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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

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रविवार, 22 मार्च 2020

कोरोना वायरस kovid -19 से लड़ाई में होम्योपैथी की भूमिका - डॉ एम डी सिंह

कोरोना वायरस kovid -19 से लड़ाई में होम्योपैथी कैसे नायक की भूमिका निभा सकती है

डब्ल्यू एच ओ कोरोना वायरस के इंफेक्शन को वैश्विक महामारी घोषित कर चुका है । अब तक इसने विश्व के 195 से अधिक देशों को प्रभावित किया है । अब तक पूरे विश्व में 270,000 से ज्यादा लोग पीड़ित हैं और रोज उनकी संख्या बढ़ रही है । रोज एक नया देश इससे प्रभावित भी हो रहा है वहीं 12500 से ज्यादा लोग अपना जीवन गंवा चुके हैं । जहां चीन ने इसे कठोरता के साथ नियंत्रित कर लिया है वहीं यूरोप में यह अनियंत्रित होता प्रतीत हो रहा है।

चीन की सरकार ने अपने वोहान प्रांत की अच्छी तरह घेराबंदी करके कोरोना वायरस को देशभर में फैलने से रोक लिया है । वैसे ही भारतीय सरकार ने पूरे देश की घेराबंदी करके कोरोना वायरस को करीब-करीब नियंत्रित लिया हुआ है। अब तक 300 के आसपास मरीज कोरोना वायरस से पीड़ित अपने देश में चिन्हित हुए हैं उन्हें भी अनेक बाहर से आए हुए। 23 लोग इस रोग से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। चार मृत्यु हुई है जिसमें एक स्वयं सऊदी अरब से लौटा था दूसरी का पुत्र इटली से कोरोना वायरस लेकर लौटा था। एक ने हॉस्पिटल के छत से कूदकर आत्महत्या कर ली।

भारत में यह पैंडेमिक अभी दूसरे स्टेज में है। पहला स्टेज वह जिसमें किसी संक्रमित देश से कोई संक्रमित व्यक्ति संक्रमण लेकर दूसरे देश में जाता है। दूसरा स्टेज वह जिसमें बाहर से आने वाली संक्रमित व्यक्ति द्वारा
उस घर में कोई व्यक्ति संक्रमित हुआ जिसमें उसने आश्रय लिया। यह दोनों पूरी तरह आईडेंटिफाइड होते हैं
और इन्हें सुरक्षा घेरे में रखा जा सकता है। भारत में ऐसा किया भी गया है। संक्रमण प्रसार का तीसरा चरण वह है जिसमें देश के भीतर संक्रमित हुए लोगों द्वारा संक्रमण पारकर कुछ लोग अचिन्हित रह गए हों। चौथा चरण इन्हीं अचिन्हित लोगों द्वारा संक्रमण का कम्युनिटी प्रसार होना।

तीसरा और चौथा चरण रोग प्रसार की अपेक्षाकृत कठिन अवस्था है। इसमें हमें स्वयं निडर और सतर्क रहते हुए संक्रमण से बचने का प्रयास करना होगा। और संभावित संक्रमण से लड़ने के लिए अपने शरीर की इम्यून सिस्टम को व्यायाम ,जीवन शैली में बदलाव, भोजन में नियंत्रण, एवं कुछ घरेलू आयुर्वेदिक एवं बॉडी इम्यूनिटी को बढ़ाने वाली कुछ होम्योपैथिक औषधियों के सेवन द्वारा स्वयं को तैयार रखा जाय। भीड़-भाड़ से स्वयं को अलग करके, कोई भी लक्षण उत्पन्न होने पर स्वयं को आइसोलेट करके, अथवा नियंत्रण केंद्रों में जाकर इस संक्रमण से लड़ा और हराया जा सकता है। सरकार द्वारा किए जा रहे कई प्रयास अनावश्यक से दिख रहे हैं किंतु सच पूछिए तो इस महामारी को रोकने के लिए वे अत्यंत आवश्यक हैं। हमें उस कार्य में पूरा सहयोग देना होगा। 65 वर्ष से ऊपर के लोगों पर वायरस का दुष्प्रभाव ज्यादा है। ऐसी अवस्था में हम उनका हौसला बढ़ाएं ।बाहर जाने से रोके और घर में ही उनको आनंदित करें।

किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हराने के लिए उसकी प्रकृति और शक्तियों को पहले से जान लेना ही सही युद्ध नीति है।

कोरोना वायरस की शक्तियां-
1- प्रकृति और प्रसार- कोरोना वायरस की सबसे बड़ी शक्ति उसके प्रकृति एवं प्रसार के बारे में कम जानकारी का होना है । अमेरिका का आरोप है कि चीन ने फैलाया तो चीन का आरोप है कि उसे कमजोर करने के लिए अमेरिकी सेना ने फैलाया। आज पूरे विश्व को ऐसे विवादों से बचकर इस महामारी से मिलकर लड़ने की जरूरत है और अपने पास उपलब्ध सारे संसाधनों का प्रयोग करके इसके तह में पहुंचने की जरूरत है।

2- निवास और वाहक- कोरोना वायरस कोविड-19 पूर्ववर्ती कोरोनावायरस का नया स्टेन है। कोरोना वायरस पूर्व में सूअर, मुर्गो ,चमगादड़ आदि पशु पक्षियों को आक्रांत करता रहा है। अतः इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अब भी कोविड -19 के पहले घर और वाहक वही जीव हों , और उनके संपर्क में आकर मनुष्य दूसरा वाहक बन गया है। उन पशुओं को पालने पोसने और उनके मांस को पकाने खाने में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। और उनके अंदर भी इसे ढूंढने का प्रयास छोड़ना नहीं चाहिए। इसके संदर्भ में दुनिया के पास स्मालपॉक्स का उदाहरण मौजूद है। जिसके वायरस को रूस के डेयरी उद्योग में लगे मजदूरों के हाथों पर होने वाले चेचक के दानों की तरह दिखने वाले इरप्संस में पाया गया। वे दूसरी वाहक थे प्रथम वाहक गाय थी जिसकी आंतों से चेचक के वायरस गोबर के साथ बाहर आते थे।
आज कई देशों के राजनीतिज्ञ ,उनकी पत्नियां, राष्ट्रपति, स्वास्थ्य मंत्री जैसे बड़े लोग जिनके रहन-सहन और सुरक्षा की अत्यंत विशिष्ट व्यवस्था होती है, कोरोना वायरस के पॉजिटिव पाए गए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि कोरोना वायरस ने उन पर हमला करने के लिए उनके किचन का प्रयोग किया हो ।और उसके वाहक अनजाने में ही चिकन और सूअर के मांस को धोने काटने पकाने वाले बावर्ची Vector अर्थात वाहक बन गए हों। जैसे कि गोशालाओं में काम करने वाले गाय सेवक cowpox अर्थात स्मालपॉक्स के वाहक बन गए थे। मैं इसे संभावना के रूप में देख रहा हूं जिस पर ध्यान दिया जा सकता है।

3- संचरण- प्रत्येक संक्रामक रोग एक से दूसरे तक पहुंचने में किसी न किसी संचार माध्यम का प्रयोग करता है। जैसे एंथ्रेक्स एयर वार्न है, सीधे हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है। जौंडिस, पोलियो और टाइफाइड वाटर वार्न हैं यह दूषित जल के माध्यम से फैलते हैं। वैसे ही चिकन पॉक्स , मिजिल्स, स्मालपॉक्स और अब इस कोरोनावायरस का संचरण पीड़ित के मुंह और नाक से खांसी एवं छींक के साथ निकलने वाली जलीय सूक्ष्म बूंदों द्वारा होता है जो किसी भी सतह पर चिपक जाती हैं जहां से वे हाथ को दूषित कर नाक, मुह, आंख के माध्यम से दूसरे में पहुंच जाती है अथवा नजदीक होने की अवस्था में स्वामी द्वारा दूसरे व्यक्ति द्वारा सीधे इन्हेल कर ली जाती हैं। रोगाणुओं के ड्रॉपलेट्स किचन में छौंक लगाने से उड़ने वाले तेल के ड्रॉपलेट्स को भी अपने संचार का माध्यम बनाते हैं जिसपर चिपक कर वे लंबी दूरी तय कर सकते हैं । यही कारण है कि भारत में किसी भी तरह की चेचक का प्रकोप होने पर घर में तेल का प्रयोग वर्जित कर दिया जाता है। मेरी समझ में कोरोना वायरस की ड्रॉपलेट्स को रोकने के लिए भी तेल का प्रयोग बंद करना चाहिए तभी उसका व्यापक बचाव हो पाएगा।

4- मौसम देशकाल- अब तक 195 से ज्यादा देशों पर प्रहार करने वाले इस वायरस के लिए कोई देश अथवा मौसम का तापमान बाधक नहीं प्रतीत होता। यदि ठंडे देश ज्यादा पीड़ित हुए हैं तो गर्म जगहों पर भी यह फैला है। हां आज अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा एक सूचना अवश्य मिली है की मौसम की ह्यूमिडिटी और गर्मी इसके प्रभाव को सीमित करेंगे। भारत में तेजी से न फैलने का एक कारण यह भी हो सकता है कि यहां अब तक बेमौसम बारिश होती रही है। यही कारण हो सकता है कि आसाम और अन्य उत्तर पूर्वी राज्यों में अब तक कोई पॉजिटिव कोरोना वायरस का मरीज नहीं पाया गया है क्योंकि वहां आमतौर पर साल भर ह्यूमिडिटी बनी रहती है। यदि ऐसा हुआ है तो बेमौसम बरसात भी भारत के लिए वरदान साबित हुई है।

5-इनकुबेशन पीरियड ( Incubation period )- यह वह समय है जिसमें कोई वायरस शरीर के अंदर प्रवेश कर अपनी क्षमता का विस्तार करता है। कोरोना वायरस इसमें करीब 14 दिन का समय ले रहा है वह भी बहुत ही चुपके- चुपके। संक्रमित व्यक्ति को पता भी नहीं चल पाता कि वह इसके चंगुल में आ चुका है। बस थर्मल चेक द्वारा अंदाज लगाया जा सकता है, वह भी बस बीमार होने का।

5- समदर्शी- एक कहावत है 'एक तो तीती लौकी वह भी नीम चढ़ी', यही स्थिति कोरोना वायरस के इस संक्रमण काल को लेकर बनी है। सर्दी और सर्दी -गर्मी के मिलन काल में तरह-तरह के रेस्पिरेट्री परेशानियां आने की संभावना बनी रहती है जैसे कॉमन कोल्ड एंड कफ, एलर्जीकल राइनाइटिस, एलर्जीकल ब्रोंकाइटिस, सामान्य बुखार ,और इन्फ्लूएंजा इत्यादि। यह सब कोरोना वायरस जैसा ही प्रारंभिक लक्षण उत्पन्न करके डराने और न डरने पर उसे छुपाने का भी कार्य कर सकते हैं । हत्या इनके लक्षण मिलते ही अपने क्वालीफाई डॉक्टर से संपर्क करें तथा कुछ समय के लिए अपने को आइसोलेट भी कर लें। अनावश्यक पैनिक में ना आएं।

एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में टीकाकरण के अतिरिक्त वायरस प्रभावित रोगों की कोई कारगर चिकित्सा उपलब्ध नहीं है । कोरोना वायरस का अभी तक कोई टीका भी नहीं बना है । इसलिए वे बचाव, कंजरवेटिव ट्रीटमेंट एवं रोगियों के आइसोलेशन पर आश्रित हैं। यही कारण है कि पूरा यूरोप जहां एलोपैथिक चिकित्सा व्यवस्था काफी समृद्ध है कोरोना वायरस को रोक पाने में बुरी तरह असफल सिद्ध हो रही है। भारत, बांग्लादेश ,पाकिस्तान ,श्रीलंका नेपाल, भूटान इत्यादि जहां की जनसंख्या बहुत सघन भी है अभी तक कोरोना वायरस के घातक संघार से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुए हैं। इसके पीछे वहां प्रयोग किए जाने वाले घरेलू, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक औषधियों का बहुतायत में प्रयोग है। आज सारी दुनिया में होम्योपैथी सबसे ज्यादा भारत में विकसित है और निरंतर आयुष मंत्रालय के प्रयास से उन्नति कर रही है।
( दो-तीन दिनों से एक उत्साहवर्धक खबर आ रही है कि इस रोग के टीका खोजने की दिशा में अमेरिका ,भारत सहित पांच देशों के वैज्ञानिक सफलता के काफी नजदीक पहुंच चुके हैं, डब्ल्यूएचओ ने भी कल सूचित किया कि कोरोना वायरस के टीके का प्रारंभिक परीक्षण प्रारंभ कर दिया गया है)
लक्षण-
सर्दी जुकाम ,बुखार, सर दर्द, बदन दर्द थकान के साथ प्रारंभ होने वाला यह रोग जल्द ही गले को प्रभावित करते हुए( सोर थ्रोट) फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां एक्यूट ब्राँकाइटिस , ड्राई कफ एवं आखिर में संक्रामक निमोनिया के रूप में आक्रांत कर अत्यंत कठिन रूप धारण कर लेता है। इस रोग में सर दर्द, खांसी ,बुखार एवं श्वसन में परेशानी 15-20 दिन तक बनी रह सकती है और दवाएं काम नहीं करती प्रतीत होतीं।

प्रसार- कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसी और छींक के माध्यम से ड्रॉपलेट के रूप में बाहर आते हैं जहां से वे सीधे अन्य व्यक्ति द्वारा इन्हेल कर लिए जाते हैं अथवा हाथों को संक्रमित कर अन्य तक पहुंच जाते हैं।मुख्यतः शीत ऋतु में एपिडेमिक के रूप में।

बचाव-
1- किसी भी भयावह रोग से बचने का पहला उपाय है भय मुक्त रहा जाए। भय शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती है और रोग अपना पैर तेजी से फैलाता है।
2- सर्दी से बचने का उपाय किया जाए।
3- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए अपने हाथ ,शरीर, घर और आसपास की।
सार्वजनिक स्थानों पर रहने वालों को अपने हाथ दिन भर में कई बार साबुन अथवा किसी एल्कोहलिक डिसइनफेक्टेंट से साफ करते रहना चाहिए।
4- जहां रोग फैला हो अथवा फैलने की संभावना हो उन सार्वजनिक स्थलों पर मास्क लगाया जाए और छींकते , खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखा जाए।
5- ज्ञात संक्रमित मरीजों को आइसोलेट किया जाए।
समतुल्य लक्षणों वाले रोगों की अवस्था में भी स्वयं को संरक्षित किया जाए।
6- व्यायाम, योगासन, प्राणायाम द्वारा शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यून)को बढ़ाया जाए।
7- अच्छी तरह धुली हुई हरी सब्जियों का प्रयोग किया जाए । मांसाहार का सेवन एकदम न करें ।
8- आक्रांत स्थानों पर सर्दी ,जुकाम सर दर्द बदन दर्द गले में खराश के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सीय सलाह ली जाए।
9- हाथों का सैनिटाइजेशन अत्यधिक आवश्यक है क्योंकि इस वायरस के ड्रॉपलेट्स प्रयोग की जा रही वस्तुओं मेज कुर्सी हैंडल फोन इत्यादि पर घंटों जीवित रहते हैं जो हाथों के माध्यम से मुंह और नाक तक पहुंच सकते हैं इसलिए यदि हम सार्वजनिक स्थलों पर हैं तो बार-बार साबुन से हाथ धो कर अथवा किसी ऐसे सैनिटाइजर जिसमें 65% से ज्यादा अल्कोहल हो का दिन में कई बार प्रयोग करें।
10- भारत में चेचक होने पर तेल का प्रयोग छौंक आदि के लिए बंद कर दिया जाता है इसके पीछे चेचक का इंफेक्शन भी ड्रापलेट द्वारा होना है ,जिससे बचाव के लिए भारत का आम नागरिक ऐसा करता रहा है। वैसे ही कोरोना वायरस के ड्राप्लेट्स भी तेल के ड्रॉप्लेट्स पर चिपक कर घर के अन्य सदस्यों तक पहुंच सकते हैं ऐसी अवस्था में तेल का सेवन और छौंक को सीमित किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में इस वायरस के रोकथाम और इलाज की कारगर औषधियां उपलब्ध हैं । जहां आयुर्वेद में गिलोय, तुलसी, अणूस, काली मिर्च ,छोटी कटेरी, हल्दी, मुलहेठी ,लिसोढ़, इत्यादि से बनी हुई दबाएं एवं काढ़ा स्वसन तंत्र को मजबूत करने वाली एवं रोग मुक्त करने वाली कारगर औषधियां हैं। वहीं होम्योपैथी में उपरोक्त आयुर्वेदिक औषधियों के मदर टिंक्चर क्रमशः टीनेस्पोरा कार्डिफ़ोलिया, आसिमम सैंक्टम, जस्टिसिया अधाटोडा,पाइपर नाइग्रा, सोलेनम जैन्थोस्पर्मम एवं कुरकुमा लौंगा, अजाडिरेक्टा इन्डिका , कैलेंडुला ऑफिसिनलिस इत्यादि के नाम से उपलब्ध हैं। इन औषधियों का उपयोग आंतरिक और बाह्य दोनों तरह से किया जा सकता है। इनका उपयोग अत्यंत कारगर साबित होगा ।

लाक्षणिक चिकित्सा पर आधारित होम्योपैथी कोरोना वायरस से आक्रांत मरीजों की चिकित्सा में सबसे ज्यादा कारगर सिद्ध हो सकती है। तथा रोग प्रारंभ होने से पूर्व भी इसकी कुछ औषधियों के प्रयोग से रोग से बचा रहा जा सकता है।


बचाव के लिए उपयोगी होम्योपैथिक औषधियां-
Prophylactic Homeopathic medicines-

1-
थूजा THUJA 1M , यह होम्योपैथी की मुख्य वायरस प्रतिरोधी औषधि है । साथ ही सर्द हवाओं से होने वाले किसी भी रोग से बचाव भी करती है। संक्रमित जगहों पर रहने वालों को यह दवा महीने में एक बार पूरे संक्रमण काल में लेते रहना फायदेमंद होगा।

2-
इग्नेशिया Ignatia 200, इस औषधि का हफ्ते में एक बार सेवन कोरोना वायरस के भय से मुक्त रखने में कारगर होगा। किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहेगी जिससे उसके ऊपर इस रोग का प्रभाव बहुत सूक्ष्म अथवा नहीं होगा।

3-
आर्सेनिक अल्ब ARSENIC ALB 30 अथवा 200, यह औषधि ठंड से होने वाले सर्दी, जुकाम ,बुखार, निमोनिया की कारगर औषधि तो है ही । साथ ही गोश्त खाने से होने वाली प्रकोपों के लिए महौषधि है। यह औषधि इसे लेने वालों के अंदर व्यवस्था एवं सफाई के प्रति स्वतः ही सजगता उत्पन्न करने की क्षमता रखती है जो कोरोना वायरस से बचने के लिए फायदेमंद होगा। संक्रमित एरिया में इसका 1 दिन नागा करके एक खुराक लेना कारगर साबित होगा।

4-
न्यूमोकोकिनम PNEUMOCOCCINUM 200, यह दवा अकेले कोरोना वायरस की रोकथाम में कारगर सिद्ध हो सकती है ।इस औषधि को संक्रमण काल में 15 दिन में एक खुराक लेना उपयुक्त रहेगा।

रोग उत्पन्न होने के बाद लक्षणानुसार होम्योपैथिक औषधियां-Aconite nap 30.Arsenic alb 30, Antim ars 30, Hepar sulph30,200, Arsenic Iod 30 , Dulcamara 30, Lycopodium200, Bryonia Alb 30,, Lachesis30,200 ,Phosphorus 30,Antim tart 30, Causticum 200, ऐंटिम सल्फ30, Opium30,Pneumococcinum200, 30,Aspidosperma Q&30, Hepatica30, Sangunaria can इत्यादि , रोग भय से पीड़ित होने पर Ignatia 200 एक खुराक ।

होम्योपैथिक औषधियां अलग अलग मौसम तापमान और परिस्थितियों के अनुसार भी काम करने में सक्षम हैं । अलग-अलग प्रकृति ,भोजन, परिस्थितियों के आधार पर भी होमियोपैथिक औषधियों का चुनाव निश्चित होता है। इस तरह यह संक्रमण किसी भी तापमान वाले जगहों पर कभी भी क्यों न फैले उसकी कारगर लाक्षणिक चिकित्सा देने वाली अनेक औषधियां होम्योपैथी के पास सुलभ हैं ।

19वीं शताब्दी के प्रारंभ में जब प्ले सारी दुनिया में फैल गया तब होम्योपैथी की एक औषधि इग्नेशिया ने उस भयानक महामारी से सारी दुनिया का बचाव किया ।वैसे ही अमेरिका में पशुओं पर जब ऐन्थ्रेक्स का हमला हुआ तो उसके निजोड से वहां के एक पशु चिकित्सक डॉक्टर लक्स ने ऐन्थ्रेसाइनम नामक होमियोपैथिक दवा बनाकर प्रयोग किया । जिसके प्रयोग से अमेरिका की पशु संपदा एवं अर्थव्यवस्था नष्ट होते होते बच पाई। ऐसे अनेक उदाहरण उपलब्ध हैं जिनके आधार पर हम यह कह सकते हैं कि होम्योपैथी कोरोना वायरस को विज्ञान कोविड-19 से लड़ने में अग्रणी भूमिका निभा सकती है । हम इसके लिए पूरी तरह प्रयास कर भी रहे हैं। भारत में तो आयूष मंत्रालय ने इसके लिए कमर भी कस लिया है।(कोरोना नोजोड्स से भी होमियोपैथिक औषधि बनाईं जा सकती है ।)
इन दिनों जर्मनी, फ्रांस ,अमेरिका और यूरोप के अधिकांश देशों ने कुछ खड़यंत्रों के कारण होम्योपैथिक काफी पीछे कर दिया है जिसका खामियाजा वह आज भुगत रहे हैं।

