मंगलवार, 30 जनवरी 2018
बाल संस्कार श्लोको को नित्य प्रयोग कर जीवन सफल बनायें
मंगलवार, 16 जनवरी 2018
काल तक था मेरा जो अपना आज बेगाना क्यो है - लव तिवारी
मेरी हालत देखकर ये जमाना पागल क्यो हैं
जाने सब बातों को दिल फिर भी दीवाना क्यो है
रात गुजर जाये चाहत में वो अफ़साना क्यो है
मेरी मोहब्बत का मसीहा आज अंजाना क्यो है
१५- जनवरी- २०१८
गुरुवार, 11 जनवरी 2018
देव पुरुष पूज्य श्री देवरहा बाबा देवरिया उत्तर प्रदेश
बुधवार, 27 दिसंबर 2017
प्रतिभाओ को मत काटो आरक्षण की तलवार से - अज्ञात
प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से
जाट आन्दोलन से फैली , चारों ओर निराशा है.
महाराष्ट्र में प्रबल मराठा , चढ़ जाएंगे भाल पर..
प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से.
अपने ही घर के दीपक से ,अपना घर जल जाएगा.
आरक्षण वादी नेताओं का , सर्वस्व मिटाके जायेगा.,
प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से...
जो सवर्ण है पर गरीब हैं , उनका क्या अपराध है..
भूखा बच्चा जिस कुटिया में , लोरी खाकर पलता है..
प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से..
वह अधिकारी है जिसके घर , भूखी मुनिया सोती है.
जातिवाद के कारण , कितने लोग वेदना सहते हैं.
"प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से...||
सोमवार, 25 दिसंबर 2017
दिखावे की रश्में- मंगला सिंह युवराजपुर गाज़ीपुर उत्तर प्रदेश
घुटन में हर एक जिंदगी पल रही है
कहा थे चले हम कहा चल पड़े है
लिपटी कफन में ये जिंदी सी लाशें
जिधर देखिये बस चिता जल रही है
शहीदों की धरती बनी को अभागन
पावन धरा से विखेरें अमन को
वो रघुकुल की रीति कहा चल रही है
न यादो को उनके समेटे हुये हम
लगाने चले चिताओ के मेले
देखावे के रश्में हमे छल रही है
है सोने की लंका में रावण की सोहरत
आओ जरा फिर से सोचे विचारे
ये अपनी ही करनी हमे खल रही है
युवराजपुर ग़ाज़ीपुर
+91 9452756159
सोमवार, 11 दिसंबर 2017
जब भी रोना चरागो को बुझा कर रोना - ओसमान मीर
जब भी रोना चरागो को बुझा कर रोना
हाथ भी जाते हुए वो तो मिलाकर न गया-3
मैने चाहा जिसे सिने से लगा कर रोना
जब भी रोना..................
लोग पढ़ लेते है चेहरे पर लिखी तहरीरे- 3
कितना दुश्वार है लोगो से छुपा कर रोना
जब भी रोना..................
तेरे दीवाने का क्या हाल किया है गम ने-5
मुस्कुराते हुए लोगो मे भी जाकर रोना
जब भी रोना..............
Link -https://www.youtube.com/watch?v=JDJZwOF3cws&list=RDJDJZwOF3cws
मंगलवार, 28 नवंबर 2017
अहसास- लव तिवारी
सोमवार, 30 अक्टूबर 2017
धूप दीप नैवेद्य अपनाये अगरबत्ती है घातक
लेड जलने पर लेड आक्साइड बनाता है जो कि एक खतरनाक नीरो टॉक्सिक है हेवी मेटल भी जलने पर ऑक्साइड्स बनाते है
हर स्थान पर धूप, दीप , नैवेद्य का ही वर्णन है
इस्लाम मे ईस्वर की आराधना जीवंत स्वरूप में नही होती, परंतु हमारे यंहा होती है।
मुस्लिम लोग अगरबत्ती मज़ारों में जलाते है, उनके यंहा ईश्वर का मूर्त रूप नही पूजा जाता।
हम हमेशा अंधानुकरण ही करते है और अपने धर्म को कम आंकते है।
जब कि हमारे धर्म की हर एक बातें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार मानवमात्र के कल्याण के लिए ही बनी है।
अतः कृपया सामर्थ्य अनुसार स्वच्छ धूप का ही उपयोग करें...
(यह मैसेज जैसा प्राप्त हुआ है आगे फारवर्ड किया गया है )
गुरुवार, 26 अक्टूबर 2017
ब्राम्हणो की वंशावली - लव तिवारी
गुरुवार, 28 सितंबर 2017
ये जमी चाँद से बेहतर नजर आती है हमें- उमराव जान
ये जमी चाँद से बेहतर नजर आती है हमें
ये जमी चाँद ...............
दिन ढले यू तेरी आवाज़ बुलाती है हमें
ये जमी चाँद ...............
रात के पिछले पहर रोज जगाती है हमें
ये जमी .........
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें
बुधवार, 27 सितंबर 2017
इधर जिंदगी का जनाजा उठेगा - ग़ज़ल चंदनदास
आईना देख के बोले ये सवारने वाले
अब तो बे मौत मरेगे तेरे मेरे वाले
कह गए मेरी मैय्यत से गुजरने वाले
रास आयी न जवानी तुझे मरने वाले
इधर जिंदगी का जनाजा उठेगा
उधर जिंदगी उनकी दुल्हन बनेगी
कयामत से पहले कयामत है यारो
मेरे सामने मेरी दुनिया लूटेगी
जवानी पे मेरी सितम ढाने वालो
जरा सोच लो क्या कहेगा जमाना-2
इधर मेरे अरमा कफन ओड़ लगे
उधर उनकी हाथो में मेहदी लगेगी
इधर जिंदगी का....
