मेरा ब्लॉग मेरी रचना- लव तिवारी संपर्क सूत्र- +91-9458668566

Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

we are performing in bhail bihan program in mahuaa chanel

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Flag Counter

Flag Counter

सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

शरारत के बन्दे शराफत की बातें - एम डी सिंह

शरारत  के   बंदे  शराफत  की  बातें
मवाली के धंधे  हिफाजत  की  बातें

हैरानी   में   सब   को   डाले  हुए  हैं
नियत  मैं   दंगे   इबादत   की   बातें

चोरों   के   घर  सिपाहियों  की दावत
मक्कारी  के फंदे  हिरासत  की  बातें

कोयले  की   दलाली  सफेदी के संग
बैठे   खुद  नंगे   नफासत   की  बातें

पास ना जिनके आज जेब में अधेली
दिखावट  में  चंगे  विरासत  की बातें

.............डॉ एम डी सिंह


सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

कब्र के लिए दो गज जमीन ढुढोगे - एम डी सिंह

डा साहब की कविता अक्सर whatsaap पर आती है और पढ़ कर मन ख़ुशी के साथ उर्दू के कुछ नए शब्दो से भी सामना होता है

मकां नहीं एक  दिन  मकीन  ढूंढोगे
कब्र  के  लिए  दो  गज  जमीन  ढूंढोगे
हर  हाथ  फरेब  बेचेने  वालों सुन  लो
किसी  रोज  तुम  भी  यकीन  ढूंढोगे
खुदगर्जिओं  के  बाजार  में खड़े बेकस
ऐ  खुशफहम  एक  दिन  ख़दीन  ढूंढोगे
खुद  पे  बेईमान  कुछ  तो  रहम  करो
न  मिलेगा  जब  तुम  अमीन  ढूंढोगे
खत्म करने की फिक्र में हो जिसे आजकल
एक  दिन  तुम  मादा  जनीन  ढूंढोगे

मकीन - रहने वाला
ख़दीन -दोस्त
अमीन - ईमानदार
मादा जनीन - गर्भस्थ बच्ची 

डॉ एम डी सिंह


शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

मेरी ग़ज़लों में तू और तुझ पर मैं फ़िदा हूँ - लव तिवारी

जान ले लेती है मेरी ये होंठो पर तेरी काली तिल
लोग कहते हैं कि मयकदो का वासिन्दा हूँ

ज़ुल्फ़ तेरे जो लगते है एक सुहानी छाव की तरह
दुनिया समझी है मै घने जंगल का परिंदा हूँ

तेरे सख्सियत से उभरे मेरे हुनर और क़ाबलियत
मेरी ग़ज़लों में तू और तुझ पर मैं फ़िदा हूँ

ये आँखे चेहरा और इसपर एक गुलाबी लिबास
कयामत हो जाती तभी तो मैं मर कर भी जिन्दा हु




गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

तेरे हुस्न की क्या तारीफ करू- लव तिवारी

तेरे हुस्न की क्या तारीफ करू
तू सबसे अलग है और सबसे हसीन

तुझे जब से देखा भूल गया
मुझे क्या मिला और क्या नही

तेरे ज़ुल्फ़ की सुखद छांव में
मुझे मिलता है एक सुकून सही

तेरे एक झलक को पाने को
मैं कब से हूँ  बेचैन  यही

तू मिल गयी तो सबकुछ मिला
मुझे किसी बात का अब मलाल नही

रचना- लव तिवारी


बिगड़ लेने दे इतना सुधरने का मज़ा आ जाये डॉ एम डी सिंह

कद्दावर   के   आगे   मुकरने  का  मजा  आए
हो   सामने   पहाड़   ठुकरने   का  मजा आए

राहें   न   बत   आसां   रहबर    और   हमको
दुश्वार   डगर   हो   गुजरने   का   मजा  आए

चढ़ने  दे  दोस्त  इतना  नीचे न  दिखे कुछ भी
गहरी    हो   घाटी   उतरने   का   मजा   आए

मिल जाए गर किसी के  सपनों को पर हमीसे
फिर ख्वाब कुछ अपने कुतरने का मजा आए

नसीहतें   सभी   तेरी   हम   मान   लें   नासेह
बिगड़  लेने  दे  इतना  सुधरने  का मजा आए

.......डॉ एम डी सिंह

सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

याद आयी माँ बहुत जब खत मिला - जसवंत सिंह

याद आयी माँ बहुत जब खत मिला-2
रुक न पाया आँसुओ का सिलसिला
याद आयी माँ........

माँ के हर अल्फ़ाज से गम की उठी ऐसी लहर
सो सका न चैन से एक पल भी रात भर
वक़्त से करता रहा रो कर गिला
याद आयी........

कितने बचपन के सुहानी  दिन जहन पर छा गए
संग जिनके खेलता था याद वो सब आ गए
कैसे अब लौटेगा वो बचपन भला
याद आयी माँ .........

मैं शहर की भीड़ में आया तो आकर खो गया
मेरा चेहरा मुझसे ही कुछ अजनबी सा हो गया
फूल ख्वाबो का नही कोई खिला
याद आयी माँ ........

भेजती है बहन राखी, रो के लिखती है मुझे
तू तो मुझको भूल बैठा कैसे मैं भूलू तुझे
टूट जाता है मेरा तब हौसला
याद आयी माँ.........

दर बदर भटका हु कितना नौकरी के वास्ते
माँ को कैसे मैं लिखू गुजरे है क्या क्या वास्ते
चाह कर मैं नही पाता भुला
याद आयी माँ.........

आगे लिखती है माँ कैसे रखूं मैं हौसला
कोई पंछी तक न अपना भूलता है घोसला
आ सहा जाता नही अब फासला
याद आयी माँ......


