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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

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गुरुवार, 1 अगस्त 2013

Meri Zindgi Mujhe ye bata, Mujhe Bhul kar Tujhe Kya mila By Lav Tiwari

Meri Zindgi Mujhe ye bata,
Mujhe Bhul kar Tujhe Kya mila,
Meri hasraton ka hisab de,
Dil tod kar tujhe kya mila,
Tere 4 din ke pyar se,
Mujhe umar bhar ka gum mila,
Mai tut kar bikhar gaya,
Mujhe tod kar tujhe kya mila…

बुधवार, 31 जुलाई 2013

वो हमसे दूर रहकर ही खुश रहते है जिनके लिए हम अक्सर रोते रहते है

वो हमसे दूर रहकर ही खुश रहते है
जिनके लिए हम अक्सर रोते रहते है

पानी की ज़िद छोड़ो मुशफिर अश्क पी लो
गम के सताए लोग ही यहा रहते है

हमने महफ़िलो मे जाना छोड़ दिया है
मुझे तन्हा देख के ही खुश रहते है

हम उनको पाने के लिए खुदा से लड़े थे
आज वही शक्स मेरे दुश्मनो के साथ रहते है

हमपे वॉर करते है तो करने दो न रानु'
हम उन्हे अपना समझकर ही छोड़ते रहते है

हमने तुमको चाहा है मेरा यकीन करो दिल के हर धड़कन मे बसा लुगा मेरा यकीन करो

हमने तुमको चाहा है मेरा यकीन करो
दिल के हर धड़कन मे बसा लुगा मेरा यकीन करो

 कोई चाहेगा मुझसे ज़्यादा तो बताना सनम
तेरे आसुओ को अपने पलको पे लुगा मेरा यकीन करो

चाहत का सिला तो क्या देगी मुझको
मैं तेरा हर मोड़ पे साथ दुगा मेरा यकीन करो

मेरे प्यार को ना समझने वाली
साया बनके तेरा साथ दुगा मेरा यकीन करो

मुझको गले लगाती तो सूखे शाख पे गुल खिलते
तेरे हुस्न की तारीफ़ मैं रोज इक नयी ग़ज़ल लिखुगा 

मुश्किल मे जब था तो किसी ने दामन थाम लिया


मुश्किल मे जब था तो किसी ने दामन थाम लिया
लड़खड़ा गये जब कदम तो किसी ने दामन थाम लिया ,

मुझे मालूम नही की वो अपना है या पराया
जिन्दगी की जब ढलने लगी शाम तो किसी ने दामन थाम लिया,

हम दिल लगा बैठे है अपने ही कातिल से
खुद पर जब रोना आया तो किसी ने दामन थाम लिया,

आज ना-हक पीजिए और कीजिए बाते पैमाने से
नशे मे जब झूम उठा बूटखाने मे शांकी ने दामन थाम लिया,

रविवार, 23 जून 2013

दिल के हाथों मजबूर हो गए,

दिल के हाथों मजबूर हो गए,

हम जितना पास आये वो दूर हो गए,

कुछ हसीं ख्वाब पाले थे पलकों पे,

खुली जो आंख तो देखा सब चूर हो गए,

न गिला है उनसे न खुदा से शिकायत,

ये नसीब था अपना के हम मजबूर हो गए,

हम तो चाहते रहे उन्हें दिल ही दिल में,



हमें मालूम ही न हुआ वो इतना मगरूर हो गए


ये सवाल है खुदा से, क्या खता थी हमारी,


जो हर ख़ुशी से हम महरूम हो गए...!!

Jheel mein chand nazar aaye thi hasrat uski

Jheel mein chand nazar aaye thi hasrat uski
Kab se aankhon mein liye baitha hoon surat uski

Jheel mein chand nazar aaye thi hasrat uski

Ek din mere kinaron mein simat jayegi
Tahre paani si ye khamosh mohabbat uski

Jheel mein chand nazar aaye thi hasrat uski


Bandh muththi ki tarah vo kabhi khulta hi nahin
Faasle aur badha deti hai khurbat uski

Jheel mein chand nazar aaye thi hasrat uski

Kisne jaana hai badalte hue mausam ka mizaj
Usko chaho to samajh paoge phitrat uski

Jheel mein chand nazar aaye thi hasrat uski

Hai Bus Yeh Hi Aarzu Har Janam Mein Usko Pyar Karun, Woh Bhula Bhi De Mujhko Main Har Pal Bus Usko Yaad Karun

Hai Bus Yeh Hi Aarzu Har Janam Mein Usko Pyar Karun,
Woh Bhula Bhi De Mujhko Main Har Pal Bus Usko Yaad Karun,

