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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

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शनिवार, 18 दिसंबर 2021

समाज सेवा साधना स्तर की हो ::आदरणीय गुरु जी श्री प्रवीण तिवारी पेड़ बाबा ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश

समाज सेवा साधना स्तर की हो ::--
**************************
समाज में पिछड़े एवं समस्याग्रस्त लोगों को आगे लाने तथा उनकी कठिनाइयों को सुलझाने का नाम समाज सेवा है ।

आज कुछ मनुष्य अच्छे से अच्छे डॉक्टरों से इलाज करवा लेते हैं वहीं बहुत से लोग ऐसे हैं जो एक एक दिन कष्ट मे बिताते हुए मौत के मुँह की तरफ बढ़ते जाते हैं ।

बहुत बच्चे अच्छे से अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं वहीं बहुत बच्चे ऐसे भी हैं जो बिना लक्ष्य के रहते हैं ।
राई और पहाड़ के इस अंतर को पाटने के लिए , पिछड़ेपन को दूर करने के लिए और उन समस्याओं को सुलझाने के लिए जो जीते जी मनुष्य को नरक की यातना में झुलसा देती है - करुणा की आवश्यकता है ।

यहाँ करुणा और दया में अंतर है । दया कमजोरों पर किया जाता है । जबकि करुणा कर्तव्यनिष्ठा से प्रेरित होता है । जैसे जब अपना भाई या बेटा बिमार हो जाता है तो लोग जमीन आसमान एक कर देते हैं । इसका कोई विज्ञापन नहीं करते और इसके बदले में कोई लाभ भी नहीं चाहते ।यही करुणा है , यही सेवा है ।

अब धारणा बदल चुकी है लोग समाज सेवा करने के स्थान पर समाज सेवी कहलाना अधिक पसंद करते हैं । यही कारण है कि लोग इस दिशा में नैष्ठिक प्रयास करने के स्थान पर अपने मुँह से अपनी बहादुरी और अपने पराक्रम का परिचय ज्यादा देते हैं ।





रविवार, 5 दिसंबर 2021

भारत देश के महान क्रांतिकारी श्री चंद्रशेखर आजाद और उनकी शव यात्रा -

जब चंद्रशेखर #आजाद की शव यात्रा निकली... देश की जनता नंगे पैर... नंगे सिर चल रही थी... लेकिन कांग्रेसियों ने शव यात्रा में शामिल होने से इनकार कर दिया था

- एक अंग्रेज सुप्रीटेंडेंट ने चंद्रशेखर आजाद की मौत के बाद उनकी वीरता की प्रशंसा करते हुए कहा था कि चंद्रशेखर आजाद पर तीन तरफ से गोलियां चल रही थीं... लेकिन इसके बाद भी उन्होंने जिस तरह मोर्चा संभाला और 5 अंग्रेज सिपाहियों को हताहत कर दिया था... वो अत्यंत उच्च कोटि के निशाने बाज थे... अगर मुठभेड़ की शुरुआत में ही चंद्रशेखर आजाद की जांघ में गोली नहीं लगी होती तो शायद एक भी अंग्रेज सिपाही उस दिन जिंदा नहीं बचता!
-शत्रु भी जिसके शौर्य की प्रशंसा कर रहे थे...

मातृभूमि के प्रति जिसके समर्पण की चर्चा पूरे देश में होती थी.. जिसकी बहादुरी के किस्से हिंदुस्तान के बच्चे-बच्चे की जुबान पर थे उन महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की शव यात्रा में शामिल होने से इलाहाबाद के कांग्रेसियों ने ही इनकार कर दिया था!

-उस समय के इलाहाबाद... यानी आज का प्रयागराज... इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में जिस जामुन के पेड़ के पीछे से चंद्रशेखर आजाद निशाना लगा रहे थे... उस जामुन के पेड़ की मिट्टी को लोग अपने घरों में ले जाकर रखते थे... उस जामुन के पेड़ की पत्तियों को तोड़कर लोगों ने अपने सीने से लगा लेते थे । चंद्रशेखर आजाद की मृ्त्यु के बाद वो जामुन का पेड़ भी अब लोगों को प्रेरणा दे रहा था... इसीलिए अंग्रेजों ने उस जामुन के पेड़ को ही कटवा दिया... लेकिन चंद्रशेखर आजाद के प्रति समर्पण का भाव देश के आम जनमानस में कभी कट नहीं सका!

- जब इलाहाबाद (आज का प्रयागराज) की जनता अपने वीर चहेते क्रांतिकारी के शव के दर्शनों के लिए भारी मात्रा में जुट रही थी... लोगों ने दुख से अपने सिर की पगड़ी उतार दी... पैरों की खड़ाऊ और चप्पलें उताकर लोग नंगें पांव चंद्रशेखर आजाद की शव यात्रा में शामिल हो रहे थे... उस समय शहर के कांग्रेसियों ने कहा कि हम अहिंसा के सिद्धांत को मानते हैं इसलिए चंद्रशेखर आजाद जैसे हिंसक व्यक्ति की शव यात्रा में शामिल नहीं होंगे!
- पुरुषोत्तम दास टंडन भी उस वक्त कांग्रेस के नेता थे और चंद्रशेखर आजाद के भक्त थे । उन्होंने शहर के कांग्रेसियों को समझाया कि अब जब चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु हो चुकी है और अब वो वीरगति को प्राप्त कर चुके हैं तो मृत्यु के बाद हिंसा और अहिंसा पर चर्चा करना ठीक नहीं है.. और सभी कांग्रेसियों को अंतिम यात्रा में शामिल होना चाहिए । आखिरकार बहुत समझाने बुझाने और बाद में जनता का असीम समर्पण देखने के बाद कुछ कांग्रेसी नेता और कांग्रेसी कार्यकर्ता डरते हुए चंद्रशेखर आजाद की शव यात्रा में शामिल होने को मजबूर हुए थे!

-चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु साल 1931 में हो गई थी... लेकिन उनकी मां साल 1951 तक जीवित रहीं... आजादी साल 1947 में मिल गई थी... लेकिन आजादी के बाद 4 साल तक भी उनकी मां जगरानी देवी को बहुत भारी कष्ट उठाने पड़े थे । माता जगरानी देवी को भरोसा ही नहीं था कि उनके बेटे की मौत हो गई है वो लोगों की बात पर भरोसा नहीं करती थीं । इसलिए उन्होंने अपने मध्यमा अंगुली और अनामिका अंगुली को एक धागे से बांध लिया था । बाद में पता चला कि उन्होंने ये मान्यता मानी थी कि जिस दिन उनका बेटा आएगा उसी दिन वो अपनी ये दोनों अंगुली धागे से खोलेंगी लेकिन उनका बेटा कभी नहीं लौटा... वो तो देश के लिए अपने शरीर से आजाद हो गया था...

