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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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सोमवार, 9 दिसंबर 2019

राजनिति में सक्रिय होना कोई बुरी बात नहीं , लेकिन हार कर निष्क्रिय होना ये गलत बात है- लव तिवारी

राजनिति में सक्रिय होना कोई बुरी बात नहीं , लेकिन हार कर निष्क्रिय होना ये गलत बात है, किसी भी गांव का एक ही प्रधान होता है और प्रत्याशी अनेक ,तो क्यों नहीं हारे प्रत्याशी विपक्ष का काम करके, आने वाले नए प्रधान को उसके कार्यो में सहयोग और अगर वो कार्यो के प्रति असंवैधानिक, धोखा धड़ी करता है ,तो इन कार्यो को रोके , यहाँ सब उल्टा होता है प्रत्याशी चुनाव से पहले उत्तेजित होकर गांव के विकास की राजनीती करता है और हार जाने पर द्वेष और बदले की भावना की राजनीति, और हर एक प्रत्याशी को चाहिए की वो सक्रीय होकर राजनिति में सहयोग करके गांव को विकास की एक नयी राह दे , और किसी भी छेत्र के नव निर्मित प्रधान को ये चाहिए को उन प्रत्याशी से मिले जिनकी सामाजिक गरिमा ,कार्य अनुभव, योग्यता हो ,और उनके सहयोग की भी जरुरत गांव के विकास में उपयोगी हो , साथ में ये भी पुराने प्रधानो के द्वारा किये गए अनैतिक कार्य और संसाधनों का दुरपयोग का हिसाब ले, पुरे प्रदेश और देश राजनितिक व्यवस्था चरमरा सी गयी , और नए निर्मित प्रधान केवल अपने कार्यकाल के बारे में सोचते और यह प्रक्रिया निरतंर चलती जाती है, इस प्रकार की राजनिति से केवल गांव के विकास में ही नहीं रुकावट आती है बल्कि आगे आने वाली पढ़ी भी इस प्रकार के राजनितिक दल दल में फसती जाती है, इसका दुस प्रभाव निरतंर देखने को मिलाता है ,इस पोस्ट को किसी राजनितिक पार्टी या किसी प्रत्याशी के गरिमा को आहत करने के लिए नहीं लिखा गया है ,इसका उद्देश्य जागरूकता और सामजिक ब्यवस्था को सही करना है
प्रस्तुति- लव तिवारी
+919458668566



शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

ओवरलोड वाहनों के कारण बार बार क्षतिग्रस्त वीर अब्दुल हमीद सेतु ग़ाज़ीपुर - लव तिवारी

वीर अब्दुल हमीद सेतु गाज़ीपुर का यह पक्का पुल जो पूर्व प्रधानमंत्री श्री मति इंदिरा गांधी जी के द्वारा ग़ाज़ीपुर की जनता को सौगात के रूप में दिया गया था। 10 सितम्बर 1965 में परमवीर चक्र विजेता स्वर्गीय श्री वीर अब्दुल हमीद जी के पूर्ण तिथि इस पुल का नाम वीर अब्दुल हमीद सेतु रखा गया जिसकी लंबाई लगभग 810 मीटर है । इस पक्की पुल की विशेषता (नेशनल हाईवे 97) को मुख्यरूप ग़ाज़ीपुर और बिहार के सीमा को NH 97 के माध्यम से जोड़ना । ग़ाज़ीपुर सैयदराजा मार्ग इसी हमीद सेतू की मदद से जुड़ा हुआ है । वर्तमान में आलाधिकारियों के आदेश ताक पर सुहवल एवं रजागंज पुलिस की मिली भगत से धडल्ले से जारी है ओवरलोड वाहनों का संचालन सेतु पर एक बार फिर खतरा मडरा रहा है, इस खतरा से कभी भी कोई बड़ी दुर्धटना हो सकती है और पूल क्षतिग्रस्त हो सकता है। ऐसा यह पहली बार नही है इस ओवर लोड के चक्कर मे पुल कई बार क्षतिग्रस्त चुका है। इसका दुष्परिणाम सबसे ज्यादा समीपवर्ती गांवों को जैसे- युवराजपुर पटकनिया, बवाडे मेदनीपुर रेवतीपुर सुहवल के लोंगो होता है। किसान की खेती भी इस दुष्परिणाम से कई बार प्रभावित हो चुकी है । आलू के खेती के समय पुल के क्षतिग्रस्त होने से किसानों को सही समय पर आलू को कोल्डस्टोरेज में न रखने से बहुत बड़ा नुकसान का सामना करना पड़ा था।

इस सब समस्यायों का सबसे बड़ा पुलिस थाना सुहवल और राजगंज चौकी ग़ाज़ीपुर के  कारण है। इनकी लूट खसोट के चक्कर से स्थानीय नागरिकों को बहुत नुकसान के साथ दुर्घटना का भी शिकार होना पड़ता है। इस विषय पर सरकार एवम जिले के आला अधिकारियों को इस समस्या का पूर्ण निदान अवश्य ढूढना चाहिए। और पुलिस के इस लापरवाही के प्रति उचित कार्यवाही करनी चाहिए।।

लेखक- लव तिवारी
+91-9458668566
ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश

गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

बहुत खूबसूरत जवां एक लड़की न जाने कहा से - लव तिवारी

बहुत खूबसूरत जवां एक लड़की ।
न जाने कहा से ख्यालो में आयी।।

तकल्लुफ़ की बातें बनावट नही।
न जाने वो कैसे मेरे दिल को भाई।।

वो चेहरा गुलाबी वो आँखे शराबी।
मगर उसके होंठो पर लाली थी ऐसी

न जाने कहाँ से ख्यालो में आयी 
बहुत खूबसूरत जवां एक लड़की।।

परी तो ये मैंने ये देखी नही है ।
यू लगती है मुझको परी से भी प्यारी।।

मेरे दिल की ख्वाईश तमन्ना है ऐसी।
हो जाये वो मेरे सपनों की रानी ।।

बहुत खूबसूरत.......
तकल्लुफ़= दिखवाया, बनावटी
रचना- लव तिवारी
पहली ग़ज़ल - वर्ष 2005


  

शनिवार, 30 नवंबर 2019

चारों वर्णों के उदय ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र - लव तिवारी

ब्राह्मण 

              एक ऐसा शब्द जिसे सुनकर वामपंथी विचारधारा और भीमवादी ईर्ष्या से भर उठते हैं, मुस्लिम समुदाय ब्राह्मण शब्द उच्चारण से भी कतराते हैं, आखिर ये शब्द ब्राह्मण है, क्या।क्यों इतनी नफ़रत इस एक नाम से?व्यवहार पटल और सामाजिक परिदृश्य से उक्त प्रश्न की समीक्षा:-

उत्पत्ति:-
                 मनुष्य योनि में सर्वप्रथम ब्राह्मण की उत्पत्ति होती है।यानी ब्राह्मण के सिवाय कोई और वर्ग नहीं था,उस समय और सृष्टि के आरम्भ में मनुष्यों की संख्या भी अत्यल्प थी,तब आवश्यकता भी उनकी सीमित ही थी,इसके पीछे दो कारण प्रयुक्त थे,मंत्र शक्ति और संख्या में अत्यल्पता। 

                जैसे जैसे आबादी बढ़ी,आवस्यकता में भी वृद्धि हुई,और आबादी का विस्तार ही उन्नत व्यवहार क्रम के पालन का सबसे बड़ा बाधक बना, जिससे संस्कार हीनता उत्पन्न हुई,और संस्कारहीनता ने अविद्या को जन्म दिया,जिसका परिणाम यह हुआ,की मंत्र शक्ति से मंत्र और भौतिक दोनों युक्ति का इस्तेमाल किया जाने लगा,मंत्रशक्ति के अवनमन और भौतिकता के उदय ने संचय को जन्म दिया,यही से संचय संरक्षण की आवश्यकता महसूस की जाने लगी।जिसके परिणाम स्वरूप एक मजबूत वर्ग का निर्माण हुआ,जिसे क्षत्रिय वर्ण के नाम से जाना जाता है।

