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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

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शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

छुट्टा पशुओं से परेशान रात में लाठी डंडा एवं टॉर्च लेकर अपने खेत की रखवाली करता है किसान - लव तिवारी

आज मैं अपने मित्र से मिलने गया था मिलकर आते समय बरही राजापुर भड़सर जो एनएच 29 पर स्थित है मैंने देखा कि छुट्टा पशुओं का झुंड इकट्ठा है पशुओं के झुंड में अच्छी अच्छी गाय बछिया एवं बछड़े थे झुंड के अंदर अधमरा कमजोर सड़क के किनारे एक गाय एक छोटी बछिया एवं एक बछड़ा जो बड़े कद का था उसका आगे का पैर कटा हुआ था पैर से रक्त निकल रहा था एक छोटे बछड़ा का आंख के ऊपर चोट लगी थी देखने में लग रहा था कि कोई इसको लाठी से मार दिया हो यह सब दृश्य देखकर बहुत ही दुःखी हुआ मैं मुख्यमंत्री माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी से निवेदन करता हूं कि ब्लॉक तहसील जिला स्तर पर जो गो आश्रय बना है उसकी मॉनिटरिंग एक ईमानदार छवि वाले अफसर से कराएं आप से एक और अनुरोध करता हूं कि इन घुमक्कड़ जानवरों से हम किसान बहुत ही परेशान हैं। जिसका हम व्याख्या नहीं कर सकते किसान दिन में अपने खेतों में काम करता है और रात में लाठी डंडा  एवं टॉर्च लेकर अपने खेत की रखवाली करता है जिसके चलते 24 घंटा जागना पड़ता है कुछ किसान दिन में काम रात में अपने फसल की सुरक्षा मैं लगे रहते हैं जिससे किसानों को शारीरिक रूप से अस्वस्थ भी होना पड़ता है जो माननीय प्रधानमंत्री जी या आपके द्वारा किसानों की आय दोगुना होने की बात की जाती है उसमें यह दृश्य बाधक है किसान तभी खुशहाल हो सकता है जब तक कि इन छुट्टा पशुओं का कोई मुकम्मल व्यवस्था न हो जाए।।

जय जवान जय किसान जय विज्ञान
जय हिंद जय भारत मेरा देश महान




शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

संघर्ष में परम शांति का अनुभव करते हैं वस्तुत: उन्ही का जीवन सार्थक है श्री प्रवीण तिवारी पेड़ बाबा गाज़ीपुर

हमनें संघर्ष किया है ::--
****************
संघर्ष जीवन को परिभाषित करते हैं । जो कठिन संघर्ष में परम शांति का अनुभव करते हैं वस्तुत: उन्ही का जीवन सार्थक है । जो संघर्ष किया है , खतरों के बीच रहा है उन्ही का जीवन विकसित हो सका है ।जिंदगी में यदि खतरा नहीं है , संघर्ष नहीं है तो सोचिए कुछ न कुछ गड़बड़ है । व्यक्तित्व का विकास संघर्षों से ही तो होता है । और हम गर्व से कह सकते हैं कि हमने संघर्ष किया है ।

पढ़ाई समाप्त करने के बाद हमारे सभी मित्र कहीं ना कहीं ऐडजस्ट हो गए लेकिन हमने संघर्ष को चुना । हमारा लक्ष्य कभी भी धन कमाने का नहीं रहा । हम तो स्वक्षंद रूप से अपना जीवन जीने का रास्ता चुने । थोड़े दिनों तक हमसे जुड़े लोग परेशान हुए लेकिन बाद में वो हमारे बारे में सोचना ही छोड़ दिए । दैवयोग से हमें छोड़ कर बाकी सभी लोग नौकरी करते हैं । इसीलिए हमारे न कमाने से हमारे घर में किसी को अधिक परेशानी नहीं हुई । हमारी भी परवरिश इस ढंग से हुई थी सादगी हमारा स्वभाव बन गया , किसी से रत्ती मात्र भी आपेक्षा नहीं है । इसका परिणाम यह निकला कि हमारे घर के सभी लोग हमारी आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं ।

वैसे तो हम अबतक के जीवन में बहुत कुछ किए और छोड़े लेकिन एक काम लगातार करते रहे वह है गायत्री मंत्र का लेखन । गायत्री मंत्र लिखते-लिखते गायत्री परिवार के संसथापक वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं.श्री राम शर्मा आचार्य को पढ़ने का अवसर मिला और हमने उनको अपने जीवन में जीना शुरू कर दिया । अब हम उनको पढ़ते हैं और वही करते हैं जो उसमें लिखा होता है । अब हम कह सकते हैं कि हमारे पास पारस है ।
अब हम अपना मूल्य समझ चुके हैं कि हम इस संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं । अब हम परिस्थितियों के दास नहीं हैं बल्कि उसके निर्माता , नियंत्रणकर्ता और स्वामी हैं । अभी तक हमने जो किया है वह अपने पुरुषार्थ से किया है इसके लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया है । हाँ जो भी किया है लोगों के सहयोग से किया है । लोगों ने हमारे ऊपर भरोसा किया है और हम भी अपने मास्टर को , अपने गुरु को बदनाम नहीं होने देंगे , लोगों के भरोसे को बनाए रखेंगे ।

आने वाले समय में हमें कुछ बड़ा करना है । सहयोग की भावना को विकसित करना है । लोगों को यह बताना है कि आपके धन पर मात्र आपका और आपके परिवार का ही अधिकार नहीं है बल्कि समाज का भी इसमें अंश है । अब मात्र व्यक्तिगत विकास से काम चलने वाला नहीं है बल्कि आपको सामूहिक विकास में भी अपना योगदान देना ही पड़ेगा , बिना इसके काम चलने वाला नहीं है ।

हमे इस बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है कि क्या हम सुख और सुख की अभिलाषा करने के लिए , अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पैदा हुए हैं या फिर प्रकृति ने हमें अपने एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पैदा किया है ।

आपके सोचने में कहीं विलंब न हो जाए और हमें भी कहीं हुदहुद , सुनामी , उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे प्रलयंकारी विभीषिका से न जुझना पड़े ।

हमारी कुछ समाज निर्माण की योजनायें हैं , हमें आपके सहयोग की आवश्यकता है । आइए हम लोग मिलजुलकर एक नये समाज की , एक नये जमाने की कल्पना को साकार करते हैं ।



गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

ऐसी दुनियां रब ने क्यो दी,मानवता फिर सूली चढ़ गई- लव तिवारी

खाना दिया पर इज्जत ना दी।
ऐसी दुनियां रब ने क्यो दी।।

जात पात के भेद भाव में।
मानवता फिर सूली चढ़ गई।।

आदमी में रहा न इंसानियत,
देखते-2 ये जमाना बदल गई।।

ब्राम्हण भी न रहा पवित्र अब,
उसको भाये मुर्गा और मच्छी।।

इस दुनियां का अब क्या होगा।
बेटी बहु में इज्जत मर गई।।

रचना - लव तिवारी
संपर्क सूत्र- +919458668566



बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

बोला का बा, हमरे गाँव में का बा। (प्रधानी चुनाव के सन्दर्भ में) - लव तिवारी

बोला का बा, हमरे गाँव में का बा।
प्रधान होला केहू
केहू मोहर मारेला
पैसा होला जनता के
केहू कुरता पैजामा झारेला
बोला का बा, हमरे गाँव में का बा।

नारी बजबजात बा
सफाई कर्मी ठठात बा
रोज न फेरा लागे जिनकर
पैंतीस हज़ार जे कमात बा
बोला का बा, हमरे गाँव में का बा।

दारू अब दवाई जईसन
जुवा खेले लइकवा गईनन
घर में खाएके जेकरा नइखे
ओकरा के जुवा मिठाई जईसन
बोला का बा, हमरे गाँव में का बा।

प्रधानी अब आइल देख
प्रत्याशी लोग के बौराइल देख
झूठ मुठ के वादा करके
फिर जनता भरमाईल देखब
बोला का बा, हमरे गाँव में का बा।

गढ़ही में पानी के जगह पर
गांव के कूड़ा करकट जमलस
घर दुवार के छोड़कर लोगवा
ओकरा ऊपरा माटी पटलस।
बोला का बा, हमरे गाँव में का बा।

गरीबन कार्ड धारक के चाऊर
दोकनिया पर बेचाला,
बेच के एकरे पैसा से,
कतरनी चाउर किनाला,
बोला का बा, हमरे गाँव में का बा।

फर्जी काम नरेगा में,
रोज देखावल जाला,
काम करे केहू, केहू के,
झूठही हाज़री भरल जाला
बोला का बा, हमरे गाँव में का बा।
हर गांव की यह बिडम्बना
लव तिवारी






सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

लावारिश लाशों का नि:स्वार्थ भाव से अन्तिम संस्कार करने वाले कृष्णा नन्द उपाध्याय ग़ाज़ीपुर - लव तिवारी


  • दाह संस्कार  का मतलब देह रूपी शरीर का संस्कार है। मृत्यु के पश्चात वेदमंत्रों के उच्चारण द्वारा किए जाने वाले इस संस्कार को दाह-संस्कार कहते है। , श्मशान कर्म तथा अन्त्येष्टि-क्रिया आदि भी कहते हैं। इसमें मृत्यु के बाद शव को विधी पूर्वक मुखाग्नि के द्वारा उस व्यक्ति के कुल का व्यक्ति के द्वारा अग्नि को समर्पित किया जाता है। यह प्रत्येक हिंदू के लिए आवश्यक है। केवल संन्यासी-महात्माओं के लिए एक विशेष प्रकार का प्रावधान है जो समाधि होने के कारण शरीर छूट जाने पर भूमिसमाधि या जलसमाधि आदि देने का विधान है। कहीं-कहीं संन्यासी का भी दाह-संस्कार किया जाता है और उसमें कोई दोष नहीं माना जाता है।

