सोमवार, 20 अप्रैल 2015
शनिवार, 18 अप्रैल 2015
Sanam ki Akho Main- सनम की आंखों में
1:41 am
No comments
सनम की आंखों में हम अपना दीदार कर बैठे,
उनके रूबरू हम नजरों से यूं तकरार कर बैठे..
मत कहिए जमाने से कि लगा है दिल का रोग,
वो कहेंगे न था कोई काम तो ये रोजगार कर बैठे..
दर्द की आदत से अब यूं मजबूर हो चुके हैं हम,
अश्कों के खातिर तेरी यादों का जुगाड़ कर बैठे..
हुस्न से इश्क का सदियों से ये रिश्ता है कैसा,
खाक होने के लिए हम एक-दूजे से प्यार कर बैठे..
उनके रूबरू हम नजरों से यूं तकरार कर बैठे..
मत कहिए जमाने से कि लगा है दिल का रोग,
वो कहेंगे न था कोई काम तो ये रोजगार कर बैठे..
दर्द की आदत से अब यूं मजबूर हो चुके हैं हम,
अश्कों के खातिर तेरी यादों का जुगाड़ कर बैठे..
हुस्न से इश्क का सदियों से ये रिश्ता है कैसा,
खाक होने के लिए हम एक-दूजे से प्यार कर बैठे..
सोमवार, 13 अप्रैल 2015
Hum Tumhe Dekhate Hai- हम तुझे देखते हैं
6:15 am
No comments
नजरे-मुहब्बत का बस इतना है फसाना
हम तुझे देखते हैं, हमें देखे है जमाना...
दलदल भरे रिश्तों से बचके निकल चले,
कसम खाए हैं, अब खुद को नहीं रुलाना...
चांद की तन्हाई में अब यूं खो चुकी हूं मैं,
ऐ सितारों अपनी भीड़ में हमको न बुलाना...
दर्द की लहरों से जब भीगती है ये आंखे,
बहुत मुश्किल होता है समंदर को छुपाना...
हम तुझे देखते हैं, हमें देखे है जमाना...
दलदल भरे रिश्तों से बचके निकल चले,
कसम खाए हैं, अब खुद को नहीं रुलाना...
चांद की तन्हाई में अब यूं खो चुकी हूं मैं,
ऐ सितारों अपनी भीड़ में हमको न बुलाना...
दर्द की लहरों से जब भीगती है ये आंखे,
बहुत मुश्किल होता है समंदर को छुपाना...
रविवार, 5 अप्रैल 2015
Bachapan Dekha Jata Maine -बचपन देखा जाता मैंने जाती जवानी देखी
12:31 am
No comments
बचपन देखा जाता मैंने जाती जवानी देखी I
बुढ़ापा आये, जाए न जीवन की कहनी देखी I
अंतकाल हो मस्तिष्क, काम नहीं फिर करता,
विनाश काले विपरीत बुद्धि बाते स्यानी देखी II
बंधन जो दिल के दिल से थे उनको टूटते देखा I
बच्चों को ही मात-पिता को मैंने लूटते देखा I
साधारण व्यक्ति की औकात दो कौड़ी की यारों,
मंत्री की बेटी के बदले मैंने आतंक छूटते देखा II
बुढ़ापा आये, जाए न जीवन की कहनी देखी I
अंतकाल हो मस्तिष्क, काम नहीं फिर करता,
विनाश काले विपरीत बुद्धि बाते स्यानी देखी II
बंधन जो दिल के दिल से थे उनको टूटते देखा I
बच्चों को ही मात-पिता को मैंने लूटते देखा I
साधारण व्यक्ति की औकात दो कौड़ी की यारों,
मंत्री की बेटी के बदले मैंने आतंक छूटते देखा II
मुंह में भर भर कर लड्डू मैंने रेवड़ी बांटते देखा I
क्या नेता-क्या अभिनेता मैंने सबको काटते देखा I
क़ानून की बातें बड़ी बड़ी जो करते थे बढ़चढ़ कर,
राजनीति में उनको भी मैंने तलवे चाटते देखा II
बीच भंवर में डूबती नैया मैंने मझदार को देखा I
अपनों ने हे अपनों को किया ऐसे लाचार को देखा I
पेट की आग किसे कहतें है क्या बतलाऊँ तुमको,
रोटी के बदले खून किया मैंने गुनहगार को देखा II
मन के खेत में दुश्मनी के बीज रोंपते देखा I
दोस्तों को यारी की पीठ में खंजर घोंपते देखा I
क्या होती है जिंदगी दो लफ़्ज़ों में हूँ बताता,
पेट भरे किसी तरह मैंने इज़ज़त सौंपते देखा II
Has Ke Har Gum Chhupa Liya Maine - हँस के हर ग़म छुपा लिया मैंने,
12:22 am
No comments
हँस के हर ग़म छुपा लिया मैंने,
लब पे नग़में सजा लिया मैंने...
भीड़ की आदत नहीं मुझे,
थोड़े में जीना सीख लिया है मैंने,,,,,
चन्द दोस्त हैं, चन्द दुआएं हैं,
बस इन खुशियों को गले लगा लिया मैंने..
लब पे नग़में सजा लिया मैंने...
भीड़ की आदत नहीं मुझे,
थोड़े में जीना सीख लिया है मैंने,,,,,
चन्द दोस्त हैं, चन्द दुआएं हैं,
बस इन खुशियों को गले लगा लिया मैंने..
Kisi Pe Jaan Lutai Ja Rahi Hai- किसी पे जाँ लुटाई जा रही है
12:20 am
No comments
किसी पे जाँ लुटाई जा रही है
या किस्मत आजमाई जा रही है..
बहेकते जा रहे हैं होश दिल के
निगाहों से पिलाई जा रही है...
हुई कुर्बत तो ऐसा लग रहा है
मेरी जाँ मुस्कुराई जा रही है ...
खिला के गुंचा-ए-दिल को मेरे
हकीकत अब दिखाई जा रही है ...
तुम्हारी राह में जानाँ हमेशा
नज़र मेरी बिछाई जा रही है ...
लूट कर चैन_ओ_सकूं मेरा
मुझसे नज़रे चुरायी जा रही है...
बिना उसके दोस्तों जीना है मुश्किल
मुझसे ही मेरी दुनया मिटाई जा रही है..
या किस्मत आजमाई जा रही है..
बहेकते जा रहे हैं होश दिल के
निगाहों से पिलाई जा रही है...
हुई कुर्बत तो ऐसा लग रहा है
मेरी जाँ मुस्कुराई जा रही है ...
खिला के गुंचा-ए-दिल को मेरे
हकीकत अब दिखाई जा रही है ...