                        क्षत्रिय समाज के उदय से जहाँ एक ओर भौतिकता को आरक्षण मिला,वही सत्ता नाम की दुर्व्यवस्था का भी उदय हुआ,और यही से शक्ति प्रदर्शन आरम्भ हुआ,जिसके कारण ज्यादा संचय और डर की भावना का जन्म हुआ,संचय और रक्षण के परिणाम स्वरूप क्षत्रियों को दिया जाने वाला कर ही वैश्य वर्ण का जन्मकारण बना।क्योंकि हम आपसे सेवा लेगा,तो हमारा कर्तव्य बनता है,की आपकी आवस्यकता की पूर्ति हम करें।यही आवस्यकता और आबादी विस्तार वैश्य वर्ण का जन्मकारण हुआ।

                     वैश्य समाज की उत्पत्ति से जहाँ एक ओर ब्राह्मण हासिये पर जाने लगे,वही भौतिकता के चरम के कारण वैश्य वर्ण निरन्तर आगे बढ़ता गया।परन्तु सभी की एक निश्चित सीमा होती है, उस सिमा के बाद अन्य का उदय निश्चित ही होता है।उसी प्रकार वैश्य में कार्यभार वृद्धि शुद्र या श्रमिक वर्ग की उत्पत्ति का कारण बना।एक ओर जहाँ संस्कार के अवनमन के कारण ही समस्त वर्गों का निर्णय हुआ,वही इन वर्णों में जटिलता और उपवर्ग विस्तार भी हुआ।

                   इस प्रकार चारों वर्णों के उदय का एकमात्र कारण संस्कार हनन ही था,जो जनसंख्या वृद्धि के परिणाम स्वरूप आरम्भ हुआ।और अन्य वर्णों में भी यही संस्कारजन्य अवनमन अनेक वर्गों का निर्माण का कारण बना।
                    उपर्युक्त आधार पर देखने से ज्ञात हो जाता है,की ब्राह्मण निश्चित ही संस्कर ही है, न यह कोई वर्ण है,न जाति है,न ही कोई पदवी।संदर्भ:-श्रुति।
अब प्रश्न यह उठता है,की जिस प्रकार यह तर्क दिया जाता है, की कर्म से सभी ब्राह्मण और शूद्र बनते हैं, वे कृपया यह बताने का कष्ट करें, की #ब्राह्मण_का_कर्तव्य_क्या_है? क्योंकि संस्कार का कोई व्यवहार कर्म तो लक्षित नहीं होता,और कर्म प्रकार से  देखा जाय तो कर्म सप्तभूमिका अनुसार ही होता है,जो उन्नत और उत्तम संस्कारजन्य ब्राह्मण होगा,वह उत्तम भूमिका में ही कर्म करेगा।और जो निम्न संस्कारजन्य होगा,वह निम्न।
                         यह प्रश्न यही पर दम तोड़ देता है,की कोई भी कर्म से ब्राह्मण या शूद्र होता है।अगर इस तर्क को स्वीकृति दी जाय, तो यह प्रमाणित करने की सामर्थ्य किसी मे भी नहीं, की ब्रह्मविद्या की ग्रहणशीलता अनेकों जन्मों के उत्तम संस्कार का परिणाम ही होती है।जो उसके पूर्वजन्मों के उत्तम कर्मों के फलस्वरूप उसे प्राप्त होती है।संदर्भ:-गीता,गरूण पुराण।

#दण्ड_विधान_से_ब्राह्मण:-
                                आजकल वामी और भीमवादियों से अक्सर सुनने को मिलता है, की #मनुस्मृति में वर्णित दंडविधान में सबसे कम या नगण्य सजा ब्राह्मण को ही बताई गई है, जबकि सर्वाधिक सजा शुद्र वर्ण को।उनके लिए एक सामान्य से तर्क जो मनुष्य उत्तम संस्कारजन्य वर्तन करने वाला हो,जिसके #समस्त_कर्म_अकृतक अवस्था के हों,भला वह किस प्रकार किसी को हानि पहुंचा सकता है,अगर दुर्भाग्यवश उससे किसी को कोई क्षति हो भी जाती है,तो वह उस क्षति का कारक स्वयं को ही स्वीकार कर स्वयं को नष्ट करना ज़्यादा उचित समझेगा।क्योंकि संस्कारजन्य हनन एक बार हुआ,तो उसकी भरपाई कठोर तप से ही पूरी की जा सकती है।जो कोई भी राजा या समाज उतनी कठोरतम सजा नहीं दे पाएगा।
          फिर भी मनुस्मृति में शुद्र की सज़ा का दुगना वैश्य,वैश्य का दुगना क्षत्रिय और क्षत्रिय का चार गुना सज़ा का प्रावधान ब्राह्मण के लिए किया गया है।राजकरण से सजा में चूक होने पर न केवल राजा का सिंहासन च्युत होना कहा गया है,बल्कि ब्राह्मण का तत्काल वानप्रस्थ जीवन का उल्लेख मिलता है।
                           इस प्रकार जो ब्राह्मण रूपी संस्कार को धारणा करने वाला है, वही ब्राह्मण है,वह जन्म से ही ब्राह्मण है,और अपने कर्म से ब्रह्मपद को पाने का अधिकारी बनता है।वरना गरूण पुराण के उल्लेख से अत्यंत नीच योनि को प्राप्त करने वाला बन चौरासी में ही भ्रमण करता है।

             ★★★ ★जय पशुराम- +919458668566 ★★★★





शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

कल एक छलावा है, आज पर यकीन कर- लव तिवारी

कल एक छलावा है, आज पर यकीन कर ।
जिंदगी का क्या भरोसा, इस पल को अजीज कर।।

रास्ते कई अनजाने है, चलना यहाँ संभल कर ।
हैं जमाना दुश्मन यहाँ, न कोई ऐसी तक़सीर कर ।।

मुझको मिला एक राही, रास्ते मे जो छोड़ गया ।
मैं किस पर भरोसा करू, मिला ऐसा तकदीर गर ।।

तक़सीर - भूल 
रचना- लव तिवारी
दिनांक - 29- नवम्बर-2019



दिन रात रहो मेरे पास तुम- लव तिवारी

कुछ दूर चलो मेरे साथ तुम ।
दिन रात रहो मेरे पास तुम ।।

तेरे बिना मुझे चैन कहाँ ।
आते रहो मुझे याद तुम ।।

ये जिंदगी नही अब तेरे बिना ।
बन जाओ मेरे हमराज़ तुम ।।

तुम बिन कोई मेरा नही ।
मिलते रहो हर बार तुम ।।

ये मौत का अब क्या भरोसा ।
आ जाओ मेरे अब पास तुम।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 28 नवंबर 2019

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

मुझे बहुत प्रिय था साथ तुम्हारा- लव तिवारी

 बहुत प्रिय था बस साथ तुम्हारा।
आते जाते तुम देखा करते थे जो चेहरा हमारा ।।

बड़ी हसीन दौर था और तुम्हारा साथ भी।
नरज किसकी लगी जो सबकुछ बिखर गया हमारा ।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 20- नंवबर- 2019

बुधवार, 20 नवंबर 2019

मैंने तुम्हें चाहा कहने दो मुझे- लव तिवारी

मैंने तुम्हें चाहा, कहने दो मुझे ।
अब तो अपने दिल मे रहने दो मुझे।।

मेरे जज्बात मेरे दिल की तम्मना हो तुम ।
कब से नही देखा तुम्हे मिलने दो मुझे।।

आओ करीब तुम रखो न फासला मुझसे ।
करो रहम मुझ पर अब न बिछड़ने दो मुझे।।

तुम्हे छोड़ कर रही न कोई ख्वाईश अब तो
अगर बिछड़े तुम  तो मौत ही मिले मुझसे।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 19- नंवबर-2019



शनिवार, 16 नवंबर 2019

आप की घुड़सवारी किसी की जिंदगी है- लव तिवारी

आपकी घुड़सवारी,किसी की जिंदगी हैं। हर एक जीव जीव होता है दर्द सबको होता हैं,चोट सबको लगती हैं,खून सबको आता हैं,लेकिन ये बेजुबान हैं,ये अपना दर्द आपकी नही बता सकते। एक घुड़सवारी के पीछे इनका दर्द शायद ही कोई जानता हो,जीतता तो सिर्फ इंशान हैं,इस बेजुबान की आँखों पर पट्टी बंधी होती हैं,इसे हार जीत का पता नही,बस आपके इशारों पर दौड़ता हैं,और आपको जीता भी देता हैं, आपकी जीत के पीछे इनका कितना दर्द हैं वो कभी नही सोचा? 