- आजाद के परिवार के पास संपत्ति नहीं थी... गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्म हुआ था... पिता की मृत्यु बहुत पहले ही हो चुकी थी... बेटा अंग्रेजों से लडता हुआ बलिदान हो चुका था... ये जानकर सीना फट जाता है कि आजाद की मां आजादी के बाद भी पड़ोस के घरों में लोगों के गेहूं साफ करके और बर्तन मांजकर किसी तरह अपना गुजारा चला रही थी!

- किसी कांग्रेसी लीडर ने कभी आजाद की मां की सुध नहीं ली... जो लोग जेलों में बंद होकर किताबें लिखने का गौरव प्राप्त करते थे और बाद में प्रधानमंत्री बन गए उन लोगों ने भी कभी चंद्रशेखर आजाद की मां के लिए कुछ नहीं किया!वो एक स्वाभिमानी बेटे की मां थीं... बेटे से भी ज्यादा स्वाभिमानी रही होंगी किसी की भीख पर जिंदा नहीं रहना चाहती थीं!लेकिन क्या हम देश के लोगों ने उनके प्रति अपना फर्ज निभाया है?



मंगलवार, 30 नवंबर 2021

चढ़ल जाये ना पहड़वा गोहराइला न हो- भोजपुरी देवी पचरा गीत - मनोज तिवारी

तोहके बार बार धाइला मनाइला ये मईया
दुअरे आईला तोहार गुनवा गाईला न हो
चढ़ल जाये ना पहड़वा गोहराइला न हो- २

हम नाही जनली कब नेह लागल
तोहरे दुवारे सुख पाईला हो-२
विश्वास अइसन चारनिया में भइले
दुखवा तोहिसे सुनाइला न हो
तोहके गांव गल्ली गल्ली......$$$$$
तोहके गांव गल्ली गल्ली पाईला ये मैया
दुअरे आईना तोहार गुनवा गाइला न हो
चढ़ल जाये ना पहड़वा गोहराइला न हो- २

मन अशांत बा मन मे तरह तरह के तनाव बाटे पता ना माई पूजा स्वीकार करी की ना करीह। हमरा पर कृपा करि की नाही करी। लेकिन ई जानके की हमरा शीतला के सवारी बैशाख नन्दन बाने

गदहा तोहार जब जनली सावरिया
मनवा के अपना मना लिहली हो-२
हमरो पर करबू कृपा आस जागल
बिश्वास मन मे बना लिहनी हो
एहि आसरा में गाइला.....$$$$
एहि आसरा में गाइला मनाइला
ये मैया दुअरे आईला तोहरे गुनवा गाइला न हो
चढ़ल जाये ना पहड़वा गोहराइला न हो- २

शीतला मईया के कुछ धाम बड़ा प्रमुख बानस उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के पास कौशाम्बी जिला में कड़ावासनी माता के मंदिर बनारस में
काशी में गंगा जी के किनारे शीतला माँ के मंदिर जौँनपुर में शीतला धाम चौकिया

देखनी अगलपूरा देखनी चौकियां
काशी में गंगा के तिरवा है माँ-२
गुनवा तोहार माई गाके सेवकवा
बिगड़ करम बनावे हो माँ
कड़ावासनी के हाजरी ......$$$$
कड़ावासनी के हाजरी लगाइला ये मैया
दुवारे आईना तोहार गुनवा गाइला न हो
चढ़ल जाये ना पहड़वा गोहराइला न हो- २

तोहके बार बार धाइला मनाइला ये मईया
दुअरे आईला तोहार गुनवा गाईला न हो
चढ़ल जाये ना पहड़वा गोहराइला न हो- २






मंगलवार, 23 नवंबर 2021

लोकतंत्र जय लिखी तख्तियाँ कहाँ गईं प्रस्तुति - डॉ अक्षय पाण्डेय ग़ाज़ीपुर

#लोकतंत्र_जय_लिखी_तख्तियाँ_कहाँ_गईं

~।।वागर्थ।। ~
प्रस्तुति ...
________________________________________________

अक्षय पाण्डेय जी के नवगीत कथ्य , शिल्प , भाव आदि स्तरों पर सशक्त और संपुष्ट नवगीत हैं । उनकी दृष्टि बिल्कुल स्पष्ट है , उन्हें अपने नवगीतों में जो कहना है वो कहकर ही रहते हैं । उनके कुछ गीत संवाद शैली में हैं । नवीन व विशिष्ट प्रयोग आपके गीतों की विशेषता है , जिनमें पंक्तियों का विन्यास बिल्कुल अलग तरह से है । सामान्यतः गीत में तुक का निर्वहन भी हो जाए और भाव स्खलन भी न हो , इस कवायद से सभी रचनाकार गुजरते ही हैं किन्तु अक्षय पाण्डेय जी के नवगीत ' बाढ़ का पानी ' में तीन -तीन तुकों का निर्वाह बेहद सहजता से हुआ है न कि सायास । नवीन शिल्प गढ़ने और साधने की अद्भुत क्षमता का दस्तावेज है ये दुर्लभ प्रयोग ।
खुलते बिम्ब , नवीन प्रतीक योजना समृद्ध भाषा का प्रयोग तो आप सभी इनके गीतों में स्वयं ही देख रहे हैं उस पर बहुत जियादः न कहूँगी ।
जो कहना है वो ये कि नवगीत तो खूब लिखे जा रहे हैं और कहीं -कहीं थोक में लिखे जा रहे हैं किन्तु नवगीत विधा के अवयवों में सामाजिक सरोकारिता का जो प्रमुख अवयव है वो वहाँ कितना विद्यमान है। कुछ चुनिंदा नाम ही समाज में , सत्ता द्वारा हो रही अनैतिकता के प्रति सजग हैं व मुखर होकर प्रतिरोध भी कर रहे हैं । अक्षय पाण्डेय जी उनमें से एक हैं ।
वागर्थ आपको उत्तम स्वास्थ्य व समृद्ध साहित्यिक जीवन हेतु
हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता है ।

प्रस्तुति
~।। वागर्थ ।।~
सम्पादक मण्डल

________________________________________________

(१)

अरे ! तुम कैसे हो 'महराज' ?
—————————————

घर में लाश
हास चेहरे पर
तुमको तनिक न लाज
अरे ! तुम कैसे हो 'महराज' ?

'अकबर'
बजा रहा है बाजा ,
नाच रहा
'मुल्ला दो-प्याजा' ,
राजा के गिरने का मतलब
गिरता देश-समाज ।
अरे ! तुम कैसे हो 'महराज' ?

ज्यादे खोया
'औ' कम पाया ,
'अच्छे दिन' की है
यह माया ,
छाया छोटी धूप बड़ी है
समय बहुत नासाज़ ।
अरे ! तुम कैसे हो 'महराज' ?

सबके भीतर
बैठा है डर ,
सरेआम जब
लेकर खंजर , 
अम्बर ही पर कतर रहा, तब 
कौन भरे परवाज़ । 
अरे ! तुम कैसे हो 'महराज' ? 