तुम्हारी राह में जानाँ हमेशा
नज़र मेरी बिछाई जा रही है ...
लूट कर चैन_ओ_सकूं मेरा
मुझसे नज़रे चुरायी जा रही है...
बिना उसके दोस्तों जीना है मुश्किल
मुझसे ही मेरी दुनया मिटाई जा रही है..
शनिवार, 28 मार्च 2015
चंद सपने, चंद साथी हैं अभी तक गाँव में |
8:33 am
No comments
चंद सपने, चंद साथी हैं अभी तक गाँव में |
कुछ पुराने पेड़ बाकी हैं अभी तक गाँव में |
कुछ पुराने पेड़ बाकी हैं अभी तक गाँव में |
वो चुराना आम खाकर कुछ रसीली गालियाँ,
भोर सी यादें सुहानी हैं अभी तक गाँव में |
भोर सी यादें सुहानी हैं अभी तक गाँव में |
मुह बनाकर बंदरों सा बंदरों को छेड़ना,
जागती रातें निराली हैं अभी तक गाँव में |
जागती रातें निराली हैं अभी तक गाँव में |
मेड पर वो बैठना वो हाथ लेना हाथ में,
वो फिजायें मुस्कुराती हैं अभी तक गाँव में |
वो फिजायें मुस्कुराती हैं अभी तक गाँव में |
मैं कहाँ तुम भी कहाँ हैं गुम शहर की भीड़ में,
पनघटें हमको बुलाती हैं अभी तक गाँव में |
पनघटें हमको बुलाती हैं अभी तक गाँव में |
होती है सुनहली सुबह-ओ-शाम अभी तक गाँव में।
मर्यादा की महीन लकीर बची है अभी तक गांव में।
मर्यादा की महीन लकीर बची है अभी तक गांव में।
गुरुवार, 12 मार्च 2015
Maine Har Roj Jamane ko Rang- मैंने हर रोज जमाने को रंग
4:45 am
No comments
मैंने .. हर रोज .. जमाने को .. रंग बदलते देखा है ....
उम्र के साथ .. जिंदगी को .. ढंग बदलते देखा है .. !!
वो .. जो चलते थे .. तो शेर के चलने का .. होता था गुमान..
उनको भी .. पाँव उठाने के लिए .. सहारे को तरसते देखा है !!
जिनकी .. नजरों की .. चमक देख .. सहम जाते थे लोग ..
उन्ही .. नजरों को .. बरसात .. की तरह ~~ रोते देखा है .. !!
जिनके .. हाथों के .. जरा से .. इशारे से .. टूट जाते थे ..पत्थर ..
उन्ही .. हाथों को .. पत्तों की तरह .. थर थर काँपते देखा है .. !!
जिनकी आवाज़ से कभी .. बिजली के कड़कने का .. होता था भरम ..
उनके .. होठों पर भी .. जबरन .. चुप्पी का ताला .. लगा देखा है .. !!
ये जवानी .. ये ताकत .. ये दौलत ~~ सब कुदरत की .. इनायत है ..
इनके .. रहते हुए भी .. इंसान को ~~ बेजान हुआ देखा है ... !!
अपने .. आज पर .. इतना ना .. इतराना ~~ मेरे .. यारों ..
वक्त की धारा में .. अच्छे अच्छों को ~~ मजबूर हुआ देखा है .. !!!
कर सको......तो किसी को खुश करो......दुःख देते ........तो हजारों को देखा है.
Kisi Din Jara Muskura Kar To Dekho- किसी दिन जरा मुस्कुरा कर
4:22 am
No comments
हमेशा हुए देख कर मुझको बेरहम..
किसी दिन जरा मुस्कुरा कर तो देखो...!
सताते हो दिन रात जिस तरह मुझको..
किसी गैर को सता कर तो देखो.....!
निगाहों से खेंची है तस्वीर मैंने..
जरा अपनी तस्वीर आ कर तो देखो....!
तुम्ही को इन आँखों में तुमको दिखाऊ..
इन आँखों से आँखें मिला कर तो देखो....!
किसी दिन जरा मुस्कुरा कर तो देखो...!
सताते हो दिन रात जिस तरह मुझको..
किसी गैर को सता कर तो देखो.....!
निगाहों से खेंची है तस्वीर मैंने..
जरा अपनी तस्वीर आ कर तो देखो....!
तुम्ही को इन आँखों में तुमको दिखाऊ..
इन आँखों से आँखें मिला कर तो देखो....!
बुधवार, 11 मार्च 2015
Sur Badale Tevar Badale Sab -सुर बदले,तेवर बदले,सब
4:51 am
No comments
सुर बदले,तेवर बदले,सब शंखनाद क्यों बंद हुए,
छप्पन इंची सीने वाले भाषण भी क्यों मंद हुए,
केसर की क्यारी में तुमने कमल खिलाया अच्छा है,
और नमाज़ी कस्बों में भगवा लहराया अच्छा है,
लोकतंत्र की दिए दुहाई,सत्ता सुख में झूल गए,
आखिर श्याम प्रसाद मुखर्जी की कुर्बानी भूल गए,
भारत माँ फिर से घायल है,अपने ही अरमानो से,
सिंहों का अनुबंध हुआ है,गीदड़ की संतानों से,
आँखे टेढ़ी किये हुए है,संविधान के खाते पर,
देखों मुफ़्ती थूक रहा है लाल किले के माथे पर,
अफज़ल के अवशेष मांगने वाले जिद पे अड़े हुए,
कुछ तो बिरियानी की प्लेटें ले बॉर्डर पर खड़े हुए,
दिल्ली वालों की ज़ुबान भी लाचारी में अटकी है,
वीर सैनिकों की कुर्बानी लालचौक पर लटकी है,
माँ के सर का पल्लू,वहशी हाथों ने फिर थामा है,
लगता है अखंड भारत का भाषण केवल ड्रामा है,
पूछ रहा हूँ मोदी जी से,पूछूं भाग्य विधाता से,
क्या सत्ता की चाह बड़ी है प्यारी भारत माता से,
अगर तिरंगा गद्दारों के चरणों में गिर जाएगा,
सवा अरब की उम्मीदों पर पानी ही फिर जायेगा,
भरत वंशियों उठो,शत्रु के लोहू का जलपान करो,
भारत माँ पर एक नहीं,सौ सरकारे कुर्बान करो,
वर्ना दर्द यही निकलेगा,गंगा की फरियादों से,
राम के बेटे हार गए हैं जिन्ना की औलादों से,
बुधवार, 4 मार्च 2015
Dard Leta Hai Mere Dil Main-दर्द लेता है मेरे दिल में
1:19 am
No comments
दर्द लेता है मेरे दिल में जब अंगराई
जाग उठती है रातों में मेरी तन्हाई..