ग़ाज़ीपुर के समाज सेवी प्रवीण तिवारी पेड़ बाबा - लव तिवारी

मेरे पैतृक गांव युवराजपुर ग़ाज़ीपुर से गहरा तालुकात है माननीय श्री प्रवीण तिवारी पेड़ बाबा जी का ननिहाल मेरे गांव मेंं है। आदरणीय गुरू जी श्री प्रवीण तिवारी  का आशीर्वाद हम दोनों भाइयों के छात्र जीवन पर रहा है । आदरणीय गुरु जी को समर्पित ये चार लाइन की कविता

खुद की कश्ती का खुद ही पतवार बनो ।
हो सके निर्बलों के जीवन का मददगार बनो।।

जिंदगी में एक तमन्ना एक ख्वाईश रखो तुम।
मिल जाये दुखिया कोई उसका तुम फरमान बनो।।

नही खुदा इस धरती पर ना कोई भगवान यहाँ।
किसी गरीब की सेवा कर धरती का वरदान बनो ।।

रचना- लव_तिवारी
दिनांक- 15 नंवबर 2019
युवराजपुर ग़ाज़ीपुर
232332





बुधवार, 6 नवंबर 2019

जीव हत्या पाप है -लव तिवारी

भीष्म पितामह कुरुक्षेत्र में शरशैया पर पड़े थे..कृष्ण उनसे मिलने आये तो भीष्म बोले कृष्ण मैंने ऐसे कौनसे पाप किये हैं जिनकी इतनी बड़ी सजा मिली. मेरा पूरा शरीर तीरों से बिंधा पड़ा हैं. प्राण निकल नहीं रहे हैं....दर्द इतना हैं की शब्दों में नहीं कहा जा सकता..कृष्ण ने कहा सब पूर्व जन्मो का फल हैं. भीष्म ने कहा मैं पिछले जन्म देखने की कला जानता हूँ...मैंने पिछले 100 जन्म देख लिए हैं कृष्ण मैंने कोई कर्म ऐसा नहीं किया जिसका फल ये हो..कृष्ण ने कहा 101 वां भी देख लो...भीष्म ने देखा की वो अपने रथ से जा रहे थे..आगे सिपाही थे...एक सैनिक आया और बोला महाराज मार्ग में एक सर्प (सांप) पड़ा हैं. रथ उसपर से गुज़र गया तो वह मर जायेगा. भीष्म ने कहा नहीं वह मरना नहीं चाहिए...एक काम करो उसे किनारे फेंक दो. सैनिक ने उसे भाले से उठा कर खाई में फेंक दिया. वह सर्प खाई के एक कंटीले वृक्ष में उलझ गया. जितना प्रयास उससे निकलने को करता उतने ही कांटे उसके शरीर में घुस जाते. कई दिनों टाक उन्ही कांटो में फंसे रहने के बाद उसके प्राण निकले...तब कृष्ण ने कहा पितामह ये तो आपके द्वारा किया वह पाप था जो अनजाने में हुआ...उसका परिणाम इतने जन्मो बाद भी आपको भोगना पड़ रहा हैं...सोचिये जो लोग जान बूझ कर जीव हत्या करते हैं उनकी क्या दशा होगी??

कोई धर्म नहीं कहता की जीव हत्या करो...क़ुरबानी/बलि से आशय जीव की हत्या से नहीं अपितु अपनी किसी प्रिय वस्तु का त्याग अल्लाह, इश्वर के प्रति करने से हैं...धर्म पाप का पर्यावाची नहीं विलोम हैं. हत्या से बचें...छुरी चलते वक़्त उस जीव की तड़प को महसूस करें...उसकी वेदना, पीड़ा, कराह, बद्दुआ ही दे सकती हैं आपको दुआ नहीं...
-लव तिवारी

रविवार, 20 अक्टूबर 2019

ऐसे तो मर जायेंगे हम। तेरे बिन न रह पाएंगे हम- लव तिवारी

ऐसे तो मर जायेंगे हम।
तेरे बिन न रह पाएंगे हम।।

चाहे दुनिया कुछ भी करले।
एक दूजे के हो जायेगे हम।।

आओ मिलकर साथ चले हम।
जीवन को सफल बनायेगे हम।।

कभी तुम्हारा साथ न छूटे।
उम्र भर साथ निभायेंगे हम।।

दुनिया की इस कश्मोकश में।
 प्रेम के गीत गायेंगे हम।।

ऐसे तो मर...

रचना- लव तिवारी
दिनाक- 20-अक्टूबर-2019


ये न सोचे कि सोचने से सब हो जाएगा। कुछ करना होगा तभी मंजिल मिल पायेगा- लव तिवारी

ये न सोचे कि, सोचने से सब हो जाएगा।
कुछ करना होगा, तभी मंजिल मिल पायेगा।।

घर मे बच्चा न रोये तो माँ समझें न उसके भूख को।
अगर वो भी कुछ न करे तो भूखा ही सो जाएगा।।

आजका आदमी दिन पर दिन निक्कमा होता जा रहा।
यही हालात रहे तो ज़माना कैसे चल पायेगा।।

देश की हालात पहले से बत्तर नही है अब।
अगर इंसान इंसानियत को जो समझ पायेगा।।

मुझको भी मिला था एक शख्स अजनबी बनकर।
कौम से हटकर शायद ही वो कभी दोस्त बन पायेगा।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 20-अक्टूबर-2019
मो नो +91-9458668566






शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

दो दिन जा जग में मेला सब चला चली- अनूप जलोटा

चलती चक्की देख के दिया कबीरा रो
दो पाटन के बीच में साबुत बचा ना कोई

दो दिन का जग में मेला सब चला चली का खेला
दो दिन का जग में मेला सब चला चली का खेला

कोई चला गया कोई जावे,कोई गठरी बांध सी भावे-2
कोई खड़ा तैयार अकेला रे कोई खड़ा तैयार अकेला
चला चली का खेला रे खेला रे खेला रे
दो दिन का जग मे मेला सब चला चली का खेला
दो दिन का जग .......

मात-पिता सूत नारी भाई अंत सहायक नाही-2
फिर क्यो भरता पाप का ठेला रे
फिर क्यो भरता पाप का ठेला
चला चली का खेला रे खेला रे खेला रे
दो दिन का जग मे मेला सब
चला चली .........