मेरी तरफ से मानवता की भलाई के लिए यह अनुरोध है कि इस कठिन परिस्थिति में दुराग्रहों को भुलाकर होम्योपैथिक औषधियों का एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के साथ ही पॉजिटिव रोगियों पर प्रयोग किया जाए तो निश्चित ही जल्दी और पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा सकता है ।और होम्योपैथी पूरी तरह जन स्वास्थ्य की अग्रणी चिकित्सा पद्धति बन सकती है। जो जीव जगत के लिए वरदान होगा।

नोट- उपरोक्त औषधियों को होम्योपैथिक चिकित्सकों की राय पर ही लिया जाना चाहिए।

डॉ एम डी सिंह,
प्रबंध निदेशक,एम. डी. होमियो लैब प्रा.लि.
महाराज गंज, गाजीपुर यू.पी.भारत .
9839099260,9839099261,9839099251
Website- www.mdhomoeolab.com






बुधवार, 18 मार्च 2020

इन्क्यूबेशन पीरियड और कोरोना महामारी की गम्भीरता को समझिए- लव तिवारी

'इन्क्यूबेशन पीरियड और कोरोना महामारी' की गम्भीरता को समझिए: साहसी बनिए पर सिर्फ़ हम ही बुद्धिमान है ऐसा समझने की बेवकूफ़ी मत कीजिए ।

WHO, अमेरिका, यूरोप, प्रधानमन्त्री कार्यालय, IIM, IIT अन्य सभी को बेवकूफ़ मत समझिए जो स्कूल, कॉलेज, मॉल बन्द करवा रहे है ।
बहुत आवश्यक हो तो बाजार से सामान जरूर लें पर शर्ट या जूते एक महीने बाद भी खरीदे जा सकते है । रेस्टोरेंट एक महीने बाद भी जा सकते है ।
यह मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि कई जानकारों को ऐसा करते देखा है । यह बहादुरी नहीं मूर्खता है । ऐसे लोग अब भी गम्भीरता को नहीं समझ रहे है लापरवाही से आप अपने साथ उन अनेक लोगों की जान लेने का प्रयास कर रहे है जो देश के लिए या अपने लिए जीना चाहते है ।इन्क्यूबेशन पीरियड का खेल समझिए जिसे न समझने से इटली बर्बाद हुआ है ।

आप हम में से कोई भी कोरोना से इन्फेक्टेड हुआ तो ऐसा होते ही तुरन्त उसमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं होंगे । उसे खुद भी मालूम नहीं होगा कि उसे कोई परेशानी है या वायरस का इन्फेक्शन हो गया है परन्तु उससे अन्य व्यक्ति में इन्फेक्शन ट्रांसमिट हो सकता है । वायरस से इन्फेक्ट होने से 14 दिन बाद तक कभी भी लक्षण आ सकते है ।
इसलिए आप और हम स्वस्थ लगने वाले व्यक्ति के साथ बैठे हो तब भी हो सकता है वह इन्क्यूबेशन पीरियड में हो ऐसे में हो सकता है हम कोई इन्फेक्शन अपने साथ ले आए और अपने परिवार के सदस्यों या अपने कलीग्स को दे आए । यह हमें भी पता तब चलेगा जब बीमारी के लक्षण दिखने लगेंगे ।

मैं किसी पैथी की बुराई नहीं कर रहा हूँ लेकिन कोई कितने ही दावे करे सच यह है कि COVID-19 का इलाज़ नहीं है । जो कह रहा है उसके पास इलाज़ है वह सफ़ेद झूठ बोल रहा है । जिस दिन बीमारी दिखेगी उस दिन उस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता और वायरस की बीमार करने की क्षमता तथा उसके फेफड़ों, हार्ट, गुर्दे जैसे अंगों का सामर्थ्य तय करेगा कि वह ज़िन्दा बचेगा या नहीं ।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ के कुछ ऐसे शहर है और महा नगर है जो जनसंख्या घनत्व के आधार पर विश्व के सबसे बड़े आबादी वाले क्षेत्र है। जनसँख्या घनत्व का तातपर्य है कम जगह में ज्यादा से ज्यादा लोगो का निवास से मतलब है। जैसे दिल्ली मुम्बई, कोलकत्ता, चेन्नई, वाराणसी, कानपुर जहाँ पर रोग के फैलने से पूरे समुदाय महामारी के चपेट में आ सकता है।

इसलिए यह दुस्साहस दिखाने वाले लोग अपने ही घर के वृद्ध लोगों के हत्यारे साबित होंगे जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई है ।
घबराने की आवश्यकता नहीं है पर अनावश्यक गोष्ठियां, घूमना, मिलना कुछ दिनों के लिए बन्द कीजिए । केवल ये दूरियां ही बचा सकती है मास्क, ग्लव्ज़, सैनिटाइजर कोई भी प्रोटेक्टिव नहीं है सिर्फ़ सहायक हो सकते है । अपनी नहीं भी करते हो पर अपनों की चिंता कीजिए । आपको जिन्होंने जीवन दिया है उन्हें मौत मत दीजिए ।
अभी भी वक़्त है सावधान हो जाइए । जो लोग इतनी कवायद कर रहे है उन सबको बेवकूफ़ मत समझिए वरना भारत में आंकड़ा किस कदर भी पार कर जाए तो भी आश्चर्य नहीं होगा चीन और इटली के हालात देखने के बावजूद जो बड़ी ग़लती स्पेन ने की वो अब भारत में न दोहरायें। पिछले सप्ताह कोरोना मरीज़ों की संख्या देखते हुए सरकारी आदेश से स्पेन के स्कूल कॉलेज बंद करवा दिये गये तो कई बच्चे और उनके माता पिता, दादा दादी नाना नानी आदि पार्क में पिकनिक करने लगे। इसका नतीजा यह हुआ कि अचानक से मरीज़ों की संख्या बढ़ने लगी। तब सख़्ती से और दंड से लोगों को समझाया गया कि यह छुट्टियों का समय नहीं बल्कि आपातकाल है। सख़्ती से घर पर रहने के आदेश दिये गये। किंतु इस बीच इनफ़ेक्शन कहाँ तक और कितना फैल गया, फ़िलहाल इसका अंदाज़ा नहीं है। आगे आने वाले दो सप्ताह में इसका पता लग ही जायेगा।

भारत के निवासियों से निवेदन है, इन बड़ी बड़ी ग़लतियों से सबक़ लें, अभी से जागरूक हो जायें और कोशिश करें कि अधिक लोगों से न मिलें। जहाँ भी भीड़ की संभावना हो, यदि अत्यंत आवश्यक न हो तो वहाँ न जायें। कुछ दिन घर में रहें तो सभी सुरक्षित रहेंगे। अपने कॉमन सेंस का प्रयोग करें कि यदि बाहर जाने की वाक़ई ज़रूरत न हो तो परिवार सहित घर में ही बने रहें। ज़रूरी होने पर मास्क अवश्य लगायें। साबुन से बार बार हाथ धोयें । कोई भी पारिवारिक या सामाजिक उत्सव कुछ समय के लिये स्थगित कर दें। आप जितने कम लोगों से मिलेंगे, आप और आपके अपने उतने ही सुरक्षित रहेंगे। याद रखिये कि समझदारी से उठाया गया आपका प्रत्येक क़दम इस महामारी से लड़ने में अत्यंत प्रभावशाली तौर से सहायक हो सकता है। भीड़ से बचें, जागरूकता के साथ सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें।

ताजा जानकारी के अनुसार अभी भारत विभन्न जगह के आधार पर लगभग 140 लोग कॅरोना वायरस से पीड़ित है और सरकार ने इससे निपटने कई कारिगर उपाय कर रखा है। सरकार के द्वारा 112 नंबर को टोल फ्री नंबर और कई हेल्पलाइन नंबर को जारी किया गया है जिससे इस भयानक महामारी को रोकने से बचाया जा सके। सरकार के साथ हमे भी इस रोग के उपचार में बराबर भागीदारी करके सरकार के इस मुहिम में मदद करनी चाहिए ।

अपने साथ आप का शुभचिंतक
लव तिवारी
नोएडा गौतम बुद्ध नगर
उत्तर प्रदेश 201301
टोल फ्री नंबर-112




मंगलवार, 17 मार्च 2020

कौन कहता है कि हमने गलत प्रधानमंत्री चुना है-

1990 की घटना..

आसाम से दो सहेलियाँ रेलवे में भर्ती हेतु गुजरात रवाना हुई। रास्ते में एक स्टेशन पर गाडी बदलकर आगे का सफ़र उन्हें तय करना था लेकिन पहली गाड़ी में कुछ लड़को ने उनसे छेड़-छाड़ की, इस वजह से अगली गाड़ी में तो कम से कम सफ़र सुखद होगा ,यह आशा मन में रखकर भगवान से प्रार्थना करते हुए दोनों सहेलियाँ स्टेशन पर उतर गयी और भागते हुए रिजरवेशन चार्ट तक पहुची और चार्ट देखने लगी।चार्ट देख दोनों परेशान और भयभीत हो गयी क्यों की उनका रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं हो पाया था ।

मायूस और न चाहते उन्होंने नज़दीक खड़े TC से गाड़ी में जगह देने के लिए विनती की TC ने भी गाड़ी आने पर कोशिश करने का आश्वासन दिया एक दूसरे को आस्वाशन देते हुए दोनों गाड़ी का इंतज़ार करने लगी , आख़िरकार गाड़ी आ ही गयी और दोनों जैसे तैसे कर गाड़ी में एक जगह बैठ गयी अब सामने देखा तो !

सामने दो पुरूष बैठे थे। पिछले सफ़र में हुई बदसलूकी कैसे भूल जाती लेकिन अब वहा बैठने के अलावा कोई चारा भी नहीं था क्यों की उस डिब्बे में कोई और जगह ख़ाली भी नहीं थी।गाडी निकल चुकी थी और दोनों की निगाहें TC को ढूंढ रही थी शायद कोई दूसरी जगह मिल जाये कुछ समय बाद TC वहा पहुँचा और कहने लगा कि कही जगह नहीं है और इस सीट का भी रिजर्वेशन अगले स्टेशन से हो चूका है कृपया आप अगले स्टेशन पर दूसरी जगह देख लीजिये । यह सुनते ही दोनों के पैरो तले से जैसे जमीन ही खिसक गयी क्यों की रात का सफ़र जो था । गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ने लगी ,जैसे जैसे अगला स्टेशन पास आने लगा दोनों परेशान होने लगी लेकिन सामने बैठे पुरूष उनके परेशानी के साथ भय की अवस्था बड़े बारीकी से देख रहे थे जैसे ही अगला स्टेशन आया दोनो पुरूष उठ कर ,चल दिये. अब दोनों लड़कियो ने उनकी जगह पकड़ ली और गाड़ी निकल पड़ी कुछ क्षणों बाद वो नौजवान वापस आये और कुछ कहे बिना निचे सो गए ।दोनों सहेलियाँ यह देख अचम्भित हो गयी और डर भी रही थी जिस प्रकार सुबह के सफ़र में हुआ उसे याद कर डरते सहमते सो गयी।

सुबह चाय वाले की आवाज़ सुन नींद खुली दोनों ने उन पुरूषों को धन्यवाद कहा तो उनमे से एक पुरूष ने कहा " बहन जी गुजरात में कोई मदद चाहिए हो तो जरुर बताना " अब दोनों सहेलियों का उनके बारे में मत बदल चूका था खुद को बिना रोके एक लड़की ने अपनी बुक निकाली और उनसे अपना नाम और संपर्क लिखने को कहा दोनों ने अपना नाम और पता बुक में लिखा और हमारा स्टेशन आ गया है" ऐसा कह उतर गए और भीड़  में कही गुम हो गए दोनों सहेलियों ने उस बुक में लिखे नाम पढ़े वो नाम थे नरेंद्र मोदी और शंकर सिंह वाघेला वह लेखिका फ़िलहाल General Manager of the center for railway information system Indian railway New Delhi में कार्यरत है और यह लेख 
"The Hindu "इस अंग्रेजी पेपर में पेज नं 1 पर 
"A train journey and two names to remember इस नाम से दिनांक 1 जुन 2014 को प्रकाशित हुआ तो क्या आप अब भी ये सोचते है की हमने गलत प्रधानमन्त्री चुना है?