शायद इतना ही बहुत है कि तुझे देखा
तेरी तस्वीर मेरे रूह में उतर आई..
जब भी रोए गुलाबों को हाथों में लिए
दिल से तेरी ही यादों की महक आई..
इस भरी दुनिया में बस तेरा गम है अपना
इसी गम से मरने की ना नौबत आई..
जाग उठती है रातों में मेरी तन्हाई..
शायद इतना ही बहुत है कि तुझे देखा
तेरी तस्वीर मेरे रूह में उतर आई..
जब भी रोए गुलाबों को हाथों में लिए
दिल से तेरी ही यादों की महक आई..
इस भरी दुनिया में बस तेरा गम है अपना
इसी गम से मरने की ना नौबत आई..
मंगलवार, 3 मार्च 2015
Ek Ghazal Tere Liye - (एक ग़ज़ल तेरे लिए )
5:44 am
No comments
एक ग़ज़ल तेरे लिए ज़रूर लिखूंगी बे-हिसाब उस में तेरा कसूर लिखूंगी.. टूट गए बचपन के तेरे सारे खिलौने अब दिलों से खेलना तेरा दस्तूर लिखूंगी.. तेरे बगैर कांटे तनहा हर रात लिखूंगी भीगी आँखे राह देखते तेरे इंतज़ार लिखूंगी.. तू आया नही थाम ने हाथ वो शाम लिखूंगी मेरी बर्बादी का हर वो किस्सा तेरे नाम लिखूंगी.. |
Hai Sabase Madhur wo Geet- हैं सबसे मधुर वो गीत
5:41 am
No comments
हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें, हम दर्द के सुर में गाते हैं
जब हद से गुज़र जाती है ख़ुशी, आँसू भी छलक आते हैं..
काँटों में खिले हैं फूल हमारे, रंग भरे अरमानों के
नादान हैं जो इन काँटों से, दामन को बचाये जाते हैं..
जब ग़म का अंधेरा घिर आये, समझो के सवेरा दूर नहीं
हर रात का है पग़ाम यही, तारे भी यही दोहराते हैं..
पहलू में पराये दर्द बसाके, हँसना हँसाना सीख ज़रा
तूफ़ान से कह दे घिर के उठे, हम प्यार के दीप जलाते हैं..
जब हद से गुज़र जाती है ख़ुशी, आँसू भी छलक आते हैं..
काँटों में खिले हैं फूल हमारे, रंग भरे अरमानों के
नादान हैं जो इन काँटों से, दामन को बचाये जाते हैं..
जब ग़म का अंधेरा घिर आये, समझो के सवेरा दूर नहीं
हर रात का है पग़ाम यही, तारे भी यही दोहराते हैं..
पहलू में पराये दर्द बसाके, हँसना हँसाना सीख ज़रा
तूफ़ान से कह दे घिर के उठे, हम प्यार के दीप जलाते हैं..
Mujhame Jadu Koi Jaga To Hai -मुझमें जादू कोई जगा तो है
5:40 am
No comments
मुझमें जादू कोई जगा तो है
मेरी बातों में इक अदा तो है..
नज़रें मिलते ही लडखडाया वो
मेरी आँखों में इक नशा तो है..
आईने रास आ गये मुझको
कोई मुझ पे भी मर मिटा तो है..
धूप की आंच कम हुई तो क्या
सर्दियों का बदन तपा तो है..
नाम उसने मेरा शमां रक्खा
इस पिघलने में इक मज़ा तो है..
देखकर मुझको कह रहा है वो
दर्दे-दिल की कोई दवा तो है..
उसकी हर राह है मेरे घर तक
पास उसके मेरा पता तो है..
वो पागल मुझको मुझसे मांगे है
मेरे लब पे भी इक दुआ तो है..
मेरी बातों में इक अदा तो है..
नज़रें मिलते ही लडखडाया वो
मेरी आँखों में इक नशा तो है..
आईने रास आ गये मुझको
कोई मुझ पे भी मर मिटा तो है..
धूप की आंच कम हुई तो क्या
सर्दियों का बदन तपा तो है..
नाम उसने मेरा शमां रक्खा
इस पिघलने में इक मज़ा तो है..
देखकर मुझको कह रहा है वो
दर्दे-दिल की कोई दवा तो है..
उसकी हर राह है मेरे घर तक
पास उसके मेरा पता तो है..
वो पागल मुझको मुझसे मांगे है
मेरे लब पे भी इक दुआ तो है..
Band Kar Du Darwaje Laga Du Ye- बंद कर दूं ये दरवाजे, लगा दूं
5:22 am
No comments
बंद कर दूं ये दरवाजे, लगा दूं ये खिड़कियां
फुरसत है, उन्हें यादकर ले लूं मैं हिचकियां..
हमने बनाए जाने कितने सपनों के महल
हिज्र के तूफान ने उजाड़ दी है बस्तियां..
कागज पे लिखी बातें भी दिल तोड़ देती हैं
उनकी खतें पढ़के निकलती है सिसकियां..
तेरी यादों के गुलशन में बैठी मैं कई पहर
आंखों से उड़ती रही अश्कों की तितलियां..
फुरसत है, उन्हें यादकर ले लूं मैं हिचकियां..
हमने बनाए जाने कितने सपनों के महल
हिज्र के तूफान ने उजाड़ दी है बस्तियां..
कागज पे लिखी बातें भी दिल तोड़ देती हैं
उनकी खतें पढ़के निकलती है सिसकियां..
तेरी यादों के गुलशन में बैठी मैं कई पहर
आंखों से उड़ती रही अश्कों की तितलियां..
सुकून मिल गया मुझको बदनाम होकर आपके हर इक इल्ज़ाम पे यूँ बेजुबान होकर
लोग पढ़ ही लेंगें आपकी आँखों में मेरी मोहब्बत चाहे कर दो इनकार अंजान होकर
गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015
Tumane Dil Ki Baat Kah Di- तुमने दिल की बात कह दी
1:09 am
No comments
तुमने दिल की बात कह दी, आज ये अच्छा हुआ,
हम तुम्हें अपना समझते थे, बड़ा धोखा हुआ,
जब भी हमने कुछ कहा, उसका असर उल्टा हुआ,
आप शायद भूलते हैं, बारहा ऐसा हुआ,
आपकी आंखों में ये आंसू कहाँ से आ गये,
हम तो दीवाने हैं लेकिन आपको ये क्या हुआ,
हम तुम्हें अपना समझते थे, बड़ा धोखा हुआ,
जब भी हमने कुछ कहा, उसका असर उल्टा हुआ,
आप शायद भूलते हैं, बारहा ऐसा हुआ,
आपकी आंखों में ये आंसू कहाँ से आ गये,
हम तो दीवाने हैं लेकिन आपको ये क्या हुआ,
सोमवार, 23 फ़रवरी 2015
Jaan Baki Hai- जान बाक़ी है,
6:31 am
No comments
एक घडी और ठहर कि जान बाक़ी है,
तेरे लब पे मेरे होने का निशां बाक़ी है...
