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गांव कटरिया ब्लॉक करण्डा जिला ग़ाज़ीपुर की दुर्घटना- श्री माधव कृष्ण ~ Lav Tiwari ( लव तिवारी )

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शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

गांव कटरिया ब्लॉक करण्डा जिला ग़ाज़ीपुर की दुर्घटना- श्री माधव कृष्ण



कटरिया गांव की दुर्घटना

अभी तक इस दुर्घटना पर जितने भी पोस्ट पढ़े हैं, उनमें से अधिकतम या तो किसी जाति के विरुद्ध हैं या किसी पार्टी के विरुद्ध हैं या किसी व्यक्ति के विरुद्ध हैं!

तो जो लोग इसे ब्राह्मण या विश्वकर्मा या ठाकुर की दृष्टि से देख रहे हैं, वे गलत हैं। जो लोग इसे भाजपा या सपा की दृष्टि से देख रहे हैं वे भी गलत हैं।

जब दुर्घटना हो चुकी है तो इसको जातीय दृष्टिकोण से देखना बंद करना होगा। पीड़ित पक्ष को न्याय और अपराधी को सजा, यही न्यायसंगत है। लेकिन यह तय कौन करेगा?

निःसंदेह, यह तय करना पुलिस, प्रशासन और न्यायपालिका का कार्य है। फिर राजनैतिक दलों की क्या भूमिका है? राजनैतिक दलों की एकमात्र भूमिका है, यह सुनिश्चित करना कि किसी की आवाज न दबे।

लेकिन यह कार्य कैसे करना होगा? क्या संख्या और शक्ति का प्रदर्शन करके? या बड़े संवेदनशील तरीके से शांतिपूर्वक सौहार्द्र को बनाए रखते हुए? किसी भी कार्य को करने का कौशल ही मुख्य है।

शक्ति प्रदर्शन की तो इतनी बुरी स्थिति है कि अब लोग शादियों में भी उन नेताओं को बुलाते हैं जिनसे उनका कोई संबंध नहीं, और नेता जी लोगों को शादियों में जा जाकर हाजिरी लगानी पड़ रही है।

बहरहाल, काम तो सब कर लेते हैं। लेकिन कुछ लोग काम को कुशलता से करते हैं, सोच समझकर करते हैं, समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखकर करते हैं।

जो लोग मीडिया या सोशल मीडिया ट्रायल कर रहे हैं, उनके पास सूचनाएं नहीं हैं, तथ्य नहीं हैं, सही कौन है और गलत कौन है इसका ज्ञान भी नहीं है, लेकिन उनके पोस्ट्स में विष भरा हुआ है।

यह समय है सतर्क रहने का, सावधान रहने का, साथ रहने का, और वह साथ है सत्य न्याय धर्म का। पुलिस अपना काम कैसे करेगी यदि वह इस घटना पर हो रहे बवाल में ही अपनी ऊर्जा क्षय कर रही है?

पुलिस, प्रशासन और न्यायपालिका को स्वतंत्र रूप से काम करने दीजिए। सोशल मीडिया पर बिना किसी तथ्य के विष वमन मत कीजिए। यदि आप पीड़ित के लिए न्याय और अपराधी के लिए सजा चाहते हैं तो आपको भी अपना दायित्व निभाना होगा।

तमाशबीन बनिए लेकिन बिना मतलब के भ्रम मत पैदा कीजिए। हम जब प्रमाणपत्र देना शुरू करते हैं किसी जाति या दल या व्यक्ति को, तो समझ लीजिए कि हम स्वयंभू ईश्वर बनना चाहते हैं लेकिन ईश्वर तो ईश्वर है।

इतना भरोसा तो रखना पड़ेगा कि उसके घर देर है अंधेर नहीं। और यह भी कि बाबा साहब के संविधान से किसी का अहित नहीं होगा। शक्ति प्रदर्शन के बेहतर रास्ते तलाशने होंगे।

माधव कृष्ण, २३.४.२६