बुधवार, 11 मार्च 2020

नाव का छेद- अज्ञात

*नाव का छेद*

एक आदमी ने एक पेंटर को बुलाया अपने घर, और अपनी नाव दिखाकर
कहा कि इसको पेंट कर दो

पेंटर ने पेंट ले कर उस नाव को पेंट कर दिया, लाल रंग से जैसा कि नाव का मालिक चाहता था।
फिर पेंटर ने अपने पैसे लिए और चला गया !

अगले दिन, पेंटर के घर पर वह नाव का मालिक पहुँच गया और उसने एक बहुत बड़ी धनराशि का चेक दिया उस पेंटर को !

पेंटर भौंचक्का हो गया, और पूछा - ये किस बात के इतने पैसे हैं ? मेरे पैसे तो आपने कल ही दे दिये थे !

मालिक ने कहा - ये पेंट का पैसा नहीं है, बल्कि ये उस नाव में जो "छेद" था, उसको रिपेयर करने का पैसा है !

पेंटर ने कहा - अरे साहब, वो तो एक छोटा सा छेद था, सो मैंने बंद कर दिया था। उस छोटे से छेद के लिए इतना पैसा मुझे, ठीक नहीं लग रहा है !

मालिक ने कहा - दोस्त, तुम समझे नहीं मेरी बात !
अच्छा मैं विस्तार से समझाता हूँ। जब मैंने तुम्हें पेंट के लिए कहा तो जल्दबाजी में तुम्हें ये बताना भूल गया कि नाव में एक छेद है उसको रिपेयर कर देना !

और जब पेंट सूख गया, तो मेरे दोनों बच्चे उस नाव को समुद्र में लेकर नौकायन के लिए निकल गए !

मैं उस वक़्त घर पर नहीं था, लेकिन जब लौट कर आया और अपनी पत्नी से ये सुना कि बच्चे नाव को लेकर नौकायन पर निकल गए हैं !

तो मैं बदहवास हो गया। क्योंकि मुझे याद आया कि नाव में तो छेद है !

मैं गिरता पड़ता भागा उस तरफ, जिधर मेरे प्यारे बच्चे गए थे। लेकिन थोड़ी दूर पर मुझे मेरे बच्चे दिख गए, जो सकुशल वापस आ रहे थे !

अब मेरी ख़ुशी और प्रसन्नता का आलम तुम समझ सकते हो !

फिर मैंने छेद चेक किया, तो पता चला कि, मुझे बिना बताये तुम उसको रिपेयर कर चुके हो !
उस महान कार्य के लिए तो ये पैसे भी बहुत थोड़े हैं !

मेरी औकात नहीं कि उस कार्य के बदले तुम्हे ठीक ठाक पैसे दे पाऊं !

आप भी ज़रूर ध्यान रखें कि जीवन मे "भलाई का कार्य" जब मौका लगे हमेशा कर देना चाहिए, भले ही वो बहुत छोटा सा कार्य ही क्यों न हो !

क्योंकि कभी कभी वो छोटा सा कार्य भी किसी के लिए बहुत अमूल्य हो सकता है।

उन सभी को जिन्होने 'हमारी जिन्दगी की नाव' कभी भी रिपेयर की है उन्हें हार्दिक धन्यवाद .....
आपका दिन और जीवन सदा मंगलमय रहे ! राधे राधे🙏🏻



रविवार, 8 मार्च 2020

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और एक महान शख्शियत सविता सिंह- -लव तिवारी

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आईये आपको मिलवाते है एक महान शख्सियत सविता सिंह जी से मन में विश्वास और कुछ करने की जज्बा हो तो कोई भी बाधा मांयने नही रखती बचपन मे ही पोलियो से एक पैर प्रभावित होने के बाद भी आप ने अपने उद्देश्य को नही छोड़ा और आज एक राजस्व विभाग में नौकरी के साथ एक सामाजिक संस्था समर्पण के बैनर तले चलने वाले राजेश्वरी विकलांग विद्यालय जो 2007 से चल रहा है का संचालन करती है जो समाज के गरीब ,विकलांग जन, की पुर्ण से सेवा और उनके कार्यो में आये अड़चनों का सामना कर उन्हें पूरा सहयोग करती है। और आज 250 से दिव्यांग बच्चो को संभालती है ये इन बच्चों को उनके पैरों पर खड़ा करने के लिए उन्हें शिक्षा देती है ताकि ये बड़े होकर किसी पर बोझ बनने के बजाय आत्मनिर्भर हो सके सविता सिंह ने दिव्यागों को ही आपन परिवार मान लिया है

आपके इस महान कार्य के लिए 3 दिसम्बर 2011 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश और विकलांग कल्याण विभाग के द्वारा स्टेट अवार्ड सम्मानित किया गया और 2013 में अमर उजाला रूपायन अचीवर अवार्ड एव 2014 में वाराणसी के तत्कालीन कमीश्नर नितिन गोकर्ण ने भी सम्मानित किया

साल 2015 सबसे खास रहा क्योंकि इस साल इन्हें नेशनल अवार्ड चेन्नई में मिला जो मशहूर संगीतकार ए आर रहमान के हाथों से केविन केयर एपीलिटी अवार्ड और 2018 में 3 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ के द्वारा से भी सम्मानित हुई

पिछले कुछ दिन पहले गृह जनपद ग़ाज़ीपुर में इन आदरणीय जन का स्नेह एवं आशीर्वाद मिला। महिला दिवस पर इस महान व्यक्तित्व को हम सादर प्रणाम करते है और ईश्वर से यही दुआ करते है कि इन्हें और समर्थवान एवम शक्तिशाली बनाये जिससे ये समाज के इस तरह के उत्कृष्ट कार्यो में योगदान करती रहें

#महिला_दिवस










तुम्हारे आने की चाह से मंदिर में दीप जालाये जाते है- लव तिवारी

आ जाओ मेरे पास अब दिन पुराने याद आते है।
तुम्हारा साथ नही तो दिल पर सितम ढाये जाते है।।

अपनी मंजिल तुमसे थी और तुम पर ही खत्म ।
इस मसलों को दिल मे आज भी सुलझाए जाते है।।

कितनी बेरहम है दुनिया जो न हो सके हम एकदूजे के।
मोहब्बत वालो के इस दौर में नसीब आजमाए जाते है।।

कुछ तो है जो दूर रह कर तुम आज भी याद आते हो।
तुम्हारे आने की चाह से मंदिर में दीप जालाये जाते है।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- ०८-मार्च२०२०


शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

सरकारों ने वैज्ञानिक शोध कार्यो में लगातार की अन्देखी- डॉक्टर सम्मी सिंह

28 फरवरी को हम विज्ञान दिवस के रूप में मनाते है क्योकि हमारे देश के प्रख्यात वैज्ञानिक सर चन्द्रशेखर वेंकट रमन ने उसी दिन अपने उस सिद्धान्त को प्रतिपादित किया जिसमें उन्होंने माध्यम के सापेक्ष प्रकाश किरणों के बदलते तरंग दैधर्य की व्याख्या की और जो पूरी दुनिया में रमन प्रभाव के नाम से परिभषित हुआ ।  इसी खोज पर सन 1930 में उनको भौतिकी का नोबल भी दिया गया । 

सन 1987 से हम लोग उनके इस शोध पर  प्रकाशित शोध पत्र वाले दिन यानि 28 फरवरी को विज्ञान दिवस के तौर पर मनाते हुए यह संकल्प लेते है कि स्कूली  शिक्षा से लेकर जीवन के हर क्ष्रेत्र में वैज्ञानिकता और तार्किकता का विकास करेंगे लेकिन आज जब एक अंतरष्ट्रीय संग़ठन "क्लेरेटिवे एनालिटिक्स" ने दुनिया के सबसे काबिल 4000  शोधकर्ताओं की सूची जारी की तो अमेरिका के 2639, ब्रिटेन के 546 और चीन के 482 शोधकर्ताओं को स्थान मिला जबकि भारत के सिर्फ 10 शोधकर्ता ही इस सूची में जगह बना पाए । उसमे भी एक ही भारतीय महिला है जो इस सूची में जगह बना पायी। ऐसी गम्भीर स्थिति पर किसकी जवाबदेही बनती है । उस सरकार की जो हमको विश्वगुरु बनाने का सपना दिखाती है या समाज की जो आये दिन हमको हिन्दू और मुसलमान बनाकर हमारे हाथों में ख़ंजर सौप देता है इंसानियत की कत्ल करने को । 

अतुल्य भारत का सपना दिखाने वाली हमारे देश की  सरकारों ने वैज्ञानिक शोध कार्यो में लगातार कमी किया है। इस समय वह  अपने जी डी पी का 0.67%से भी कम खर्च कर रही है और यह कमी लगातार 2008से और भी बढ़ रही है और वही हमारा पड़ोसी देश चीन अपनी जी डी पी का 2.5%, ब्राजील 1.7% ,रूस 1.24% और अमेरिका तथा यूरोपीय विकसित देश अपनी जी डी पी का लगभग3 %से ऊपर शोध कार्यो पर  खर्च करते है।  राष्ट्रीय उच्च शिक्षा संस्थान पर पिछली साल 2300 करोड़ बजट आवंटित किया गया थाऔर इस बार लगभग  80%बजट की कटौती कर सिर्फ 400 करोड़ रुपया आवंटित किया गया है । हम अभी इसी पर खुश है कि कौन सा विश्विद्यालय कितना राष्ट्रवादी बचा है और कौन देशद्रोही हो गया है । सरकार तो जो कर रही है लेकिन शिक्षक और विद्यार्थी समाज भी सरकार के इस रवैये पर चुप होकर बस भारत माता की जय बोलने में मशगूल है ।
अब सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी युवा आबादी को अगर आप स्तरीय और वैज्ञानिक पद्धति से शिक्षित नही करेंगे तो देश मे धर्म, जाति और क्षेत्र आदि के नाम पर बढ़ते कत्ले आम को आप कितना रोक पाएंगे और यह खूनी अराजकता अगर समय रहते नही रोका गया तो यह हिंसा, हिंदुस्तान की पीढ़ियों को बर्बाद कर देगी।