शब के चेहरे पे चढा रंग सवेरे का तो क्या,
ढलते ख़्वाबों में अभी अपना जहां बाक़ी है
तेरे लब पे मेरे होने का निशां बाक़ी है...
शब के चेहरे पे चढा रंग सवेरे का तो क्या,
ढलते ख़्वाबों में अभी अपना जहां बाक़ी है
Meri Har Raat Tere Gum Main
5:57 am
No comments
मेरी हर शाम तेरे गम में सुलग जाए
मेरी हर रात तेरी यादों में जल जाए..
दिल के हर राग में तेरा ही दर्द होता है
मेरी आवाज इन आंखों से पिघल जाए..
तू मुझे चाहे, न चाहे, मेरी ये चाहत है
जिसे भी तू चाहे वो तुझको मिल जाए..
मेरी हर दर्द जानकर तू मुझे छोड़ गया
तू सिखा दे कि कैसे तुझे दिल भूल जाए..
मेरी हर रात तेरी यादों में जल जाए..
दिल के हर राग में तेरा ही दर्द होता है
मेरी आवाज इन आंखों से पिघल जाए..
तू मुझे चाहे, न चाहे, मेरी ये चाहत है
जिसे भी तू चाहे वो तुझको मिल जाए..
मेरी हर दर्द जानकर तू मुझे छोड़ गया
तू सिखा दे कि कैसे तुझे दिल भूल जाए..
बुधवार, 18 फ़रवरी 2015
Har Sakhsh Mujhe Dekh ke Rukata Jarur Hai
2:49 am
No comments
तूफान मुझसे हो के गुजरते हैं किसलिए...
कोई न कोई मुझमें भी रस्ता जरूर है...
"चाँदी के चंद सिक्कों को कितना यकीन है...
सोनिया हो या केजरीवाल बिकता जरूर है...
"किस्मत के जानकार नजूमी को देखिए...
लिखता नहीं है वो मगर पढ़ता जरूर है...
"जब भी सफ़र हो धूप का साये की तलब में...
हर शख़्स मुझको देख के रूकता जरूर है...
कोई न कोई मुझमें भी रस्ता जरूर है...
"चाँदी के चंद सिक्कों को कितना यकीन है...
सोनिया हो या केजरीवाल बिकता जरूर है...
"किस्मत के जानकार नजूमी को देखिए...
लिखता नहीं है वो मगर पढ़ता जरूर है...
"जब भी सफ़र हो धूप का साये की तलब में...
हर शख़्स मुझको देख के रूकता जरूर है...
बुधवार, 26 नवंबर 2014
अपने स्कूलों से तो, पढ़कर मैं आया और कुछ, जिंदगी जब भी मिली, उसने सिखाया और कुछ!
2:50 am
No comments
अपने स्कूलों से तो, पढ़कर मैं आया और कुछ,
जिंदगी जब भी मिली, उसने सिखाया और कुछ!
जिंदगी जब भी मिली, उसने सिखाया और कुछ!
सख्त असमंजश में हूँ बच्चों को क्या तालीम दूँ ,
साथ लेकर कुछ चला था, काम आया और कुछ !
साथ लेकर कुछ चला था, काम आया और कुछ !
आज फिर मायूस होकर, उसकी महफ़िल से उठा,
मुझको मेरी बेबसी ने, फिर रुलाया और कुछ !
मुझको मेरी बेबसी ने, फिर रुलाया और कुछ !
इसको भोलापन कहूं या, उसकी होशियारी कहूँ?
मैंने पूछा और कुछ, उसने बताया और कुछ!
मैंने पूछा और कुछ, उसने बताया और कुछ!
सब्र का फल हर समय मीठा ही हो, मुमकिन नहीं,
मुझको वादे कुछ मिले थे, मैंने पाया और कुछ!
मुझको वादे कुछ मिले थे, मैंने पाया और कुछ!
आजकल 'विश्नोई' के, नग्मों की रंगत और है,
शायद उसका दिल किसी ने फिर दुखाया और कुछ
शायद उसका दिल किसी ने फिर दुखाया और कुछ
शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014
अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
3:32 am
No comments
अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है
मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है
हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है
बुधवार, 8 अक्टूबर 2014
देख कर तस्वीर तेरी जमाना भूल जाते है ,
6:19 am
No comments
देख कर तस्वीर तेरी जमाना भूल जाते है ,
खुशी इतनी होती है कि मुस्कुराना भूल जाते है।।
खुशी इतनी होती है कि मुस्कुराना भूल जाते है।।
पोंछते रहते है बहते अश्क जमाने भर के ,
अपनी आँखो के आँसू दिखाना भूल जाते है।।
अपनी आँखो के आँसू दिखाना भूल जाते है।।
हजारो बाते समझाते रहते है दुनियाभर को ,
बस अपने आप को समझाना भूल जाते है।।
बस अपने आप को समझाना भूल जाते है।।
यह अँधेरा भी खुश रहता है रातो का मेरी ,
चराग रखे रहते है और जलाना भूल जाते है।।
चराग रखे रहते है और जलाना भूल जाते है।।
आँधियो मे भी रौशन रहता है सदा वजूद मेरा ,
दिल के जलते दिये तूफान मे बुझाना भूल जाते है।।
दिल के जलते दिये तूफान मे बुझाना भूल जाते है।।
वो समझ नही पाते मेरी नजरों की चाहत,
मूझे उससे मोहब्बत है हम बताना भूल जाते है।।
मूझे उससे मोहब्बत है हम बताना भूल जाते है।।
मंगलवार, 23 सितंबर 2014
एक था टाइगर
2:08 am
No comments
कृपया इस पोस्ट को पूरा जरुर पढ़े
======================
पिछले साल रिलीज हुई फिल्म "एक था टाइगर" ने बड़े
परदे पर जबरदस्त धूम मचाई थी....
इस फिल्म ने कमाई के सारे रिकार्ड तोड दिये थे और
फिल्म के हीरो सलमान खान ने भी खूब पैसा और
वाहवाही बटोरी थी...
इस फोटो मेँ दिखाये गये ये शख्स "एक था टाइगर"
फिल्म के सलमान खान की तरह बहुत मशहूर तो नहीँ है
और शायद ही कोई इनके बारे मेँ
जानता हो या किसी ने सुना हो? इनका नाम
था रवीन्द्र कौशिक.... ये भारत
की जासूसी संस्था RAW के भूतपूर्व एजेन्ट थे...
