मेरा ब्लॉग मेरी रचना- लव तिवारी संपर्क सूत्र- +91-9458668566

Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

we are performing in bhail bihan program in mahuaa chanel

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Flag Counter

Flag Counter

रविवार, 12 मई 2024

ग़ाज़ीपुर की महान कवियत्री श्रीमती बीना राय जी का संक्षिप्त परिचय एवं रचनाएँ

परिचय:-
नाम - बीना राय
जन्म:- 27 /9/1981
निवास स्थान : गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
कार्य - शिक्षण व लेखन
जन्म स्थान : कोलकाता, पश्चिम बंगाल
अभिरूचियां : अध्ययन, अध्यापन व लेखन
प्रकाशित पुस्तक - 1-खुशनसीब हो गए
2-अंगारे गीले राख से
अन्य प्रकाशन - 18 साझा संकलन पुस्तकों में प्रकाशित
उद्देश्य: मानवता और साहित्य की सेवा
संप्रतियां : अंग्रेजी विषय की शिक्षिका के रूप में 20 वर्ष से कार्यरत एवं अपने जिला गाजीपुर महिला काव्य मंच की वर्तमान अध्यक्षा। काशी काव्य संगम मंच वाराणसी की उपाध्यक्षा।

सृजनात्मिका महिला काव्य मंच वाराणसी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

साहित्य संस्थाओं से सम्मानित।
अखिल भारतीय अनुबंध साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित।
शांतिदूत साहित्य सम्मान 2021 से सम्मानित
साहित्य मनीषी सम्मान 2021 से सम्मानित
नारी शक्ति सम्मान 2023 से सम्मानित
नव उदित साहित्य सम्मान भोपाल 2023 से सम्मानित
काशी कजरी रत्न 2023 से सम्मानित
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में इनकी कहानियां,लेख, लघुकथा व कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं।
वर्तमान पता- रामनगर, वाराणसी



1- *मुकाम युद्ध के*

खून से सनी धरती
मानवता के धूप को
हर वक्त है तरसती
ऐसी ही कुछ उपलब्धियां
नाम हैं युद्ध के।

भूखमरी और बेरोज़गारी
लाचारी और महामारी
ऐसे ही कुछ खास
परिणाम हैं युद्ध के।

किसी के अहं और
ज़िद की सरपरस्ती
नफ़रतों के आग
हर दिशा में उगलती
ऐसे ही कुछ मुकाम हैं युद्ध के।

किया भारत ने बहुत बार
युद्ध का सामना स्वीकार
लेकिन कभी किसी देश पर
खुद से किया ना वार
क्यों कि हम समझते हैं
विनाशक अंजाम युद्ध के


युद्ध से हम डरते हैं
ऐसा ना तुम समझना
वसुधैव कुटुंबकम् है
हिंद का सलोना सपना
मगर साक्षी समय रहा है
और जानती है दुनिया
जब जंग दुश्मन चाहे
समझौते से ना माने
किस क़दर लिए हैं
हमने इंतिक़ाम युद्ध के

स्वरचित कविता
बीना राय
ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश


2- *दहेज मुक्त विवाह*

चलो ख़त्म मिलकर
दहेज का रिवाज़ हम करें
अंत से इस कुप्रथा के
सुखी समाज हम करें

माँ के गहने गिरवी रखे जाते
जिसे वो रखती थी सहेज कर
बिक जाता जमीन पिता का
करने को खर्चा इस दहेज पर
डूब जाते हैं कर्ज मे भाई कई
बहन को ससुराल भेजकर

इस अपयशी रिवाज के विरोध में
कुछ नेक काज हम करें
अंत से इस कुप्रथा के
सुखी समाज हम करें

वर हो चाहे जैसा पर
वधू हो सुंदर और सुसंस्कृत
मांगें बढ़ती ही जाती हैं
लोभ कर लेते वो अनियंत्रित
भूलकर रिश्तों की मधुरता
ध्यान करते हैं धन पर केंद्रित

ऐसे लोभियों को
कन्या सौंप कर
कैसे नाज़ हम करें
अंत से इस कुप्रथा के
सुखी समाज हम करें

जो बेटी बाबुल के आंगन मे
चिड़ियो सी चहचहाती है
ताने से दहेज के अक्सर
ससुराल मे घुट जाती है
कहींकहीं तो धन की
लोलुपता मे जिंदा
जला दि जाती है

ऐसी वेदनाओं के
जड़ को काट कर
नई आगाज़ हम करें
अंत से इस कुप्रथा के
सुखी समाज हम करें।

स्वरचित कविता

बीना राय
गाजीपुर, उत्तर प्रदेश


3- *मर भी ना सके हम तिरे प्यार में*

बारहा गिरे, बारहा उठे
फिर बारहा झुके हम तिरे प्यार में
मर मर कर जिए,जीते जी मरे,
मर भी ना सके हम तिरे प्यार में

