोहन कर चुके गिरोह फिर सक्रिय है... इनके पास न सोच है न ही विचार।

वन्दे मातरम! ( साभार ) Rameshwar shukla




बुधवार, 14 जून 2023

हवस की एक अनोखी कहानी जो आदमी को हैवान बना दी है- लेखक लव तिवारी ग़ाज़ीपुर


वास्तव में जाति मनुष्यों के अंतर्विवाही समूह या समूहों का योग है जिसका एक सामान्य नाम होता है, जिसकी सदस्यता व्यक्ति द्वारा अर्जित न होकर उसकी जन्मना से प्राप्त होती है, जिसके सदस्य समान या मिलते जुलते पैतृक धंधे या धंधा करते हैं और जिसकी विभिन्न शाखाएँ समाज के अन्य समूहों की अपेक्षा एक दूसरे से अधिक निकटता का अनुभव करती हैं।

प्राचीन काल में जाति का वास्तविक और उनके कार्यों से होता था कार्य का तात्पर्य है अगर व्यक्ति पानी संबंधी काम करता था तो उसे हम कमकर खैरवार करते थे अगर व्यक्ति का सम्बंध पशुपालन तो यादव अहीर, ३ व्यक्ति मिट्टी के बर्तन बनाता था तो कुम्हार कहलाता है। ४ पान संबंधी व्यवसाय को करने वाला व्यक्ति पुणेरी कहलाता था, ६ दैनिक जीवन की संपूर्ण आवश्यक वस्तु की पूर्ति करने के लिए एक व्यवसाय को करने वाले व्यक्ति को हम बनिया खाते थे। ऐसे ही अन्य जीवन यापन करने के लिए तमाम प्रकार की जाति की व्यवस्था थी।

प्राचीन काल में भारत के जीवन को यापन करने के लिए जैसा कि मैंने दूसरे पैराग्राफ में लिखा है जातिवाद की व्यवस्था थी, भारत के स्वतंत्रता के बाद जातियों को आरक्षण के आधार पर मुख्यतः 4 या 5 भागों में बांटा गया।

सामान्य, पिछड़ी, अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति।

प्राचीन काल और अब भी आधुनिक काल जातियों के बीच में वर्चस्व को लेकर मतभेद रहे हैं, लेकिन बड़ी जाति छोटी जाति के शारिरिक उत्पीड़न के संबंध में उनका सारा प्राचीन काल की परंपरा, संस्कार, सभ्यता, संस्कृति, और पुरानी आधार पर बनाए गए रीति रिवाज को ताख पर रखकर उसे शारीरिक संबंध रखने को आतुर हो जाते हैं। ऐसी सामाजिक प्रपंच, ढकोसले पन , रूढ़िवादी से क्या लाभ है।

हमारी गाजीपुर शहर में एक बसुका गांव है। जहां इस क्षेत्र की तमाम बड़ी जाति छोटी जाति अपने शारीरिक हवस को मिटाने के लिए वहां उनके घर आते जाते हैं। वेश्यावृत्ति एवं वेश्याओं के घर अक्सर बड़े जाति के लोगों का ही आना जाना है। उदाहरण के रूप में वेश्या से शारीरिक सम्बन्ध बनाकर उसके द्वारा उतपन्न लड़की फिर से वेश्यावृत्ति में और लड़के भडुआ का काम करते है। उतपन्न वेश्या से उनके घर परिवार की अगली पीढ़ी फिर से वेश्यावृत्ति करती है। कहने का सीधा मतलब की वेश्या की माँ से लड़के का पिता लगा है तो वेश्या स खुद लड़का । इस घोर कलयुग में इस तरह के और भी अन्याय हो रहे है। अभी धरती पर ऐसे बहुत से पाप है जिसका उजागर होना बाकी है, हम अपनी अगले पोस्ट में ऐसे ही कुछ नए ज्वलंत मुद्दों को लेकर आपके पास हाजिर होंगे।

धन्यवाद- लेखक लव तिवारी


श्वेत कफ़न में लिपटी वह निर्जीव काया कुछ क्षणों पहले कुछ रिश्तों से बंधी एक पहचान लिये सजीव थी, हम सब के मध्य में।

मृत्यु- 
श्वेत कफ़न में लिपटी
वह निर्जीव काया
कुछ क्षणों पहले
कुछ रिश्तों से बंधी
एक पहचान लिये
सजीव थी, हम सब के मध्य में।

एक प्यारा नाम था
कुछ प्यारे सम्बोधन थे
सिर्फ कुछ समय पहले ही
सब के मन में बसी थी
जब साँसों की तार जुडी थी
उसकी अपने ह्रदय से।

काल की पदचाप की
न कोई पहचान थी
बस हाथ बढ़ा उसने तोड़ी
साँसों की एक डोर थी
हम सब के समक्ष ही
बुझ गई जीवन ज्योति थी।

सम्बोधन सब मिट गए
नाम पता सब खो गया
अंत में नाम बस
पार्थिव शरीर ही रह गया
भूल गए सब क्या कभी
इसकी कोई पहचान थी?

छूट गयी जब आत्मा भी
तन के इस बंधन से तो
छोड़ इस काय का मोह
उड़ चली अनंत में वो
साँसों की एक डोर से ही
क्या इससे जुडी थी वो ?

चल पड़ी कन्धों पर सवार
सब कुछ पीछे छोड़ कर
नया नाम 'अर्थी' का ले
कैसे है खामोश पड़ी
अपनी अंतिम यात्रा में
अपने ही संस्कार को।



आदिपुरुष: फिल्म देखनी है या नहीं ? अगर देखनी है तो क्यों देखनी है- श्री माधव कृष्ण

आदिपुरुष: फिल्म देखनी है या नहीं?

प्रभास अभिनीत आदिपुरुष रिलीज़ होने वाली है. इस पर कुछ विवाद भी हो रहे हैं, कुछ प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं, कुछ लोग बहिष्कार करने की घोषणा कर चुके हैं और कुछ लोग इस फिल्म को न देखने के कारणों पर चर्चा कर रहे हैं.

पहले निष्कर्ष: यह फिल्म देखनी चाहिए क्योंकिं इस फिल्म में आदिपुरुष भगवान् श्रीराम अपने उदात्त चरित्र और मानवीय मूल्यों के साथ वैश्विक स्तर पर बड़े पर्दे पर उपस्थित होंगे.

अब कारण:
अनेक लोग कुछ समय पहले इस बात पर दुःख व्यक्त कर रहे थे कि फिल्मों में हिन्दुओं और हिन्दू धर्म को विकृत करके दिखाया जाता है. अब उन्हें आपत्ति क्यों जब भारत के महानायक का महिमामंडन किया जा रहा है! इतने बड़े स्केल पर.

एक धर्मचार्य ने कहा कि भगवान् राम और लक्ष्मण को दाढ़ी और मूंछों के साथ दिखाया जाना गलत है. धर्माचार्य साहब के धर्म की समझ पर मुझे संदेह है. भगवान अपने भक्तों के सामने उसके इष्ट रूप में प्रकट होते हैं. भयाक्रांत प्रहलाद के समक्ष वह संसार का विनाश कर देने वाले नृसिंह के रूप में प्रकट होते हैं. यदि एक भक्त उन्हें दाढ़ी मूंछों के साथ देखना चाहता है तो क्या समस्या है? वह तो बंदर, सिंह, वराह और बौने के रूप में भी प्रकट होते हैं.

किसी ने कहा कि इतिहास को इतिहास की तरह दिखाया जाना चाहिए. नवीन तकनीकी जैसे vfx का प्रयोग कर इस फिल्म को कार्टून और अविश्वसनीय बना दिया गया है. मैं तो कहता हूँ कि भगवान् श्री राम और हनुमान जी जैसे सभी रामायण के नायकों के जीवन मूल्य अविश्वसनीय हैं.