ये तो है नश्वर संसारा भजन को करले ईश का प्यारा-2
ब्रह्मानंद कहे सुन चेला रे ब्रह्मानंद कहे सुन चेला
चला चली का खेला रे खेला रे खेला रे
दो दिन का जग मे मेला सब चला चली का खेला

दो दिन का जग.....चला चली......4



बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

छुपते फिरते हो तुम क्यो न जाने मुझसे। कोई उलझन है तुमको बताओ न मुझसे- लव तिवारी

छुपते फिरते हो तुम क्यो न जाने मुझसे।
कोई उलझन है तुमको बताओ न मुझसे।।

हक़ीक़त क्या है ये पता तो मुझे भी चले।
जो तुम पास थे मेरे,अब क्यो दूर हो मुझसे।।

मैं हर वक़्त जुबान पर नाम जो तेरा लेता हूं।
पता नही बन गए तुम मेरे ख़ुदा कबसे ।।

कई हसीन रुख आज भी फिदा है मुझपर।
मेरी निगाह तुमको ढूढ़ती है हर जगह तबसे।।

कभी आना तो न छोड़ कर जाना कभी मुझको।
मैं आशिक हुँ तुम्हारा और बस दीवानी है तुमसे।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 16-अक्टूबर-2019















रविवार, 13 अक्टूबर 2019

मैं नाम उसका लूँ कैसे जिस नाम से बदनाम हुँ- लव तिवारी


अब कोई नही गिला तुमसे,अपनी जिंदगी से हैरान हूं।

न हो सका कोई अपना, इस बात से परेशान हुँ।।


मिलता नही हर किसी को, उसके मनमाफ़िक हमसफ़र।

मिला एक शख़्स मुझे बेवफ़ा, इस बात से हैरान हुँ ।।


कोई आकर मुझे पूछे, क्या दवा है तेरे दर्द की।

मैं नाम उसका लूं कैसे, जिस नाम से बदनाम हुँ।।


मैं अपने हाथ की लकीरों में, ढूढता हूं नाम उसका।

अब क्या है उसके दिल मे, इस बात से मैं अंजान हूँ।।


रचना- लव तिवारी

दिनांक- 13- अक्टूबर-2019


गुरुवार, 26 सितंबर 2019

जरा देर से आते हो, दिल सहम सा जाता है। पल भर के इस दौर को, बरसों की तरह लग जाता है- लव तिवारी

जरा देर से आते हो, दिल सहम सा जाता है।
पल भर के इस दौर को, बरसों की तरह लग जाता है।।

इतनी बेचैनी न थी,और पागलपन भी कभी नही।
तुमसे मिलने के थोड़े देर से, जान निकल सा जाता है।।

क्या जानो तुम मेरे दर्द को,ना समझो इस बिरहन को।
आते जाते तेरे ख़यालो में, बस दिन गुजर सा जाता है।।

अपनी बेताबी किससे कहे, तुम ही तो हो मेरे साजन।
सजनी की इस बात को समझो, जीवन फिर नही आता है।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 26-सिंतम्बर-2019


बुधवार, 18 सितंबर 2019

बहुत तलाश किया तुम्हें तुम्हारे जाने के बाद मिलता नही कोई फिर बिछड़ जाने के बाद- लव तिवारी

बहुत तलाश किया तुम्हें, तुम्हारे जाने के बाद।
मिलता नही कोई फिर, बिछड़ जाने के बाद ।।

मुझको भी चाहिए हमेशा, तुम्हारे रुख का दीदार हो ।
सफर ऐसे ही गुजर जाती है, बसअफ़साने के साथ ।।

क्या खता हुई जो तुम, इतना बदल गए ।
छोड़कर जाना था, तो जाते मेरे मरने के बाद ।।

आदमी हूँ मुझको भी, मोहब्बत की जरूरत है।
क्यो बदले तुम एकाएक, मुझें इतना चाहने के बाद।।

अब नही होगा किसी गैर से, मुझको मोहब्बत।
बदन ओढ़ लेगा कफ़न, तुम्हारे हसरतों के बाद।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 18-सितम्बर-2019
ब्लॉग- www.lavtiwari.blogspot.com




रविवार, 15 सितंबर 2019

क्यो हिंदू और मुसलमान बना फिरता है इंसान की आड़ में हैवान बना फिरता है - लव तिवारी

क्यो हिंदू और मुसलमान बना फिरता है ।
इंसान की आड़ में,हैवान बना फिरता है ।।

कुछ नहीं होगा इस जहाँ में मजहबी बनकर ।
शहर के गलियारों में, शैतान बना फिरता है ।।

राजनीति किसी की नही, जो तेरे साथ होगी ।
क्यों नेताओं का तू, फ़रमान बना फिरता है ।।

अब भी वक़्त है चलो, एक होकर मिलकर रहे ।
क्यों तू अपने कौम की भगवान बना फिरता है ।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 15- सितंबर-2019
संपर्क सूत्र- +91-9458668566


शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

समुद्र की कहानी - लव तिवारी

समुद्र की गहराइयों से हटकर समुद्र की एक प्रेरणा युक्त कहानी , समुद्र के किनारे जब एक लहर आया तो एक बच्चे का चप्पल ही अपने साथ बहा ले गया| बच्चा रेत पर अंगुली से लिखता है "समुद्र चोर है"| उसी समुद्र के एक दूसरे किनारे कुछ मछुआरे बहुत सारे मछली पकड़ लेते  और उनसे उनका व्यवसाय एवम धन अर्जित करते हैं|  वह उसी रेत पर लिखता है "समुद्र मेरा पालनहार है"| एक युवक समुद्र में डूब कर मर जाता है| उसकी मां रेत पर लिखती है "समुद्र हत्यारा है"| एक दूसरे किनारे एक गरीब बूढ़ा टेढ़ी कमर लिए रेत पर टहल रहा था| उसे एक बड़े सीप में एक अनमोल मोती मिल गया| वह रेत पर लिखता है "समुद्र दानी है"| अचानक एक बड़ी लहर आता है और सारे लिखा मिटा कर चला जाता है| लोग जो भी कहे समुद्र के बारे में लेकिन विशाल समुद्र अपनी लहरों में मस्त रहता है| अपने उफान और शांति वह अपने हिसाब से तय करता है| अगर विशाल समुद्र बनना है तो किसी के निर्णय पर अपना ध्यान ना दें| जो करना है अपने हिसाब से करें| जो गुजर गया उसकी चिंता में ना रहे| हार जीत, खोना पाना, सुख-दुख, इन सबके चलते मन विचलित ना करें| अगर जिंदगी सुख शांति से ही भरा होता तो आदमी जन्म लेते समय रोता नहीं| जन्म के समय रोना और मरकर रुलाना इसी के बीच के संघर्ष भरा समय को जिंदगी कहते हैं|



वाहन चलान से पीड़ित व्यक्ति की अभिव्यक्ति -लव तिवारी

इसका जुर्म का जुर्माना कौन भरेगा
धरती पर हो रहे अन्याय कौन सहेगा

अगर मौत मिल जाये खराब सड़कों से
खूबसूरत जिंदगी का हरजाना कौन भरेगा

चालान ऐसा की वेतन भी शर्मा जाये
घर मे भूखे बच्चो का निवाला कौन भरेगा

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 06- सितंबर-2019




शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

मेरे ख़ुदा तूमने मुझको क्यो ऐसे ख्वाब दिखाए- लव तिवारी

कहा चले जाते हो तुम, दिल मे तड़प जगा के
बरसो की प्यासी धरती पर, थोड़ी बूँद बरसा के

मुझको मिले नही तुम फुरसत के चंद लम्हो में
चाहत देखो ऐसी है बस मुझको तुम तड़पाते

ख्वाब जो देखा तुमको लेकर और न पुरे हो सके सपने
बड़ी खुसनशीब होती जिंदगी, जीवन मे जो तुम आते

इस जिंदगी में मुक्कमल, न हो सकी जो अपनी चाहत
मेरे ख़ुदा तुमने मुझको, क्यो ऐसे ख्वाब दिखाये

रचना - लव तिवारी
दिनांक- 30- अगस्त-2019








मंगलवार, 27 अगस्त 2019

वंशवाद से हटकर है भारतीय जनता पार्टी- प्रोफेसर डॉ दीपक कुमार शर्मा

अरुण जेटली अब नहीं रहे। पर उनका बेटा कहाँ है?और स्वर्गीय सुषमा स्वराज की बेटी कहाँ है? स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर, जिन्होंने अपने अंतिम दिनों में एक सार्वजनिक कर्तव्य के साथ नाक में ट्यूब डालकर काम करते रहे , उनके नथुने कहाँ हैं या उनका कोई बच्चा राजनैतिक गद्दी संभालने के दावे का साथ आगे आया?