राजस्थान के श्रीगंगानगर मेँ पले बढ़े रवीन्द्र ने 23 साल
की उम्र मेँ ग्रेजुएशनकरने के बाद RAW ज्वाइन की थी,
तब तक भारत पाकिस्तान और चीन के साथ एक-एक
लड़ाई लड़ चुका था और पाकिस्तान भारत के
खिलाफ एक और युद्ध की तैयारी कर रहा था... जब
भारतीय सेना को इसकी भनक लगी तो साल 1975 में
कौशिक को भारतीय जासूस के तौर पर
खुफिया मिशन के लिए पाकिस्तान भेजा गया और
वहाँ उन्हें नबी अहमद शेख़ का नाम दिया गया.
पाकिस्तान पहुंच कर कौशिक ने कराची के
लॉ कॉलेज में दाखिल लिया और कानून में
स्तानककी डिग्री हासिल की. इसके बाद
वो पाकिस्तानी सेना में शामिल हो गए और मेजर के
रैंक तक पहुंच गए, लेकिन पाकिस्तान सेना को कभी ये
अहसास ही नहीं हुआ कि उनके बीच एक भारतीय
जासूस काम कर रहा है. कौशिक को वहां एक
पाकिस्तानी लड़की अमानत से प्यार भी हो गया,
दोनों ने शादी कर ली और उनकी एक बेटी भी हुई..
कौशिक ने अपनी जिंदगी के 30 साल अपने घर और देश
से बाहर गुजारे. इस दौरान पाकिस्तान के हर कदम पर
भारत
भारी पड़ता था क्योंकि उसकी सभी योजनाओं
की जानकारी कौशिक की ओर से भारतीय
अधिकारियों को दे दी जाती थी. इनकी बताई
जानकारियोँ के बलबूते पर भारत ने पाकिस्तान के
खिलाफ हर मोर्चे पर रणनीति तैयार की!
पाकिस्तान तो भारत के खिलाफ कारगिल युद्ध से
काफी पहले ही युद्ध छेड़ देता पर रवीन्द्र के रहते ये
संभव ना हो पाया.. केवल एक आदमी ने पाकिस्तान
को खोखला कर दिया था! भारतीय
सेना को रवीन्द्र के जरिये रणनीति बनाने
का पूरा मौका मिला और पाकिस्तान जिसने कई
बार राजस्थान से सटी सीमा पर युद्ध छेड़ने
का प्रयास किया उसे मुँह की खानी पड़ी!
इसलिए ये बात बहुत कम ही लोगोँ को पता है
कि पाकिस्तान के साथ हुई
लड़ाईयोँ का असली हीरो रवीन्द्र कौशिक है...
रवीन्द्र के बताये अनुसार भारतीय सेना के जवानोँ ने
अपने अतुल्य साहस का प्रदर्शन करते हुये पहलगाम मेँ
घुसपैठ कर चुके 50 से
ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकोँ को मार गिराया...
लेकिन दुर्भाग्य से 1983 में कौशिक का राज खुल
गया. दरअसल रॉ ने ही एक अन्य जासूस को कौशिक से
मिलने पाकिस्तान भेजा था जिसे
पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी ने पकड़ लिया. पूछताछ
के दौरान इस जासूस ने अपने इरादों के बारे में साफ़
साफ़ बता दिया और साथ ही कौशिक की पहचान
को भी उजागर करदिया. हालांकि रवीन्द्र ने
किसी तरह भागकर खुद को बचाने के लिये भारत
सरकार से अपील की.. पर सच्चाई सामने आने के बाद
तत्कालीन इंदिरा गाँधी सरकार ने उसे भारत वापिस
लाने मेँ कोई रुचि नहीँ दिखाई! अंततः उन्हे
पाकिस्तान मेँ ही पकड़ लिया गया और जेल मेँ डाल
कर उन पर तमाम तरह के मुकदमेँ चलाये गये... रवींद्र
कौशिक को काफी लालच दिया गया कि अगर
वो भारतीय सरकार से जुड़ी गोपनीय जानकारी दे दें
तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा. लेकिन कौशिक ने
अपना मुंह नहीं खोला, इस पर कौशिक को भयंकर
टार्चर भी किया गया...
फिर पाकिस्तान में कौशिक को 1985 में मौत
की सजा सुनाई गई जिसे बाद में उम्रकैद में तब्दील कर
दिया गया. कौशिक को मियांवाली की जेल में
रखा गया और वही टीबी और दिल का दौरा पड़ने से
उनकी मौत हो गई....
तो ये सिला मिला रवीन्द्र कौशिक को 30 साल
की देशभक्ति का..
भारत सरकार ने भारत मेँ मौजूद रवीन्द्र से संबंधित
सभी रिकार्ड मिटा दिये और RAW
को धमकी दी कि अपना रवीन्द्र के मामले मे
अपना मुँह बंद रखे...
रवीन्द्र के परिवार को हाशिये मेँ ढकेल
दिया गया और भारत का ये सच्चा सपूत हमेशा के
लिए गुमनामी के अंधेरे मेँ खो गया...
"एक था टाइगर" नाम की फिल्म रवीन्द्र कौशिक के
जीवन पर ही आधारित है, जब इस फिल्म का निर्माण
हो रहा था तो भारत सरकार के भारी दखल के बाद
इसकी स्क्रिप्ट मेँ फेरबदल करके इसकी कहानी मे
बदलाव किया गया....पर मूल कथा वही है!
इसलिए दोस्तो इस देशभक्त को गुमनाम ना होने देँ, ,
जब भी "एक था टाइगर" फिल्म देखे, तब इस
असली टाइगर को जरूर याद कर लें...!
======================
पिछले साल रिलीज हुई फिल्म "एक था टाइगर" ने बड़े
परदे पर जबरदस्त धूम मचाई थी....
इस फिल्म ने कमाई के सारे रिकार्ड तोड दिये थे और
फिल्म के हीरो सलमान खान ने भी खूब पैसा और
वाहवाही बटोरी थी...
इस फोटो मेँ दिखाये गये ये शख्स "एक था टाइगर"
फिल्म के सलमान खान की तरह बहुत मशहूर तो नहीँ है
और शायद ही कोई इनके बारे मेँ
जानता हो या किसी ने सुना हो? इनका नाम
था रवीन्द्र कौशिक.... ये भारत
की जासूसी संस्था RAW के भूतपूर्व एजेन्ट थे...