  • इसी धरती पर कई ऐसी लावारिस लाशें होती है जिनका न कोई आगे है न कोई पीछे रोने वाला होता है। जिसका कोई नही होता उसके लिए भगवान ने एक ऐसे व्यक्ति का चुनाव करता है। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व आदरणीय श्री कृष्णा नन्द उपाध्याय जी जिन्होंने ग़ाज़ीपुर था ग़ाज़ीपुर के आस पास क्षेत्र के 600 लावारिश लाशो का विधि पूर्वक ढाह संस्कार किया है।

  • भगवान से यही विनती करते है ऐसे व्यक्तित्व को इसी तरह समर्थवान बनाये एवं शक्ति दे जिससे यह इस तरह के सामाजिक कार्यो को विधि पूर्वक अंजाम देते रहे।।
  • धन्य है बड़े भैया आप आप की हमेशा जय हो चरण बन्दन आप को।।
  • लेखक- लव तिवारी




रविवार, 18 अक्टूबर 2020

किसी जाति समुदाय से नही बल्कि भ्रष्ठ राजनेताओं व अधिकारियों का विरोध करें भारतीय नागरिक- लव तिवारी

किसी जाति समुदाय नही बल्कि भ्रष्ठ राजनेताओ अधिकारियों से धृणा करनी चाहिए। चुनाव एक संवैधानिक व्यवस्था है। जो किसी गांव क्षेत्र या देश के जन प्रतिनिधि को सर्व सम्मति से चुनने का अधिकार देता है। 

भारतीय राजव्यवस्था पूर्ण रूप से परिवार वाद से जुड़ी है। जिस सस्ता का मुखिया उस सत्ता की बाग डोर संभालता है। उसके अनुचित ढंग से की गई शासन प्रणाली के बाद जातिगत राजनीति की वजह से या तो वो खुद देश या क्षेत्र की बागडौर सम्भलता है या फिर उसका उत्तराधिकारी। इस विशेष व्यवस्था के चलते देश का सर्वनाश हो चुका है।

मुझे एक तस्वीर जो शोशल मीडिया के माध्यम से मिली जिसमे ये दर्शाया गया है कि अमेरिका जैसे महान देश के 2 बार राष्ट्रपति रह चुके बराक ओबामा किसी प्राइवेट संस्था में नौकरी करके अपने बीते जीवन को जी रहे है। वही हमारे भारत देश का राजनेता जब तक कब्र में नही जाता देश को दीमक की तरह खोखला करता है और उसके जाने के बाद उसका उत्तराधिकारी। हमारे प्रदेश के 1 दिन तक भी रहे चुके विधायक सांसद एवं अन्य नेताओं को पेंशन मिलती है जो एक विशेष व्यवस्थित जीवन जीने के लिये पर्याप्त है। लेकिन दुःख की बात यह है बड़े नेताओं के साथ वो व्यक्ति भी उसी तरह के भृष्ट जीवन को जी रहा है जैसे बड़े नेता। ग्राम सभा का चुनाव अपने जन अपने गांव के छोटे बड़े भाइयों एवं बड़े बुजुर्गों के मदद से लड़ा जाता है। बाद में उनके विश्वास पर खरा उतरना भी एक नैतिक पूर्ण दायित्व व जिमेवारी है। आप को बता दे कि BDC में जीते प्रत्याशी को भी 7 से 8 लाख की बड़ी रकम वाली राशि गांव के विकास के लिए मिली थी लेकिन उस राशि का 10 प्रतिशत भी उपयोग गांव के विकास में नही किया गया। ग्राम प्रधान की इनकम को तो मत ही समझिए इनके 5 वर्षों में आये विकास के लिए धन करोड़ो में होते है। और विकास के नाम पर थोड़े से काम और जनता नही बल्कि अपने गांव के अपने लोगो को मूर्ख बनने की मुहिम उसी तरह चलती है जैसे वर्षो से चली आ रही है।

फिर चुनाव पास है और ऐसे ही कार्यो का लेखा जोखा फिर आप को देखने को मिलेगा। और गांव के विकास की कहानी फिर उन्ही पन्नो में रह कर सिमट जाएगी।।

कुछ हिन्दू विरोधी संगठन द्वारा हिन्दू धर्म और संस्कृति को बदनाम करने की साजिश- लव तिवारी

कुछ हिन्दू विरोधी संगठन द्वारा कुछ सवालों के जवाब माँगे है जो कि सोशल मीडिया की सबसे बड़ी अफवाह है और इस अफवाह को लेकर हिन्दू धर्म और संस्कृति को बदनाम और लज्जित किया जाता है। ये काम पहली बार नही किया जा रहा है जिस प्रकार भारतीय पाठ्यक्रम से हिन्दू सम्राटों व उनके योगदान को हटाकर मुस्लिम शासकों की महत्ता बताई जाती है उसी तरह विवाह की झूठी अफवाह भी इसी तरह फैलाई जाती है, उसका खंडन कर रहा हूँ बहूत खोज कर और सही जानकारी लाया हू अगर आपको भी सही लगे तो कृपया इस मैसेज को अधिक से अधिक शेयर करें और अपने मित्र को इस तरह की जानकारी से अवगत कराएं।।

प्रश्न- 1 विश्व हिन्दू परिषद के नेता अशोक सिंघल ने अपनी बेटी की शादी मुख़्तार अब्बास नकवी से की है।

खंडन अशोक सिंघल जी ने शादी नहीं की थी , वे ब्रह्मचारी थे, उनकी कोई औलाद नहीं है, फिर अशोक सिंघल जी की बेटी की शादी किसी मुस्लिम से होने का कोई सवाल ही पैदा नही होता।
हाँ मुख्तार अब्बास नकवी की पत्नी का नाम सीमा जरुर है, लेकिन वो भी एक हिन्दू पिता और. मुस्लिम माँ की सन्तान हैं) जहाँ पिता हिन्दू धर्म को छोड़कर कर मुस्लिम लड़की से शादी कर सकता है वहाँ बेटी भी मुस्लिमों के के साथ शादी करने की विशेष रुचि उसके गैर हिन्दू माता ने उसे दिए होंगे।।

2 मुरली मनोहर जोशी ने अपनी बेटी की शादी शाहनवाज़ हुसैन से की है।

खंडन = मुरली मनोहर जोशी की बेटी की शादी इलाहाबाद के हिन्दू परिवार में हुई है। श्री जगदीश स्वरुप के घराने में। जो इलाहाबाद के ECC में १९८५ बैच में नाम था, अनंत स्वरुप, जो आज कल स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हैं। उनके बड़े भाई विकास स्वरुप विदेश सेवा के नामी अधिकारी हैं।
यहाँ भी एक बात और - (शहनवाज हुसैन की पत्नी रेनू हैं, जो एक प्रसिद्द टीचर हैं, और उन्होंने आज तक इस्लाम कुबूल नहीं किया है, आज भी उनके घर हिन्दू त्योहार मनाये जाते हैं)

3. मोदी की भतीजी की शादी मुस्लिम से हुई है।

खंडन= नरेंद्र मोदी जी की भतीजी की शादी कट्टर हिन्दू से हुई है जो RSS के हैं ! मोदी जी की सिर्फ दो भतीजियों की शादी हुई है, और दोनों के पति.. हिन्दू हैं।

4. लाल कृष्ण आडवानी की बेटी ने दूसरी शादी मुस्लिम से की है।

खंडन = लाल कृष्ण अडवानी की बेटी ने तो आज तक शादी ही नहीं की ! हाँ उनके बड़े भाई की बेटी, यानी भतीजी ने अपनी *दूसरी शादी* प्रेम विवाह के रूप में एक मुल्ले से की थी, लेकिन फिर सात महीने के बाद, मुस्लिम आदतों के कारण, तलाक हो गया। आडवानी जी की बेटी प्रतिभा ने शादी ही नहीं की है।

*5.* सुब्रह्मनियम स्वामी की बेटी "सुहासिनी " ने मुस्लिम से शादी की है ।

खंडन= सुब्रमन्यम स्वामी जी की लड़की ने अवश्य प्रेम विवाह किया मुस्लिम से। सुहासिनी स्वामी लन्दन में पढ़ती थीं, और वहीं पूर्व विदेश सचिव, शिया सलमान हैदर का बेटा शिया नदीम हैदर भी पढ़ता था, और दोनों में प्रेम हो गया। मगर सुहासिनी ने भी आज तक इस्लाम कबूल नहीं किया है, आज भी उनकी लड़की हिन्दू धर्म को मानती हैं, और अपने पति को भी हिन्दू बना चुकी हैं। शादी Civil Marriage Boston, US में हुयी, फिर भारत में Re-Register हुआ। उनकी शादी भी इस्लामिक रीति से नहीं हुई। उनको एक बेटा है, प्रतीक नामक जिसका धर्म आज तक हिन्दू धर्म है, और उसका आज तक खतना भी नहीं हुआ है।

6.शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने अपनी पोती की शादी मुस्लिम से की।

खंडन = बाला साहेब ठाकरे जी की पोती की शादी एक गुजराती लोहाना परिवार में हुई गई है। सामना के सम्पादक, प्रेम शुक्ल कई बार उस लड़के के पूरे खानदान का विवरण भी अखबारों में कई बार दे चुके हैं। ये अफवाह फैलाने वाले मुल्ले ने ये सोच भी कैसे लिया कि बाला साहेब ऐसा घिनौना काम करेंगें !