जनता अपनी 
बनी बलूची , 
लम्बी दिखती 
दुख की सूची , 
ऊँची लहर , नाव जर्जर है 
रामभरोसे आज  । 
अरे ! तुम कैसे हो 'महराज' ? 

(२)

वह तोड़ती पत्थर
---------------------

चिलचिलाती धूप सिर पर 
जून का मंजर  ;
गुरु हथौड़ा हाथ-ले वह 
तोड़ती पत्थर । 

एक बेघर ज़िन्दगी यह 
है यहाँ, कल वहाँ होगी, 
कौन जाने क्या ठिकाना 
आँधियों में कहाँ होगी , 
ज़िन्दगी का है वज़न बस 
एक तिनका भर । 

गर्म लोहा खौलता हो
और उठते बुलबुले हों , 
घूरतीं नज़रें कि जैसे 
हिंस्र पशु के मुँह खुले हों , 
'श्याम तन, भर बँधा यौवन ' 
है इसी का डर । 

बंदिशें हैं , है नहीं परवाज़
पाँखों में जहाँ पर , 
थूकता आकाश हँस कर 
तिमिर आँखों में जहाँ पर , 
ओढ़ कर है स्वप्न सोया
भूख की चादर । 

हवा पानी भूमि अम्बर 
पक्ष में कोई नहीं है , 
एक कुचली आग भीतर 
मार खा रोई नहीं है , 
उठ रहा हर चोट पर 
प्रतिरोध का अब स्वर । 

(३)      

'वीटो' वाली महाशक्तियाँ कहाँ गयीं 
-----------------------------------------

'लोकतन्त्र-जय' लिखी तख़्तियाँ 
कहाँ गयीं । 
'वीटो' वाली महाशक्तियाँ 
कहाँ गयीं । 

बदहवास है मौसम 
बहुत अन्धेरा है , 
कहाँ छिपा है सूरज 
कहाँ सबेरा है, 
जनहित-चिन्तक आर्षवाणियाँ 
कहाँ गयीं । 

कन्धों पर रिश्ते ढोती 
दीवार कहाँ , 
घर है पर घर के भीतर 
वो प्यार कहाँ , 
खुली हुई ख़ुश-फ़हम खिड़कियाँ 
कहाँ गयीं । 

नहीं रहा अब 
पहले जैसा वक्त हरा , 
रंगो पर ख़तरा है
फूलों पर ख़तरा ,
पंख-जली अधमरी तितलियाँ 
कहाँ गयीं ।

'दारी' 'अंग्रेजी' में 
फ़र्क़ नहीं होता , 
आँसू की भाषा में
तर्क नहीं होता ,
अमरीका की आज गोलियाँ 
कहाँ गयीं । 
 
(४)

बुद्ध और बन्दूक
--------------------

दूर खड़ा जग 
देख रहा है 
बनकर बहरा मूक  ;
तोड़ बुद्ध को 
तालिबान अब लिये खड़ा बन्दूक । 

इतिहासों के जले हुए 
फिर पन्ने बोल रहे , 
टूटे हुए तथागत के 
सब टुकड़े डोल रहे , 
बोलेगी कब ज़ुबाँ हमारी 
ऐसे में दो टूक । 

बारूदी है गन्ध हवा की 
मिट्टी खून-सनी , 
साँसों का मधुमास मर गया 
इतने हुए धनी , 
जले ठूँठ पर बैठी कोयल 
नहीं भरेगी कूक । 

आस भुवन भर, नेह गगन भर 
अपना बचा रहे , 
मन भर जीवन और नयन भर
सपना बचा रहे , 
करें जतन जो बचे अमन की 
प्यारी-सी सन्दूक ।

(५)

जीते आज किसान
------------------------

खेतों में बिखरा सत्ता का
फटा हुआ फरमान  ;
सड़कें जीतीं, संसद हारी 
जीते आज किसान । 

फिर जुलूस में टूटा हुआ  
मुखौटा आज मिला , 
उल्टे पाँव भागता राजा 
बिन सरताज़  मिला , 
सबने माना जोकर का यह 
अभिनय था बेजान । 

चीखों ने फिर शीशमहल का
फाटक तोड़ा है , 
और भीड़ ने सही दिशा में 
रथ को मोड़ा है , 
जहाँ रात है वहीं चाहिए 
हँसता हुआ विहान । 

हर चेहरे की पर्त-पर्त 
सच्चाई, खोलेगा , 
बहुत दिखाया रूप-रंग 
अब दर्पन बोलेगा , 
सत्ता बोती कीलें 
ये बोते हैं गेंहूँ-धान । 

इनके खून-पसीने से ही 
मिट्टी काली है , 
इनके होने से सबके 
गालों पर लाली है , 
यही अन्नदाता हैं सच में 
धरती के भगवान । 

(६)

बाढ़ का पानी 
-----------------

कट रहा तट
बढ़ रहा हँस बाढ़ का पानी
विवश है ज़िंदगानी ।

नाव रह-रह काँपती है
लग रहा डर , 
और उन्मन दिख रहे हैं 
आज धीवर , 
घट रहा तट
चढ़ रहा हँस बाढ़ का पानी
गई मिट सब निशानी । 

क्या हुआ, कैसे हुआ 
किसने ख़ता की , 
गाँव में चर्चा 
कुपित जल-देवता की ,
फट रहा तट 
गढ़ रहा हँस बाढ़ का पानी 
दुखद सर्पिल रवानी । 

छोड़ कर घर जा रहा है 
लोक - जीवन , 
नीलकंठी रो रही है
रो रहा घन ,
हट रहा तट 
पढ़ रहा हँस बाढ़ का पानी 
विशद दुःख की कहानी । 

(७)

दादुर बोले ताल किनारे 
----------------------------

उमड़ घुमड़ बरसे घन कारे  , 
दादुर बोले ताल किनारे । 

बारिश ने 
मर्यादा तोड़ी , 
फिर गरीब की 
बाँह मरोड़ी , 
सस्मित चूम रही महलों को 
झोपड़ियों को थप्पड़ मारे । 
उमड़ घुमड़ बरसे घन कारे  , 
दादुर बोले ताल किनारे । 

बारिश ने 
रच दी बर्बादी , 
चूल्हे की 
सब आग बुझा दी , 
आँखों में टपके अँधियारा 
भूख पेट पर काजल पारे । 
उमड़ घुमड़ बरसे घन कारे  , 
दादुर बोले ताल किनारे । 

बारिश ने 
सब धुली कहानी , 
भूखे सोये 
पोश-परानी , 
हुई  बहुत बदरंग ज़िन्दगी 
कौन सजाये, कौन सँवारे । 
उमड़ घुमड़ बरसे घन कारे  , 
दादुर बोले ताल किनारे । 

(८)

