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lav Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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बुधवार, 12 फ़रवरी 2025

ये मोहब्बत बड़े बर्बादी की रस्म होती है।- रचना लव तिवारी

अपने दिल और दिमाग पर काबू पालोये मोहब्बत बड़े बर्बादी की रस्म होती है।उसके लाखों दीवाने इस जमी पर।ये बिरानिया हम जैसो को नसीब होती है।।बात अक्सर नही समझ आती है नवजवानी मेंनए परिन्दों की तो बस दुनिया अजीब होती है।जफ़ा दर्द आँसू प्यार में शिकस्त पाने वाले कीकितना भी चाहे, उनकी दुनिया बदनसीब होती है।कुछ आशिक होते है जिनको मिली उनकी मोहब्बतबस कुछ है जिनकी दुनिया में खुशनसीब होती ...

गुरुवार, 16 जनवरी 2025

चुप लोग ही तो बोलते हैं जनाब जोर से भर देते हैं चुप रहकर भी दिमाग शोर से- डाॅ एम डी सिंह

चुप लोग ही तो बोलते हैं जनाब जोर सेभर देते हैं चुप रहकर भी दिमाग शोर सेखुशियां बटोर कर वे रख लेते हैं चुपचापगुस्सा भी तह कर रखते रहते हैं भोर सेसुनता है भला सोचिए कौन आपके सिवाजब बोलती हैं कभी हड्डियां पोर-पोर से महज आंसू नहीं दोस्त टपकते हैं हर घड़ीकभी रक्त भी उबलते हैं आंखों की कोर सेमत सोचिए सिर्फ बर्फ ही जमेगी पहाड़ परनिकलेगी फूट आग भी चोटी की ओर सेडाॅ एम डी स...

रजाइयों में बस्ती रचना डाॅ एम डी सिंह

रजाइयों में बस्ती :गांव घर शहर गली खेत सड़क परती कोहरे की धुंध में डूबी है धरतीचांद भी दिखा नहीं सूर्य भी उगा नहींहै खड़ा श्वेत पटल किन्तु कुछ लिखा नहींनाव नदी नहर रेत सब एक करतीकोहरे की धुंध में डूबी है धरतीहाथों को हाथ नापैरों को साथ नादिखता बस कोहराकरता कुछ बात नारेल बस वायुयान की खत्म हुई हस्तीकोहरे की धुंध में डूबी है धरतीचाय की चुस्की मेंमंद मधुर मुस्की मेंलगी हुई आग हैहर ओर खुश्की मेंजेबों में मुट्ठी रजाइयों में बस्तीकोहरे की धुंध में डूबी...

सच्चाई महाकुंभ प्रयागराज उत्तर प्रदेश लेखक डॉ एम डी सिंह

सच्चाई :गंगा जमुना सरस्वती को घाट तोड़ डुबा रही प्रयागराज नहाने आस्था की बाढ़ आ रही अमृतोत्सव के प्रांगण में भव्यता की चढ़ नाव सनातन के महाकुंभ में आ दुनिया समा रही हाथी घोड़ा ऊंट पालकी पर सवार निर्वस्त्र नागा साधु देख सारी दुनिया चकपका रही वैसे तो पकी ही थी दादी, तप उम्र की आंच कल्पवास की शीताग्नि, उसको और पका रही महाकुंभ से मोक्ष की सरकार राह आसानमेला में अत्याधुनिक सुविधाओं से बना रही खों-खों करते दद्दू की बारहमासी दिनचर्यामहाकुंभ पर आकर संगम...

जाड़ में हाड़ कांपता- रचना कुमार अजय सिंह गीतकार एकवना घाट बड़हरा भोजपुर बिहार

✍️ जाड़ में हाड़ कांपता ✍️जाड़ में हाड़ कांपत बा भईया,सुत रजाई तान केबीना काम के मत निकलिह,रक्षा कर तु जान केबेधत बड़ुऐ जाड़ा भीतरी ले,छेदत बा शरीर केगरम कपड़ा चादर कोट,रहिह तु सुटर पहिर केआफत बिपत आइल बा,कुछ दिन चलऽ मान केबीना काम के मत निकलिह,रक्षा कर तु जान केई सर्दी रही भर जनवरी,बचके रहिह लोग बबुआ खतम भइल खरवास अब,अइहन जइहन अगुआसुरक्षीत तु रहबऽ तबही बंटबऽ,दोसरा के ज्ञान के बीना काम के मत निकलिह,रक्षा कर तु जान केछुटत नईखे जब धऽ लेता,कसके जेकरा...