रविवार, 5 फ़रवरी 2017

सुबह से शाम तक तेरा ख्याल रहता है - लव तिवारी

सुबह से शाम तक तेरा ख्याल रहता है
तुम जो मेरे नही हो इसका मलाल रहता है

बड़ी उम्मीद है तुमसे जो तुम हो जाओगे अपने
इसी वास्ते तुझपर हरदम ख़ुमार रहता है

कभी सोते कभी जागते सोचता हूं तुम्हें अक्सर
खुली और बन्द आँखों से तेरा दीदार होता है

बड़े दुश्मन है दुनिया में इस दिल्लगी के
यहाँ फ़रेबी बन कर चमत्कार होता है

हालात अपने जो बत्तर हुए तुम्हे चाहने से
तेरे करार से जिंदगी बहाल होता है

रचना- लव तिवारी
05-02-2017

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

गांव तेरे गोद में बचपन सुहाना बीत गया- लव तिवारी

गांव तेरे गोद में बचपन सुहाना बीत गया
चंद गलिया और अपनों में दिन पुराना बीत गया

पनघटों पर भरती गगरी और रात की लोरिया
ऐसी जिंदगी को देखते-2 एक जमाना बीत गया

मैं बड़ा क्यों हुआ और आया क्यों परदेश में
आज कुछ सोचूँ तो रोऊ मुस्कुराना बीत गया

खेत और खलिहान के वो पग डंडों से रास्ते
चिड़ियों की कतुहल के स्वर का आना बीत गया

गांव की गोरी की मुस्काती छवि और प्यार भी
कैसे उनको भूलू मैं उनका शर्माना बीत गया

चाँदनी रातो में छत पर मिलने को बेकरारी सी
थी नजाकत और शराफ़त फिर ख़ामोशी से आना बीत गया

प्रस्तुति- लव तिवारी
रचना- 02-02-17



बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

सरस्वती बंदना - सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला

वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे।


ज्ञान विद्या वाणी वीणा संगीतसुधा व आचरण की देवी मां भगवती सरस्वती के जन्मदिवस व वसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
सभी में सद् बुद्धि का संचार हो।

शनिवार, 28 जनवरी 2017

जो खो जाता है मिलकर जिंदगी में - चन्दन दास

जो खो जाता है मिलकर जिंदगी में-2
ग़ज़ल है नाम उसका शायरी में

निकल आते आंसू हँसते हँसते-3
ये किस गम की महक हर ख़ुशी में
ग़ज़ल है............

कही चेहरा कही आँखे कही लब- 3
हमेशा एक मिलता है करी में
ग़ज़ल है.......

सुलगती रेत में पानी कहा था
कोई बादल छुपा था तिशनगी में
ग़ज़ल है.............

जमी पर आशमा मिलता नही है
फरिश्ता ढूढ़िये मत आदमी में
ग़ज़ल है..........

जाने वाले तेरी तस्वीर ले जा मुझसे- चन्दन दास

मोहब्बत का रिश्ता न टूटे कभी भी
तेरा साथ छुटे तो किस तरह छुटे
बिछड़ना है हमसे तो हँस कर बिछड़ जा
कुछ ऐसे जुदा हो दिल भी न टूटे

जाने वाले तेरी तस्वीर ले जा मुझसे
लूट रहा हूँ तो ये ज़ागीर ले जा मुझसे

लौट कर फिर कभी आवाज न देना मुझको
प्यार करने का ये अंदाज न देना मुझको
हाथ में टुटा हुआ साज न देना मुझको
तेरी ख़त तेरी ये तहरीर भी ले जा मुझसे
जाने वाले......

अब मेरा और मेरी मंजिल का ठिकाना क्या है
मुझसे मत पूछ की जीने का बहाना क्या है
तू नही है तो जमाने को दिखाने क्या है
छीन कर अब मेरी तक़दीर भी ले जा मुझसे
जाने वाले.......

जाने कल क्या हो तेरी आस रहे या न रहे
दिल में ये दौलते अहसास रहे या न रहे
जिंदगी मेरी मेरे पास रहे या न रहे
ख्वाब भी टुटा है ताबीर भी ले जा मुझसे
जाने वाले........
लूट रहा ........


आ भी जाओ कि जिंदगी कम हैं - चन्दन दास

आ भी जाओ जिन्दगी कम है
तुम नहीं तो हर ख़ुशी कम है
आ भी जाओ.......

वादा करके ये कौन आया नहीं- 3
शहर में आज रोशनी कम है
तुम नहीं हो........

जाने क्या हो गया है मौसम को-3
धुप ज्यादा है चाँदनी कम है
तुम नहीं हो.............

आईना देख कर ख्याल आया- 3
आज कल उनकी दोस्ती काम हैं
तुम नहीं हो..........

तेरे दम से ही मुक्कमल हूं-3
बिन तेरे तेरी यामिनी कम है
तुम नहीं हो..........



शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

कटेगी ये अब जिंदगी रोते रोते- अनूप जलोटा

कटेगी ये अब जिंदगी रोते रोते
ये कह कर गयी ख़ुशी रोते रोते

गमे दस्ता अपनी अश्को लिखकर
सरे बज़्म हमने पढ़ी रोते रोते
कटेगी.....

ये सोचा था नहीं था कभी जिंदगी में-2
कि रूठेगी हमसे हँसी रोते रोते
कटेगी अब जिंदगी......

परेशान हुए चाँद तारे फलक पर
यु रुखसत हुई चाँदनी रोते रोते
कटेगी.......

ये मालूम होता है किश्मत हमारी-2
कि जैसे खुदा लिखी रोते रोते
कटेगी...............