नाटक जारी है 
——————-

एक अंक बीता 
दूजे की अब तैयारी है  ;
खुले मंच पर खड़ा विदूषक
नाटक जारी है ।

रोज़ यहाँ पर विविध चरित
अभिनीत हो रहे हैं , 
लोग बहुत क़म मुदित 
अधिक भयभीत हो रहे हैं , 
'देश-काल' के संग जीना 
कहता लाचारी है  । 

जब चाहे , जैसा चाहे वह
रूप बदलता है , 
स्वर्ण हिरन बन, राम 
साधु बन, सीता-छलता है , 
कई छद्म जीने वाला वह 
'शिष्टाचारी' है । 

दर्शक की आँखों में इक
मनभावन ख़्वाब जगे , 
विरच रहा है इन्द्रजाल 
जो कथा अनूप लगे ,
बना रहा रुपये को मिट्टी 
अज़ब मदारी है । 

रंग-मुखौटे, चेहरे की
पहचान छिपाते हैं , 
और आइने, दाग़-दाग़ 
सब सच बतलाते हैं , 
कितना कौन सदाचारी 
कितना व्यभिचारी है । 

(९)

प्रेमचन्द के कथा-समय में
--------------------------------

प्रेमचन्द के कथा-समय में 
जीती है अम्मा । 

माँ की आँखें ढूँढ रहीं हैं 
होरी वाला गाँव , 
झूरी के दो बैल कहाँ 
पंचों का कहाँ नियाँव , 
गये समय से नये समय को 
सीती है अम्मा । 

ठाकुर का वह कुआँ 
जहाँ मानवता मरती है , 
और भगत के महामन्त्र से 
खुशियाँ झरतीं हैं , 
अनबोले रिश्तों की पीड़ा 
पीती है अम्मा । 

घर में एक सुभागी जैसी 
बिटिया चाह रही , 
बुधिया को ना मिला कफ़न
मन में घन आह रही , 
इसीलिए सबकी प्यारी 
मनचीती है अम्मा । 

ईदगाह में हामिद की 
वत्सलता मोल रही , 
बूढ़ी काकी से अपने 
सपनों को तोल रही , 
कितनी भरी हुई है 
कितनी रीती है अम्मा । 
       
(१०)

चलो बादल निरेखें 
----------------------

सुनो रानी ! 
मौलश्री की पत्तियों से
झड़ रहा पानी ;
चलो बादल निरेखें । 

झूमता आषाढ़ 
बाहर गा रहा है,
और भीतर
नेह का स्वर छा रहा है,
सुनो रानी ! 
भूलकर अपने गहन 
दुख की कहानी 
हो मुदित कुछ पल, निरेखें । 

बज रहा मौसम 
सुभग संतूर बनकर, 
खिड़कियों से आ रही 
आवाज छनकर, 
सुनो रानी  ! 
यह चतुर्दिक नाचती
कल-कल रवानी 
चलो सस्मित जल निरेखें । 

आम हँस कर 
नीम से बतिया रहा है, 
शाख पर बैठा सुआ 
हर्षा रहा है, 
सुनो रानी । 
उड़ रहा आँचल धरा का 
हरित - धानी 
खेत, नद, जंगल निरेखें । 

सौ घुटन जीता हुआ 
जीवन शहर का, 
वही जगना , वही सोना 
बन्द घर का, 
सुनो रानी ! 
हो रही बदरंग कितनी 
ज़िन्दगानी, 
प्रकृति का मंगल निरेखें । 

            ooo

               - अक्षय पाण्डेय
           
 ________________________________________________  
         

             
संक्षिप्त - परिचय
_______________

नाम -  अक्षय पाण्डेय
पिता का नाम - श्री गुप्तेश्वर नाथ पाण्डेय
माता का नाम - स्व. रामदेई पाण्डेय
जन्मतिथि - 01.04.1978
जन्म-स्थान - रेवतीपुर, जनपद - गाजीपुर
                   (उ.प्र.) ,पिन-232328
शैक्षिक योग्यता - एम.ए.(हिन्दी), बी.एड.
                        पी-एच.डी., नेट ।
प्रकाशन - वागर्थ, हंस, अक्षरा, भाषा, उत्तरायण, शब्दिता, समकालीन सोच,स्वाधीनता, चेतना-स्रोत, नव किरण 
       दैनिक जागरण, जन संदेश.... आदि हिन्दी की पत्र-पत्रिकाओं के साथ समकालीन भोजपुरी साहित्य, पाती, कविता, भोजपुरी लोक, भोजपुरी माटी, सँझवत एवं भोजपुरी जंक्शन जैसी पत्रिकाओं में नवगीत, समकालीन कविता एवं समीक्षात्मक आलेख प्रकाशित।
   - गुनगुनाती शाम, हम असहमत हैं समय से, ओ पिता, ईक्षु एकादश  एवं बइठकी जैसे नवगीत संकलनों में नवगीत संकलित।
   - “हम न हारेंगे अनय से “ नवगीत संग्रह प्रकाशधीन

सम्प्रति -- प्रवक्ता - हिन्दी
इण्टर काॅलेज करण्डा, गाजीपुर(उ.प्र.)

वर्तमान पता -   प्रथम मकान
                     शिवपुरी कालोनी, प्रकाश नगर
                     (फेमिली बाजार के नजदीक)
                      गाजीपुर - 233001
                         (उ.प्र.)
   
   स्थायी पता - रेवतीपुर (रंजीत मोहल्ला)
          गाजीपुर - 232328 (उ.प्र.)



सोमवार, 8 नवंबर 2021

में होश में था तो फिर उस पे मर गया कैसे ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे- रचना- कलाम चांदपुरी

में होश में था तो फिर उस पे मर गया कैसे
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था

कुछ उसके दिल में लगावट जरुर थी वरना-३
वो मेरा हाथ वो मेरा हाथ
वो मेरा हाथ दबा कर गुजर गया कैसे- 2
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था


जरुर उसकी तवज्जो की रहबरी होगी-३
नशे में था तो में अपने ही घर गया कैसे-२
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था

जिसे भुलाए कई साल हो गए कामिल-३
में आज उसकी गली से गुजर गया कैसे-२
ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे
में होश में था तो फिर उसपे मर गया कैसे


गायक कलाकार- जनाब मेंहदी हसन साहब
रचना- कलाम चांदपुरी






गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021

एक तुम्ही आधार सदगुरु एक तुम्ही आधार पंडित श्री राम शर्मा आचार्य शांति कुंज हरिद्वार

एक तुम्ही आधार सदगुरु एक तुम्ही आधार,

जब तक मिलो न तुम जीवन में,
शांति कहा मिल सकती मन में,
खोज फिरा संसार सदगुरु,
एक तुम्ही आधार सतगुरु एक तुम्ही आधार।।


कैसा भी हो तेरन हारा,
मिले न जब तक शरण सहारा,
हो न सका उस पार सद्गुरु,
एक तुम्ही आधार,
एक तुम्ही आधार सतगुरु,
एक तुम्ही आधार।।