तेरे आखिरी दरस को हम मांगते रहे
चांद को निहार शब भर जागते रहे
तिश्नगी मिरी क्यों मिट ना सकी
क्यों तड़पते रहे हम तिरे प्यार में
मर भी ना सके हम तिरे प्यार में

तन्हाइयों के शोर में हम पागल हुए
कोई मरहम मिला ना जब घायल हुए
खुद से रूठकर खुद भागते हुए
खुद ही में छुपे हम तिरे प्यार में
मर भी ना सके हम तिरे प्यार मे

ये आलम सारा ही झूठा लगा
ग़म मेरा दिल को सिर्फ सच्चा लगा
ग़म रहनुमा अब ग़म ही खुदा
ग़म से रौशन हुए हम तिरे प्यार में
मर भी ना सके हम तिरे प्यार में

स्वरचित नज़्म

बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश


4- *थोड़ी सी तो जा संवर*

हर दफ़्'अ ऐतबार कर
जो तबाहियों में किया बसर
ऐ हयात खुद के वास्ते
थोड़ी सी तो जा संवर

ना रख किसी से भी हसद
फिदा हो तू तस्कीन पर
वो रब जो तेरे साथ है
किस बात का तुझे है डर ।

ऐ हयात खुद के वास्ते
थोड़ी सी तो जा संवर

तू राह में चलते हुए
मंजिल पे ही रख नज़र
तू धुन में अपनी मस्त हो
कर शान से पूरी सफ़र

ऐ हयात खुद के वास्ते
थोड़ी सी तो जा संवर

माना है मुश्किलें बहुत
आसान नहीं है ये डगर
तू चमक में कोशिशों की
सवांर ले मन का नगर।

ऐ हयात खुद के वास्ते
थोड़ी सी तो जा संवर।

हयात - जिंदगी
हसद- जलन
तस्कीन- शांति


स्वरचित नज़्म

बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश


5- जिसे पूजने लगोगे तुम ख़ुदा की तरह
बदलेगा रफ्ता-रफ्ता बेवफा की तरह।

तुम ही हो मेरी मंजिल वो कहेगा हर घड़ी
मिल गये तो छोड़ देगा रास्ता की तरह ।

दैरो-हरम की सीढ़ी रोने लगी है मुझपर
उसे मांगकर थके जब इक दुआ की तरह।

कल राह में मिला था चुपचाप से यूं गुज़रा
अरमानों की शजर से एक धुआं की तरह।

वो समंदर तुम्हें भी खारा बना के बहता
अच्छे भले हो मीठे एक दरिया की तरह।

बिखरी है टूटकर जो ये जिंदगी संवार लो
कुछ भी नहीं है *बीना* हौसला की तरह ।


स्वरचित
बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश

6- *फैसला आखिर कर ही लिया*

दिल ने उसकी कठोर से कठोर
बातों को भी बड़ी इत्मीनान से
सुनते ही रहना चाहा तो था
क्यों कि वो आवाज़ ही एक
ऐसी चीज थी उसकी जिसपर मर
मिटा था ये नाजुक दिल कभी
मगर रूह से उसकी मुसलसल
बेरूखी के तलवों से अपने वजूद का
कुचलना बर्दाश्त न हो सका और
इसने उसे भूल जाने का फैसला
आखिर कर ही लिया।

वैसे आसान नहीं होता दिल में
बस जाने वाले को दिल से निकालना
लेकिन कुछ जरूरी फैसले लेने में
बहुत देर करना भी ठीक नहीं होता।
शायद पाकीज़गी भरी मिरी मोहब्बत
और उसके वास्ते रोज रोज दुआओं में
हाथ उठाकर उसकी खैर मांगना
और बदले में उसके प्यार के
दो लब्ज़ों से मिरी रूह का महरूम होना
और सिसकते रहना, रब को भी मंजूर नहीं था।

मंजूर भी आखिर कैसे होता रब को
क्यों कि ये दिल रब की ही तरह
उसकी भी इबादत जो करने लगा था।
रब तो रब ठहरा और वो सिर्फ
रब का बनाया एक बंदा।
बाखुदा तो सिर्फ ख़ुदा का होना ही
अच्छा है उसके बनाए किसी बंदे का नहीं ।
ख़ैर ख़ुदा खैर करे अपने सारे
बंदों और बाखुदाओं की।
वो संभाल ही लेता है देर सबेर
अपने बनाए सारे बंदों और बाखुदाओं को भी।

*स्वरचित छंदमुक्त कविता*

बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश

7- *दुनिया में छा जाएंगे*

जीता वो जिद्दी
दुश्मन तो क्या
हम भी कहां अभी हारे हैं
जग ने हो मानी
हार भले पर
हमने कहां स्वीकारे हैं
फिर उठना है
फिर लड़ना है
आंखों में दुश्मन के गड़ना है
लिख लो कहीं तुम
लगने हैं बाकी
हिम्मत के मेरे जयकारे हैं
जग ने हो मानी हार भले पर
हमने कहां स्वीकारे हैं।
बीता बहारों का
मौसम तो क्या
पतझड़ में हम गाएंगे
अंधियारों में किस्मत के
अनुभव के दीप जलाएंगे
अब क्या चहकना
अब क्या बहकना
जज़्बातों में अब
क्या लुढ़कना
सांसों की सूरज
ढलने से पहले
दुनिया में में छा जाएंगे।
अंधियारों में किस्मत के
अनुभव के दीप जलाएंगे।