महाकुम्भ तीर्थराज प्रयाग पावन संगम मकर संक्रांति लेखक- श्री राजेश कुमार सिंह श्रेयस लखनऊ उत्तर प्रदेश

धन्य भूमि भारत जस देशा lमहिमा गुन अति रूचिर विशेषा llएहि ठहि गड़े धर्म ध्वज दंडा lपावन सलिल मातु बह गंगा llरवितनया वागेश्वरी बेनी lगंग संग मिल भई तिरवेनी llहिहां देव मुनि आयहु नर ज्ञानी lतीर्थराज प्रयाग शुभ मानी llश्रेयस -महाकुम्भ गुण गावा lबार बार एहि महि सिर नावा ll ©® राजेश 'श्रेयस' वर्ष 1987 का नवंबर माह l धरती थी तत्कालीन इलाहाबाद यानि वर्तमान प्रयागराज l तीर्थराज प्रयागराज की पावन नगरी स्थित मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद में...

साहित्यिक जीवन परिचय श्री राजेश कुमार सिंह श्रेयस कवि लेखक समीक्षक लखनऊ उत्तर प्रदेश

राजेश कुमार सिंह "श्रेयस" कवि, लेखक, समीक्षक जन्मतिथि : 14 अप्रैल 1967शैक्षिक योग्यता : बी0 एस0 सी0 ( बायो0) श्री मु. म. टा. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया, उप्र, फ़ार्मसी एम0 एल0 एन0 मेडिकल कॉलेज, इलाहाबाद ( वर्तमान प्रयागराज )संप्रति : चीफ फार्मेसिस्ट, चिकित्सा एवं स्वास्थ सेवाएं,लखनऊ, उप्र lमोबाइल : 9415254888ई मेल : rkstatetcpharma@gmail.comवर्तमान निवास...

रविवार, 12 जनवरी 2025

महाकुम्भ- लेखक माधव कृष्ण गाजीपुर

महाकुम्भभारतीय मनीषियों ने ज्ञान और प्रकाश को सर्वोच्च स्थान दिया है. लेकिन लगातार बदल रहे समय, परिस्थितियों में ज्ञान प्रासंगिक नहीं रह जाता. उसमें जड़ता आ जाती है. न्यूटन के जड़त्व के नियम के अनुसार, गति की स्थिति में परिवर्तन का विरोध करने की यह प्रवृत्ति जड़ता है. प्रत्येक वस्तु तब तक स्थिर या एक सीधी रेखा में एक समान गति में रहेगी जब तक कि उसे किसी बाहरी बल की कार्रवाई से अपनी स्थिति बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है. जड़ता कट्टरता, मतान्धता...

युवा ज्योति के दिव्य रूप स्वामी विवेकानन्द जी लेखक राजेश कुमार सिंह श्रेयस

युवा ज्योति के दिव्य रूप स्वामी विवेकानन्द जी ( स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर विशेष ) विवेकवान व्यक्ति का विवेक ही यह तय करता है, उसके जीवन की गति कैसी होगी l उसकी दिशा क्या होगी, और वह समाज के लिए कौन सी दिशा देने वाला है l उसके विचारों का दयारा कितना व्यापक है l उसके भीतर विचारों के संप्रेषण की क्षमता कितनी है l इतना तो तय है कि प्रत्येक विवेकी व्यक्ति के अपने कुछ नीति नियम और उसके निर्णय होते हैं l उसके मन में कुछ सात्विक विचार...

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2024

जीवन के रंग अनेक रचना साधना शाही वाराणसी उत्तर प्रदेश

जीवन के रंग अनेक, लें हर रंगों को देख।मद्धिम चटक सभी रंगों का, अलग-अलग अंदाज़।शांति प्रदाता कुछ हैं तो, कुछ खुशियांँ देते ख़ास।बिखरा दे सबको प्रकृति में, बिखरे ख़ुशी कतेक।रोचक,प्रेरक रंग बिखेरें,रौंदे हम व्यक्तिरेक।जीवन के रंग अनेक, लें हर रंगों को देख।खु़शहाली के साथ में ये, प्यार के घोलें रंग।रेशम के नाजुक धागे में, बाँध दें सबको संग।हे प्रभु! यह धागा ना टूटे,ना ही कभी टूटे ढंग।हर पल को हम भी बिहंँसें,विषाद देख के होवे दंग।शब्द पुष्प अपनों को दे-...