स्वर्गीय पूर्व पीएम वाजपेयी, क्या उन्होंने अपनी विरासत को हासिल करने के लिए किसी उत्तराधिकारी को छोड़ा था? क्या आप नोटिस करते हैं? हम उनके बेटों और बेटी का नाम भी नहीं जानते।
हमारे मौजूदा प्रधान मंत्री, भगवान न करे, वह जिस दिन जाते हैं , क्या वो अपनी जगह कोई भाई भतीजा बिठाकर जाएंगे ?
बीजेपी में कई खामियां हो सकती हैं, लेकिन उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था बनाई है, जहां वे वंशवादी राजतंत्र नहीं बनाते हैं।
इसकी तुलना अन्य पार्टियों से करें जहाँ नेतृत्व एक वंश है और पार्टी एक पारिवारिक व्यवसाय की तरह है।
प्रोफेसर डॉ दीपक कुमार शर्मा




शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

तुम से ही जीवन अपनी कैसे इसे बर्बाद करेगे - लव तिवारी

अब नही याद करेंगे न कोई फ़रियाद करेगे
तुम से ही जीवन अपना कैसे इसे बर्बाद करेगे

तुमको शायद मालूम न हो बिछड़ते हो जब ख्वाबों में तुम
दिल सहम जाता हो जैसे,  सोचते किसको प्यार करेगें

मुझको पता तुम मेरी न हो, हो अमानत गैरो की
जान कर इन सच्ची बातो को, फिर कैसे इनकार करेगे

रखे सलामत ख़ुदा तुम को, और सारी खुशियां मिले 
मरते दम तक यही तमन्ना और दुआ हर बार करेगें

रचना- लव तिवारी
दिनांक -02- अगस्त-2019






गुरुवार, 1 अगस्त 2019

धुंधली पड़ रही अपनी तस्वीर बदल लें- डॉ एम डी सिंह

धुंधली पड़ रही अपनी तस्वीर बदल लें
चलिए खुद ही अपनी तकदीर बदल लें

कह दो काजिओं से हालात बदल गए
अब तो वे भी अपनी तहरीर बदल लें

सुनते-सुनते दुनिया अब ऊब रही है
कुछ तो जनाब अपनी तकरीर बदल लें

मुटा रहीं गर्दनों पर कुछ तो असर करे
पुरानी पड़ी अपनी शमशीर बदल लें

अपनी ही नहीं दिमाग की भी सुने दिल
असर करे जो अपनी तदवीर बदल लें

काजी- न्यायाधीश
तहरीर- लिखावट
तकरीर- भाषण
शमशीर -दो धारी तलवार
तदवीर -उपाय,प्रयत्न
डॉ एम डी सिंह




रविवार, 14 जुलाई 2019

वृक्ष ही जीवन है - लव तिवारी

शिक्षा और संस्कार दोनों अलग अलग विषय वस्तु है, एक तरफ शिक्षा जहा मानव के शरीर में ज्ञान के प्रकाश को प्रदर्शित करता है वही संस्कार शिक्षा का मानवीय एवम नैतिक प्रयोग को दर्शाता है, आज के ज़माने में किसे ज्ञान नहीं कि पेड़ के आभाव से पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है, और प्रकृति संसन्धान ही उच्च कोटि के मानवीय संसाधन है, शिक्षा और ज्ञान का एक विशाल समूह भारत की राजधानी दिल्ली में रहता है लेकिन संस्कार कही कही देखने को मिलता है ,हाँ यहाँ हर एक व्यक्ति 10 रूपये को 1 लाख करने के फ़िराक में है,

      एक छोटी सी घटना अपने जीवन में घटित हुई है एक बार हम सब अपने दादा जी के साथ बैठे हुए थे ,दादा जी का मतलब बाबा से है बाबा ने बुआ के लडके से फिरकी लेते हुए कहा मेरे जैसा कोई काम करने वाला है तुम्हारे गांव में, मैं दिन भर घर द्वार साफ सुथरा करता हूँ ,जिस तरह बाबा फिरकी ले रहे थे बुआ का लड़का भी फिरकी के अंदाज में बाबा को वास्तविकता से रूबरू कराया बोला की नाना जी आप के दरवाजे पर कितने पेड़ है और घर द्वार को झाड़ू से चमकाना कौन सी बड़ी बात होती है आप हमारे यहाँ चलिये मेरे बाबा के कार्यो का मूल्यांकन कीजिये आप 10% भी नहीं है, आप सभी मित्रों को बता दे जो सुख हमें अपने बुआ के यहाँ पेड़ो को देख के मिलता है वो अपने गांव में नहीं 50 से 100 मीटर की दुरी में सारे पेड़ो का समूह कटहल, सिरफल, बड़हल जामुन, आम के पेड़ो की कई विशेषताये , कार्य वास्तविक में वो होता है जो सामाजिक और नैतिक सोच से किया गया हो, हम अपने गुरु जी Praveen Tree जी में समाज के प्रति नैतिक ज़िमेदारी का अदभुत कार्य देखा है वाकई सराहनीय है, सराहनीय शब्द का मतलब इस पोस्ट में कई तस्वीरों के माध्यम से देखी गयी है कि  कैसे गुरु जी ने धन के आभाव में पौधों के सुरक्षा संबंधी कार्यो को बख़ूबी निभाया हुआ है और समाज के लोगों को एक सन्देश भी भेजा है जन समुदाय के कार्यो को करने के लिए धन से ज्यादा निष्ठा और लगन की जरुरत होती है
लिंक- https://m.facebook.com/SabkaaSahyog/

धन्यबाद  लव तिवारी










शुक्रवार, 14 जून 2019

पर्यावरण का स्थायी समाधान वन संरक्षण एवम वृक्षारोपण- लव तिवारी

पिछले कुछ दिनों से गर्मी के आतंक ने भारत देश को हिला कर रख दिया है, एक दिन तो यह आंकड़ा था विश्व के 15 सबसे गर्म शहरो में भारत के 10 शहर शामिल थे जिसमें राजस्थान के चूरू जिले का तापमान सबसे अधिक 50℃ से भी ऊपर था,  दोस्तों पानी का स्थायी समाधान नदी नालों को जोड़ना नहीं हो सकता, इसका स्थाई समाधान हमें हमारी जड़ों में और हमारी परंपरा में तलाशना होगा। हमारे पुरखों ने जंगलों से उतना ही लिया, जितना आवश्यक था। हमारे पुरखे सूखी लकड़ियों का प्रयोग करते थे। हरी टहनियों को तोड़ना पाप मानते थे।


