देश में हिन्दुत्व के होल सोल ब्रैंड अंबेसडर, सामान्य वर्ग को सरकार ने लात मार मारकर ये समझाया कि देशभक्ति नहीं जाति भक्ति करने में ही फायदा है । जब मोदी जी का दिल आया गधी पर... तो परी क्या चीज है ?
मित्रों हिन्दू धर्म बड़े खतरे में है । ये समय था कि हम सभी लोग गजवा-ए-हिंद के खिलाफ तैयारी करते लेकिन अफसोस कि हिन्दुओं ने एकजुट होकर जिसको अपना नेता बनाया, उस नेता ने ही हिन्दू एकता की पीठ में छुरा घोंप दिया । कई सदियों के बाद हिंदुओं को प्रचंड सत्ता मिली, लेकिन जिनको सत्ता दी गई वो चढ़ावा चोरी जैसे घृणित कामों में लिप्त पाए गए । ये राम मंदिर की मर्यादा 5 साल तक भी अक्षुण्ण नहीं रख सके, हिंदुत्व तो बहुत बड़ा विषय है और बहुत गंभीर जटिल मुद्दे हैं ।
जब से देश की राजनीति हिंदुत्व के दौर में प्रवेश करती है।
तो सिर्फ सामान्य वर्ग की जातियां ही ऐसी थी जिन्होंने जाति भक्ति छोड़कर राष्ट्रभक्ति और हिंदुत्व भक्ति के नाम पर बीजेपी को वोट दिया। बाकी हर जाति ने अपनी अपनी पार्टी बनाई और अपने ही वर्ग की अन्य जातियों से गठजोड़ करके मुख्यमंत्री के पद तक भी पहुंच गए ।
जैसे यादवों ने अपनी पार्टी बनाई सपा और आरजेडी
जाटवों ने अपनी पार्टी बनाई बसपा
यूपी, राजस्थान और हरियाणा में जाट लोगों ने भी अपनी अलग अलग पार्टियां बनाई, RLD इत्यादि
उत्तर प्रदेश में कुर्मियों ने बनाया अपना दल
राजभरों ने बनाई सुहलदेव समाज पार्टी
बिहार के पासवानों ने बनाई LJP
बिहार के कुर्मियों ने जनता दल
यूपी में निषादों की भी अलग पार्टी है ।
सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण... सोचने लायक बात यह है की लाख कोशिशों के बाद भी बीजेपी इन जाति के लोगों को हिंदुत्व के नाम पर अपनी पार्टी के अंदर विलय कराने में कामयाब नहीं हो सकी । इन जातियों में जाति भक्ति इतनी ज्यादा है कि ये अगर बीजेपी में आए भी तो अपनी पार्टी के गठबंधन के साथ ही आए। इन जातियों के नेता भी सत्ता की मलाई काटने के लिए बीजेपी के साथ हो लिए, लेकिन आज भी हिंदुत्व पर इनकी जुबान नहीं खुलती है ।
अब हिंदुत्व के लिए इतने लंबे समय से बैटिंग करने का काम ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य कर रहे थे और सही मायने में गजवा ए हिंद से मुकाबला करने के लिए देश को तैयार करने में जी जान से लगे हुए थे तब इन सभी सामान्य वर्ग की जातियों की पीठ में मोदी जी ने यूजीसी लाकर छुरा घोंप दिया । जब सामान्य वर्ग की नींद टूटी तो उसको समझ में आया कि हिंदुत्व की घुट्टी पिलाकर उसके साथ बड़ा अन्याय किया जा रहा है। अब ये सब जातीय बवाल और जन भावनाओं के उफान को रोकना हमारे हाथ में नहीं है, सरकार ने हिमालयन ब्लंडर किया है । दुख इसी बात का है, ये सब जो हो रहा है इसकी टाइमिंग बहुत खराब है ये समय हिंदुओं को तैयार करने का था लेकिन मोदी ने आपस में हिंदुओं को ही लड़वाकर देश के इस्लामीकरण का रास्ता खोल दिया ।
अगर मोदी और संघ चाहते तो यादव, कुर्मी, पासवान अन्य सभी जातियों में मौजूद ऐसे महानायकों को आदर्श बना सकते थे जिन्होंने मुगलों के खिलाफ महान युद्ध लड़े और हिन्दुत्व के आदर्श स्थापित किए लेकिन बीजेपी और मोदी ने ऐसे अंग्रेजों के पिट्ठुओं को अपना आदर्श बना लिया है जो अपनी किताबों में ये लिखते हैं कि ब्रह्मा जी रंडीबाज थे ।
यानी जब मोदी जी का दिल आया गधी पर तो परी क्या चीज है?
और यही आज इस वक्त देश का दुर्भाग्य है और देश की बड़ी विडंबना भी है ।
विदुर नीति में विदुर लिखते हैं कि जहर एक व्यक्ति को मार सकता है, लेकिन राजा की एक गलत नीति पूरे राष्ट्र का संहार कर सकती है ।
तो अगर इस राष्ट्र को बचाना चाहते हो तो इसका एक ही उपाय है इस त्रिपुंडधारी फर्जी चक्रवर्ती सम्राट को उखाड़ फेंकने के लिए भीषण संकल्प लो और किसी योग्य हिन्दू नेता को आगे कर समाज में फिर से समरसता का माहौल स्थापित करो और सब जातियों में बराबरी स्थापित करो। किसी के साथ कोई अन्याय ना हो । किसी का तुष्टीकरण न हो । क्योंकि हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है, कहीं जाति की लड़ाई में हम वो अमूल्य समय ना खो दें जो इस राष्ट्र को बचाने के लिए आवश्यक है ।
साभार
- लव तिवारी










0 comments:
एक टिप्पणी भेजें