हर प्रकार की नवीन तकनीकी का प्रयोग कर आज भगवान् श्रीराम की कथा को और नए तरीके से दिखाना और सुनाना चाहिए जिससे कि आधुनिक पीढ़ी आनन्द के साथ उस कथा और लीला को ग्रहण करे.

एक विवाद जुड़ गया फिल्म के निर्देशक द्वारा माँ सीता की भूमिका निभा रही अभिनेत्री कृति सेनन को गले लगाना और पाश्चात्य तरीके से गाल पर हल्का विदाई चुम्बन देना. अब इस पर भी यदि बहस करनी पड़े, तो लानत है लोगों की बुद्धि पर. अभिनेत्री का कार्य है एक भूमिका निभाना, और आप उससे आशा करेंगे कि वह आजीवन माँ सीता बनकर रहे, तो आप इस धरती पर निश्चित ही बोझ हैं.

इस फिल्म को देखना इसलिए भी जरूरी है ताकि ऐसी फ़िल्में बनती रहें. पृथ्वीराज चौहान बनाने वाले डॉ चन्द्र प्रकाश द्विवेदी का फिल्म के फ्लॉप होने पर हताशा दुखद थी. यदि यह फिल्म भी फ्लॉप हो जाए तो आप सभी सेक्स, कॉमेडी, आतंकियों माफियाओं व आक्रमणकारियों को महिमामंडित तथा भारतीय मूल्यों को विकृत करने वाली फ़िल्में देखने के लिए ही बने हैं.

कुल मिलाकर, आदिपुरुष से जुड़े सभी दुराग्रहों और दुराशाओं को त्यागकर रामायण की कहानी को सिनेमाघरों में बड़ी संख्या में सपरिवार जाकर देखिये, और हाँ! ये बात-बात पर बहिष्कार करना छोड़ दीजिये. शोभा नहीं देता शास्त्रार्थ की भूमि भारत पर ऐसा बचकानापन.

माधव कृष्ण
१४.६.२३
वृन्दावन






रविवार, 11 जून 2023

कोई दूध से नहा रहा है, किसी को पीने को पानी नसीब नही है- लव तिवारी

 ग़रीबी एक अभिशाप है
भूख और गरीबी इतना सताती है कभी-कभी जान निकल जाती, आज के दौर में किसी को नहाने के दूधों तो किसी को पीने को पानी तक नसीब नही है। एक बात और मजे की लोग भुखमरी से कम मरते लेकिन खाकर मरने वालों की संख्या इस दुनिया में ज्यादा है आप न्यूज़ पेपर उठा कर देख लीजिए तमाम बड़े हस्तियों को तमाम लोगों के बारे में आप जानते हो जानते होंगे, खबर मिलती है कि उन्हें मौत हो गई मौत के पीछे का रहस्य हार्ट अटैक हार्ट अटैक क्यों होता है और असंयमित भोजन खाने तथा धूम्रपान करने से, नशा का भारी मात्रा में प्रयोग करने एवं तनाव भरे जीवन को जीने से।

यह सब गरीब के पास नहीं है गरीब खाने को और सोने को मिल जा तो उसे किसी बात की चिंता नहीं सताती, पता है झुग्गियों में रहने वाले गरीब तो केवल उसी दिन की चिंता रहती हैं अगले दिन जीवन के संघर्ष में जीवन को जीते हो अपनी पूरी उम्र को निकाल देते हैं। इस आर्टिकल को लिखने के पीछे उद्देश्य क्या है, अगर भगवान ने आपको धन दिया उस धन का सदुपयोग करें न की दुरुपयोग। उतना ही भोजन करें जितना शरीर की आवश्यकता है। उस से बढ़कर करेंगे तो तमाम तरह एवं विभिन्न प्रकार की बीमारियां आपकी तरह प्रभावित करेगी। इस तस्वीर में आप देख रहे होंगे कैसी एक बच्चा अपनी जीवन की कष्ट वाले समय को आनंद पूर्वक जी रहा है। जीवन की यही कहानी बहुत के पास पैसा है बहुत के पास खाने को भी धन नहीं हैं आपको कैसे सुखी रहना है, क्या आप संतोष भरे जीवन को जीना है या फिर वही जीवन जिसमें पैसा है लेकिन सुकून नहीं है घर है बिस्तर है लेकिन नींद नहीं औलाद है लेकिन सामाजिक दायित्व नहीं भोजन है लेकिन किसी बीमारी की वजह से खाना नहीं, तमाम तरह की बातें हैं आप खुद समझदार हैं अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए आप गरीबों के प्रति उदारवादी बने।

जीवन में कमाए हुए अपने धन का कुछ अंश जरूर गरीबों की भोजन एवं कपड़े तथा उनके अन्य जरूरतों के प्रति खर्च करें।



उम्र क़े अंतिम पड़ाव पर, बैठा रहता ताकता है अकेला

जीवन भर चलता रहा मै, लेकर पुरे परिवार का रेला !
उम्र क़े अंतिम पड़ाव पर, बैठा रहता ताकता है अकेला !!

बजाई थी बड़ी शान से जिनके पैदा होने पर थाली !
वही आज हमें बजाते दे -देकर जोर जोर से गाली !!

गुजर जाती है उम्र सारी, नहीं गुजरती अब अंतिम बेला !
आँखे भी थक चुकी अब, देख जीवन का ये खेल अलबेला !!

बचपन से सुनते आए, वही काटोगे जैसा था तुमने बोया !
पिता क़े थे हम श्रवण-कुमार, देख अपनी दिल है रोया !!




शनिवार, 10 जून 2023

वह प्यारा सा घर जहां बचपन बीता युवराजपुर ग़ाज़ीपुर- लव तिवारी

पतित पावनी गंगा बहती, सुंदर भेष परिधान यहाँ।
वह है अपनी प्यारी घरती, जिसको कहते गांव जहां।।

शहर के चकाचौंध और जरूरतों के मद्देनजर गांव की जीवन से हम दूर हो गए, लेकिन गांव आज भी हमारी सुंदर यादों को सँजोये जहन में बसता है। काली, दोमट, बलुई दोमट एवं बलुई मिट्टी को सुशोभित करते हुए गंगा मईया के तट पर बसा धरती का एक मात्र ऐसा गांव जहाँ चार तरह उपजाऊ मिट्टी पायी जाती है। कला, संस्कृति, खिलाड़ी और साहसी लोगों से परिपूर्ण अपने गांव की महिमा न्यारी है।

एक प्यारा सा गांव जिसमें पीपल की छांव।
छाव वो आशिया था एक छोटा मकान था।। छोड़कर गांव को उस घनी छांव को।
शहर के हो गए भीड़ में खो गए है।।
जन्मभूमि युवराजपुर ग़ाज़ीपुर उत्तरप्रदेश





शुक्रवार, 9 जून 2023

अष्ट शहीदों की वीर गाथा पर अष्ट बलिदानी लिख रहे भोजपुरी जगत के महान कवि श्री संजीव त्यागी जी - लव तिवारी

१८ अगस्त १९४२ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मोहम्दाबाद में अंग्रेजों के द्वारा सीने पर गोली खाकर शेरपुर गांव के आठ अमर शहीदों के साहसी कारनामों पर आधारित खण्ड काव्य "अष्ट बलिदानी" लिख रहे भोजपुरी जगत के महान लेखक रचनाकार बड़े भैया श्री संजीव कुमार त्यागी जी का स्नेह और आशीर्वाद हमें प्राप्त हुआ। ग़ाज़ीपुर लट्ठूडीह के निवासी भईया को उनकी सुप्रसिद्ध भोजपुरी काव्य संग्रह "ए सरकार किसान हई हम" को साल २०२१ के हिंदुस्तान एकादमी प्रयागराज के द्वारा भिखारी ठाकुर सम्मान एवं उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के द्वारा सहित्य सर्जना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। परम आदरणीय संजीव कुमार त्यागी भैया जी पर मां सरस्वती एवं भगवान काशी विश्वनाथ भगवान की कृपा बनी रहे।