भाई तेरे जन्म दिवस पर क्या दूंँ मैं उपहार- साधना शाही वाराणसी उत्तर प्रदेश

भाई तेरे जन्म दिवस पर क्या दूंँ मैं उपहार,भाई तेरे जन्म दिवस पर क्या दूँ मैं उपहार,आशीषों की गठरी दे दूँ और आकाश भर प्यार। जन्मदिवस हो तुझे मुबारक हर दिन हो तेरा ख़ास,हंँसी-खुशी कभी चोरी ना हो पूरी हो हर आस। मृदू वाणी और नेक विचार को कभी नहीं तू तजना,जूही,चंपा सा तू महके सद्गुणों से तू सजना।स्वर्ग से सुंदर घर आंँगन हो सुखमय हो संसार,लोभ,दंभ स्पर्श करे ना ले लो उससे रार।भाई तेरे जन्म दिवस पर क्या दूँ मैं उपहार,आशीषों की गठरी दे दूँ और आकाश भर प्यार।...

सोमवार, 23 दिसंबर 2024

चिट्ठियां रखकर क़िताब देना बहुत याद आता है- नीरज कुमार मिश्र बलिया

"तुम्हारा गिफ्ट में ग़ुलाब देना!, बहुत याद आता है,चिट्ठियां रखकर क़िताब देना, बहुत याद आता है,अब जब ख़त्म हो गईं हैं इच्छाएं और मर गये स्वप्न,तुम्हारा नयनों को ख़्वाब देना, बहुत याद आता है,आज देखता हूं तुम्हें मौन रूप में नई नस्लों के समक्ष,तुम्हारा हर किसी को ज़वाब देना, बहुत याद आता है,यद्यपि आज तुम्हारी इन प्रेरक बातों का मोल नहीं रहा,तुम्हारा जर्जर जिस्मों में शबाब देना, बहुत याद आता है,आज संघर्ष के पथ पर चलने वालों का कोई पूछ नहीं है,तुम्हारा...

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024

गांव-देहात की तक़दीर बदलने वाले वो अब नहीं दिखते रचना नीरज कुमार मिश्र बलिया

"क़दम से क़दम मिलाकर चलने वाले अब नहीं दिखते!,सातों जनम में जन्म लेकर मिलने वाले अब नहीं दिखते!,मौसम के रंग के साथ बदल गये वादों पे वादे करने वाले!,इस दोस्ती के दामन का नज़्म गाने वाले अब नहीं दिखते!,जबसे किस्मत ने किया है उनके सितारों को बहुत बुलंद!,गर्दिशों में रिश्तों के मायने लिखने वाले अब नहीं दिखते!,जिनकी झोपड़ियां अब तब्दील हो चुकीं हैं शीश महलों में,शीशों के घरों पर पत्थर फेंकने वाले वो अब नहीं दिखते!,शहर की आबो-हवा ने बदल दिया है उनकी रंगत...

गुरुवार, 19 दिसंबर 2024

बांड़ त बांड़ तीन हाथ क पगहो जाई - लेखक डॉ एम डी सिंह

'बांड़ त बांड़ तीन हाथ क पगहो जाई' गनपत सहाय क लइका मनसुख लाल छोटहने प से बहुत पढ़ाकू रहल। जब सभ लइका स्कूले से लउट के खरिहाने भागैं कबड्डी, बरगत्ता ,गुल्ली-डंडा खेले तभ मनसुख मुंशी जी का घरे चलि जात रहल अलजबरा पढ़े। गांव भर में हल्ला रहल कि गनपत पेसकारै रहि गइलें मनसुखा त मुनसिफ बनि के रही। आजु-काल्हु गांव भर में चार लोगन क चरचा कहूं न कहूं रोजिन्ना होखेला । ओहमें सबसे उप्पर हईं कहनी काकी। आजु ऊ कहवां कउन कहनी मरले बानी एही बखान में खलिहर मउगिन...

