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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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गुरुवार, 22 जुलाई 2021

अंबेडकर को लेकर बहुत से मिथक हैं जिन्हें सच माना जाता है।- अज्ञात

अंबेडकर को लेकर बहुत से मिथक हैं जिन्हें सच माना जाता है। कल एंड टीवी पर शुरू होने वाले अंबेडकर पर आधारित शो का टीज़र मित्र ने भेजा। कल उस मित्र से इस संदर्भ में बात हो रही थी तो सोचा क्यों न उन मिथकों और उनकी सच्चाई पर एक सार्वजनिक पोस्ट की जाए। आइए जानते हैं क्या हैं वो मिथक और क्या है सच्चाई-

●मिथक- अंबेडकर बहुत मेधावी थे।

सच्चाई- अंबेडकर ने अपनी सारी शैक्षणिक डिग्रियाँ तीसरी श्रेणी में पास की।

●मिथक- अंबेडकर बहुत गरीब थे।

सच्चाई- जिस ज़माने में लोग फोटो तक नहीं खींचा पाते थे उस ज़माने में अंबेडकर की बचपन की बहुत सी फोटो हैं वह भी कोट पैंट में!

●मिथक- अंबेडकर ने शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिया।

सच्चाई- अंबेडकर के पिता जी ख़ुद उस ज़माने में आर्मी में सूबेदार मेजर थे जो यह बताता है कि उस समय पढ़ने का अधिकार शूद्रों के पास था।

●मिथक- अंबेडकर को पढ़ने नहीं दिया गया।

सच्चाई- उस ज़माने में अंबेडकर को गुजरात बढ़ोदरा के क्षत्रिय राजा सीयाजी गायकवाड़ ने स्कॉलरशिप दी और विदेश पढ़ने तक भेजा और ब्राह्मण गुरु जी ने अपना नाम अंबेडकर भी दिया।

●मिथक- अंबेडकर ने नारियों को पढ़ने का अधिकार दिया।

सच्चाई- अंबेडकर के समय ही 20 पढ़ी लिखी औरतों ने संविधान लिखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया!

●मिथक- अंबेडकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।

सच्चाई- अंबेडकर ने सदैव अंग्रेजों का साथ दिया।भारत छोड़ो आंदोलन की जम कर खिलाफत की। अंग्रेजों को पत्र लिखकर बोला कि आप और दिन तक देश में राज करिए। उन्होंने जीवन भर हर जगह आजादी की लड़ाई का विरोध किया।

●मिथक- अम्बेडकर बड़े शक्तिशाली थे।

सच्चाई- 1946 के चुनाव में पूरे भारत भर में अंबेडकर की पार्टी की जमानत जप्त हुई थी।

●मिथक- अंबेडकर ने अकेले आरक्षण दिया।

सच्चाई- आरक्षण संविधान सभा ने दिया जिसमें कुल 389 लोग थे।अंबेडकर का उसमें सिर्फ एक वोट था। आरक्षण सब के वोट से दिया गया था।

●मिथक- अंबेडकर राष्ट्रवादी थे।

सच्चाई- 1931 में गोलमेज सम्मेलन में गाँधी जी के भारत के टुकड़े करने की बात कर दलितों के लिए अलग दलितस्तान की माँग अंबेडकर ने की थी।

●मिथक- अंबेडकर ने भारत का संविधान लिखा।

सच्चाई- जो संविधान अंग्रेजों के 1935 के मैग्नाकार्टा से लिया गया हो और विश्व के 12 देशों से चुराया गया है। उसे आप मौलिक संविधान कैसे कह सकते हैं? अभी भी सोसायटी एक्ट में 1860 लिखा जाता है।

●मिथक- आरक्षण को लेकर संविधान सभा के सभी सदस्य सहमत थे।

सच्चाई- इसी आरक्षण को लेकर सरदार पटेल से अंबेडकर की कहा सुनी हो गई थी। पटेल संविधान सभा की मीटिंग छोड़कर बाहर चले गये थे, बाद में नेहरू के कहने पर पटेल वापस आये थे।

सरदार पटेल ने कहा कि जिस भारत को अखण्ड भारत बनाने के लिए भारतीय देशी राजाओं, महराजाओं, रियासतदारों, तालुकेदारों ने अपनी 546 रियासतों को भारत में विलय कर दिया जिसमें 513 रियासतें क्षत्रिय राजाओं की थी। इस आरक्षण के विष से भारत भविष्य में खण्डित होने के कगार पर पहुँच जाएगा और आज हम वैसा होते देख भी रहे हैं।

●मिथक- अंबेडकर स्वेदशी विचारधारा के थे।

सच्चाई- देश के सभी नेताओं का तत्कालीन पहनावा भारतीय पोशाक धोती -कुर्ता, पैजामा-कुर्ता, सदरी व टोपी,पगड़ी, साफा, आदि हुआ करता था। गाँधी जी ने विदेशी पहनावा व वस्तुओं की होली जलवाई थी। यद्यपि नेहरू, गाँधी व अन्य नेता विदेशी विश्वविद्यालय व विदेशों में रहे भी थे फिर भी स्वदेशी आंदोलन से जुड़े रहे। वहीं अंबेडकर की कोई भी तस्वीर भारतीय पहनावे में देखने को नहीं मिलती है। अंबेडकर अंग्रेजियत के हिमायती थे।

नोट- मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाना नहीं है बल्कि सच्चाई बयां करने की कोशिश करना है।तथ्यों की जानकारी आप स्वयं भी प्राप्त कर सकते हैं।






शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

भयानक व लाइलाज़ बीमारी मोटर न्यूरॉन डिजीज एवं मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी - लव तिवारी

Motor Neurone Disease
स्टेफेन हॉकिंग्स ( फिजिक्स वैज्ञानिक) ऐसा नाम जो एक भयानक बीमारी मोटर न्यूरॉन डिसीज़ से प्रभावित थे। आज इसी तरह के बीमारी से ग्रसित एक छोटी बच्ची जो जिंदगी और मौत के बीच मे सांसे ले रही है उसके परिजनों से मिलना हुआ। बच्ची ने पिछले 14 दिनों से अन्न जल त्याग रखा है।

मानसी वर्मा
उम्र- 8 वर्ष
माता- श्री मति रिंकी वर्मा
पिता- श्री सन्नी वर्मा
वर्तमान पता- मुक्तिपुरा मरकिंगंज ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश
स्थाई पता - ग्राम रुकुनदिनपुर पोस्ट नोनहरा ग़ाज़ीपुर

Motor Neurone Disease  में डॉक्टरों और इंटरनेट के द्वारा प्राप्त जानकारियो से यह पता चलता है कि इस बीमारी में नसे सुख जाती है जिससे ब्लड का संचार शरीर मे न होने के कारण मनुष्य कुछ ही वर्ष में मरणासन अवस्था को प्राप्त कर लेता है। सही मायने में ये कहिये की इस जैसी खतरनाक बीमारियों का उपचार अभी तक मेडिकल साइंस के पास नही है लेकिन विदेशों में इस तरह के भयानक बीमारी पर शोध किये जा रहे है। 

इस तरह की एक और भयानक बीमारी जिसका नाम है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी है, इस बिमारी के भी लगभग 9 प्रकार है जिसमे DMD Duchene Muscular Dystrophy एवं LGMD Limb Gard Muscular Dystrophy के मरीज ज्यादा संख्या में है। इंटरनेट और पिछले कई वर्षों तक इस बीमारी से ग्रसित होने के कारण इस बीमारी के प्रकार और उसकी कुछ जानकारी हमें भी ज्ञात है। जैसा कि एक आप सब ने सुना होगा कि एक छोटी बच्ची को सोशल मीडिया कंपेन से इकट्ठा करके 16.5 करोड़ की दवा के माध्यम से उपचार हुआ है और वो पहले से बेहतर है। हमें ये आशा है  कि भविष्य हमारे लिए एक बेहतर इलाज के साथ सुखद परिणाम वाला होगा।

भारत या अन्य कई देशों के पास इन जैसे खतरनाक बीमारियों से निपटने के कोई उपाय नही है। और रोगी के परिजन कुछ लुटेरों डॉक्टरों के झांसे में आ कर लाखों रुपये खर्च कर देते है। पैसा खर्च के साथ अगर रोगी को आराम मिले तो पैसे का सदुपयोग समझ मे आता है। 

बीमारी से प्रभावित रोगी के परिजन के एक सवाल ने मुझे इस पोस्ट को लिखने पर मजबूर कर दिया। उसने मुझसे पूछा कि कोई ऊपरी चक्कर तो नही है। परिजनों को फिर से  यह बात समझा रहा हूँ कि यह एक भयानक बीमारी है औऱ फर्जी डॉक्टरों के साथ आप लोगों झाड़ फूक टोना ऊपरी चक्कर के चक्कर मे आकर अपने पैसे का दुरुपयोग न करें।

भारतीय प्राइवेट लुटेरे डॉक्टर के सम्बंध में भी एक बात कहूंगा। वो अच्छी तरह से जानते है कि इस तरह के बड़े बीमारी का उपचार उसके पास या किसी के पास नही फिर भी वो आप को मूर्ख बनाकर पैसा ऐठते है। कोरोना काल मे आप सभी ने प्राइवेट हॉस्पिटल और डॉक्टरों के आतंक का रूप रेखा देख चुके है।।

परिजन क्या करें।- हर परिजन अपने बच्चे को बचाने का अंत समय तक प्रयास करता है। लेकिन प्रयास का परिणाम अगर सही न हो तो प्रयास करना मेरी नजर में सही नही है। रोगी के परिजनों को यह सुझाव है भारत के बड़े सरकारी अस्पतालों के विशेषज्ञ के सम्पर्क में आप रह सकते है जैसे ऐम्म्स दिल्ली, नीमांस बेंगलुरु, सी एम सी वेल्लोर, कोई कि बीमारी के संभावित कोई भी जानकारी और उनके उपचार के सम्बंध की जनकारी आपको यही से पता लग सकती है।।






बुधवार, 14 जुलाई 2021

हमरी अटरिया पे आजा रे सावरिया देखा देखी बलम होई जाय रे- कुमार सत्यम जी

हम तुम भोले सईया जग है जुलमी
प्रीत को पाप कहते अधर्मी- 2
जग से न कहियो ये बाता बस की
जग सुनिहे तो जुलम हो ई जाय रे

हमरी अटरिया पे आजा रे सावरिया-4
देखा देखी बलम होई जाय रे।
लोग से न कहियो ये बाता बस की
जग सुनिहे तो जुलम हो ई जाय रे।
हमरी अटरिया पे आजा रे सावरिया-4

निस दिन मैं करु तेरी ही पूजा
नयंनो में नही आये कोई दूजा
सरगम,.....
सैया मोरे......
निस दिन मैं करु तेरी ही पूजा
नयंनो में नही आये कोई दूजा
मानो कसम अगर झुठ बोले हम
चढ़ती जवानी भस्म होई जाय रे

जब तक जवानी तब तक जमाना
चाहे जिसे जी भर के सता लो
सरगम,.....
सैया मोरे......
जब तक जवानी तब तक जमाना
चाहे जिसे जी भर के सता लो
याद रखियो तब कोई न चाहे
जब ये जवानी खत्म हो जाये रे
मोरे अंगनवा में आजा रे सजनवा देखा देखी बलम होई जाय रे।