हम आये है द्वार तुम्हारे,
अब उद्धार करो दुःख हारे,
सुनलो दास पुकार सदगुरु,
एक तुम्ही आधार,
एक तुम्ही आधार सतगुरु,
एक तुम्ही आधार।।


छा जाता जग में अधियारा,
तब पाने प्रकाश की धारा,
आते तेरे द्वार सदगुरु,
एक तुम्ही आधार,
एक तुम्ही आधार सतगुरु,
एक तुम्ही आधार



सोमवार, 11 अक्टूबर 2021

साथ छूटेगा कैसे मेरा आपका। जब मेरा दिल ही घर बन गया आपका- पयाम सईदी गायक- जनाब चंदन दास

साथ छूटेगा कैसे मेरा आपका।
जब मेरा दिल ही घर बन गया आपका।।

आप आये बड़ी उम्र है आपकी।
बस अभी नाम मैंने लिया आपका ।।

डर है मुझको न बदनाम कर दे कहीं।
इस तरह प्यार से देखना आपका।।

आप की इक नज़र कर गई क्या असर।
मेरा दिल था मेरा हो गया आपका।।






शनिवार, 9 अक्टूबर 2021

देख कृष्ण के नील वदन को, नीलगगन मुस्कुरा रहा था l केशव के सिर मोरमुकुट लख, कामदेव भी लजा रहा था - राजेश कुमार सिंह


देख कृष्ण के नील वदन को,
नीलगगन मुस्कुरा रहा था l
केशव के सिर मोरमुकुट लख,
कामदेव भी लजा रहा था l

अधरों की लाली को लख कर,
लाल कमल मुश्काया है l
मुरलीघर की मुरली धुन सुन,
स्वर सरगम संग गाया है ll

श्री कृष्णा का पीत बसन भी,
मां का आँचल सजा रहा था l
देख कृष्ण के नील वदन को,
नीलगगन मुस्कुरा रहा था l

गोकुल मथुरा दोनों मिलकर ,
बरसाने को रिझा रहे थे l
वृन्दावन के कदम वृक्ष पर,
धूम कन्हैया मचा रहे थे ll

झूम रहीं थीं, राधा रानी,
प्यारा बंसी बजा रहा था l
देख कृष्ण के नील वदन को,
नीलगगन मुस्कुरा रहा था l

गोपी के संग रास रचाता,
ग्वाल बाल संग गाता है l
दूध दही और मख्खन, मिश्री,
बड़े चाव से ख़ाता है ll

गोप गोपियों का पागलपन,
बनवारी को नचा रहा था ll
देख कृष्ण के नील वदन को,
नीलगगन मुस्कुरा रहा था l

ठुमुक ठुमुक और घूम धूम कर,
मोहन कोलाहल करते l
मा यशुदा को कृष्ण कन्हैया
गोदी आ आलिंगन करते ll

लाला के कदमो को छू कर,
पायल खुद को बजा रहा था ll
देख कृष्ण के नील वदन को,
नीलगगन मुस्कुरा रहा था ll

©®राजेश कुमार सिंह "श्रेयस"
लखनऊ, उप्र


वैसे मै अगेय कविताएं लिखता हुँ.. लेकिन मेरी यह रचना लयबद्ध और गेय है.ऐसा मुझे लगता है..



गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021

चल चली माई के मन्दिरवा ये धनिया की पूरा होई आस- मनोज तिवारी मृदुल

चल चली माई के मन्दिरवा ये धनिया की पूरा होई आस-2
पूरी मन के मुरदिया कि पूरा हाई आस।।

मैया की चुनरी चंडावल जाई ललकी।
चढ़ल मिल पहड़ावा की पूरा होई आस।।

सपरत दिनवा बीतल जात धनिया-2
बढ़ल जात दिने दिन बड़ी परशानिया-2
सबका के पहले शीतला भवनवा कि पूरा होई आस
पूरी मन के मुरदिया कि पूरा हाई आस।।

जइबे बिहार जहवा धावे सिवनवा 2
थावे भवानी के सुंदर भवनवा 2
थावे भवानी के सूंदर भावना
जुटे ला पूर्वांचल बिहार के अंगनवा कि पूरा होले आस।
पूरी मन के मुरदिया कि पूरा हाई आस।।

मन कामशेवर इलाहाबाद जइबो 2
भोला स्वरूप देखी मनसा पुरइबो 2
मैहर विंध्याचल वैष्णो करत दर्शनवा कि पूरा होई आस
होइहे मन के मुरदिया कि पूरा हाई आस।
पूरी मन के मुरदिया कि पूरा हाई आस।।

मईया के कोढ़िया पुकारे ली सखिया कि पूरा होई आस
मईया के अधंरा पुकारे ली सखिया कि पूरा होई आस
मईया दिहे सूंदर काया की पूरा होइ आस।।

चल चली माई के मन्दिरवा ये धनिया की पूरा होई आस-2
पूरी मन के मुरदिया कि पूरा हाई आस।।



बुधवार, 6 अक्टूबर 2021

गुरुवर तुम्हीं बता दो, किसकी शरण में जायें। किसकी चरण में गिरकर,अपनी व्यथा सुनायें॥

गुरुवर तुम्हीं बता दो, किसकी शरण में जायें।
किसकी चरण में गिरकर,अपनी व्यथा सुनायें॥

अज्ञान के तिमिर ने, चारों तरफ से घेरा।
क्या रात है प्रलय की, होगा नहीं सवेरा।
पथ और प्रकाश दो तो, चलने की शक्ति पायें।
गुरुवर तुम्ही बता.....

जीवन के देवता का, करते रहे निरादर।
कैसे करें समर्पित, जीवन की जीर्ण चादर।
यह पाप की गठरिया, क्या खोलकर दिखायें॥
गुरुवर तुम्ही बता दो किसकी...

माना कपूत हैं हम, क्या रुष्टï रह सकोगे।
मुस्कान प्यार अमृत, क्या दे नहीं सकोगे।
दाता तुम्हारे दर से, जायें तो किधर जाय।
गुरुवर तुम्ही बता दो...….

कभी काम क्रोध बनकर कभी माया लोभ बनकर
इन दानवों से कैसे अपना गला छुड़ाये ।।

गुरुवर तुम्ही बता दो
किसकी.........