7. प्रवीण तोगड़िया की बहन की शादी कब हुई बे जिहादियों.जिससे हिन्दुओं का विश्वास हिन्दू नेताओं के प्रति कम हो।

इसलिए आप सच जानिये, ताकि उन बिके हुए जिहादी और सेक्युलरों को जवाब दे सकें ।।

इस मेसेज को फ़ॉरवर्ड करना न भूलें। कम से कम अपने दोस्तों को तो जरूर बताएँ। इसी संक्षेप में भारतीय शिक्षा पद्धति से हिन्दू सम्राटो और उनके योगदानों के बारे में न बताकर मुस्लिम शासको के बारे में बताया जाता है।जो बच्चा बचपन से ही इस तरह की अध्ययन को अपना चुका है। वो तो मुस्लिमों के आदर्श को अपनायेगा ही। भारत के उन दो महापुरषों को विशेष नमन जिनकी वजह से आज भी भारत देश मे भारतीय संस्कृति पूर्ण रूप से बची हुई है।

तुलसीदास- जिन्होंने ने रामचरित मानस की रचना कर के भारतीयों में प्रभु राम की भक्ति और चरित को उजागर किया।।

रामानन्द सागर- इस महान व्यक्तित्व ने भारतीय पुराणों और धर्म के आधार पर सीरियल बनाकर भारतीय जनो में फिर से हिन्दू धर्म के उच्च कोटि की सँस्कृति का विस्तार किया।।
भारत माता की जय !

लेखक- लव तिवारी



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विवाहभोज एवं मृत्युभोज कुरीति नहीं है समाज और रिश्तों को सँगठित करने का अवसर है- लव तिवारी

मृत्युभोज के विरोध पर बहुत से मत है बहुत ज्ञानी समुदाय द्वारा कुछ न कुछ लिखा जा रहा है आजकल इस विषय वस्तु पर मेरा मत जरा अलग है मित्रों पोस्ट का प्रारंभ मानवता को शर्मसार करने वाले एक खबर से करुँ, अमेरिका में स्थापित दो धनाढ्य भाइयों के पिता की जब मौत हो जाती है तो एक भाई दूसरे भाई से कहता है कि इस बार तुम चले जाओ, माँ मरेगी तो मै चला जाउंगा, पिता के मरने के बाद जो माता के जल्द मरने की इच्छा करे वो पूत नही कपूत है।।

मृत्युभोज कुरीति नहीं है. समाज और रिश्तों को सँगठित करने के अवसर की पवित्र परम्परा है,
हमारे पूर्वज बिना मोबाइल और कम पढ़ लिखकर भी हमसे ज्यादा ज्ञानी थे ।आज मृत्युभोज का विरोध है, कल विवाह भोज का भी विरोध होगा.. हर उस सनातन धर्म परंपरा का विरोध होगा, या ये कहिये कि किसी न किसी रूप में विरोध हो रहा है। लोगों के द्वारा निमंत्रण में आना केवल खाना पीना ही नही बल्कि उनसे रिश्ते और समाज मजबूत होता है।।

इसका विरोध करने वाले मूर्खो इस बात को समझो हमारे बाप दादाओ ने रिश्तों को जिंदा रखने के लिए ये परम्पराएं बनाई हैं। ये सब बंद हो गए तो रिश्तेदारों, सगे समबंधियों, शुभचिंतकों को एक जगह एकत्रित कर मेल जोल का दूसरा माध्यम क्या है, केवल दुःख और सुख दो ऐसे पहलू है जहाँ आदमी अब भी एकत्रित हो रहा है, दुख की घड़ी मे भी रिश्तों को कैसे प्रगाढ़ किया जाय ये हमारे पूर्वज अच्छे से जानते थे। हमारे पूर्वज बहुत समझदार थे, वो ऐसे आयोजन रिश्तों को सहेजने और जिंदा रखने के किए करते थे हाँ ये सही है की कुछ लोगों ने मृत्युभोज को हेकड़ी और शान शौकत दिखाने का माध्यम बना लिया, आप पूड़ी सब्जी ही खिलाओ. और हमारे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बरहा यानी अपने आस पास के 12 से 21 गांव के लोगो को बुलाकर खिलाने का प्रयोजन था और कुछ धनी समुदाय आज भी करते है।।

1.कौन कहता है की 56 भोग परोसो..
2.कौन कहता है कि 4000-5000 लोगों को ही भोजन कराओ और बर्चश्व दिखाओ, परम्परा तो केवल 16 ब्राह्मणों की थी। आगर ब्राम्हण जाति से परहेज है तो किसी निर्धन व्यक्ति को ही भोजन कराओ।

मैं खुद दिखावे की विरोधी हूँ लेकिन अपनी उन परंपराओं की कट्टर समर्थक हूँ, जिनसे आपसी प्रेम, मेलजोल और भाईचारा बढ़ता हो.कुछ कुतर्कों की वजह से हमारे बाप दादाओं ने जो रिश्ते सहजने की परंपरा दी उसे मत छोड़ो, यही वो परम्पराएँ हैं जो दूर दूर के रिश्ते नाते को एक जगह लाकर फिर से समय समय पर जान डालते हैं । सुधारना हो तो लोगों को सुधारो जो आयोजन रिश्तों की बजाय हेकड़ी दिखाने के लिए करते हैं,

किसी परंपरा की कुछ विधियां यदि समय सम्मत नही है तो उसका सुधार किया जाये ना की उस परंपरा को ही बंद कर दिया जाये, हमारे बाप दादा जो परम्पराएं देकर गए हैं रिश्ते सहेजने के लिए उसको बन्द करने का ज्ञान मत बाँटिये मित्रों, वरना तरस जाओगे मेल जोल को, बंद बिल्कुल मत करो, समय समय पर शुभचिंतकों ओर रिश्तेदारों को एक जगह एकत्रित होने की परम्परा जारी रखो. ये संजीवनी है रिश्ते नातों को जिन्दा करने की...

अब वो दिन दूर नही जब पास बैठे माँ की बात सुनने वाला भी नही रहेगा एक छत के नीचे रहकर इस मोबाइल और इनरनेट युग ने अपने आप इस परंपरा से होने वाले मेलजोल को खत्म कर दिया है। मृत्यु भोज का समर्थन मैं खुद भी नही करता था लेकिन अगर मृत्यु भोज एवं विवाह भोज की व्यवस्था अगर बन्द हुई तो एक सभ्यता और सँस्कृति का भी नाश होगा जो बहुत से हिन्दू विरोधी संगठनों की रणनीति है। 

लेखक- लव तिवारी





शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

जय जय गुरु नंदन हाथ जोड़ हम बन्दना करते है। हम आये शरण तुम्हारी तेरी हम पूजा करते है।

जय जय गुरु नंदन हाथ जोड़ हम बन्दना करते है।
हम दीन दुःखी है भारी आप दुःखियों के रखवारे 
हम आये शरण तुम्हारी तेरी हम पूजा करते है।

माथे तिलक बिराजे गले मे माला साजे
स्वामी तीन लोक के राज ध्यान हम तुम्हरा करते है।
दास दासी को ये बर दीजो मेरा चित चरणों मे लीजो
स्वामी आये शरण तुम्हारी ध्यान हम तुम्हारा करते है।।

हरि ॐ जय श्री जग तारण 
कलि के कलुष बिभंजन भव पार 
हरि ॐ जय श्री जग तारण 

संत मत परमहंस रूप धरी नाम तत्व दरशाओ
दस गुण ब्रम्ह सनातन करके आयो
जप जपाय न हद बतलाकर भक्ति योग प्रकटायो
पतित होय शरणागत तुरतहि अपनायो
हरि ॐ जय श्री जग तारण ......

परम् दयालु शरण अशरण हरि रूप मनोहर धरी
आरती करत पतित गुरु सेवक आरती हरि को 
हरि ॐ जय श्री जग तारण ......