राजस्थान के श्रीगंगानगर मेँ पले बढ़े रवीन्द्र ने 23 साल
की उम्र मेँ ग्रेजुएशनकरने के बाद RAW ज्वाइन की थी,
तब तक भारत पाकिस्तान और चीन के साथ एक-एक
लड़ाई लड़ चुका था और पाकिस्तान भारत के
खिलाफ एक और युद्ध की तैयारी कर रहा था... जब
भारतीय सेना को इसकी भनक लगी तो साल 1975 में
कौशिक को भारतीय जासूस के तौर पर
खुफिया मिशन के लिए पाकिस्तान भेजा गया और
वहाँ उन्हें नबी अहमद शेख़ का नाम दिया गया.
पाकिस्तान पहुंच कर कौशिक ने कराची के
लॉ कॉलेज में दाखिल लिया और कानून में
स्तानककी डिग्री हासिल की. इसके बाद
वो पाकिस्तानी सेना में शामिल हो गए और मेजर के
रैंक तक पहुंच गए, लेकिन पाकिस्तान सेना को कभी ये
अहसास ही नहीं हुआ कि उनके बीच एक भारतीय
जासूस काम कर रहा है. कौशिक को वहां एक
पाकिस्तानी लड़की अमानत से प्यार भी हो गया,
दोनों ने शादी कर ली और उनकी एक बेटी भी हुई..
कौशिक ने अपनी जिंदगी के 30 साल अपने घर और देश
से बाहर गुजारे. इस दौरान पाकिस्तान के हर कदम पर
भारत
भारी पड़ता था क्योंकि उसकी सभी योजनाओं
की जानकारी कौशिक की ओर से भारतीय
अधिकारियों को दे दी जाती थी. इनकी बताई
जानकारियोँ के बलबूते पर भारत ने पाकिस्तान के
खिलाफ हर मोर्चे पर रणनीति तैयार की!
पाकिस्तान तो भारत के खिलाफ कारगिल युद्ध से
काफी पहले ही युद्ध छेड़ देता पर रवीन्द्र के रहते ये
संभव ना हो पाया.. केवल एक आदमी ने पाकिस्तान
को खोखला कर दिया था! भारतीय
सेना को रवीन्द्र के जरिये रणनीति बनाने
का पूरा मौका मिला और पाकिस्तान जिसने कई
बार राजस्थान से सटी सीमा पर युद्ध छेड़ने
का प्रयास किया उसे मुँह की खानी पड़ी!
इसलिए ये बात बहुत कम ही लोगोँ को पता है
कि पाकिस्तान के साथ हुई
लड़ाईयोँ का असली हीरो रवीन्द्र कौशिक है...
रवीन्द्र के बताये अनुसार भारतीय सेना के जवानोँ ने
अपने अतुल्य साहस का प्रदर्शन करते हुये पहलगाम मेँ
घुसपैठ कर चुके 50 से
ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकोँ को मार गिराया...
लेकिन दुर्भाग्य से 1983 में कौशिक का राज खुल
गया. दरअसल रॉ ने ही एक अन्य जासूस को कौशिक से
मिलने पाकिस्तान भेजा था जिसे
पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी ने पकड़ लिया. पूछताछ
के दौरान इस जासूस ने अपने इरादों के बारे में साफ़
साफ़ बता दिया और साथ ही कौशिक की पहचान
को भी उजागर करदिया. हालांकि रवीन्द्र ने
किसी तरह भागकर खुद को बचाने के लिये भारत
सरकार से अपील की.. पर सच्चाई सामने आने के बाद
तत्कालीन इंदिरा गाँधी सरकार ने उसे भारत वापिस
लाने मेँ कोई रुचि नहीँ दिखाई! अंततः उन्हे
पाकिस्तान मेँ ही पकड़ लिया गया और जेल मेँ डाल
कर उन पर तमाम तरह के मुकदमेँ चलाये गये... रवींद्र
कौशिक को काफी लालच दिया गया कि अगर
वो भारतीय सरकार से जुड़ी गोपनीय जानकारी दे दें
तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा. लेकिन कौशिक ने
अपना मुंह नहीं खोला, इस पर कौशिक को भयंकर
टार्चर भी किया गया...
फिर पाकिस्तान में कौशिक को 1985 में मौत
की सजा सुनाई गई जिसे बाद में उम्रकैद में तब्दील कर
दिया गया. कौशिक को मियांवाली की जेल में
रखा गया और वही टीबी और दिल का दौरा पड़ने से
उनकी मौत हो गई....
तो ये सिला मिला रवीन्द्र कौशिक को 30 साल
की देशभक्ति का..
भारत सरकार ने भारत मेँ मौजूद रवीन्द्र से संबंधित
सभी रिकार्ड मिटा दिये और RAW
को धमकी दी कि अपना रवीन्द्र के मामले मे
अपना मुँह बंद रखे...
रवीन्द्र के परिवार को हाशिये मेँ ढकेल
दिया गया और भारत का ये सच्चा सपूत हमेशा के
लिए गुमनामी के अंधेरे मेँ खो गया...
"एक था टाइगर" नाम की फिल्म रवीन्द्र कौशिक के
जीवन पर ही आधारित है, जब इस फिल्म का निर्माण
हो रहा था तो भारत सरकार के भारी दखल के बाद
इसकी स्क्रिप्ट मेँ फेरबदल करके इसकी कहानी मे
बदलाव किया गया....पर मूल कथा वही है!
इसलिए दोस्तो इस देशभक्त को गुमनाम ना होने देँ, ,
जब भी "एक था टाइगर" फिल्म देखे, तब इस
असली टाइगर को जरूर याद कर लें...!
शुक्रवार, 5 सितंबर 2014
था मैं नींद में और मुझे इतना सजाया जा रहा था
3:00 am
2 comments
था मैं नींद में और मुझे इतना
सजाया जा रहा था....
.
बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा था....
.
ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर में....
.
बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा था....
.
था पास मेरा हर अपना
उस वक़्त....
.
फिर भी मैं हर किसी के
मन से
भुलाया जा रहा था...
.
जो कभी देखते
भी न थे मोहब्बत की
निगाहों से....
.
उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर लुटाया जा रहा था...
.
मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते हुए देख कर....
.
जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था...
.
काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख कर....
.
जहाँ मुझे हमेशा के
लिए सुलाया जा रहा था....
.
मोहब्बत की
इन्तहा थी जिन दिलो में
मेरे लिए....
.
उन्ही दिलो के हाथों
आज मैं जलाया जा रहा था....
सजाया जा रहा था....
.
बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा था....
.
ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर में....
.
बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा था....
.
था पास मेरा हर अपना
उस वक़्त....
.
फिर भी मैं हर किसी के
मन से
भुलाया जा रहा था...
.