हाल में ही भारत के प्रधानमंत्री से एक विशेष समुदाय के व्यक्ति के द्वारा मुलाकात हुई उसने भारत मे संस्कृत अध्ययन पर विशेष जोर देने को कहा संस्कृत भाषा मे पेड़ संरक्षण पर विशेष बल दिया है पिछली तीन सदियों से प्रकृति के साथ भरपूर छेड़छाड़ की गई। यह प्रक्रिया औपनिवेशिक भारत के पहले वन अधिनियम कानून से शुरू हुई। आज़ादी के बाद 1970 के बाद हमने सबसे अधिक प्रकृति और उसके उपादानों के साथ छेड़खान की है। इसका परिणाम हमें अत्यधिक तापमान, जल की कमी और सूखे के रूप में हमारे सामने आया है।
दोस्तों जल का स्थायी समाधान  पर्यावरण में बढ़ते तापमान का स्थायी उपाय अधिकाधिक वृक्षारोपण है। वृक्षारोपण की बात हर साल होती है, इसलिए हमें यह बात सामान्य लगती है, लेकिन इस बार इसे एक उत्सव के रूप में मनाया जाए तो और अधिक बेहतर होगा।
आने वाले मानसून के मध्य में हम 30 दिनों तक अपने अपने क्षेत्रों में वृक्षारोपण का कार्य करें। इसकी शुरुआत अपने-अपने घरों से कीजिये, इसके बाद सार्वजनिक स्थलों- विद्यालय, लोक धार्मिक स्थलों, ग्राम पंचायत भवन, डिस्पेंसरी, सड़क के किनारे, अथाई पर वृक्षारोपण का कार्य करेंगे। इससे एक ओर जल और जंगल सुरक्षित होगा वहीं दूसरी तरफ हमारे पुरखों के लिए यह एक आदर्श श्रद्धांजलि होगी। हमारी विचारधारा आदिवासियत की दिशा में यह एक सशक्त कदम भी होगा।



मुस्कुलर डिस्ट्रॉफी - कई निराशाओं में व्यथित मन ढूढ़े एक आशा- लव तिवारी

हिंदी हिन्दू और हिंदुस्तान का जिक्र करते हुए अपनी कहानी लिख रहा हूँ , हिन्दू और हिंदुस्तान की बात इस लिए है कई बाबाओ ने हिन्दू रीति रिवाज को इस हिंदुस्तान में बर्बाद कर रखा है, यही कारण भी हिन्दू धर्म में लोगो की आस्था दिन पर दिन खत्म होती जा रही है , सेक्टर 15 स्थित अपने आवास के पास एक नाई की दुकान है उस दुकान का मालिक ने जल्द में ही ईसाई धर्म को धारण कर लिया , मैंने पूछा कि ऐसा क्यों किया तो बोला मेरी धर्म पत्नी हमेशा बीमार रहती थी और जैसे मैने ईसाई धर्म को धारण किया मेरे पत्नी को पहले से बेहतर है।

अपनी कहानी पर आते है हम दो भाइयों लव और कुश तिवारी का जन्म 11 अगस्त 1987 को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर के युवराजपुर के ग्राम में हुआ था बचपन की पढ़ाई लिखाई गांव में हुई और बाद की पढ़ाई हाइस्कूल और इंटरमिडियड की पढ़ाई शहर के सरकारी स्कूल राजकीय सिटी इंटर कॉलेज में हुई। पढ़ाई के साथ साथ इस स्कूल में अपना एक अलग बर्चस्व था, इसका मुख्य कारण हम दोनों भाइयों को संगीत के प्रति रुचि और कॉलेज के हर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ के भागीदारी, राजकीय सिटी कॉलेज में पढ़ाई के बाद आगे की स्नातक तक कि पढ़ाई स्नाकोत्तर महाविद्यालय ग़ाज़ीपुर में पूरी हुई , स्नाकोत्तर की पढ़ाई के हम दोनों भाइयों को अलग अलग शहर जाना पड़ा मुझे प्रबंधन में पोस्ट ग्रेजुएट के लिए ग्रेटर नोएडा गौतम बुद्ध नगर उत्तर प्रदेश आना पड़ा और वही मेरे भाई को कंप्यूटर में पोस्ट ग्रेजुएट के लिए काशी बनारस आना पढ़ा, पढ़ाई पूरा होने के एक साल तक सब कुछ ठीक चल रहा था फिर एक दिन भाई को लगा कि मेरा शरीर दिन पर दिन कमजोर होता जा रहा है फिर उसने इस बात की जिक्र पिता जी से की , यही कोई दिसंबर 2012 में पिता जी ने उसे नोएडा से वाराणसी में बुला लिया, वही सारे परीक्षण के बाद पता चला कि हम दोनों भाइयो को मुस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की भयानक बीमारी है इसकी बात की पुष्टि के वाराणसी के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय हॉस्पिटल ने हम दोनों भाइयों को अखिल भारतीय आयुवेर्दिक संस्थान जिसे एम्स दिल्ली कहा जाता है वहाँ के लिए भेजा, और वहाँ इस बात की पूर्ण पुष्टि हुई ।

यही से इस पूरे लेखन का शीर्षक कई निराशाओं में  व्यथित मन ढूढे  एक आशा, कई विशेष जानकारों का यह मानना है कि इस रोग का कोई इलाज संभव नही और किसी के द्वारा यह भी सुनने को मिलता है कि भारत के आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में ही एक इलाज संभव है, अब इस बात की पुष्टि और रोग के सही उचार के लिए देश के विभिन्न प्रदेशों के आयुर्वेद के चिकित्सक के पास आना जाना हुआ लेकिन कोई कारीगर इलाज नही मिला , इस बीच कई लोगो द्वारा ये सुझाव दिए गए दवा के साथ दुआ की भी जरूरत होती है फिर यहीं से शुरू हुई लूट खसोट की कहानी और फिर हिंदू धर्म के प्रपंच का अनोखा किस्सा , मरता क्या न करता हिंदुस्तान के इन पापी ब्राम्हणों ने बहुत रुपये तक चुना लगाया और फिर भी बात नही बनी, यही पर उस नाई की बात में सच्चाई नजर आई, उसको भी हिन्दू धर्म के इन  ढोंगी बाबाओं भी लूटा होगा और बाद में बेचारा थक हार कर ईसाई धर्म को मानने के लिए मजबूर होना पड़ा होगा।

धन्यबाद - लव तिवारी
नोएडा उत्तर प्रदेश
+91-9458668566




बुधवार, 5 जून 2019

विश्व पर्यावरण दिवस पर आधुनिक मानव की मानसिकता - लव तिवारी

कुल्लू में तापमान 33℃ है ऋषिकेश में तापमान 38℃ है नैनीताल में 26℃ है डलहौजी में भी 25 से 30 के बीच मे है कुफरी में 23℃ है शिमला में 25℃ है और मसूरी में भी 26 है |इन सभी हिल स्टेशन्स के तापमान लगातार बढ़ रहें , दिल्ली से शिमला के लिए रोज हजारों लोग निकलते हैं और गर्मी के मौसम का आनंद लेकर चले आते है आते जाते हजारों रुपये खर्च के साथ जो लंबा जाम लगता है वहाँ जिसकी कोई हद नही शिमला को दिल्ली बनाने का प्रोसेस लगातार जारी है |जब इन प्राकृतिक जगहों पर ये हाल है तो भैया UP बिहार दिल्ली राजस्थान में 50℃ + तापमान पहुँचना नार्मल है ।


AC घर घर लग रही स्कूल, हॉस्पिटल,सरकारी आवास, सरकारी कार्यालय प्राइवेट संस्थान हर जगह AC का ही बोल बाला है , बिना AC आप रह भी नही सकते,हम अपनी मौत अपने हाँथो लिख रहे ,गंगा सूख गई है , ग्लेशियर में बर्फ ही नही है पिघलेगा कहाँ से ।

गर्मी पड़ती है हम झुंझलाते हैं , जिनका फील्ड वर्क है उनकी हालत खराब है , जो ऑफिसियल वर्क करते है उन्हें तो कम दिक्कत का सामना करना पड़ता है, आदमी की जितनी आमदनी नही उससे ज्यादा पैसा शिकंजी , ठंडे पानी और गन्ने के जूस पर खर्च कर देता है ! सरकार भी सस्ती AC बाँटने निकली है , दुबई जो की रेगिस्तान में बसा है वहाँ तापमान 42℃ है ,और हमारे यहाँ 50 पहुँच रहा , हमारे यहाँ केवल पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण का कार्य किया जाता है और आज कल कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके वाहवाही लूटी जाती है