उम्र भर तो करी नीद ने बेवफ़ाई-2
जो ओढ़ा कफ़न आ गयी रोते रोते
कटेगी ये अब जिंदगी......

ये कह कर गयी........


आप की बेरुखी को क्या कहिये - अनूप जलोटा

आप की बेरुखी को क्या कहिये-2
अपने दिल की लगी को क्या कहिये

काश करते न हम जफ़ा का गिला
उनकी शर्मिंदगी को क्या कहिये
अपने..............

हिज्र में मौत भी नहीं आती
बेहया जिंदगी को क्या कहिये
अपने ..............

लाख चाहा की भूल जाए उन्हें
अपने कम्बख्त जी को क्या कहिये
आप की बेरुखी........

तोड़ दी फिर से दर्द ने तौबा
आदते मय कशी को क्या कहिये
आप की बेरुखी......


फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया- लव तिवारी

छोटे बच्चों की तरह मुझको लुभाने आया
फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया

बड़ी फ़जीहत है अपनी इस दौर में नेताओं से
आज फिर से कोई मुझमे इंसानियत जगाने आया

रूखी सूखी खाता हुँ और चुपचाप सो जाता हूँ
स्वपन में खीर की हकीकत को मुझे बताने आया

इन्हें भी कसम दे इंसान के ईमान और वसूल की
वरना एक शख़्श ही सबके घर को जलाने आया

बड़ी खौफ है इस चुनावी दौर में कही रंजिश न हो
फिर कोई नेता हिन्दू मुसलमान के मसलो को उलझाने आया

छोटे बच्चों की तरह मुझको लुभाने आया
फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया


बुधवार, 18 जनवरी 2017

दिल में लगी आग तो दोस्त बेगाने लगाते है- लव तिवारी

पेड़ पर अनगिनत हरे पत्ते सुहाने लगते है
दिल में लगी हो आग तो दोस्त बेगाने लगते है

में चाहू उन्हें रूह से, और समझे गर जिस्म की बात
ऐसे हालात में मोहब्बत भी अफ़साने लगाते है

हर शख़्स यहाँ ओढ़ा हुआ है फरेब की चादर
एक वफ़ा मिल जाये तो नसीब जगमगाने लगते है

इस वक़्त में गरीबी बनी है मौत का कारण
कोई चंद पैसे लुटाए तो हम घबराने लगाते है

बड़ी तोहमत मिली मुझको किसी अपने के फ़रेब से
एक गुनाह हमसे गर हो जाये तो लोग इतराने लगते है



रचना- लव तिवारी
18-01-2017

सोमवार, 16 जनवरी 2017

फिर वो ख़्वाब में आये और रात सुहानी हों- लव तिवारी

फिर वो ख़्वाब में आये और रात सुहानी हों
मुझसे करे बात फिर कोई कहानी हो

बदल देता है वो रुख हवाओँ का फ़िज़ा में आकर
और कहते है ,मुझ जैसी कई आप की रुबाई हो

मै कैसे समझाऊ उन्हें की वही है मेरा सबकुछ
उन्हें छोड़कर कर कुछ सोचु तो खत्म जवानी हो

बदलते वक़्त की रफ़तार के फिराक में ही था
जो मेरी थी कभी, आज किसी और की दीवानी हो

रचना- लव तिवारी
15- 01- 2017

शनिवार, 14 जनवरी 2017

कोई तारीफ करे तो उसे मोहब्बत समझे- लव तिवारी

कोई तारीफ करे तो उसे मोहब्बत समझे
जिंदगी को केवल न जिंदगी समझे

बड़े उसूल है दुनिंया में रिश्तो  के
आप कौन है इसकी अहमियत समझे

आप को न चाहा तो क्या किया मैंने
उम्र के एक पल की जो हकीकत समझे

दुनिया में आया हू केवल आप के लिए
आप जो गौर से देखे तो मेरी चाहत समझे

प्रस्तुति- लव तिवारी
14-01-2016

गुरुवार, 12 जनवरी 2017

श्रमिक तेरे जीवन की दुःखद है कहानी लव तिवारी

श्रमिक चौक नोएडा (#Labour_Chauk )
आज अचानक सुबह नॉएडा में श्रमिक चौक से गुज़रे, ठण्ड और कपकपाती शरद की हवाओं में एक अजब सा दुःखद अहसास भी मजदूरों की अन्तर्व्यथा को दर्शाता है और साथ में बेरोजगारी की महामारी भी,  कई बार बिना काम मिले भी श्रमिक को घर लौटना पड़ता है, इसका महत्वपूर्ण कारण टेक्नोलॉजी एवं अत्याधुनिक संसाधनों से युक्त मशीने भी है, श्रमिक के हक़ का भी धन बड़े ठेकेदारो के हाथ में जा रहा है,  सरकार की इतनी योजनाओ के बावजूद भी भारत के श्रमिक को आज भी परेशानियो का सामना करना पड़ता है

   
कभी तपती धूप तो कभी शरद हवाओं की
श्रमिक तेरे जीवन में दोनों की अपनी मनमानी
 
हर वक़्त पैसे की क़िल्लत है और लाचारी
सत्ता और मालिक के अत्याचार की गजब कहानी
 
प्रस्तुति- #लव_तिवारी




मंगलवार, 10 जनवरी 2017

आप के दिल में क्या है बता दीजिए

आँख तो प्यार में दिल की जबान होती है
सच्ची चाहत तो सदा बेजुबान होती है
प्यार में दर्द भी मिले तो कैसा घबराना
सुना है दर्द से चाहत जवान होती है

आप के दिल में क्या है बता दीजिए
यु न खामोश रह कर सजा दीजिये

या तो वादा वफ़ा को पूरा करे
या उमीदो की सम्मा बुझा दीजिये
यु न खामोश.....
आप के.........