सोमवार, 5 जुलाई 2021

अब जरूर होगा कोई और दूसरा निगाह में तभी तो आयी कयामत इस हँसते खेलते परिवार में।- लव तिवारी

अब जरूर होगा कोई और दूसरा निगाह में
तभी तो आयी कयामत इस हँसते खेलते परिवार में।।

रिश्ता बनाना अब देखो मज़ाक बन कर रह गया ।
जज़्बात और जीवन की खुशियां खाक बन बन कर गया ।

क्या है षडयंत्र कौन होगा अब अगला शिकारी है।
किस पर होगी अब ये अगली आफत की बम बारी है।।

भगवान तेरा नही मगर ख़ुदा का तो वफादार है।
इस बात वो नही समझेगा जो तेरा कर्ज़दार है।।

इस बिपदा को जो झेला वो दर्द को समझ जायेगा।
उसको बात नही समझ आएगी जो तेरा ही परछाई है।।

रचना - लव तिवारी
05- जुलाई- 2021






शुक्रवार, 25 जून 2021

अनपढों के साथ जिनकी कट गई हो जिंदगी। वो पढ़ो को क्या समझेंगे बात में महान कौन।- लव तिवारी

मन व्यथीत है आज क्यों कल सुनेगा मेरी कौन।
किसकी खता थी यहाँ, और भरेगा जुर्माना कौन।।

अपनों की पहचान में न काम आई डिग्रियां।
मेरे घर को बर्बाद कर रहा, मैं रहा परेशान मौन।।

गैरो पर खर्च करके घर से हिसाब की चाह है।
हकीकत सबके सामने है और बना अंजान कौन।।

सबको पता है अपनी गलती फिर है नदान सब।
गर्दन पर तलवार है तो अब रहा वफादार कौन।।

जो किया वो सामने है फिर नही सबक जीने की।
जिंदगी किसकी रही, और गया शमशान कौन।।

अनपढों के साथ जिनकी कट गई हो जिंदगी।
वो पढ़ो को क्या समझेंगे बात में महान कौन।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- २६- जून-२०२१




मंगलवार, 15 जून 2021

आदत फिर से न बिगड़े अब मेरी। वादों का कोई पक्का नही लगता- लव तिवारी

हर कोई अच्छा नही लगता।
दिल अब बच्चा नही लगता।।

जो थे उनको हम रास नही आये।
अब कोई मुझे सच्चा नही लगता।।

आदत फिर से न बिगड़े अब मेरी।
वादों का कोई पक्का नही लगता।।

मेरी मानो तुम भी सुधर जाओ अब।
इस उम्र में ये सब अच्छा नही लगता।।

बात उसको अगर जो मालूम हो जाये।
मेरी जिंदगी का वो हिस्सा नही लगता।।

रचना- लव तिवारी





बुधवार, 9 जून 2021

ये वायरस मेंरा क़ीमती खजाना ले गया। मौत के साथ अपनो का ठिकाना ले गया।- लव तिवारी

ये वायरस मेंरा क़ीमती खजाना ले गया।
मौत के साथ अपनो का ठिकाना ले गया।।

गली रास्ते और सड़के अब भी है सुनसान।
वो भीड़ भरी जिंदगी का ज़माना ले गया।।

गरीब को अन्न नही, भूख की तड़प को देखों।
उसके बसर के संसाधनों का सहारा ले गया।।

जन्दगी सबको थी प्यारी कुछ थे बस बेपरवाह।
ऐसे मूर्खो के कारण सब कुछ गवाना पड़ गया।।

कुछ के गुनाह तो नही थे माफ़ी के लायक।
कुछ बेगुनाहो को भी इस दौर में जनाजा ले गया।।


रचना- लव तिवारी
दिनांक- ०९-जून-२०२१







बुधवार, 2 जून 2021

शरीर और जीवन से साइकिल की वफादारी थी। आज कल की दुनिया से प्यारी वो जिंदगानी थी।- लव तिवारी

रोज सुबह सायकिल से स्कूल जाया करते थे।
और पैडिल के सहारे रेस लगाया करते थे।।

सफर अपना देर लेकिन दुर्घटनाओं से परे था।
जेब खर्च के साथ सायकिल का खर्च भी खरे था।।

शरीर और जीवन से साइकिल की वफादारी थी।
आज कल की दुनिया से प्यारी वो जिंदगानी थी।।

मौज मस्ती में के साथ हम खूब सायकिल चलाया करते थे।
कभी दोस्तों के तो कभी पापा के संग गांव जाया करते थे

बड़ी गाड़ियों में बैठ कर उस दौर का अनुभव करते है।
देख जमाने की रफ़्तार अब स्वपन में साइकिल से चलते है।

रचना- लव तिवारी 
युवराजपुर ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश



रविवार, 23 मई 2021

प्रभु ने जो धन दिया है उसपर न अभिमान करो हो सके तो कुछ रुपयों का गरीबों में दान करो। - लव तिवारी

प्रभु ने जो धन दिया है उस पर न अभिमान करो।
हो सके तो कुछ रुपयों का गरीबों में दान करो।।

झूठे है रिश्ते नाते, बस झूठे है सब लोग यहाँ।
इनके चक्कर में न तुम जीवन को बर्बाद करो।।

मौत एक है निश्चित घटना, ऐसे हो या महामारी से
पुत्र मोह में पाप कमाई को न अपने नाम करो।।

क्या लेकर आये थे जग में क्या लेकर तुम जाओगे।
ऐसे बात को ध्यान में रखकर प्रभु भजन का काम करो।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक - २३ मई २०२१







शनिवार, 22 मई 2021

नौकरी के नाम पर तुमने युवाओं को छला यहाँ। गौतम अडानी अमीर होकर एशिया के दहाई में- लव तिवारी

सब अच्छे चले गये इस कोरोना की महामारी में।
एक तू ही रोता दिख रहा राजनीति के परछाई से।

मानव जन भी मूर्ख होकर बना गया शमशान यहाँ।
देते तुमको वोट भी इस विपत्ति और तन्हाई में।।

नौकरी के नाम पर तुमने युवाओं को छला यहाँ।
गौतम अडानी अमीर हो गये एशिया के दहाई में।

हल चलाकर पेट काटकर भेजता पैसा जो बच्चों को।
उसके आस को तोड़ा तुमने मर गया जो रुसवाई में।।

ऐसा नही की तुम्ही गन्दे और सब दूध के धुले यहाँ।
बड़े उम्मीद से वोट दिया था इस शारिरिक परेशानी में।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 22 मई 2021





सोमवार, 17 मई 2021

इंसान को अब भी फिक्र नही है अपनो सासों की। जो हवा के माध्यम से सिलेंडरों में बिक रहा है।- लव तिवारी

सबकी नादानी के दर्दनाक अंजाम की बदौलत।
लाशों के ढेर पर ये शमशान दिख रहा है।।

इंसान को अब भी फिक्र नही है अपनो सासों की।
जो हवा के माध्यम से सिलेंडरों में बिक रहा है।।

जिंदगी सबको है प्यारी मौत से किसी का वास्ता नही।
फिर भी देखिये अवाम अपनी हस्ती से मिट रहा है।।

नशे में मौत के दर्दनाक हालात उन्हें क्या मालूम।
जिनका वजूद जो बस यहाँ शराबों में बिक रहा है।।

छोटे बच्चों के सिर से उठा गया माँ बाप का साया।
इनके जीवन का दीया देखिये कैसे बुझ रहा हैं।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- १७ मई २०२१


शुक्रवार, 7 मई 2021

मोदी योगी क्या करेंगे हम भी भरष्टाचारी है। आपदा एवं विप्पति में भी करते कालाबाजारी है।।- लव तिवारी

मोदी योगी क्या करेंगे
हम भी भरष्टाचारी है।
आपदा एवं विप्पति में भी
करते कालाबाजारी है।।

पैसे के इस भुख को देखो।
इंसानियत और इंसान कहा
गरीबों के अन्न निगलकर
देखों करते कोटादारी है।

राजनीतिक बस नही है गंदी
गन्दे है आवाम यहाँ
इस महामारी में भी
हम सब अत्याचारी है।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 07- मई-2021

सोमवार, 3 मई 2021

मरीज के साथ, बैद्य भी हम है फिर भी कहा हम सुधर रहे है।- लव तिवारी

धर्म के आंधी में बह रहे है।
कुछ पैसे के लिए मर रहे है।।

नेताओं को कभी न दिक्कत।
जनता आपस मे लड़ रहे है।

कोरोना के आतंक को देखकर।
लोग कुंभ और रोजा कर रहे है।

सबको पता है अपनी सुरक्षा।
लोग घरों में कहा रह रहे है।।

मरीज के साथ, बैद्य भी हम है
फिर भी कहा हम सुधर रहे है।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 04- मई- 2021






मंगलवार, 23 मार्च 2021

कहीं आप रो पड़ी तो लोग कहेंगे कि भगत सिंह की माँ रो रही है- भगत सिंह

"लहू देकर तिरंगे की बुलंदी को संवारा है, 
फरिश्ते तुम वतन के हो, तुम्हे सजदा हमारा है"

" लाश लेने आप मत आना कुलबीर को भेज देना,
कहीं आप रो पड़ी तो लोग कहेंगे कि भगत सिंह की माँ रो रही है"

जनमानस के ह्रदय में इंकलाब की गूंज को पहुचाने वाले देश के अमर वीर सपूतों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनके शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि 🙏

लोग कहते है कि आजादी बापू ने दिलाई है। अगर ऐसी बात होती तो आज़ादी बहुत पहले मिल गई होती। और अगर आजादी पहले मिल गई होती तो भगत सिंह सुखदेव राजगुरु और तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा जैसे विचारो पर  चल कर भारत माँ को आजादी दिलाने वाले महान क्रांतिकारी सुभाष चन्द्र बोस जैसे लोगो को बलिदान नही देना पड़ता।।

इतने परिश्रम के बाद लोगो में खुलकर दोष भरे पड़े है। आजाद भारत के बाद भी हम कई तरह की बुराइयों से लिप्त है।

भ्र्ष्टाचार
चोरी और बलात्कार
साम्प्रदायिकता
जातीयता
राजनैतिक दलों की समस्या
संस्कृतित बिभिन्नता
प्रांतीय बिभिन्नता

आजादी की लड़ाई हम सब ने एक होकर लड़ी थी और जैसे आजादी मिली हम सब अनेको बुराइयो से ग्रस्त होकर अपने देश अपने समाज और खुद अपना नुकसान कर रहे है।

शहीद दिवस- 23 मार्च 1931
लेखक- लव तिवारी





जीवन है तो बाधाएँ तो रहेंगी ही ::--प्रवीण तिवारी पेड़ बाबा

जीवन है तो बाधाएँ तो रहेंगी ही ::--
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जीवन में बाधाओं का हर व्यक्ति सामना करता है । बाधाएँ हमारी राह में आने वाली वो रुकावटें हैं , जो हमें आगे नहीं बढ़ने देतीं । बाधाओं का रोना रोने वालों की कमी नहीं , पर वे भूल जाते हैं कि यदि जीवन है तो बाधाएँ आएँगी ही , ये तो प्रकृति का नियम है । जितनी बड़ी बाधा होती है , उसे दूर करने के लिए उससे अधिक कड़ा संघर्ष करना पड़ता है । बाधाएँ समयानुसार आती जरूर हैं , लेकिन हम इतनी आशंकाओं से भरे रहते हैं कि समय से पहले ही ये बाधाएँ हमारी सोच पर हावी हो जाती हैं । यदि हम इनसे घबराने लगते हैं तो हमारी निर्णय लेने की शक्ति प्रभावित हो जाती है और हम गलत निर्णय लेने लगते हैं ।
यदि व्यक्ति सकारात्मक सोच वाला है तो बाधाएँ सड़क पर औंधे मुँह लेटे स्पीड ब्रेकर से अधिक कुछ नहीं होतीं , जिन्हें थोड़ा सँभलकर आसानी से पार किया जा सकता है । मुसीबतें , रुकावटें , समस्याएँ , असफलताएँ बाधाओं के रूप में सामने आती हैं जिनसे हमें जूझना पड़ता है, लेकिन यदि पहले से ही इन सभी बाधाओं को दिमाग में , अपनी सोच में जगह दे दी गई तो फिर इनका समाधान निकालने के लिए सोच कम पड़ जाएगी । इसलिए जब जिस तरह की बाधाएँ सामने आएँ , उसी समय पर्याप्त सोच-समझ के साथ इनका सामना करना चाहिए ।



शनिवार, 13 मार्च 2021

दरोगा जी ने गुमशुदगा मासूम को उसके परिजनों से मिलाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया।

मासूम को बुलेट पर बैठाकर बनारस की गलियों की खाक छानता रहा ये दारोगा, जानिए क्या है पूरा मामला :

महाशिवरात्रि के दिन वाराणसी पुलिस के दो अलग-अलग चेहरे देखने को मिलें। एक तरफ दशाश्वमेध इलाके में सड़क किनारे पूजा सामाग्री बेच रही महिला के साथ पुलिसवाले की बदसलूकी ने जहां महकमे की जगहंसाई की तो वहीं दूसरी ओर एक ऐसा भी वर्दीवाला था जिसने गुमशुदगा मासूम को उसके परिजनों से मिलाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया। अंजान नहीं बल्कि अपने बच्चे की तरह मासूम को अपनी बुलेट बैठाकर पूरे चौबीस घंटे तक बनारस की गलियों की खाक छानता रहा। कोशिश तब तक जारी थी, जब तक परिजनों से मुलाकात नहीं हो पाई।

दारोगा की कोशिशों से मां-बाप से मिला मुजफ्फर :

पूरी कहानी है कोतवाली के मैदागिन इलाके की। शाम के वक्त सड़क पर ट्रैफिक पूरे शबाब पर था। पुलिस महकमा महाशिवरात्रि पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए गश्त पर थी। तभी गायघाट चौकी प्रभारी अमित शुक्ला की नजर छह साल के मासूम मुजफ्फर पर पड़ी। सड़क किनारे रोता हुआ मासूम सिर्फ अपना नाम बता पा रहा था। मौके पर मौजूद दारोगा ने काफी देर तक उसके परिजनों को ढूंढने की कोशिश की। वायरलेस के जरिए सूचना भी प्रसारित करवाया। लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

बुलेट पर बैठाया और निकल पड़ा गलियों में :

कामयाबी ना मिलते देख दारोगा ने मासूम को अपनी बुलेट पर बैठाया और शहर की सड़कों पर निकल पड़ा। इस दौरान उसने रोते हुए मुजफ्फर को रबड़ी ख़िलाई और खिलौना दिलाया तब कहीं जाकर वह शांत हुआ। घर से बिछड़ने के गम में बालक अपना पता सिर्फ पांडेयपुर बता पा रहा था।

दारोगा ने आधी रात को बुलेट पांडेयपुर की ओर मोड ली। काफी खोजबीन के बाद मासूम के बताए एक चाय वाले के पास पहुंचा। तब लोगों ने बालक को पहचानकर उसके घर का पता बताया। 6 वर्षीय मुजफ्फर अपने घर का इकलौता संतान है।

दारोगा ने मां, बाप और दादा को घर के इकलौते बालक को सौंपा तो परिजनों के आंखों से आंसू छलक उठे। परिजनों के मुताबिक मुजफ्फर टयूशन पढ़ने निकला था और भटककर मैदागिन आ गया था।
हम वाराणसी के लोगों की दायित्व है कि ऐसे जिम्मेदार पुलिसकर्मी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समाज का भला करना चाहिए
दिल से धन्यवाद करता हूं आपको
जय हिंद




शुक्रवार, 12 मार्च 2021

हमारे देश के महान वैज्ञानिक मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के इलाज के लिए दूसरों देशों पर निर्भर नहीं रह सकते- लव तिवारी

Subject :: Muscular dystrophy

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक अनुवांशिक बीमारी है , परंतु आनुवंशिक करण ना होने पर भी हो सकती है ,

एक परिवार में दो तीन या चार पीड़ित भी हो सकते हैं मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से बच्चे और युवा दोनों पीड़ित है , बच्चों में यह बीमारी बचपन में 2-3 या 5 साल से और युवाओं में 15 - 16 या 20 वर्ष की उम्र में शुरू होती है और बहुत तेजी से पूरे शरीर की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं । पीड़ित इस प्रकार दूसरों पर निर्भर हो जाता है कि वह अपने आप हिल - डुल भी नहीं सकता , खाना नहीं खा सकता , पानी नहीं पी सकता , मच्छर नहीं उड़ा सकता , शरीर में कहीं भी खुजली हो तो खुजा नहीं सकता , रोगी बहुत कम आयु में ही बिस्तर पर पहुंच जाता है और कुछ ही समय में पीड़ित की मृत्यु हो जाती है , अगर बीमारी बचपन में शुरू होती है तो पीड़ित मुश्किल से 10 - 12 या 18 साल तक जी पाता है , और अगर युवावस्था में शुरू हो तो पीड़ित 32-35 या 40 साल तक जी सकता है ,

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के शुरुआती लक्षण निम्न हैं ।।

शुरुआत में पीड़ित एड़ीयों पर चलना शुरू करता है , चलते चलते गिर जाना , घुटनों पर हाथ रखकर उठना , पेट का अत्यधिक आगे निकल आना , रीढ़ की हड्डी का मुड़ना , हाथ - पैर लगातार पतले होते जाना , लगातार तीव्र गति से पूरे शरीर की मांसपेशियों का कमजोर होना , सांस लेने में परेशानी होना , बीमारी से पीड़ित व्यक्ति जिंदा लाश के समान होता है ।

अपने आप सभी सामान्य कार्य जैसे- शौचालय , पेशाब , स्नान , कपड़े पहनना , लेटना , उठना - बैठना , आदि भी करने में सक्षम नहीं होता है , मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ित सभी कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर होता है ,

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी कई प्रकार की होती है , कुछ मुख्य प्रकार निम्न हैं ,

DMD - Duchene Muscular Dystrophy
BMD - Becker Muscular Dystrophy
LGMD - Limb Girdle Muscular Dystrophy
FSHD - Facioscapulohumeral Muscular Dystrophy

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के सभी टाईप जानलेवा है प्रतिदिन पीड़ित जान गंवा रहे हैं ,

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक बेहद गंभीर , भयानक एवं जटिल बीमारी है , मस्कुलर डिस्ट्रॉफी वर्तमान समय में भारत एवं उत्तर प्रदेश में बड़ी महामारी के रूप में विकसित हो रही है , ध्यान रहे यह एक आनुवंशिक बीमारी है , इसलिए यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है , कई परिवारों में तीन - तीन , चार - चार पीड़ित हो जाते हैं , इस गंभीर बीमारी के कारण परिवार बर्बाद हो चुके हैं , घर और जमीन भी बिकने के कगार पर है , पीड़ित एवं उनके परिवार मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहे हैं ,

अमेरिका में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का इलाज Exon Skipping द्वारा हो रहा है , Pfizer की Gene therapy 3rd Phase में चल रही है , जीन थेरेपी से इसका पूरा इलाज होगा , Pfizer की Gene therapy के 2021 में होने की पूरी संभावना है ,

अमेरिका के अलावा जापान , कनाडा , आस्ट्रेलिया , इंग्लैंड अथवा कुछ अन्य देशों में इस बीमारी का इलाज जीन थेरेपी से करने की कोशिश कर रहे हैं तथा इस पर बहुत तेजी से काम कर रहे हैं , Pfizer के अलावा भी दुनिया की कई कंपनियां Clinical trials और Human Trials कर रही है , जल्द हम इसका पूरा इलाज आने की उम्मीद कर रहे हैं , परंतु भारत में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लिए अभी तक कोई बड़ी रिसर्च नहीं हो रही हैं ,

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ितों के इलाज ( जीन थेरेपी या अन्य कोई भी इलाज ) के लिए तीव्र गति से प्रयास किया जाना चाहिए तथा सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अब मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ितों को इलाज के अभाव में अपना जीवन गंवाना नहीं पड़ेगा

केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ितों के बचाव तथा इलाज के लिए निम्न कार्य करने चाहिए

1. देश और प्रदेश के सभी अस्पतालों में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ितों के सभी टेस्ट फ्री किए जाए , क्योंकि इसके टेस्ट बहुत महंगे होते हैं ,

2. माँ के गर्भ में ही मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के टेस्ट किए जाएं जिससे भविष्य में किसी भी बच्चे को मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी गंभीर बीमारी से ना जूझना पड़े ,

3. इस बीमारी के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है जानकारी के अभाव में भी बहुत से पीड़ित बहुत जल्दी जान गंवा रहे हैं , इसलिए केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार संयुक्त रूप से इसके लिए अभियान चलाएं ,

4. जिस रफ्तार के साथ कोरोना वैक्सीन पर काम किया गया है उतनी रफ्तार के साथ मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के इलाज के लिए काम किया जाए , जिससे सभी पीड़ितों को इस गंभीर बीमारी से हमेशा के लिए राहत और छटकारा मिल सकें .

5. हमारे देश के वैज्ञानिक दुनिया में नेतृत्व कर रहे हैं इसलिए हम मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के इलाज के लिए दूसरों देशों पर निर्भर नहीं रह सकते , चूंकि केन्द्र और राज्य सरकार आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही हैं इसलिए हमें भी आत्मनिर्भर बनना चाहिए ,





CPK isoenzymes सीपीके आइसोनिजेस का Muscular dystrophy में परीक्षण क्यों किया जाता है- लव तिवारी

CPK isoenzymes परीक्षण क्या है?

 एंजाइम जटिल प्रोटीन होते हैं जो शरीर के हर हिस्से में रासायनिक परिवर्तनों की सुविधा प्रदान करते हैं। ठीक से काम करने के लिए आपके शरीर को एंजाइमों की आवश्यकता होती है। मांसपेशियों के कार्य के लिए क्रिएटिन फॉस्फोकाइनेज (CPK) नामक एंजाइम महत्वपूर्ण है। CPK isoenzymes परीक्षण आपके रक्तप्रवाह में इस एंजाइम के स्तर को मापने का एक तरीका है।

CPK को तीन अलग-अलग भागों में विभाजित किया जा सकता है:

CPK-1 मुख्य रूप से आपके मस्तिष्क और फेफड़ों में पाया जाता है।

CPK-2 ज्यादातर आपके दिल में पाया जाता है।

CPK-3 आपकी कंकाल की मांसपेशी में पाया जाता है।

जब चोट या बीमारी के कारण आपके शरीर के ये हिस्से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो आपके रक्तप्रवाह में सीपीके एंजाइम जारी हो सकते हैं। CPK isoenzymes परीक्षण आपके रक्त में इन एंजाइमों के स्तर की जाँच करता है। यह आपके डॉक्टर को आपके शरीर के उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद कर सकता है जो क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।


CPK isoenzymes परीक्षण एक साधारण रक्त परीक्षण है जिसमें न्यूनतम तैयारी और जोखिम शामिल है। रक्त का नमूना विश्लेषण के लिए एक प्रयोगशाला में भेजा जाएगा, और आपका डॉक्टर आपको परिणाम बताएगा।


CPK isoenzymes परीक्षण अभी भी कुछ मामलों में उपयोग किया जा सकता है, लेकिन पिछले एक दशक में, अधिकांश डॉक्टरों ने इससे दूर संक्रमण किया है। इसके बजाय, एक ट्रोपोनिन परीक्षण अक्सर आपके हृदय की मांसपेशियों को नुकसान का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। एक ट्रोपोनिन परीक्षण रक्त में ट्रोपोनिन टी और ट्रोपोनिन I नामक प्रोटीन के स्तर को मापता है। ये प्रोटीन तब रिलीज़ होते हैं जब दिल का दौरा पड़ने या दिल की अन्य गंभीर स्थिति के कारण आपके दिल की मांसपेशी क्षतिग्रस्त हो जाती है। ट्रोपोनिन परीक्षण प्रक्रिया CPK isoenzymes परीक्षण के समान है।

सीपीके आइसोनिजेस परीक्षण क्यों किया जाता है?

CPK isoenzymes परीक्षण आमतौर पर आपातकालीन कक्ष में किया जाता है यदि आपको दिल का दौरा पड़ने के लक्षण हैं। आपका डॉक्टर सीपीके रक्त परीक्षण का आदेश दे सकता है:


दिल के दौरे का निदान करने में उनकी मदद 

अपने सीने में दर्द का कारण 

CPK isoenzymes सीपीके आइसोनिजेस का Muscular dystrophy में परीक्षण क्यों किया जाता है? 

परीक्षण यह भी निर्धारित कर सकता है कि क्या आप जीन को मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लिए ले जाते हैं। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारियों का एक समूह है जो समय के साथ मांसपेशियों की हानि और कमजोरी का कारण बनता है। एक सीपीके आइसोनिजेस परीक्षण विभिन्न मांसपेशियों की बीमारियों या मुद्दों का पता लगा सकता है, जिसमें शामिल हैं:


जिल्द की सूजन, जो एक सूजन की बीमारी है जो त्वचा और मांसपेशियों को प्रभावित करती है

पॉलीमायोसिटिस, जो एक भड़काऊ बीमारी है जो मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनती है

घातक अतिताप, जो एक विरासत में मिली बीमारी है जो मांसपेशियों में संकुचन का कारण बनती है

अन्य स्थितियां जो मांसपेशियों के टूटने का कारण बन सकती हैं, जैसे कि अधिक व्यायाम, कुछ दवाएं या लंबे समय तक दौरे।



 

Limb Girdle Muscular Dystrophy (LGMD) दुर्लभ प्रगतिशील आनुवंशिक विकारों का एक समूह है- लव तिवारी

 लिम्ब-गर्डल मस्कुलर डिस्ट्रोफियाँ (LGMD) दुर्लभ प्रगतिशील आनुवंशिक विकारों का एक समूह है जो कूल्हे और कंधे के क्षेत्रों (लिम्ब-गर्डल क्षेत्र) की स्वैच्छिक मांसपेशियों की बर्बादी (शोष) और कमजोरी की विशेषता है। मांसपेशियों की कमजोरी और शोष प्रगतिशील है और शरीर की अन्य मांसपेशियों को प्रभावित करने के लिए फैल सकता है। कुछ जीनों के असामान्य परिवर्तनों (म्यूटेशन) के आधार पर कई अलग-अलग उपप्रकारों की पहचान की गई है। इन उपप्रकारों के लक्षणों की शुरुआत, गंभीरता और प्रगति की उम्र, एक ही परिवार के व्यक्तियों के बीच, मामले में बहुत भिन्न हो सकती है। कुछ व्यक्तियों में विकारों का हल्का, धीरे-धीरे प्रगतिशील रूप हो सकता है; अन्य विकार का एक तेजी से प्रगतिशील रूप हो सकता है जो गंभीर विकलांगता का कारण बनता है। लिम्ब-गर्डल मस्कुलर डिस्ट्रोफी शब्द एक सामान्य शब्द है जिसमें कई विकार शामिल हैं। इन विकारों को अब आनुवंशिक और प्रोटीन विश्लेषण से अलग किया जा सकता है। LGMD के विभिन्न रूपों को ऑटोसोमल प्रमुख या आवर्ती लक्षणों के रूप में विरासत में मिला जा सकता है। ऑटोसोमल प्रमुख LGMD को LGMD1 के रूप में जाना जाता है और वर्तमान में आठ उपप्रकारों (LGMD1A-1H) को मान्यता दी गई है। ऑटोसोमल रिसेसिव LGMD को LGMD2 के रूप में जाना जाता है और इसमें 17 उपप्रकार (LGMDA-Q) हैं। अतिरिक्त शब्दावली का उपयोग अतीत में मांसपेशियों के डिस्ट्रोफी के रूपों का वर्णन करने के लिए किया गया है जिन्हें अब LGMD के तहत वर्गीकृत किया गया है। इन शब्दों का अब व्यापक रूप से उपयोग नहीं किया जाता है और इसमें स्कैपुलोहुमरल (एर्ब) पेशी अपविकास, श्रोणिफलक (लेडन-मोबियस) पेशी अपविकास, और गंभीर बचपन के ऑटोसोमल रिसेसिव मस्कुलर सिस्ट्रोफी (SCARMD) शामिल हैं।

यद्यपि एलजीएमडी के मुख्य प्रकारों में कुछ सामान्य विषय पहचानने योग्य हैं, एलजीएमडी से जुड़े लक्षणों की शुरुआत, गंभीरता, और प्रगति में उम्र, एक ही परिवार के सदस्यों के बीच, मामले में बहुत भिन्न हो सकती है। LGMD के कुछ मामलों में वयस्कता, हल्के लक्षण और धीमी प्रगति के दौरान शुरुआत हो सकती है; दूसरों को बचपन के दौरान शुरुआत में दिक्कत हो सकती है और जल्दी गंभीर विकलांगता जैसे कि सीढ़ियां चढ़ने और चलने में कठिनाई होती है। कुछ व्यक्तियों को अंततः व्हीलचेयर की आवश्यकता होती है। ज्यादातर मामलों में, LGMD की शुरुआत से बच्चे को अधिक गंभीर विकार होता है जो किशोर या वयस्क शुरुआत के मामलों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ता है।

LGMD के प्रमुख लक्षण प्रगतिशील बर्बादी (शोष) और कूल्हे और कंधे के क्षेत्रों की समीपस्थ मांसपेशियों की कमजोरी हैं। समीपस्थ मांसपेशियां वे मांसपेशियां होती हैं जो शरीर के केंद्र के सबसे करीब होती हैं जैसे कि कंधे, श्रोणि, और ऊपरी हाथ और पैर की मांसपेशियां। दूर की मांसपेशियों को प्रभावित करने के लिए समीपस्थ मांसपेशियों से मांसपेशियों की कमजोरी फैल सकती है। डिस्टल मांसपेशियां शरीर के केंद्र से दूर होती हैं और निचले हाथों और पैरों और हाथों और पैरों की मांसपेशियों को शामिल करती हैं।

मांसपेशियों की कमजोरी आमतौर पर पहले श्रोणि और कूल्हे क्षेत्र की मांसपेशियों को प्रभावित करती है और प्रभावित व्यक्तियों को बैठने की स्थिति या सीढ़ियों से चलने में कठिनाई हो सकती है। कूल्हे और ऊपरी पैर की मांसपेशियों की कमजोरी एक विशिष्ट वाडलिंग गैट का कारण हो सकती है। आखिरकार, मांसपेशियों की कमजोरी ऊपरी बाहों और कंधों (लिम्ब-गर्डल एरिया) की मांसपेशियों को प्रभावित करती है। नतीजतन, प्रभावित व्यक्तियों को मुश्किल से अपने सिर के ऊपर से हथियार उठाना या भारी वस्तुओं को ले जाना पड़ सकता है। मांसपेशियों की कमजोरी मांसपेशियों में दर्द और जोड़ों के दर्द से जुड़ी हो सकती है।

LGMD के साथ व्यक्तियों में विकसित होने वाली अतिरिक्त असामान्यताएं में रीढ़ की हड्डी (स्कोलियोसिस) की असामान्य साइड-टू-साइड वक्रता, रीढ़ की हड्डी (लॉर्डोसिस) के असामान्य सामने-से-पीछे की वक्रता शामिल है, ऊतक का मोटा होना और छोटा होना जो विकृति का कारण बनता है और आंदोलन को प्रतिबंधित करता है। प्रभावित क्षेत्र, विशेष रूप से जोड़ों (सिकुड़न), और कुछ मांसपेशियों जैसे बछड़े की मांसपेशियों के अतिवृद्धि (अतिवृद्धि)।

LGMD के कुछ विशेष रूपों में, हृदय की मांसपेशियों को कमजोर करना, कार्डियोमायोपैथी के रूप में जाना जाता है, हो सकता है। कार्डियोमायोपैथी एक प्रगतिशील स्थिति है जिसके परिणामस्वरूप रक्त पंप करने के लिए हृदय की बिगड़ा हुआ क्षमता हो सकती है; थकान; ह्रदय मे रुकावट; अनियमित दिल की धड़कन (अतालता) और, संभवतः, दिल की विफलता। दिल की असामान्यता LGMD के सभी रूपों से जुड़ी नहीं है।

श्वसन प्रणाली की मांसपेशियां कुछ मामलों में भी शामिल हो सकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप निगलने में कठिनाई (डिस्फेजिया), स्लेड स्पीच (डिस्थरिया), और सांस लेने में कठिनाई होती है। सांस लेने में कठिनाई ऐसे मामलों में उत्तरोत्तर बदतर हो सकती है।

AUTOSOMAL RECESSIVE LGMD


ऑटोसोमल रिसेसिव एलजीएमडी के कम से कम 17 अलग-अलग रूपों की पहचान की गई है। ये विकार श्रोणि कमर, पैर, हाथ और कंधे की मांसपेशियों की प्रगतिशील कमजोरी की विशेषता है। मांसपेशियों की कमजोरी की प्रगति धीमी या तेज हो सकती है और एक ही परिवार के व्यक्तियों में भी भिन्न हो सकती है। बुद्धि सामान्य है। शुरुआत की उम्र उपसमूह से उपसमूह में भिन्न होती है। कुल मिलाकर, शुरुआत बचपन में अधिक होती है लेकिन वयस्क जीवन में देर हो सकती है।

LGMD2A (कैलपेन-कमी एलजीएमडी; कैलपैनोपैथी)

एलजीएमडी का यह रूप आमतौर पर 8-15 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रभावित करता है, लेकिन 2-40 वर्ष की आयु तक हो सकता है। अधिकांश मामलों में हिप-गर्डल क्षेत्र को प्रभावित करने वाली मांसपेशियों की कमजोरी की विशेषता होती है, हालांकि हिप एडिक्टर मांसपेशियों को बख्शा जा सकता है। उत्थान (शोष) प्रमुख है। प्रभावित बच्चे एक अलग वाडलिंग गैट का प्रदर्शन कर सकते हैं और अक्सर गिर सकते हैं। वे सीढ़ियों को चलाने और चढ़ने में कठिनाई का अनुभव कर सकते हैं। LGMD के इस रूप के साथ श्वसन संबंधी समस्याएं बताई गई हैं, लेकिन दिल की असामान्यताएं नहीं हैं।

LGMD2B (डिस्फेर्लिनोपैथी)

LGMD के इस रूप की शुरुआत आमतौर पर किशोर वर्षों के दौरान होती है। अधिकांश व्यक्तियों में बचपन के दौरान सामान्य गतिशीलता होती है। मांसपेशियों की कमजोरी श्रोणि और कंधे दोनों क्षेत्र की मांसपेशियों को प्रभावित करती है, लेकिन आमतौर पर बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। बछड़े की मांसपेशियों को बर्बाद करना (शोष) और टिप्टो पर चलने में असमर्थता रोग प्रगति में जल्दी देखी जा सकती है। दुर्लभ मामलों में, बछड़े की मांसपेशियों का अस्थायी (क्षणिक) अतिवृद्धि, बछड़े की दर्दनाक सूजन और संकुचन का प्रारंभिक विकास हो सकता है। हृदय और श्वसन की मांसपेशियां आमतौर पर प्रभावित नहीं होती हैं।

LGMD2B एक जीन के उत्परिवर्तन के कारण होता है, जो मियाशी मायोपैथी का कारण बनता है, जिसमें एक दुर्लभ मांसपेशी विकार होता है, जो पैरों और बाजुओं की बाहर की मांसपेशियों की कमजोरी के कारण होता है। परिवारों को सूचित किया गया है जिसमें कुछ सदस्य LGMD2B और अन्य मियोशी मायोपैथी विकसित करते हैं। (इस विकार के बारे में अधिक जानकारी के लिए, दुर्लभ बीमारी डेटाबेस में अपने खोज शब्द के रूप में "मियोशी" चुनें।)

LGMD2C-2F (सारकोग्लेनोपैथिस)

LGMD के ये रूप गंभीर रूप से अक्सर बचपन से लेकर हल्के रूप में अक्सर वयस्क शुरुआत के साथ हो सकते हैं। एक ही परिवार के व्यक्तियों में भी गंभीरता बहुत भिन्न होती है। प्रारंभिक शुरुआत के रूप में पैरों, कूल्हों, पेट और कंधे की प्रगतिशील मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है। सरकोग्लाइकोनापैथी की मांसपेशियों की कमजोरी की प्रगति अक्सर एलजीएमडी के अन्य रूपों की तुलना में अधिक तेज होती है और प्रभावित व्यक्तियों को 12-16 वर्ष की आयु के बीच व्हीलचेयर की आवश्यकता हो सकती है। बाद की शुरुआत वाले व्यक्ति आमतौर पर धीमी प्रगति और अधिक हल्के लक्षणों का अनुभव करते हैं। ऐसे व्यक्ति आमतौर पर वयस्कता में देर से चलने की क्षमता रखते हैं।

अतिरिक्त लक्षण अक्सर बछड़े और जीभ की मांसपेशियों, कार्डियोमायोपैथी, श्वसन संबंधी असामान्यताओं, संकुचन और स्कोलियोसिस के अतिवृद्धि सहित व्यंग्यलीकोनापी से जुड़े होते हैं।

LGMD2G (टेलीथोनिनोपैथी)

LGMD का यह रूप आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था के दौरान स्पष्ट हो जाता है और ऊपरी और निचले पैरों की मांसपेशियों की कमजोरी के साथ प्रस्तुत होता है। प्रभावित बच्चों को सीढ़ियाँ चढ़ने और चलने में कठिनाई हो सकती है। प्रभावित व्यक्तियों को अक्सर तीसरे या चौथे दशक तक व्हीलचेयर की आवश्यकता होती है। लगभग आधे मामलों में दिल की असामान्यताएं हुई हैं। बछड़े की मांसपेशियों का अतिवृद्धि (अतिवृद्धि) भी हो सकता है।

LGMD2H (TRIM 32 म्यूटेशन)

एलजीएमडी का यह रूप कनाडा के मैनिटोबा की हटराइट आबादी में बताया गया है। प्रभावित व्यक्तियों में निचले अंगों की कमजोरी विकसित होती है जो हल्के या गंभीर हो सकते हैं। चेहरे की मांसपेशियों की कमजोरी भी हो सकती है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, बाहों की मांसपेशियां शामिल हो सकती हैं। प्रभावित व्यक्ति वयस्कता में अच्छी तरह से चलने में सक्षम हो सकते हैं।

LGMD2I (फुकुटिन से संबंधित प्रोटीनोपैथी)

LGMD का यह रूप हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है। LGMD2I का प्रारंभिक बचपन आमतौर पर एक गंभीर नैदानिक ​​पाठ्यक्रम को इंगित करता है जिसमें प्रभावित व्यक्तियों को दूसरे दशक तक व्हीलचेयर की आवश्यकता होती है। मांसपेशियों के डिस्ट्रोफी, एमडीसी 1 सी के जन्मजात रूप के साथ ओवरलैप होता है। ऐसे मामलों में, प्रभावित व्यक्तियों को दोनों हाथों और पैरों की मांसपेशियों की गंभीर कमजोरी होती है, मांसपेशी टोन (हाइपोटोनिया) की हानि होती है, और मोटर मील के पत्थर को प्राप्त करने में देरी होती है। एलजीएमडी 2 आई का देर या वयस्क शुरुआत रूप विकार का धीरे-धीरे प्रगतिशील, हल्का रूप है। LGMD2I कार्डियोमायोपैथी और श्वसन असामान्यताओं से भी जुड़ा है।

LGMD2J (टिटिनोपैथी)

एलजीएमडी का यह रूप तब होता है जब दो टिटिन जीन उत्परिवर्तन मौजूद होते हैं और 10-30 वर्ष से लेकर शुरुआत की चर आयु होती है। प्रभावित व्यक्तियों में गंभीर प्रगतिशील समीपस्थ मांसपेशियों की कमजोरी होती है। आखिरकार डिस्टल मांसपेशियां शामिल हो जाती हैं और कुछ व्यक्तियों को व्हीलचेयर के उपयोग की आवश्यकता हो सकती है। जब केवल एक टिटिन जीन उत्परिवर्तन मौजूद होता है, तो डिस्टल मायोपैथी का परिणाम हो सकता है। LGMD2J फिनिश व्यक्तियों में सूचित किया गया है।

LGMD2K

LGMD का यह अत्यंत दुर्लभ रूप तुर्की व्यक्तियों में बताया गया है। शुरुआत बचपन या प्रारंभिक बचपन के दौरान होती है। प्रभावित व्यक्ति धीरे-धीरे प्रगतिशील मांसपेशियों की कमजोरी को प्रदर्शित करते हैं और अधिकांश देर से किशोरावस्था में चलने की क्षमता बनाए रखते हैं। सभी प्रभावित व्यक्तियों के पास विकासखंड थे।


LGMD2L (एनोक्टोमिनोपैथी)

प्रभावित व्यक्तियों में निचले और ऊपरी अंगों में समीपस्थ मांसपेशियों की कमजोरी की सूचना दी गई थी और मांसपेशियों की अतिवृद्धि आम थी। इंटेलिजेंस के सामान्य होने की सूचना मिली थी।

LGMD2K, LGMD2L, LGMD2M, LGMD2N, LGMD2O, LGMD2Q और प्राथमिक अल्फा dystroglycan दोष के साथ recessive LGMD के लिए कारण जीन की पहचान की गई है।

स्वचालित घरेलू LGMD

LGMD के ऑटोसोमल प्रमुख रूप ऑटोसोमल रिसेसिव रूपों की तुलना में कम बार होते हैं और जीवन के बाद होने की संभावना अधिक होती है। कई मामलों में, ऑटोसोमल प्रमुख एलजीएम ऑटोसोमल रिसेसिव एलजीएमडी की तुलना में धीमी दर से आगे बढ़ता है और इसके लक्षण एक ही परिवार के सदस्यों के बीच भी परिवर्तनशील हो सकते हैं। प्रत्येक जीन उत्परिवर्तन लक्षणों के कई अलग-अलग समूहों को जन्म दे सकता है। कुछ लक्षणों के उदाहरण जो विशिष्ट जीन उत्परिवर्तन के साथ जुड़े हो सकते हैं, इस प्रकार हैं:

LGMD1A (मायोटिलिनोपैथी)

LGMD1A की शुरुआत भिन्न होती है, किशोरावस्था से वयस्कता तक। LGMD का यह रूप समीपस्थ मांसपेशियों की कमजोरी की विशेषता है जो कभी-कभी स्लेड स्पीच (डिसरथ्रिया) और असामान्य रूप से तंग अकिलीज़ कण्डरा से जुड़ी होती है। बाहों में मांसपेशियों की कमजोरी भी हो सकती है। डिस्टल मांसपेशियां अंततः भी शामिल हो सकती हैं। LGMD1A की प्रगति बेहद धीमी है और केवल कुछ प्रभावित व्यक्तियों को ही व्हीलचेयर की आवश्यकता होती है। कुछ मामलों में दिल की भागीदारी को नोट किया गया है। यह फेनोटाइप मियोफिब्रिलर मायोपैथिस के रूप में जाना जाने वाले रोगों के समूह के साथ ओवरलैप करता है, जो मांसपेशियों के रोगों का एक और विषम समूह है, जो मायोटिलिन म्यूटेशन के साथ भी जुड़ा हो सकता है।

LGMD1B (टुकड़े टुकड़े A / C)

LGMD का यह रूप धीरे-धीरे प्रगतिशील समीपस्थ मांसपेशियों की कमजोरी की विशेषता है। प्रभावित व्यक्ति बछड़े की मांसपेशियों और कोहनी या अचकन कण्डरा के हल्के संकुचन को भी बढ़ा सकते हैं। दिल की असामान्यताएं अक्सर होती हैं और प्रगतिशील चालन दोषों को शामिल करने के लिए जांच की जानी चाहिए जो अंततः अनियमित दिल की धड़कन (अतालता) और हृदय ब्लॉक को जन्म दे सकती हैं। Lamin A / C उत्परिवर्तन के परिणामस्वरूप विभिन्न फेनोटाइप की एक विस्तृत श्रृंखला हो सकती है इसलिए प्रभावित परिवारों में आनुवंशिक परीक्षण की पेशकश करने के लिए देखभाल की आवश्यकता होती है।

LGMD1C (केवोलिनोपैथी)

एलजीएमडी का यह रूप व्यायाम के बाद मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन से मध्यम समीपस्थ मांसपेशियों की कमजोरी और बछड़े की मांसपेशियों के अतिवृद्धि के कारण होता है। मांसपेशियों की कमजोरी की प्रगति धीमी या तेज हो सकती है। शुरुआत आमतौर पर बचपन के दौरान होती है। मरीज़ों को तथाकथित चीर-फाड़ वाली मांसपेशियाँ हो सकती हैं।

LGMD1D

LGMD का यह अत्यंत दुर्लभ रूप प्रगतिशील मांसपेशियों की कमजोरी की विशेषता है जो सबसे पहले हिप-गर्डल क्षेत्र को प्रभावित करता है, अंग-गर्डल क्षेत्र को प्रभावित करने से पहले फैलता है। शुरुआत आमतौर पर शुरुआती वयस्कता के दौरान होती है, लेकिन छठे दशक के अंत तक हो सकती है। विकार की प्रगति धीमी है। दिल की गड़बड़ी सहित चालन असामान्यताएं और पतला कार्डियोमायोपैथी हो सकती है। LGMD के इस रूप वाले व्यक्ति आमतौर पर चलने में सक्षम होते हैं।

LGMD1E

LGMD का यह रूप ऊपरी और निचले पैरों की समीपस्थ मांसपेशियों की प्रगतिशील कमजोरी से जुड़ा हुआ है। शुरुआत आमतौर पर बचपन के दौरान होती है और रोग की प्रगति धीमी होती है। प्रभावित व्यक्तियों को निगलने में कठिनाई (डिस्फेजिया) और सिकुड़न भी हो सकती है। हृदय की असामान्यता LGMD के इस रूप में आमतौर पर मांसपेशियों की कमजोरी के विकास के एक या दो दशक बाद होती है।

LGMD1E, LGMD1F, LGMD1G, या LGMD 1H के लिए कारण जीन की पहचान नहीं की गई है।

LGMD के अतिरिक्त मामले मेडिकल साहित्य में बताए गए हैं जो कि उपर्युक्त उपप्रकारों में से किसी से भी जुड़े नहीं हैं और जिसके लिए किसी भी कारण जीन की पहचान नहीं की गई है। इसका मतलब यह है कि आगे LGMD जीन अभी भी पहचाना जाना बाकी है।


Causes कारण 

एलजीएमडी एक आनुवांशिक विकार है जिसे या तो एक ऑटोसोमल रिसेसिव या प्रमुख विशेषता के रूप में विरासत में मिला है। 90 प्रतिशत मामलों के लिए ऑटोसोमल रिसेसिव फॉर्म का अनुमान है। आनुवांशिक विकार एक विशेष गुण के लिए जीन के संयोजन से निर्धारित होते हैं जो पिता और माता से प्राप्त गुणसूत्रों पर होते हैं।

जब एक व्यक्ति प्रत्येक माता-पिता से एक ही लक्षण के लिए एक ही असामान्य जीन विरासत में मिलाता है, तो आनुवांशिक आनुवंशिक विकार होते हैं। यदि कोई व्यक्ति बीमारी के लिए एक सामान्य जीन और एक जीन प्राप्त करता है, तो व्यक्ति बीमारी का वाहक होगा, लेकिन आमतौर पर लक्षण नहीं दिखाएंगे। दो वाहक माता-पिता के लिए जोखिम दोनों दोषपूर्ण जीन को पारित करते हैं और इसलिए, प्रत्येक गर्भावस्था के साथ एक प्रभावित बच्चा 25% है। एक बच्चे के लिए जोखिम जो माता-पिता की तरह एक वाहक है, प्रत्येक गर्भावस्था के साथ 50% है। एक बच्चे के लिए माता-पिता दोनों से सामान्य जीन प्राप्त करने और उस विशेष लक्षण के लिए आनुवंशिक रूप से सामान्य होने का मौका 25% है। पुरुषों और महिलाओं के लिए जोखिम समान है।

प्रमुख आनुवंशिक विकार तब होते हैं जब रोग की उपस्थिति के लिए एक असामान्य जीन की केवल एक प्रति आवश्यक होती है। असामान्य जीन को या तो माता-पिता से विरासत में मिला जा सकता है, या प्रभावित व्यक्ति में एक नए उत्परिवर्तन (जीन परिवर्तन) का परिणाम हो सकता है। परिणामी बच्चे के लिंग की परवाह किए बिना प्रत्येक माता-पिता को प्रभावित माता-पिता से असामान्य जीन को पारित करने का जोखिम 50% है। कुछ मामलों में, उत्परिवर्ती (छिटपुट उत्परिवर्तन) के पिछले इतिहास के बिना परिवारों में कोई स्पष्ट कारण के लिए प्रमुख आनुवंशिक उत्परिवर्तन अनायास हो सकते हैं। यह "नया" उत्परिवर्तन तब एक ऑटोसोमल प्रमुख लक्षण के रूप में पारित किया जाता है।

शोधकर्ताओं ने एलजीएमडी के कई अलग-अलग उपप्रकारों की पहचान की है, हर एक एक अलग बीमारी जीन (आनुवंशिक विषमता) के उत्परिवर्तन के परिणामस्वरूप है। इनमें से कई उपप्रकारों से जुड़े जीन की पहचान की गई है। इनमें से अधिकांश जीन कुछ मांसपेशियों के प्रोटीन के उत्पादन में शामिल हैं। ये प्रोटीन प्रत्येक पेशी कोशिका के आसपास या कोशिका के भीतर की झिल्ली पर स्थित हो सकते हैं। प्रत्येक मांसपेशी कोशिका के आसपास की झिल्ली, जिसे सेरोलेमामा के रूप में जाना जाता है, कोशिकाओं को चोट से बचाता है और एक गेट के रूप में कार्य करता है जो सेल में पदार्थों को अनुमति देता है या रोकता है। यदि प्रोटीन में से एक गायब या दोषपूर्ण है, तो मांसपेशियों की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं या गलत तरीके से सेल के अंदर या बाहर पदार्थों की अनुमति दे सकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप एलजीएमडी के लक्षण दिखाई देते हैं। इन सभी प्रोटीनों की सटीक भूमिका और कार्य और उनकी कमी या अनुपस्थिति एलजीएमडी का कारण अभी तक ज्ञात नहीं है।

निम्नलिखित लिंक में पाए गए विभिन्न प्रकार के LGMD से जुड़े जीनों को जीनोजेनिक न्यूरोमस्कुलर विकारों की जीन तालिका में सूचीबद्ध किया गया है:


प्रभावित आबादी

LGMD पुरुषों और महिलाओं को समान संख्या में प्रभावित करता है। विकार की घटना अज्ञात है। एलजीएमडी की व्यापकता अज्ञात है, लेकिन अनुमान 14,500 में एक से 123,000 तक है। शुरुआत की उम्र एक ही परिवार के व्यक्तियों में भी भिन्न हो सकती है। LGMD के विभिन्न प्रकारों की सापेक्ष आवृत्तियां जनसंख्या से जनसंख्या में भिन्न होती हैं, लेकिन दुनिया भर में LGMD2G, 2H और 2J अत्यंत दुर्लभ हैं।

संबंधित विकार

निम्नलिखित विकारों के लक्षण LGMD के समान हो सकते हैं। तुलना अंतर निदान के लिए उपयोगी हो सकता है।

Dystrophinopathies X क्रोमोजोम पर स्थित DMD जीन के उत्परिवर्तन के कारण होने वाली मांसपेशियों की बीमारियों का एक स्पेक्ट्रम है। स्पेक्ट्रम के गंभीर अंत में मांसपेशियों की बीमारियां शामिल हैं जिन्हें ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और बेकर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के रूप में जाना जाता है। डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बचपन की मांसपेशियों के डिस्ट्रोफी का सबसे प्रचलित रूप है। विकार आमतौर पर लगभग तीन से छह साल की उम्र से पहचाना जाता है और इसमें अपेक्षाकृत तीव्र, प्रगतिशील रोग है। डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी को शुरू में श्रोणि क्षेत्र के भीतर मांसपेशियों की कमजोरी और बर्बादी (एट्रोफी) की विशेषता होती है जो कंधे की मांसपेशियों की भागीदारी के बाद हो सकती है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मांसपेशियों की कमजोरी और शोष ट्रंक और अग्र-भुजाओं को प्रभावित करते हैं और धीरे-धीरे शरीर की अधिकांश प्रमुख मांसपेशियों को शामिल करने के लिए प्रगति करते हैं। बेकर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी आमतौर पर जीवन के दूसरे या तीसरे दशक के दौरान शुरू होती है। यह धीरे-धीरे प्रगतिशील विकार पुरुषों को लगभग विशेष रूप से प्रभावित करता है। कूल्हों और कंधों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, चलने में असामान्यताएं विकसित होती हैं, और हल्के मानसिक मंदता हो सकती है। आखिरकार, अन्य गंभीर लक्षणों में हृदय और फेफड़े शामिल हो सकते हैं। डचेन और बेकर दोनों की मांसपेशियों की डिस्ट्रोफी को एक्स-लिंक्ड रिसेसिव लक्षणों के रूप में विरासत में मिला है। (इन विकारों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, दुर्लभ बीमारी डेटाबेस में आपकी खोज के रूप में "डचेन या बेकर" चुनें।)

Dystrophinopathy LGMD के किसी भी रूप से अधिक सामान्य है और किसी भी रोगी को अंग की कमजोरी के साथ पेश किया जाना चाहिए। निदान को महिलाओं में भी माना जाना चाहिए क्योंकि डायस्ट्रोफिनोपैथी के वाहक कुछ मामलों में मांसपेशियों के लक्षण हो सकते हैं।

Facioscapulohumeral मांसपेशियों की डिस्ट्रोफी (FSHD), जिसे Landouzy-Dejerine मांसपेशियों की डिस्ट्रोफी के रूप में भी जाना जाता है, एक और न्यूरोमस्कुलर विकार है जो एलजीएमडी के रूपों के साथ लक्षणों में ओवरलैप हो सकता है। लक्षण शुरुआत आमतौर पर किशोरावस्था या शुरुआती वयस्कता में होती है; हालाँकि, आमतौर पर, बचपन या प्रारंभिक बचपन में लक्षण स्पष्ट हो सकते हैं। विकार आमतौर पर शुरू में चेहरे, कंधे और / या ऊपरी बांह की मांसपेशियों की कमजोरी की विशेषता है। एसोसिएटेड असामान्यताएं में आंखों को पूरी तरह से बंद करने, होंठों के सीमित आंदोलनों और सिर के ऊपर हथियार उठाने में कठिनाई शामिल हो सकती है। प्रभावित व्यक्ति अंततः कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों की कमजोरी और संबंधित बर्बादी (शोष) और / या निचले पैर की मांसपेशियों को शामिल कर सकते हैं। यद्यपि रोग का पाठ्यक्रम परिवर्तनशील हो सकता है, एफएसएचडी को आमतौर पर अपेक्षाकृत धीमी गति से होने वाली बीमारी की विशेषता है। विशिष्ट लक्षण और निष्कर्ष भी रेंज और गंभीरता में भिन्न हो सकते हैं, जिसमें एक ही परिवार (प्रभावित) के प्रभावित सदस्य भी शामिल हैं। एफएसएचडी आमतौर पर एक ऑटोसोमल प्रमुख विशेषता के रूप में विरासत में मिला है। हालांकि, लगभग 30 प्रतिशत प्रभावित व्यक्तियों में विकार का कोई स्पष्ट पारिवारिक इतिहास नहीं है। इनमें से कुछ मामलों में, एफएसएचडी नए आनुवंशिक परिवर्तनों (उत्परिवर्तन) के कारण हो सकता है जो अज्ञात कारणों से (छिटपुट रूप से) अनायास प्रकट होते हैं। (इस विकार के बारे में अधिक जानकारी के लिए, दुर्लभ बीमारी डेटाबेस में अपने खोज शब्द के रूप में "फेशियोसेपुलोहूमरल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी" चुनें।)

एमरी-ड्रेफस मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (ईडीएमडी) एक दुर्लभ, अक्सर धीरे-धीरे प्रगतिशील पेशी है, जो मांसपेशियों, डिस्ट्रोफी के साथ-साथ हाथों, पैरों, चेहरे, गर्दन, रीढ़ और हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित करती है। विकार में कुछ मांसपेशियों की कमजोरी और अध: पतन होता है, जो एक लचीली या विस्तारित स्थिति (सिकुड़न), और हृदय (कार्डियोमायोपैथी) को प्रभावित करने वाली असामान्यताओं में तय होते हैं। प्रमुख लक्षणों में मांसपेशियों की बर्बादी और कमजोरी शामिल हो सकती है विशेष रूप से ऊपरी पैर और हाथ और कोहनी, एच्लीस टेंडन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों में सिकुड़न। कुछ मामलों में, अतिरिक्त असामान्यताएं मौजूद हो सकती हैं। ज्यादातर मामलों में, मांसपेशियों की कमजोरी धीरे-धीरे प्रगतिशील होती है। दिल की असामान्यताएं संभावित रूप से जीवन-धमकाने वाली जटिलताओं का परिणाम हो सकती हैं। ईडीएमडी को आमतौर पर एक एक्स-लिंक्ड रिसेसिव विशेषता के रूप में विरासत में मिला है, लेकिन एक ऑटोसोमल प्रमुख या ऑटोसोमल रिसेसिव विशेषता के रूप में भी विरासत में मिला हो सकता है। ऑटोसोमल प्रमुख एमरी ड्रेइफस पेशी अपविकास लामिना ए / सी में उत्परिवर्तन के कारण होता है, एलजीएम 1 बी में शामिल एक ही जीन और महत्वपूर्ण नैदानिक ​​ओवरलैप हो सकते हैं। (इस स्थिति के बारे में अधिक जानकारी के लिए, दुर्लभ बीमारी डेटाबेस में आपके खोज शब्द के रूप में "एमरी ड्रेफस" चुनें।)


स्पाइनल पेशी शोष (SMA) जो क्रोमोसोम 5 पर SMN जीन के विलोपन के कारण होता है, एक विरासत में मिला प्रगतिशील न्यूरोमस्कुलर विकार है, जो मस्तिष्क के सबसे निचले क्षेत्र (मस्तिष्क के निचले क्षेत्र) और कुछ निश्चित के भीतर तंत्रिका कोशिकाओं (मोटर नाभिक) के समूहों के अध: पतन की विशेषता है। रीढ़ की हड्डी (पूर्वकाल सींग कोशिकाओं) में मोटर न्यूरॉन्स। मोटर न्यूरॉन्स तंत्रिका कोशिकाएं हैं जो रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) से तंत्रिका आवेगों को मांसपेशियों या ग्रंथियों के ऊतकों तक पहुंचाती हैं। विशिष्ट लक्षण धीरे-धीरे प्रगतिशील मांसपेशियों की कमजोरी और मांसपेशियों की बर्बादी (शोष) हैं। प्रभावित व्यक्तियों में मांसपेशियों का कमजोर होना, बिना शरीर के दोनों तरफ की मांसपेशियों की कमजोरी, या कम से कम, चेहरे की मांसपेशियों की भागीदारी, जीभ का हिलना और गहरी कण्डरा सजगता की कमी होती है। एसएमए को लक्षणों की शुरुआत और प्राप्त अधिकतम फ़ंक्शन के आधार पर उपप्रकारों में विभाजित किया जाता है। (इस विकार के बारे में अधिक जानकारी के लिए, दुर्लभ बीमारी डेटाबेस में "खोज शब्द" के रूप में "स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी" चुनें।)

मांसपेशियों की बीमारी के अतिरिक्त रूपों (मायोपैथी) को एलजीएमडी के लिए विभेदक निदान माना जाता है जिसमें पोम्पे रोग जैसे चयापचय मायोपथी शामिल हैं; सूजन संबंधी मायोपैथिस जैसे डर्माटोमायोसिटिस या पॉलीमायोसिटिस; और नवजात मायोपथी जैसे अलग-अलग जन्मजात मायोपैथी। (इन विकारों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, दुर्लभ बीमारी डेटाबेस में आपके खोज शब्द के रूप में विशिष्ट विकार नाम चुनें।)

निदान

एलजीएमडी समूह के भीतर, एक सटीक निदान तक पहुंचना महत्वपूर्ण है ताकि रोगी और उसके परिवार को सही आनुवंशिक सलाह दी जा सके, साथ ही जटिलताओं के प्रबंधन के लिए उचित मार्गदर्शन किया जा सके, जो रोग इकाई से रोग इकाई तक भिन्न हो सकते हैं। यह विशेष रूप से हृदय या श्वसन जटिलताओं के जोखिम से संबंधित है। आज उपलब्ध सटीक परीक्षण उन व्यक्तियों के लिए संभव हो सकता है जिन्हें पूर्व में LGMD का एक निर्धारित निदान दिया गया था जिसे फिर से लागू किया गया और अधिक सटीक आणविक निदान दिया गया।

LGMD का एक निदान पूरी तरह से नैदानिक ​​मूल्यांकन, एक विस्तृत रोगी इतिहास, विशिष्ट लक्षणों की पहचान (उदाहरण के लिए, मांसपेशियों की कमजोरी और शोष के विशिष्ट वितरण), और सर्जिकल हटाने और माइक्रोस्कोपी परीक्षा (बायोप्सी) सहित कई विशिष्ट परीक्षणों के आधार पर किया जाता है। प्रभावित मांसपेशी ऊतक जो मांसपेशियों के तंतुओं के लिए विशिष्ट परिवर्तन प्रकट कर सकते हैं; एक परीक्षण जो मांसपेशियों और नसों को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों (इलेक्ट्रोमोग्राफी) के स्वास्थ्य का आकलन करता है; विशेष रक्त परीक्षण; परीक्षण जो कुछ मांसपेशी प्रोटीन (इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री) की उपस्थिति और संख्या का मूल्यांकन करते हैं; और आणविक आनुवंशिक परीक्षण।

इलेक्ट्रोमोग्राफी के दौरान, एक सुई इलेक्ट्रोड को प्रभावित मांसपेशी में त्वचा के माध्यम से डाला जाता है। इलेक्ट्रोड मांसपेशी की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। यह रिकॉर्ड दिखाता है कि एक मांसपेशी नसों को कितनी अच्छी तरह से प्रतिक्रिया देती है और यह निर्धारित कर सकती है कि मांसपेशियों की कमजोरी मांसपेशियों के कारण होती है या मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाले तंत्रिकाओं द्वारा। एक इलेक्ट्रोमोग्राफी मोटर न्यूरॉन रोग और परिधीय न्यूरोपैथी जैसे तंत्रिका विकारों को नियंत्रित कर सकती है और न्यूरोमस्कुलर जंक्शन विकारों जैसे कि मायस्थेनिक सिंड्रोमेस जिनमें से कुछ अंगों की कमजोरी के साथ मौजूद हो सकते हैं। यह एक विशिष्ट LGMD उपप्रकार के निदान की अनुमति नहीं देगा लेकिन वैकल्पिक निदान को बाहर करने के लिए उपयोगी हो सकता है।

रक्त परीक्षण क्रिएटिन किनेज़ (सीके) के ऊंचे स्तर को प्रकट कर सकता है, एक एंजाइम जो अक्सर मांसपेशियों के क्षतिग्रस्त होने पर असामान्य रूप से उच्च स्तर में पाया जाता है। ऊंचा सीके का स्तर कुछ में होता है, लेकिन एलजीएमडी के सभी मामलों में नहीं। सीके का स्तर ऑटोसोमल प्रमुख रूपों की तुलना में एलजीएमडी के ऑटोसोमल रिसेसिव रूपों में बहुत अधिक है। ऊंचे CK स्तरों का पता लगाने से पुष्टि हो सकती है कि मांसपेशी क्षतिग्रस्त है या सूजन है, लेकिन LGMD के निदान की पुष्टि नहीं कर सकता है। हालांकि यह इंगित करने में मदद कर सकता है कि किस प्रकार का एलजीएमडी दूसरों की तुलना में अधिक संभावना है।

कुछ मामलों में, मांसपेशी बायोप्सी नमूनों पर एक विशेष परीक्षण किया जा सकता है जो मांसपेशियों की कोशिकाओं के भीतर विशिष्ट मांसपेशी प्रोटीन की उपस्थिति और स्तर निर्धारित कर सकता है। विभिन्न तकनीकों जैसे कि इम्यूनोस्टेनिंग, इम्यूनोफ्लोरेसेंस या वेस्टर्न ब्लॉट (इम्यूनोब्लॉट) का उपयोग किया जा सकता है। इन परीक्षणों में कुछ विशिष्ट एंटीबॉडी का उपयोग होता है जो कुछ मांसपेशियों के प्रोटीन पर प्रतिक्रिया करता है। मांसपेशी बायोप्सी से ऊतक के नमूने इन एंटीबॉडी के संपर्क में आते हैं और परिणाम यह निर्धारित कर सकते हैं कि क्या एक विशिष्ट मांसपेशी प्रोटीन मौजूद है और किस मात्रा में है। कुछ मांसपेशियों के प्रोटीन की कमी से संकेत मिलता है कि LGMD किस रूप में मौजूद है। ये प्रोटीन परीक्षण LGMD के सभी रूपों के लिए उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इसका उपयोग LGMD2C-2F (सारकोग्लिनोपैथिस), LGMD1C (केवोलिनोपैथी), LGMD2B (डिस्फ़्लीनोपैथी) और LGMD2A (कैल्पेनोपैथी) के कुछ मामलों के लिए किया जा सकता है।

आणविक आनुवंशिक परीक्षण में विशिष्ट आनुवंशिक परिवर्तन की पहचान करने के लिए डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए) की परीक्षा शामिल है। यह अब LGMD में निदान के लिए सोने का मानक है और एक विशिष्ट निदान के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों के लिए विशिष्ट परीक्षण की अनुमति देता है।

LGMD संस्थापनाओं के एक संघ ने रोगियों के लिए नि: शुल्क आनुवांशिक अनुक्रमण की पेशकश करने के लिए http://LGMD-diagnosis.org पर रखे एक नए नैदानिक ​​कार्यक्रम का निर्माण किया।









गुरुवार, 11 मार्च 2021

लिख के कागज़ पर मेरा नाम मिटाते क्यों हो हमसे इकरार करो प्यार छुपाते क्यों हो - सुमन सरीन

लिख के कागज़ पर मेरा नाम मिटाते क्यों हो -2
हमसे इकरार करो प्यार छुपाते क्यों हो

लिख के कागज़ पे मेरा नाम मिटाते क्यों हो -2
हमसे इकरार करो प्यार छुपाते क्यों हो
लिख के कागज़ पे मेरा...........