स्तुति
मैं अवगुण हार की विनती सुनहु गरीब निवार
जो मैं पूत कपूत हू स्वामी बहुरी पिता को लाज
नही विद्या नही बाह बला है नही ख़र्चन को दाम
मौसे ऐसे पतित की लाज रखो भगवान
अवसर राखो द्रोपदी संकट से प्रह्लाद
कहन सुनन को कछु नही स्वामी
शरण परे की लाज
माता पिता मरी स्वामी शरण जाऊ किसके
स्वामी बिन और दूजा आस करु किसीकी
पार ब्रम्ह परमेश्वर पूरण सचितानन्द
नमस्कार स्वामी आप की सब सन्तन के सुख कंद

अकाल मृत्युहरणम सर्व व्याधि विनाशितम।
गुरु चरणामृत जो पिये पूर्वजन्म न आवतरणम।।

काली मंत्र- ओम काली काली महाकाली बैठी नीम की डाली खाये पान बजावे ताली जय माँ दुर्गा जय माँ काली।।
त्राहिमाम रक्षा करो।।



रविवार, 11 अक्टूबर 2020

महान समाज सेवी आदरणीय श्री प्रवीण तिवारी जी के साथ अपने गांव युवराजपुर में देववृक्ष हरिशंकरी का वृक्षारोपड़- लव तिवारी

हमारे विशेष अनुरोध पर ग़ाज़ीपुर के महान समाज सेवी आदरणीय श्री Praveen Tree पेड़ बाबा जी एवं रेवतीपुर ब्लाक प्रमुख आदरणीय श्री Mukesh Rai जी के साथ ग्राम के विशेष सम्मानित जन क्रमशः श्री Heera Singh जी , अम्बरीष सिंह (गुड्डू भैया) Ud Somvanshy दीपक सिंह जी बड़े भैया श्री Ajit Singh Yogi मेरे चाचा श्री Ajay Tiwari के साथ मेरे ग्राम समाज के मेरे प्रिय अनुज भाइयों में क्रमशः Kush Tiwari पंडित Piyush Dubey , Vikas Singh , Vivek Singh Chandan Singh, Sandeep Singh अमित सिंह, अंकित सिंह दादा , Vishal Yadav S K एवं Sushil Tiwari अपना गाँव युवराजपुर के सहयोग से हमारे ग्राम युवराजपुर में देव वृक्ष हरिशंकरी के पांच पेड़ो के लगाने का कार्य सफलतापूर्वक संम्पन हुआ।

"गांव में युवाओं के साथ हमारे बड़े भाइयों के उत्साह को देखकर हमारे समाजसेवी श्री प्रवीण तिवारी जी के साथ आये रेवतीपुर के ब्लाक प्रमुख श्री मुकेश राय जी ने विशेष प्रसंसा की,एवं भाविष्य में इस तरह के और आयोजन की बात कही"

दिव्य #देववृक्ष #हरिशंकरी की अपने गांव युवराजपुर में विस्तृत जानकारी

1- फुलवारी दाई गंगा मैया मुख्य मार्ग युवराजपुर
2- युवराजपुर गंगा मैया के अरार से 20 मीटर पहले
3- प्राथमिक विद्यालय युवराजपुर ग़ाज़ीपुर
4- श्री नाथ बाबा मंदिर परिसर युवराजपुर ग़ाज़ीपुर
5- उच्चमाध्यमिक विद्यालय परिसर युवराजपुर ग़ाज़ीपुर

विशेष_आभार- हीरा सिंह, अम्बरीष सिंह ( गुड्डू भैया) उधम सिंह जी, Ajit Singh Jogi

आप सभी अन्य ग्रमीणजनो से विशेष अनुरोध है कि जिस प्रकार इस विशेष देववृक्ष को लगाने में आप सभी का विशेष सहयोग मिला है, उसी प्रकार आप सभी इस पेड़ो के विशेष सुरक्षा का दायित्व भी ले और इन पेड़ों के विशालकाय और अपने पूर्णरूप होने तक सहयोग करे। जिन व्यक्ति विशेष को अपने ग्राम क्षेत्र में इसतरह के विशेष देववृक्ष लगवाने है वो मेरे से संपर्क करके अपने स्थान व गांव की सूचना दे सकता है।।

धन्यबाद-
#लव_तिवारी
#युवराजपुर #ग़ाज़ीपुर #उत्तर_प्रदेश 232332











शनिवार, 3 अक्टूबर 2020

प्रसिद्ध समाजसेवी श्री प्रवीण तिवारी जी के साथ अपने ननिहाल में हरिशंकरी देववृक्ष लगाते हुए- लव तिवारी

आपके के पास भी कोई उचित स्थान है कृपया करके हमे सूचित करें आपका थोड़ा सा सहयोग इस प्रकृति को हरा भरा और स्वच्छ वातावरण दे सकती है हम करेगे तभी हमारी आने वाली पीढियां उसका उपयोग कर सकेगी दिनांक 27-09-2020 दिन रविवार को हम दोनों भाई आपने गुरु जी प्रसिद्ध समाजसेवी श्री प्रवीण तिवारी जी Praveen Tree के साथ आपने ननिहाल जैसा कि नीचे के लिंक में गुरुजी के द्वारा वर्णन किया गया है पेड़ लगाने मोहम्दाबाद तहसील के अंतर्गत सिलाइच गांव के लिए प्रस्थान किये रास्ते मे बहुत सारे पीपल पाकड़ के छायादार वृक्ष देखने को मिले जिसमे से कुछ 100 साल तो कुछ 200 साल पुराने थे आज हम किसी पूर्वजो ने ये पूण्य कार्य किया है तभी हम देख रहे थे कि बहुत कड़ी धूप के चलते पैदल या साइकिल राहगीर वहां पर छायादार पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे हमे ये सोचना है हमारे पूर्वज तो ये पूण्य कार्य कर के गए है जिसे हम उसका प्रयोग कर रहे है लेकिन हमने क्या दिया है जो हमारे आने वाली पीढ़ियो के लिए सहायक हो सके क्यो दुनिया मे सभी चीजें नश्वर है एक न एक दिन सभी नष्ट हुई है हमारा भी कुछ कर्तव्य बनता है कि हम भी कुछ प्रकृति को सुंदर बनाने में कुछ सहयोग करे धन्यवाद

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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

पिता का कर्तव्य निभाते हुए आधे राष्ट्र का कन्यादान देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी- लव तिवारी

जानिए नोट वाले गांधी के बारे में

ये कोई सन्त,भगवान या फरिश्ता नही था बल्कि एक आम आदमी था.

इंग्लेंड मे पढ़ा एक बैरिस्टर अफ्रीका मे एक स्मगलार की केस लड़ने गया, जहाँ अपमानित होने पर बदले की भावना से धधकते हुए, बेबसी मे अहिंसक आंदोलन किया.उसने मूल अफ्रीकियों के खिलाफ "बोअर युद्ध" मे अंग्रेज सैनिकों की ओर से अश्वेत लोगों के खिलाफ "हिंसक युद्ध" मे भी भाग लिया.
उसके भाषण कौशल्य को देख कर अँग्रेज़ों ने उसे भारत मे, लोकमान्य तिलक द्वारा आम जनता मे जगाई हुई -"संपूर्ण स्वातन्त्र्य की धधकने लगी हुई आग" - को बुझाने के लिए सुपारी दी जिसको उसने बड़ी ही - "धूर्तता - कुशलता और असीम कुटिलता" से पूरा किया. उसने लोगों को दिल्ली वाले कंजर की तरह सत्ताधारी अंग्रेज़ो से मिलीभगत करके झुठेऔर दिखावटी आंदोलन करके "बाल गंगाधर तिलक" की सारी मेहनत और देशभक्ति की उर्जा को - जनता के मन से नष्ट कर दिया.
इसका सबसे बड़ा सबूत है कि, उसने कोई भी आंदोलन पूर्णता की ओर नही ले गया....
एक आदमी सारी दुनिया को बेवकूफ़ कैसे बना सकता है यह तो केवल इस "महात्मा(?)" ने ही साबित किया...
जब कांग्रेस अध्यक्ष के लिए चुनाव हो रहा था नेताजी सुभाष चंद्र बोस लड़ रहे थे और मोहनदास ने अपना उम्मीदवार "पट्टाभी सीतारमैया" को खड़ा किया था..
उसके उम्मीदवार -"पट्टाभी सीतारमैया" को मात्र दो मत मिले और सुभाष चंद्र बोस को 17 वोट मिले।
मोहन ने कहा कि -- "पट्टाभी सीतारामय्या" की हार मेरी हार है और मैं कांग्रेस से इस्तीफा देता हूं।"

यह सुनकर - सुभाष चंद्र बोस को बहुत दुख हुआ कि - मेरी जीत की वजह से चूतिया कांग्रेस से इस्तीफा दे रहा और खुद सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया
और चूतिये से कहा कि आप कांग्रेस मत छोड़िए .
वो इस्लामियों" को बख़ूबी समझता था और उनसे डरता था
इसीलिए सदैव उनके पक्ष में खड़ा होता था चाहे "ख़िलाफ़त आंदोलन" हो, "मोपला के दंगे" हों या "अब्दुल रशीद" हो, हर जगह ये उनके पक्ष में खड़ा दिखा
कोई भी कोई एक उदाहरण देखने को नही मिलेगा जब ये हिन्दुओं के पक्ष में खड़ा हुआ हो।
अरे पक्ष छोड़िए, ये निष्पक्ष भी रहा हो तो कोई बात होती।
हम गोडसे जी के ऋणी हैं जो इस नटवरलाल से हमें मुक्ति दिला दी।
आज हमारे देश में उत्पन्न अधिकतर समस्याओं का बीजारोपण इसी का किया है।
ये “चंगू मंगू” आपस में मिले, एक इस देश का “बाप” बन बैठा और दूसरा “चाचा”
इसलिए गांधी को आजादी का "हीरो" कहना उन "सभी क्रान्तिकारियों का अपमान" है जिन्होंने देश की आजादी के लिए "अपना खून बहाया" था।

यदि "चरखों" की "आजादी की रक्षा" सम्भव होती है तो बार्डर पर टैंकों की जगह चरखे क्यों नहीं रखवा दिए जाते ...??...
🙏🏻🙏🏻🙏🏻



गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

आदत तुम्हारी इतनी गन्दी और राजनेता कहलाते हो- लव तिवारी

राजनीति की आड़ लेकर तुम झूठा शोक मनाते है।
आदत तुम्हारी इतनी गन्दी और राजनेता कहलाते हो।।