जो कभी देखते
भी न थे मोहब्बत की
निगाहों से....
.
उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर लुटाया जा रहा था...
.
मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते हुए देख कर....
.
जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था...
.
काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख कर....
.
जहाँ मुझे हमेशा के
लिए सुलाया जा रहा था....
.
मोहब्बत की
इन्तहा थी जिन दिलो में
मेरे लिए....
.
उन्ही दिलो के हाथों
आज मैं जलाया जा रहा था....
सोमवार, 25 अगस्त 2014
डोलि गइल पतइन के पात-पात मन, जब से छु गइल पवन -भोलानाथ गहमरी
8:13 am
No comments
डोलि गइल पतइन के पात-पात मन,
जब से छु गइल पवन
पाँव के अलम नाहीं
बाँह बे-सहारा,
प्रान एक तिनिका पर
टंगि गइल बेचारा,
लागि गइल अइसे में बाह रे लगन
रचि गइल सिंगार
सरुज-चान आसमान,
जिनगी के गीत लिखे
रात भर बिहान,
बाँचि गइल अनजाने में बेकल नयन।
देह गइल परदेसी
मोल कुछ पियार के,
दर्द एक बसा गइल
घरी-घरी निहार के,
लुटि गइल जनम-जनम के हर सुघर सपन।
जब से छु गइल पवन
पाँव के अलम नाहीं
बाँह बे-सहारा,
प्रान एक तिनिका पर
टंगि गइल बेचारा,
लागि गइल अइसे में बाह रे लगन
रचि गइल सिंगार
सरुज-चान आसमान,
जिनगी के गीत लिखे
रात भर बिहान,
बाँचि गइल अनजाने में बेकल नयन।
देह गइल परदेसी
मोल कुछ पियार के,
दर्द एक बसा गइल
घरी-घरी निहार के,
लुटि गइल जनम-जनम के हर सुघर सपन।
काँट –कुश से भरल डगरिया, धरीं बचा के पाँव रे- भोलानाथ गहमरी
8:11 am
No comments
काँट –कुश से भरल डगरिया, धरीं बचा के पाँव रे
माटी ऊपर, छानी छप्पर, उहे हामरो गाँव रे…..
चारों ओर सुहावन लागे, निर्मल ताल-तलैया,
अमवा के डाली पर बैठल, गावे गीत कोइलिया,
थकल-बटोही पल-भर बैठे, आ बगिया के छाँव रे…
सनन –सनन सन बहे बायरिया, चरर-मरर बंसवरिया,
घरर-घरर-घर मथनी बोले, दहिया के कंह्तरिया,
साँझ सवेरे गइया बोले, बछरू बोले माँव रे…….
चान-सुरुज जिनकर रखवारा, माटी जिनकर थाती,
लहरे खेतन, बीच फसलीया, देख के लहरे छाती,
घर-घर सबकर भूख मिटावे, नाहीं चाहे नाव रे…….
निकसे पनिया के पनिघटवा, घूँघट काढ़ गुजरिया,
मथवा पर धई चले डगरिया, दूई-दूई भरल गगरिया,
सुधिया आवे जो नन्द गाँव के रोवे केतने साँवरे……
तन कोइला मन हीरा चमके, चमके कलश पिरितिया,
सरल स्वाभाव सनेही जिनकर, अमृत बासलि बतिया,
नेह भरल निस कपट गगरिया, छलके ठांवे-ठांव रे……….
माटी ऊपर, छानी छप्पर, उहे हामरो गाँव रे…..
चारों ओर सुहावन लागे, निर्मल ताल-तलैया,
अमवा के डाली पर बैठल, गावे गीत कोइलिया,
थकल-बटोही पल-भर बैठे, आ बगिया के छाँव रे…
सनन –सनन सन बहे बायरिया, चरर-मरर बंसवरिया,
घरर-घरर-घर मथनी बोले, दहिया के कंह्तरिया,
साँझ सवेरे गइया बोले, बछरू बोले माँव रे…….
चान-सुरुज जिनकर रखवारा, माटी जिनकर थाती,
लहरे खेतन, बीच फसलीया, देख के लहरे छाती,
घर-घर सबकर भूख मिटावे, नाहीं चाहे नाव रे…….
निकसे पनिया के पनिघटवा, घूँघट काढ़ गुजरिया,
मथवा पर धई चले डगरिया, दूई-दूई भरल गगरिया,
सुधिया आवे जो नन्द गाँव के रोवे केतने साँवरे……
तन कोइला मन हीरा चमके, चमके कलश पिरितिया,
सरल स्वाभाव सनेही जिनकर, अमृत बासलि बतिया,
नेह भरल निस कपट गगरिया, छलके ठांवे-ठांव रे……….
कवने खोंतवा में लुकाइलु, आहि रे बालम चिरई,-भोलानाथ गहमरी
8:09 am
No comments
कवने खोंतवा में लुकाइलु, आहि रे बालम चिरई,
वन-वन ढूँढलीं, दर-दर ढूँढलीं, ढूँढलीं नदी के तीरे,
साँझ के ढूँढलीं, रात के ढूँढलीं, ढूँढलीं होत फजीरे,
मन में ढूँढलीं, जन में ढूँढलीं, ढूँढलीं बीच बजारे,
हिया-हिया में पैंइठ के ढूँढलीं, ढूँढलीं विरह के मारे,
कौने सुगना पे लुभइलु, आहि रे बालम चिरंई……….
गीत के हम हर कड़ी से पूछलीं, पूछलीं राग मिलन से,
छन्द-छन्द, लय ताल से पूछलीं, पूछलीं सुर के मन से,
किरण-किरण से जाके पूछलीं, पूछलीं नील गगन से,
धरती और पाताल से पूछलीं, पूछलीं मस्त पवन से,
कौने अंतरे में समइलु, आहि रे बालम चिरई…………
मन्दिर से मस्जिद तक देखलीं, गिरजा से गुरद्वारा,
गीता और कुरान में देखलीं तीरथ सारा,
पण्डित से मुल्ला तक देखलीं, देखलीं घरे कसाई,
सागरी उमरिया छछनत जियरा, कबले तोहके पाई,
कौनी बतिया पर कोहइलु, आहि रे बालम चिंरई…
वन-वन ढूँढलीं, दर-दर ढूँढलीं, ढूँढलीं नदी के तीरे,
साँझ के ढूँढलीं, रात के ढूँढलीं, ढूँढलीं होत फजीरे,
मन में ढूँढलीं, जन में ढूँढलीं, ढूँढलीं बीच बजारे,
हिया-हिया में पैंइठ के ढूँढलीं, ढूँढलीं विरह के मारे,
कौने सुगना पे लुभइलु, आहि रे बालम चिरंई……….