आप को चाह कर कुछ न चाहा कभी
मेरी चाहत का कुछ तो सिला दीजिये
यु न खामोश.....
आप के .........

फूल मुरझा गए आप की चाह  में
मुस्कुरा कर उन्हें फिर खिला दीजिये
यु न खामोश .........
आप के .......


शनिवार, 7 जनवरी 2017

हिन्दू परम्पराओं के अनुसरण विशेष वैज्ञानिक लाभ

*सूर्य नमस्कार*
हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क-
पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है।
*सिर पर चोटी*
हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।
*हाथ जोड़कर नमस्ते करना*
जब किसी से मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें। दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते। अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा।
*तुलसी के पेड़ की पूजा*
तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है। सुख शांति बनी रहती है।
वैज्ञानिक तर्क-
तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियां दूर होती हैं।
*जमीन पर बैठकर भोजन करना*
भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है।
वैज्ञानिक तर्क-
पलती मारकर बैठना एक प्रकार का योग आसन है। इस पोजीशन में बैठने से मस्त‍िष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही खुद-ब-खुद दिमाग से एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये।
*दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना*
दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है, तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे, भूत प्रेत का साया आ जायेगा, आदि। इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोयें।
वैज्ञानिक तर्क-
जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है। इससे अलजाइमर, परकिंसन, या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है।
*भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से*
जब भी कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है।
वैज्ञानिक तर्क-
तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है। अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है। इससे पेट में जलन नहीं होती है।
*माथे पर कुमकुम का तिलक*
महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है। कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है.
*पीपल की पूजा*
तमाम लोग सोचते हैं कि पीपल की पूजा करने से भूत-प्रेत दूर भागते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
इसकी पूजा इसलिये की जाती है, ताकि इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और उसे काटें नहीं। पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो रात में भी ऑक्सीजन प्रवाहित करता है.
*कान छिदवाने की परम्परा*
भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क-
दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।
*दीपक के ऊपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण*
दीपक के ऊपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण
आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।
*मंदिर में घंटा लगाने का कारण*
मंदिर में घंटा लगाने का कारण
जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है।
*एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं*
एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा की जेनेटिक बीमारी न हो इसका एक ही इलाज है और वो है "सेपरेशन ऑफ़ जींस".. मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नही करना चाहिए ..क्योकि नजदीकी रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नही हो पाता और जींस लिंकेज्ड बीमारियाँ जैसे हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस, और एल्बोनिज्म होने की १००% चांस होती है ..आखिर हिन्दूधर्म में हजारों सालों पहले जींस और डीएनए के बारे में कैसे लिखा गया है ? जो "विज्ञान पर आधारित" है !  हिंदुत्व में कुल सात गोत्र होते है और एक गोत्र के लोग आपस में शादी नही कर सकते ताकि जींस सेपरेट (विभाजित) रहे..
*चप्पल बाहर क्यों उतारते हैं ?*
चप्पल बाहर क्यों उतारते है ?
मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर हिंदू मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।
*परिक्रमा करने के पीछे वैज्ञानिक कारण*
परिक्रमा करने के पीछे वैज्ञानिक कारण
हर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 8 से 9 बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है।


बुधवार, 4 जनवरी 2017

सबको दुश्मन बना लिया मैंने आप से दिल लगा लिया मैंने- चंदन दास

दिलो दिमाग को रो लूँगा आह कर लूँगा
तुम्हारे इश्क़ में सब कुछ तबाह कर लूँगा
अगर मुझे न मिली तुम्हारे सर की कसम
मैं अपनी सारी जवानी तबाह कर लूँगा

सबको दुश्मन बना लिया मैंने
आप से दिल लगा लिया मैंने

हर तरफ रास्ते में कांटे थे
फिर दामन बचा लिया मैंने
आप से...

दिल में ख्वाइश तो कि बहकने की
कैसे दिल को मना लिया मैंने
आप से.....

नीद आती है आँखों में
रोग कैसा लगा लिया मैंने

                                                                     आप से........

                                                                    सबको दुश्मन बना....


बुधवार, 28 दिसंबर 2016

नज़र और तेरा इस अदा से मुझे देखना - लव तिवारी

किसे देखती हो तुम इस अदा से
मुझे देखो तो इनायत समझे
है खूबसूरत तेरी तिरछी नज़र
हम पर गिरे तो कयामत समझे

प्रस्तुति- लव तिवारी

दिल की बेकरारी सी है - लव तिवारी

शरद की रात का वो खुशनसीब मंजर जब तुम अचानक हमें याद आती हो , न कोई आस पास होता है बस आप का साथ होता है और रात की एकांक का वो बेहतरीन पल जो हम आप के साथ जीते है उसकी पल की कुछ अनोखी दस्ता 

तुम्हारे रुख को जो न देखू दिल की बेकरारी सी है
जिंदगी तुमसे है बस तुमसे वरना बेकारी सी है

न भुख है न प्यास है जब तुम होते हो आसपास
वरना इस दुनिया में पेट की महामारी सी है

कुछ लिखू तुम्हे सोच कर तो बन जाती है ग़ज़ल
तुम्हे लेकर दिल में एक अजब ख़ुमारी सी है

वजूद तुमसे है तुम हो तो जिंदगी है रोशन
वरना जिंदगी कैसे गुज़रे ये महामारी सी है

मुझे याद आते हो तुम तो कयामत हो जाती है
न होते हो जहन में तो लगता है बीमारी सी है