शनिवार, 2 अक्टूबर 2021

भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जन्म दिवस विशेष- अज्ञात

याद रखियेगा ,
2 अक्टूबर को चरित्रवान निष्ठावान देशभक्त... पूर्व प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री जी.. की जयन्ती है।
जन्म 2 अक्टूबर 1904
जन्म भूमि मुग़लसराय, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 11 जनवरी, 1966
मृत्यु स्थान ताशकंद, रूस (अब उज़बेकिस्तान) मृत्यु कारण अज्ञात
अभिभावक श्री शारदा प्रसाद और श्रीमती रामदुलारी देवी
पति/पत्नी ललितादेवी
संतान 6 (चार पुत्र- हरिकृष्ण, अनिल, सुनील व अशोक और दो पुत्रियाँ- कुसुम व सुमन) नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि भारतीय राजनेता व देश के दूसरे प्रधानमंत्री
पार्टी भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस
पद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री
कार्य काल 9 जून, 1964 से 11 जनवरी, 1966
शिक्षा स्नातकोत्तर
विद्यालय काशी विद्यापीठ
भाषा हिंदी, अंग्रेज़ी
पुरस्कार-उपाधि भारत रत्न
अन्य जानकारी इनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। अत: सब उन्हें 'मुंशी जी' ही कहते थे। बाद में उन्होंने राजस्व विभाग में लिपिक (क्लर्क) की नौकरी कर ली थी। लालबहादुर की माँ का नाम 'रामदुलारी' था। परिवार में सबसे छोटा होने के कारण बालक लालबहादुर को परिवार वाले प्यार से नन्हें कहकर ही बुलाया करते थे। जब नन्हें अठारह महीने का हुआ तब दुर्भाग्य से पिता का निधन हो गया। उसकी माँ रामदुलारी अपने पिता हजारीलाल के घर मिर्ज़ापुर चली गयीं। कुछ समय बाद उसके नाना भी नहीं रहे। बिना पिता के बालक नन्हें की परवरिश करने में उसके मौसा रघुनाथ प्रसाद ने उसकी माँ का बहुत सहयोग किया। ननिहाल में रहते हुए उसने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद की शिक्षा हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ में हुई। काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलते ही प्रबुद्ध बालक ने जन्म से चला आ रहा जातिसूचक शब्द श्रीवास्तव हमेशा के लिये हटा दिया और अपने नाम के आगे शास्त्री लगा लिया। इसके पश्चात् 'शास्त्री' शब्द 'लालबहादुर' के नाम का पर्याय ही बन गया।
लाल बहादुर शास्त्री किसानों को जहां देश का अन्नदाता मानते थे, वहीं देश के सीमा प्रहरियों के प्रति भी उनके मन में अगाध प्रेम था जिसके चलते उन्होंने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया। लाल बहादुर शास्त्री एक प्रसिद्ध भारतीय राजनेता, महान् स्वतंत्रता सेनानी और जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। वे एक ऐसी हस्ती थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में देश को न सिर्फ सैन्य गौरव का तोहफा दिया बल्कि हरित क्रांति और औद्योगीकरण की राह भी दिखाई। शास्त्री जी किसानों को जहां देश का अन्नदाता मानते थे, वहीं देश के सीमा प्रहरियों के प्रति भी उनके मन में अगाध प्रेम था जिसके चलते उन्होंने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया।



मंगलवार, 3 अगस्त 2021

चलो चलें अब अपने गाँव चलो चलें अब अपने गाँव- रचना- लव तिवारी

चलो चलें अब अपने गाँव,
चलो चलें अब अपने गाँव

बचपन जहाँ बुलाता है,
वह दौर ही मन को भाता है।
आज मतलबी इस दुनिया से
जी अपना घबराता है।।
याद बहुत आता है मुझको
उस बूढ़े पीपल की छाँव।
चलो चलें अब अपने गाँव, चलो चलें ------ गाँव।।

यही कहानी सब कहते
क्या-क्या नहीं दर्द सहते।
सड़को औ चौराहो पर
कैसे गंवईं जन है रहते ।।
याद सताती मातृभूमि की
यहाँ कर लिये खूब पड़ाव।
चलो चलें अब अपने गाँव, चलो------ गाँव।।

जहाँ बाग में मीठे आम
वहाँ की प्यारी होती शाम।
मेरे बाबू जी किसान हैं
खेतों में करते हैं काम।।
दियारे में गउवें चरती हैं
जहाँ नदी में चलती नाव।
चलो चलें अब अपने गाँव, चलो---------–-गाँव।।

शहर की चकाचौंध खोटी है
अपने घर मे भी रोटी है।
शहरों की औकात ही कितनी
माँ की ममता से  छोटी है ।।
मुझे मिलेगा स्वर्ग वहीं पर
जहाँ पड़े मेरी माँ के पाँव।
चलो चलें अब अपने गाँव, चलो ----------------गाँव।।

अपना गाँव सजायेंगे हम
सुंदर उसे बनायेगे हम।
मेरा हृदय गाँव में बसता
लोगों को बतलायेंगे हम।।
वही हमारी कर्मभूमि है
जहाँ हमारा गाँव-गिरांव।
चलो चलें अब अपने गाँव, चलो -----------------गाँव।।

रचना- लव तिवारी
विशेष सहयोग - आदरणीय गुरु जी "शिब्बू गाजीपुरी"
ग्राम पोस्ट- युवराजपुर जिला- ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश २३२३३२




गुरुवार, 22 जुलाई 2021

अंबेडकर को लेकर बहुत से मिथक हैं जिन्हें सच माना जाता है।- अज्ञात

अंबेडकर को लेकर बहुत से मिथक हैं जिन्हें सच माना जाता है। कल एंड टीवी पर शुरू होने वाले अंबेडकर पर आधारित शो का टीज़र मित्र ने भेजा। कल उस मित्र से इस संदर्भ में बात हो रही थी तो सोचा क्यों न उन मिथकों और उनकी सच्चाई पर एक सार्वजनिक पोस्ट की जाए। आइए जानते हैं क्या हैं वो मिथक और क्या है सच्चाई-

●मिथक- अंबेडकर बहुत मेधावी थे।

सच्चाई- अंबेडकर ने अपनी सारी शैक्षणिक डिग्रियाँ तीसरी श्रेणी में पास की।

●मिथक- अंबेडकर बहुत गरीब थे।

सच्चाई- जिस ज़माने में लोग फोटो तक नहीं खींचा पाते थे उस ज़माने में अंबेडकर की बचपन की बहुत सी फोटो हैं वह भी कोट पैंट में!

●मिथक- अंबेडकर ने शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिया।

सच्चाई- अंबेडकर के पिता जी ख़ुद उस ज़माने में आर्मी में सूबेदार मेजर थे जो यह बताता है कि उस समय पढ़ने का अधिकार शूद्रों के पास था।

●मिथक- अंबेडकर को पढ़ने नहीं दिया गया।

सच्चाई- उस ज़माने में अंबेडकर को गुजरात बढ़ोदरा के क्षत्रिय राजा सीयाजी गायकवाड़ ने स्कॉलरशिप दी और विदेश पढ़ने तक भेजा और ब्राह्मण गुरु जी ने अपना नाम अंबेडकर भी दिया।

●मिथक- अंबेडकर ने नारियों को पढ़ने का अधिकार दिया।

सच्चाई- अंबेडकर के समय ही 20 पढ़ी लिखी औरतों ने संविधान लिखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया!