क्या जरुरत थी मेरी ज़िन्दगी में आने की -3
आ गए हो तो मुझे छोड़ के जाते क्यों हो 2
हमसे इकरार करो प्यार ............
लिख के कागज़ पे मेरा ............

बाद मरने के भी तुम, साथ में रहने वाले-3
फिर मेरे जीते जी दामन को बचते क्यूँ हो-2
हमसे इकरार करो प्यार ............
लिख के कागज़ पे मेरा ............

लिख के कागज़ पे मेरा नाम मिटाते क्यों हो




मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

दिव्यांगों के सर्वांगीण विकास हेतु 21 सूत्रीय मांग पत्र- लव तिवारी


1, महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत

2, माननीय प्रधानमंत्री जी भारत सरकार

3, माननीय सामाजिक न्याय अधिकारिता केन्द्रीय मन्त्री(दिव्यांगजन मन्त्री)भारत सरकार


विषय: दिव्यांगों के सर्वांगीण विकास हेतु 21 सूत्रीय मांग पत्र।


महोदय,


निवेदन है कि दिव्यांग देश की सबसे कमजोर,वंचित व उपेक्षित कड़ी है जिसकी तरफ आजादी से आज तक सरकार की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया गया है इसलिए उनका आज तक कोई विकास नहीं हुआ है अपनी मांगों को लेकर आज हम सरकार को जगाने का कार्य कर रहे हैं ताकि सरकार हमारी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करें और हम भी समाज की मुख्यधारा में जुड़ सकें।


1, दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 के सभी प्रावधानों को अति शीघ्र जमीनी स्तर पर लागू किया जाए।


2, देश व समस्त प्रदेशों में दिव्यांग आयोग तुरंत बनाए जाएं और उसमें सभी पदाधिकारी दिव्यांग हो। ऐसी स्थाई व्यवस्था की जाए।


3, केंद्र में सभी प्रदेश सरकारों में त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत,क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत,नगर निगम,नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत ,सरकारी ,अर्द्ध सरकारी ,सहकारी एवं अन्य व्यक्तिगत समितियां हाउसिंग सोसायटी कोऑपरेटिव सोसायटी ,गन्ना सोसायटी, विधानसभा ,विधान परिषद, लोकसभा व राज्यसभा में विकलांगों का 4% आरक्षण लागू कर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अनुरूप सीट रिजर्व की जाए


4, दिव्यांग,वृद्ध, विधवा एक देश एक पेन्शन ₹5000 महीना की जाए तथा सरकारी कर्मचारियों की तरह साल में महंगाई भत्ता जोड़ कर दी जाए।


5, दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए पैरा खेल नीति के सभी प्रावधानों को अति शीघ्र लागू किया जाए ओर उसमें सभी पदाधिकारी दिव्यांग हो ऐसा प्रावधान किया जाए।


6, देश में सभी राज्यों के सरकारी विभागों निगमों एवं निजी सेक्टर में दिव्यांगों का नौकरी व रोजगार में 4% कोटा सुनिश्चित करके अविलम्ब पूर्ण किया जाए एवं सरकार के सभी पदों पर दिव्यांगों को योग्यता के आधार पर अविलंब पदोन्नति दी जाए वह दिव्यांगों का अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न अभिलंब बंद किया जाए।


7, दिव्यांगों व दिव्यांगों के बच्चों को सरकारी व निजी शिक्षा वह उच्च शिक्षा संस्थानों में दिव्यांगों का 4% कोटा सुनिश्चित करते हुए समस्त प्रकार की फीस निशुल्क की जाए। अनुसूचित जाति जनजाति के अनुरूप दिव्यांगों के लिए सभी जिला स्तर पर कोचिंग सेंटर निशुल्क चलाए जाएं।


8 देश व प्रदेशो में दिव्यांगजन आयुक्त व दिव्यांग विभागों में जिले स्तर से राष्ट्र स्तर तक के सभी बड़े पदों पर दिव्यांग ही तैनात किए जाए।अधिनियम में ऐसी व्यवस्था की जाए।


9, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की शर्तों में सभी दिव्यांगों एवं उनके आश्रितों को अनिवार्य रूप से अभिलंब सम्मिलित किया जाए व दिव्यांगों के लिए अंत्योदय कार्ड अनिवार्य रूप से लागू किया जाए अगर कोई अधिकारी इस में लापरवाही बरतना है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाए।


10, प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के लाभ हेतु शर्तों में दिव्यांगों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए वह जो विकलांग अकेला रहता है उसे भी उपरोक्त सभी सुविधाएं दी जाएं ऐसा उसमें अविलंब प्रावधान किया जाए।


11, देश में प्रदेश के मुख्यालयों के साथ-साथ एक जनपद मुख्यालय पर दिव्यांग भवन बनाए जाएं एवं उनका संचालन दिव्यांगों द्वारा सुनिश्चित किया जाए।


12, सार्वजनिक स्थलों बसों ट्रेनों हवाई अड्डे एवं बंदरगाह आदि में स्वरोजगार हेतु दिव्यांगों को दुकानें दी जाएं तथा पुलिस व अन्य कर्मचारियों/ अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न अविलंब बंद कराया जाए उत्पीड़न करने वाले के विरुद्ध जुर्माना सहित दंड का प्रावधान किया जाए ऐसी व्यवस्था तुरंत लागू की जाए।


13, समस्त दिव्यांग कन्याओं /युवाओं की शादी अनुदान राशि कम से कम दो लाख की जाए तथा धनराशि लाभार्थी के खाते में हस्तांतरित की जाए।


14, सभी प्रकार की मस्कुलर डिस्ट्राफी पीड़ितों के लिये सरकार द्वारा भारत मे इलाज उपलब्ध नही होता तब तक सरकार उन्हें केयर टेकर,फिजियोथेरेपी, हाइड्रोथेरेपी आदि की सुविधा की अधिनियम में व्यवस्था कर उपलब्ध कराई जाए।


15, सांसद निधि व विधायक निधि का 25% धनराशि दिव्यांगों को उपकरण सहित संपूर्ण विकास में खर्च की जाए।


16, देश की सभी सुपरफास्ट ट्रेनों से हटाये गये दिव्यांग कोच/महिला कोच अविलम्ब लगाये जाये तथा दिव्यांग कोच की जगह ट्रेनों में निश्चित की जाए और गार्ड की जिम्मेदारी हो कि दिव्यांग व उसके सहायक के अतिरिक्त अन्य कोई दिव्यांग कोच में मिलता है तो गार्ड व पुलिस के विरुद्ध जुर्माना व दण्ड का प्रावधान किया जाए।

17, सरकार द्वारा दिव्यांगों को दिए जा रहे हैं उपकरण पर लगाई गई पाबंदी तक सभी उपकरणों के रिपेयर टूट-फूट एवं खराब होने पर सरकार द्वारा निशुल्क ठीक कराया जाए जैसा कि ट्राई साइकिल के लिए 3 साल की बाध्यता है उसी तरह बैटरी द्वारा चालित ट्राई साइकिल 10 साल की बाध्यता है लेकिन 6 महीने में ही खराब हो जाती है जिसकी कंपनियां ओर सरकार रिपेयर नहीं कराती और विकलांग के पास इतना धन नहीं होता। इसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार सुनिश्चित करें।


18, सभी दिव्यांगों का दिव्यांग प्रमाण पत्र एवं रेलवे रियायती कार्ड सभी जिलों के अंदर ही बनाने की व्यवस्था की जाए। अगर किसी दिव्यांग को जनपद मुख्यालय के अलावा कहीं भेजा जाता है तो उसके आने जाने की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाए।


19, दिव्यांगों को स्वरोजगार के लिए अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति को स्वरोजगार हेतु एसटीपी (स्पेशल कंपोनेंट प्लान )योजना की शर्तों में समस्त दिव्यांगों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए एवं ₹500000 तक का ऋण बिना ब्याज दिया जाए।


20, सुगम भारत योजना के अंतर्गत प्रत्येक कार्यालय स्तर पर व्हीलचेयर वह दिव्यांगों की पहुंच तथा सभी सरकारी अधिकारियों के कार्यालयों दिव्यांगों की पहुंच के अनुरूप हो इसकी व्यवस्था अभिलंब की जाए।ओर सहायता प्राप्त पंजिकृत एन जी ओ (NGO) के पिछले पांच वर्षों के कार्यो का दिव्यांगों की मौजूदगी में आडिट कराया जाए।गबन की स्थिति में स्थाई रूप से रोक लगाकर दण्डित किया जाए।


21, विज्ञापन सँख्या 2/2018 रेलवे ग्रुप डी भर्ती परीक्षा में दिव्यांगों के साथ हुई अनियमितताओं का निपटारा शीघ्र करके रेलवे में उत्तीर्ण दिव्यांग अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र अति शीघ्र जारी करे।एवं उत्तर प्रदेश के 69000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पात्र दिव्यांगों का 4% कोटा पूर्ण कर अविलम्ब नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।ओर ऐसा सुनिश्चित किया जाए जो भी अन्य विभाग/अधिकारी दिव्यांगों के साथ ऐसा भेदभाव करेगा उसके विरुद्ध जुर्माना सहित दण्ड का प्रावधान किया जाए।

दिनांक
२० फरवरी २०२१ 
  लव कुमार ग़ाज़ीपुर (समाजसेवी)



बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

हम जिसे सबसे अधिक चाहते है अंत मे वही हमारा साथ निभाता है -प्रवीण तिवारी पेड़ बाबा


अपनी कमजोरी और अपने राज किसी को भी नहीं बताने चाहिए.

क्योंकि अपने राज जिसे आप खुद दूसरे व्यक्ति को बता रहे हैं, दूसरा व्यक्ति भी आपके राज कभी न कभी किसी न किसी को बताएगा. और इस तरह से आपके राज को बहुत सारे लोग जान जायेंगे.



शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2021

यहाँ पानी महंगा और जहर सस्ते है। देखो शहर गांव उजाड़ कर जो बसते है- लव तिवारी

यहाँ पानी महंगा और जहर सस्ते है।
देखो शहर गांव उजाड़ कर जो बसते है।।

हर कोई होता है भीड़ में तन्हा अकेला।
यहाँ हर शख्श के अपने अपने रास्ते है।।

मेरे पास पराये लोगो का एक हुजूम सा है।
जो लोग बस अपने फ़ायदे की बात करते है।।

ख़ुशी का दौर हो मुझपर या हो दुख के बादल।
हम अकेले हँसते है और तन्हाई में रो लेते है।।

गांव से याद आते है जब अपनों की यादों।
बस एक उम्र वही जो खुद से मिलने को तरसते है।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक - 05 फरवरी 2021