IANCON-2026; न्यूरो कॉन्फ्रेंस में बोले विशेषज्ञ
मांसपेशियों के लिए दवाओं का क्लिनिकल ट्रायल, जल्द मिलेगी
हेल्थ रिपोर्टर | जयपुर
डुशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी और एलजीएमडी से पीड़ित बच्चे आसानी से चल फिर सकेंगे। व्हील चेयर के सहारे नहीं रहना पड़ेगा। आने वाले दिनों में इन बीमारियों के इलाज की दवा बाजार में उपलब्ध हो सकेगी। यह जानकारी गुरुवार को मुंबई के डॉ. सतीश खादिलकर और पुणे से डॉ. सुधीर कोठारी ने इंडियन न्यूरोलॉजी एकेडमी की ओर से जेईसीसी में 33वीं न्यूरो कॉन्फ्रेंस में दी। देशभर के बड़े संस्थान निम्हांस में भी शोध कार्य चल रहा है।
डॉ. भावना शर्मा ने बताया कि 5 दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से 2 हजार से अधिक डॉक्टर शामिल हुए। गुरुवार को स्ट्रोक के लक्षण, दवा, जांच और इलाज की आधुनिक तकनीक पर विशेष सत्र में विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए। देश में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद और अनेक संस्थान जीन थेरेपी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे इलाज के खर्च में 70% तक कमी आने की उम्मीद है। एम्स और आईसीएमआर नई दिल्ली की ओर से मांसपेशियों की सूजन को कम करने के लिए वोरिनोस्टेट जैसी दवाओं का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है।







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