वो पर्दे के पीछे में पर्दे के आगे
न वो आगे न में जाऊ पीछे- 2
वो आगे बढ़ेगा कुछ भी न होगा
में पीछे हटूँगा तो दुनिया हँसेगी
इधर जिंदगी......
अजल से मोहब्बत की दुश्मन है दुनिया
कहि दो दिलो को ये मिलने न देगी
इधर मेरी गर्दन पर ख़ंजर चलेगा
उधर उनकी माथे पर बिंदिया सजेगी
इधर जिंदगी......
अभी उनके हँसने के दिन है वो हस ले
अभी मेरे रोने के दिन है में रो लू
मगर उनको एक दिन रोना पड़ेगा
की जिस रोज मेरी मैय्यत उठेगी
इधर जिंदगी का जनाजा
बुधवार, 20 सितंबर 2017
चेहरे से पर्दा हटा दीजिए चाँद कहने को जी चाहता है- अज्ञात
चेहरे से पर्दा हटा दीजिए चाँद कहने को जी चाहता है
शायर हूँ मैं ग़ज़ल कहने को जी चाहता है
नज़र से नज़र क्या मिली की मदहोश हो गये
आपके आँखो को जाम कहने को जी चाहता है
हथेली पे लगाये है जो मेहदी उसका रंग फिका है
आपके प्यार के रंग मे ही रंग जाने को जी चाहता है
फिजाओ मे लहराये जब आप की रेशमी जुल्फे
बिखरे हुए केसुओ को सवारने को जी चाहता है
कब से सुनी पड़ी है मेरे दिल की ज़मीन
बन के घटा प्यार का बरस दीजिए भीग जाने को जी चाहता है
आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,/ बशीर बद्र
कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा
बेवक़्त अगर जाऊँगा, सब चौंक पड़ेंगे
इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा
जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा
ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं,
तुमने मेरा काँटों-भरा बिस्तर नहीं देखा
पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा
मंगलवार, 19 सितंबर 2017
गौत्र- गोत्र शब्द का अर्थ होता है वंश । कुल l
शनिवार, 16 सितंबर 2017
बुधवार, 13 सितंबर 2017
जमाना आज भी कहता है बेघर मुझको - लव तिवारी
शनिवार, 9 सितंबर 2017
देखो पापा मे तुमसे बड़ा हो गया -अज्ञात
मेरे कंधे पे खड़ा हो गया
मुझी से कहने लगा,
देखो पापा में तुमसे बड़ा हो गया
मैंने कहा, बेटा इस खूबसूरत
ग़लतफहमी में भले ही जकडे रहना
मगर मेरा हाथ पकडे रखना,
जिस दिन यह हाथ छूट जाएगा
बेटा तेरा रंगीन सपना भी टूट जाएगा,
दुनिया वास्तव में उतनी हसीन नही है
देख तेरे पांव तले अभी जमीं नही है,
में तो बाप हूँ बेटा बहुत खुश हो जाऊंगा
जिस दिन तू वास्तव में मुझसे बड़ा हो जाएगा
मगर बेटे कंधे पे नही...
जब तू जमीन पे खड़ा हो जाएगा!!
शुक्रवार, 8 सितंबर 2017
मातृ देवो भवः महर्षि वेदव्यास
गर्भधारणपोषणात् ।
अतो हि त्रिषु लोकेषु
नास्ति मातृसमो गुरुः॥
नास्ति विष्णुसमः प्रभुः।
नास्ति शम्भुसमः पूज्यो
नास्ति मातृसमो गुरुः॥
व्रतं त्रैलोक्यविश्रुतम्।
तपो नाशनात् तुल्यं
नास्ति मातृसमो गुरुः॥
नास्ति पुत्रसमः प्रियः।
नास्ति भगिनीसमा मान्या
नास्ति मातृसमो गुरुः॥
न दानं कन्यया समम्।
न भ्रातृसदृशो बन्धुः
न च मातृसमो गुरुः ॥
दलेषु तुलसीदलम्।
वर्णेषु ब्राह्मणः श्रेष्ठो
गुरुर्माता गुरुष्वपि ॥
भार्यामाश्रित्य जायते।
पूर्वभावाश्रया माता
तेन सैव गुरुः परः ॥
दृष्ट्वा पुत्रस्तु धर्मवित्।
प्रणम्य मातरं पश्चात्
प्रणमेत् पितरं गुरुम् ॥
दयार्द्रहृदया शिवा ।
देवी त्रिभुवनश्रेष्ठा
निर्दोषा सर्वदुःखहा॥
दया शान्तिः क्षमा धृतिः ।
स्वाहा स्वधा च गौरी च
पद्मा च विजया जया ॥
मातुरेवैकविंशतिम् ।
शृणुयाच्छ्रावयेन्मर्त्यः
सर्वदुःखाद् विमुच्यते ॥
दृष्ट्वा मातरमीश्वरीम्।
यमानन्दं लभेन्मर्त्यः
स किं वाचोपपद्यते ॥
मातृस्तोत्रं महागुणम्।
पराशरमुखात् पूर्वम्
अश्रौषं मातृसंस्तवम्॥
व्याधः परमधर्मवित्।
लेभे सर्वज्ञतां या तु
साध्यते न तपस्विभिः॥
भक्तिः कार्या तु मातरि।
पितर्यपीति चोक्तं वै
पित्रा शक्तिसुतेन मे ॥


