●मिथक- अंबेडकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।

सच्चाई- अंबेडकर ने सदैव अंग्रेजों का साथ दिया।भारत छोड़ो आंदोलन की जम कर खिलाफत की। अंग्रेजों को पत्र लिखकर बोला कि आप और दिन तक देश में राज करिए। उन्होंने जीवन भर हर जगह आजादी की लड़ाई का विरोध किया।

●मिथक- अम्बेडकर बड़े शक्तिशाली थे।

सच्चाई- 1946 के चुनाव में पूरे भारत भर में अंबेडकर की पार्टी की जमानत जप्त हुई थी।

●मिथक- अंबेडकर ने अकेले आरक्षण दिया।

सच्चाई- आरक्षण संविधान सभा ने दिया जिसमें कुल 389 लोग थे।अंबेडकर का उसमें सिर्फ एक वोट था। आरक्षण सब के वोट से दिया गया था।

●मिथक- अंबेडकर राष्ट्रवादी थे।

सच्चाई- 1931 में गोलमेज सम्मेलन में गाँधी जी के भारत के टुकड़े करने की बात कर दलितों के लिए अलग दलितस्तान की माँग अंबेडकर ने की थी।

●मिथक- अंबेडकर ने भारत का संविधान लिखा।

सच्चाई- जो संविधान अंग्रेजों के 1935 के मैग्नाकार्टा से लिया गया हो और विश्व के 12 देशों से चुराया गया है। उसे आप मौलिक संविधान कैसे कह सकते हैं? अभी भी सोसायटी एक्ट में 1860 लिखा जाता है।

●मिथक- आरक्षण को लेकर संविधान सभा के सभी सदस्य सहमत थे।

सच्चाई- इसी आरक्षण को लेकर सरदार पटेल से अंबेडकर की कहा सुनी हो गई थी। पटेल संविधान सभा की मीटिंग छोड़कर बाहर चले गये थे, बाद में नेहरू के कहने पर पटेल वापस आये थे।

सरदार पटेल ने कहा कि जिस भारत को अखण्ड भारत बनाने के लिए भारतीय देशी राजाओं, महराजाओं, रियासतदारों, तालुकेदारों ने अपनी 546 रियासतों को भारत में विलय कर दिया जिसमें 513 रियासतें क्षत्रिय राजाओं की थी। इस आरक्षण के विष से भारत भविष्य में खण्डित होने के कगार पर पहुँच जाएगा और आज हम वैसा होते देख भी रहे हैं।

●मिथक- अंबेडकर स्वेदशी विचारधारा के थे।

सच्चाई- देश के सभी नेताओं का तत्कालीन पहनावा भारतीय पोशाक धोती -कुर्ता, पैजामा-कुर्ता, सदरी व टोपी,पगड़ी, साफा, आदि हुआ करता था। गाँधी जी ने विदेशी पहनावा व वस्तुओं की होली जलवाई थी। यद्यपि नेहरू, गाँधी व अन्य नेता विदेशी विश्वविद्यालय व विदेशों में रहे भी थे फिर भी स्वदेशी आंदोलन से जुड़े रहे। वहीं अंबेडकर की कोई भी तस्वीर भारतीय पहनावे में देखने को नहीं मिलती है। अंबेडकर अंग्रेजियत के हिमायती थे।

नोट- मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाना नहीं है बल्कि सच्चाई बयां करने की कोशिश करना है।तथ्यों की जानकारी आप स्वयं भी प्राप्त कर सकते हैं।






शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

भयानक व लाइलाज़ बीमारी मोटर न्यूरॉन डिजीज एवं मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी - लव तिवारी

Motor Neurone Disease
स्टेफेन हॉकिंग्स ( फिजिक्स वैज्ञानिक) ऐसा नाम जो एक भयानक बीमारी मोटर न्यूरॉन डिसीज़ से प्रभावित थे। आज इसी तरह के बीमारी से ग्रसित एक छोटी बच्ची जो जिंदगी और मौत के बीच मे सांसे ले रही है उसके परिजनों से मिलना हुआ। बच्ची ने पिछले 14 दिनों से अन्न जल त्याग रखा है।

मानसी वर्मा
उम्र- 8 वर्ष
माता- श्री मति रिंकी वर्मा
पिता- श्री सन्नी वर्मा
वर्तमान पता- मुक्तिपुरा मरकिंगंज ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश
स्थाई पता - ग्राम रुकुनदिनपुर पोस्ट नोनहरा ग़ाज़ीपुर

Motor Neurone Disease  में डॉक्टरों और इंटरनेट के द्वारा प्राप्त जानकारियो से यह पता चलता है कि इस बीमारी में नसे सुख जाती है जिससे ब्लड का संचार शरीर मे न होने के कारण मनुष्य कुछ ही वर्ष में मरणासन अवस्था को प्राप्त कर लेता है। सही मायने में ये कहिये की इस जैसी खतरनाक बीमारियों का उपचार अभी तक मेडिकल साइंस के पास नही है लेकिन विदेशों में इस तरह के भयानक बीमारी पर शोध किये जा रहे है। 

इस तरह की एक और भयानक बीमारी जिसका नाम है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी है, इस बिमारी के भी लगभग 9 प्रकार है जिसमे DMD Duchene Muscular Dystrophy एवं LGMD Limb Gard Muscular Dystrophy के मरीज ज्यादा संख्या में है। इंटरनेट और पिछले कई वर्षों तक इस बीमारी से ग्रसित होने के कारण इस बीमारी के प्रकार और उसकी कुछ जानकारी हमें भी ज्ञात है। जैसा कि एक आप सब ने सुना होगा कि एक छोटी बच्ची को सोशल मीडिया कंपेन से इकट्ठा करके 16.5 करोड़ की दवा के माध्यम से उपचार हुआ है और वो पहले से बेहतर है। हमें ये आशा है  कि भविष्य हमारे लिए एक बेहतर इलाज के साथ सुखद परिणाम वाला होगा।

भारत या अन्य कई देशों के पास इन जैसे खतरनाक बीमारियों से निपटने के कोई उपाय नही है। और रोगी के परिजन कुछ लुटेरों डॉक्टरों के झांसे में आ कर लाखों रुपये खर्च कर देते है। पैसा खर्च के साथ अगर रोगी को आराम मिले तो पैसे का सदुपयोग समझ मे आता है। 

बीमारी से प्रभावित रोगी के परिजन के एक सवाल ने मुझे इस पोस्ट को लिखने पर मजबूर कर दिया। उसने मुझसे पूछा कि कोई ऊपरी चक्कर तो नही है। परिजनों को फिर से  यह बात समझा रहा हूँ कि यह एक भयानक बीमारी है औऱ फर्जी डॉक्टरों के साथ आप लोगों झाड़ फूक टोना ऊपरी चक्कर के चक्कर मे आकर अपने पैसे का दुरुपयोग न करें।

भारतीय प्राइवेट लुटेरे डॉक्टर के सम्बंध में भी एक बात कहूंगा। वो अच्छी तरह से जानते है कि इस तरह के बड़े बीमारी का उपचार उसके पास या किसी के पास नही फिर भी वो आप को मूर्ख बनाकर पैसा ऐठते है। कोरोना काल मे आप सभी ने प्राइवेट हॉस्पिटल और डॉक्टरों के आतंक का रूप रेखा देख चुके है।।