जब सत्ता में रहते हो तो अपने मन की करते हो।।
और विपक्ष में होते तो सड़क पर जाम लगाते हो।।

मानवता से कुछ नही लेना और न कुछ दरिंदगी से।
भोली भाली जनता को तुम ऐसे ही मूर्ख बनाते हो।।

वोट की राजनीति में तुम्हें नही पहचान अपनों की।
सगे बेटे का कत्ल करके सिंहासन पर बैठ जाते हो।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- १-अक्टूबर-२०२०



बुधवार, 30 सितंबर 2020

उनसे पूछो क्या हालत है। बेटी जिनकी जलाई है- लव तिवारी

कैसा मंजर, यह कैसा दृश्य है।
यह कैसी आफत आयी है।
घर से विदा होती जिस बहन की
अर्थी ने भी की रुसवाई है।।

मानव में रही न मानवता
डरी सहमी अब बच्चियां भी
इन दरिंदो को क्या सज़ा दे
जो हवस का बना पुजारी है।।

सत्ता के नेताओं को भी
भाती अपनी राजनीति ही
उनसे पूछो क्या हालत है।
बेटी जिनकी जलाई है।।

कब सुधरोंगे तुम दरिंदो
कब होगा तुम्हारा मन निर्मल
गंगा के इस देश मे तुमने
आज नरक नगरी बसाई है।।

रचना - लव तिवारी
दिनांक- १-अक्टूबर-२०२०
ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश






बुधवार, 16 सितंबर 2020

युवाओं को नौकरी देकर उनका भी सम्मान करो रचना- लव तिवारी

इंसानियत के नाम को ऐसे न तुम बदनाम करो ।
युवाओं को नौकरी देकर उनका भी सम्मान करो।।

खेत मे रोज परिश्रम करके बाप बेटे को पढ़ता है।
और पूछता इतने में कैसे सब कुछ हो जाता है।।
इस खून पसीने की कमाई को ऐसे न बर्बाद करो।
युवाओं को नौकरी.......

नमक रोटी और कुछ बिस्किट के साथ बच्चे रहते है
हरदम भूखे पेट अन्न धन के अभाव सोते है।।
इनके इस बलिदान को व्यर्थ न सरे आम करो।
युवाओं को नौकरी............

बेरोजगारी में ये कैसा सविंदा का प्रारूप नया।
उधर लड़का कहता है प्राइवेट से है सरकारी बड़ा
लोगों के आत्मविश्वास को ऐसे न शर्मशार करो
युवाओ को नौकरी दो.........

रचना- लव तिवारी












सोमवार, 14 सितंबर 2020

भारतीय लोकतंत्र के महान नेता स्वर्गीय रघुवंश बाबू को विनम्र श्रद्धांजलि- सम्मी सिंह

कल रघुवंश बाबू चले गए औऱ छोड़ गए वो स्मृतियां जिसको कि हर गांधीवादी समाजवादी सहेजना चाहेगा। वह गंगा औऱ गंडक के कछार पर स्थित उसी वैशाली से आते थे जहां दुनिया का शुरुआती लोकतंत्र पुष्पित औऱ पल्लवित हुआ था ,जो वज्जि महासंघ की राजधानी थी औऱ दुनिया मे अहिंसा के अगुणित बीज बोने वाले जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर महाबीर स्वामी की जन्मस्थली भी थी। उसी वैशाली में नगरवधू आम्रपाली ने सम्पूर्ण एशिया को ज्ञानवान बनाने वाले बुद्ध को लैंगिक भेदभाव करने पर खुलेआम चुनौती दी थी औऱ दुनिया के इतिहास में यह पहला औऱ शायद अंतिम उदाहरण है जब एक नगरवधू के सामने एक सन्यासी ने नैतिक आधार पर घुटने टेके थे औऱ वह नगरवधू अपने को सवाल- जवाब से ऊपर उठाकर स्वयं को ईश्वर प्रदत्त नारी गुणधर्म के बल पर बुद्ध के शरण मे समर्पित दुनिया की पहली बौद्ध भिक्षुणी बन गयी थी।

इतिहास में वैशाली की अपनी महिमा है लेकिन आजादी के बाद बहुत कम ऐसे मौके आये जब किसी नेता के कारण किसी स्थान की महिमा उद्घाटित हुई हो लेकिन उन्ही कम उदाहरण में से रघुवंश प्रसाद एक ऐसे उदाहरण है जिन्होंने वैशाली को विश्व के फलक पर स्थापित करने का महान कार्य किया । वैशाली की धरती इस क्षण गर्व औऱ दुख दोनो महसूस कर रही होगी। गर्व इस बात पर कि ईसा से छ शताब्दी वर्ष पूर्व जनतंत्र की बुनियाद रखने वाले वैशाली ने लगभग ढाई हजार साल बाद एक ऐसा सपूत को जना था जो जम्हूरियत का न केवल रक्षक था बल्कि सम्पूर्ण जम्हूरी समाज के जीवन औऱ गरिमा को सर्वोच्च स्थान दिलाने में अपने जीवन को ही खपा दिया और दुःख इस बात पर की कि जीवन के अंतिम समय मे वैशाली के जनमत ने उस भदेस रघुवंश बाबू के खिलाफ अपना फैसला दिया जिस रघुवंश बाबू ने एक ज्ञानवान साधक की तरह राजनीति की काल कोठरी से न केवल बेदाग निकले बल्कि राजनीति के लक्ष्यों को पूरे देश के गाव, गरीब औऱ किसान के सवालो पर संसद से सड़क तक केंद्रित भी किये।

गणित के इस प्रोफेसर ने आरक्षण के बाद हिंदुस्तान की दूसरी सबसे बड़ी क्रांति का आधार बनी मनरेगा को न केवल सफलतापूर्वक लागू किया बल्कि उंसको हिंदुस्तान के बेसहारा गरीब -गुरबा का सहारा और ताकत भी बनाया।
आपातकाल की आग से निकले और जेपी तथा कर्पूरी ठाकुर की पाठशाला में पके इस महान समाजवादी नेता में गांधी औऱ लोहिया की तरह अपनी मिट्टी की समझ औऱ अंतिम व्यक्ति को गौरवपूर्ण जीवन उपलब्ध कराने की वह आग थी जिसकी ऊष्मा में वह अंतिम समय तक स्वयं को जलाते हुए एक ऐसे संसार को रचने में मशगूल रहे जो जीवन औऱ इतिहास दोनो को गौरव प्रदान करे।

हम स्वयं को सौभाग्यशाली मानते है कि हमे भी दो बार उनको सानिध्य में बैठकर कुछ जानने समझने का मौका मिला और आजीवन यह स्मृति जीवन मे ऊर्जा भरती रहेगी।
भारतीय लोकतंत्र के इस महान नेता को नमन।


गाँव मेरा प्यारा- पटकनिया,प्यार का नाम पटकनी है-रचना - हरबिंदर सिंह शिब्बू

शिष्य गुरु को उपहार देते हैं, परन्तु आज हिन्दी दिवस पर शिष्य को मैं यह कविता बतौर उपहार सस्नेह भेंट करता हूँ।
मेरा प्रिय शिष्य नितीश सिंह जो मेरे पड़ोसी गाँव पटकनिया का निवासी है, वह अपने गाँव का एक विस्तृत इतिहास परिश्रम से लिखा, जिसे पढ़ कर मैं बहुत प्रभावित हुआ, उसके उसी स्वग्राम परिचय को मैं काव्यरुप में प्रस्तुत कर उसको भेंट कर रहा हूँ, इसमें सारी जानकारी नितीश के लेख "मेरा गाँव पटकनिया" से लिया गया है।
                        

गाँव मेरा प्यारा- पटकनिया,प्यार का नाम पटकनी है।
मैं नितीश परिचय देता हूँ, ये मेरी भू-जननी है ।।
भौगोलिक सौंदर्य अगर बतलाऊँ तो , वो ऐसे है  ।
ढाई सौ वर्ष पूर्व में आकर लोग बसे यहाँ तब से है।।

कोई सुनियोजित संरचना नहिं,  पूछेंगे यह  कैसे है?
ज्यो-ज्यो आये लोग औऱ बस गये जैसे, का तैसे है।।
पूरब में कल्यान पूर,पश्चिम युवराज पुर ग्राम है।
उत्तर दूर मातु गंगे हैं, दक्षिण, अड़रिया गौरा, ग्राम है।।

ग्राम के नामकरण के पीछे, एक रहस्य बतलाता हूँ ।
गाँव पहलवानों का रहा, ये बुजुर्गों से सुनी सुनाता हूँ।
किस किस के मैं नाम गिनाऊँ, पहलवान यहाँ पट्ठे थे।
बुजुर्ग या फिर नौजवान जो भी थे , हट्ठे-कट्ठे थे।।

मलिकार ओस्ताद खलीफा इनको यहाँ कहा जाता।
बाहर का लड़वइया यहाँ पटकनी खा कर ही जाता।।
यही पटकनी देते - देते नाम पड़ गया ,  पटकनिया।
रेवतीपुर है ब्लाक यहाँ का,और तहसील जमानियां।।

स्वतंत्रता सेनानियों की ,यह धरती कहलाती है।
वंशनरायन मिश्र ,अमर सिंह जी की याद दिलाती है।।
इनका करूँ बखान ,तो बातें लम्बी होतीं जायेंगी ।
गाँव जलाया गोरों ने, ये भी बातें जुड़ जायेंगी।।

