मेरा ब्लॉग मेरी रचना- लव तिवारी संपर्क सूत्र- +91-9458668566

Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

we are performing in bhail bihan program in mahuaa chanel

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Flag Counter

Flag Counter

बुधवार, 23 अगस्त 2017

ये मेरा दिल तुझमे एक फरिश्ता ढूढता है लव तिवारी

बर्बाद मंजर में बहार गुलिस्तां ढूढता हैं
ये मेरे दिल तुझमे एक फरिश्ता ढूढ़ता है

कभी तो मेहरबाँ बन कर आओगी मेरे सामने
ये ख़्वाब भी हक़ीक़त का एक असर ढूढता है

नज़र अभी तलाशती उस हसीन रुख को
जिसे देखने की चाह में हर कोई मरता है

मैं तुम्हें चाहूँ जमाने की हर रिवाज़ को छोड़कर
इस वाकपन को देख कर आज शहर जलता है

तकलीफ़ ज़माने को मोहब्बत करने वालो से अक्सर
इन्सान अपने दुःख से परेशां किसी सुख पर रहता  है

लव तिवारी



सोमवार, 21 अगस्त 2017

पेड़ से ही हो सकती है सृष्टि की रक्षा - लव तिवारी

शुद्ध नहीं आबो-हवा, दूषित है आकाश,
सभ्य आदमी कर रहा, स्वयं श्रृष्टि का नाश..

ओजोन परत गल रही, प्रगति बनी अभिशाप,
वक़्त अभी है सोचिये, वरना पछ्ताएंगे आप..

अंत निकट संसार का, सूख रही है झील,
दूषित है वातावरण, लुप्त हो रही चील..

पेड़ लगाए कोई नही ac की है आस
घर को ठंडा सबकरे धरती का करे विनाश

पूज्य गुरु जी के तस्वीर सोशल मीडिया पर हर दिन मिलती रहती है देश के वास्तविक विकास को अग्रसर रूप देते हुए इस महान व्यक्तित्व की एक अनोखी कहानी , कुछ दिन पहले #दिल्ली #नोएडा डायरेक्ट #DND  से अचानक गुजरने का मौका मिला नोएडा दिल्ली dnd के बाई तरफ एक तस्वीर भी इस वास्तविकता को समझा रही थी कि पेड़ नही रहे तो जीवन नही रहेगा
प्रस्तुति- #लव_तिवारी
Visit- www.lavtiwari.blogspot.in



शनिवार, 12 अगस्त 2017

अब सवाल और जबाब भी तुम्ही से- लव तिवारी

अब सवाल और जबाब भी तुम्ही से
आओ किसी दिन हिसाब भी तुम्ही से

बड़े उलफ्फत में है ये हसीन जिंदगी
किसी रोज मुस्कुराओ कायनात भी तुम्ही से

लोगो का क्या है मोहब्बत के सब दुश्मन है यहाँ
बस एक तुम हो और जज्बात भी तुम्ही से

हुस्न की बात करे तो निगाहें तुम पर रुकती
हो आसमान में बहुत तारे लेकिन चाँद भी तुम्ही से

कभी आओ सज धज के की अब कयामत हो
अब नही सही जाती जुदाई हालात भी तुम्ही से



रचना लव तिवारी
11 08 2017

शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

तुमको देखूं और फिर सोचूँ न तुमको अपना पाऊँ लव तिवारी

तुमको देखु और फिर सोचु ,न तुमको अपना पाऊँ
ये कैसी है रीत यहाँ की, साथ तुम्हारे जा न सकु

प्यार भरा ये मौसम है और तन्हा मेरा जीवन
ख्वाब के वो सुने पल को मैं तुमसे बतला न सकु

मेरा जीवन मेरी कविता मेरे सब कुछ तुम्ही हो
है दुनिया की एक हक़ीक़त मैं तुमको दिखा न सकूँ

आओ अब हम साथ चले दुनिया की रंजिश छोड़कर
प्यार भरे इस जीवन के कुछ पल तुम्हारे साथ जियूँ

आँखों को एक नरमी और चेहरे की अदायगी
बिन कहे सब बात मैं समझो पर तुमको न समझा पाऊँ

रचना- लव तिवारी
27-07-2017


गुरुवार, 27 जुलाई 2017

हमारा नाम लिखकर कागजो पर फिर उड़ा देना- अज्ञात

हमारा नाम लिखकर कागजों पर फिर उडा देना।
भला सीखा कहाँ तुमने सितम को यूँ हवा देना॥

हमे मालूम है तुम भी किसी से प्यार करते हो।
तुम्हे भी इल्म है मेरा किसी पर मुस्कुरा देना॥

मुहब्बत ग़म मे हो या खुशी मे दोनो बेहतर है।
कहीं कोई मिले तुमको उसे यह मशविरा देना॥

तुम अपने हक पे जायज हो हम अपने हक पे जायज हैं।
कहाँ फिर बात आती है किसी का घर गिरा देना॥

यॆ दुनियाँ है बडी काफिर तू इसकी बात पर मत आ।
के इसका काम है ऊपर चढा कर फिर गिरा देना॥


सोमवार, 24 जुलाई 2017

सुनाइये कुछ अनसुना सा- लव तिवारी

सुनाइये कुछ अनसुना सा
जिंदगी में कुछ रहनुमा सा
ख्वाब और हकीकत में
हो गया एक फासला सा
तुम न मिले तो समझ आया
जिंदगी में न कुछ हुआ सा
मंजरों का दौर भी अब
रह गया अब सुना  सा
जिंदगी में एक मलाल भी
तुम सा न कोई मिला सा
मुझको तुम मिलोगी एक दिन
रह गया अब भरम जरा सा
रचना - लव तिवारी
25-07-2017