अन्य सम्मानित सदस्य-आदरणीय गुरुजी श्री Kameshwar Dubey जी, शिवांक राय आज़ाद जी, Anupam Rai जी एवं स्वतन्त्र पत्रकार श्री Sushil Tiwari जी
इंटरव्यू लिंक-https://youtu.be/I1BHnoxBMLs
#अष्टबलिदानी #मोहम्दाबाद #ग़ाज़ीपुर #उत्तरप्रदेश


नफ़रत नही हक़ीक़त साझा किया हैं कब सुधरेगी ये दरिन्दगी भरा समाज- लव तिवारी

तबाह और बर्बाद हो गयी ये तमाम सेक्युलर लड़कियां, मिला सिर्फ आंसू, प्रताड़ना, शोषण, मुस्लिम बच्चे और तलाक, इनके शौहर लाइफ में मस्त, ये हो गयी गुमनाम

अगर आप से पुछा जाये की आज सैफ अली खान से निकाह करने वाली अमृता सिंह कहाँ पर है, आमिर खान से निकाह करने वाली रीना दत्ता कहाँ पर है ? ओमर अब्दुल्ला से निकाह करने वाली पायल नाथ कहाँ पर है ? मोहम्मद अजहरुद्दीन से निकाह करने वाली संगीता बिजलानी कहाँ पर है, फरहान अख्तर से निकाह करने वाली अनुराधा कहाँ पर है ? और नवाजुद्दीन सिद्दीकी से निकाह करने वाली अंजना किशोर पांडे कहाँ पर है ?

ये सब अब गुमनाम हो चुकी है, इनका कोई अतापता नहीं है, पर हां जिन लोगो से इन्होने निकाह किया था वो अपनी जिंदगी में मस्त है, या तो वो और किसी महिला के साथ है या फिर अपने काम काज में व्यस्त है, ये आराम से है 

आज अंजना किशोर पांडे की खबर सामने आई थी जो की नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बीवी बन कर आलिया सिद्दीकी बन गयी थी, अंजना ने आज कहा की - वो 10 साल से शोषण की शिकार है, 10 साल तक लाश बनकर रही है और अब वो और शोषण बर्दास्त नहीं कर सकती, अंजना ने ये भी कहा की अब वो आलिया से वापस अंजना किशोर पांडे बन चुकी है और नवाजुद्दीन सिद्दीकी से तलाक चाहती है 

सेक्युलर निकाह करने वाली इन तमाम महिलाओं की कहानी लगभग एक सी ही है, चाहे वो अंजना किशोर पांडे हो, अमृता सिंह हो, रीना दत्ता हो, संगीता बिजलानी हो, अनुराधा हो, पायल नाथ हो, ये लिस्ट काफी लम्बी है और यहाँ पर दिव्या भारती को तो बिलकुल नहीं भुला जा सकता, वो तो मर चुकी है

सेक्युलर निकाह करने वाली ये तमाम महिलाएं अब गुमनाम होकर जी रही है, इनको अपने जीवन में मिला तो मिला तलाक, इनको मुस्लिम बच्चे भी मिले, इन सभी के अगर बच्चे है तो वो मुस्लिम ही है, इनके शौहर अब या तो दूसरी महिलाओं से निकाह कर अपनी जिंदगी आराम से जी रहे है या अपनी जिंदगी में वो बिजी होकर मस्त है, जबकि ये महिलाएं गुमनाम है, इनकी जिंदगी अब तबाह और बर्बाद हो चुकी है और ये अपने जीवन के अंत का ही इंतज़ार कर रही है 

सेक्युलर निकाह करने वाली तमाम महिलाओं ने ये ही सोचा था की उनके शौहर बड़े अच्छे है और वो जीवन भर अपने शौहर के साथ सुखी जीवन व्यतीत करेंगी, इन सेक्युलर महिलाओं और इनके सेक्युलर शौहरों का जीवन कुछ दिन ठीक भी चला, बेगम शौहर ने जीवन में आनंद भी लिया पर आख़िरकार आनंद ख़त्म होने लगा और जीवन में रह गया सिर्फ मानसिक प्रताड़ना, सपनो का टूटना, शोषण और तलाक और साथ ही साथ मुस्लिम बच्चे 

कहा जा सकता है की इन सेक्युलर निकाहों का रिजल्ट काफी दर्दनाक निकला जहाँ पर आंसू, सपनो के टूटने, शोषण, पछतावे के अलावा कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं मिला😠😠



गुरुवार, 8 जून 2023

भोजपुरी के बेहतर विकास के लिए समर्पित है आदरणीय गुरु जी श्री राम बहादुर राय- लव तिवारी

साहित्यकार समाज और अपने युग को साथ लिए बिना रचना कर ही नहीं सकता है, क्योंकि सच्चे साहित्यकार की दृष्टि में साहित्य ही अपने समाज की अस्मिता की पहचान होता है। इस संदर्भ में हिंदी, भोजपुरी भाषा के महान कवि लेखक परम् आदरणीय श्री राम बहादुर राय गुरु जी का स्नेह और आशीर्वाद हमें अपने निवास स्थान ग़ाज़ीपुर में प्राप्त हुआ। भोजपुरी के बेहतर विकास के लिए आदरणीय गुरु जी ने "भोजपुरी के मान्यता देई ए सरकार" सुंदर काव्य से सुशोभित पुस्तक का प्रकाशन किया है। संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है, लेकिन भोजपुरी भाषा को नही, युद्ध क्षेत्र, राजनीति, फिल्म, मनोरंजन, खेल जगत वैज्ञानिक एवं अनुसंधान ऐसे तमाम क्षेत्रों में भोजपुरी भाषाई लोगों का विशेष योगदान रहा है लेकिन भोजपुरी को अभी भी संविधान की आठवीं अनुसूची से बाहर है। भोजपुरी के मान्यता देई ए सरकार के साथ साथ अपनी तीन प्रकाशित पुस्तक क्रमशः २- अब गंवुओ में शहर आ गईल, ३-धरती के परिंदे ४- आदमी कई रंग को हमें आशीर्वाद स्वरुप भेंट में प्रदान किए। ऐसे महान समाजसेवी रूपी साहित्यकार पर परमपिता परमेश्वर की कृपा बनी रहे।

#भोजपुरी #भाषा #साहित्यकार #आंठवी #अनुसूची #भारतीय #सविंधान #बलिया #ग़ाज़ीपुर #उत्तरप्रदेश



योगासनों में हलासन का एक महत्वपूर्ण स्थान है। हल का सीधा संबंध उत्पादकता से है।- डॉ एम डी सिंह

हलासन

योगासनों में हलासन का एक महत्वपूर्ण स्थान है। हल का सीधा संबंध उत्पादकता से है। इस तरह यह हमारे प्रजनन तंत्र से सीधा जुड़ा हुआ है। हल जिसमें पृथ्वी को जोतने की शक्ति होती है, इस तरह वह पौरुष का प्रतीक है। दूसरी तरफ वह पृथ्वी की उत्पादकता को भी बढ़ाता है, इसलिए वह स्त्रियों की प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करता है। अपनी इन्हीं उपयोगिताओं के कारण हलासन पुरुष और स्त्री दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। हलासन जहां एड्रीनलीन, इंसुलिन एवं टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को उत्प्रेरित करता है तो वहीं स्त्री हार्मोन प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजन के संतुलित सेक्रेशन को भी बल देता है। स्त्री पुरुष दोनों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन इस आसन के मुख्य दबाव क्षेत्र में आते हैं।