सरकारों को इस ओर ध्यान देना चहिये , एक सीमा के बाद तो AC भी काम नही करती 60 ℃ के बाद खून उबल जाएगा और सब मर जाएँगे,
इस बार ठंडी में कुहरा का दर्शन नही हुआ , वरना पूरे दिन कुहरा पड़ता था ,
सावन की झड़ी तो लोग भूल ही चुके हैं जब हफ़्तों महीनों लगातार बारिश होती थी रिमझिम रिमझिम ।
एक AC और लाइये चलाइये अपने सुकून की केवल ढुढिये और सो जाइये !! विज्ञान और प्रकृति की लड़ाई में विजेता सदैव प्रकृति होगी लिख के ले लीजिए ।

प्रस्तुति - लव तिवारी
पर्यावरण दिवस पर विशेष
5 जून 2019





मंगलवार, 4 जून 2019

केजरीवाल के दिल्ली मेट्रो और डीटीसी बस में महिलाओं के मुफ्त यात्रा के संदर्भ में -लव तिवारी


मजबूर मजदूर और लड़की - ये वाक्य अब दिए गए केजरीवाल के दिल्ली मेट्रो और डीटीसी बस में महिलाओं के मुफ्त यात्रा के संदर्भ में है, वाकई केजरिवाल पर ये कहावत भी सटीक बैठती है, अँधेर नगरी चौपट राजा टका सेर भाजी टका सेर खाजा, बात सोचनीय है कि क्या मेट्रो या डीटीसी में फ्री सेवा उन गरीब मजदूरों के बजाय दिल्ली के उन महिला वर्ग को मिलनी चाहिए जिनकी वेतन हजारो एवम लाखो में है, फिर इस एलान से मेट्रो के विस्तार पर पूरा असर पड़ेगा और जिस मेट्रो की वजह से दिल्ली प्रदूषण रहित है पेड़ लगाने के बजाय दिल्ली के इवेन और ओड का फार्मूला भी फैल रहा, जहा लोगो के द्वारा अपनी वाहन छोड़ कर मेट्रो यात्रा या पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर देना चाहिए वहाँ लोगो ने निजी वाहनों की संख्या बढ़ा दी जिसके पास इवेन नंबर का वाहन था उसने ओड नंबर का वाहन खरीदा, वैसे बहुत हद तक ये फार्मूला पसंद आया लेकिन एक साल तक ही इसे प्रयोग में लाया गया,केजरीवाल ने महिलाओं को मेट्रो मुफ्त करके दिल्ली चुनाव के बाद मेट्रो बंद करने की पूरी व्यवस्था कर दी, घाटे में कैसे चलेगी मेट्रो? वैसे मेरे हिसाब से वोटर जब 72 हजार ठुकरा सकता है तो मुफ्त यात्रा क्या मायने रखती है |

शुक्रवार, 3 मई 2019

आरक्षण पर एक हरिजन की जुबानी मध्यप्रदेश - लव तिवारी

मध्यप्रदेश भारत देश का एक अनोखा राज्य जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अनोखा पहचान इसके पीछे भारत देश में इसकी भगोलिक स्थिति का मध्य होना है, आज कल तो विशेष रूप को सुशोभित करता यह प्रदेश क्यों की महाकुंभ की आस्था को संजोता महाकाल की नागरी उज्जैन पुरे भारत के विभिन्न नगरो के लोगो जमावड़ा , आस्था भक्ति विश्वास को संजोता यह धार्मिक पर्व - महाकुम्भ

मध्यप्रदेश से निकलते समय इस बात की जानकारी हुयी क़ि वहाँ की शिवराज सरकार ने आरछण के आधार पर होने वाले प्रमोशन को बंद कर दिया है, इस बात की ख़ुशी मिली , दोपहर के समय जब हम घर से रेलवे स्टेशन की तरफ निकले रस्ते में ऑटो की सवारी कर स्टेशन को जाना था ,ऑटो वाले भाई से जब हम आरक्षण का जिक्र किये तो भाई भी बोला की दोस्त हम भी आरछण विरोधी है , फिर झट से मैंने दोस्त की जात का पता किया उसने बोला की श्रीमान हम जाती से हरिजन है , मैंने कहा की तब तो आप को इसका विरोध करना चाहिए तब उस व्यक्ति ने एक ऐसी बात बोली की मैं दंग रह गया , बोला आरछण हम को अपंग बना रही है और योग्य #व्यक्ति को उस जगह पर बैठने का अधिकार है, अगर योग्य व्यक्ति को आज के समय नौकरी नहीं दिया जाय तो सारे काम सही ढंग से न होकर ख़राब और सुस्त रूप को धारण करेगे ,जब मैं छोटा था तो मेरे पिता जी का स्वर्गवास हो गया माता जी भी 4 ,5 साल की उम्र में परलोक सिधार गयी, पालन पोषण दादा दादी ने किया ,आज कल सरकार के द्वारा जो हम सबको 4 से 10 किलो अनाज मिलता है उसके आधार पर रिक्शे वाले कहते जब घर बैठे खाने को मिल रहा है तो कमाने की क्या जरुरत,  आरक्षण विरोधी समाज का वो पड़ा लिखा वर्ग भी है जो किसी जाति धर्म को न देख कर देश का वास्तविक विकास  चाहता है, लेकिन राजनीती में बैठे देश के वो गद्दार जो आरक्षण और जाति धर्म को मोहरा बनाकर देश के साथ दुर्व्यवहार करते है और वोट बैंक की राजनीति

सोमवार, 11 मार्च 2019

गांव वाले कितने अच्छे होते है - लव तिवारी

कच्चे घर और पक्के रिश्ते होते थे
गाँव वाले कितने अच्छे होते थे

सुना है हर दरवाजे में अब ताला है
पहले तो हर घर मे बच्चे होते थे

अब तो कार में दुल्हन आती जाती है
पहले सिर्फ डोली और सिक्के होते थे

ये तो खुश्क़ पडी़ है नदिया झरने भी
याद है बादल कितने गहरे होते थे

क्या अब भी कोई खैलता है उस पीपल पर
जिस से हम दिन भर ही चिपके होते थे


शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

भगवान राम के कुल की विस्तृत जानकारी - वा‍ल्मीकि रामायण- ॥1-59 से 72।।

राम के कुल को रघुवंश या रघुकुल क्यूँ कहा जाता है?
भगवान् राम की वंश परंपरा
वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध।भगवान् राम का जन्म इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था।
मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु से विकुक्षि, निमि और दण्डक पुत्र उत्पन्न हुए। इस तरह से यह वंश परम्परा चलते-चलते हरिश्चन्द्र रोहित, वृष, बाहु और सगर तक पहुँची।
इक्ष्वाकु प्राचीन कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी।
रामायण के बालकांड में गुरु वशिष्ठजी द्वारा राम के कुल का वर्णन किया गया है जो इस प्रकार है:- ब्रह्माजी से मरीचि का जन्म हुआ।
मरीचि के पुत्र कश्यप हुए।कश्यप के विवस्वान और विवस्वान के वैवस्वतमनु हुए।वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था।वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था। इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुल की स्थापना की।
इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए।
कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था।
विकुक्षि के पुत्र बाण और बाण के पुत्र अनरण्य हुए।
अनरण्य से पृथु और पृथु और पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ।
त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए।
धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था।
युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए और मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ।
सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित।
ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए।
भरत के पुत्र असित हुए और असित के पुत्र सगर हुए।
सगर अयोध्या के बहुत प्रतापी राजा थे।सगर के पुत्र का नाम असमंज था।असमंज के पुत्र अंशुमान तथा अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए।दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए।
भगीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतार था।भगीरथ के पुत्र ककुत्स्थ और ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए।रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया। तब राम के कुल को रघुकुल भी कहा जाता है।
रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए।
प्रवृद्ध के पुत्र शंखण और शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए।
सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था।
अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग और शीघ्रग के पुत्र मरु हुए।
मरु के पुत्र प्रशुश्रुक और प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए।
अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था।नहुष के पुत्र ययाति और ययाति के पुत्र नाभाग हुए।
नाभाग के पुत्र का नाम अज था।अज के पुत्र दशरथ हुए और दशरथ के ये चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत, तथा शत्रुघ्न हैं।
वा‍ल्मीकि रामायण- ॥1-59 से 72।।


आधुनिक समाज मे गाय को छोड़कर घर मे कुत्ते की अधिक महत्ता- लव तिवारी

समाज मे आधुनिकता और पश्चिमी सभ्यताओं के नाम पर हम में बहुत ख़राब परिवर्तन आये है जहा घर में गाय न रख के कुत्ता रखना | कुत्ते के बारे में शास्त्रों में कहा गया है के इसको कभी भी बांध के नही रखना चाहिए इसको खुला छोड़ना चाहिए और गाय के बारे में कहा गया है के इसको साज समाल कर के रखना चाहिए देखभाल के साथ | पर हमने ऐसी अंग्रेजी शिक्षा शिखी के गाय को छोर दी, कशाई ले जाये काटने को या कोई और... कुत्ता पकड़ के घर में बांध के पट्टे से रखा..और बड़े शान से बताते है 'देखो मेरा कुत्ता' | रोज सबरे कुत्ते को टहलाने लेके जायेंगे, फिर सुसु और टट्टी करवाएंगे और गाय की बार करो तोह नाक चड़ाएंगे | एक कुत्ते को पालने के लिए आज कल लाखों रुपये खर्च किये जा रहे है कुत्ते की महत्ता आदमी से बढ़ कर हो गयी है क्यो की कुत्ते की देखभाल करने के लिए विशेष रूप से नौकर और नौकरी दी जाती है

कुत्ते और गाय की कोई तुलना नही हो सकती पर अंग्रेजी शिक्षा ने सब सत्यानास कर दिया | जिस गाय के गोबर से स्नान किये बिना आप कोई यज्ञ नही कर सकते, जिस गोबर की लेपन किये बिना यज्ञ की बेदी नही बन सकती उसी गोबर को देखते ही अंग्रेजी स्कूल में पड़ने वाले बच्चे छि छि करते है और बदबू की बात करते है पर दुनिया भर का कचरा अंग्रेजी सेन्ट और परफिउम में खुसबू आति है जो त्वचा और शारीर दोनों का नुक़सान करते है |


बुधवार, 23 जनवरी 2019

जिंदगी का सफर- लव तिवारी

।।  जीवन का सफर  ।।
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एक बार एक नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी।
एक कौए ने लाश देखी, तो प्रसन्न हो उठा, तुरंत उस पर आ बैठा।
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यथेष्ट मांस खाया। नदी का जल पिया। उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए कौए ने परम तृप्ति की डकार ली।
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वह सोचने लगा, अहा ! यह तो अत्यंत सुंदर यान है, यहां भोजन और जल की भी कमी नहीं। फिर इसे छोड़कर अन्यत्र क्यों भटकता फिरूं ?
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कौआ नदी के साथ बहने वाली उस लाश के ऊपर कई दिनों तक रमता रहा.. भूख लगने पर वह लाश को नोचकर खा लेता, प्यास लगने पर नदी का पानी पी लेता।
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अगाध जलराशि, उसका तेज प्रवाह, किनारे पर दूर-दूर तक फैले प्रकृति के मनोहरी दृश्य-इन्हें देख-देखकर वह विभोर होता रहा।
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नदी एक दिन आखिर महासागर में मिली। वह मुदित थी कि उसे अपना गंतव्य प्राप्त हुआ।
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सागर से मिलना ही उसका चरम लक्ष्य था, किंतु उस दिन लक्ष्यहीन कौए की तो बड़ी दुर्गति हो गई।
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चार दिन की मौज-मस्ती ने उसे ऐसी जगह ला पटका था, जहां उसके लिए न भोजन था, न पेयजल और न ही कोई आश्रय। सब ओर सीमाहीन अनंत खारी जल-राशि तरंगायित हो रही थी।
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कौआ थका-हारा और भूखा-प्यासा कुछ दिन तक तो चारों दिशाओं में पंख फटकारता रहा, अपनी छिछली और टेढ़ी-मेढ़ी उड़ानों से झूठा रौब फैलाता रहा, किंतु महासागर का ओर-छोर उसे कहीं नजर नहीं आया।
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आखिरकार थककर, दुख से कातर होकर वह सागर की उन्हीं गगनचुंबी लहरों में गिर गया। एक विशाल मगरमच्छ उसे निगल गया।
शारीरिक सुख में लिप्त मनुष्यों की भी गति उसी कौए की तरह होती है, जो आहार और आश्रय को ही परम गति मानते हैं और अंत में अनन्त संसार रूपी सागर में समा जाते है।
जीत किसके लिए, हार किसके लिए
      ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए..
जो भी आया है वो जायेगा एक दिन
      फिर ये इतना अहंकार किसके लिए -
विचार कीजिये..



गुरुवार, 10 जनवरी 2019

भारत में रहकर भारत को गाली देने वाले कुत्तों के लिए समर्पित।

एक बादशाह अपने कुत्ते के साथ नाव में यात्रा कर रहा था। उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था। कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। वह उछल-कूद कर रहा था और किसी को चैन से नहीं बैठने दे रहा था।मल्लाह उसकी उछल-कूद से परेशान था कि ऐसी स्थिति में यात्रियों की हड़बड़ाहट से नाव डूब जाएगी। वह भी डूबेगा और दूसरों को भी ले डूबेगा।

परन्तु कुत्ता अपने स्वभाव के कारण उछल-कूद में लगा था। ऐसी स्थिति देखकर बादशाह भी गुस्से में था, पर कुत्ते को सुधारने का कोई उपाय उन्हें समझ में नहीं आ रहा था। नाव में बैठे दार्शनिक से रहा नहीं गया। वह बादशाह के पास गया और बोला : "सरकार। अगर आप इजाजत दें तो मैं इस कुत्ते को भीगी बिल्ली बना सकता हूँ।बादशाह ने तत्काल अनुमति दे दी।

दार्शनिक ने दो यात्रियों का सहारा लिया और उस कुत्ते को नाव से उठाकर नदी में फेंक दिया।
कुत्ता तैरता हुआ नाव के खूंटे को पकड़ने लगा।उसको अब अपनी जान के लाले पड़ रहे थे।
कुछ देर बाद दार्शनिक ने उसे खींचकर नाव में चढ़ा लिया।वह कुत्ता चुपके से जाकर एक कोने में बैठ गया।

नाव के यात्रियों के साथ बादशाह को भी उस कुत्ते के बदले व्यवहार पर बड़ा आश्चर्य हुआ।
बादशाह ने दार्शनिक से पूछा : "यह पहले तो उछल-कूद और हरकतें कर रहा था। अब देखो, कैसे यह पालतू बकरी की तरह बैठा है ?

दार्शनिक बोला : "खुद तकलीफ का स्वाद चखे बिना किसी को दूसरे की विपत्ति का अहसास नहीं होता है। इस कुत्ते को जब*मैंने पानी में फेंक दिया तो इसे पानी की ताकत और नाव की उपयोगिता समझ में आ गयी।

जिन कुत्तों को भारत में डर लगता है उन्हें 6 महीने के लिए सीरिया, इराक़ या पाकिस्तान में फेंक देना चाहिए फिर भारत आने पर अपने आप भीगी बिल्ली बनकर एक कोने में पड़े रहेंगे।*
'भारत' में रहकर 'भारत' को गाली देने वाले कुत्तों के लिए समर्पित।
 _जयहिंद_  