आज भी गाँव में सेवारत  फौजी भाई मिल जायेंगे।
गाँव मे नजर घुमाएंगे ,भूतपूर्व सैनिक दिख जायेंगे।।
पदकंदुक का खेल यहाँ पर रुचि से खेला जाता रहा।
गायन में मिश्रा जी लोगों का परचम लहराता रहा।।

कृषिप्रधान यह गाँव,बड़े खेतिहर में यही कहावत थी।
नरवन में नीरू,पटकनी में खीरु,लेकिन नहीं अदावत थी।।
और सिताब दियर में गरीब रा को याद किया जाता।
बाकी सब छोटे गृहस्थ थे , बड़ों में तीन का नाम आता।।

अंग्रेजी शासन में भी ,शिक्षा हित सतत प्रयास हुआ।
जे एन राय, जे एन सिंह द्वारा, शिक्षा का विकास हुआ।।
आज के दौर में भी प्रयासरत लोग यहाँ मिल जायेंगे।
ग्रामोन्नति हित मदद सगीना राम का नहीं भुलायेंगे।।

बहुत है बतलाने के लिए , मैं थोड़ा ही बतलाता हूँ।
गाँव की मैं मीठी बोली  भोजपूरी में बतियाता हूँ।।

गाजीपुर जनपद अंतर्गत गाँव और क्या बतलाऊँ।
आओ प्यारे पथिक,आपको,अपना गाँव मैं दिखलाऊँ

  रचना - हरबिंदर सिंह "शिब्बू"







शनिवार, 5 सितंबर 2020

मैं हालातों का मारा प्राइवेट शिक्षक हूँ।- डॉ शशिकांत तिवारी


मैं बी.एड हूँ ।
मैं एम.एड.हूँ ।।
मैं उतीर्ण नेट शिक्षक हूँ ।
मैं हालातों का मारा प्राइवेट शिक्षक हूँ ।।

मैं इंटिलिजेंट हूँ ।
मैं ब्रिलियंट हूँ ।।
मुझें अपनों ने लूटा ।
इसलिए साइलेंट हूँ ।।

मुझें परम् पावन बनाया गया ।
बड़े बड़े सब्ज़बाग दिखाया गया ।।
लेकिन अब न चम्पा , न बेला न , ही इत्र हूँ ।
  समायोजित हुआ गर्व से शिक्षक बना ।
             लेकिन अर्श से फ़र्श पर गिरा शिक्षामित्र हूँ ।।

 और इस कोरोना काल में कहना क्या हैं ।
  
          आधा पेट खाना हैं ।
           और किश्मत पर रोना हैं ।।
            अब अगले जन्म की तलाश हैं ।
       इस जन्म कुछ नही होना हैं ।।



शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

उठ जाता हूं सुबह-सुबह वो सपने सुहाने नही आते अब मुझे स्कूल न जाने वाले बहाने बनाने नही आते

उठ जाता हूं सुबह-सुबह वो सपने सुहाने नही आते
अब मुझे स्कूल न जाने वाले बहाने बनाने नही आते

कभी पा लेते थे घर से निकलते ही मंजिल को
अब मीलों सफर करके भी ठिकाने नही आते

मुंह चिढाती है खाली जेब महीने के आखिर में
अब बचपन की तरह गुल्लक में पैसे बचाने नही आते

यूं तो रखते हैं बहुत से लोग पलको पर मुझे
मगर बेमतलब बचपन की तरह गोदी उठाने नही आते

माना कि जिम्मेदारियों की बेड़ियों में जकड़ा हूं
क्यूं बचपन की तरह छुड़वाने वो दोस्त पुराने नही आते

बहला रहा हूं बस दिल को बच्चों की तरह
मैं जानता हूं फिर वापस बीते हुए जमाने नही आते

आप सभी मित्रों को #शिक्षक_दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं- #लव_तिवारी




राष्ट्र भावना से प्रेरित, सीमा पर अलख जगाता है । बर्फीले तूफानों में भी जन गण मन धुन गाता है- हरविंदर सिंह शिब्बू

"फौजी भाइयों के नाम" ।।

भाव शक्ति का अक्षय स्रोत है, भाव भक्ति का प्रेरक है।
भाव ओज का संवाहक है , भाव चित उत्प्रेरक है ।।
बिना भाव के हृदयस्थल को, उपमा पत्थर की मिलती।
भाव, हृदय जब छिन्न भिन्न हो, प्रेमभावना ही सिलती ।।

भाव भरा ही कहीं , वेदनाओं का बोझ उठता है ।
अधरों पर मुस्कान किसी के खुद मिट कर दे जाता है।।
राष्ट्र भावना से प्रेरित, सीमा पर अलख जगाता है ।
बर्फीले तूफानों में भी जन गण मन धुन गाता है।।

गोले गोली की बौछारें ,डिगा नहीं सकती उसको ।
प्राण बहुत छोटा लगता और देश बड़ा लगता जिसको।।
वीरों की धरती भारत है , यहाँ नहीं कोई कायर है ।
ऐसे वीर जवानों पर , यह पूरा देश न्योछावर है ।।

बहन यहाँ भाई को जब ,सरहद के लिए पठाती है ।
जाने से पहले उसको राखी की याद दिलाती है ।।
याद रहे राखी पर भाई, लेकर छुट्टी घर आना ।
किन्तु शत्रु ललकारे तो मत आना आगे बढ़ जाना।।

लेकर के बंदूकें , शत्रु के सीने पर चढ़ जाना ।
पीठ नहीं दिखलाना भाई , लड़ते लड़ते मर जाना ।।
यही भावनाएं जवान को निर्भय कर जाती होंगी।
उठती होगी फड़क भुजाएँ, भौंहें तन जाती होंगी।।

माँ के छू कर चरण पुत्र जब घर से कदम बढ़ता है।
माँ की ममता और दुआ की शक्ति संग ले जाता है।।
माँ के आँचल की हवायें सरहद तक जाती होंगीं।
माँ के लाडले को सरहद पर भी छू कर आती होंगी।

सेना की वर्दी में पति को देख के चौड़ी छाती होगी ।
अपने मन की कहने में वो तो कुछ कुछ शर्माती होगी।।
तभी डभडभाये नयनों को नीची कर मुस्काती होगी।
रखना अपना ध्यान , दबी आवाज में चेत दिलाती होगी।।

पिता विदा करने बेटे को गाँव की सीमा तक आता है।
और पुत्र आशीष पिता का लेकर सरहद पर जाता है।।
भाव हृदय के छलक नेत्र से जब बाहर आ जाते होंगे।
सीमा पर जाते जवान के लिए कवच बन जाते होंगे।।

देशभक्ति के प्रबल भाव से , हृदय हिलोरे लेता है ।
हँसते हुए वीर सैनिक , सर्वोच्च आहुती देता है ।।
इन्हीं भावनाओं की ताकत का अनुमान लगाता हूँ ।
हर जवान के परिजन के सम्मान में शीश झुकाता हूँ ।।
हरबिंदर सिंह "शिब्बू"
राष्ट्रीय प्रचारक, (ABKMY)

#poetry #poem #मोदी



मंगलवार, 1 सितंबर 2020

अब तो बस जिस्म बची,जान तो बचा ही नहीं दुनियाँ वालों कहीं ईमान तो बचा ही नहीं -हरबिंदर सिंह शिब्बू

अब तो बस जिस्म बची,जान तो बचा ही नहीं।
दुनियाँ वालों कहीं ईमान तो बचा ही नहीं।।

मैं भी तुम पर और तुम मुझ पर,लगा लो तोहमत।
गल्तियां माने वो इन्सान तो बचा ही नहीं।।

सब के मुँह से निवाला छीन भले लेता था।
बच्चों को छोड़ दे, वो शैतान तो बचा ही नहीं ।।

लोग ही,लोगों के लिए ,जब से बन गये ठोकर।
पत्थरों ने कहा पहचान तो बचा ही नहीं।।

दूरियां ख़त्म हुईं, दूरियां बनी फिर भी ।
नहीं पहचान भी,और अन्जान तो बचा ही नहीं।।

दिया जो रात भर जलता, वो बुझ गया जल्दी ।
हवा ने कह दिया ,कभी तूफ़ान तो चला ही नहीं।।

बड़े अदब से वो ,मुझको अजीज कहते रहे।
गली में उनके "शिब्बू" सम्मान तो बचा ही नहीं।।

हरबिंदर सिंह "शिब्बू"
राष्ट्रीय प्रचारक,(ABKM-Y) 

श्रद्धांजलि भारत रत्न स्वर्गीय श्री प्रणव मुखर्जी

सौम्य, सरल, सद्भाव, प्रणव,
दल से ऊपर विह्वल विश्वास
अर्पित, श्रद्धांजलि, अश्रुपूरित
शान्ति आत्मा हो स्वर्ग निवास ।।

देश जरूरत हिम्मती नेतृत्व,
अति महत्वपूर्ण प्रणव उपदेश,
राजनीति क्षेत्र अति निपुण सोच
ना सत्ता मद, ना दिल में क्लेश
दिल में तरंग जो उनके उठती,
कन्हैया को होता अब एहसास
अर्पित श्रद्धांजलि, अश्रुपूरित,
शांति आत्मा हो स्वर्ग निवास

अपनाये उनके अभिलक्षित दर्शन
राष्ट्र नियत प्रकाश फैलायें
विकास प्रकीर्णित राग प्रदर्शन
सब नेता मन, कर्म, अपनाये
दर्शन, प्रदर्शन समन्वित सुचिता
छटे राजनीति सब द्वेष निराश
अर्पित श्रद्धांजलि करे कन्हैया,
शान्ति आत्मा हो स्वर्ग निवास

कन्हैया गुप्ता। (शिक्षक)
जनता उ मा विद्यालय जंगीपुर ग़ाज़ीपुर
8423397106



सोमवार, 31 अगस्त 2020

प्रेम जाल में फ़स के अपने घर को छोड़कर कर जानी वाली लड़की की अपने माँ बाप के घर लौटने की कहानी- लव तिवारी

ट्रैन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निकालने की पिन है??"

