शुक्रवार, 29 जुलाई 2022
हुई स्वतंत्रता आज हमारी पूर्ण पचहत्तर वर्ष की चलो सुनाएं कथा विश्व को भारत के उत्कर्ष की- डॉ एम डी सिंह
गुरुवार, 28 जुलाई 2022
रहें सावधान केवल 23 ₹ किलो की लागत आती है देसी घी बनाने में- प्रवीण तिवारी
हे गोपाल राधा कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद।।
सोमवार, 18 जुलाई 2022
बरसत बरसत क़ईले बाड़ा पूरा बम्बई पानी पानी तनी बरसता यू० पी० में त हे भगवान हम तोहक़े मानी- कवि राजेश पाल,
गुरुवार, 14 जुलाई 2022
पूज्य संत आदरणीय श्री युश जी महाराज के सानिध्य में गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर आशीर्वाद की प्राप्ति-
मंगलवार, 12 जुलाई 2022
जब रात की तन्हाई दिल बनके धड़कती है यादों की दरीचों चिलमन सी सरकती है।।
सोमवार, 11 जुलाई 2022
सलोना सा सजन है और मैं हूँ जिया में एक अगन है और मैं हूँ- आशा भोंसले गज़ल
लोग मुझे पागल कहते हैं गलियों और बाजारों में मैंने प्यार किया है मुझकों चुनवा दो दीवारों में
रविवार, 10 जुलाई 2022
दिल का लगाना खेल न जानों दिल का लगाना मुश्किल है जिस पर दिल आ जाये उसको दिल से भुलाना मुश्किल है-आशा भोंसले
शनिवार, 9 जुलाई 2022
लोग कहते है अज़नबी तुम हो अज़नबी मेरी जिंदगी तुम हो-आशा भोंसले ग़ज़ल
आँखों को इंतज़ार था दे के हुनर चला गया, चाहा था एक शख्स को जाने किधर चला गया- आशा भोसले ग़ज़ल
कुछ दूर हमारे साथ चलो हम दिल की कहानी कह देंगे।-गायक- आशा भोसले व हरिहरन जी
सोमवार, 27 जून 2022
ग़ाज़ीपुर से तनिके दूर माई के भवनवा मोहे ले मनवाँ श्री कामाख्या माई धमवा।- देवी पचरा मनोज तिवारी मृदुल
रविवार, 26 जून 2022
देवी पचरा -ठाड़े लेके आरती अँगनवा नयना माई के निहारे- मनोज तिवारी मृदुल
गुरुवार, 23 जून 2022
अहि ठइयां झुलनी हेरा गइले रामा कहा मो ढूँढू पारम्परिक चैता
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर बहता जाए युग युग से इस देश की धरती तुझसे जीवन पाए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर बहता जाए
युग युग से इस देश की धरती तुझसे जीवन पाए
दूर हिमालय से तू आई गीत सुहाने गाती
बस्ती बस्ती जंगल जंगल सुख संदेश सुनाती
तेरी चाँदी जैसी धारा मीलों तक लहराए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर..................................
कितने सूरज उभरे डूबे गंगा तेरे द्वारे
युगों युगों की कथा सुनाएँ तेरे बहते धारे
तुझको छोड़ के भारत का इतिहास लिखा ना जाए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर..................................
इस धरती का दुःख सुख तूने अपने बीच समोया
जब जब देश ग़ुलाम हुआ है तेरा पानी रोया
जब जब हम आज़ाद हुए हैं तेरे तट मुस्काए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर...............................
खेतों खेतों तुझसे जागी धरती पर हरियाली
फसलें तेरा राग अलापें, झूमे बाली बाली
तेरा पानी पीकर मिट्टी सोने में ढल जाए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर..............................
तेरे दान की दौलत ऊँचे खलिहानों में ढलती
खुशियों के मेले लगते, मेहनत की डाली फलती
लहक लहक के धूम मचाते तेरी गोद के जाए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर............................
गूँज रही है तेरे तट पर नवजीवन की सरगम
तू नदियों का संगम करती, हम खेतों का संगम
यही वो संगम है जो दिल का दिल से मेल कराए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर..............................
हर हर गंगे कहके दुनिया तेरे आगे झुकती
तुझी से हम सब जीवन पाएँ तुझी से पाएँ मुक्ति
तेरी शरण मिले तो मैया जनम सफल हो जाए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर..............................
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर बहता जाए
युग युग से इस देश की धरती तुझसे जीवन पाए
गंगा तेरा पानी अमृत झर झर..............................4















