सोमवार, 10 जुलाई 2017

आखों में आँसू दिल मे अंगार लिए बैठे है- लव तिवारी

आँखों मे आँसू दिल में अंगार लिए घूमते है
हम तेरे प्यार में गुलिस्ता बर्बाद किये घूमते है

हस्र अब ये है दिल धड़कता नही तड़पता है
ख्वाइशें ऐसी है कि बेकरार लिए घूमते है

याद आते ही अब भी आँखे नम हो जाती
जमना कहता है तेरा प्यार लिए घूमते है

भले दूर ही सही आज भी दिल के करीब हो तुम
ख़्वाब में आज भी तुम्हारा तलबगार लिए घूमते है

जहाँ में हम तुम एक न हो सके तो क्या हुआ
चाहत आज भी जवा है इंतेजार लिए घूमते है

रचना- लव तिवारी 10-07-2017


दोनों उदास है नही बुझती अब प्यास है- लव तिवारी

दोनों उदास है
नही बुझती अब प्यास है

दीवानो की बस्ती में
समुन्दर भी आस पास है

कौन कहेगा इन्हें बेवफ़ा
दुनिया ने इन्हें किया निराश है

अब भी बस करे तो कर दु इन्हें एक मैं
देखो इनकी आखो में कितनी प्यास है

फिर सोचा सब कुछ नही मिलता है
आज आदमी भी अपने नसीब से परेशान है

एक प्रेमी जोड़े की उदासियों को उजागर करती मेरी कविता
रचना- लव तिवारी
10-07-2017


शनिवार, 8 जुलाई 2017

दरिंदगी की आग में झुलसता बंगाल - लव तिवारी

अब भी करो अवार्ड वापसी कोई तो दम दिखाओ
सुवर के अवालाद हो तुम कोई तो जश्न मनाओ

देश जहा नंगा है अपने ही गद्दारों से
करते है जो खून खराबा सत्ता को हथियाने में

ममता को ममता नही बंगाल की दहशत से
अपनी रोटी सेक रही दंगो की नफरत से

हिन्दू को इंसाफ चाहिए देश के तुम गद्दारो से
देश को तुमने बहुत ही रौंदा उल्फत के अंगारो से

आजादी के हक के खातिर हिन्दू मुस्लिम आदी थे
आज ऐसा क्या हुआ जो अपने मे सब बागी है

दरिंदगी की आग में झुलसता बंगाल - लव तिवारी


नाकाम होकर भी कामयाबी की बात करते हो- लव तिवारी

नाकाम हो कर भी कामयाबी की बात करते है
है मोहब्बत जहर और खुराकी की बात करते हो

बदल दिए जाते है वसूल शोहरत और हैसियत देखकर
क़त्ल के दौर में तुम जिंदगानी की बात करते हो

हो मुसफिल तो जनाज़े में भी न हुजूम होगा
होकर गरीब तरफ़दारी की बात करते हो

कहा था कुछ दूर चलो मेरे साथ सफर जिंदगी में
नही चले तो फिर समझदारी की बात करते हो

जामने भर की रंजिश में आज बदनाम है कौम
इन्सानियत की जिद छोड़कर बर्बादी की बात करते हों

नाकाम होकर भी कामयाबी की बात करते हो- लव तिवारी
08-07-2017


शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

डर अब ये है कि हर ज़नाज़े को कफन चाहिये - लव तिवारी

डर अब ये है कि हर ज़नाज़े को कफन चाहिये
मौत बत्तर न हो कही एक ऐसी जगह चाहिए

कौन है यहाँ अपना इस बात की खबर नही मुझे
गर पड़े काम तो हर शख्स  की परख चाहिए

आइये चलिए कही बैठ कर फिर जाम पीये
सच को परखने के लिए नशे की लत चाहिए

बड़े तोहमत भी दिए और बाद में शर्मिंदगी भी
ऐसे हालात के बाद भी दिल पर उन्हें हक चाहिए

मुझसे मांगते है वो कि अब दो मुझे तुम और तौफा
दिल लगाने के बदले उन्हें मेरा जानो जहन चाहिए

रचना- डर अब ये है कि हर ज़नाज़े को कफन चाहिये - लव तिवारी
 06-07-2017


गुरुवार, 6 जुलाई 2017

डर अब ये है कि हर जनाज़े को कफन चाहिए - लव तिवारी

डर अब ये है कि हर ज़नाज़े को कफन चाहिये
मौत बत्तर न हो कही एक ऐसी जगह चाहिए

कौन है यहाँ अपना इस बात की खबर नही मुझे
गर पड़े काम तो हर शख्स  की परख चाहिए

आइये चलिए कही बैठ कर फिर जाम पीये
सच को परखने के लिए नशे की लत चाहिए

बड़े तोहमत भी दिए और बाद में शर्मिंदगी भी
ऐसे हालात के लिए भी क्या दिल को लत चाहिए

मुझसे मांगते है वो कि अब दो मुझे तुम और तौफा
दिल लगाने के बदले उन्हें मेरा जानो जहन चाहिए

रचना- लव तिवारी
06-07-2017


गुरुवार, 29 जून 2017

दर्द अब भी न सभले तो जख्म होगा लव तिवारी

दर्द अब भी न सभले तो जख़्म होगा
तुम्ही हो दवा अब न कोई मरहम होगा

ख्वाईशो की चाह भी रुकती है तुम्ही पर
कि खुदा जो भी करेगा मेरे हक में होगा 

बदलते मौसम की तरह तुम भी बदल गये
मैं बस देखता रह गया कोई तो हमदम होगा

ख्याल आता तुम्हरा अक्सर मुझे अकेले में
औऱ कुछ लिखू तुझपर तो एक ग़ज़ल होगा

रात में अब भी संवारता है तेरा जुनून मुझे
की जिंदगी में कुछ न कुछ तो मुक्कमल होगा

लव तिवारी- 29-06-2017


बुधवार, 28 जून 2017

तुम्हारी खूबसूरती में अजब रंग है कि तुम ही हो जहन में दिल तंग है- लव तिवारी

तुम्हारी खूबसूरती में अजब रंग है
कि तुम ही हो जहन में दिल तंग है

मोहब्बत की रंगत में देखिए ये हस्र भी
जिसे बेपनाह चाहो वही आज दंग है

खुदा की इबादत में भी ख्याल आता है तुम्हारा
दिल सोचे तुम्हें अब न कोई मरहम है

मौसम हुआ खुशनुमा की एक ख्याल सा आया
कि कोई तो हुआ खुश मुझे भले गम है

लव तिवारी
रचना- 27-06-2017


गुरुवार, 1 जून 2017

जिंदगी को एक बेहतर जिंदगी मिले- लव तिवारी

अब भी दो मोहब्बत की खुशी मिले
जिंदगी को एक बेहतर जिंदगी मिले

लोग कहते है मुझको तेरा चाहने वाला
क्या खता की बिन बात दर्द और ग़म मिले

बड़ी उम्मीद थी जिंदगी में नये ख्वाईश की
आज फिर से मिलो तो कोई खम  मिले

बात क्या है कि अब मिलते नही करीब से
कुछ तो कहो झूठ ही कि सच का दम निकलें

तरी अहमियत को अभी दिल को आश सी है
कि कभी मुहूर्त बदले और तुम हमसे मिले

रचना- लव तिवारी
01-06-2017
\

रविवार, 21 मई 2017

ये आँखे ये जुल्फे ये तेरा मुस्काना- लव तिवारी

ये आँखे , ये जुल्फे ये तेरा मुस्काना
कभी हमको मरेगा ये तेरा शर्मना

ये काजल ये बिंदिया और हाथो की चूड़ी
मुझे तेरे पास लाये ये कैसी मजबूरी

रोज  शाम होते मेरी यादों में आना
मुझे मदहोश रखता तेरी निगाहों का प्याला

कभी चुपके से  मेरे सपनों में आकर
तुम्हे याद करू मैं अपने दिल मे समाकर

कभी उठ के बैठु कभी हँस के रोऊ
ये दुनिंया कहे मुझको पागल दिवाना

लव तिवारी
रचना- 22-05-2017


गुरुवार, 18 मई 2017

तेरी उल्फत में भी एक अदा है - डॉ एम डी सिंह

तेरी  उल्फत  में  भी  एक अदा है
तेरी  नफरत  में भी  एक  अदा है
खैर  वाजिब   तो   वाजिब  है  ही
बेजा  हरकत में  भी एक  अदा है
जान-बूझ के करे तो क्या  कहना
तेरी  गफ़लत में भी  एक  अदा है
अदा  इनकार  में भी  तेरे कम ना
तेरी  शिरकत  में भी  एक अदा है
कभी  जो   नाफरमा  हुए  तो भी
तेरी  सहमत  में  भी एक अदा है
उल्फत - प्यार
वाजिब - सही
बेजा - गलत
गफलत - अनजान
शिरकत - भाग लेना
नाफरमा - विरोधी
डॉ एम डी सिंह


शुक्रवार, 5 मई 2017

कोई अच्छी सी सजा दो मुझको चलो ऐसा करो भुला दो मुझको- लव तिवारी

कोई अच्छी सी सजा दो मुझको
चलो ऐसा करो भुला दो मुझको

अपने दिल मे बसी तस्वीर मेरी
ऐसा करो फिर जला दो उसको

मेरी वफा पे अगर शक हे तुमको
तो फिर नजर से गिरा दो मुझको

मुद्दत हो गई हैं तेरे प्यार मे जागते हुए
अपनी सांसो कि हरारात से सुला दो मुझको

कुछ तो तरस करो अपने दिवाने पर
जाम न सही जहर ही पिला दो मुझको ,

तुमसे बिछडू तो मौत आ जाये मुझको 
दिल कि गहराइयो से ये दुआ दो मुझको






गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

एक प्यारा सा गांव, जिसमे पीपल छांव छाव में आशिया था एक छोटा मका था - सुदर्शन फ़ाकिर

एक प्यारा सा गांव, जिसमे पीपल छांव 
छाव में आशिया था, एक छोटा मका था 
छोड़ कर गांव को, उसी घनी छाव को 
शहर के हो गए है, भीड़ में खो गये है

वो नदी का किनारा, जिस पर बचपन गुजारा
वो लड़कपन दीवाना, रोज पनघट पर जाना
क्या वो थी जवानी , बन गए हम कहानी
छोड़ कर गांव.......
एक प्यारा सा गांव.......

इतने गहरे थे रिश्ते, लोग थे फरिश्ते
एक टुकड़ा जमीन थी, अपनी जन्नत वही थी
हाय ये बदनसीबी ,नाम जिसका गरीबी 
छोड़ कर गांव को....
एक प्यारा सा गांव.....

ये तो प्रदेश ठहरा ,देश फिर देश ठहरा
हादसों की बस्ती , कोई मेला न मस्ती
क्या यहाँ जिंदगी है हर कोई अजनबी है
छोड़ कर गांव को......
एक प्यारा सा गांव.......

 रचना- - सुदर्शन फ़ाकिर




शनिवार, 22 अप्रैल 2017

दोस्त एक भी तो नही दिख रहा यहाँ- डॉ एम डी सिंह

हुआ   कैसा   यह   अखबार   शाया   है
पन्ना - पन्ना गम हर्फ - हर्फ  दर्द छाया है

चीख  के  दम  तोड़ती  इंसानियत  यहां
कैसे  दौर  में  भला  यह  वक्त  आया है

दोस्त  एक भी तो नहीं  दिख  रहा  यहां
खींच  ऐसे  मुकाम  पर  जश्न  लाया  है

रोके नहीं हैं रुकते यहां अश्क किसी के
किसी  शायर  ने  यूं इक  नज्म गाया है

खौफ के साए में सभी लिपटे दिख रहे
मौत   करीब   इतना   सबने   पाया  है

डॉ एम डी सिंह


जहाँ इंसानियत दिखती नही - डॉ एम डी सिंह

जहां  इंसानियत  दिखती  नहीं  यार  कहीं पर
कहते हो तुम था जमी पे कभी जन्नत यहीं पर


गुलों  की जहां  बस्तियां  दिखतीं थी  हर जगह
टुकड़े  पत्थरों  के  बिखरे हैं हर सिम्त वहीं पर


जाने को जहां थी भरी दिल में हर किसी के हाँ
आज क्यूँ  टिकी  है  बात  एकदम  से नहीं पर


जहां  फूलों  की घाटियां  शिकारों  पे  शहर था
सुना   वही   वादियां  जी  बन्दूकों  पे  रहीं  पर


शाल  पश्मीने की ओढ़ के  ले हाथों  में कांगड़ी
वे मेरे इरादों   की   मीनारें   रेत   सी   ढहीं  पर


डॉ एम डी सिंह




शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

एक बात कहे जो तुम समझो- लव तिवारी

एक बात कहे जो तुम समझो
मुझे तुमझे मोहब्बत है शायद

लेकिन दुनिया के लोगो मे
एक बड़ी बग़ावत है शायद

तुम हो जाते  मेरे अपने
बस यही एक चाहत है शायद

ये ख्वाब न टूटे उम्र भर कही
एक बस यही हसरत है शायद

मुझे अपनी दुनिया की फिक्र नही
एक तुम्ही सलामत रहो शायद


रविवार, 2 अप्रैल 2017

कौन सुनेगा किसको सुनाये - लव तिवारी

दिल्ली, गुरुग्राम, नॉएडा, मुंबई, पुणे, बंगलुरु 
मिनी इंडिया को रिप्रेजेंट करते हैं...

एक ही पल में जहां एक तरफ बहुमंजिला इमारतों की बालकनियों में 
चाय की चुस्कियां चल रही होती हैं...
तो दूसरी ओर उसी बिल्डिंग के बराबर वाले स्लम में 
रोते बिलखते बच्चों की आवाज के बीच एक बैचैन माँ 
चूल्हे पे कुछ पकाने की जद्दोजहद में होती है..

कोई एक कान पे फ़ोन लगाए और दूसरे कंधे पे लैपटॉप बैग टाँगे 
घर जाने के लिए ऑटो पकड़ने भाग रहा होता है..
तो दूसरी तरफ उस भागते हुए आदमी 
और उस ऑटो वाले को सूनी सी आँखों से देखते 
5 रिक्शेवाले खड़े होते हैं..
जिनके घुटने कभी भी उनको धोखा दे देंगे..
और इस गर्मी में लू से ज्यादा फ़िक्र उन्हें 
शाम के लिए अपने परिवार का पेट भरने की होगी..

एक तरफ अहातों के बाहर फॉर्चूनर लगाए 
"बापू जमींदार" सुनते हुए नशे में चूर लोग होंगे..
तो दूसरी तरफ उन्ही फॉर्चूनरों में टिक्के पहुंचाते और कम प्याज लाने पे गालियां खाते 
10 12 साल के बच्चे..

एक तरफ नाईट आउट पे निकले शोहदे शोहदियां हैं 
तो दूसरी तरफ इसी रात में फुटपाथ के किनारे 
चादर तान के सोने की कोशिश करते बिन पते बिन नामों वाले लोग..

ये कंट्रास्ट ही शायद इन शहरों की हकीकत है...
शायद यही हकीकत हमारे देश की भी है..
कोई बारिश के इन्तजार में दुखी है..
तो कोई बारिश के आ जाने से..
कोई २ घंटे के पावर कट से ही दुखी है 
तो किसी की किस्मत में एक पंखा तक नहीं है..

इन सब बातों को डिस्कस करने का कोई मतलब नहीं है..
ना ही इसका समाधान मेरे पास है..
पर भगवान् ने भाव ही ऐसा दिया है कि 
ये सब अनदेखा करके भी अवचेतन मन में रह जाता है..

कई बार यूँही ऑटो पकड़ने भागते भागते ठिठक जाता हूँ..
और उन सूनी सी आँखों वाले रिक्शेवालों की आँखों में 
मुझे अपनी तरफ आता देख थोड़ी सी चमक बढ़ जाती है..

तीज त्यौहार पे यूँही अपनी मेड..चौकीदार..और कार साफ़ करने वालों को 
500 500 रुपये का बोनस दे देता हूँ...

और अपने फ्लैट की बालकनी से 
झुग्गियों में खेलते बच्चों को देख तीरथ महसूस कर लेता हूँ...

मैं समस्याओं को समझ रहा हूँ..
और अपनी हैसियत के हिसाब से योगदान देने की कोशिश कर रहा हूँ..
मैं इस बदलते #भारत का युवा हूँ..
मैं अपने साथ और भी बहुत सपनों को सच करना चाहता हूँ...

मुझे उम्मीद है मैं और आप एक ही हैं..



गुरुवार, 30 मार्च 2017

विवशता- मरती क्यों नही चिड़िया - एम डी सिंह

विवशता :::
चिड़िया
घर के सामने
पेड़ पर चीखती है
नारे लगाती है मेरे विरुद्ध
बच्चों के साथ चहचहा कर खेलती है
फुदक फुदक कर नाचती है
गड़ती है मेरी आंखों में
किरकिरी की तरह
मुझे हंसी क्यों नहीं आती
मेरे बच्चे मेरे साथ खेल क्यों नहीं पाते
आता है गुस्सा
चिढ़ाती है मुझको
मारता हूं ढेले भगाता हूं उसको
उड़-उड़ बार-बार बैठ जाती है
डरती क्यों नहीं चिड़िया
नहीं जानती
हूं कितना वहशी
बेदर्द स्वार्थी भय का प्रतीक
वह तो बस चिड़िया
जीभ का स्वाद पेट का आहार
मारता हूं रोज नोचता हूं पंख
भूनता हूं खाता हूं
चिड़िया पेड़ पर
घोसले में
फिर भी चाहचहाती है
मरती क्यों नहीं चिड़िया ?
डॉ एम डी सिंह


शुक्रवार, 17 मार्च 2017

काश ये रोशनी के शहर नही होते - डा एम डी सिंह

काश  ये  रोशनी  के  शहर नहीं  होते
तो  फिर  ये  हादसों  के घर नहीं होते

अस्ल  तल्खियां  गुनहगार  हैं  वरना
यूं  खंजर  कभी  खूँ  से तर नहीं होते

है  इल्म  जो हम सब  को  डराती  है
वरना   इतने  कहीं  पे  डर नहीं  होते

फिक्र झूठ को सच करने की न होती
सच मुच  अफवाहों  के पर नहीं होते

खोल गर निगाहें चलते कहीं तुम भी
मौत के  इल्जाम इतने सर नहीं होते

़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़डॉ एम डी सिंह

गुरुवार, 9 मार्च 2017

कश्मीर की नाजुक कली हो तुम- लव तिवारी

कश्मीर की नाजुक कली हो तुम
बिन कहे चहकती ग़ज़ल हो तुम

कोई नही तुम्हारा बिना मेरा यहाँ
मेरी जिंदगी और आशिकी हो तुम

कभी रातो में एक खुशनुमा ख़्याल
तो कभी दिलो की धङकन हो तुम

धुप और गर्मी सी बेहाल है  जिंदगी
शीतलता के लिए शज़र हो तुम

लहरों तूफान में डुबू अगर मैं कही
बन के साहिल किनारें की मंजिल हो तुम




रचना - लव तिवारी

रविवार, 5 मार्च 2017

आती कैसे नींद करवट को मैंने- ऍम डी सिंह

आती   कैसे   नींद  करवटों   को   मैंने  ख्वाब  लुटाते  देखा
आवारा   कमबख़्त   ख़यालों   को   मैंने  नीद  चुराते  देखा

कैसे  करूं  शिकायत  किसने मेरा  घर जलाया खाक किया
मेरे   ही   हाथों   मशाल  थी  जिन्हें  मैंने  आग  लगाते  देखा

पतवारों  को   छीन  हवाओं  ने  जब   नावों  के  बदले  पांव
मैंने  खुद  को  सर  ऊंचा  कर तूफानों को पास  बुलाते देखा

कभी   कालरें  मेरी   तुमने  मुड़  टूट  रही  हैं  कब  ये सोचा
दुनिया  ने   तमाशाई   बन  के  आस्तीनें  ऊपर  जाते   देखा

बड़ा  आदमी  बड़ी  हवेली  थी  फिर  भी आज न जाने क्यों
बेहद तंग सबिस्तां में लेजा कर ना किसने मुझे सुलाते देखा

 
सबिस्तां -शयनगृह
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़डॉ एम डी सिंह

शनिवार, 4 मार्च 2017

कल तक जो ख्वाब था वो हकीकत हो तुम - लव तिवारी

कल तक जो ख्वाब था वो हकीकत हो तुम
जिंदगी कैसे जिये अब मोहब्बत हो तुम

धड़कते दिल की आहट में शोर सा है खुशनुमा
तपतपाती धुप  में  एक शजर हो तुम

मेरी दुनिया तुमसे है और ग़ज़ल रंगीन भी
शायरी के हर लब्ज़ में एक बसर हो तुम

रात की तन्हाइयो में देते हो एक अहसास
बन जाती हो ग़ज़ल मेरी आशिकी हो तुम

ख्वाब का वो दौर जब तुम आती हो सामने
दिल झूम उठता है  बस हर ख़ुशी हो तुम

रचना -लव तिवारी 03-03-2017
संपर्क सूत्र- +91-8010060609
Visit- lavtiwari.blogspot.in\


सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

शरारत के बन्दे शराफत की बातें - एम डी सिंह

शरारत  के   बंदे  शराफत  की  बातें
मवाली के धंधे  हिफाजत  की  बातें

हैरानी   में   सब   को   डाले  हुए  हैं
नियत  मैं   दंगे   इबादत   की   बातें

चोरों   के   घर  सिपाहियों  की दावत
मक्कारी  के फंदे  हिरासत  की  बातें

कोयले  की   दलाली  सफेदी के संग
बैठे   खुद  नंगे   नफासत   की  बातें

पास ना जिनके आज जेब में अधेली
दिखावट  में  चंगे  विरासत  की बातें

.............डॉ एम डी सिंह


सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

कब्र के लिए दो गज जमीन ढुढोगे - एम डी सिंह

डा साहब की कविता अक्सर whatsaap पर आती है और पढ़ कर मन ख़ुशी के साथ उर्दू के कुछ नए शब्दो से भी सामना होता है

मकां नहीं एक  दिन  मकीन  ढूंढोगे
कब्र  के  लिए  दो  गज  जमीन  ढूंढोगे
हर  हाथ  फरेब  बेचेने  वालों सुन  लो
किसी  रोज  तुम  भी  यकीन  ढूंढोगे
खुदगर्जिओं  के  बाजार  में खड़े बेकस
ऐ  खुशफहम  एक  दिन  ख़दीन  ढूंढोगे
खुद  पे  बेईमान  कुछ  तो  रहम  करो
न  मिलेगा  जब  तुम  अमीन  ढूंढोगे
खत्म करने की फिक्र में हो जिसे आजकल
एक  दिन  तुम  मादा  जनीन  ढूंढोगे

मकीन - रहने वाला
ख़दीन -दोस्त
अमीन - ईमानदार
मादा जनीन - गर्भस्थ बच्ची 

डॉ एम डी सिंह


शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

मेरी ग़ज़लों में तू और तुझ पर मैं फ़िदा हूँ - लव तिवारी

जान ले लेती है मेरी ये होंठो पर तेरी काली तिल
लोग कहते हैं कि मयकदो का वासिन्दा हूँ

ज़ुल्फ़ तेरे जो लगते है एक सुहानी छाव की तरह
दुनिया समझी है मै घने जंगल का परिंदा हूँ

तेरे सख्सियत से उभरे मेरे हुनर और क़ाबलियत
मेरी ग़ज़लों में तू और तुझ पर मैं फ़िदा हूँ

ये आँखे चेहरा और इसपर एक गुलाबी लिबास
कयामत हो जाती तभी तो मैं मर कर भी जिन्दा हु




गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

तेरे हुस्न की क्या तारीफ करू- लव तिवारी

तेरे हुस्न की क्या तारीफ करू
तू सबसे अलग है और सबसे हसीन

तुझे जब से देखा भूल गया
मुझे क्या मिला और क्या नही

तेरे ज़ुल्फ़ की सुखद छांव में
मुझे मिलता है एक सुकून सही

तेरे एक झलक को पाने को
मैं कब से हूँ  बेचैन  यही

तू मिल गयी तो सबकुछ मिला
मुझे किसी बात का अब मलाल नही

रचना- लव तिवारी


बिगड़ लेने दे इतना सुधरने का मज़ा आ जाये डॉ एम डी सिंह

कद्दावर   के   आगे   मुकरने  का  मजा  आए
हो   सामने   पहाड़   ठुकरने   का  मजा आए

राहें   न   बत   आसां   रहबर    और   हमको
दुश्वार   डगर   हो   गुजरने   का   मजा  आए

चढ़ने  दे  दोस्त  इतना  नीचे न  दिखे कुछ भी
गहरी    हो   घाटी   उतरने   का   मजा   आए

मिल जाए गर किसी के  सपनों को पर हमीसे
फिर ख्वाब कुछ अपने कुतरने का मजा आए

नसीहतें   सभी   तेरी   हम   मान   लें   नासेह
बिगड़  लेने  दे  इतना  सुधरने  का मजा आए

.......डॉ एम डी सिंह

सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

याद आयी माँ बहुत जब खत मिला - जसवंत सिंह

याद आयी माँ बहुत जब खत मिला-2
रुक न पाया आँसुओ का सिलसिला
याद आयी माँ........

माँ के हर अल्फ़ाज से गम की उठी ऐसी लहर
सो सका न चैन से एक पल भी रात भर
वक़्त से करता रहा रो कर गिला
याद आयी........

कितने बचपन के सुहानी  दिन जहन पर छा गए
संग जिनके खेलता था याद वो सब आ गए
कैसे अब लौटेगा वो बचपन भला
याद आयी माँ .........

मैं शहर की भीड़ में आया तो आकर खो गया
मेरा चेहरा मुझसे ही कुछ अजनबी सा हो गया
फूल ख्वाबो का नही कोई खिला
याद आयी माँ ........

भेजती है बहन राखी, रो के लिखती है मुझे
तू तो मुझको भूल बैठा कैसे मैं भूलू तुझे
टूट जाता है मेरा तब हौसला
याद आयी माँ.........

दर बदर भटका हु कितना नौकरी के वास्ते
माँ को कैसे मैं लिखू गुजरे है क्या क्या वास्ते
चाह कर मैं नही पाता भुला
याद आयी माँ.........

आगे लिखती है माँ कैसे रखूं मैं हौसला
कोई पंछी तक न अपना भूलता है घोसला
आ सहा जाता नही अब फासला
याद आयी माँ......