हलासन आमतौर पर सर्वांगासन के बाद किया जाने वाला आसन है। इसमें योगी सर्वांगासन की मुद्रा में ही अपनी दोनों टांगों को कमर के पास से चेहरे को ढंकते हुए नीचे ले जाकर सर के पीछे जमीन से लगा देता है। दोनों हाथ जो सर्वांगासन में कुहनी के पास से उठकर कमर को सपोर्ट किए होते हैं अब हलासन में पीठ के पीछे जमीन पर एक दूसरे के समानांतर रख दिए जाते हैं। इस अवस्था में 2 से 3 मिनट तक बने रहना पर्याप्त शक्ति संतुलन और उर्जा का संवाहक होगा।

संभवतः हलासन एकमात्र आसान है जो मानव शरीर के प्रत्येक एंडोक्राइन ग्रंथि को प्रभावित करता है और उनके हार्मोन उत्सर्जन को उत्प्रेरित करता है। जहां यह पुरुषों के वृषण, महिलाओं के डिंब ग्रंथियों पर सीधा प्रभाव डालता है वहीं पैंक्रियाज पर उपस्थित पैंक्रियाटिक ग्लैंड, किडनी पर उपस्थित एड्रिनल कार्टैक्स, छाती में उपस्थित थायमस ग्लैंड, गले में उपस्थित थाइरोइड ग्लैंड एवं ब्रेन में उपस्थित पिट्यूटरी ग्लैंड इत्यादि सभी अंतः स्रावी ग्रंथियों को भी उतनी ही क्षमता से प्रभावित करता है। इस आसन को करते समय अपने शरीर में उपस्थित सारी अंतः स्रावी ग्रंथियों को स्वस्थ एवं शुद्ध होने का भाव मन में बनाए रखना चाहिए। इस तरह हम देखें तो हलासन सर्वांगासन की प्रक्रिया को संपूर्ण करता है।

सच पूछिए तो हलासन योगी को हल की तरह शक्तिशाली, हलवाहे की तरह संतुलन बनाए रखने वाला और किसान की तरह उदार बनाता है। सुंदर, युवा और ऊर्जावान बनाए रखने में इससे बड़ा कोई आसन नहीं।
इस आसन को हर आयु एवं प्रत्येक जेंडर के लोग कर सकते हैं।

इस आसन के बाद चक्रासन करना चाहिए।
सर्वाइकल स्पॉन्डलोसिस से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को करने से बचें।

हलासन के साथ जरूरत पड़ने पर हम होम्योपैथिक औषधियों लाइकोपोडियम, सेलेनियम, योहिम्बिनम, टेस्टिस, सीपिया, पलसाटिला, ऊफोरिनम, इंसुलिन, एड्रीनलिन, फास्फोरस, एसिड फास, कैलकेरिया आयोड, कोनियम मैकुलेटम, ब्रोमियम, थाइरॉएडिनम, पिट्यूटरिन, आयोडियम एवं ए सी टी एच इत्यादि का प्रयोग करके अद्भुत लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

(नोट-औषधियों का चयन होमियोपैथिक चिकित्सकों की राय पर ही किया जाए)

(अपनी पुस्तक 'संपूर्ण योग सिद्धांत एवं होमियोपैथिक दृष्टिकोण' से।)
डॉ एम डी सिंह


मंगलवार, 6 जून 2023

दुल्लहपुर का पशु मेला - नीरज सिंह अजेय

🐂🐃 दुल्लहपुर का पशु मेला 🐂🐃

मेला का नाम सुनते ही हमारे मन अपने स्थानीय बाजार और कस्बे में लगने वाले मेलों का दृश्य घूमने लगता है और अपना बचपना याद आने लगता है लेकिन आज हम लोग एक विशेष प्रकार के मेले की बात करेंगे जिसमें पशुओं की खरीद बिक्री होती थी।
आप में से तो बहुत लोग इस मेले के बारे में जानते भी नहीं होंगे पर आपको अपने क्षेत्र के ऐसे शानदार मेले के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
ऐसा ही एक मेला अपने गाजीपुर जिले में दुल्लहपुर बाजार में लगता था, मेले को बंद हुए आज एक जमाना बीत गया पर अभी भी उस अविस्मरणीय मेले की यादें आती रहती है।
पहले हर गांवों में लोग बहुत ही प्रेम से पशुपालन करते थे, हर घर के सामने खुद की चरनी होती थी जिस पर कम से कम चार या पांच पशुओं को पाला जाता था, जिस घर में गाय भैंस और बैल नहीं होता था उसको लोग आश्चर्य से देखते थे।
जब हम लोग छोटे-छोटे थे उसके भी बहुत पहले से दुल्लहपुर का बैल मेला लगता आ रहा था।
इस मेले की यादें हमारे साथ जुड़ी हुई हैं, आज के बच्चे तो इसके बारे में कल्पना भी नहीं कर पाएंगे।
हमारे गांव से उत्तर दिशा की ओर दुल्लहपुर बाजार पड़ता है तो मैंने बचपन से देखा है कि बहुत सारे किसान अपने बछड़े और बैलों को हांकते हुए दुल्लापुर मेले में लेकर जाते थे, यह मेला प्रत्येक सप्ताह में सोमवार के दिन लगता था इस मेले के मालिक कोई कमला राय साहब थे। इसमें पशु के खरीदने बेचने पर एक रसीद कटानी पड़ती थी जिसका सामान्य शुल्क लगता था।बहुत दिनों तक यह मेला गाजीपुर जिले की शान हुआ करता था।
हम भी इस मेले में तीन या चार बार गये थे जिधर देखो एक से एक बछड़े और बैल। इनकी खूबसूरती देखते ही बनती थी।
हमारी खेती करने वाले पसराम चाचा कई बार बैलों की खरीद बिक्री करने के लिए मेले में जाते थे तो हम भी साथ गए थे।
यह पशु मेला दुल्लाहपुर रेलवे स्टेशन के ठीक सामने पूरब दिशा में और स्टेशन के दक्षिण दिशा में भी लगता था।
यह मेला आप को अपनी ओर बरबस ही आकर्षित कर लेता था। मेले में जहां तक निगाहें जाती चारों और बस बैल ही बैल दिखते थे।
मुझे याद आता है कि बचपन में मेरे घर में दो बैल थे जिसमें जो नया बैल था उसको हम लोग मरकहवा बैल बोलते थे। एक दिन एकाएक मरकहवा बैल बीमार हो गया है और उसकी मौत हो गई। मुझे याद आता है कि घर के सभी सदस्य रोने लगे थे और उस दिन घर में खाना भी नहीं बना था, संभवतः यह सना 1990 के आसपास की बात होगी।
धीरे-धीरे इस मेले में जानवरों को कसाईखानो में बेचने वाले व्यापारियों का आना जाना बढ़ गया, ज्यादा पैसे के लिए लोग पशुओं को इन व्यापारियों के हाथ बेच कर अच्छा खासा मुनाफा कमाने लगे।
हमें याद आता है कि जब ऐसे व्यापारी मेले में बेचने खरीदने के लिए हमारे गांव की ओर से बैलों को लेकर आते जाते थे तो हमारे गांव के कुछ बदमाश टाइप के लोग इन व्यवसायियों से पैसों की वसूली भी करते थे। अब जब दुल्लहपुर जाना होता है स्टेशन के सामने देखने पर पुराना मेला याद आने लगता है और उसकी यादें मन को भावुक कर देती है।
कभी ऐसे भी सुनहरे दिन थे कि जब हर घर में गाय भैंस बैल हुआ करते थे, जिस घर में जानवर नहीं होते थे उस परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा कम मानी जाती थी।
हमको लग रहा है कि लगभग बीस साल पहले से यह मेला बंद हो गया है। आज तो यह समय आ गया है कि लगभग हर गांव में पैसा होने पर भी दुध नही मिल रहा है, आधे लोग डिब्बे के दुध दही के भरोसे हो गये हैं।
अब गांव भी बनावटी शहर बनते जा रहे हैं क्योंकि अब गांव के अधिकांश परिवार ऐसे हैं जिनके पास कोई पशु नहीं है, लोग पशु पालने से कतरा रहे हैं और पशु पालने को निरर्थक और घाटे का सौदा समझ रहे हैं !
क्या वर्तमान में आपके घर में कोई पशु हैं ? यदि हैं तो आपकी महानता है। पता नहीं फिर कब दुल्लहपुर बाजार का पशु (बैल) मेला शुरू होगा ... ... ...