केंसर क्यो होता है मेरी अपनी समझ क्या आप सहमत है- लव तिवारी

भारतीय संस्कृति भी पश्चिमी सभ्यता के रूप को धीरे धीरे अपना रही है । एक रोज ब्रेड खाने बैठा ब्रेड का मतलब भरतीय रोटी से नही पॉवरोटी से है ब्रेड को इलेक्ट्रॉनिक मशीन से सेकने के बाद सास की जरूर पड़ी दुकान से सास खरीदने के बाद ब्रेड का सेवन यानी कि खाना शुरू कर दिया। खाते खाते एक बात जहन में आई हम कितना केमिकल का सेवन कर रहे है। हर जगह ही केमिकल का ही सेवन कर रहे है हम सब इससे पूर्ण रूप से बचा जा सकता है। आप ने कभी सोचा है  अगर हम घर पर टमाटर की चटनी बनाते है कोई और चटनी बनाते तो उसका सेवन मूलतः दो या चार दिन ही कर पाते है उसे भी घर मे रखे फ्रीज की सहायता से करते है। फिर इन कंपनियों के द्वारा बनाई गई खाद्य सामग्री जिसके मैनुफैक्चरिंग डेट 3 महीने पहले के होते है और खाने में उसका यूज़ हम करते है न वो खराब हो ता है न ही खाने में बुरा लगता है। क्यो की केमिकल की साहयता से इसे खराब होने से रोका जाता है। 

फिर यही से शुरुवात होती है बीमारियों को हम प्रकृतिक से उत्पन्न वस्तुयों को सेवन से परहेज कर रहे है चाहे वो सास हो या कोई फल का जूस फल के जूस के साथ भी वही कहानी है। आप घर पर जूस निकालो उसे 2 दिन रखो वो पीने के अयोग्य हो जाता है लेकिन 3 महीने पुराने जूस को प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से बेचा जाता हैं उसे हम और आप पीते भी है मेरे पास कंपनी का नाम और तस्वीर भी है लेकिन मैं किसी भी कंपनी और उसके द्वारा बनाये प्रोडक्ट का नाम उजागर करूँगा तो मुझे थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। 

यही कारण है कि जितने भी सेलिब्रिटी है उनमे से 50 % लोग को कैंसर जैसी भयानक बीमारी होती है या है भी क्यो उनके पास डॉक्टर नही है या पैसे की कमी है ऐसा नही डॉक्टर तो उनके छिक आने पर उनके सामने उपस्थित होता है और पैसों का तो पूछिये मत लेकिन ये सभी लोग प्रकृति खाद्यपदार्थ के सेवन से परहेज करते है । अगर चटनी खाना है तो किसी कंपनी से निर्मित सास का सेवन करेगे अगर जूस पीना है तो भी किसी कंपनी से निर्मित 4 महीने पुराना जूस जो केमिकल के आधार पर पीने योग्य हो उसे सेवन करते है। और ही से शुरुवात होती है कैंसर जैसे महामारी की आप सभी लोगों से अनुरोध है कि प्रकृति खाद्य पदार्थो का सेवन करे। और अपने जीवन को खुशहाल रखे।

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

पढ़ा लिखा आज अन्धा हो रहा है- लव तिवारी

मजहब का धंधा हो रहा है, 
पढ़ा-लिखा भी आज अंधा हो रहा है।

देश की हुकूमत को लोग जिम्मेवार समझते है।
हर कौम को देखो गद्दार समझा रहा है।

आदत कल थी जो आज है और रहेगी ही हमारी।
मुफ्त की सेवा से आज दिल्ली मालामाल हो रहा है।।

दुसरो को दोष दे कर कब तक चैन से सो सकोगे ।
अपनी खामियों को जमाना नजर अंदाज कर रहा है।।

बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह और मुसलमान

3 अप्रैल 1967 को चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे उस समय उत्तर प्रदेश के विधानसभा में दो मुसलमान थे। एक दिन विधानसभा भवन में एक कमाल यूसुफ नाम के विधायक ने चौधरी चरण सिंह से कहा कि चौधरी साहब आप केवल हिंदुओं की वोटों से ही मुख्यमंत्री नहीं बने हो, हमने भी तुम्हें वोट दी हैं, अब हमारी कुछ मांग हैं वह आपको माननी पड़ेगी ! चौधरी साहब ने कहा यदि तुम्हारी मांग मैं ना मानूं तो क्या करोगे ? उस मुस्लिम विधायक ने कहा कि मुसलमान जन्मजात लड़ाकू होता है बहादुर होता है यदि तुम हमारी मांग स्वीकार नहीं करोगे तो हम लड़ करके अपनी मांगे मनवायेंगे ! 

चौधरी साहब ने कहा - के नीचे बैठ जा वरना जितना ऊपर खड़ा है उतना ही तुझे जमीन में उतार दूंगा ! तुम बहादुर कब से हो गए ? मुसलमान बहादुर बिल्कुल नहीं होता , एक नंबर का कायर होता है ! तुम यदि बहादुर होते तो मुसलमान बनते ही क्यों , यह जितने भी हिंदुओं से मुसलमान बने हैं यह तलवार के बल पर बने हैं ! जो तलवार की नोक को देखकर ही अपने धर्म को छोड़ सकता है और विधर्मी बन सकता है वह बहादुर कैसे हो सकता है !

 बहादुर तो हम हैं कि हमारे पूर्वजों ने 700 साल तक मुसलमानों के साथ तलवार बजाई है ! लाखों ने अपना बलिदान दिया है ! लेकिन  मुसलमान नहीं बने , तो बहादुर हम हुए या तुम हुए ! तलवार को देखते ही धर्म छोड़ बैठे आज तुम बहादुर हो तुम्हें तो अपने आप को कायर कहना चाहिए , और जो भी हिंदुओं से बना हुआ मुसलमान है पक्का कायर है क्योंकि तुमने इस्लाम को स्वीकार किया था , और मैं तुम्हारी एक भी मॉंग मानने वाला नहीं हूं जो तुम्हें करना हो कर लेना,  मैं देखना चाहता हूं तुम कितने बहादुर हो। धन्य हैं ऐसे मुख्यमंत्री !

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

टिड्डी दल के हमले को लेकर यूपी में अलर्ट- खेतों में किसानों को थाली और ढोल बजाकर जागरूक करने के लिए कहा गया है बिशन पपोला


राजस्थान और गुजरात में टिड्डी दल के हमले के बाद उत्तर-प्रदेश में भी अलर्ट जारी कर दिया है। खासकर, गन्ना किसानों के लिए दवा से अधिक सतर्कता की जरूरत बताई गई है। इसीलिए किसानों को गन्ना खेतों के आसपास थाली और ढोल बजाने को कहा गया है। पश्चिमी उत्तर-प्रदेश को अधिक संवदेनशील माना जा रहा है, जिनमें मुख्य रूप से मुरादाबाद, सहारनपुर, मुज्जफरनगर, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मथुरा, अलीगढ़ आगरा व मेरठ आदि जिले शामिल हैं। इसके अलावा पूर्वी उत्तर-प्रदेश में भी टिड्डी दल के हमले को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। हालांकि माना जा रहा है कि उत्तर-प्रदेश में फिलहाल टिड्डी दल का कोई खतरा नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके दो कारण हैं। पहला, उन्हें फिलहाल,राजस्थान और गुजरात में पर्याप्त रूप से भोजन मिल रहा है और दूसरा उत्तर-प्रदेश की पश्चिमी सीमा टिड्डी दल के हमले वाले क्षेत्रों से 1000 किलोमीटर दूर है, हालांकि अनुकूल हवा के साथ टिड्डी दल एक दिन में भी 300 किलोमीटर आगे बढ़ सकता है। अगर, ऐसा होता भी है तो 4 से 7 दिनों का समय टिड्डी दल को यहां पहुंचने में लगेगा। इसीलिए किसानों के लिए यह चेतावनी जरूरी है कि वे इसकी लड़ाई लड़ने के लिए स्वयं ही तैयार रहे। 
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने डाउन-टू-अर्थ को बताया कि टिड्डी दल के हमले का फिलहाल, यूपी में खतरा नहीं है, लेकिन सतर्कता बरतने के लिए प्रशासन की तरफ से निर्देश मिले हैं, जिसके तहत किसान अपने खेतों की रखवाली कर रहे हैं, लेकिन दवा का छिड़काव अभी नहीं किया गया है। पश्चिमी उत्तर-प्रदेश खेती के लिहाज से उत्तम क्षेत्र है, यहां अभी गन्ना, गेंहू, सरसों आदि की फसल लहलहा रही है। अगर, इस वक्त टिड्डी दल का हमला होता है तो वह फसल को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। इसीलिए अभी टिड्डी दल को भगाने के लिए प्राथमिक उपायों के आधार पर सतर्कता बरती जा रही है। 

पूर्वी उत्तर-प्रदेश के जिला गाजीपुर के किसान नेता अजय तिवारी ने डाउन-टू-अर्थ से कहा कि यहां 30-35 साल पहले टिड्डी दल का हमला हुआ था, लेकिन इस बार अभी तक पूर्वी उत्तर-प्रदेश में ऐसा हमला नहीं हुआ है। राजस्थान और गुजरात में टिड्डी दल का जिस प्रकार हमला हुआ है और वहां करोड़ों की फसल को नुकसान पहुंचा है, उससे यहां टिड्डी दल न आए, ऐसा नहीं है। अगर, नहीं भी होता है तो फिर भी एहतियात जरूरी है। प्रशासन के स्तर से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। यहां के गन्ना के अलावा गेंहू व सरसों के खेतों की रखवाली के लिए किसान हर वक्त निकल रहे हैं, जो डंडे, थाली और ढोल नगाड़ों के साथ खेतों में जा रहे हैं। 

  अधिकारी कर रहे जागरूक
प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने जनवरी के मध्य में प्रदेश के टिड्डी दल के हमले के लिहाज से अतिसंवेदनशील मंडलों के गन्ना अधिकारियों को पत्र लिखकर सतर्क रहने को कहा था और गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों से भी जागरूकता कार्यक्रमों में सहयोग करने के लिए कहा गया है। प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय भूस रेड्डी के अनुसार प्रीवेंशन इज बेटर देन क्योर का सिद्धांत अपनाकर अभियान चलाया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अगर, टिड्डी एक बार दल समेत हमला कर दे तो पूरी फसल चौपट कर देती है। इसीलिए कीटों के संभावित हमले को विफल करने के लिए अधिकारी और कर्मचारी भी भ्रमण कर रहे हैं और किसानों को सतर्कता के जरूरी उपाय बता रहे हैं। इसीलिए उत्तर-प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता के तहत थाली या ढोल बजाकर इन्हें भगाने को कहा गया है, क्योंकि टिड्डी दल शोर से डर कर भागते हैं। इसके अलावा घास में इनके अंडे पनपने की संभावना को देखते हुए गन्ना किसानों को खेतों में और मेड़ में घास की सफाई करने को भी कहा गया है। वहीं, वाल पेटिंग, पंपलेट और हैंडबिल का भी वितरण कर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

जिसे चाह अपनी मिल गयी उसे उसका खुदा मिल गया- लव तिवारी

हैरान हूं तेरे रवैये से, मेरे साथ तूने क्या किया।
ये जिंदगी को तुमने, मौत से बत्तर बना दिया।।