होम्योपैथिक चिकित्सक लेखक एवं समाजसेवी परम आदरणीय डॉ एम डी सिंह- लेखक लव तिवारी

गाजीपुर के ख्याति प्राप्त होम्योपैथिक चिकित्सक, लेखक एवं समाजसेवी परम आदरणीय डॉ एम डी सिंह की बेहतरीन पुस्तक समग्र योग सिद्धांत एवं होम्योपैथिक दृष्टिकोण व भोजपुरी काव्य संग्रह चिल्होर आशिर्वाद के रुप मे हम दोनों भाइयों को प्राप्त हुई। महान चिकित्सक के रूप में डॉक्टर मुनि देवेंद्र सिंह उर्फ एम. डी सिंह पूर्वांचल क्षेत्र के बहुचर्चित नाम है। सुबह 7:00 से लेकर शाम 7:00 बजे तक वर्ष भर निरन्तर विभिन्न प्रकार की रोगियों के इलाज के साथ-साथ भारत देश के...

बुधवार, 18 दिसंबर 2024

सर्दी के मौसम में उच्च रक्तचाप कारण निवारण तथा होम्योपैथिक चिकित्सा- डॉ एम डी सिंह ग़ाज़ीपुर

ठंड पड़ने लगी है। बरसात के बाद हमने अभी अपनी दिनचर्या में बहुत बदलाव नहीं किया है। मौसम की तरह हमें भी अपनी दिनचर्या में बदलाव लाने की जरूरत है।आमतौर पर सर्दी के मौसम में बीमारियां कम हो जाती हैं। खासतौर से बैक्टीरिया और पैरासाइट्स के कारण उत्पन्न होने वाली बीमारिॅयां इस मौसम में कुछ कम हो जाती हैं। क्योंकि मच्छर , मक्खी, पिस्सू इत्यादि इन रोगों के वाहक इस मौसम में कम हो जाते हैं ।बारिश खत्म हो चुकी होती है और सर्दी के वजह से मनुष्य भी जल का प्रयोग...

शुक्रवार, 29 नवंबर 2024

मैं आत्मा हूँ लेखक श्री माधव कृष्ण ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश

मैं आत्मा हूँबात २०१५ की है. मैंने सिंगापोर और सिटीबैंक की नौकरी छोड़ दी थी और गाजीपुर आ चुका था. मेरी पुत्री आद्या अभी २ साल की थी इसलिए उसे कोई फर्क नहीं पड़ा. लेकिन मेरा पुत्र अव्यय, जो कि ११ वर्ष का हो चुका था, इस परिवर्तन को स्वीकार नहीं कर सका.जब उसकी कक्षा में अध्यापक उससे उसकी जाति पूछते थे तो वह चिढ़ जाता था. नाम के आगे कोई सरनेम नहीं होने से कभी कभी उसके मित्र मजाक उड़ाते थे और पूछते थे कि, "अव्यय कृष्ण! यह कैसा नाम है? जाति छिपाने का अर्थ...

बुधवार, 27 नवंबर 2024

धर्मान्तरण एक बलात्कार है जहाँ हम किसी की निर्बलता और विवशता का लाभ उठाकर छल से या बल से या धन से उसका शोषण करते हैं- माधव कृष्णा

रोहिणी मसीह-Madhav Krishnaहम जीवन का एक हिस्सा देख पाते हैं, और दूसरा हिस्सा प्रायः अंधकार से आच्छादित रहता है। हम चाहें तो उसे देख सकते हैं लेकिन दृष्टि का विस्तार प्रायः हमारी प्राथमिकता में नहीं रहता।गांव में अपनी दुनियां में मगन लोगों का एक समुदाय होता है। बस्ती में बसने वाले लोग प्रायः एक दूसरे के जीवन में झांकते हुए ही जीवन जी लेते हैं। ऐसा ही मेरा एक गांव था। तहसील के मुख्य चौक से जोड़ता हुआ एक संकरा सा वीरभानु सिंह मार्ग था। कहते हैं वीरभानु...

सोमवार, 18 नवंबर 2024

नही गम बस खुशी देते हो मेरी जिंदगी को एक हँसी देते हो रचना लव तिवारी ग़ाज़ीपुर

नही गम बस खुशी देते हो मेरी जिंदगी को एक हँसी देते होतुम्हे देख कर मिलता है एक सुकून दिल कोमेरे धीमी धड़कनों को एक गति देते होहमें उम्मीद है वफ़ा की उम्रभर तुझसेमेरे थके आँखो को रोशनी देते होचैन मिलता हौ तुम्हे याद करके सोने सेमेरे ख़्वाब मेंरे नींद को तुम मंजिल देते हो।।🙏�...