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यदि आपकी यादों में दुल्लहपुर मेले से जुड़ी कोई बात हो तो कमेन्ट में लीखिए मैं उसे इसमें जोड़ लुंगा।
पोस्ट पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजियेगा। यदि पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर करें।
बाकी फिर कभी... ...
आप सभी को धन्यवाद 🙏
✍️ नीरज सिंह 'अजेय'
नीरज सिंह 'अजेय'  'हिन्दी साहित्यकार'



सोमवार, 5 जून 2023

कुछ भी हो नाम देखना जरूरी है। पंडित राजेंद्र प्रसाद शर्मा

अभी तक 300 से ज्यादा को मौत की नींद सुलाने वाला और 900 से ज्यादा को गंभीर घायल करने वाला उड़ीसा का ट्रेन एक्सीडेंट जिस स्टेशन पर हुआ उसका नाम है। बहानागा स्टेशन। इस स्टेशन के स्टेशन मास्टर का नाम है मोहम्मद शरीफ अहमद।

सुना है -
एक्सीडेंट की जाँच के आदेश के बाद से ही फ़रार है मोहम्मद शरीफ अहमद।

हम तो हमेशा से कहते आये हैं कि व्यापार हो, नौकरी हो, कारोबार हो, मजदूरी हो, सब्जी जो, फल हो, दूध हो..... कुछ भी हो -- नाम देखना जरूरी है।



परोपकार से बड़ा कोई धर्म नही है- नीरज सिंह अजेय हिन्दी साहित्यकार

रात तक़रीबन 9 बजे दफ़्तर से लौटने के क्रम में प्रफुल्ल बाबू की चमचमाती मर्सिडीज कार जैसे ही उनके घर के मुख्य फाटक में घुसी,ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी तेज़ी से दौड़कर उनके पास पहुंचा औऱ उन्हें सैल्यूट करते हुए कहा...“साहब, एक महिला आपके लिए लिखी गई किसी व्यक्ति की एक चिट्ठी लेकर न जाने कब से यहाँ भटक रही हैं औऱ बार बार आपसे मिलने का अनुरोध कर रही है। मेरे मना करने के बाद भी यहाँ से भाग नहीं रही है , उसके साथ उसका एक बच्चा भी है ।”

प्रफुल्ल जी ने गार्ड की बातों को सुन बेहद अचरज से उस महिला को अपने नज़दीक बुलाया औऱ उससे जानना चाहा..."आप कहाँ से आई हैं और मुझसे क्यों मिलना चाहती हैं , किसने मुझें ये चिट्ठी लिखी है" ??

कपकपाती हाथों से महिला ने बिना कुछ ज़्यादा बोले प्रफुल्ल जी को एक चिट्ठी पकड़ाई औऱ फ़िर मद्धिम आवाज़ में सिसकते हुए बोली...." साहब, मैं अभागन बड़ी भयानक मुसीबत में हूँ , तत्काल आपकी मदद चाहिए , आपके पिताजी ने मुझें ये चिट्ठी देकर आपके पास भेजा है ।मेरा एकलौता बेटा बहुत बीमार है । इसे किसी भी तरह किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दीजिए ।आपका जीवनभर उपकार रहेगा ।गांव में इसके इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मज़बूरी में मैं आपके पास आई हूँ "।

चिट्ठी देते हुए महिला प्रफुल्ल जी के सामने अपना दोनों हाथ जोड़कर खड़ी हो गई ।

प्रफुल्ल जी ने उस चिट्ठी को ध्यान से पढ़ा और कुछ पल के बाद बेहद गंभीर व शांत हो गए । उसके बाद वे मैली कुचैली साड़ी पहनी क़भी उस महिला की तरफ़ अपनी आँखें फेरते तो क़भी उस चिट्ठी की तरफ़ । कुछ देर तक बेहद गहरी चिंता में प्रफुल्ल बाबू गोताखोरी करते रहे ।

दरअसल उस चिट्ठी के साथ साथ वो महिला अपने गंभीर रूप से बीमार बच्चे को लेकर उनके पास इलाज़ हेतु मदद के लिए अपने गांव से शहर पहुँची थी ।

"आप कब से मेरा इंतज़ार कर रही हैं , क्या आपने कुछ खाया है"....?? प्रफुल्ल जी ने महिला से जानना चाहा ।

इसके उत्तर में महिला कुछ बोल न सकी , बस उनको लगातार एक टक देखती रही ।

प्रफुल्ल जी ने उसी क्षण अपने सुरक्षाकर्मी को बोल उस महिला औऱ उसके बीमार बच्चे के लिए अपने आउट गेस्ट रूम में रहने का इंतजाम करवाया औऱ फ़िर वहीं कुछ देर बाद दोनों के लिए भोजन का प्रबंध किया गया ।

उन दोनों के भोजन करते करते प्रफुल्ल जी फ़िर अपने मोबाइल फोन से किसी से कुछ बात करते हुए उनके सामने उपस्थित हो गए ।

महिला ने पुनः उनसे फरियाद करते हुए कहा..."साहब , भगवान के लिए मेरी मदद कीजिए और मेरे एकलौते बीमार बच्चे को किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दीजिए , नहीं तो इसका बचना मुश्किल है "।

महिला बोलते बोलते उनके पैरों पर गिर पड़ी ।

"अरे माताजी ऐसा मत कीजिए, आप मेरी मां समान हैं , आप चिंता मत कीजिए, सब ठीक हो जाएगा"....प्रफुल्ल बाबू ने उसकी हिम्मत बढ़ाई ।

इतने में रात के बेहद ख़ामोश सन्नाटे को चीरती हुई हॉर्न बजाती एक दूसरी गाड़ी तेज़ी से घर के अंदर घुसी औऱ कुछ पल बाद एक डॉक्टर वहाँ उपस्थित हुए ।

"आईए डॉक्टर साहब , ये बच्चा बीमार है , इसको ज़रा बेहद गंभीरता से पड़ताल कर इसका इलाज़ कीजिए"...प्रफुल्ल जी ने कहा ।

डॉक्टर बाबू ने बिना अपना वक़्त गवाएं तकरीबन बीस मिनट तक उस बच्चे का गहन निरीक्षण किया औऱ फ़िर कुछ जाँच करने के साथ साथ कुछ दवाईयों की पर्ची भी वहाँ खड़े प्रफुल्ल बाबू के हाथों में पकड़ा दी ।

"ये कुछ दवाइयां औऱ इंजेक्शन मेडिकल स्टोर से तत्काल मंगा लीजिए , अभी देने हैं और मैं अपने साथ जांच के लिए इस बच्चे का रक्त नमूना लेकर जा रहा हूँ ,इनके रिपोर्ट लेकर कल फ़िर आऊंगा" ......डॉक्टर ने प्रफुल्ल बाबू से कहा औऱ फिर वहां से निकल गए ।

प्रफुल्ल बाबू ने डॉक्टर की पर्ची औऱ कुछ पैसे अपने ड्राइवर को पकड़ाते हुए उसे तुरंत सारी दवाइयां लाने का निर्देश दिया औऱ फ़िर ख़ुद अपने घर के अंदर जाने के लिए वहाँ से बरामदे की ओर मुड़े ।