उसने अपने बैग से एक फोन निकाला था, और नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है जो उसके पास नहीं थी। मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और अपने क्रॉस बेग से पिन निकालकर लड़की को दे दी। लड़की ने थैंक्स कहते हुए पिन ले ली और सिम डालकर पिन मुझे वापिस कर दी।

थोड़ी देर बाद वो फिर से इधर उधर ताकने लगी, मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने पूछ लिया "कोई परेशानी??"

वो बोली सिम स्टार्ट नहीं हो रही है, मैंने मोबाइल मांगा, उसने दिया। मैंने उसे कहा कि सिम अभी एक्टिवेट नहीं हुई है, थोड़ी देर में हो जाएगी। और एक्टिव होने के बाद आईडी वेरिफिकेशन होगा उसके बाद आप इसे इस्तेमाल कर सकेंगी।

लड़की ने पूछा, आईडी वेरिफिकेशन क्यों??
मैंने कहा " आजकल सिम वेरिफिकेशन के बाद एक्टिव होती है, जिस नाम से ये सिम उठाई गई है उसका ब्यौरा पूछा जाएगा बता देना"

लड़की बुदबुदाई "ओह्ह "
मैंने दिलासा देते हुए कहा "इसमे कोई परेशानी की कोई बात नहीं"
वो अपने एक हाथ से दूसरा हाथ दबाती रही, मानो किसी परेशानी में हो। मैंने फिर विन्रमता से कहा "आपको कहीं कॉल करना हो तो मेरा मोबाइल इस्तेमाल कर लीजिए"
लड़की ने कहा "जी फिलहाल नहीं, थैंक्स, लेकिन ये सिम किस नाम से खरीदी गई है मुझे नहीं पता"
मैंने कहा "एक बार एक्टिव होने दीजिए, जिसने आपको सिम दी है उसी के नाम की होगी"
उसने कहा "ओके, कोशिश करते हैं"
मैंने पूछा "आपका स्टेशन कहाँ है??"
लड़की ने कहा "दिल्ली"
और आप?? लड़की ने मुझसे पूछा
मैंने कहा "दिल्ली ही जा रहा हूँ, एक दिन का काम है,
आप दिल्ली में रहती हैं या...?"
लड़की बोली "नहीं नहीं, दिल्ली में कोई काम नहीं , ना ही मेरा घर है वहाँ"
तो ???? मैंने उत्सुकता वश पूछा
वो बोली "दरअसल ये दूसरी ट्रेन है, जिसमे आज मैं हूँ, और दिल्ली से तीसरी गाड़ी पकड़नी है, फिर हमेशा के लिए आज़ाद"
आज़ाद??
लेकिन किस तरह की कैद से??
मुझे फिर जिज्ञासा हुई किस कैद में थी ये कमसिन अल्हड़ सी लड़की..
लड़की बोली, उसी कैद में थी जिसमें हर लड़की होती है। जहाँ घरवाले कहे शादी कर लो, जब जैसा कहे वैसा करो। मैं घर से भाग चुकी हुँ..
मुझे ताज्जुब हुआ मगर अपने ताज्जुब को छुपाते हुए मैंने हंसते हुए पूछा "अकेली भाग रही हैं आप? आपके साथ कोई नजर नहीं आ रहा? "
वो बोली "अकेली नहीं, साथ में है कोई"
कौन? मेरे प्रश्न खत्म नहीं हो रहे थे
दिल्ली से एक और ट्रेन पकड़ूँगी, फिर अगले स्टेशन पर वो जनाब मिलेंगे, और उसके बाद हम किसी को नहीं मिलेंगे..
ओह्ह, तो ये प्यार का मामला है।
उसने कहा "जी"
मैंने उसे बताया कि 'मैंने भी लव मैरिज की है।'
ये बात सुनकर वो खुश हुई, बोली "वाओ, कैसे कब?" लव मैरिज की बात सुनकर वो मुझसे बात करने में रुचि लेने लगी
मैंने कहा "कब कैसे कहाँ? वो मैं बाद में बताऊंगा पहले आप बताओ आपके घर में कौन कौन है?
उसने होशियारी बरतते हुए कहा " वो मैं आपको क्यों बताऊं? मेरे घर में कोई भी हो सकता है, मेरे पापा माँ भाई बहन, या हो सकता है भाई ना हो सिर्फ बहने हो, या ये भी हो सकता है कि बहने ना हो और 2-4 गुस्सा करने वाले बड़े भाई हो"
मतलब मैं आपका नाम भी नहीं पूछ सकता "मैंने काउंटर मारा"
वो बोली, 'कुछ भी नाम हो सकता है मेरा, टीना, मीना, रीना, कुछ भी'
बहुत बातूनी लड़की थी वो.. थोड़ी इधर उधर की बातें करने के बाद उसने मुझे टॉफी दी जैसे छोटे बच्चे देते हैं क्लास में,
बोली आज मेरा बर्थडे है।
मैंने उसकी हथेली से टॉफी उठाते बधाई दी और पूछा "कितने साल की हुई हो?"
वो बोली "18"
"मतलब भागकर शादी करने की कानूनी उम्र हो गई आपकी"
वो "हंसी"
कुछ ही देर में काफी फ्रैंक हो चुके थे हम दोनों। जैसे बहुत पहले से जानते हो एक दूसरे को..
मैंने उसे बताया कि "मेरी उम्र 35 साल है, यानि 17 साल बड़ा हुँ"
उसने चुटकी लेते हुए कहा "लग तो नही रहे हो"
मैं मुस्कुरा दिया
मैंने उसे पूछा "तुम घर से भागकर आई हो, तुम्हारे चेहरे पर चिंता के निशान जरा भी नहीं है, इतनी बेफिक्री मैंने पहली बार देखी"
खुद की तारीफ सूनकर वो खुश हुई, बोली "मुझे उन जनाब ने मेरे लवर ने पहले से ही समझा दिया था कि जब घर से निकलो तो बिल्कुल बिंदास रहना, घरवालों के बारे में बिल्कुल मत सोचना, बिल्कुल अपना मूड खराब मत करना, सिर्फ मेरे और हम दोनों के बारे में सोचना और मैं वही कर रही हूँ"
मैंने फिर चुटकी ली, कहा "उसने तुम्हे मुझ जैसे अनजान मुसाफिरों से दूर रहने की सलाह नहीं दी?"
उसने हंसकर जवाब दिया "नहीं, शायद वो भूल गया होगा ये बताना"
मैंने उसके प्रेमी की तारीफ करते हुए कहा " वैसे तुम्हारा बॉय फ्रेंड काफी टेलेंटेड है, उसने किस तरह से तुम्हे अकेले घर से रवाना किया, नई सिम और मोबाइल दिया, तीन ट्रेन बदलवाई.. ताकि कोई ट्रेक ना कर सके, वेरी टेलेंटेड पर्सन"
लड़की ने हामी भरी, " बोली बहुत टेलेंटेड है वो, उसके जैसा कोई नहीं"
मैंने उसे बताया कि "मेरी शादी को 10 साल हुए हैं, एक बेटी है 8 साल की और एक बेटा 1 साल का, ये देखो उनकी तस्वीर"
मेरे फोन पर बच्चों की तस्वीर देखकर उसके मुंह से निकल गया "सो क्यूट"
मैंने उसे बताया कि "ये जब पैदा हुई, तब मैं कुवैत में था, एक पेट्रो कम्पनी में बहुत अच्छी जॉब थी मेरी, बहुत अच्छी सेलेरी थी.. फिर कुछ महीनों बाद मैंने वो जॉब छोड़ दी, और अपने ही कस्बे में काम करने लगा।"
लड़की ने पूछा जॉब क्यों छोड़ी??
मैंने कहा "बच्ची को पहली बार गोद में उठाया तो ऐसा लगा जैसे मेरी दुनिया मेरे हाथों में है, 30 दिन की छुट्टी पर घर आया था, वापस जाना था लेकिन जा ना सका। इधर बच्ची का बचपन खर्च होता रहे उधर मैं पूरी दुनिया कमा लूं, तब भी घाटे का सौदा है। मेरी दो टके की नौकरी, बचपन उसका लाखों का.."
लड़की ने कहा "वेरी इम्प्रेसिव"
मैं मुस्कुराकर खिड़की की तरफ देखने लगा
लड़की ने पूछा "अच्छा आपने तो लव मैरिज की थी न,फिर आप भागकर कहाँ गए??
कैसे रहे और कैसे गुजरा वो वक्त??
उसके हर सवाल और हर बात में मुझे महसूस हो रहा था कि ये लड़की लकड़पन के शिखर पर है, बिल्कुल नासमझ और मासूम छोटी बहन सी।
मैंने उसे बताया कि हमने भागकर शादी नहीं की, और ये भी है कि उसके पापा ने मुझे पहली नजर में सख्ती से रिजेक्ट कर दिया था।"
उन्होंने आपको रिजेक्ट क्यों किया?? लड़की ने पूछा
मैंने कहा "रिजेक्ट करने का कुछ भी कारण हो सकता है, मेरी जाति, मेरा काम,,घर परिवार,
"बिल्कुल सही", लड़की ने सहमति दर्ज कराई और आगे पूछा "फिर आपने क्या किया?"
मैंने कहा "मैंने कुछ नहीं किया,उसके पिता ने रिजेक्ट कर दिया वहीं से मैंने अपने बारे में अलग से सोचना शुरू कर दिया था। खुशबू ने मुझे कहा कि भाग चलते हैं, मेरी वाइफ का नाम खुशबू है..मैंने दो टूक मना कर दिया। वो दो दिन तक लगातार जोर देती रही, कि भाग चलते हैं। मैं मना करता रहा.. मैंने उसे समझाया कि "भागने वाले जोड़े में लड़के की इज़्ज़त पर पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता, जबकि लड़की के पूरे कुल की इज्ज़त धुल जाती है। भगाने वाला लड़का उसके दोस्तों में हीरो माना जाता है लेकिन इसके विपरीत जो लड़की प्रेमी संग भाग रही है वो कुल्टा कहलाती है, मुहल्ले के लड़के उसे चालू कहते है । बुराइयों के तमाम शब्दकोष लड़की के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। भागने वाली लड़की आगे चलकर 60 साल की वृद्धा भी हो जाएगी तब भी जवानी में किये उस कांड का कलंक उसके माथे पर से नहीं मिटता। मैं मानता हूँ कि लड़का लड़की को तौलने का ये दोहरा मापदंड गलत है, लेकिन हमारे समाज में है तो यही , ये नजरिया गलत है मगर सामाजिक नजरिया यही है,
वो अपने नीचे का होंठ दांतो तले पीसने लगी, उसने पानी की बोतल का ढक्कन खोलकर एक घूंट पिया।
मैंने कहा अगर मैं उस दिन उसे भगा ले जाता तो उसकी माँ तो शायद कई दिनों तक पानी भी ना पीती। इसलिए मेरी हिम्मत ना हुई कि ऐसा काम करूँ.. मैं जिससे प्रेम करूँ उसके माँ बाप मेरे माँ बाप के समान ही है। चाहे शादी ना हो, तो ना हो।
कुछ पल के लिए वो सोच में पड़ गई , लेकिन मेरे बारे में और अधिक जानना चाहती थी, उसने पूछा "फिर आपकी शादी कैसे हुई???
मैंने बताया कि " खुशबू की सगाई कहीं और कर दी गई थी। धीरे धीरे सबकुछ नॉर्मल होने लगा था। खुशबू और उसके मंगेतर की बातें भी होने लगी थी फोन पर, लेकिन जैसे जैसे शादी नजदीक आने लगी, उन लोगों की डिमांड बढ़ने लगी"
डिमांड मतलब 'लड़की ने पूछा'
डिमांड का एक ही मतलब होता है, दहेज की डिमांड। परिवार में सबको सोने से बने तोहफे दो, दूल्हे को लग्जरी कार चाहिए, सास और ननद को नेकलेस दो वगैरह वगैरह, बोले हमारे यहाँ रीत है। लड़का भी इस रीत की अदायगी का पक्षधर था। वो सगाई मैंने तुड़वा डाली..इसलिए नही की सिर्फ मेरी शादी उससे हो जाये बल्कि ऐसे लालची लोगों में खुशबू कभी खुश नही रह सकती थी ना उसका परिवार, फिर किसी तरह घरवालों को समझा बुझा कर मैं फ्रंट पर आ गया और हमारी शादी हो गई। ये सब किस्मत की बात थी..
लड़की बोली "चलो अच्छा हुआ आप मिल गए, वरना वो गलत लोगों में फंस जाती"
मैंने कहा "जरूरी नहीं कि माता पिता का फैसला हमेशा सही हो, और ये भी जरूरी नहीं कि प्रेमी जोड़े की पसन्द सही हो.. दोनों में से कोई भी गलत या सही हो सकता है..काम की बात यहाँ ये है कि कौन ज्यादा वफादार है।"
लड़की ने फिर से पानी का घूंट लिया और मैंने भी.. लड़की ने तर्क दिया कि "हमारा फैसला गलत हो जाए तो कोई बात नहीं, उन्हें ग्लानि नहीं होनी चाहिए"

