मेरा ब्लॉग मेरी रचना- लव तिवारी संपर्क सूत्र- +91-9458668566

फ़रवरी 2026 ~ Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

we are performing in bhail bihan program in mahuaa chanel

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Flag Counter

Flag Counter

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

बीएचयू में भर्ती पद्मश्री डॉ. टी.के.लाहिड़ी

#बीएचयू में भर्ती पद्मश्री डॉ. टी.के.लाहिड़ी के प्रति क्यों है इतना प्रेम। कैसे प्रधानमंत्री और कुलपति को भी मिलने से कर दिया था मना--कहा कि मैं मरीजों से सिर्फ ओपीडी में मिलता हूं, 20-25 की थाली किसी छोटे से होटल में खाते हैं, आइए आज सबकुछ पढ़ें।

त्याग, तपस्या और सेवा का दुर्लभ उदाहरण।आचरण, सादगी, प्रतिबद्धता और मानव सेवा से चिकित्सा पेशे को गौरवान्वित किया है, तो वह नाम है पद्मश्री प्रो. डॉ. तपन कुमार लाहिड़ी (टी.के. लाहिड़ी)।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विख्यात कार्डियोथोरेसिक सर्जन और लाखों मरीजों के लिए किसी देवदूत से कम नहीं।

वाराणसी की जनता उन्हें ‘धरती का भगवान’ कहकर पुकारती है। यह उपाधि यूँ ही नहीं मिली। बीएचयू के सामान्य अस्पताल की गलियों में रोज एक परिचित दृश्य नजर आता है, एक हाथ में बैग और दूसरे हाथ में काली छतरी लिए, एक वृद्ध डॉक्टर पैदल चलते हुए अस्पताल की ओर आने वाला।वही साधारण-सा वृद्ध दरअसल दुनिया के ख्यातिप्राप्त कार्डियोथोरेसिक सर्जन—डॉ. टी.के. लाहिड़ी होते हैं।

साल 1994 से उन्होंने अपनी पूरी तनख्वाह गरीब मरीजों की मदद के लिए समर्पित कर दी। 2003 में सेवानिवृत्ति के बाद भी यह क्रम नहीं टूटा
वे आज भी उतनी ही पेंशन अपने पास रखते हैं, जिससे उनका साधारण जीवन चल सके। बाकी पूरी राशि बीएचयू के गरीब मरीज सहायता कोष में जमा कर दी जाती है।

उन्होंने अपने भविष्य निधि (पीएफ) तक का पैसा विश्वविद्यालय को दान कर दिया—ताकि किसी गरीब की जान बच सके। 35 वर्ष की सेवा, सैकड़ों डॉक्टर तैयार, पर खुद के लिए एक वाहन तक नहीं। 1974 में बीएचयू में मात्र 250 रुपये मासिक वेतन पर लेक्चरर नियुक्त हुए। 

जिनके शिष्य आज देश-विदेश के बड़े अस्पतालों का नेतृत्व कर रहे हैं, उसी शिक्षक ने अपनी पूरी जिंदगी में कभी एक कार तक नहीं खरीदी। आज भी वे पैदल ही अस्पताल जाते थे—गर्मी, सर्दी या बारिश, मौसम कोई भी हो।

उनकी सादगी जितनी प्रेरणादायक है, उनकी ईमानदारी और सिद्धांतों पर अडिग रहने की क्षमता उतनी ही दुर्लभ।  एक बार देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर वाराणसी आए और किसी कारणवश उनसे निजी तौर पर मिलना चाहते थे।

 डॉ. लाहिड़ी ने घर पर मिलने से मना कर दिया और साफ कहा
“मैं मरीजों से केवल ओपीडी में ही मिलता हूँ। इसी तरह, बीएचयू के एक बीमार कुलपति को घर जाकर देखने से उन्होंने इनकार किया।
उनकी नजर में हर मरीज समान, चाहे वह प्रधानमंत्री हो या सामान्य श्रमिक।

उनका पूरा जीवन सादगी से भरा है। वाराणसी की गलियों में उन्हें अक्सर अन्नपूर्णा होटल में 20–25 रुपये की थाली खाते देखा जा सकता है।
न कोई दिखावा, न कोई विशेष सुविधा। बीएचयू से मिलने वाला साधारण आवास ही उनकी दुनिया है। उन्होंने गरीब मरीजों की सेवा में इतना समर्पण दिखाया कि जीवनभर विवाह तक नहीं किया।कहते हैं कि वे परिवार की जिम्मेदारियों में बंधकर अपने सेवा-कार्य में कमी नहीं आने देना चाहते थे।

सेवानिवृत्ति के बाद अमेरिका के कई प्रतिष्ठित अस्पतालों ने उन्हें भारी-भरकम पैकेज पर काम करने का प्रस्ताव दिया। लेकिन उन्होंने एक ही वाक्य में सारे प्रस्ताव वापस कर दिए—“मैं भारत और अपने गरीब मरीजों की सेवा से दूर नहीं जा सकता।”

बीएचयू में लोग कहते हैं कि जो भी व्यक्ति समय जानना चाहता है, वह डॉ. लाहिड़ी की ओर नजर कर ले—समय का अंदाजा हो जाता है।
वे सुबह ठीक 6 बजे अस्पताल पहुंचते हैं, तीन घंटे की सेवा के बाद घर लौटते हैं और शाम को फिर अस्पताल आते हैं।उम्र 75 के पार है, पर उनका अनुशासन वही है जो युवा दिनों में था।

उनकी ओपन-हार्ट सर्जरी की क्षमता और शल्य चिकित्सा कौशल के कारण हजारों गरीब मरीजों की जान बची। जो मरीज आर्थिक अभाव में महंगे अस्पतालों में इलाज नहीं करा पाते थे, उनके लिए डॉ. लाहिड़ी किसी फरिश्ते की तरह आए। बीएचयू में आज भी लोग कहते हैं—“जिस मरीज को लाहिड़ी सर देख लेते हैं, उसकी जान बचने की उम्मीद बढ़ जाती है।”
#DrLahari
#Drtlahiri
#banarashinduuniversity
#varanasi