8-
*छंदमुक्त कविता*

*क्या मैं लिख पाऊंगी*


कभी कभी मैं अपनी ही किसी
तस्वीर को दिल से चूम लेती हूं
देती रहती हूं दुआ अक्सर
अपने खूबसूरत ख्वाबों से भरी
इन खूबसूरत आंखों को
जिसने निराश हो कर कभी
नहीं छोड़ा हौसला ख्वाबों को संजोने का

अदा करती रहती हूं शुकराना
घनघोर अजाबों से जीतने पर
अपने मेहरबां उस रब का जिसने भर दी
मेरे वजूद की झोली अपने रहमतों से यूं ही
एक बार दुआ में दोनों हाथ उठाने पर

निहारती हूं एक टक उन पदचिन्हों को
मेरे दुःख में निस्वार्थ भाव से
साथ देने वाले भाई-बहनों और दोस्तों के
और संकल्प भी लेती हूं उन्हीं पदचिन्हों
पर चलते रहने का जिसपर चलकर
बन जाना चाहती हूं काबिल मैं भी किसी
तन्हा और परेशान व्यक्ति के दुःख में
अपने सामर्थ्य भर साथ निभाने का

मैं कामना करती हूं मुसलसल
अपने हिस्से की जिंदगी को
जिंदादिली से जीकर
कुछ लाचार और भीगी आंखों से
गर्म नमी को मिटाकर
अपने चाहने वालों के दिलों में
खुद के भी अस्तित्व को कायम रखने की

अक्सर सींचती रहती हूं अपनी
तमाम हसरतों की क्यारियों को
ताकि वो मुश्किलों के पहाड़ में भी
खिला सकें फूल साहस, उम्मीद और समृद्धि के

रखती हूं सबसे बड़ी एक चाहत
और पूछती हूं अपने आप से
क्या मैं लिख पाऊंगी स्वयं पर बीती
एक ऐसी किताब जिसे पढ़कर
भीग जाएं आंखे मेरे बाद उन लोगों की भी
जो बात बात पर किसी निर्दोष को
बदनाम करने और उसके सुखी संसार में
अनायास ही अपने ईर्ष्या
की आग लगाने से बाज़ नहीं आते
क्या मैं लिख पाऊंगी एसी किताब?

स्वलिखित कविता

बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश




किसी करीबी पर भी आंख मूंद कर ऐतबार का अब वक्त नहीं- रचना श्रीमती बीना राय ग़ाज़ीपुर

किसी करीबी पर भी आंख मूंद कर ऐतबार का अब वक्त नहीं
मौन रहकर करना है हर चाल पस्त, तकरार का अब वक्त नहीं

हो कितने पानी में है मुझे भी पता, तुम डार-डार मैं पात-पात
यह मत सोचो कि सौ सुनार की एक लुहार का अब वक्त नहीं

किसी सरल और निर्दोष हृदय पर तुम ऐसे ना आघात करो
कि रब रूठकर तुमसे सोचे कि तिरे इसरार का अब वक्त नहीं

जो बोते हैं वहीं काटते हैं हम तो बुरे कर्म का बीज क्यों बोना
जल्दी समझो, इस बात को समझने से इंकार का अब वक्त नहीं

स्वलिखित रचना

बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश



तू रोड़ा ना बन - रचना श्रीमती बीना राय ग़ाज़ीपुर उत्तरप्रदेश

तू रोड़ा ना बन

राह दिखाने वाले के
राह में तू रोड़ा ना बन
आग बुझा दे ईर्ष्या की
कर ले अपना शीतल मन
आभार व्यक्त कर ईश्वर की
मुझ जैसी तुझको सखी मिली
जिसके मन पर पड़ी नहीं कभी
छल कपट की आवरण
जिसने पीड़ा अपनी व्यक्त की
तुझे मानकर अपनी बहन
माना वक्त की सतायी हूं मैं
पर इसका तंजं तुझे शोभा ना दे
तेरी प्रवृत्ति पहचान सका ना
कपटी तुझे मेरा भोला मन
क्या हासिल हुआ है तुझे बता
मुझ निर्दोष की झूठी निंदा कर
है अब भी वक्त, सम्हल जा सखी
दोस्ती का ना कर मैला दर्पण
मुझे ग़म नहीं की मैं तनहा हूं
मेरी नेकी मेरे साथ है
हां तेरी नीयत से जरूर
घायल मेरे जज़्बात हैं
तूने जलन के पैरों से रौंदी है
तेरे वास्ते मेरा अपनापन
मैं चतुर नहीं हूं तुझ जैसी
मुझे सत्य में है विश्वास मगर
तुझे जो करना है करती जा
रब साथ है हर पल मेरे
अब वही बनाएगा मेरी डगर
मुझे ठीक से तू पहचान ले
मैं अब भी हूं तेरी मान ले
मुझसे स्पर्धा की दौड़ में
कंटक से न भर अपना जीवन
अक्सर कहती थी तू ही सखी
यह जग मिथ्या माया है
तुझमें अपने पराये का भाव नहीं
बड़ी निर्मल तेरी काया है
मैं कहती हूं जो काया में ईश्वर है
वह भी हम पर गर्व करे
जब रखें समान हम कर्म-वचन