Kaliyaan Uske Daman Mein Khilake Saare Kante Apne Naam Karun,
Meri Saari Khushiyan Uske Aur Gum Uske Apne Naam Karun,

Hai Bus Yeh Hi Aarzu Har Janam Mein Usko Pyar Karun,
Woh Bhula Bhi De Mujhko Main Har Pal Bus Usko Yaad Karun,

Subah Ke Ujale Uske Aur Raat Ke Andhere Main Apne Naam Karun,
Uski Sunsaan Galiyon Mein Main Roshni Banke Damka Karun,

Hai Bus Yeh Hi Aarzoo Har Janam Mein Usko Pyar Karun,
Woh Bhula Bhi De Mujhko Main Har Pal Bus Usko Yaad Karun,

Neend Apni Bhula Ke Saare Khwab Main Uske Naam Karun,
Uske Khayalon Se Hi Raatein Main Apni Guzara Karun,

Hai Bus Yeh Hi Aarzoo Har Janam Mein Usko Pyar Karun,
Woh Bhula Bhi De Mujhko Main Har Pal Bus Usko Yaad Karun,

Apni Sab Tamanna Mita Ke Uski Har Aarzoo Ki Tamanaa Main Karun,
Ho Har Aarzoo Uski Puri Bus Ek Aarzoo Ab Main Baar Baar Karun

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

वो जो धरती पे भटकता रहा जुगनू बनकर, कहीं आकाश मे होता तो सितारा होता.


बहके जो एक पल को सम्हालना भी आ गया 
शम्मा तुम्हारे इश्क में जलना भी आ गया 
बांहों की हरारत का तेरी शुक्रिया बहुत 
पत्थर था मगर मुझको पिघलना भी आ गया....

वो जो धरती पे भटकता रहा जुगनू बनकर,
कहीं आकाश मे होता तो सितारा होता.....

हज़ार निगाहों से गुजरी मगर कोई पढ़ न सका
साल भर खुली रही किताब-ए-ज़िंदगी मेरी...

ना जाने क्यूँ, गले से लिपट कर वो रोने लगी,
जाते हुए जिसने कहा था, के तुम जैसे हजारों मिलेंगे..

शनिवार, 5 जनवरी 2013

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा

किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ बरसों से
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा

एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा

मुद्दतें बीत गईं ख़्वाब सुहाना देखे
जागता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा

आईना देखके निकला था मैं घर से बाहर
आज तक हाथ में महफ़ूज़ है पत्थर मेरा

गुरुवार, 22 नवंबर 2012

Hum Bhi Kabhi Muskuraya Karte The…





Hum Bhi Kabhi Muskuraya Karte The..

Ujale Me Bhi Shor Machaya Karte The…


Usi Diye Ne Jala Diya Mere Hatho Ko


Jis Diye Ko Hum Hawa se Bachaya Karte The…



Lav Tiwari

सोमवार, 19 नवंबर 2012

बहते अश्को की ज़ुबान नही होती

बहते अश्को की ज़ुबान नही होती,
लफ़्ज़ों मे मोहब्बत बयां नही होती,
मिले जो प्यार तो कदर करना,
किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नही होती.

रविवार, 18 नवंबर 2012

उसको नम्बर देके मेरी और उलझन बढ़ गई फोन की घंटी बजी और दिल की धड़कन बढ़ गई

उसको नम्बर देके मेरी और उलझन बढ़ गई
फोन की घंटी बजी और दिल की धड़कन बढ़ गई

इस तरफ़ भी शायरी में कुछ वज़न-सा आ गया
उस तरफ़ भी चूड़ियों की और खन-खन बढ़ गई

हम ग़रीबों के घरों की वुसअतें मत पूछिए
गिर गई दीवार जितनी उतनी आँगन बढ़ गई

मशवरा औरों से लेना इश्क़ में मंहगा पड़ा
चाहतें क्या ख़ाक बढ़तीं और अनबन बढ़ गई

आप तो नाज़ुक इशारे करके बस चलते बने
दिल के शोलों पर इधर तो और छन-छन बढ़ गई ..



गुरुवार, 15 नवंबर 2012

कहने की सीमा होती है, सहने की सीमा होती है;

कहने की सीमा होती है,

सहने की सीमा होती है;

कुछ मेरे भी वश में, 

मेरा कुछ सोच-समझ अपमान करो!

अब मत मेरा निर्माण करो

शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना , हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।

उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।

छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।

उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।

वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।

रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।

तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।

हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।

मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना.

रविवार, 4 नवंबर 2012

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