गाजीपुर कोर्ट में जज शक्ति सिंह जी की चर्चा हर तरह लोग यही बोल रहे है जज हो तो शक्ति सिंह जी जैसा👇
गाजीपुर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मासूम भांजे का गला रेतने वाले जल्लाद मामा को फांसी, जज ने तोड़ी पेन की निब!
अदालत में पूछा गया- "छोड़ दिया तो क्या करोगे?"... हत्यारे ने कहा- "जो उलझेगा, उसे भी मार दूंगा", फिर सुनाई गई मौत की सजा
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की अदालत ने चार वर्षीय मासूम दानियाल उर्फ अदनान की निर्मम हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी मामा *अमजद खान* को फांसी की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की अदालत ने इस जघन्य अपराध को "दुर्लभतम से दुर्लभ" श्रेणी का मानते हुए दोषी को मौत की सजा दी। फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश ने परंपरा के अनुसार अपने पेन की निब भी तोड़ दी।
कोर्ट में दिखी हैवानियत, नहीं था कोई पछतावा
सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने दोषी अमजद खान से पूछा कि यदि उसे छोड़ दिया जाए तो वह क्या करेगा। इस पर उसने निर्भीकता से जवाब दिया, "अगर कोई मुझसे उलझेगा तो मैं उसकी भी हत्या कर दूंगा।"
जब अदालत ने पूछा कि क्या उसे अपने किए पर पछतावा है, तो उसने साफ शब्दों में कहा, *"बिल्कुल नहीं।"* दोषी के इस रवैये को देखते हुए अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई और आदेश दिया कि उसे तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।
मामूली विवाद में मासूम की ले ली थी जान
यह हृदयविदारक घटना 21 अक्टूबर 2021 को दिलदारनगर क्षेत्र के बारा गांव में हुई थी। चार वर्षीय दानियाल अपनी मां शबाना नाज के साथ ननिहाल आया हुआ था। इसी दौरान किसी बात को लेकर शबाना और उसके भाई अमजद खान के बीच विवाद हो गया।
गुस्से में आगबबूला अमजद ने अपने ही सगे भांजे पर धारदार चाकू से हमला कर उसका गला रेत दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मासूम का सिर गर्दन से मात्र कुछ इंच ही जुड़ा रह गया था। मां ने अपनी आंखों के सामने बेटे को तड़पते हुए दम तोड़ते देखा।
सगे भाई-बहनों की गवाही बनी सबसे बड़ा सबूत
घटना के बाद मृतक के चाचा अरबाज खान ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। सुनवाई के दौरान कुल 9 गवाहों ने अदालत में बयान दिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि आरोपी की तीन सगी बहनों और एक सगे भाई ने भी न्याय के पक्ष में खड़े होकर उसके खिलाफ गवाही दी।
इन्हीं मजबूत साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने अमजद खान को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई।
जज बोले- क्रूरता की सारी हदें पार हो गईं
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश शक्ति सिंह ने कहा कि चार साल का बच्चा दुनिया की भलाई और बुराई से पूरी तरह अनजान था। उसके साथ जो हुआ वह अमानवीयता और क्रूरता की पराकाष्ठा है। एक मां के सामने उसके बच्चे की हत्या कर दी गई, जिसका दर्द शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
इकलौते बेटे को याद कर रो पड़ा पिता
फैसले के बाद दानियाल के पिता भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि दो बेटियों के बीच दानियाल उनका इकलौता बेटा था और उसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि बाद में उनके घर एक और बेटे का जन्म हुआ, लेकिन दानियाल की याद आज भी उन्हें हर पल रुलाती है।
अदालत के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है और इसे न्याय की बड़ी जीत बताया है।







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