परिजन क्या करें।- हर परिजन अपने बच्चे को बचाने का अंत समय तक प्रयास करता है। लेकिन प्रयास का परिणाम अगर सही न हो तो प्रयास करना मेरी नजर में सही नही है। रोगी के परिजनों को यह सुझाव है भारत के बड़े सरकारी अस्पतालों के विशेषज्ञ के सम्पर्क में आप रह सकते है जैसे ऐम्म्स दिल्ली, नीमांस बेंगलुरु, सी एम सी वेल्लोर, कोई कि बीमारी के संभावित कोई भी जानकारी और उनके उपचार के सम्बंध की जनकारी आपको यही से पता लग सकती है।।






बुधवार, 14 जुलाई 2021

हमरी अटरिया पे आजा रे सावरिया देखा देखी बलम होई जाय रे- कुमार सत्यम जी

हम तुम भोले सईया जग है जुलमी
प्रीत को पाप कहते अधर्मी- 2
जग से न कहियो ये बाता बस की
जग सुनिहे तो जुलम हो ई जाय रे

हमरी अटरिया पे आजा रे सावरिया-4
देखा देखी बलम होई जाय रे।
लोग से न कहियो ये बाता बस की
जग सुनिहे तो जुलम हो ई जाय रे।
हमरी अटरिया पे आजा रे सावरिया-4

निस दिन मैं करु तेरी ही पूजा
नयंनो में नही आये कोई दूजा
सरगम,.....
सैया मोरे......
निस दिन मैं करु तेरी ही पूजा
नयंनो में नही आये कोई दूजा
मानो कसम अगर झुठ बोले हम
चढ़ती जवानी भस्म होई जाय रे

जब तक जवानी तब तक जमाना
चाहे जिसे जी भर के सता लो
सरगम,.....
सैया मोरे......
जब तक जवानी तब तक जमाना
चाहे जिसे जी भर के सता लो
याद रखियो तब कोई न चाहे
जब ये जवानी खत्म हो जाये रे
मोरे अंगनवा में आजा रे सजनवा देखा देखी बलम होई जाय रे।



सोमवार, 5 जुलाई 2021

अब जरूर होगा कोई और दूसरा निगाह में तभी तो आयी कयामत इस हँसते खेलते परिवार में।- लव तिवारी

अब जरूर होगा कोई और दूसरा निगाह में
तभी तो आयी कयामत इस हँसते खेलते परिवार में।।

रिश्ता बनाना अब देखो मज़ाक बन कर रह गया ।
जज़्बात और जीवन की खुशियां खाक बन बन कर गया ।

क्या है षडयंत्र कौन होगा अब अगला शिकारी है।
किस पर होगी अब ये अगली आफत की बम बारी है।।

भगवान तेरा नही मगर ख़ुदा का तो वफादार है।
इस बात वो नही समझेगा जो तेरा कर्ज़दार है।।

इस बिपदा को जो झेला वो दर्द को समझ जायेगा।
उसको बात नही समझ आएगी जो तेरा ही परछाई है।।

रचना - लव तिवारी
05- जुलाई- 2021






शुक्रवार, 25 जून 2021

अनपढों के साथ जिनकी कट गई हो जिंदगी। वो पढ़ो को क्या समझेंगे बात में महान कौन।- लव तिवारी

मन व्यथीत है आज क्यों कल सुनेगा मेरी कौन।
किसकी खता थी यहाँ, और भरेगा जुर्माना कौन।।

अपनों की पहचान में न काम आई डिग्रियां।
मेरे घर को बर्बाद कर रहा, मैं रहा परेशान मौन।।

गैरो पर खर्च करके घर से हिसाब की चाह है।
हकीकत सबके सामने है और बना अंजान कौन।।

सबको पता है अपनी गलती फिर है नदान सब।
गर्दन पर तलवार है तो अब रहा वफादार कौन।।

जो किया वो सामने है फिर नही सबक जीने की।
जिंदगी किसकी रही, और गया शमशान कौन।।

अनपढों के साथ जिनकी कट गई हो जिंदगी।
वो पढ़ो को क्या समझेंगे बात में महान कौन।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- २६- जून-२०२१




मंगलवार, 15 जून 2021

आदत फिर से न बिगड़े अब मेरी। वादों का कोई पक्का नही लगता- लव तिवारी

हर कोई अच्छा नही लगता।
दिल अब बच्चा नही लगता।।

जो थे उनको हम रास नही आये।
अब कोई मुझे सच्चा नही लगता।।

आदत फिर से न बिगड़े अब मेरी।
वादों का कोई पक्का नही लगता।।

मेरी मानो तुम भी सुधर जाओ अब।
इस उम्र में ये सब अच्छा नही लगता।।

बात उसको अगर जो मालूम हो जाये।
मेरी जिंदगी का वो हिस्सा नही लगता।।

रचना- लव तिवारी





बुधवार, 9 जून 2021

ये वायरस मेंरा क़ीमती खजाना ले गया। मौत के साथ अपनो का ठिकाना ले गया।- लव तिवारी

ये वायरस मेंरा क़ीमती खजाना ले गया।
मौत के साथ अपनो का ठिकाना ले गया।।

गली रास्ते और सड़के अब भी है सुनसान।
वो भीड़ भरी जिंदगी का ज़माना ले गया।।

गरीब को अन्न नही, भूख की तड़प को देखों।
उसके बसर के संसाधनों का सहारा ले गया।।

जन्दगी सबको थी प्यारी कुछ थे बस बेपरवाह।
ऐसे मूर्खो के कारण सब कुछ गवाना पड़ गया।।

कुछ के गुनाह तो नही थे माफ़ी के लायक।
कुछ बेगुनाहो को भी इस दौर में जनाजा ले गया।।


रचना- लव तिवारी
दिनांक- ०९-जून-२०२१







बुधवार, 2 जून 2021

शरीर और जीवन से साइकिल की वफादारी थी। आज कल की दुनिया से प्यारी वो जिंदगानी थी।- लव तिवारी

रोज सुबह सायकिल से स्कूल जाया करते थे।
और पैडिल के सहारे रेस लगाया करते थे।।

सफर अपना देर लेकिन दुर्घटनाओं से परे था।
जेब खर्च के साथ सायकिल का खर्च भी खरे था।।

शरीर और जीवन से साइकिल की वफादारी थी।
आज कल की दुनिया से प्यारी वो जिंदगानी थी।।

मौज मस्ती में के साथ हम खूब सायकिल चलाया करते थे।
कभी दोस्तों के तो कभी पापा के संग गांव जाया करते थे

बड़ी गाड़ियों में बैठ कर उस दौर का अनुभव करते है।
देख जमाने की रफ़्तार अब स्वपन में साइकिल से चलते है।

रचना- लव तिवारी 
युवराजपुर ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश