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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

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मंगलवार, 19 सितंबर 2017

गौत्र- गोत्र शब्द का अर्थ होता है वंश । कुल l


गौत्र
यह लेख उन लोगों के लिये है । जो गोत्र प्रणाली को बकवास कहते है । गोत्र शब्द का अर्थ होता है वंश । कुल lineage
गोत्र प्रणाली का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को उसके मूल प्राचीनतम व्यक्ति से जोड़ना है । उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति कहे कि उसका गोत्र भारद्वाज है । तो इसका अभिप्राय यह है कि उसकी पीडी वैदिक ऋषि भारद्वाज से प्रारंभ होती है । या ऐसा समझ लीजिये कि वह व्यक्ति ऋषि भारद्वाज की पीढ़ी में जन्मा है । इस प्रकार गोत्र 1 व्यक्ति के पुरुष वंश में मूल प्राचीनतम व्यक्ति को दर्शाता है ।
ब्राह्मण स्वयं को निम्न
8 ऋषियों ( सप्त ऋषि + अगस्त्य ) का वंशज मानते हैं जमदग्नि । अत्रि । गौतम । कश्यप । वशिष्ठ । विश्वामित्र । भारद्वाज । अगस्त्य ।
उपरोक्त 8 ऋषि मुख्य गोत्रदायक ऋषि कहलाते है । तथा इसके पश्चात जितने भी अन्य गोत्र अस्तित्व में आये हैं
। वो इन्ही 8 में से 1 से फलित हुए हैं । और स्वयं के नाम से गौत्र स्थापित किया । उदाहरण माने कि अंगिरा की 8वीं पीडी में कोई ऋषि क हुए । तो परिस्थितियों के अनुसार उनके नाम से गोत्र चल पड़ा । और इनके वंशज क गौत्र कहलाये । किन्तु क गौत्र स्वयं अंगिरा से उत्पन्न हुआ है ।
इस प्रकार अब तक कई गोत्र अस्तित्व में है । किन्तु सभी का मुख्य गोत्र 8 मुख्य गोत्रदायक ऋषियों में से ही है ।
गोत्र प्रणाली में पुत्र का महत्व जैसा कि हम देख चुके हैं । गोत्र द्वारा पुत्र व उस वंश की पहचान होती है । यह गोत्र पिता से स्वतः ही पुत्र को प्राप्त होता है । परन्तु पिता का गोत्र पुत्री को प्राप्त नही होता । उदाहरण माने कि 1 व्यक्ति का गोत्र अंगिरा है । और उसका 1 पुत्र है । और यह पुत्र 1 कन्या से विवाह करता है । जिसका पिता कश्यप गोत्र से है । तब लड़की का गोत्र स्वतः ही गोत्र अंगिरा में परिवर्तित हो जायेगा । जबकि कन्या का पिता कश्यप गोत्र से था ।
इस प्रकार पुरुष का गोत्र अपने पिता का ही रहता है । और स्त्री का पति के अनुसार होता है । न कि पिता के अनुसार । यह हम अपने दैनिक जीवन में देखते ही हैं । कोई नई बात नहीं !
परन्तु ऐसा क्यों ? पुत्र का गोत्र महत्वपूर्ण । और पुत्री का नहीं । क्या ये कोई अन्याय है ? बिलकुल नहीं ।
देखें । कैसे गुण सूत्र और जीन Chromosomes and Genes
गुण सूत्र का अर्थ है वह सूत्र जैसी संरचना । जो सन्तति में माता पिता के गुण पहुँचाने का कार्य करती है ।
हमने 10वीं कक्षा में भी पढ़ा था कि मनुष्य में 2 3 जोड़े गुण सूत्र होते हैं । प्रत्येक जोड़े में 1 गुण सूत्र माता से । तथा 1 गुण सूत्र पिता से आता है । इस प्रकार प्रत्येक कोशिका में कुल 4 6 गुण सूत्र होते हैं । जिसमें 2 3 माता से व 2 3 पिता से आते हैं ।
जैसा कि कुल जोड़े 2 3 हैं । इन 2 3 में से 1 जोड़ा लिंग गुण सूत्र कहलाता है । यह होने वाली संतान का लिंग निर्धारण करता है । अर्थात पुत्र होगा । अथवा पुत्री ?
यदि इस 1 जोड़े में गुण सूत्र xx हो । तो सन्तति पुत्री होगी । और यदि xy हो । तो पुत्र होगा । परन्तु दोनों में x समान है । जो माता द्वारा मिलता है । और शेष रहा । वो पिता से मिलता है । अब यदि पिता से प्राप्त गुणसूत्र x हो । तो xx मिलकर स्त्री लिंग निर्धारित करेंगे । और यदि पिता से प्राप्त y हो । तो पुल्लिंग निर्धारित करेंगे । इस प्रकार x पुत्री के लिए । व y पुत्र के लिए होता है । इस प्रकार पुत्र व पुत्री का उत्पन्न होना पूर्णतया पिता से प्राप्त होने वाले x अथवा y गुण सूत्र पर निर्भर होता है । माता पर नहीं ।
अब यहाँ में मुद्दे से हटकर 1 बात और बता दूँ कि जैसा कि हम जानते हैं कि पुत्र की चाह रखने वाले परिवार पुत्री उत्पन्न हो जाये । तो दोष बेचारी स्त्री को देते हैं । जबकि अनुवांशिक विज्ञान के अनुसार पुत्र व पुत्री का उत्पन्न होना पूर्णतया पिता से प्राप्त होने वाले x अथवा y गुण सूत्र पर निर्भर होता है । न कि माता पर । फिर भी दोष का ठीकरा स्त्री के माथे मढ दिया जाता है । ये है मूर्खता ।
अब 1 बात ध्यान दें कि स्त्री में गुण सूत्र xx होते हैं । और पुरुष में xy होते हैं । इनकी सन्तति में माना कि पुत्र हुआ ( xy गुण सूत्र ) इस पुत्र में y गुण सूत्र पिता से ही आया । यह तो निश्चित ही है । क्योंकि माता में तो y गुण सूत्र होता ही नहीं । और यदि पुत्री हुई । तो ( xx गुण सूत्र ) यह गुण सूत्र पुत्री में माता व पिता दोनों से आते हैं ।
1. xx गुण सूत्र xx गुण सूत्र अर्थात पुत्री । xx गुण सूत्र के जोड़े में 1 x गुण सूत्र पिता से । तथा दूसरा x गुण सूत्रमाता से आता है । तथा इन दोनों गुण सूत्रों का संयोग 1 गांठ सी रचना बना लेता है । जिसे Cross over कहा जाता है ।
2 .xy गुण सूत्र xy गुण सूत्र अर्थात पुत्र । पुत्र में y गुण सूत्र केवल पिता से ही आना संभव है । क्योंकि माता में y गुण सूत्र है ही नहीं । और दोनों गुण सूत्र असमान होने के कारण पूर्ण Crossover नहीं होता । केवल 5% तक ही होता है । और 95% y गुण सूत्र ज्यों का त्यों intact ही रहता है ।
तो महत्त्वपूर्ण y गुण सूत्र हुआ । क्योंकि y गुण सूत्र के विषय में हम निश्चित हैं कि यह पुत्र में केवल पिता से ही आया है ।
बस इसी y गुण सूत्र का पता लगाना ही गोत्र प्रणाली का एकमात्र उदेश्य है । जो हजारों लाखों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों ने जान लिया था ।
अब तक हम यह समझ चुके हैं कि वैदिक गोत्र प्रणाली य गुण सूत्र पर आधारित है । अथवा y गुण सूत्र को ट्रेस करने का 1 माध्यम है ।
उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का गोत्र कश्यप है । तो उस व्यक्ति में विद्यमान y गुण सूत्र कश्यप ऋषि से आया है । या कश्यप ऋषि उस y गुण सूत्र के मूल हैं ।
चूँकि y गुण सूत्र स्त्रियों में नहीं होता । यही कारण है कि विवाह के पश्चात स्त्रियों को उसके पति के गोत्र से जोड़ दिया जाता है वैदिक हिन्दू संस्कृति में 1 ही गोत्र में विवाह वर्जित होने का मुख्य कारण यह है कि 1 ही गोत्र से होने के कारण वह पुरुष व स्त्री भाई बहिन कहलाये । क्योंकि उनका पूर्वज 1 ही है ।
परन्तु ये थोड़ी अजीब बात नहीं कि जिन स्त्री व पुरुष ने एक दूसरे को कभी देखा तक नहीं । और दोनों अलग अलग देशों में परन्तु 1 ही गोत्र में जन्में । तो वे भाई बहिन हो गये ?
इसका 1 मुख्य कारण 1 ही गोत्र होने के कारण गुण सूत्रों में समानता का भी है । आज की आनुवंशिक विज्ञान के अनुसार यदि समान गुण सूत्रों वाले 2 व्यक्तियों में विवाह हो । तो उनकी सन्तति आनुवंशिक विकारों का साथ उत्पन्न होगी ।
ऐसे दंपत्तियों की संतान में 1 सी विचारधारा, पसंद, व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता । ऐसे बच्चों में रचनात्मकता का अभाव होता है । विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष अर्थात मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं । शास्त्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से सगौत्र विवाह पर प्रतिबंध लगाया था ।अब यदि हम ये जानना चाहें कि यदि चचेरी, ममेरी, मौसेरी, फुफेरी आदि बहनों से विवाह किया जाये । तो क्या क्या नुकसान हो सकता है । इसे जानने के लिए आप उन समुदाय के लोगों के जीवन पर गौर करें । जो अपनी चचेरी, ममेरी, मौसेरी, फुफेरी बहनों से विवाह करने में 1 सेकंड भी नही लगाते । फलस्वरूप उनकी संताने बुद्धिहीन, मूर्ख, प्रत्येक उच्च आदर्श व धर्म ( जो धारण करने योग्य है ) से नफरत, मनुष्य पशु पक्षी आदि से प्रेम भाव का अभाव आदि जैसी मानसिक विकलांगता अपनी चरम सीमा पर होती है ।
या यूँ कहा जाये कि इनकी सोच जीवन के हर पहलू में विनाशकारी destructive व निम्नतम होती है । तथा न ही कोई रचनात्मक constructive सृजनात्मक, कोई वैज्ञानिक गुण, देश समाज के सेवा व निष्ठा आदि के भाव होते है । यही इनके पिछड़ेपन का प्रमुख कारण होता है । उपरोक्त सभी अवगुण गुण सूत्र, जीन व DNA आदि में विकार के फलस्वरूप ही उत्पन्न होते हैं । इन्हें वर्ण संकर genetic mutations भी कह सकते हैं । ऐसे लोग अक्ल के पीछे लठ लेकर दौड़ते हैं । वैदिक ऋषियों के अनुसार कई परिस्थतियाँ ऐसी भी हैं । जिनमें गोत्र भिन्न होने पर भी विवाह नहीं होना चाहिए ।
देखें कैसे - असपिंडा च या मातुरसगोत्रा च या पितु: ।
सा प्रशस्ता द्विजातिनां दारकर्मणि मैथुने । मनु स्मृति 3-5
जो कन्या माता के कुल की 6 पीढ़ियों में न हो । और पिता के गोत्र की न हो । उस कन्या से विवाह करना उचित है ।
उपरोक्त मंत्र भी पूर्णतया वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है । देखें कैसे
वह कन्या पिता के गोत्र की न हो । अर्थात लड़के के पिता के गोत्र की न हो । लड़के का गोत्र = पिता का गोत्र । अर्थात लड़की और लड़के का गोत्र भिन्न हो । माता के कुल की 6 पीढ़ियों में न हो । अर्थात पुत्र का अपनी माता की बहिन के पुत्री की पुत्री की पुत्री 6 पीढ़ियों तक विवाह वर्जित है । हिनक्रियं निष्पुरुषम निश्छन्दों रोम शार्शसम ।
क्षय्यामयाव्यपस्मारिश्वित्रिकुष्ठीकुलानिच । मनु स्मृति 3-7
जो कुल सत क्रिया से हीन । सत पुरुषों से रहित । वेद अध्ययन से विमुख । शरीर पर बड़े बड़े लोम । अथवा बवासीर । क्षयरोग । दमा । खांसी । आमाशय । मिरगी । श्वेत कुष्ठ । और गलित कुष्ठ युक्त कुलों की कन्या या वर के साथ विवाह न होना चाहिए । क्योंकि ये सब दुर्गुण और रोग विवाह करने वाले के कुल में प्रविष्ट हो जाते हैं ।
आधुनिक आनुवंशिक विज्ञान से भी ये बात सिद्ध है कि उपरोक्त बताये गये रोग आदि आनुवंशिक होते हैं । इससे ये भी स्पष्ट है कि हमारे ऋषियों को गुण सूत्र संयोजन आदि के साथ साथ आनुवंशिकता आदि का भी पूर्ण ज्ञान था ।



शनिवार, 16 सितंबर 2017

मुझे देख मेरी कहानी पर रोई ये जिंदगी मेरी जिंदगानी पर रोई - लव तिवारी

मुझे देख मेरी कहानी पर रोई
ये जिंदगी मेरी जिंदगानी पर रोई

क्या था कहाँ था अब  क्या हो गया
जुल्मो को सहती जवानी पर रोईं

खायी थी कस्में निभाने को रिश्ता
मेरे प्यार की इस नादानी पर रोई

जहाँ मेरी बसती थी ख्वाबों की बस्ती
देख उजड़े चमन की निशानी पर रोई

रचना- लव तिवारी
संसोधनकर्ता- नृपजीत सिंह पप्पू


बुधवार, 13 सितंबर 2017

जमाना आज भी कहता है बेघर मुझको - लव तिवारी

गुजर कर देख तू मेरी राहों को इस कदर अब तो
जमाना आज भी कहता है बेघर मुझको

सब कहते है किसी के प्यार में पागल है ये तो
आदमी मुझसा बनकर तो महसूस कर मुझको

उम्मीद होती है हर आशिक को अपने वफ़ा पर
जफ़ा भी की तुमने और तोहमत भी दिये मुझको

कल तलक मैं भी था मोहब्बत को मानने वाला
मिली जो आज अपने खूबसूरत फर्ज की सजा मुझको

ख्वाब के मंजर में अब  भी आता है ख़्याल तेरा
ख्वाइशें दफन है  जमाने की रंजिश में अब तो

लव तिवारी
रचना - 13-09-2019
www.lavtiwari.blogspot.in


शनिवार, 9 सितंबर 2017

देखो पापा मे तुमसे बड़ा हो गया -अज्ञात

मेरे कंधे पर बैठा मेरा बेटा जब
मेरे कंधे पे खड़ा हो गया
मुझी से कहने लगा,
देखो पापा में तुमसे बड़ा हो गया
मैंने कहा, बेटा इस खूबसूरत
ग़लतफहमी में भले ही जकडे रहना
मगर मेरा हाथ पकडे रखना,
जिस दिन यह हाथ छूट जाएगा
बेटा तेरा रंगीन सपना भी टूट जाएगा,
दुनिया वास्तव में उतनी हसीन नही है
देख तेरे पांव तले अभी जमीं नही है,
में तो बाप हूँ बेटा बहुत खुश हो जाऊंगा
जिस दिन तू वास्तव में मुझसे बड़ा हो जाएगा
मगर बेटे कंधे पे नही...
जब तू जमीन पे खड़ा हो जाएगा!!
ये बाप तुझे अपना सब कुछ दे जाएगा!
और तेरे कंधे पर दुनिया से चला जाएगा!!.


शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

मातृ देवो भवः महर्षि वेदव्यास

।।मातृ देवो भव।।
पितुरप्यधिका माता  
गर्भधारणपोषणात्  ।
अतो हि त्रिषु लोकेषु
नास्ति मातृसमो गुरुः॥
गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है।
नास्ति गङ्गासमं तीर्थं
नास्ति विष्णुसमः प्रभुः।
नास्ति शम्भुसमः पूज्यो
नास्ति मातृसमो गुरुः॥
गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं, विष्णु के समान प्रभु नहीं और शिव के समान कोई पूज्य नहीं और माता के समान कोई गुरु नहीं।
नास्ति चैकादशीतुल्यं
व्रतं त्रैलोक्यविश्रुतम्।
तपो नाशनात् तुल्यं
नास्ति मातृसमो गुरुः॥
एकादशी के समान त्रिलोक में प्रसिद्ध कोई व्रत नहीं,  अनशन से बढकर कोई तप नहीं और माता के समान गुरु नहीं।
नास्ति भार्यासमं मित्रं
नास्ति पुत्रसमः प्रियः।
नास्ति भगिनीसमा मान्या
नास्ति मातृसमो गुरुः॥
पत्नी के समान कोई मित्र नहीं, पुत्र के समान कोई प्रिय नहीं,  बहन के समान कोई माननीय नहीं और माता के समान गुरु नही।
न   जामातृसमं   पात्रं
न दानं कन्यया समम्।
न भ्रातृसदृशो बन्धुः
न च मातृसमो गुरुः ॥
दामाद के समान कोई दान का पात्र नहीं,  कन्यादान के समान कोई दान नहीं, भाई के जैसा कोई बन्धु नहीं और माता जैसा गुरु नहीं।
देशो गङ्गान्तिकः श्रेष्ठो
दलेषु       तुलसीदलम्।
वर्णेषु   ब्राह्मणः   श्रेष्ठो
गुरुर्माता      गुरुष्वपि ॥
गंगा के किनारे का प्रदेश अत्यन्त श्रेष्ठ होता है, पत्रों में तुलसीपत्र, वर्णों में ब्राह्मण और माता तो गुरुओं की भी गुरु है।
पुरुषः       पुत्ररूपेण
भार्यामाश्रित्य जायते।
पूर्वभावाश्रया   माता
तेन  सैव  गुरुः  परः ॥
पत्नी का आश्रय लेकर पुरुष ही पुत्र रूप में उत्पन्न होता है, इस दृष्टि से अपने पूर्वज पिता का भी आश्रय माता होती है और इसीलिए वह परमगुरु है।
मातरं   पितरं   चोभौ
दृष्ट्वा पुत्रस्तु धर्मवित्।
प्रणम्य  मातरं  पश्चात्
प्रणमेत्   पितरं  गुरुम् ॥
धर्म को जानने वाला पुत्र माता पिता को साथ देखकर पहले माता को प्रणाम करे फिर पिता और गुरु को।
माता  धरित्री जननी
दयार्द्रहृदया  शिवा ।
देवी    त्रिभुवनश्रेष्ठा
निर्दोषा सर्वदुःखहा॥
माता, धरित्री , जननी , दयार्द्रहृदया,  शिवा, देवी , त्रिभुवनश्रेष्ठा, निर्दोषा,  सभी दुःखों का नाश करने वाली है।
आराधनीया         परमा
दया शान्तिः क्षमा धृतिः ।
स्वाहा  स्वधा च गौरी च
पद्मा  च  विजया   जया ॥
आराधनीया,  परमा, दया ,  शान्ति , क्षमा,  धृति, स्वाहा , स्वधा, गौरी , पद्मा, विजया , जया,
दुःखहन्त्रीति नामानि
मातुरेवैकविंशतिम्   ।
शृणुयाच्छ्रावयेन्मर्त्यः
सर्वदुःखाद् विमुच्यते ॥
और दुःखहन्त्री -ये माता के इक्कीस नाम हैं। इन्हें सुनने सुनाने से मनुष्य सभी दुखों से मुक्त हो जाता है।
दुःखैर्महद्भिः दूनोऽपि
दृष्ट्वा मातरमीश्वरीम्।
यमानन्दं लभेन्मर्त्यः
स  किं  वाचोपपद्यते ॥
बड़े बड़े दुःखों से पीडित होने पर भी भगवती माता को देखकर मनुष्य जो आनन्द प्राप्त करता है उसे वाणी द्वारा नहीं कहा जा सकता।
इति ते  कथितं  विप्र
मातृस्तोत्रं महागुणम्।
पराशरमुखात् पूर्वम्
अश्रौषं मातृसंस्तवम्॥
हे ब्रह्मन् ! इस प्रकार मैंने तुमसे महान् गुण वाले मातृस्तोत्र को कहा , इसे मैंने अपने पिता पराशर के मुख से पहले सुना था।
सेवित्वा पितरौ कश्चित्
व्याधः     परमधर्मवित्।
लेभे   सर्वज्ञतां  या  तु
साध्यते  न तपस्विभिः॥
अपने माता पिता की सेवा करके ही किसी परम धर्मज्ञ व्याध ने उस सर्वज्ञता को पा लिया था जो बडे बडे तपस्वी भी नहीं पाते।
तस्मात्    सर्वप्रयत्नेन
भक्तिः कार्या तु मातरि।
पितर्यपीति   चोक्तं   वै
पित्रा   शक्तिसुतेन  मे ॥
इसलिए सब प्रयत्न करके माता और पिता की भक्ति करनी चाहिए,  मेरे पिता शक्तिपुत्र पराशर जी ने भी मुझसे यही कहा था।
                                 -वेदव्यास



बुधवार, 6 सितंबर 2017

ब्राम्हण क्या है और कौन है -अज्ञात

" ब्राह्मण " क्या है,,,,? कौन है,,,,,?
भगवान कृष्ण ने क्या कहा है
बनिया धन का भूखा होता है।
क्षत्रिय दुश्मन के खून का प्यासा होता है ।
गरीब अन्न का भूखा होता है।
पर ब्राम्हण?
ब्राम्हण केवल प्रेम और सम्मान का भूखा होता है।
ब्राम्हण को सम्मान दे दो वो तुम्हारे लिऐ
जान देने को तैयार हो जाऐगा।
अरे दुनिया वालो आजमाकर
तो देखो हमारी दोस्ती को।
मुसलमान अशफाक उल्ला खान बनकर हाथ बढ़ाता है,हम बिस्मिल बनकर गले लगा लेते है।
क्षत्रिय चंद्रगुप्त बनकर पैर छू लेता है,हम चाणक्य बनकर पूरा भारत जितवा देते है।
सिख भगत सिह बनकर हमारे पास आता है। हम चंद्रशेखर आजाद बनकर उसे बेखौफ जीना सिखा देते है।
कोई वैश्य गाधी बनकर हमे गुरु मान लेता है हम गोपाल कृष्ण गोखले बनकर उसे महात्मा बना देते है।
और
कोई शूद्र शबरी बनकर हमसे वर मागती है, तो हम उसे भगवान से मिलवा देते है।
अरे एक बार सम्मान तो देकर देखो हमें...........
........ फर्ज न अदा करे तो कहना
जय जय राम!!जय जय परशुराम!!
--  पुराणों में कहा गया है -
     विप्राणां यत्र पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता ।
  जिस स्थान पर ब्राह्मणों का पूजन हो वंहा देवता भी निवास करते हैं अन्यथा ब्राह्मणों के सम्मान के बिना देवालय भी शून्य हो जाते हैं ।
इसलिए
   ब्राह्मणातिक्रमो नास्ति विप्रा वेद विवर्जिताः ।।
  श्री कृष्ण ने कहा - ब्राह्मण यदि वेद से हीन भी तब पर भी उसका अपमान नही करना चाहिए ।
क्योंकि तुलसी का पत्ता क्या छोटा क्या बड़ा वह हर अवस्था में कल्याण ही करता है ।

  ब्राह्मणोंस्य मुखमासिद्......
   वेदों ने कहा है की ब्राह्मण विराट पुरुष भगवान के मुख में निवास करते हैं इनके मुख से निकले हर शब्द भगवान का ही शब्द है, जैसा की स्वयं भगवान् ने कहा है की

   विप्र प्रसादात् धरणी धरोहम
   विप्र प्रसादात् कमला वरोहम
   विप्र प्रसादात्अजिता$जितोहम
   विप्र प्रसादात् मम् राम नामम् ।।
   ब्राह्मणों के आशीर्वाद से ही मैंने धरती को धारण कर रखा है अन्यथा इतना भार कोई अन्य पुरुष कैसे उठा सकता है, इन्ही के आशीर्वाद से नारायण हो कर मैंने लक्ष्मी को वरदान में प्राप्त किया है, इन्ही के आशीर्वाद सेढ मैं हर युद्ध भी जीत गया और ब्राह्मणों के आशीर्वाद से ही मेरा नाम "राम" अमर हुआ है, अतः ब्राह्मण सर्व पूज्यनीय है । और ब्राह्मणों का अपमान ही कलियुग में पाप की वृद्धि का मुख्य कारण है ।
  - किसी में कमी निकालने की अपेक्षा किसी में से कमी निकालना ही ब्राह्मण का धर्म है,            
समस्त ब्राह्मण सम्प्रदाय को समर्पित्


शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

एक दिन अउरु उमर के जिआन हो गइल - अज्ञात

रतिया सुतते हीं झट से बिहान हो गईल।
अखिया भरमल की घडिया तुफान हो गईल।

कईसे भागत बा सरपट समय के पहर।
एक दिन अउरू उमर के जिआन हो गइल ।।

कब ती ती ती ती, लुका छुपी छुटल।
कब बचपन के पटरी आ भाठा टुटल।

काहवां गउआं गोनसारी के भूजा गईल।
अब त सापना उ मडई- पालान हो गईल।

एक दिन अउरू उमर के जिआन हो गइल।।

केतना धधकल ऊ कउडा, ऊ जाडा रहे।
केतना नीमन पनरह के पहाडा रहे।

चिउरा-मीठा के चासका भूलाला नाही।
जाने कांहवा नापाता बाथान हो गईल।

एक दिन अउरू उमर के जिआन हो गइल।।
कईसे माई उ लोरिया सुनावत रहे।

गोइठा, पूवरा पे खानवा बानावत रहे ।
बाबूजी से बेहाया के डंटा पडल।

काहवा गायब गोजहरा, निशान हो गईल।
एक दिन अउरू उमर के जिआन हो गइल।।

अब ना दिनवा उ रतिया दोबारा मिली।
अब ना समय उ गीने के तारा मिली।

अब ना छुअम-छुआई के फुर्ती रहल।
दिलवा टूटल, बदन में थाकान हो गईल।

एक दिन अउरू उमर के जिआन हो गइल।।
साँचि पूछीं त एक दिन बडा दुख भईल।

फेसबुकवा पे बचपन के यार मिल गईल।
सगरी बचपन के बतिया भुला गउवे तब।

जब देखुवी की उ त जवान हो गईल।
एक दिन अउरू उमर के जिआन हो गइल।।


गुरुवार, 31 अगस्त 2017

ब्राह्मणों की वंशावली- जय श्रीपरशुराम

ब्राह्मणों की वंशावली
भविष्य पुराण के अनुसार ब्राह्मणों का इतिहास है की प्राचीन काल में महर्षि कश्यप के पुत्र कण्वय की आर्यावनी नाम की देव कन्या पत्नी हुई।
 ब्रम्हा की आज्ञा से
दोनों कुरुक्षेत्र वासनी
सरस्वती नदी के तट
पर गये और कण् व चतुर्वेदमय सूक्तों में सरस्वती देवी की स्तुति करने लगे
एक वर्ष बीत जाने पर वह देवी प्रसन्न हो वहां आयीं और ब्राम्हणो की समृद्धि के लिये उन्हें
वरदान दिया ।
वरदान के प्रभाव से कण्वय के आर्य बुद्धिवाले दस पुत्र हुए जिनका
क्रमानुसार नाम था_
उपाध्याय,
दीक्षित,
पाठक,
शुक्ला,
मिश्रा,
अग्निहोत्री,
दुबे,
तिवारी,
पाण्डेय,और
चतुर्वेदी ।
इन लोगो का जैसा नाम था वैसा ही गुण।
 इन लोगो ने नत मस्तक हो सरस्वती देवी को प्रसन्न किया।
बारह वर्ष की अवस्था वाले उन लोगो को भक्तवत्सला शारदा देवी ने अपनी कन्याए प्रदान की।
उनके क्रमशःनाम हुए
उपाध्यायी,
दीक्षिता,
पाठकी,
शुक्लिका,
मिश्राणी,
अग्निहोत्रिधी,
द्विवेदिनी,
तिवेदिनी
पाण्ड्यायनी,और
चतुर्वेदिनी कहलायीं।
फिर उन कन्याओं के भी अपने-अपने पति से सोलह-सोलह पुत्र हुए हैं
वे सब गोत्रकार हुए जिनका नाम -
कष्यप,
भरद्वाज,
विश्वामित्र,
गौतम,
जमदग्रि,
वसिष्ठ,
वत्स,
गौतम,
पराशर,
गर्ग,
अत्रि,
भृगडत्र,
अंगिरा,
श्रंगी,
कात्याय,और
याज्ञवल्क्य।
इन नामो से सोलह-सोलह पुत्र जाने जाते हैं।
मुख्य 10 प्रकार ब्राम्हणों ये हैं-
(1) तैलंगा,
(2) महार्राष्ट्रा,
(3) गुर्जर,
(4) द्रविड,
(5) कर्णटिका,
यह पांच "द्रविण" कहे जाते हैं, ये विन्ध्यांचल के दक्षिण में पाय जाते हैं|तथा
विंध्यांचल के उत्तर मं पाये जाने वाले या वास करने वाले ब्राम्हण
(1) सारस्वत,
(2) कान्यकुब्ज,
(3) गौड़,
(4) मैथिल,
(5) उत्कलये,
उत्तर के पंच गौड़ कहे जाते हैं।
वैसे ब्राम्हण अनेक हैं जिनका वर्णन आगे लिखा है।
ऐसी संख्या मुख्य 115 की है।
शाखा भेद अनेक हैं । इनके अलावा संकर जाति ब्राम्हण अनेक है ।
यहां मिली जुली उत्तर व दक्षिण के ब्राम्हणों की नामावली 115 की दे रहा हूं।
जो एक से दो और 2 से 5 और 5 से 10 और 10 से 84 भेद हुए हैं,
फिर उत्तर व दक्षिण के ब्राम्हण की संख्या शाखा भेद से 230 के
लगभग है |
तथा और भी शाखा भेद हुए हैं, जो लगभग 300 के करीब ब्राम्हण भेदों की संख्या का लेखा पाया गया है।
उत्तर व दक्षिणी ब्राम्हणां के भेद इस प्रकार है
81 ब्राम्हाणां की 31 शाखा कुल 115 ब्राम्हण संख्या
(1) गौड़ ब्राम्हण,
(2)मालवी गौड़ ब्राम्हण,
(3) श्री गौड़ ब्राम्हण,
(4) गंगापुत्र गौडत्र ब्राम्हण,
(5) हरियाणा गौड़ ब्राम्हण,
(6) वशिष्ठ गौड़ ब्राम्हण,
(7) शोरथ गौड ब्राम्हण,
(8) दालभ्य गौड़ ब्राम्हण,
(9) सुखसेन गौड़ ब्राम्हण,
(10) भटनागर गौड़ ब्राम्हण,
(11) सूरजध्वज गौड ब्राम्हण(षोभर),
(12) मथुरा के चौबे ब्राम्हण,
(13) वाल्मीकि ब्राम्हण,
(14) रायकवाल ब्राम्हण,
(15) गोमित्र ब्राम्हण,
(16) दायमा ब्राम्हण,
(17) सारस्वत ब्राम्हण,
(18) मैथल ब्राम्हण,
(19) कान्यकुब्ज ब्राम्हण,
(20) उत्कल ब्राम्हण,
(21) सरवरिया ब्राम्हण,
(22) पराशर ब्राम्हण,
(23) सनोडिया या सनाड्य,
(24)मित्र गौड़ ब्राम्हण,
(25) कपिल ब्राम्हण,
(26) तलाजिये ब्राम्हण,
(27) खेटुवे ब्राम्हण,
(28) नारदी ब्राम्हण,
(29) चन्द्रसर ब्राम्हण,
(30)वलादरे ब्राम्हण,
(31) गयावाल ब्राम्हण,
(32) ओडये ब्राम्हण,
(33) आभीर ब्राम्हण,
(34) पल्लीवास ब्राम्हण,
(35) लेटवास ब्राम्हण,
(36) सोमपुरा ब्राम्हण,
(37) काबोद सिद्धि ब्राम्हण,
(38) नदोर्या ब्राम्हण,
(39) भारती ब्राम्हण,
(40) पुश्करर्णी ब्राम्हण,
(41) गरुड़ गलिया ब्राम्हण,
(42) भार्गव ब्राम्हण,
(43) नार्मदीय ब्राम्हण,
(44) नन्दवाण ब्राम्हण,
(45) मैत्रयणी ब्राम्हण,
(46) अभिल्ल ब्राम्हण,
(47) मध्यान्दिनीय ब्राम्हण,
(48) टोलक ब्राम्हण,
(49) श्रीमाली ब्राम्हण,
(50) पोरवाल बनिये ब्राम्हण,
(51) श्रीमाली वैष्य ब्राम्हण
(52) तांगड़ ब्राम्हण,
(53) सिंध ब्राम्हण,
(54) त्रिवेदी म्होड ब्राम्हण,
(55) इग्यर्शण ब्राम्हण,
(56) धनोजा म्होड ब्राम्हण,
(57) गौभुज ब्राम्हण,
(58) अट्टालजर ब्राम्हण,
(59) मधुकर ब्राम्हण,
(60) मंडलपुरवासी ब्राम्हण,
(61) खड़ायते ब्राम्हण,
(62) बाजरखेड़ा वाल ब्राम्हण,
(63) भीतरखेड़ा वाल ब्राम्हण,
(64) लाढवनिये ब्राम्हण,
(65) झारोला ब्राम्हण,
(66) अंतरदेवी ब्राम्हण,
(67) गालव ब्राम्हण,
(68) गिरनारे ब्राम्हण
सभी ब्राह्मण बंधुओ को मेरा नमस्कार बहुत दुर्लभ जानकारी है जरूर पढ़े। और समाज में सेयर करे हम क्या है
इस तरह ब्राह्मणों की उत्पत्ति और इतिहास के साथ इनका विस्तार अलग अलग राज्यो में हुआ और ये उस राज्य के ब्राह्मण कहलाये।
ब्राह्मण बिना धरती की कल्पना ही नहीं की जा सकती
 इसलिए ब्राह्मण होने पर गर्व करो और  अपने कर्म और धर्म का पालन कर सनातन संस्कृति की रक्षा करे।
             
           जयश्रीपरशुराम      
  





             

शनिवार, 26 अगस्त 2017

जिन्हें अपने घरों में बच्चियां अच्छी नहीं लगती -अज्ञात

दरवाज़ों पे खाली तख्तियां अच्छी नहीं लगती
मुझे उजड़ी हुई ये बस्तियां अच्छी नहीं लगती.

उन्हें कैसे मिलेगी माँ के पैरों के तले जन्नत
जिन्हें अपने घरों में बच्चियां अच्छी नहीं लगती

चलती तो समंदर का भी सीना चीर सकती थीं
यूँ साहिल पे ठहरी कश्तियां अच्छी नहीं लगती...

खुदा भी याद आता है ज़रूरत पे यहां सबको
दुनिया की यही खुदगर्ज़ियां अच्छी नहीं लगती



बुधवार, 23 अगस्त 2017

ये मेरा दिल तुझमे एक फरिश्ता ढूढता है लव तिवारी

बर्बाद मंजर में बहार गुलिस्तां ढूढता हैं
ये मेरे दिल तुझमे एक फरिश्ता ढूढ़ता है

कभी तो मेहरबाँ बन कर आओगी मेरे सामने
ये ख़्वाब भी हक़ीक़त का एक असर ढूढता है

नज़र अभी तलाशती उस हसीन रुख को
जिसे देखने की चाह में हर कोई मरता है

मैं तुम्हें चाहूँ जमाने की हर रिवाज़ को छोड़कर
इस वाकपन को देख कर आज शहर जलता है

तकलीफ़ ज़माने को मोहब्बत करने वालो से अक्सर
इन्सान अपने दुःख से परेशां किसी सुख पर रहता  है

लव तिवारी



सोमवार, 21 अगस्त 2017

पेड़ से ही हो सकती है सृष्टि की रक्षा - लव तिवारी

शुद्ध नहीं आबो-हवा, दूषित है आकाश,
सभ्य आदमी कर रहा, स्वयं श्रृष्टि का नाश..

ओजोन परत गल रही, प्रगति बनी अभिशाप,
वक़्त अभी है सोचिये, वरना पछ्ताएंगे आप..

अंत निकट संसार का, सूख रही है झील,
दूषित है वातावरण, लुप्त हो रही चील..

पेड़ लगाए कोई नही ac की है आस
घर को ठंडा सबकरे धरती का करे विनाश

पूज्य गुरु जी के तस्वीर सोशल मीडिया पर हर दिन मिलती रहती है देश के वास्तविक विकास को अग्रसर रूप देते हुए इस महान व्यक्तित्व की एक अनोखी कहानी , कुछ दिन पहले #दिल्ली #नोएडा डायरेक्ट #DND  से अचानक गुजरने का मौका मिला नोएडा दिल्ली dnd के बाई तरफ एक तस्वीर भी इस वास्तविकता को समझा रही थी कि पेड़ नही रहे तो जीवन नही रहेगा
प्रस्तुति- #लव_तिवारी
Visit- www.lavtiwari.blogspot.in



शनिवार, 12 अगस्त 2017

अब सवाल और जबाब भी तुम्ही से- लव तिवारी

अब सवाल और जबाब भी तुम्ही से
आओ किसी दिन हिसाब भी तुम्ही से

बड़े उलफ्फत में है ये हसीन जिंदगी
किसी रोज मुस्कुराओ कायनात भी तुम्ही से

लोगो का क्या है मोहब्बत के सब दुश्मन है यहाँ
बस एक तुम हो और जज्बात भी तुम्ही से

हुस्न की बात करे तो निगाहें तुम पर रुकती
हो आसमान में बहुत तारे लेकिन चाँद भी तुम्ही से

कभी आओ सज धज के की अब कयामत हो
अब नही सही जाती जुदाई हालात भी तुम्ही से



रचना लव तिवारी
11 08 2017

शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

तुमको देखूं और फिर सोचूँ न तुमको अपना पाऊँ लव तिवारी

तुमको देखु और फिर सोचु ,न तुमको अपना पाऊँ
ये कैसी है रीत यहाँ की, साथ तुम्हारे जा न सकु

प्यार भरा ये मौसम है और तन्हा मेरा जीवन
ख्वाब के वो सुने पल को मैं तुमसे बतला न सकु

मेरा जीवन मेरी कविता मेरे सब कुछ तुम्ही हो
है दुनिया की एक हक़ीक़त मैं तुमको दिखा न सकूँ

आओ अब हम साथ चले दुनिया की रंजिश छोड़कर
प्यार भरे इस जीवन के कुछ पल तुम्हारे साथ जियूँ

आँखों को एक नरमी और चेहरे की अदायगी
बिन कहे सब बात मैं समझो पर तुमको न समझा पाऊँ

रचना- लव तिवारी
27-07-2017


गुरुवार, 27 जुलाई 2017

हमारा नाम लिखकर कागजो पर फिर उड़ा देना- अज्ञात

हमारा नाम लिखकर कागजों पर फिर उडा देना।
भला सीखा कहाँ तुमने सितम को यूँ हवा देना॥

हमे मालूम है तुम भी किसी से प्यार करते हो।
तुम्हे भी इल्म है मेरा किसी पर मुस्कुरा देना॥

मुहब्बत ग़म मे हो या खुशी मे दोनो बेहतर है।
कहीं कोई मिले तुमको उसे यह मशविरा देना॥

तुम अपने हक पे जायज हो हम अपने हक पे जायज हैं।
कहाँ फिर बात आती है किसी का घर गिरा देना॥

यॆ दुनियाँ है बडी काफिर तू इसकी बात पर मत आ।
के इसका काम है ऊपर चढा कर फिर गिरा देना॥


सोमवार, 24 जुलाई 2017

सुनाइये कुछ अनसुना सा- लव तिवारी

सुनाइये कुछ अनसुना सा
जिंदगी में कुछ रहनुमा सा
ख्वाब और हकीकत में
हो गया एक फासला सा
तुम न मिले तो समझ आया
जिंदगी में न कुछ हुआ सा
मंजरों का दौर भी अब
रह गया अब सुना  सा
जिंदगी में एक मलाल भी
तुम सा न कोई मिला सा
मुझको तुम मिलोगी एक दिन
रह गया अब भरम जरा सा
रचना - लव तिवारी
25-07-2017


सोमवार, 10 जुलाई 2017

आखों में आँसू दिल मे अंगार लिए बैठे है- लव तिवारी

आँखों मे आँसू दिल में अंगार लिए घूमते है
हम तेरे प्यार में गुलिस्ता बर्बाद किये घूमते है

हस्र अब ये है दिल धड़कता नही तड़पता है
ख्वाइशें ऐसी है कि बेकरार लिए घूमते है

याद आते ही अब भी आँखे नम हो जाती
जमना कहता है तेरा प्यार लिए घूमते है

भले दूर ही सही आज भी दिल के करीब हो तुम
ख़्वाब में आज भी तुम्हारा तलबगार लिए घूमते है

जहाँ में हम तुम एक न हो सके तो क्या हुआ
चाहत आज भी जवा है इंतेजार लिए घूमते है

रचना- लव तिवारी 10-07-2017


दोनों उदास है नही बुझती अब प्यास है- लव तिवारी

दोनों उदास है
नही बुझती अब प्यास है

दीवानो की बस्ती में
समुन्दर भी आस पास है

कौन कहेगा इन्हें बेवफ़ा
दुनिया ने इन्हें किया निराश है

अब भी बस करे तो कर दु इन्हें एक मैं
देखो इनकी आखो में कितनी प्यास है

फिर सोचा सब कुछ नही मिलता है
आज आदमी भी अपने नसीब से परेशान है

एक प्रेमी जोड़े की उदासियों को उजागर करती मेरी कविता
रचना- लव तिवारी
10-07-2017


शनिवार, 8 जुलाई 2017

दरिंदगी की आग में झुलसता बंगाल - लव तिवारी

अब भी करो अवार्ड वापसी कोई तो दम दिखाओ
सुवर के अवालाद हो तुम कोई तो जश्न मनाओ

देश जहा नंगा है अपने ही गद्दारों से
करते है जो खून खराबा सत्ता को हथियाने में

ममता को ममता नही बंगाल की दहशत से
अपनी रोटी सेक रही दंगो की नफरत से

हिन्दू को इंसाफ चाहिए देश के तुम गद्दारो से
देश को तुमने बहुत ही रौंदा उल्फत के अंगारो से

आजादी के हक के खातिर हिन्दू मुस्लिम आदी थे
आज ऐसा क्या हुआ जो अपने मे सब बागी है

दरिंदगी की आग में झुलसता बंगाल - लव तिवारी


नाकाम होकर भी कामयाबी की बात करते हो- लव तिवारी

नाकाम हो कर भी कामयाबी की बात करते है
है मोहब्बत जहर और खुराकी की बात करते हो

बदल दिए जाते है वसूल शोहरत और हैसियत देखकर
क़त्ल के दौर में तुम जिंदगानी की बात करते हो

हो मुसफिल तो जनाज़े में भी न हुजूम होगा
होकर गरीब तरफ़दारी की बात करते हो

कहा था कुछ दूर चलो मेरे साथ सफर जिंदगी में
नही चले तो फिर समझदारी की बात करते हो

जामने भर की रंजिश में आज बदनाम है कौम
इन्सानियत की जिद छोड़कर बर्बादी की बात करते हों

नाकाम होकर भी कामयाबी की बात करते हो- लव तिवारी
08-07-2017


शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

डर अब ये है कि हर ज़नाज़े को कफन चाहिये - लव तिवारी

डर अब ये है कि हर ज़नाज़े को कफन चाहिये
मौत बत्तर न हो कही एक ऐसी जगह चाहिए

कौन है यहाँ अपना इस बात की खबर नही मुझे
गर पड़े काम तो हर शख्स  की परख चाहिए

आइये चलिए कही बैठ कर फिर जाम पीये
सच को परखने के लिए नशे की लत चाहिए

बड़े तोहमत भी दिए और बाद में शर्मिंदगी भी
ऐसे हालात के बाद भी दिल पर उन्हें हक चाहिए

मुझसे मांगते है वो कि अब दो मुझे तुम और तौफा
दिल लगाने के बदले उन्हें मेरा जानो जहन चाहिए

रचना- डर अब ये है कि हर ज़नाज़े को कफन चाहिये - लव तिवारी
 06-07-2017


गुरुवार, 6 जुलाई 2017

डर अब ये है कि हर जनाज़े को कफन चाहिए - लव तिवारी

डर अब ये है कि हर ज़नाज़े को कफन चाहिये
मौत बत्तर न हो कही एक ऐसी जगह चाहिए

कौन है यहाँ अपना इस बात की खबर नही मुझे
गर पड़े काम तो हर शख्स  की परख चाहिए

आइये चलिए कही बैठ कर फिर जाम पीये
सच को परखने के लिए नशे की लत चाहिए

बड़े तोहमत भी दिए और बाद में शर्मिंदगी भी
ऐसे हालात के लिए भी क्या दिल को लत चाहिए

मुझसे मांगते है वो कि अब दो मुझे तुम और तौफा
दिल लगाने के बदले उन्हें मेरा जानो जहन चाहिए

रचना- लव तिवारी
06-07-2017


गुरुवार, 29 जून 2017

दर्द अब भी न सभले तो जख्म होगा लव तिवारी

दर्द अब भी न सभले तो जख़्म होगा
तुम्ही हो दवा अब न कोई मरहम होगा

ख्वाईशो की चाह भी रुकती है तुम्ही पर
कि खुदा जो भी करेगा मेरे हक में होगा 

बदलते मौसम की तरह तुम भी बदल गये
मैं बस देखता रह गया कोई तो हमदम होगा

ख्याल आता तुम्हरा अक्सर मुझे अकेले में
औऱ कुछ लिखू तुझपर तो एक ग़ज़ल होगा

रात में अब भी संवारता है तेरा जुनून मुझे
की जिंदगी में कुछ न कुछ तो मुक्कमल होगा

लव तिवारी- 29-06-2017


बुधवार, 28 जून 2017

तुम्हारी खूबसूरती में अजब रंग है कि तुम ही हो जहन में दिल तंग है- लव तिवारी

तुम्हारी खूबसूरती में अजब रंग है
कि तुम ही हो जहन में दिल तंग है

मोहब्बत की रंगत में देखिए ये हस्र भी
जिसे बेपनाह चाहो वही आज दंग है

खुदा की इबादत में भी ख्याल आता है तुम्हारा
दिल सोचे तुम्हें अब न कोई मरहम है

मौसम हुआ खुशनुमा की एक ख्याल सा आया
कि कोई तो हुआ खुश मुझे भले गम है

लव तिवारी
रचना- 27-06-2017


गुरुवार, 1 जून 2017

जिंदगी को एक बेहतर जिंदगी मिले- लव तिवारी

अब भी दो मोहब्बत की खुशी मिले
जिंदगी को एक बेहतर जिंदगी मिले

लोग कहते है मुझको तेरा चाहने वाला
क्या खता की बिन बात दर्द और ग़म मिले

बड़ी उम्मीद थी जिंदगी में नये ख्वाईश की
आज फिर से मिलो तो कोई खम  मिले

बात क्या है कि अब मिलते नही करीब से
कुछ तो कहो झूठ ही कि सच का दम निकलें

तरी अहमियत को अभी दिल को आश सी है
कि कभी मुहूर्त बदले और तुम हमसे मिले

रचना- लव तिवारी
01-06-2017
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रविवार, 21 मई 2017

ये आँखे ये जुल्फे ये तेरा मुस्काना- लव तिवारी

ये आँखे , ये जुल्फे ये तेरा मुस्काना
कभी हमको मरेगा ये तेरा शर्मना

ये काजल ये बिंदिया और हाथो की चूड़ी
मुझे तेरे पास लाये ये कैसी मजबूरी

रोज  शाम होते मेरी यादों में आना
मुझे मदहोश रखता तेरी निगाहों का प्याला

कभी चुपके से  मेरे सपनों में आकर
तुम्हे याद करू मैं अपने दिल मे समाकर

कभी उठ के बैठु कभी हँस के रोऊ
ये दुनिंया कहे मुझको पागल दिवाना

लव तिवारी
रचना- 22-05-2017


गुरुवार, 18 मई 2017

तेरी उल्फत में भी एक अदा है - डॉ एम डी सिंह

तेरी  उल्फत  में  भी  एक अदा है
तेरी  नफरत  में भी  एक  अदा है
खैर  वाजिब   तो   वाजिब  है  ही
बेजा  हरकत में  भी एक  अदा है
जान-बूझ के करे तो क्या  कहना
तेरी  गफ़लत में भी  एक  अदा है
अदा  इनकार  में भी  तेरे कम ना
तेरी  शिरकत  में भी  एक अदा है
कभी  जो   नाफरमा  हुए  तो भी
तेरी  सहमत  में  भी एक अदा है
उल्फत - प्यार
वाजिब - सही
बेजा - गलत
गफलत - अनजान
शिरकत - भाग लेना
नाफरमा - विरोधी
डॉ एम डी सिंह


शुक्रवार, 5 मई 2017

कोई अच्छी सी सजा दो मुझको चलो ऐसा करो भुला दो मुझको- लव तिवारी

कोई अच्छी सी सजा दो मुझको
चलो ऐसा करो भुला दो मुझको

अपने दिल मे बसी तस्वीर मेरी
ऐसा करो फिर जला दो उसको

मेरी वफा पे अगर शक हे तुमको
तो फिर नजर से गिरा दो मुझको

मुद्दत हो गई हैं तेरे प्यार मे जागते हुए
अपनी सांसो कि हरारात से सुला दो मुझको

कुछ तो तरस करो अपने दिवाने पर
जाम न सही जहर ही पिला दो मुझको ,

तुमसे बिछडू तो मौत आ जाये मुझको 
दिल कि गहराइयो से ये दुआ दो मुझको






गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

एक प्यारा सा गांव, जिसमे पीपल छांव छाव में आशिया था एक छोटा मका था - सुदर्शन फ़ाकिर

एक प्यारा सा गांव, जिसमे पीपल छांव 
छाव में आशिया था, एक छोटा मका था 
छोड़ कर गांव को, उसी घनी छाव को 
शहर के हो गए है, भीड़ में खो गये है

वो नदी का किनारा, जिस पर बचपन गुजारा
वो लड़कपन दीवाना, रोज पनघट पर जाना
क्या वो थी जवानी , बन गए हम कहानी
छोड़ कर गांव.......
एक प्यारा सा गांव.......

इतने गहरे थे रिश्ते, लोग थे फरिश्ते
एक टुकड़ा जमीन थी, अपनी जन्नत वही थी
हाय ये बदनसीबी ,नाम जिसका गरीबी 
छोड़ कर गांव को....
एक प्यारा सा गांव.....

ये तो प्रदेश ठहरा ,देश फिर देश ठहरा
हादसों की बस्ती , कोई मेला न मस्ती
क्या यहाँ जिंदगी है हर कोई अजनबी है
छोड़ कर गांव को......
एक प्यारा सा गांव.......

 रचना- - सुदर्शन फ़ाकिर




शनिवार, 22 अप्रैल 2017

दोस्त एक भी तो नही दिख रहा यहाँ- डॉ एम डी सिंह

हुआ   कैसा   यह   अखबार   शाया   है
पन्ना - पन्ना गम हर्फ - हर्फ  दर्द छाया है

चीख  के  दम  तोड़ती  इंसानियत  यहां
कैसे  दौर  में  भला  यह  वक्त  आया है

दोस्त  एक भी तो नहीं  दिख  रहा  यहां
खींच  ऐसे  मुकाम  पर  जश्न  लाया  है

रोके नहीं हैं रुकते यहां अश्क किसी के
किसी  शायर  ने  यूं इक  नज्म गाया है

खौफ के साए में सभी लिपटे दिख रहे
मौत   करीब   इतना   सबने   पाया  है

डॉ एम डी सिंह


जहाँ इंसानियत दिखती नही - डॉ एम डी सिंह

जहां  इंसानियत  दिखती  नहीं  यार  कहीं पर
कहते हो तुम था जमी पे कभी जन्नत यहीं पर


गुलों  की जहां  बस्तियां  दिखतीं थी  हर जगह
टुकड़े  पत्थरों  के  बिखरे हैं हर सिम्त वहीं पर


जाने को जहां थी भरी दिल में हर किसी के हाँ
आज क्यूँ  टिकी  है  बात  एकदम  से नहीं पर


जहां  फूलों  की घाटियां  शिकारों  पे  शहर था
सुना   वही   वादियां  जी  बन्दूकों  पे  रहीं  पर


शाल  पश्मीने की ओढ़ के  ले हाथों  में कांगड़ी
वे मेरे इरादों   की   मीनारें   रेत   सी   ढहीं  पर


डॉ एम डी सिंह




शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

एक बात कहे जो तुम समझो- लव तिवारी

एक बात कहे जो तुम समझो
मुझे तुमझे मोहब्बत है शायद

लेकिन दुनिया के लोगो मे
एक बड़ी बग़ावत है शायद

तुम हो जाते  मेरे अपने
बस यही एक चाहत है शायद

ये ख्वाब न टूटे उम्र भर कही
एक बस यही हसरत है शायद

मुझे अपनी दुनिया की फिक्र नही
एक तुम्ही सलामत रहो शायद


रविवार, 2 अप्रैल 2017

कौन सुनेगा किसको सुनाये - लव तिवारी

दिल्ली, गुरुग्राम, नॉएडा, मुंबई, पुणे, बंगलुरु 
मिनी इंडिया को रिप्रेजेंट करते हैं...

एक ही पल में जहां एक तरफ बहुमंजिला इमारतों की बालकनियों में 
चाय की चुस्कियां चल रही होती हैं...
तो दूसरी ओर उसी बिल्डिंग के बराबर वाले स्लम में 
रोते बिलखते बच्चों की आवाज के बीच एक बैचैन माँ 
चूल्हे पे कुछ पकाने की जद्दोजहद में होती है..

कोई एक कान पे फ़ोन लगाए और दूसरे कंधे पे लैपटॉप बैग टाँगे 
घर जाने के लिए ऑटो पकड़ने भाग रहा होता है..
तो दूसरी तरफ उस भागते हुए आदमी 
और उस ऑटो वाले को सूनी सी आँखों से देखते 
5 रिक्शेवाले खड़े होते हैं..
जिनके घुटने कभी भी उनको धोखा दे देंगे..
और इस गर्मी में लू से ज्यादा फ़िक्र उन्हें 
शाम के लिए अपने परिवार का पेट भरने की होगी..

एक तरफ अहातों के बाहर फॉर्चूनर लगाए 
"बापू जमींदार" सुनते हुए नशे में चूर लोग होंगे..
तो दूसरी तरफ उन्ही फॉर्चूनरों में टिक्के पहुंचाते और कम प्याज लाने पे गालियां खाते 
10 12 साल के बच्चे..

एक तरफ नाईट आउट पे निकले शोहदे शोहदियां हैं 
तो दूसरी तरफ इसी रात में फुटपाथ के किनारे 
चादर तान के सोने की कोशिश करते बिन पते बिन नामों वाले लोग..

ये कंट्रास्ट ही शायद इन शहरों की हकीकत है...
शायद यही हकीकत हमारे देश की भी है..
कोई बारिश के इन्तजार में दुखी है..
तो कोई बारिश के आ जाने से..
कोई २ घंटे के पावर कट से ही दुखी है 
तो किसी की किस्मत में एक पंखा तक नहीं है..

इन सब बातों को डिस्कस करने का कोई मतलब नहीं है..
ना ही इसका समाधान मेरे पास है..
पर भगवान् ने भाव ही ऐसा दिया है कि 
ये सब अनदेखा करके भी अवचेतन मन में रह जाता है..

कई बार यूँही ऑटो पकड़ने भागते भागते ठिठक जाता हूँ..
और उन सूनी सी आँखों वाले रिक्शेवालों की आँखों में 
मुझे अपनी तरफ आता देख थोड़ी सी चमक बढ़ जाती है..

तीज त्यौहार पे यूँही अपनी मेड..चौकीदार..और कार साफ़ करने वालों को 
500 500 रुपये का बोनस दे देता हूँ...

और अपने फ्लैट की बालकनी से 
झुग्गियों में खेलते बच्चों को देख तीरथ महसूस कर लेता हूँ...

मैं समस्याओं को समझ रहा हूँ..
और अपनी हैसियत के हिसाब से योगदान देने की कोशिश कर रहा हूँ..
मैं इस बदलते #भारत का युवा हूँ..
मैं अपने साथ और भी बहुत सपनों को सच करना चाहता हूँ...

मुझे उम्मीद है मैं और आप एक ही हैं..



गुरुवार, 30 मार्च 2017

विवशता- मरती क्यों नही चिड़िया - एम डी सिंह

विवशता :::
चिड़िया
घर के सामने
पेड़ पर चीखती है
नारे लगाती है मेरे विरुद्ध
बच्चों के साथ चहचहा कर खेलती है
फुदक फुदक कर नाचती है
गड़ती है मेरी आंखों में
किरकिरी की तरह
मुझे हंसी क्यों नहीं आती
मेरे बच्चे मेरे साथ खेल क्यों नहीं पाते
आता है गुस्सा
चिढ़ाती है मुझको
मारता हूं ढेले भगाता हूं उसको
उड़-उड़ बार-बार बैठ जाती है
डरती क्यों नहीं चिड़िया
नहीं जानती
हूं कितना वहशी
बेदर्द स्वार्थी भय का प्रतीक
वह तो बस चिड़िया
जीभ का स्वाद पेट का आहार
मारता हूं रोज नोचता हूं पंख
भूनता हूं खाता हूं
चिड़िया पेड़ पर
घोसले में
फिर भी चाहचहाती है
मरती क्यों नहीं चिड़िया ?
डॉ एम डी सिंह


शुक्रवार, 17 मार्च 2017

काश ये रोशनी के शहर नही होते - डा एम डी सिंह

काश  ये  रोशनी  के  शहर नहीं  होते
तो  फिर  ये  हादसों  के घर नहीं होते

अस्ल  तल्खियां  गुनहगार  हैं  वरना
यूं  खंजर  कभी  खूँ  से तर नहीं होते

है  इल्म  जो हम सब  को  डराती  है
वरना   इतने  कहीं  पे  डर नहीं  होते

फिक्र झूठ को सच करने की न होती
सच मुच  अफवाहों  के पर नहीं होते

खोल गर निगाहें चलते कहीं तुम भी
मौत के  इल्जाम इतने सर नहीं होते

़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़डॉ एम डी सिंह

गुरुवार, 9 मार्च 2017

कश्मीर की नाजुक कली हो तुम- लव तिवारी

कश्मीर की नाजुक कली हो तुम
बिन कहे चहकती ग़ज़ल हो तुम

कोई नही तुम्हारा बिना मेरा यहाँ
मेरी जिंदगी और आशिकी हो तुम

कभी रातो में एक खुशनुमा ख़्याल
तो कभी दिलो की धङकन हो तुम

धुप और गर्मी सी बेहाल है  जिंदगी
शीतलता के लिए शज़र हो तुम

लहरों तूफान में डुबू अगर मैं कही
बन के साहिल किनारें की मंजिल हो तुम




रचना - लव तिवारी

रविवार, 5 मार्च 2017

आती कैसे नींद करवट को मैंने- ऍम डी सिंह

आती   कैसे   नींद  करवटों   को   मैंने  ख्वाब  लुटाते  देखा
आवारा   कमबख़्त   ख़यालों   को   मैंने  नीद  चुराते  देखा

कैसे  करूं  शिकायत  किसने मेरा  घर जलाया खाक किया
मेरे   ही   हाथों   मशाल  थी  जिन्हें  मैंने  आग  लगाते  देखा

पतवारों  को   छीन  हवाओं  ने  जब   नावों  के  बदले  पांव
मैंने  खुद  को  सर  ऊंचा  कर तूफानों को पास  बुलाते देखा

कभी   कालरें  मेरी   तुमने  मुड़  टूट  रही  हैं  कब  ये सोचा
दुनिया  ने   तमाशाई   बन  के  आस्तीनें  ऊपर  जाते   देखा

बड़ा  आदमी  बड़ी  हवेली  थी  फिर  भी आज न जाने क्यों
बेहद तंग सबिस्तां में लेजा कर ना किसने मुझे सुलाते देखा

 
सबिस्तां -शयनगृह
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़डॉ एम डी सिंह

शनिवार, 4 मार्च 2017

कल तक जो ख्वाब था वो हकीकत हो तुम - लव तिवारी

कल तक जो ख्वाब था वो हकीकत हो तुम
जिंदगी कैसे जिये अब मोहब्बत हो तुम

धड़कते दिल की आहट में शोर सा है खुशनुमा
तपतपाती धुप  में  एक शजर हो तुम

मेरी दुनिया तुमसे है और ग़ज़ल रंगीन भी
शायरी के हर लब्ज़ में एक बसर हो तुम

रात की तन्हाइयो में देते हो एक अहसास
बन जाती हो ग़ज़ल मेरी आशिकी हो तुम

ख्वाब का वो दौर जब तुम आती हो सामने
दिल झूम उठता है  बस हर ख़ुशी हो तुम

रचना -लव तिवारी 03-03-2017
संपर्क सूत्र- +91-8010060609
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