स्वरचित कविता
बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश





तुम देना ज़हर रचना श्रीमती बीना राय ग़ाज़ीपुर उत्तरप्रदेश


तुम देना ज़हर

दोस्ती में मुझे तुम देना ज़हर
मैं पीऊंगी उसे भी अमृत कर

चाहते हो क्या बताओ तो सही
मेरा सबकुछ तुमपर न्यौछावर

मिलती है खुशी गर इसी से तुम्हें
भोंक लेना मिरे पीठ में खंजर

तुम दे दो मुझे तीरगी अपनी
और ले लो मिरे हिस्से की सहर

कर्ण ने भी दल नहीं बदला
हार रहा था दुर्योधन अगर

माफ़ करते चलो सबको बीना
जिंदगी है बड़ी ही ये मुख़्तसर


स्वरचित कविता

बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश





सुन रही हूं मैं रचना श्रीमती बीना राय गाज़ीपुर उत्तरप्रदेश


सुन रही हूं मैं

मिरी ही बात आजकल जा-ब-जा सुन रही हूं मैं
मिरे खिलाफ चल रही है एक हवा सुन रही हूं मैं

ना डर उसको है खैर ऐसी किसी हवा से यहां
क्यों कि वो खुद ही है एक तुफां सुन रही हूं मैं

मैं जिस दोस्त के राहों में फूल बरसाती रही
उसने बिछा रक्खा है वास्ते मिरे कांटा सुन रही हूं मैं

मैं हो जाऊं बदनाम और बेकदर इस ज़माने में
मिरे ही लोगों को बनाया गया जरिया सुन रही हूं मैं

पढ़ रही हूं अक्से-ख़ुश्बू प्यारी परवीन शाकिर की बादशाहे-
ग़ज़ल दनकौरी की शेर ताज़ा सुन रही हूं मैं

मैं अपने हौसले से खुशी हासिल कर रही लेकिन
लगे हैं लोग कुछ तोड़ने में ये हौसला सुन रही हूं मैं

मैं रोज जिंदगी से छुटकारे की मिन्नतें करती हूं मगर
जीकर देखो बीना, कहती मिरी क़जा सुन रही हूं मैं

स्वलिखित रचना

बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश



कुछ बात करो - रचना श्रीमती बीना राय गाज़ीपुर उत्तरप्रदेश

कुछ बात करो

आओ बैठो पास मिरे कुछ बात करो
साझा मुझसे अपने तुम जज़्बात करो

हो जाए बदनाम हमारी दोस्ती
तुम पैदा ऐसे ना कोई हालात करो।

रख दिया खोलकर मन जब आप के सामने
अब मन के घावों पर नहीं आघात करो

तुम कहते हो मैं हूं सूखा फलहीन शजर
तो अलाव में उपयोग डार और पात करो

कह दूं अलविदा मैं आप की महफ़िल को
तुम बार आखिरी हंसकर तो मुलाकात करो।

स्वरचित रचना

बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश



तुम ना रोना रचना श्रीमती बीना राय ग़ाज़ीपुर उत्तरप्रदेश

तुम ना रोना

जब चली जाऊं मैं इस आलम से तुम ना रोना
रोएगी रूह मिरी क़सम से तुम ना रोना

लग जाती है ज़माने की दोस्ती को नज़र
मैं हूं तिरे खिलाफ इस भरम से तुम ना रोना

मुझे रूसवा और तन्हा तो कर ही दिया तुमने
दिल में धधकते अपने अहम से तुम ना रोना

हैं बिन बात के ही कुछ लोग ख़फ़ा तो क्या हुआ
महफूज़ हूं मैं खुदा की करम से तुम ना रोना

हुई हो बीना से कुछ ख़ता तो माफ़ करना
रह-रहकर दिल में उपजे अलम से तुम ना रोना।


स्वरचित रचना
बीना राय
गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश




गुरुवार, 25 अप्रैल 2024

तेरी याद मुझको ना ऐसे सताये चरागे मोहब्बत कही बुझ जाये

तेरी याद मुझको ना ऐसे सताये
चरागे मोहब्बत कही बुझ जाये
तेरी याद मुझको.........

कहा है जुनून ने मोहब्बत की मंजिल
न तुम जान पाये न हम जान पाये
चरागे मोहब्बत कही बुझ जाये
तेरी याद मुझको.........

पलट कर नही आते है जाने वाले-२
मगर हम तेरे दर पर फिर लौट आये
चरागे मोहब्बत कही बुझ जाये
तेरी याद मुझको.........

मैं अब उसके दामन का लूंगा सहारा
जो आंखों में साहिल ये मोती लुटाएं
चरागे मोहब्बत कही बुझ जाये
तेरी याद मुझको.........



शनिवार, 27 जनवरी 2024

स्वागत श्री चरण में स्वीकार हो हमारा खुशियां लुटाए सारी इज़हार हो हमारा

स्वागत श्री चरण में स्वीकार हो हमारा

खुशियां लुटाए सारी इज़हार हो हमारा


राहों के हर कदम में हम फूल हैं बिछाए

आएंगे वह अतिथिगण हम आस हैं लगाये

आने की हर खुशी में जाने का गम दोबारा 

खुशियां लुटाये सारी इज़हार हो हमारा


स्वागत श्री चरण में स्वीकार हो हमारा

खुशियां लुटाए सारी इज़हार हो हमारा


मेरी अर्चना यही है मेरी बंदना यही है

सकुशल रहे अतिथि गण मेरी कामना यही है

गर हो तो माफ करना जो कसूर हो हमारा

खुशियां लुटाये सारी इज़हार हो हमारा



स्वागत श्री चरण में स्वीकार हो हमारा

खुशियां लुटाए सारी इज़हार हो हमारा


हिंदी फिल्मी तर्ज मुझे इश्क है तुम्ही से गायक कलाकार मोहम्मद रफी और इस गीत को माध्यमिक विद्यालय जहानाबाद कुदरा कैमूर के बच्चों ने गया है यह तस्वीर भी गणतंत्र दिवस समारोह माध्यमिक विद्यालय कुदरा की है धन्यवाद लव तिवारी




बुधवार, 20 दिसंबर 2023

मेरे जीवन के विरानियों में सुंदर बगिया की बहार हो तुम- रचना लव तिवारी

ताजमहल की सुंदरता लिए एक अनुपम उपहार हो तुम।
मेरे जीवन के विरानियों में सुंदर बगिया की बहार हो तुम।।

देख कर तुमको आहे भरता औऱ तड़पता तुम्हारी यादों में।
ईश्वर रूपी एक फरिस्ता बन अदभुत पहचान हो तुम।।

एक तम्मना लिए खुदा से मांगता हूं दिन रात तुम्हें।
हो जाती तुम मेरी साजना अमृत घड़ा की प्यास हो तुम।

तुमको पाने की उम्मीद में कैसे कटते है दिन रात मेरे।
ख़ुदा तुमको हमें सौंप दे इस दुनियां की सौगात हो तुम।।




मंगलवार, 19 दिसंबर 2023

तुम्हें पाकर खोने को कुछ नही जिंदगी एक ख़्वाब साजोंने को कुछ नही- रचना लव तिवारी

तुम्हें पाकर खोने को कुछ नही
जिंदगी एक ख़्वाब साजोंने को कुछ नही।

आदमी में भला क्या मांगू ख़ुदा से
मुझको सब मिल गया पाने को कुछ नही।

एक हसरत लिए अब भी बैचेन सा होता है
भर दु मांग तेरा अब पछताने को कुछ नही।

बन के रहना तुम मेरी यही तम्मना है मेरी।
दुनिया मेरी मुस्कुराती रहें अब आज़माने को कुछ नही

दूसरा- ग़ज़ल

कुछ नहीं बस तू ही है जिंदगी मेरे नाम की,
आते जाते ख्वाबों में बस गई एक जान सी।

मुझको मिल गया जो चाहा और ख़ुदा से क्या चाहु।
हसरते पूरी हुई जो ख़्वाब थी अरमान की।

मुझसे करना न फरेब बनकर रहना मेरी दुल्हन।
तुम पर शुरू हुई हैं ख्वाईश जब तक रहे ये प्राण भी।

मुझको और कुछ नही चाहिए तेरे सिवा कुछ और भी।
बन गई हो दिल की धङकन रहना मेरे साथ ही।।




शादीशुदा स्त्री अक्सर कर बैठती है इश्क- अज्ञात

शादीशुदा स्त्री अक्सर कर बैठती है इश्क
मांग में सिंदूर होने के बाबजूद
जुड़ जाती है किसी के अहसासो से
कह देती है उससे कुछ अनकही बाते
ऐसा नहीं कि बो बदचलन है
या उसके चरित्र पर दाग है..
तो फिर वो क्या है जो वो खोजती है
सोचा कभी स्त्री क्या सोचती है
तन से वो हो जाती है शादीशुदा
पर मन कुंवारा ही रह जाता है
किसी ने मन को छुआ ही नहीं
कोई मन तक पहुंचा ही नहीं
बस वो रीती सी रह जाती है
 और जब कोई मिलता है उसके जैसा
 जो उसके मन को पढ़ने लगता है
 तो वो खुली किताब बन जाती है
 खोल देती है अपनी सारी गिरहें
 और नतमस्तक हो जाती है उसके सम्मुख
 स्त्री अपना सबकुछ न्यौछावर कर देती है
 जहां वो वोल सके खुद की बोली
 जी सके सुख के दो पल
 बता सकें बिना रोक टोक अपनी बातें
 हंस सके एक बेखौफ हंसी
 हां लोग इसे ही इश्क कहते हैं
 पर स्त्री तो दूर करती है
 अपने मन का कुंवारापन..!!


तकलीफ़ दुनिया मे कम कहा है किसके आगे रोया जाए- रचना लव तिवारी

तकलीफ़ दुनिया मे कम कहा है।
किसके आगे रोया जाए।

हम सल्तनत के राजा नहीँ
कैसे किसी को ढोया जाय।

सत्ता जिसकी है वो बेख़बर है
नेता और अधिकारी जन

मेरा आंसू कौन पोछेगा
किसको हमदर्द कहा जाये।।

इस दुनिया मे जो भी आया
सब कुछ न कुछ दर्द लिए है।

मेरी हालत ऐसी है कि
सबके दर्द को को न सहा जाए

मेरे मालिक तेरी दुनिया मे ऐसा क्यों अन्याय है।
जो तेरा है वही दुःखी है किस किस से निपटा जाय।।

ताजमहल सी खूबसूरत एक फ़रमान हो तुम। मेरे पवित्र प्यार की उमीद वफ़ा यार हो तुम।।रचना लव तिवारी

ताजमहल सी खूबसूरत एक फ़रमान हो तुम।
मेरे पवित्र प्यार की उमीद वफ़ा यार हो तुम।।

रहो सलामत हरदम जले तुम्हारे दुश्मन सब।
आती जाती ठंडी हवा की एक बयार हो तुम।।

मुझपर बस एहसान कर मेरी हो जाओ तुम।
और कुछ नही चाहिये खुदा से मेरी प्राण हो तुम।।

ख़ुद से ज्यादा भरोसा करते है दिन रात तुम्ही पर।
और किसी मत हो जाना मेरी जान हो तुम।।

2- शेर

दिन रात तुझे में देखु बस यही तम्मना सौ बार मेरी।
तुम भी मुझकों देखा करना दिल का है अरमान यही।।

आ जाओ पास मेरे दुनिया के सारे रिश्ते को तोड़कर।
बन जाओ बस मेरी सजाना लेकर हर अरमान यही।



शुक्रवार, 15 दिसंबर 2023

मेरा दर्द क्या है यह मैं दुनिया को दिखला नहीं सकता- रचना लव तिवारी

मेरे सामने बैठे हुए प्यार को मैं अपना नहीं सकता।
इस दुनिया झुठी रिवाज़ से मैं टकरा नही सकता।।

अब तो यही रह गया है इस जमाने की फ़ितरत में ।
पास रखी अपनी ही वस्तु को भी कोई पा नहीं सकता।।

जिसको जो चाहे मिल जाए ऐसा ख़ुदा क्यों नहीं करता।
हर प्यार करने वाला अपने दर्द को ठुकरा नहीं सकता।

एक तुम ही तो हो जो मेरे दिल दिमाग जहन में बैठे हो।
क्या कोई अपने दिल की धड़कनों को धड़का नहीं सकता।।

किस्मत मेरी निक्कमी है जो महबूब के प्यार को पा ना सकूं।
मेरा दर्द क्या है यह मैं दुनिया को दिखला नहीं सकता।।

एक दिन वह दौर आएगा जब तुम मेरी और मैं तेरा रहूंगा।
इस बात की गंभीरता को कोई अब झुठला नहीं सकता।।




बुधवार, 13 दिसंबर 2023

मैं जानता हूं कि तुम मेरी नहीं हो फिर भी तुमको पाने को दिल करता है रचना- लव तिवारी ग़ाज़ीपुर

ये आंखें ये होंठ और सादगी भरा चेहरा इसमें डूब जाने को दिल करता है।
मैं जानता हूं कि तुम मेरी नहीं हो फिर भी तुमको पाने को दिल करता है।।।

यह जमाने के दस्तूर और नियम हमारे लिए नहीं है
ये सब जानकर फिर भी तुमसे दिल लगाने को जी करता है।

तुम मेरी हो कर रहोगी इस बात का यक़ीन मुझे भी है।
फिर भी तुम्हारे याद में दिल को धड़काने का जी करता है।

खुदा तुम्हें हर शोहरत हर ना चीज से नवाजे इस जमाने में
जो तेरे दुश्मन है उनको रास्तों से हटाने को जी करता है।

आदमी में भी बुरा कहां हूं जो बस तुम्हारे बारे में सोचता हूँ।
अब दिल आ ही गया है तुमपर तो साथ मुस्कुराने जी करता है।।



मंगलवार, 12 दिसंबर 2023

देखते देखते सो जाते हैं इन खूबसूरत चेहरे को। रचना लव तिवारी

देखते देखते सो जाते हैं इन खूबसूरत चेहरे को।
मेरे दर्द को तुम क्या जानो नही सोचते किसी औरों को।

तुम ही मेरी दवा दुआए साथ हो मेरे हक़ीम भी।
नहीं समझोगे तो मर जाएंगे दर्द लिए इन जख्मों को।।

चाह के तुमको गुनाह किया हूं तड़प रहा हूं पल पल में
तुम भी मुझको वैसे ही चाहों जैसे चाहत हो वर्षो की

सपने मेरे सच कर जाओ आकर तुम मेरी बन जाओ
इस दुनिया में जो ना हो सका वो करके तुम दिखलाओ।

एक तम्मना हरदम मेरी, तुम्हारा परचम ही लहराये
जो तुम्हारा जानी दुश्मन है वो खाक में मिल जाये।।

रहो सलामत हरदम तुम, मेरी उम्र भी तुमको लग जाये।
करो राज दुनिया पर तुम साथ कोई आये या न आये।।



सोमवार, 11 दिसंबर 2023

आप की याद हमें अक्सर रुलाती है क्या करें आप भी कहा साथ निभाती है रचना लव तिवारी

आप की याद हमें अक्सर रुलाती है। क्या करें आप भी कहा साथ निभाती है। दिल मे रखकर दूर है इसका किसे ख़बर ये दर्द मेरा मुझको दिन रात तड़पाती है। मारा गया हूं तेरा प्यार का कोई दवा नही एक चेहरा तेरा देख लू तो सुकून की नींद आती है। जमाने की तरह तुम भी अब मतलबी न बन जाओ तुम भी तो मेरा दर्द समझो जिसे दुनिया सताती है।




ख़ुदा का शुक्र देखिए कि आप हमको ही मिल गए रचना - लव तिवारी


नजर में बसते बसते कब दिल में बस गए।

आदमी थे आप गैर कब रूह में उतर गए।।


इतनी मोहब्ब्त किसी से मैंने की नही कभी

आप है जो खुशियों से दामन मेरा भर दिए।


कुछ लोग ने मुझसे आप के बारे में कुछ कहा।

तो फिर क्या है देखिए कि हम ज़माने से भीड़ गए।।


हर शख्स है पागल आप को पाने की चाह में।

ख़ुदा का शुक्र देखिए कि आप हमको ही मिल गए।।


मेरा वजूद बढ़ा है आप शख्शियत को पाने से

कुछ लोग मुझसे कहते है कि आप धन्य हो गए।।



रविवार, 10 दिसंबर 2023

मेरा हक अब किसी को न देना मेरी हो तो बस मेरी ही होना रचना - लव तिवारी

मेरा हक अब किसी को न देना।
मेरी हो तो बस मेरी ही होना।।

मेरी धङकन हो गयी हो जबसे तुम,
अब किसी से क्या लेना देना।।

मेरी अमानत हैं तेरा वो प्यारा दिल
अब किसी को इसे कभी मत देना।

ख़ुदा तुम्हें रखेगा सलामत
इस दुनिया से फिर क्या लेना।

सारी मुरादे हो आप की पूरी
दुनिया मे बस आप का होना

लव तुमको चाहेगा हरदम।
यही तम्मना मरते दम तक देना।।

रचना - लव तिवारी



शनिवार, 9 दिसंबर 2023

तुम्हारी याद ही मुझको हर पल हर वक्त क्यों सताती हैं- लव तिवारी

तुम्हारी याद ही मुझको हर पल हर वक्त क्यों सताती है।
ये दुनिया क्या कोई कम है निगाह तुम पर ही जाती है।

बड़ा दुष्वार है जीना इस दौर में तुम्हारे बिना।
मेरी दुनिया बस तुम हो ये क्यों नही समझ पाती हो।

ये जीवन तुम बिन मुझको बहुत सुना सा लगता है।
जमाने भर की खुशियां मुझे क्यो नही रास आती है।।

मैं मर जाऊँगा तुम बिन जब तुम मेरी हो न पाओगी।
दुनिया की कोई तकलीफ़ मुझे नही दर्द दे पाती है।

कभी आओ मेरी बाहों में लिपट कर अपने गम सारे दे दो।
जब तुम ख़ुश होते हो तभी तो मुझे नींद आती है।।

रचना - लव तिवारी


गुरुवार, 7 दिसंबर 2023

इतिहास गवाह बा क्षत्रिय बल से ना छल से मारल गईल बा -कुमार अजय सिंह गीतकार

🗡️✍️ क्षत्रिय के बलिदान ✍️🗡️

बीरवन के बीर गति होखल,ई इतिहास के बात पुरान बा
अत्याचार के विरोध करे में,क्षत्रिय के भइल बलिदान बा 

चाहे लड़ाई आजादी के होखे,चाहे बॉडर के सुरक्षा के
बीना क्षत्रिय के शस्त्र उठइले,वतन के,के करी रक्षा के 
क्षत्रिय वंश के त्याग तप के,जानत जगत हिन्दुस्तान बा
अत्याचार के विरोध करे में,क्षत्रीय के भइल बलिदान बा 