तेरे जफ़ा का ये हस्र है तेरा प्यार मुझको न मिल सका।
मैं वफ़ा करके तेरे साथ फिर,किसी ओर को न मिल सका।।

एक बात सुनी है दुनिया मे जिसे चाहो उसे न पा सको।
जिसे चाह अपनी मिल गयी उसे उसका खुदा मिल गया।।

मुझे इसका तो पता ही है तुम हो अमानत गैर की
मेरा दिल तुम्हारी चाह को पाने में जो विफल रहा।।

एक दुनिया अपनी थी एक दौर वो भी अजीब था ।
मेरे साथ तेरा साथ था वो पल कितना हसीन था ।।

तुम खुश रहो जिसके साथ हो ये दुआ है मेरी दिल से
जो फसल मैंने बोयी थी वो किसी ओर हिस्से में मिल गया।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 31- जनवरी-2020

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

सरस्वती साधना पर्व: बसंत पंचमी- लव तिवारी

ॐ या देवी सर्वभुतेषु बुद्धिरुपेण संस्थिता।।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।

भारत त्योहारो का देश है, यंहा पर्त्येक अवसर को त्योहार के रूप में मनाकर अपनी ख़ुशी का इजहार किया जाता हैI हमारे देश के त्योहार केवल धार्मिक अवसरों को ध्यान में ही रखकर नही मनाये जाते बल्कि ऋतु परिवर्तन के मौके का भी पर्व के रूप में ही स्वागत किया जाता हैI

ऋतु परिवर्तन का ऐसा ही एक त्यौहार है बसंत पंचमीI यह ऋतु अपने साथ कई परिवर्तन लेकर आती हैI कभी सुखकर दरकती धरती, तो कभी उसे रिमझिम फुहारों से भिगोकर मनाने कि चेस्टा करते देख, कभी शरद कि कुनकुनी धुप तो घने कोहरे मैं किसी उदास मन सी उलझी उलझी यह धरतीI मानो जैसे जो कुछ भी इंसान के मन में चल रहा है, यही प्रकृति में भी प्रतिबिंबित हो रहा हैI

बसंत पंचमी के अवसर पर चारो ओर पीली सरसों लहलहाने लगती है तथा मानव मन भी ख़ुशी से झूमने लगता हैI बसंत पंचमी के दिन से शरद ऋतु कि विदाई के साथ पेड़-पौधों और प्राणियों में नवजीवन का संचार होता हैI सभी गीतों में मदमस्त होकर झूमने लगते हैंI ये गीत होते है प्रेम के, यौवन के, यौवन कि मस्तियों के खिलने के, बिखरने के, छितरा जाने के भी, ज्यों हरे-भरे खेतों में सरसों के फूल अपनी पीली आभा के साथ मीलों-मील छितरा जाते हैं, क्योंकि यह बसंत के पर्व का अवसर होता हैI इस मौसम में कोयलें कूक-कूककर बावरी होने लगती हैं, भौरें इठला-इठलाकर मधुपान करते हैंI


बुधवार, 29 जनवरी 2020

सरस्वती पूजा और मैं- लव तिवारी

सरस्वती महामाता वीणा पुस्तक धारणे।
मम कण्ठह वसः देवी विद्या दान करो ममः।।

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।(ऋग्वेद)
जो परम चेतना सरस्वती के रूप में  हमारी मेधा, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। ऐसी कल्याणी माँ पराम्बा ,वाग्देवी' सरस्वती' के आराधना के पर्व बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।💐💐💐🙏🙏🙏



सोमवार, 27 जनवरी 2020

फिर मुझे कोई राजनीति की पाठ पढ़ाने आया- लव तिवारी

छोटे बच्चों की तरह मुझको लुभाने आया
फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया

बड़ी फ़जीहत है अपनी इस दौर में नेताओं से
आज फिर से कोई मुझमे इंसानियत जगाने आया

रूखी सूखी खाता हुँ और चुपचाप सो जाता हूँ
स्वपन में खीर की झूठ हकीकत को मुझे बताने आया

इन्हें भी कसम दे इंसान के ईमान और वसूल की
वरना एक शख़्श ही सबके घर को जलाने आया

बड़ी खौफ है इस चुनावी दौर में कही रंजिश न हो
फिर कोई नेता हिन्दू मुसलमान के मसलो को उलझाने आया

छोटे बच्चों की तरह मुझको लुभाने आया
फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया

स्वरचित- लव तिवारी

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

राम तेरी गंगा मैली हो गयी- अम्रित तिवारी

शपथ: जो भी कहूंगा सरकार की कही कहूंगा, अपने ‘मन की बात’ बिल्कुल नहीं- क्योंकि, उसका पेटेंट मेरे पास नहीं है----

27 जनवरी से यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ “गंगा यात्रा” पर हैं। बलिया और बिजनौर से शुरू होने वाली दो यात्राएं कानपुर में आकर मिलेंगी और इस दौरान 26 जिलों को टच किया जाएगा।  मकसद है गंगा का सफाई अभियान। लेकिन, सावधान! इस यात्रा का मकसद गंगा की सफाई से बिल्कुल नहीं है। ‘गंगा यात्रा’ एक बहुत बड़ा आई-वॉश है। खलिहड़ भौकाल के अलावा कुछ भी नहीं। 2020 तक गंगा को साफ करने का यज्ञ जिन्होंने ठाना था, आज उन्हीं की सरकार ने बीते चार सालों में सिर्फ 25 फीसदी ही सफाई का काम काम पूरा किया है। ये मैं नहीं कहता, बल्कि खुद सरकार ने ही लोकसभा पटल पर आंकड़े पेश किए हैं। (इसलिए कोई फटीचर तर्क नहीं पेलेगा)। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2015 से 2019 तक कुल 20,000 करोड़ रुपये के फंड का मात्र 4,800 करोड़ रुपये ही “मिशन क्लिन गंगा” या कहें “नमामि गंगे” पर पर खर्च किया गया है।

 चार साल में महज 25 फीसदी काम हुआ है, तो क्या 75 फीसदी काम एक साल में हो जाएगा? उस पर भी तब जब देश में आर्थिक मंदी ऐतिहासिक स्तर पर है। IMF ने (संयोग से इसकी प्रमुख फिरंगी मूल की नहीं, बल्कि भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ हैं) ने विकास दर का आंकड़ा 4.8 फीसदी कर दिया है। ऐसे में आर्थिक-मंदी के दौर में 75 फीसदी काम हो पाएगा?  

‘इंडियास्पेंड’ की रिपोर्ट के मुताबिक जो अभी तक 4,800 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, उसका 3,700 करोड़ रुपये (अक्टूबर, 2018 तक) यानी 77% हिस्सा सिवेज़ ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करने में हुआ है। गौर करने वाली बात ये है कि 2015 में 96 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (गंदे नाले जो गंगा में गिरते हैं, उनको साफ करने के संयत्र) बनाने के लिए स्वीकृत हुए थे। लेकिन, इसमें सिर्फ 23 को बनाने का काम पूरा हुआ और अक्टूबर 2018 तक सिर्फ 44 का काम प्रगति पर दिखाया गया। 

पहले केंद्र सरकार ने गंगा को 2019 तक साफ करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन, यह डेडलाइन आगे बढ़ाई गई और 2020 तय कर दिया गया। लेकिन, आज भी जिस तरह का छीछालेदर है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि यह स्कीम अपनी डेडलाइन पर पूरी नहीं हो सकती। गंगा का पानी इस कदर प्रदूषित है और BOD (साधारण भाषा में समझे पानी में प्रदूषण की मात्रा का मानक) लेवल काफी ज्यादा है। कई एजेंसियों ने दावा किया है कि गंगा का पानी नहाने लायक तक नहीं है। 

जरूरी बात- मैं खुद बलिया का हूं. गंगा के तट से मेरा करीबी संबंध है। भइया हो, हमारे यहां का पानी घरों तक प्रदूषित है। आर्सेनिक लेवल इस कदर बढ़ा हुआ है कि पानी पीना तो दूर गांव के खेतों के लिए हानिकारक है। प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ नलों को चिन्हित किया जाता है और पानी नहीं पीने की सलाह दी जाती है। (बाकिर अरे हीत! जब पानी नहीं पीएंगे तो जीएंगे कैसे?) ये चैलेंज सिर्फ बलिया ही नहीं, बल्कि गंगा के किनारे स्थित सभी जिलों के लिए है।  

सवाल- आर्सेनिक से जो हमारे लोगों को घातक बीमारियां हुई हैं, उसका हिसाब कौन देगा? क्या सरकार मेडिकल हर्जाना भरेगी? ये सवाल एक सरकार से नहीं बल्कि सभी सरकारों से है। 

बात यूपी की- डंपट के बोल रहा हूं कि यूपी में खलिहड़ ‘भगवा लंठई’ के कुछ नहीं हो रहा है। भगवा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, लेकिन इसका पथ-भ्रष्ट रूप अपनी आंखों के सामने देख रहा हूं। सिर्फ गंगा के नाम पर जो राजनीतिक जमीन तैयार की जा रही है, वह एक पॉलिटिकल प्रोपगैंडा है। इमोशनल मार्केटिंग है। गंगा वैसे ही मैली हैं। लेकिन, मार्केटिंग के जरिए इसे खूब चीकन दिखाया जा रहा है। जैसे कोई प्रॉडक्ट आपको सात दिनों में गोरा बना देता है। वैसे ही बताया जा रहा है कि 2020 तक गंगा साफ हो जाएगी। लेकिन, इसके बरक्स जो सियासी जॉइंट पिलाई जा रही है, उसका असल असर तो नशा उतरने के बाद पता चलेगा। 

नोट- मुझे पता है आंकड़े, रिपोर्ट, सही तर्क इत्यादि अधिक लोगों को समझ नहीं आ पाएंगे। इसके लिए मैं पूर्व की सरकारों को कटघरे में खड़ा करूंगा। कंबख्तों ने अपने बच्चों को ऑक्सफोर्ड भेजा और हमारे लिए महाविद्यालयों की राजनीतिक फौज खड़ी कर डाली...।   

एक लास्ट- "माफ करना थोड़ा इधर-उधर बहक जाता हूं"

मंगलवार, 14 जनवरी 2020

मकरसंक्रांति खिचड़ी का पर्व और मैं- लव तिवारी

भारतीय धर्म और संस्कृति में 5 साही स्नान का बहुत महत्व है , मकरसंक्रांति , अमस्वा, शिव रात्रि , और बसन्त पंचमी । मकर संक्रांति को हम खिचड़ी का त्यौहार भी कहते है। पुरानी मान्यताओ के आधार पर एक गरीब ब्रम्हाण जो कई दिन से भूखा था और एक गांव में भिक्षा के दौरान उसे थोड़े थोड़े मात्रा में कई अन्य मिले । सब अन को एक साथ मिलकर उसने खिचड़ी पकाई और बाद में उसको स्प्रेम भाव से खाने बैठ गया। तभी से मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रुप मे मनाते है। और जन आदरणीय जन सम्पन्न होते हो वो ब्रम्हाण दान के साथ ब्रम्हाण भोजन भी कराते है।

विज्ञान के आधार पर हिन्दू धर्म का मात्र एक ही त्यौहार है जिसकी दिन और समय निहित है। जब सूर्य की किरणें मकर रेखा पर सीधे पड़ती है तो उस विशेष दिन को हम मकरसंक्रांति पर्व (खिचड़ी) पर्व को मनाते हैं। लड़के इस पर्व का आनंद पतंग उड़ा कर था गांव में लड़कियां खेतो में साग खा कर इस पर्व को हर्षो उल्लास से मानते/मनाती है।इसका एक वैज्ञानिक कारण यह भी है कि जब सूर्य की किरणें मकर रेखा पर पड़ती है तो वो शरीर के लिए बहुत लाभदायक होती है । शरीर पर सूर्य के प्रकाश का पड़ना बहुत उपयोगी एवम स्वस्थ वर्धक है। 

बचपन मे मैं जब गांव में रहता था तब तक इस पर्व का आनंद हमने जम कर लिए अब परदेश में इस पर्व की केवल अनौपचारिकता ही रह गयी है। खिचड़ी के दिन का इनंतेजार हम बड़े उत्सुकता से करते थे और करे भी क्यो न  सुबह सुबह दादा स्वर्गीय पंडित राम सिंहासन तिवारी जी के साथ गंगा स्नान के लिए निकल जाते थे स्नान के बाद खिचड़ी पर्व की शुरुवात दही चुरा के साथ अपने घर पर होती थी। अगर किसी विशेष व्यक्ति जन के आग्रह पर और बाबा के आदेशानुसार हमे किसी दूसरे के घर भी दही चुरा को खाने के लिए जाना पड़ता था। लोगो के द्वारा अन दान का सिलसिला भी उस दिन होता था। जिससे लोगों के स्प्रेम मुलाकात के जो आनंद मिलते थे वो अब आधुनिक जमाने मे नही के बराबर ही या थोड़े ही रह गए है। सुबह के भोजन के बाद दोपहर में लड़कों के झुंड के साथ हम खेतो में साग खाने निकल जाते थे और दिन भर साग खाने के उपरांत कुछ साग घर के लिए भी लाये जाते थे। रात्रि भोजन में खिचड़ी का सेवन कर के सो जाते थे इस तरह मकरसंक्रांति (खिचड़ी) का त्यौहार का आनन्द हम बचपन मे खूब अच्छे ढंग से करते थे।

सोमवार, 13 जनवरी 2020

आर्थिक स्थिति के आधार पर हो आरक्षण न कि जाति के आधार पर - लव तिवारी

ये हैं मुकेश। 
जाति से ब्राह्मण हैं, नाम मुकेश मिश्र है। बनारस में अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के लिए हफ्ते में तीन दिन रिक्शा चलाकर धन अर्जित करते हैं।
इनके पिता जी का देहांत हो चुका है। मुकेश जी बनारस में रहकर अपने एक छोटे भाई को पालिटेक्निक (सिविल) करवा रहे हैं। मुकेश स्वयं Net Exam निकाल चुके हैं और Economics (अर्थशास्त्र) विषय से अभी वर्तमान समय में Phd कर रहे हैं। 
जब मैंने मुकेश मिश्र से एक मुलाकात में पूछा कि--- आप की पारिवारिक दुर्दशा पर क्या कभी कोई सरकारी मदद आपको मिला है ? 
उन्होंने हँस कर मुझे जवाब दिया--- "क्या सर जी, ब्राह्मण हूं जन्म से। भीख मांग लूंगा, यह करना हमारा स्वभाव है। हमने भीख मांगकर देश का निर्माण किया है। दान ले कर दूसरे को और समाज को दान में सब कुछ दिया है। हम सरकार से अपेक्षा क्यों करें ? हम स्वाभिमान नहीं बेच सकते। हम आरक्षण के लिये गिड़गिड़ा नहीं सकते। हम मेहनत कर सकते हैं। रिक्शा चलाने में अपना स्वाभिमान समझते हैं। किसी का उपकार लेकर जीना पसन्द नहीं है।परशुराम के वंशज हैं। हम पकौड़ा तल कर अपने और अपने भाई की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं, करेंगे। आप देखियेगा, कल हम खड़े हो जायेंगे। पीएचडी पूरी कर कहीं लग जायेंगे। रिक्शा भी चलाते हैं । मेहनत से पढ़ाई भी पूरी करते हैं।पीएचडी मेरी तैयार है। टाइप वगैरह के लिये थोड़ा और रिक्शा चलाऊंगा। भाई की पढ़ाई भी पूरी होने वाली है। माता की सेवा भी करता हूं। मां को कुछ करने नहीं देता। वे बस हमें दुलार कर साहस दे देती हैं। आप तो जानते ही हैं कि भारत के अन्दर ब्राह्मण जाति का अर्थ नेताओं की नजर में सिर्फ एक गुलाम होता है। सरकार सिर्फ दलित एवं पिछड़े वर्गों के लिए कार्य करती है। मेरे साथ चलिए, मैं ऐसे हजारों ब्राह्मण नवयुवकों से आप सभी को मिला सकता हूँ जोकि बनारस जैसे धार्मिक शहर में मजदूरी कर रहे हैं और अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। सभी स्वाभिमान से अपना काम करते हैं। किसी के आगे गिड़गिड़ाते नहीं। सभी तेज हैं। किसी प्रकार के पाखंड में नहीं जीते। अपने लक्ष्य के लिये मेहनत करते हैं। कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता। आवश्यकता है लक्ष्य भेदने की। हम सब खुश हैं स्वाभिमान से जीने पर।"

रविवार, 12 जनवरी 2020

तमाम कोशिशों के वावजूद हम तुम्हे न भूल पाये- लव तिवारी

तमाम कोशिशों के वावजूद हम तुम्हे न भूल पाये।
ये कैसी जिंदगी है कि आज भी न हम संभल पाये।।

मोहब्बत इनायत और वफ़ा ये मेरी तकदीर में नही।
ये बात समझ मे आयी फिर भी न हम बदल पाये।।

उदास मन है तन्हाई में गुजरते है मेरे दिन रात।
ये सफर कैसा था जो एक दूसरे के न हम बन पाये।।

आदते अब भी सुमार तुम्हें सोच कर कुछ लिखने को।
ये मोहब्बत चीज ही ऐसी जिसे हो वो न कुछ कर पाये।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 12- जनवरी-2020

शनिवार, 11 जनवरी 2020

सब कहते है बिगड़ गए है हम- लव तिवारी

सबकी नजरों से गिर गए है हम।
जबसे तुमसे जो मिल गए है हम।।

आदते मेरी आज कल है ऐसी।
सब कहते है कि बिगड़ गए है हम।।

तुमको चाह कर क्या गुनाह किया।
लोग कहते कितने बदल गए है हम।।

तुमसे मिलने की आदते देखकर।
सबका कहना है कि क्या कर रहे है हम।।

उनको पता नही मोहब्बत की बाते
एक दूसरे बिन आज मर रहे है हम

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 12 जनवरी 2020





शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

मातृ भाषा की अपनी पहचान हिंदी दिवस विशेष- लव तिवारी

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और भाषा से उसके राष्ट्र एवं क्षेत्र की पहचान होती है। व्यक्ति विशेष की पहचान में भाषा का विशेष योगदान है फिर भाषा का अर्थ जहा एक दूसरे की बात को समझना के साथ संस्कृति और सभ्यता से भी  है। अत्याधुनिक युग मे इस भाषा का उपयोग धीरे कम होता जा रहा है हर व्यक्ति अंग्रेजी भाषा की ओर ध्यान केंद्रित कर रखा है। जैसी भाषा वैसी संस्कृति के ओर अग्रसर इस भारतीय नागरिको की मन बुद्धि भी संकुचित हो रही है।



बुधवार, 8 जनवरी 2020

इवेन ओड की सफलता के बाद इसे पूर्ण रूप से लागू करे केजरीवाल सरकार- लव तिवारी

01 जनवरी 2016 से even और odd नंबर वाहनों की नियम जो अब पूर्ण रूप से सफलता की तरफ अग्रसर हो रहा है , इसके लिए हम दिल्ली सरकार और केजरीवाल साहब को शुभकामनाओ के साथ तहे दिल से धन्यबाद देते है ,  उनके इस असंभव कार्य और सामाजिक निष्ठा का पूर्ण समर्थन कराते है , लेकिन कही न कही एक बात मन में हमेशा संदेह पैदा कर रही है दिल्ली पर आर्थिक बोझ और वाहनों की संख्या में इजाफा तो होना तय है,  क्यों की कुछ वयक्ति की मानसिक स्थिति और इरादे नहीं बदले है और वो नयी रणनीति की फ़िराक में है जैसा की हमने पहले पोस्ट में लिखा था कि दिल्ली में मेट्रो परिचालन के बाद कुछ दिन तक ही परिस्थिति काबू में थी बाद में सभी स्थिति पहले जैसी ही हो गयी, दिल्ली या पूरा देश किसी मोदी और केजरीवाल का न हो कर हम सभी का है , सही कार्यो का समर्थन और जिम्मेदारी हम सभी का है ,एक विचार और मेरे मन में है अगर कोई चार पहिया वाहन जिसमे उनके संख्या के आधार पर लोग बैठे हो उन वाहनों का चालान न काटे जाये और हमारा जहा तक अनुमान है सरकार को सभी लोगो से विचार करके अपने नियमो में बदलाव की भी जरुरत है 

इस पोस्ट के साथ जो तस्वीर लगाई गयी है उसका इस पोस्ट से कोई ताल्लुकात नहीं है , यह एक प्रमोशन की प्रकिया है जिससे लोगो के पास हमारी बात पहुच सके

हमारी दिल्ली , स्वस्थ दिल्ली
जय हिन्द ,जय भारत , जय दिल्ली

प्रस्तुति - लव तिवारी

मंगलवार, 7 जनवरी 2020

सामर्थ के आधार पर ही सहयोग का आस्वासन दे - लव तिवारी

एक ठंडी रात में एक अरबपति बाहर एक बूढ़े गरीब आदमी से मिला। उसने उससे पूँछा क्या तुम्हें बाहर ठंड महसूस नही हो रही है और तुमने कोई कोट भी नही पहना है?

बूढ़े ने जवाब दिया मेरे पास कोट नही है लेकिन मुझे इसकी आदत है।
अरबपति ने जवाब दिया मेरे लिए रुको मैं अभी अपने घर में प्रवेश करूंगा और तुम्हारे लिए एक कोट ले लाऊंगा।

वह बेचारा बहुत खुश हुआ और कहा कि वह उसका इंतजार करेगा। अरबपति अपने घर में घुस गया और वहां व्यस्त हो गया और गरीब आदमी को भूल गया।

सुबह उसे उस गरीब बूढ़े व्यक्ति की याद आई और वह उसे खोजने निकला लेकिन ठंड के कारण उसे मृत पाया लेकिन उसने एक चिट्ठी छोड़ी थी जिसमे लिखा था कि "जब मेरे पास कोई गर्म कपड़े नही थे, तो मेरे पास ठंड से लड़ने की मानसिक शक्ति थी।
लेकिन जब आपने मुझे मेरी मदद करने का वादा किया तो मैं आपके वादे से जुड़ गया और इसने मेरी मानसिक शक्ति को खत्म कर दिया।

अगर आप अपना वादा नही निभा सकते तो कुछ भी वादा न करें।
यह आप के लिये जरूरी नही भी हो सकता है लेकिन यह किसी और के लिए सब कुछ हो सकता है।
🙏🙏🙏

सोमवार, 6 जनवरी 2020

गैर इस्लाम से इस्लामिक देश गाम्बिया - लव तिवारी

15Dec.2015 को धर्मनिरपेक्ष देश गाम्बिया बना 57वां इस्लामिक राष्ट्र
जब 1965 में ब्रिटेन से आजाद हुआ तब इस देश में 25% मुस्लिम,
55% ईसाई व 20% में बहावी बौद्ध और हिंदू,
2000 मुस्लिम 40%,
2010 मुस्लिम 65%
2014 मुस्लिम 90%
2015 इस्लामिक देश, 
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ गाम्बिया!

राष्ट्रपति ने मुस्लिम जनसँख्या अधिक होते ही घोषित कर दिया इस्लामिक राष्ट्र..
सेकुलरिज्म तभी तक चला जबतक मुस्लिम अल्पसंख्यक थे,बहुसंख्यक होते ही लागू हुआ इस्लामिक शरिया कानून जो लोग मुसलमानों की इस मौलिक बात को नहीं समझेंगे वे हमेशा भटकते रहेंगे
मुसलमान केवल तब तक ही धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक होता है जब तक वो अल्पमत में होता हैं।ये दोनों सिद्धांत उनके लिए आस्था के बिंदु नहीं बल्कि एक हथियार हैं।वास्तव में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता इस्लाम में हराम है।आप स्वयं पता करोगे तो पाओगे की दुनिया का कोई भी मुस्लिम देश लोकतांत्रिक या धर्मनिरपेक्ष नहीं है।वे इस्लामी गणतंत्र से ऊपर नहीं उठ सकते।जैसे ही मुसलमान बहुसंख्यक होते हैं,लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता उड़ जाते हैं।इसके विपरीत जब ये अल्पमत में होते हैं तो इनको सारे अधिकार चाहिए,परंतु जैसे ही बहुसंख्यक होते हैं कट्टर इस्लामिक बन जाते हैं, जो अल्पमत वालों को जीने का भी अधिकार नहीं देते।

सारी दुनिया और भारत में कहीं भी नज़र डालिए, मेरी बात समझ आ जायेगी। दुःख इस बात का है कि अधिकांश हिंदू अभी भी इस वास्तविकता पर आँखें मूंदे रहते है।

कुछ लोग है जो इस दौर में मोदी सरकार से ही जल गये- लव तिवारी

शहर के दंगे देखकर गली के बच्चे भी डर गये।
जो रहते एक साथ, वो अपने मे ही झगड़ गये ।।

कुछ हाल ऐसा अपने मुल्क में भी है आज कल।
जो अपने थे वो आज गीता कुरान के लिए लड़ गये।।

न हुनर रही न सलीका किसी के साथ उठने बैठने की।
बच्चों में जो तहज़ीब चाहिए वो अब किताब तक रह गये।।

भूख और बेरोजगारी ये आज की नही है फसाद "लव"।
कुछ लोग है जो इस दौर में मोदी सरकार से ही जल गये।।

रचना- लव तिवारी 
दिनांक- 06- जनवरी- 2020


रविवार, 5 जनवरी 2020

आगे-आगे समाज और पीछे-पीछे सरकार चलेगी तभी गोवंश सुरक्षित होंगे- नीतीश सिंह

आगे-आगे समाज और पीछे-पीछे सरकार चलेगी तभी गोवंश सुरक्षित और किसान खुशहाल  होंगे: नीतीश सिंह 
....

बेसहारा गोवंश की समस्या पूरे प्रदेश में है। गोकशी पर कानूनी रोक लगने के बाद गोवंशों को गांव से निकालना दूभर हो गया। इससे गांवों में सैकड़ों बेसहारा गोवंश जुट गये। बेसहारा और बेकार जानवरों खेती-किसानी के लिए खतरा बन गये। प्रदेश सरकार ने लोक आस्था और अपनी विचारधारा के अनुरुप गोवंश को व्यक्तित्व माना और उनकी हत्या पर कानूनी रोक लगा दी।  ऐसे गोवंशों को जीवन जीने के अधिकार मिले और हिंदू आस्था की रक्षा भी हुई। सरकार ने गोवंशों की सुरक्षा, चारा और पानी का इंतजाम करने की बेशक व्यवस्था तो बनाई पर हरेक गोवंश के लिए 30 रुपये प्रतिदिन का मानक व्यवहारिक नहीं सिद्ध हो रहा। सरकारी अमला से लेकर लोग 30 रुपये में गोवंश के पेट भरने की आलोचना करते हैं।वास्तव में इतने कम पैसे में भूसे के अलावा खली, चून्नी और अन्य खाद्य की व्यवस्था नहीं हो सकेगी। 

आज सरकार ने सेस लगाकर गोवंश के लिए पैसे जुटाने की पहल तो की है, इससे जरूर कुछ राजस्व आ जाएंगे। लेकिन उत्तर प्रदेश में ही  11 लाख के करीब बेसहारा गोवंश हैं, वहीं अपने जिले में एक हिसाब से 15 हजार के करीब बेसहारा गोवंश होंगे। यदि आप प्रदेश सरकार का बजट देखेंगे तो हर वित्त वर्ष में घाटे का बजट पेश होता है। सरकार की आमदनी से ज्यादा खर्चें रहते हैं। ऐसे में सरकार को समाज के भी सहयोग की जरूरत पड़ती है। एक हिंदू होने के नाते आस्थावश सबको अपनी क्षमता के मुताबिक इस लोक कार्य में सहयोग करना चाहिए। 
जनप्रतिनिधि, व्यापारी, युवा और बड़े किसानों को सबसे पहले आगे आना चाहिए। गांव-2 में गोशाला बनाने और उसके संचालन में सहयोग करके इस व्यवस्था को दुरुस्त करनी चाहिए। अन्यथा सरकार के भरोसे न खेती बच पाएगी और न गोशाला टीक पाएंगे। 

यह फोटो : पटकनिया गांव के अस्थायी गोशाला की है।

गांव गाय गौशाला और योगी सरकार -लव तिवारी

गांव गाय और गौशाला यह एक वास्तविक विषय बना था । जिस पर योगी सरकार ने कार्यवाही करते सही दिशा निर्देश दिए है। अधिकतर अपने गांव के आदरणीय जन से बातो में एक यही सबसे बड़ी खामियां लोग बताते थे आवारा पशुओं और उनके द्वारा  खेतों के नुकसान जिससे किसानों का बुरा हाल होता था। योगी सरकार को गैर बीजपी सरकार ने बदनाम कर रखा था  इसका कारण कत्ल खानों पर सरकार के पाबन्दी से आवारा पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी । अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के जिला अधिकारियो को  सख्त निर्देश है कि सभी आवारा पशुओं को जिले के गौशाला में एकत्रित किया जाय तथा योगी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गोशाला में गायों को छुड़ाने आता है, तो उससे जुर्माना वसूला जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि गायों को चारा, पानी और सुरक्षा भी मुहैय्या कराई जाए. उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों और व्यापारियों को भी इसमें योगदान करना चाहिए. इससे पहले मंगलवार को योगी सरकार ने सड़क में घूमती आवारा गायों के लिए गोशाला बनाने के लिए नए सेस का फैसला लिया. 'गौ कल्याण सेस' का उपयोग गोशाला बनाने और उसकी देखभाल करने के लिए किया जाएगा.

मेरे द्वारा माननीय मुख्यमंत्री को एक सुझाव है गांव के अधिकतर ग्राम सभा की जमीनों पर दबंगो का कब्जा हो रखा है। बढ़ती जनसंख्या और लूट खोस की वजह से गांव के दबंग लोग वो किसी भी जाति से सम्बंध रखते हो गांव के ग्राम सभा की जमीनों पर कब्जा जमा रखा है। इन जमीनों पर पर्याप्त मात्रा में घास होती थी जिससे गांव के आवारा पशुओं का भोजन का काम इन सभी जगहों से हो जाता था। अगर गरीब या निम्न समुदाय जिसको उस जमीन की जरूरत हो अगर वो उस जमीन पर  गुजर बसर कर रहे होते है तो बात समझ मे आती है  मैंने अपने जिले के कई ऐसे गांव देखे है जहाँ अवैध रुप से सरकारी एवं ग्राम सभा की जमीनों पर लोगो द्वारा कब्जा कर रखा है
प्रस्तुति-लव तिवारी


शनिवार, 4 जनवरी 2020

छुटी जाइ जगवा के जेतना झमेल बा- गोपाल राय

अरे आइल अकेल तोहके जायके अकेल बा
छुटी जाइ  जगवा के जेतना झमेल बा
छुटी जाइ जगवा के...

कितनो तू सईहरब बाकी अंत समय आवेला
ये जिनगी के दियना फिर लुपुर झुपर ताके ला
उतने जरेला जेतना ओकरा में तेल बा
छुटी जाइ जगवा के...
अइले अकेल तोहके......

जिनगी ह स्टेशन एगो चहल पहल बा भारी
हरियर झंडी गार्ड देखवलस चले का बा तैयारी-2
सुन सुन लागेला अब त छूट गइल रेल बा
छुटी जाइ जगवा के...
अइल अकेल तोहके......

पहिला बचपन दूसरा जवानी जे पर सब अगराला
तीसरे चढल बुड़वती मनवा कांप कांप रही जाले
इहे तीन घंटा वाला जिनगी के खेल बा 
छुटी जाइ जगवा के...
अइले अकेल तोहके

इंतिहान में पास भईल जो राम राम गोहरवलस
माया ठगनी ए दुनिया पल पल नाच नचवलस
हँसे वाले एकरा में जीरो पा के फेल बा
छुटी जाइ जगवा के...
अइले अकेल तोहके

छूट जाई जगवा......
अइले अकेल तोहके

चलत बेरिया हो चलत बेरिया हमके उड़ाये चदरिया- गोपाल राय

लकड़ी जल कोयला भई कोयला जल भई राख
मैं पापन ऐसी जली कोयला भई न राख

चलत बेरिया हो चलत बेरिया हो चलत बेरिया
हमके उड़ाये चदरिया चलत बेरिया
चलत बेरिया..........4

प्राण राम जब निक्सन लागे 
निक्सन लागे निकासन लागे
उलट गई दोनु नयन पूतारिया
चलत बेरिया.....
हमके उड़ाये चदरिया....

भीतर से जब बाहर आये-2
बाहर आये हो बाहर आये
छूट गई सब महल अटरिया-2
चलत बेरिया हो....
हमके उड़ाए चदरिया....

चार जने मिल खाट उठाइहे-2
खाट उठाइहे खाट उठाइहे-2
चार जने मिल खाट उठाइहे
रोयत ले चले डगर डगरिया
चलत बेरिया हो चलत बेरिया....
हमके उड़ाए चदरिया.....

कहत कबीर सुनो भाई साधो-2
सुनो भाई साधो सुनो भाई साधो-2
कहत कबीर सुनो भाई साधु
संग चली वही सुखी लकड़िया
चलत बेरिया हो.....
हमके उड़ाये चदरिया.....