प्रस्तुति- लव तिवारी


मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

जिंदगी हसीन सी है ये तुम्हारा असर सा है - लव तिवारी

जुल्फ की लट का आगे होंना एक क़हर सा है
जिंदगी हसीन सी है ये तुम्हारा असर सा है

वजूद तुमसे है, नहीं तो मैं कौन हूँ
आज तुम मेरी हो तो जमाने में खबर सा है

जबसे तुम मिलो, तो रोशन चराग है
वरना जिंदगी का उजाला बस तुम सा है

आज बड़े दिनों के बाद आई हो जहन में
कि इश्क़ का कतरा भी अब दरिया सा है


स्वरचित लव तिवारी


गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

तेरे रुख के तबियत से अब ये यकीन हो गया है- लव तिवारी

तेरे रुख के तबियत से अब ये यकीन हो गया है
जो मैं तुम्हें अपना समझू ये भर्म सा रह गया है 

कुछ दिनों से बदले है जो तेवर तुम्हारे बेरुखी पन के
सच कहूं तो इसका असर दिल पर इस कदर सा हुआ है

मैं रोज तड़पु  और तुम जश्न मनाओ ख़ुशी ख़ुशी
अब ये इस हाल पर दिल कुछ इस कदर बिखर सा गया है। 

बड़े सलीके से सोचा फिर चाहा था तुम्हें
अब दर्द तो ज़माने को भी नजर सा हुआ है

आज के इंसान को फ़िक्र है केवल अपने से
दूसरा के साथ क्या हुआ और क्यों हो रहा है

बड़ी उम्मीद थी तुमसे की रोशन कोना कोना है
जिंदगी आज भी अंधेरी रह गयी उम्मीद मर सा गया है

रचना -लव तिवारी
दिनांक-  17 दिसंबर 2016




मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

तुम्हारे यादो का एक खुशनुमा सा एहसास- लव तिवारी

रात्रि का समय ,तुम्हारे यादो का एक खुशनुमा सा एहसास फिर से मेरे ख्यालों मे आ जाता है, कभी कभी तुम जो पूछ लेते हो कि कब याद आती हु मैं, अब क्या बताए कुछ कहे तो हिंदी भाषा का एक प्रचलित शब्द अतिश्योक्ति की उपमा का चित्रण मेरे शब्दों में दिखेगा, लेकिन वो वास्तविक मे अतिश्योक्ति नहीं हकीकत है , अब हकीकत क्या है सुन लीजिये, मुझे कब और क्यों याद आती है इसका जिक्र मैं आप से करता हूँ ,हमेशा तब जब में एकेले होता हूं , अगर पहर की बात करु तो रात के समय जब पूरा जहा नींद के आगोश में करवटे बदल बदल कर चैन की नीद सोता है , तो मैं जगता हु और तुम्हे सोचता हूँ, अब ये मत पूछना क्यों , क्यों की क्यों मेरे पास जबाब नही है 

रचना -लव तिवारी
दिनांक-  17 दिसंबर 2016




रविवार, 18 दिसंबर 2016

मेरे आँगन में आज रौशनी आयी है - लव तिवारी

एक अरसे बाद छत पे चाँदनी आयी है
मेरे आँगन में आज रोशनी आयी है
मैं डूबा तो लहरों को भी खबर न थी

आज सबके जुबाँ पे मेरी कहानी आयी हैं

प्रस्तुति- लव तिवारी रानू मिश्रा
09711941017

गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

एक रात एटीएम पर - लव तिवारी

एक प्रश्न की वास्तविकता क्या है
क्या राहुल गांधी और मोदी जी की मां दोबारा बैंक आएंगे ? या अभी 4 हजार खत्म नहीं हुए ।
राजनीति कूटनीति
दूसरी तरफ हम तो न मोदी है न राहुल हमें जब भी जरुरत पड़ती है हम पैसे के लिए लाइन में लगते है और पैसे निकलते भी है , आज थोड़ी देर पहले ही एक रोचक घटना को अंजाम मिला ,लंबी लाइन लाइन में कुछ लोग ये कहने लगे की जाइये भाई आप पहले निकल ले हम बात समझ नहीं पाये लेकिन बाद में इस बात की पुष्टि हुई की सभी लोग 12 बजने का इंतेजार कर रहे थे लेकिन सबसे रोचक घटना तो तब घटित हुयी जब एटीएम में लम्बी लाइन लगाकर पैसे निकालते हुए एक भाई साहब ने लगभग 11.30 मिनट पर यह पूछ दिया की भैया यहाँ ठेका कहा है और अभी खुला होगा की नहीं , हमने भी तुरंत जबाब दिया भाई अशोक नगर जाओ वहाँ मिल जाएगा अनुभवहीन व्यक्ति समझ कर उसने मुझे कहा 10 बजे के बाद अशोक नगर का ठेका बन्द हो जाता है आप यूपी के ठेके की जानकारी दीजिये

कुछ तो बात है साहब अपनी #यूपी में जो पूरी होती नजर आ रही है अब यह सब बात करके दोस्त का खुद ही 2 3 मिनट समय नष्ट हो गया था, बाइक स्टार्ट किये निकल लिए , हम आशा करते है कि दोस्त को उनकी मदिरा जरूर मिल गयी होगी, #भारत सरकार और मोदी जी से अनुरोध है ठेके के समय में भी परिवर्तन करे ताकि मदिरापान वाले व्यक्ति को उस तरह के दिक्कत का सामना न करना पड़े, देश में जहाँ लोग अपनी दैनिक जीवन को निर्वहन करने के लिए पैसे की किल्लत से जूझ रहे है वही कुछ लोगो को मदिरापान, अय्याशी एवम फ़िजूल के  कार्य एवं कई अन्य कारकों ने पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, धन तो धनी आदमी का ही है वो उसे जैसे प्रयोग करे, जहा 500 रूपये के पुराने नोट के चलन का अंतिम दिवस है वही एटीएम वाली तस्वीर गूगल से ली गयी है रात्रि में तस्वीर लेने का कोई अवचित्य नहीं है

वही मदिरापान वाले दोस्त को जलोटा साहब की ग़ज़ल की चंद लाइन
आँखों से पी रुत मस्तानी हो गयी
जाम से पीना रश्म पुरानी हो गयी

धन्यबाद- #लव_तिवारी


मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

कालेधन के विरोध में देश की एकजुटता - लव तिवारी

सन 1975 की बात है -
श्री संजय गांधी ने #जनसंख्या नियंत्रण के लिए #नसबंदी पर जोर दिया था। पूरी सरकारी मशीनरी जुटी थी। अफवाहों का दौर चला कि स्कूल में बच्चों की नसबंदी की जा रही है,अफसर केस देने के लिए कुंआरों की भी नसबंदी करा रहे हैं ।नतीजा क्या रहा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 0/85 हो गई ।श्रीमती इंदिरा जी ,संजय सब हार गए। और अब हालत ये है की 41 साल से किसी ने जनसँख्या नियंत्रण की बात ही नहीं की। इतने सालों में हम दुगने हो गए। आज किसी #पार्टी की हैसियत नहीं की वो जनसंख्या नियंत्रण की बात कर सके।
लाल तिकोन का निशान आज किसी को याद नहीं जो परिवार नियोजन का निशान था और ज्यादातर सरकारी दीवारों पर पेंटेड हुआ करता था। हम दो हमारे दो का नारा बिलुप्त हो गया।जरा सोचिये ये मुहिम अगर सफल हो गई होती और हमारी जनसंख्या दर नियंत्रित होती,

तो हमारी प्रगति कितनी रफ़्तार से होती, हम आज कितने विकसित देश होते। चीन अमरीका हमें सलाम कर रहे होते। इतनी बेरोजगारी ना होती और गरीबी नहीं होती।
हर सामान इफ़रात में होता और सस्ता होता। ज्यादा क्या बोलूं खुद सोच कर देखिये।। संसाधन इतने ही होते पर उपयोग करने वाले आधे।

     आज भी कुछ ऐसा ही माहौल है। नोटबन्दी के नाम पर एक अच्छी पहल को एक तंत्र बर्बाद करने पर लगा है। यह मोदी सरकार का दुःसाहस ही सही ,पूरी तैयारी ना सही। कुछ गलतियां भी सही पर अगर नोट बंदी और काले धन के खिलाफ ये मुहिम फेल हुई तो अगले सैकड़ो साल तक कोई भी राष्ट्राध्यक्ष दुबारा इस कदम को उठाने का साहस नहीं करेगा।और हमारी भावी पीढ़ियां न जाने कब तक शायद हमेशा के लिए भ्रष्ट्राचार की व्यवस्था में जीने के लिए अभिशप्त हो जाएंगी।

     हम इतिहास के एक निर्ण़ायक मोड़ पर खड़े है, कुछ वैसा ही मोड़ जहाँ पृथ्वीराज चौहान की हार हुई थी और कुतुबुदीन ऐबक ने हिंदुस्तान को गुलाम बना लिया था।
हमारी गुलामी का प्रतीक कुतुबमीनार तामीर हुआ था। ये वैसा ही मोड़ है जहाँ जहांगीर ने अंग्रेजो को तिज़ारत की इजाज़त दी थी। ये इतिहास के उस मोड़ जैसा है जब #पाकिस्तान का जन्म हुआ था जिसका दंश हम 70 साल से भोग रहे है।* नोटबंदी का असफल होना मोदी की नहीं इस देश की असफलता होगी।
अतः हम ये भूल जाएं की हम #हिन्दू हैं, #मुसलमान हैं, #सिख या #ईसाई है..कांग्रेसी हैं ,समाजवादी हैं, #हरिजन हैं, बहुजन हैं, और सिर्फ ये सोचें की हम इस मुहिम को अपने देश व बच्चों के भविष्य लिए सफल करेंगे।
एक बार थोड़ी तकलीफ सह जाइये।देश के लिए ना सही अपने ही भावी परिवार के सुखद और संमृद्ध जीवन के लिए ।संजय गांधी की तरह मोदी को भी मत फेल होने दीजिए ।

ये मुहिम सफल या असफल होने से हम एक सफल या असफल राष्ट्र बनेंगे दोस्त यदि आप मेरे पोस्ट से असहमत हो तो इसे अनदेखा कर दे अन्यथा इसे अपने दूसरे दोस्तो को पोस्ट करे.. धन्यवाद
#नोटबंदी #कालाधन #सरकार #मोदी #केजरीवाल #ममता_बनर्जी #कांग्रेस #सपा #बसपा


सोमवार, 28 नवंबर 2016

मुझे तुम क्यों याद आते हों - लव तिवारी

मुझे तुम क्यों याद आते हों 
अंधेरी रातो में कभी दिन के उजालो में 
मुझे तुम क्यों....... 

कभी कुछ सोचु तो तुम्हारा ख़्याल आये बस 
न सोचूँ तो दिल परेशान होये बहुत 
अब इस मसले का उपाय भी बताओ तुम 
मुझे तुम क्यों याद आते हो ये सवाल बताओ तुम 
मुझे तुम क्यों........ 

कभी कुछ लिखूं कविता और कहानी भी 
उसमे भी मौजूद है केवल तेरी रवानी ही 
मैं अक्सर ढूढ़ता हूं कुछ नये अल्फाजो को 
फिर अक्सर बन जाती है ग़ज़लें सुहानी भी 
मुझे तुम क्यों याद आते........ 

 मैं अक्सर सोचता हूं कि तुम बिन मेरा क्या होगा 
न होगी तुम तो फिर सुना मेरा जहाँ होगा 
यही सोच कभी घबरा कर परेशान होता हूँ 
तुम्हारी यादों के बगैर मैं समशान होता हूँ मुझे 
तुम क्यों याद आते हो......... 

प्रस्तुति- लव तिवारी





शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

राजनितिक मे बेहतर बिकल्प नरेंद्र मोदी

"मोदी जी" हम आप से बहुत "शर्मिंदा" हैं क्योंकि आप की "भतीजी" यानि आपके छोटे भाई "प्रह्लाद मोदी" जी की बेटी का "41 वर्ष" की उम्र में "दिल की बीमारी" से निधन हो गया वो अपनी "जीविका" चलाने के लिए "कपडे सिलने" का काम करती थी

"मोदी जी" आप को "शर्म" आनी चाहिए कि आपने "अपने परिवार" और अपने भाइयों को अपनी "कैबिनेट" में या "राजनीति" में लाने का ज़रा भी "प्रयास नहीं किया" आप को इस बात के लिए भी "शर्म" आनी चाहिए कि आप के "भाई" साधारण नागरिक का जीवन जी रहे हैं और आप की "भतीजी गरीबी" में "मर गई"
"मोदी जी" आप को "शासन चलाने" की कला "मुलायम सिंह" से "सीखनी" चाहिए जहा "सैफई" के उसके परिवार के करीब "36 सदस्य" आज "उत्तर प्रदेश" में "ब्लाक प्रमुख" के पदों पर सुशोभित हैं वही "मुलायम सिंह" जिन्हें "दो वक़्त की रोटी" भी मुश्किल से नसीब होती थी आज "करोडपति" ही नहीं "अरबपति" हैं
"30 वर्ष" पहले "बहन मायावती" (BMW) का "पूरा परिवार" दिल्ली में "एक कमरे" में रहा करता था आज "मायावती के भाई" का "बंगला" सुन्दरता में "ताज महल" को भी "मात" दे रहा है

"देवगोडा" अपने "पोते" को "100 करोड़" की "बहु भाषाई फिल्म" में बतौर "सुपर हीरो" उतार रहे हैं "कर्नाटक" के "हासन जिले" में "आधी से ज्यादा" खेती की ज़मीन "देवगोडा परिवार" की है

"कर्नाटक" के मुख्यमंत्री "सिद्धारमैया" का "बेटा" जो "सरकारी अस्पताल" में "मुख्य चिकित्सक" है और "छोटा पुत्र" जिसका अभी हाल में "निधन" हुआ है, उसका "ब्रुसेल्स" में बड़ा कारोबार है और उसके बच्चे "जर्मनी" में "पढ़" रहे हैं
"सोनिया का दामाद" जो कि "मुरादाबाद" में "पुराने पीतल" के आइटम "बेचा" करता था, आज "पांच सितारा होटल" का "मालिक" है, उसका "शिमला" में एक "महल" है और "लक्ज़री कारों" का "मालिक" है जबकि "आप की माँ" आज भी "ऑटोरिक्शा" में चलती है और आप के "भाई ब्लू कालर जॉब" यानि मेंहनत "मजदूरी" कर रहे हैं और आप की एक "भतीजी" शिक्षामित्र है (आप उसे टीचर की नौकरी भी नहीं दिलवा पाए ) जो कि दूसरो के "कपडे सिलती" है तथा "ट्यूशन पढ़ा" कर अपनी "जीविका" चला रही है

"मोदी जी" देश बहुत "शर्मिंदा" है कि आप "प्रधानमंत्री" होते हुए भी अपने "भाइयों" को "MLA या MP" का "टिकट नहीं दिलवा पाए" आप "चाहते" तो अपनी "बहनों" को "राज्य सभा" में "MP" बनवा सकते थे और आप के "जीजा", "जिला स्तर" के "चुनाव लड़" कर "ब्लाक प्रमुख" तो बन ही सकते थे आप "सीखने" में बहुत "सुस्त" हैं "15 वर्ष" तक "गुजरात" में और "प्रधानमंत्री" का "आधा कार्यकाल", "दिल्ली" में बिताने के बाद भी आप "लालू, मुलायम, सोनिया गाँधी, बहन मायावती" से कुछ भी "नहीं सीखे" और अपनी "रसोई का खर्च" भी "खुद वहन" कर रहे हैं

उपरोक्त बातो से हमे "शर्मिंदा" तो होना पड़ा लेकिन उतना ही "गर्व" भी है कि हमने अपने जीवन का "पहला वोट" , "2014" में एक बहुत ही "ईमानदार और देशभक्त इंसान" को वोट दिया "हम सभी गर्व" करते है की हमे अपने जीवन में आप जैसे देशभक्त का मार्गदर्शन मिला सच में "ईमानदारी और कर्तब्यनिष्ठा" की "पराकाष्ठा" है




Source- whatsapp

एक खूबसूरत चेहरा जो बसा दिल में- लव तिवारी

चेहरे पर जो जुल्फ का लट है उसे न बिखरने देना
एक खूबसूरत चेहरा जो बसा दिल में उसे तुम सवरने देना

है हक़ीक़त कि तुमसे खूबसूरत नही कोई जहाँ में
गर है भर्म मेरा तो इस भर्म को भी पनफने देना

है उम्मीद तुमसे वफ़ा की अगर मुमकिन हो तो
वरना इस दिल की हसरत को कभी टूटने मत देना