रविवार, 5 फ़रवरी 2017

सुबह से शाम तक तेरा ख्याल रहता है - लव तिवारी

सुबह से शाम तक तेरा ख्याल रहता है
तुम जो मेरे नही हो इसका मलाल रहता है

बड़ी उम्मीद है तुमसे जो तुम हो जाओगे अपने
इसी वास्ते तुझपर हरदम ख़ुमार रहता है

कभी सोते कभी जागते सोचता हूं तुम्हें अक्सर
खुली और बन्द आँखों से तेरा दीदार होता है

बड़े दुश्मन है दुनिया में इस दिल्लगी के
यहाँ फ़रेबी बन कर चमत्कार होता है

हालात अपने जो बत्तर हुए तुम्हे चाहने से
तेरे करार से जिंदगी बहाल होता है

रचना- लव तिवारी
05-02-2017

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

गांव तेरे गोद में बचपन सुहाना बीत गया- लव तिवारी

गांव तेरे गोद में बचपन सुहाना बीत गया
चंद गलिया और अपनों में दिन पुराना बीत गया

पनघटों पर भरती गगरी और रात की लोरिया
ऐसी जिंदगी को देखते-2 एक जमाना बीत गया

मैं बड़ा क्यों हुआ और आया क्यों परदेश में
आज कुछ सोचूँ तो रोऊ मुस्कुराना बीत गया

खेत और खलिहान के वो पग डंडों से रास्ते
चिड़ियों की कतुहल के स्वर का आना बीत गया

गांव की गोरी की मुस्काती छवि और प्यार भी
कैसे उनको भूलू मैं उनका शर्माना बीत गया

चाँदनी रातो में छत पर मिलने को बेकरारी सी
थी नजाकत और शराफ़त फिर ख़ामोशी से आना बीत गया

प्रस्तुति- लव तिवारी
रचना- 02-02-17



बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

सरस्वती बंदना - सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला

वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे।


ज्ञान विद्या वाणी वीणा संगीतसुधा व आचरण की देवी मां भगवती सरस्वती के जन्मदिवस व वसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
सभी में सद् बुद्धि का संचार हो।

शनिवार, 28 जनवरी 2017

जो खो जाता है मिलकर जिंदगी में - चन्दन दास

जो खो जाता है मिलकर जिंदगी में-2
ग़ज़ल है नाम उसका शायरी में

निकल आते आंसू हँसते हँसते-3
ये किस गम की महक हर ख़ुशी में
ग़ज़ल है............

कही चेहरा कही आँखे कही लब- 3
हमेशा एक मिलता है करी में
ग़ज़ल है.......

सुलगती रेत में पानी कहा था
कोई बादल छुपा था तिशनगी में
ग़ज़ल है.............

जमी पर आशमा मिलता नही है
फरिश्ता ढूढ़िये मत आदमी में
ग़ज़ल है..........

जाने वाले तेरी तस्वीर ले जा मुझसे- चन्दन दास

मोहब्बत का रिश्ता न टूटे कभी भी
तेरा साथ छुटे तो किस तरह छुटे
बिछड़ना है हमसे तो हँस कर बिछड़ जा
कुछ ऐसे जुदा हो दिल भी न टूटे

जाने वाले तेरी तस्वीर ले जा मुझसे
लूट रहा हूँ तो ये ज़ागीर ले जा मुझसे

लौट कर फिर कभी आवाज न देना मुझको
प्यार करने का ये अंदाज न देना मुझको
हाथ में टुटा हुआ साज न देना मुझको
तेरी ख़त तेरी ये तहरीर भी ले जा मुझसे
जाने वाले......

अब मेरा और मेरी मंजिल का ठिकाना क्या है
मुझसे मत पूछ की जीने का बहाना क्या है
तू नही है तो जमाने को दिखाने क्या है
छीन कर अब मेरी तक़दीर भी ले जा मुझसे
जाने वाले.......

जाने कल क्या हो तेरी आस रहे या न रहे
दिल में ये दौलते अहसास रहे या न रहे
जिंदगी मेरी मेरे पास रहे या न रहे
ख्वाब भी टुटा है ताबीर भी ले जा मुझसे
जाने वाले........
लूट रहा ........


आ भी जाओ कि जिंदगी कम हैं - चन्दन दास

आ भी जाओ जिन्दगी कम है
तुम नहीं तो हर ख़ुशी कम है
आ भी जाओ.......

वादा करके ये कौन आया नहीं- 3
शहर में आज रोशनी कम है
तुम नहीं हो........

जाने क्या हो गया है मौसम को-3
धुप ज्यादा है चाँदनी कम है
तुम नहीं हो.............

आईना देख कर ख्याल आया- 3
आज कल उनकी दोस्ती काम हैं
तुम नहीं हो..........

तेरे दम से ही मुक्कमल हूं-3
बिन तेरे तेरी यामिनी कम है
तुम नहीं हो..........



शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

कटेगी ये अब जिंदगी रोते रोते- अनूप जलोटा

कटेगी ये अब जिंदगी रोते रोते
ये कह कर गयी ख़ुशी रोते रोते

गमे दस्ता अपनी अश्को लिखकर
सरे बज़्म हमने पढ़ी रोते रोते
कटेगी.....

ये सोचा था नहीं था कभी जिंदगी में-2
कि रूठेगी हमसे हँसी रोते रोते
कटेगी अब जिंदगी......

परेशान हुए चाँद तारे फलक पर
यु रुखसत हुई चाँदनी रोते रोते
कटेगी.......

ये मालूम होता है किश्मत हमारी-2
कि जैसे खुदा लिखी रोते रोते
कटेगी...............

उम्र भर तो करी नीद ने बेवफ़ाई-2
जो ओढ़ा कफ़न आ गयी रोते रोते
कटेगी ये अब जिंदगी......

ये कह कर गयी........


आप की बेरुखी को क्या कहिये - अनूप जलोटा

आप की बेरुखी को क्या कहिये-2
अपने दिल की लगी को क्या कहिये

काश करते न हम जफ़ा का गिला
उनकी शर्मिंदगी को क्या कहिये
अपने..............