"साहब बस आप मेरे बच्चे को किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती करा देते , मैं ग़रीब कहाँ से दे पाऊंगी इलाज़ के इतने पैसे, मेरे पास तो रहने खाने के भी पैसे नहीं हैं"....महिला गिड़गिड़ाई ।

"माता जी , बस आप निश्चिंत रहें औऱ जाकर आराम करें , रात बहुत हो चुकी है ".....इतना कहकर प्रफुल्ल बाबू वहां से निकल अपने घर के अंदर प्रवेश कर गए ।

सुबह डॉक्टर बाबू बच्चे के तमाम रिपोर्ट के साथ फ़िर हाज़िर हुए और उसे एक दो इंजेक्शन तथा कुछ दवाइयां दीं ।

अपने दफ़्तर जाने से ठीक पहले प्रफुल्ल बाबू ने भी बीमार बच्चे के साथ साथ उस महिला का अच्छी तरह से ख़ैर मखदम लिया और सबको उन दोनों का बेहतर ख़याल रखने के लिए निर्देशित कर वहाँ से निकल गए । प्रफुल्ल बाबू एक निजी दूरसंचार कंपनी में बड़े ओहदे पर कार्यरत थे ।

डॉक्टर बाबू अब नियमित रूप से आकर उस बीमार बच्चे की जाँच करते औऱ साथ ही बेहतर ढंग से उसका इलाज़ भी ।

प्रफुल्ल बाबू भी सुबह शाम जब भी उनको समय मिलता उन दोनों की खोज ख़बर ले लेते ।

महिला जब भी उनको देखती रोते हुए उनके सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो जाती , हालांकि प्रफुल्ल बाबु उसको बार बार औऱ लगातार ये न करने के लिए कहते रहते ।

दिन बीतने के साथ साथ बच्चे का नियमित रूप से बेहतर इलाज़ होता रहा , साथ ही रहने खाने का भी भरपूर ख़याल रखा जाता ।

तक़रीबन एक महीने के बाद जब बच्चा पूरी तरह से तंदरुस्त हो गया तो महिला प्रफुल्ल बाबू के सामने जाकर बोली . ."साहब, मेरा बच्चा बिलकुल ठीक हो चुका है , हम अब वापस अपने गांव जाना चाहते हैं । आपने जो मेरे लिए किया उसके लिए मैं जीवन भर आपका औऱ आपके पिता कृष्णकांत जी का एहसानमंद रहूंगी" ।

जब वो महिला अपने बच्चे के साथ वहाँ से विदा होने लगी तो प्रफुल्ल बाबू ने कुछ रुपयों के साथ दोनों को नए कपड़े औऱ दो जोड़ी नए चप्पल उपहार स्वरूप दी औऱ साथ ही उसे एक चिट्ठी भी देते हुए कहा कि "इसे उन्हें ही दे दीजिएगा जिन्होंने आपको यहाँ भेजा था "।

महिला हाथ जोड़कर कृतज्ञता का भाव प्रकट करते हुए उन्हें लगातार अनगिनत दुआएं देती वहाँ से बढ़ चली ।

ठीक दूसरे ही दिन अपने गाँव पहुँच कृष्णकांत जी को वह चिट्ठी देते हुए महिला उनसे प्रफुल्ल जी की बहुत तारीफ़ करने लगी....“ बाबा , आपका बेटा तो देवता है देवता , कितना ख़याल रखा हमारा...ऐसा बेटा किस्मत वाले को नसीब होता है, ऊपरवाला उन्हें औऱ उनके समूचे परिवार को हमेशा सलामत रखे ।”

कृष्णकांत जी उस चिट्ठी को पढ़कर दंग रह गए...उसमें लिखा था, “ परम आदरणीय बाबू जी ,मैं आपको नहीं जानता औऱ न ही क़भी आपसे मिला हूँ लेकिन अब आपका बेटा इस पते पर नहीं रहता ... कुछ महीने पहले ही उसने ये मकान बेच दिया है । अब मैं यहाँ रहने लगा हूँ, पर मुझे भी आप अपना बेटा ही समझिए । बचपन से ही मैं अपने पिता से महरूम रहा हूँ , लेकिन मैंने जब आपका पत्र पढ़ा तो मुझें ऐसा लगा जैसे मेरे सगे बाप ने मुझें कुछ करने के लिए आदेश दिया है । आप कृपया इनसे कुछ मत कहिएगा। आपकी वजह से मुझे इस माता के द्वारा जितना आशीर्वाद और दुआएँ मिली हैं, उस उपकार के लिए मैं आपका ताउम्र ऋणी रहूँगा .. आपका अपना प्रफुल्ल शर्मा ।”

कुछ बेहद ख़ामोश लम्हों के बाद कृष्णकांत जी का सिर कुछ सोचकर ख़ुद ब ख़ुद उस अनजान पवित्र आत्मा के सम्मान में झुक गया......औऱ उनकी आंखें तो नम थीं ही !!
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परहित सरिस धर्म नहीं भाई...
परपीड़ा सम नहीं अधमाई...!!

गोस्वामी तुलसीदासजी.......

परोपकार से बड़ा कोई धर्म नही है......!!
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नीरज सिंह 'अजेय'
नीरज सिंह 'अजेय' 'हिन्दी साहित्यकार'


सोमवार, 29 मई 2023

आखिर कौन थे सम्राट पृथ्वीराज चौहान -श्री राम बहादुर राय भरौली बलिया उत्तर प्रदेश

आखिर कौन थे ?
सम्राट पृथ्वीराज चौहान

पूरा नाम :- पृथ्वीराज चौहान
अन्य नाम :- राय पिथौरा
माता/पिता :- राजा सोमेश्वर चौहान/कमलादेवी
पत्नी :- संयोगिता
जन्म :- 1149 ई.
राज्याभिषेक :- 1169 ई.
मृत्यु :- 1192 ई.
राजधानी :- दिल्ली, अजमेर
वंश :- चौहान (राजपूत)

आज की पीढ़ी इनकी वीर गाथाओं के बारे मे..
बहुत कम जानती है..!!
तो आइए जानते है.. #सम्राट #पृथ्वीराज #चौहान से जुडा इतिहास एवं रोचक तथ्य,,,

''(1) #पृथ्वीराज_चौहान ने 12 वर्ष कि उम्र मे बिना किसी हथियार के खूंखार जंगली शेर का जबड़ा फाड़
ड़ाला था ।

(2) #पृथ्वीराज_चौहान ने 16 वर्ष की आयु मे ही
महाबली नाहरराय को युद्ध मे हराकर माड़वकर पर विजय प्राप्त की थी।

(3) #पृथ्वीराज_चौहान ने तलवार के एक वार से जंगली हाथी का सिर धड़ से अलग कर दिया था ।

(4) महान सम्राट #पृथ्वीराज_चौहान कि तलवार का वजन 84 किलो था, और उसे एक हाथ से चलाते थे ..सुनने पर विश्वास नहीं हुआ होगा किंतु यह सत्य है..

(5) सम्राट #पृथ्वीराज_चौहान पशु-पक्षियों के साथ बाते करने की कला जानते थे।

(6) महान सम्राट #पृथ्वीराज_चौहान पुर्ण रूप से मर्द थे ।
अर्थात उनकी छाती पर #स्तन नहीं थे ।

(7) #पृथ्वीराज_चौहान 1166 ई. मे अजमेर की गद्दी पर बैठे और तीन वर्ष के बाद यानि 1169 मे दिल्ली के सिंहासन पर बैठकर पूरे हिन्दुस्तान पर राज किया।

(8) सम्राट #पृथ्वीराज_चौहान की तेरह पत्नियां थी।
इनमे संयोगिता सबसे प्रसिद्ध है..

