रचना -लव तिवारी
दिनांक- 17 दिसंबर 2016
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दरिंदों ने जिसे खूब नोचा, अब स्मृति शेष अवशेष हूँ।
जाति विशेष व्यक्तियों के विकास का अखिलेश हूँ।
....मैं उत्तर प्रदेश हूँ।
दरिंदों से जितनी बची बस उतनी ही शेष हूँ।
मैं, बलात्कार पीड़िता, आपके चरणों में पेश हूँ।
....मैं उत्तर प्रदेश हूँ।
शासन नहीं सत्ता हूँ, रोजगार नहीं बेरोजगारी भत्ता हूँ।
गुंडई, दंगा और रेप का संदेश हूँ।
....मैं उत्तर प्रदेश हूँ।
विकास को तरसता जाति-धर्म की राजनीति में विशेष हूँ।
गरीबों की अमानत लूटते पूंजीपतियों का वेष हूँ।
....मैं उत्तर प्रदेश हूँ।
ना बिजली, ना पानी, ना शिक्षा, ना स्वास्थ्य, ना ही रोजगार हूँ।
मैं तो केवल जालिमों के ज़ुल्म की चीत्कार हूँ। साथ ही अपराध की बेलगाम सत्ता का संदेश हूँ।
....मैं उत्तर प्रदेश हूँ।
चार-चार मुख्यमंत्रियों के हाथों का क्लेश हूँ।
दादरी, मथुरा और मुजफ्फरनगर के दंगों में पेश हूँ।
....जी हाँ, मैं उत्तर प्रदेश हूँ।।
Source- whatsapp
तेरे से अच्छा तो अपने गांव का नेता है जो कम से कम देश के बारे में गलती शब्द का प्रयोग तो नहीं करता ,टीवी के सामने केवल तेरे फर्जी बात की उलटी पलटी कहानी, #केजरी तेरी उलटी पलटी समाचार ने आज कुछ लिखने पर विवश किया फिर थोड़े देर में गांव से सोशल मीडिया के माध्यम से नेता की तस्वीर आयी ,लिख दिया कृपया केजरीवाल भक़्त, समर्थक हमें गाली न दे, धन्यबाद
उम्मीद तुमसे है कि तुम भी कुछ नया करो
हिमायत आतंकी की छोड़ कर कुछ और करो
इसी जनता ने दिया तुझे दिल्ली का जो तख़्त
अब यही आदत है चुल्लू भर पानी में डूब मरो
क्यों करते हो गन्दी राजनीती वोट के लिए
कम से कम सैनिको और उनकी सहादत पर गर्व करो
कोई नहीं मांगता अपनी माँ से सबूत अपने बाप का
कुछ तो है बात दुनिया में जिसको तुम समझा करो
प्रस्तुति - #लव_तिवारी
#Delhi, #cmdelhi #politics #india #army #indianarmy #modi #bharat
रचना- लव_तिवारी - 13-09-2016
गुप्ता जी की बात निराली और कुछ खिस्से ऐसे है
सब लोग के बीच में सर जी बड़े अनोखे रहते थे
कुछ तथ्यों पर महाशय जी अपनी राय भी रखते थे
और हो न हो क्यों ऐसा चंदौसी में जो रहते थे
हमें पढ़ाते खुद भी पढते और गुथ्थी भी सुलझाते थे
बात बात हम को भी कुछ राज की बात बताते थे
एक बार की बात कहु तो साहब ने हमें डराया था
और दोस्तों के बिच में हमें जोर से हड़काया था
अपनी दिल को चैन न था वैभव जी से मिलने को
और कुछ रंजिश की बातों पर सुलह सपाट करने को
न मानने पर श्री मान को खूब मनाया करते थे
कभी अकेले कभी प्रशांत और जितेंद्र के संग जाया करते थे
अपनी दोस्ती के खिस्से हमेशा याद किये जाते
और दोस्तों से फ़ोन पर आप के हालात पता कर लिए जाते
प्रिय दोस्त बैभव कान्त गुप्ता जी की स्मृति में मेरी द्वारा लिखी कुछ पंक्ति
धन्यबाद - #लव_तिवारी
#फोटो ग्राफी- Praveen Richhariya
योगेश कुमार