गीत के हम हर कड़ी से पूछलीं, पूछलीं राग मिलन से,
छन्द-छन्द, लय ताल से पूछलीं, पूछलीं सुर के मन से,
किरण-किरण से जाके पूछलीं, पूछलीं नील गगन से,
धरती और पाताल से पूछलीं, पूछलीं मस्त पवन से,
कौने अंतरे में समइलु, आहि रे बालम चिरई…………
मन्दिर से मस्जिद तक देखलीं, गिरजा से गुरद्वारा,
गीता और कुरान में देखलीं तीरथ सारा,
पण्डित से मुल्ला तक देखलीं, देखलीं घरे कसाई,
सागरी उमरिया छछनत जियरा, कबले तोहके पाई,
कौनी बतिया पर कोहइलु, आहि रे बालम चिंरई…
बुधवार, 20 अगस्त 2014
आईने सा बिखरे पर पत्थर तरस नहीं खाते जिस्म ज़ख्मी है पर खंज़र तरस नहीं आते,
2:05 am
No comments
आईने सा बिखरे पर पत्थर तरस नहीं खाते
जिस्म ज़ख्मी है पर खंज़र तरस नहीं आते,
जिस्म ज़ख्मी है पर खंज़र तरस नहीं आते,
होते एक बराबर के तभी मिलता है मांगे से
सूखे हुए दरिया पर समंदर तरस नहीं खाते,
सूखे हुए दरिया पर समंदर तरस नहीं खाते,
लुटते लुटते बाकी रहा ना है कुछभी लेकिन
भारत पे नेता रूपी सिकंदर तरस नहीं खाते,
भारत पे नेता रूपी सिकंदर तरस नहीं खाते,
ख्वाबों में आके डरा देते हैं आज भी मुझको
दिल दुखाने वाले यह मंजर तरस नहीं खाते,
दिल दुखाने वाले यह मंजर तरस नहीं खाते,
कैसे बनता है आशियाँ बेघर हैं क्या जाने ये
घोंसला मिटाने में यह बंदर तरस नहीं खाते,
घोंसला मिटाने में यह बंदर तरस नहीं खाते,
चढ़वाकर खून ही बच पायी है ज़िंदगी उसकी
मगर लहू पीने में ये मच्छर तरस नहीं खाते,
मगर लहू पीने में ये मच्छर तरस नहीं खाते,
पैसे सेही मिलती हमने ज़िंदगी देखी है खुदा
मुफ़लिस बीमारों पर डॉक्टर तरस नहीं खाते,
मुफ़लिस बीमारों पर डॉक्टर तरस नहीं खाते,
रोज़ चीर हरण होता द्रोपदियों का यहां
खड़े देखते आज के गिरधर तरस नहीं खाते--
खड़े देखते आज के गिरधर तरस नहीं खाते--
शनिवार, 16 अगस्त 2014
फूल खिला दे शाखों पर, पेड़ों को फल दे मालिक,
1:35 am
No comments
फूल खिला दे शाखों पर, पेड़ों को फल दे मालिक,
धरती जितनी प्यासी है, उतना तो जल दे मालिक,
धरती जितनी प्यासी है, उतना तो जल दे मालिक,
वक़्त बड़ा दुखदायक है, पापी है संसार बहुत,
निर्धन को धनवान बना, दुर्बल को बल दे मालिक,
निर्धन को धनवान बना, दुर्बल को बल दे मालिक,
कोहरा कोहरा सर्दी है, काँप रहा है पूरा गाँव,
दिन को तपता सूरज दे, रात को कम्बल दे मालिक,
दिन को तपता सूरज दे, रात को कम्बल दे मालिक,
बैलों को इक गठरी घास, इंसानों को दो रोटी,
खेतों को भर गेहूँ से, काँधों को हल दे मालिक,
खेतों को भर गेहूँ से, काँधों को हल दे मालिक,
हाथ सभी के काले हैं, नजरें सबकी पीली हैं,
सीना ढाँप दुपट्टे से, सर को आँचल दे मालिक...
सीना ढाँप दुपट्टे से, सर को आँचल दे मालिक...
गुरुवार, 24 जुलाई 2014
दिल की बात लबों पर लाकर, अब तक हम दुख सहते हैं|
8:39 am
No comments
दिल की बात लबों पर लाकर, अब तक हम दुख सहते हैं|
हम ने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं|
बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदली,
लेकिन इन प्यासी आँखों में अब तक आँसू बहते हैं|
एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं,
दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं|
जिस की ख़ातिर शहर भी छोड़ा जिस के लिये बदनाम हुए,
आज वही हम से बेगाने-बेगाने से रहते हैं|
हम ने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं|
बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदली,
लेकिन इन प्यासी आँखों में अब तक आँसू बहते हैं|
एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं,
दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं|
जिस की ख़ातिर शहर भी छोड़ा जिस के लिये बदनाम हुए,
आज वही हम से बेगाने-बेगाने से रहते हैं|
बुधवार, 23 जुलाई 2014
सोचा नहीं अछा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं मांगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं
7:50 am
No comments
सोचा नहीं अछा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं
मांगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं
देखा तुझे सोचा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे
मेरी ख़ता मेरी वफ़ा तेरी ख़ता कुछ भी नहीं
जिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाये रात भर
भेजा वही काग़ज़ उसे हमने लिखा कुछ भी नहीं
इक शाम की दहलीज़ पर बैठे रहे वो देर तक
आँखों से की बातें बहुत मूँह से कहा कुछ भी नहीं
दो चार दिन की बात है दिल ख़ाक में सो जायेगा
जब आग पर काग़ज़ रखा बाकी बचा कुछ भी नहीं
अहसास की ख़ुश्बू कहाँ, आवाज़ के जुगनू कहाँ
ख़ामोश यादों के सिवा, घर में रहा कुछ भी नहीं
मांगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं
देखा तुझे सोचा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे
मेरी ख़ता मेरी वफ़ा तेरी ख़ता कुछ भी नहीं
जिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाये रात भर
भेजा वही काग़ज़ उसे हमने लिखा कुछ भी नहीं
इक शाम की दहलीज़ पर बैठे रहे वो देर तक
आँखों से की बातें बहुत मूँह से कहा कुछ भी नहीं
दो चार दिन की बात है दिल ख़ाक में सो जायेगा
जब आग पर काग़ज़ रखा बाकी बचा कुछ भी नहीं
अहसास की ख़ुश्बू कहाँ, आवाज़ के जुगनू कहाँ
ख़ामोश यादों के सिवा, घर में रहा कुछ भी नहीं
सदस्यता लें
संदेश (Atom)