(9) #पृथ्वीराज_चौहान ने मुहम्मद गौरी को 16 बार युद्ध मे हराकर जीवन दान दिया था..
और 16 बार कुरान की कसम का खिलवाई थी ।

(10) गौरी ने 17 वी बार मे चौहान को धौखे से बंदी बनाया और अपने देश ले जाकर चौहान की दोनो आँखें फोड दी थी ।
उसके बाद भी राजदरबार मे #पृथ्वीराज_चौहान ने अपना मस्तक नहीं झुकाया था।

(11) महमूद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाकर अनेकों प्रकार की पीड़ा दी थी और कई महीनों तक भूखा रखा था..
फिर भी सम्राट की मृत्यु न हुई थी ।

(12) सम्राट पृथ्वीराज चौहान की सबसे बड़ी विशेषता यह थी की...
जन्मसे शब्द भेदी बाण की कला ज्ञात थी।
जो की अयोध्या नरेश "राजा दशरथ" के बाद..
केवल उन्हीं में थी।

(13) #पृथ्वीराज_चौहान ने महमुद गौरी को उसी के भरे दरबार मे शब्द भेदी बाण से मारा था ।
गौरी को मारने के बाद भी वह दुश्मन के हाथो नहीं मरे..
अर्थात अपने मित्र चन्द्रबरदाई के हाथों मरे, दोनो ने एक दूसरे को कटार घोंप कर मार लिया.. क्योंकि और कोई विकल्प नहीं था ।

दुख होता है ये सोचकर कि ऐसे महान योद्धा का इतिहास और भूगोल ढंग से नहीं लिखा गया है।

राम बहादुर राय
भरौली, बलिया,उत्तरप्रदेश


रविवार, 28 मई 2023

रिजल्ट तो हमारे जमाने में आते थे- लव तिवारी

ये जमाना गुजर गया ।अब बच्चो के no 95% से भी ऊपर आने पर भी कुछ नही आता ओर उस जमाने के 36 % वाला भी आज की फौज को पढ़ा रहा है

रिजल्ट तो हमारे जमाने में आते थे, जब पूरे बोर्ड का रिजल्ट 17 ℅ हो, और उसमें भी आप ने वैतरणी तर ली हो (डिवीजन मायने नहीं, परसेंटेज कौन पूँछे) तो पूरे कुनबे का सीना चौड़ा हो जाता था।

दसवीं का बोर्ड...बचपन से ही इसके नाम से ऐसा डराया जाता था कि आधे तो वहाँ पहुँचने तक ही पढ़ाई से सन्यास ले लेते थे। जो हिम्मत करके पहुँचते, उनकी हिम्मत गुरुजन और परिजन पूरे साल ये कहकर बढ़ाते,"अब पता चलेगा बेटा, कितने होशियार हो, नवीं तक तो गधे भी पास हो जाते हैं" !!

रही-सही कसर हाईस्कूल में पंचवर्षीय योजना बना चुके साथी पूरी कर देते..." भाई, खाली पढ़ने से कुछ नहीं होगा, इसे पास करना हर किसी के लक में नहीं होता, हमें ही देख लो... 

और फिर , जब रिजल्ट का दिन आता। ऑनलाइन का जमाना तो था नहीं,सो एक दिन पहले ही शहर के दो- तीन हीरो (ये अक्सर दो पंच वर्षीय योजना वाले होते थे) अपनी हीरो स्प्लेंडर या यामहा में शहर चले जाते। फिर आधी रात को आवाज सुनाई देती..."रिजल्ट-रिजल्ट"

पूरा का पूरा मुहल्ला उन पर टूट पड़ता। रिजल्ट वाले #अखबार को कमर में खोंसकर उनमें से एक किसी ऊँची जगह पर चढ़ जाता। फिर वहीं से नम्बर पूछा जाता और रिजल्ट सुनाया जाता...पाँच हजार एक सौ तिरासी ...फेल, चौरासी..फेल, पिचासी..फेल, छियासी..सप्लीमेंट्री !!
कोई मुरव्वत नहीं..पूरे मुहल्ले के सामने बेइज्जती।

रिजल्ट दिखाने की फीस भी डिवीजन से तय होती थी,लेकिन फेल होने वालों के लिए ये सेवा पूर्णतया निशुल्क होती।

जो पास हो जाता, उसे ऊपर जाकर अपना नम्बर देखने की अनुमति होती। टोर्च की लाइट में प्रवेश-पत्र से मिलाकर नम्बर पक्का किया जाता, और फिर 10, 20 या 50 रुपये का पेमेंट कर पिता-पुत्र एवरेस्ट शिखर आरोहण करने के गर्व के साथ नीचे उतरते।

जिनका नम्बर अखबार में नहीं होता उनके परिजन अपने बच्चे को कुछ ऐसे ढाँढस बँधाते... अरे, कुम्भ का मेला जो क्या है, जो बारह साल में आएगा, अगले साल फिर दे देना एग्जाम...

पूरे मोहल्ले में रतजगा होता।चाय के दौर के साथ चर्चाएं चलती, अरे ... फलाने के लड़के ने तो पहली बार में ही ...
     
आजकल बच्चों के मार्क्स भी तो #फारेनहाइट में आते हैं।
99.2, 98.6, 98.8.......

और हमारे जमाने में मार्क्स #सेंटीग्रेड में आते थे....37.1, 38.5, 39

हाँ यदि किसी के मार्क्स 50 या उसके ऊपर आ जाते तो लोगों की खुसर -फुसर .....
नकल की होगी ,मेहनत से कहाँ इत्ते मार्क्स आते हैं।
वैसे भी इत्ता पढ़ते तो कभी देखा नहीं । (भले ही बच्चे ने रात रात जगकर आँखें फोड़ी हों)

सच में, रिजल्ट तो हमारे जमाने में ही आता था।
😅😅😅


शनिवार, 27 मई 2023

उठता लहंगा बढ़ती इज्जत- गरीबी मर्द के कपड़े उतारती है अमीरी औरत के- लव तिवारी

उठता लहंगा बढ़ती इज्जत ?
सन 1980 तक लड़कियाँ कालेज में साड़ी पहनती थी या फिर सलवार सूट।
इसके बाद साड़ी पूरी तरह गायब हुई और सलवार सूट के साथ जीन्स आ गया।
2005 के बाद सलवार सूट लगभग गायब हो गया और इसकी जगह Skin Tight काले सफेद #स्लैक्स आ गए, फिर 2010 तंक लगभग #पारदर्शी_स्लैक्स आ गए जिसमे #आंतरिक_वस्त्र पूरी तरह स्प्ष्ट दिखते हैं।
फिर सूट, जोकि पहले घुटने या जांघो के पास से 2 भाग मे कटा होता था, वो 2012 के बाद कमर से 2 भागों में बंट गया और
फिर 2015 के बाद यह सूट लगभग ऊपर नाभि के पास से 2 भागो मे बंट गया, जिससे कि लड़की या महिला के नितंब पूरी तरह स्प्ष्ट दिखाई पड़ते हैं और 2 पहिया गाड़ी चलाती या पीछे बैठी महिला अत्यंत विचित्र सी दिखाई देती है, मोटी जाँघे, दिखता पेट।

आश्चर्य की बात यह है कि यह पहनावा कॉलेज से लेकर 40 वर्ष या ऊपर उम्र की महिलाओ में अब भी दिख रहा है। बड़ी उम्र की महिलायें छोटी लड़कियों को अच्छा सिखाने की बजाए उनसे बराबरी की होड़ लगाने लगी है। नकलची महिलाए,

अब कुछ नया हो रहा 2018 मे, स्लैक्स ही कुछ Printed या रंग बिरंगा सा हो गया और सूट अब कमर तक आकर समाप्त हो गया यानि उभरे हुए नितंब अब आपके दर्शन हेतु प्रस्तुत है।