मैंने कहा "फैसला ऐसा हो जो दोनों का हो,बच्चो और माता पिता दोनों की सहमति, वो सबसे सही है। बुरा मत मानना मैं कहना चाहूंगा कि तुम्हारा फैसला तुम दोनों का है, जिसमे तुम्हारे पेरेंट्स शामिल नहीं है, ना ही तुम्हे इश्क का असली मतलब पता है अभी"
उसने पूछा "क्या है इश्क़ का सही अर्थ?"
मैंने कहा "तुम इश्क में हो, तुम अपना सबकुछ छोड़कर चली आई ये सच्चा इश्क़ है, तुमने दिमाग पर जोर नहीं दिया ये इश्क है, फायदा नुकसान नहीं सोचा ये इश्क है...तुम्हारा दिमाग़ दुनियादारी के फितूर से बिल्कुल खाली था, उस खाली जगह में इश्क का फितूर भर दिया गया। जिन जनाब ने इश्क को भरा क्या वो इश्क में नहीं है.. यानि तुम जिसके साथ जा रही हो वो इश्क में नहीं, बल्कि होशियारी हीरोगिरी में है। जो इश्क में होता है वो इतनी प्लानिंग नहीं कर पाता है, तीन ट्रेनें नहीं बदलवा पाता है, उसका दिमाग इतना काम ही नहीं कर पाता.. कोई कहे मैं आशिक हुँ, और वो शातिर भी हो ये नामुमकिन है।

मजनू इश्क में पागल हो गया था, लोग पत्थर मारते थे उसे, इश्क में उसकी पहचान तक मिट गई। उसे दुनिया मजनू के नाम से जानती है जबकि उसका असली नाम कैस था जो नहीं इस्तेमाल किया जाता। वो शातिर होता तो कैस से मजनू ना बन पाता। फरहाद ने शीरीं के लिए पहाड़ों को खोदकर नहर निकाल डाली थी और उसी नहर में उसका लहू बहा था, वो इश्क़ था। इश्क़ में कोई फकीर हो गया, कोई जोगी हो गया, किसी मांझी ने पहाड़ तोड़कर रास्ता निकाल लिया..किसी ने अतिरिक्त दिमाग़ नहीं लगाया..चालाकी नही की
लालच ,हवस और हासिल करने का नाम इश्क़ नहीं है.. इश्क समर्पण करने को कहते हैं जिसमें इंसान सबसे पहले खुद का समर्पण करता है, जैसे तुमने किया, लेकिन तुम्हारा समर्पण हासिल करने के लिए था, यानि तुम्हारे इश्क में लालच की मिलावट हो गई ।

लकड़ी अचानक से खो सी गई.. उसकी खिलख़िलाहट और लपड़ापन एकदम से खमोशी में बदल गया.. मुझे लगा मैं कुछ ज्यादा बोल गया, फिर भी मैंने जारी रखा, मैंने कहा " प्यार तुम्हारे पापा तुमसे करते हैं, कुछ दिनों बाद उनका वजन आधा हो जाएगा, तुम्हारी माँ कई दिनों तक खाना नहीं खाएगी ना पानी पियेगी.. जबकि आपको अपने आशिक को आजमा कर देख लेना था, ना तो उसकी सेहत पर फर्क पड़ता, ना दिमाग़ पर, वो अक्लमंद है, अपने लिए अच्छा सोच लेता।
आजकल गली मोहल्ले के हर तीसरे लौंडे लपाटे को जो इश्क हो जाता है, वो इश्क नहीं है, वो सिनेमा जैसा कुछ है। एक तरह की स्टंटबाजी, डेरिंग, अलग कुछ करने का फितूर..और कुछ नहीं।

लड़की का चेहरे का रंग बदल गया, ऐसा लग रहा था वो अब यहाँ नहीं है, उसका दिमाग़ किसी अतीत में टहलने निकल गया है। मैं अपने फोन को स्क्रॉल करने लगा.. लेकिन मन की इंद्री उसकी तरफ थी।
थोड़ी ही देर में उसका और मेरा स्टेशन आ गया.. बात कहाँ से निकली थी और कहाँ पहुँच गई.. उसके मोबाइल पर मैसेज टोन बजी, देखा, सिम एक्टिवेट हो चुकी थी.. उसने चुपचाप बैग में से आगे का टिकट निकाला और फाड़ दिया.. मुझे कहा एक कॉल करना है, मैंने मोबाइल दिया.. उसने नम्बर डायल करके कहा "सोरी पापा, और सिसक सिसक कर रोने लगी, सामने से पिता भी फोन पर बेटी को संभालने की कोशिश करने लगे.. उसने कहा पिताजी आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं घर आ रही हूँ..दोनों तरफ से भावनाओ का सागर उमड़ पड़ा"

हम ट्रेन से उतरे, उसने फिर से पिन मांगी, मैंने पिन दी.. उसने मोबाइल से सिम निकालकर तोड़ दी और पिन मुझे वापस कर दिया
कहानी को अंत तक पढ़ने का धन्यवाद।
देश की सभी बेटियों को समर्पित-
ये मेरा दावा है माता पिता से ज्यादा तुम्हे दुनिया मे कोई प्यार नहीं करता।