हिज्र में मौत भी नहीं आती
बेहया जिंदगी को क्या कहिये
अपने ..............

लाख चाहा की भूल जाए उन्हें
अपने कम्बख्त जी को क्या कहिये
आप की बेरुखी........

तोड़ दी फिर से दर्द ने तौबा
आदते मय कशी को क्या कहिये
आप की बेरुखी......


फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया- लव तिवारी

छोटे बच्चों की तरह मुझको लुभाने आया
फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया

बड़ी फ़जीहत है अपनी इस दौर में नेताओं से
आज फिर से कोई मुझमे इंसानियत जगाने आया

रूखी सूखी खाता हुँ और चुपचाप सो जाता हूँ
स्वपन में खीर की हकीकत को मुझे बताने आया

इन्हें भी कसम दे इंसान के ईमान और वसूल की
वरना एक शख़्श ही सबके घर को जलाने आया

बड़ी खौफ है इस चुनावी दौर में कही रंजिश न हो
फिर कोई नेता हिन्दू मुसलमान के मसलो को उलझाने आया

छोटे बच्चों की तरह मुझको लुभाने आया
फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया


बुधवार, 18 जनवरी 2017

दिल में लगी आग तो दोस्त बेगाने लगाते है- लव तिवारी

पेड़ पर अनगिनत हरे पत्ते सुहाने लगते है
दिल में लगी हो आग तो दोस्त बेगाने लगते है

में चाहू उन्हें रूह से, और समझे गर जिस्म की बात
ऐसे हालात में मोहब्बत भी अफ़साने लगाते है

हर शख़्स यहाँ ओढ़ा हुआ है फरेब की चादर
एक वफ़ा मिल जाये तो नसीब जगमगाने लगते है

इस वक़्त में गरीबी बनी है मौत का कारण
कोई चंद पैसे लुटाए तो हम घबराने लगाते है

बड़ी तोहमत मिली मुझको किसी अपने के फ़रेब से
एक गुनाह हमसे गर हो जाये तो लोग इतराने लगते है



रचना- लव तिवारी
18-01-2017

सोमवार, 16 जनवरी 2017

फिर वो ख़्वाब में आये और रात सुहानी हों- लव तिवारी

फिर वो ख़्वाब में आये और रात सुहानी हों
मुझसे करे बात फिर कोई कहानी हो

बदल देता है वो रुख हवाओँ का फ़िज़ा में आकर
और कहते है ,मुझ जैसी कई आप की रुबाई हो

मै कैसे समझाऊ उन्हें की वही है मेरा सबकुछ
उन्हें छोड़कर कर कुछ सोचु तो खत्म जवानी हो

बदलते वक़्त की रफ़तार के फिराक में ही था
जो मेरी थी कभी, आज किसी और की दीवानी हो

रचना- लव तिवारी
15- 01- 2017

शनिवार, 14 जनवरी 2017

कोई तारीफ करे तो उसे मोहब्बत समझे- लव तिवारी

कोई तारीफ करे तो उसे मोहब्बत समझे
जिंदगी को केवल न जिंदगी समझे

बड़े उसूल है दुनिंया में रिश्तो  के
आप कौन है इसकी अहमियत समझे

आप को न चाहा तो क्या किया मैंने
उम्र के एक पल की जो हकीकत समझे

दुनिया में आया हू केवल आप के लिए
आप जो गौर से देखे तो मेरी चाहत समझे

प्रस्तुति- लव तिवारी
14-01-2016

गुरुवार, 12 जनवरी 2017

श्रमिक तेरे जीवन की दुःखद है कहानी लव तिवारी

श्रमिक चौक नोएडा (#Labour_Chauk )
आज अचानक सुबह नॉएडा में श्रमिक चौक से गुज़रे, ठण्ड और कपकपाती शरद की हवाओं में एक अजब सा दुःखद अहसास भी मजदूरों की अन्तर्व्यथा को दर्शाता है और साथ में बेरोजगारी की महामारी भी,  कई बार बिना काम मिले भी श्रमिक को घर लौटना पड़ता है, इसका महत्वपूर्ण कारण टेक्नोलॉजी एवं अत्याधुनिक संसाधनों से युक्त मशीने भी है, श्रमिक के हक़ का भी धन बड़े ठेकेदारो के हाथ में जा रहा है,  सरकार की इतनी योजनाओ के बावजूद भी भारत के श्रमिक को आज भी परेशानियो का सामना करना पड़ता है

   
कभी तपती धूप तो कभी शरद हवाओं की
श्रमिक तेरे जीवन में दोनों की अपनी मनमानी
 
हर वक़्त पैसे की क़िल्लत है और लाचारी
सत्ता और मालिक के अत्याचार की गजब कहानी
 
प्रस्तुति- #लव_तिवारी




मंगलवार, 10 जनवरी 2017

आप के दिल में क्या है बता दीजिए

आँख तो प्यार में दिल की जबान होती है
सच्ची चाहत तो सदा बेजुबान होती है
प्यार में दर्द भी मिले तो कैसा घबराना
सुना है दर्द से चाहत जवान होती है

आप के दिल में क्या है बता दीजिए
यु न खामोश रह कर सजा दीजिये

या तो वादा वफ़ा को पूरा करे
या उमीदो की सम्मा बुझा दीजिये
यु न खामोश.....
आप के.........

आप को चाह कर कुछ न चाहा कभी
मेरी चाहत का कुछ तो सिला दीजिये
यु न खामोश.....
आप के .........

फूल मुरझा गए आप की चाह  में
मुस्कुरा कर उन्हें फिर खिला दीजिये
यु न खामोश .........
आप के .......