अगर हो चराग तुम और तुझसे रोशन मेरी दुनिया है
बनके चराग़ ता उम्र जिंदगी को उजाले देना

प्रस्तुति- लव तिवारी




रविवार, 20 नवंबर 2016

विकास बस एक दिखावा समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश

#समाजवादी_पार्टी #अखिलेश_यादव #उत्तर_प्रदेश
#विकास_रैली #लखनऊ #उत्तर_प्रदेश_सरकार
समाजवादी पार्टी के उदघोष से ट्रेन आगे बढ़ी सुहेल देव एक्सप्रेस , कल सुबह अखिलेश यादव की बड़ी रैली जो लखनऊ में आयोजित होनी है पूरी ट्रेन यादव समुदाय से खचाखच भरी पड़ी हमने एक बगल के भैया से विचार बिमर्श के माध्यम से पूछ लिया कौन सी ऐसी बात है जो सरकार की आप को प्रभावित करती है अखिलेश भैया आप को क्यों अच्छे लगते है बोले विकास और शिक्षा का स्तर बहुत उच्चकोटि का एवं व्यवस्थित किया है समाजवादी पार्टी एवं अखिलेश सरकार ने , हमने कहा की 80 से 90 % अंक नक़ल के माध्यम से पाना शिक्षा के अस्तर में कौन सा सुधार है और विकास का कौन सा नया प्रारूप आप ने देखा है आप हमें अवगत कराये
मऊ से ग़ाज़ीपुर ( 40 km )आने में 2 से 3 घंटे का समय लगना, वही नॉएडा से आगरा 2 घंटे में 168 km
इसी तरह की स्थिति ताड़ीघाट बारा रोड को भी जो दो राज्य विहार एवं उत्तर प्रदेश को जोड़ती है
शिक्षा को और उत्कृष्ट एवं उपयोगी बनाने के लिए अखिलेश सरकार द्वारा लैपटॉप का वितरण , सही बात लैपटॉप की जरुरत MTech और BTech के बच्चों से ज़्यादा हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट के बच्चों को है क्यों कि फ़िल्म देखना गेम खेलना यही वास्तविक उपयोग है लैपटॉप का, ऐसे कई मुद्दे है जिस पर और भी गहराई से विचार किया जा सकता है
#रोजगार
#अपराध
#विकास- सड़को की स्थिती पहले से काफी निराश जनक एवं अव्यवस्थित है
#शिक्षा
देश से जातिवाद को नहीं कम किया जा सकता , अखिलेश यादव के बुद्धि और प्रतिभा को नकारा नहीं जा सकता देश का विकास किसी एक व्यक्ति  का कार्य नहीं है समाजवादी पार्टी में सूंदर छवि एवं व्यक्तितित्व का परिचय उनके इस निर्णय से कौमी एकता दल के विलय के विरोधाभास से प्रकट होती है और विकास के मुद्दे को भी उन्होंने बख़ूबी अंजाम दिया है , लेकिन फिर वही बात आ जाती है कि केवल अखिलेश ही नहीं है जो समाजवादी पार्टी के स्तम्भ है इस पार्टी की नीव कई स्तंभों पर टिकी है,



हजाम और हज़ामत- लव तिवारी

#हजाम और #हज़ामत शब्दों के अर्थ, हजाम का मतलब नाई और हज़ामत का अर्थ है बाल की कटिंग से है, हमारे यहाँ हज़ामत की शुरुवात भी #दैविक एवं #धर्मो के परम्परा अनुसार होती है, यह तस्वीर नब्वे के दशक की है जब हमारे मुंडन #संस्कार का प्रयोजन #हिन्दू #रीति#रिवाज़ के अनुसार हमारे पैतृक गांव #युवराजपुर #ग़ाज़ीपुर में वर्षो पहले प्रयोजित किया गया था, शुरुवात पहले गंगा मैया के दर्शन के बाद गांव के देवी देवता के #पूजन के बाद हमारे यहाँ के प्रसिद्ध देवी स्थल #कमाख्या धाम के तरफ बाल के मुंडन प्रकिया के आखिरी चरण को अंजाम दिया जाता है, सर के बाल रूपी मुख का रूपांतरण टकले गंजे स्कल के रूप में हो जाती है


मेरे हरकतों का पता भी इस तस्वीर से भली भाति पता चलता है कि सामने बैठे #मुक्तेश्वरबाबा नाई को #चिड़ाने से लेकर और भी कई शरारती कार्यो को भी मैंने उस दौर में बख़ूबी अंजाम दिया था

मन की पीड़ा जो समझे वही सच्चा मीत है- लव तिवारी

#मन की पीड़ा जो समझे वही #सच्चा #मीत है
#दिल को जो अच्छा लगे वही #अच्छा #प्रीत है
#दुनिया की भूल #भुलैया में धोखा हैे और #जालीपन
एक तरफ #बाशिंदे है और दूसरी तरफ है #सूनापन
कोई #मुझसे ये पूछे #तुमको क्या और #क्यों चाहिए
या ख़ुदा #महबूब से मिला दे और उसके साथ का खालीपन
स्वरचित- #लव_तिवारी

कोई तुमसा नहीं अब ये यकीन हो गया मुझे- लव तिवारी

कोई #तुमसा नहीं अब ये #यकीन हो गया मुझे
जब से तुम मिले #मौसम #हसींन हो गया तबसे
कभी रातों में #तसब्बुर बन के #सुकून देते हो
कभी #हँस कर #ज़माने की #रंजिश को तोड़ देते हो
#मुझे तुम भी #याद आते हो ख्यालो में #जबबो में
कभी #अंधेरी #रातो में कभी #दिन के #उजालो में
स्वरचित- #लव_तिवारी