साथ ही कॉलेजी लड़कियों या बड़ी महिलाओ मे एक नया ट्रेंड और आ गया, स्लैक्स अब पिंडलियों तंक पहुच गया, कट गया है नीचे से
(पुरुषों की वेशभूषा में पिछले 40 वर्ष मे कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नही हुआ)

पहले पुरुष साधारण या कम कपड़े पहनते थे, नारी सौम्यता पूर्वक अधिक कपड़े पहनती थी, पर अब टीवी सीरियलों, फिल्मों की चपेट में आकर हिन्दू नारी के आधे कपड़े स्वयं को Modern बनने में उतर चुके हैं।
यूरोप द्वारा प्रचारित #नंगेपन के षडयंत्र की सबसे आसान शिकार, भारत की मॉडर्न महिलाए है, जो फैशन के नाम पर खुद को नंगा करने के प्रति वेहद गंभीर है, पर उन्हें यह ज्ञात नहीं कि वो जिसकी नकल कर इस रास्ते पर चल पड़ी है, उनको इस नंगापन के लिए विज्ञापनों में करोड़ो डॉलर मिलते है। उन्हें कपडे न पहनने के पैसे मिलते हैं।
यहाँ कुछ महिलाए सोचेंगी की हमे क्या पहनना है ये हम तय करेंगे कोई और नहीं, तो आप अपनी जगह बिलकुल सही हैं, लेकिन ज़रा सोचिये यदि आप ऐसे कपडे पहनती हैं जिसके कारण आप खुद को असहज महसूस करती हो, ऐसे दिखावे के कपडे पहनने से क्या फायदा?

कल्याण - नारी अंक, गीताप्रेस अवश्य पढ़ें।
यह पोस्ट केवल हमारी बहु, बेटियों, माताओं, बहनों को यूरोप द्वारा प्रचारित नंगेपन के षडयंत्र का शिकार बननें से रोकने के लिए है, यदि इस पोस्ट को आप अपनें बहनों, बेटियों से शेयर करें तो हो सकता है, हमारा आनें वाला समाज प्रगति की ओर तत्पर होवे।

और हां सुनो लडकियों/महिलाओं जो आपके शुभचिंतक हैं वही चाहते हैं कि आप मर्यादा मे सुशोभित और सुसज्जित रहें आप की तरफ कोई नजर उठाकर ना देखे वरना दुनिया तो नंगा ही देखना चाहती है।

Note-अगर कम कपड़े पहनना ही मॉडर्न होना है
तो जानवर इसमें आप से बहुत आगे हैं-





बुधवार, 17 मई 2023

बिहार और बागेश्वर धाम श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री साभार:-सर्वेश तिवारी श्रीमुख की कलम से


एक पच्चीस वर्ष का युवा कथावाचक बिहार जैसे राज्य में आता है और दूसरे ही दिन आठ से दस लाख की भीड़ उमड़ पड़ती है, तो यह सिद्ध होता कि अब भी इस देश की सबसे बड़ी शक्ति उसका धर्म है। मैं यह इसलिए भी कह रहा हूँ कि इसी बिहारभूमि पर किसी बड़े राजनेता की रैली में 50 हजार की भीड़ जुटाने के लिए द्वार द्वार पर गाड़ी भेजते और पैसे बांटते हम सब ने देखा है। वैसे समय में कहीं दूर से आये किसी युवक को देखने के लिए पूरा राज्य दौड़ पड़े, तो आश्चर्य होता है। मेरे लिए यही धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का सबसे बड़ा चमत्कार है।

वह दस लाख की भीड़ किसी एक जाति की भीड़ नहीं है, उसमें सभी हैं। बाभन-भुइंहार हैं, तो कोइरी कुर्मी भी... राजपूत हैं तो बनिया भी, यादव भी, हरिजन भी... यह वही बिहार है जहां हर वस्तु को जाति के चश्मे से देखने की ही परम्परा सी बन गयी है। उस टूटे हुए बिहार को एक युवक पहली बार में इतना बांध देता है, तो यह विश्वास दृढ़ होता है कि हमें बांधना असम्भव नहीं। राजनीति हमें कितना भी तोड़े, धर्म हमें जोड़ ही लेगा...
आयातित तर्कों के दम पर कितना भी बवंडर बतिया लें, पर यह सत्य है कि इस देश को केवल और केवल धर्म एक करता है। कश्मीर से कन्याकुमारी के मध्य हजार संस्कृतियां निवास करती हैं। भाषाएं अलग हैं, परंपराएं अलग हैं, विचार अलग हैं, दृष्टि अलग है, भौगोलिक स्थिति अलग है, परिस्थितियां अलग हैं, फिर भी हम एक राष्ट्र हैं तो केवल और केवल धर्म के कारण! धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उसी धर्म की डोर से सबको बांध रहे हैं।

कुछ लोग उनके चमत्कारी होने को लेकर उनकी आलोचना करते हैं। मैं अपनी कहूँ तो चमत्कारों पर मेरा अविश्वास नहीं। एक महाविपन्न परिवार से निकला व्यक्ति यदि युवा अवस्था में ही देश के सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल हो जाता है, तो इस चमत्कार पर पूरी श्रद्धा है मेरी...

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने समय के मुद्दों पर स्पष्ट बोलते हैं, यह उनकी शक्ति है। नवजागृत हिन्दू चेतना को अपने संतों से जिस बात का असंतोष था कि वे हमारे विषयों पर बोलते क्यों नहीं, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उस असन्तोष को शांत कर रहे हैं। यह कम सुखद नहीं...
कुछ लोग धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को रोकने के दावे कर रहे थे। मैं जानता हूँ, उन्हें ईश्वर रोके तो रोके, अब अन्य कोई नहीं रोक सकेगा... धीरेंद्र समय की मांग हैं। यह समय ही धीरेंद्र शास्त्री का है।
मैं स्पष्ट मानता हूँ कि यह भारत के पुनर्जागरण का कालखंड है, अब हर क्षेत्र से योद्धा नायक निकलेंगे। राजनीति, धर्म, अर्थ, विज्ञान, रक्षा... हर क्षेत्र नव-चन्द्रगुप्तों की आभा से जगमगायेगा। देखते जाइये...

साभार:-सर्वेश तिवारी श्रीमुख की कलम से

मंगलवार, 9 मई 2023

अविजित स्वाभिमान की पावन, वीर-कहानी अमर रहे। जय-जय राजस्थान तुम्हारी तेरा पानी अमर रहे। रचना श्री संजीव त्यागी ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश

अविजित स्वाभिमान की पावन,
वीर-कहानी अमर रहे।
जय-जय राजस्थान तुम्हारी,
तेरा पानी अमर रहे।

जिसकी टापों से अरिदल के,
बढ़े हौसले चूर हुए।
शूर-शिरोमणि का वह चेतक,
हय तूफानी अमर रहे।

जब कर से करवालें छूटीं,
रजपूती शर्मिंदा थी।
तब गौरव हित लड़ने वाला,
हर बलिदानी अमर रहे।

स्वामी के प्राणों की रक्षा,
शीश कटा कर जिसने की।
राजभक्ति का अमिट चिह्न वो,
झाला मानी अमर रहे।

किया निछावर पाई-पाई,
राष्ट्र-धर्म की रक्षा में।
वणिक-विभूषण महामना वह,
भामा दानी अमर रहे।

पति-व्रत के पालन में जिसने,
वन के अगणित कष्ट सहे।
कुल सिसोदिया की मर्यादा,
वह पटरानी अमर रहे।।

जिसका अतुल शौर्य हर्षित हो,
सदियाँ सदियों गाएँगी।
गिरि अरावली का प्रताप वह,
कुलाभिमानी अमर रहे।।

महाप्रतापी,महापराक्रमी महाराणा प्रताप की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

शत शत नमन, सादर वन्दन🙏🌹

-संजीव कुमार त्यागी