जब करवट सता लेला,चाहे लाज राखेके होला कानुन के
रणभूमी में कुद जाला,अपने हाथे तिलक लगाके खुन के 
ना डेराला लड़े मरे से,ई लिखले अपने हाथ से दास्तान बा
अत्याचार के विरोध करे में,क्षत्रीय के भइल बलिदान बा 
 
पीठ पर वार करे ना जाने,घोंपे भाला सोझा से छाती पर 
विश्वासघात ना करेला,ना हाथ लगावे दोसरा के थाती पर
आपन सब कुछ लुटाके,दोसरे के बचावे में ई परेशान बा 
अत्याचार के विरोध करे में,क्षत्रीय के भइल बलिदान बा  

कफन के आपन पोसाक समझेला,मृत्यु के जानेऽ इयारी
कुर्बानी हॅंस के देला,भारत माता के धरती के हऽ पुजारी  
ठोक देबे सोझा सोझी,ठोके ठोकाय में पहिला स्थान बा 
अत्याचार के विरोध करे में,क्षत्रीय के भइल बलिदान बा 

माथ पर पगरी डाड़ में लंगोटा,हाथ में राखे मोटहन सोटा
कटइब कगरी त पटक के रगरी,धके बांह कबार दी झोटा
रहस अजय अपना संस्कार में,ऐकरा पर बेसी ध्यान बा 
अत्याचार के विरोध करे में,क्षत्रीय के भइल बलिदान बा  

बीर सुखदेव सिंह गोगामेणी के शहादत,अमर कहानी बा
फिर रामचन्द्र महराणा के वंशज,लिखले नया कहानी बा 
खुन के धार से निकलल ज्वाला,धरती पर ई कृतिमान बा 
अत्याचार के विरोध करे में,क्षत्रीय के भइल बलिदान बा 

सर्वाधिकार सुरक्षित @@
कुमार अजय सिंह गीतकार 

------------------------------------------------------------
इतिहास गवाह बा क्षत्रिय बल से ना छल से मारल गईल बा !!
बीर शहिद क्षत्रिय के कफन भारत माता के दिहल लहु से खंघारल गईल बा !!

कुमार अजय सिंह गीतकार 
नमन एवं विनम्र श्रद्धांजली।          
 🙏🙏🙏🙏🙏


बुधवार, 6 दिसंबर 2023

तोहरा बीना कतहुं लागे नाही मन रनीया हऊ जिन्दगी के हमरा तुहीं धन रनीया - गीतकार कुमार अजय सिंह

✍️ जिन्दगी के धन हमार रानी ✍️

तोहरा बीना कतहुं लागे,नाही मन रनीया
हऊ जिन्दगी के हमरा,तुहीं धन रनीयाऽ

ओठ चटकार लाल,सुगनी के ठोर बा
चढ़ल जवानी भरल,रस पोरे पोर बा
रह दिल के भीतर इहे,बा खखन रनीया
हऊ जिन्दगी के हमरा,तुहीं धन रनीयाऽ

दिनवा तऽ ऐने ओने,घुम फिरके कटेला
रतिया में बीना तोहके,अंखियां ना सटेला
सट के सुतीले मन होला,टनाटन रनीया
हऊ जिन्दगी के हमरा,तुहीं धन रनीयाऽ

लवकुश तिवारी के,लेलऽ आशीर्वाद तु
गोलु साथे जीवन कटी,रहबु आबाद तु
"अजय" कहस बड़ा लागेलु निमन रनीया
हऊ जिन्दगी के हमरा,तुहीं धन रनीयाऽ

सर्वाधिकार सुरक्षित @@
कुमार अजय सिंह गीतकार

पत्नि भक्त गोलु जी के सेवा में सादर समर्पित भेंट संदेश द्वारा लवकुश तिवारी गाजीपुर उत्तर प्रदेश 🌹❤️🌹❤️🌹



शुक्रवार, 1 दिसंबर 2023

दिल के सच्चे लगते हो तभी तो अच्छे लगते हो आदत तुम्हारी इतनी प्यारी,तभी तो बच्चे लगते हो- रचना लव तिवारी


दिल के सच्चे लगते हो, तभी तो अच्छे लगते हो।
आदत तुम्हारी इतनी प्यारी, फिर क्यों बच्चे लगते हो।


मुझपर अपना प्यार लुटाकर, हमदर्दी की बात जताकर।
हर पल हर क्षण यादों में, अक्सर चलते रहते हो।।


मेरी दुनिया तुमसे है और तुम हो मेरी जाने तम्मना।
करू इबादत तुम्हारी ही बस, मुझकों ख़ुदा तुम लगते हो


सास का क्या कब थम जाये, जीवन अपना कब रुक जाए।
इस दुनिया की आपा धापी में, बस तुम ही सच्चें लगते हो।


गीता और कुरान की बातें, सब अपने जगह पर सब ठीक है।
बातें तुम्हारी खुश रखती है,और तुम मुझको अच्छे लगते हो।

रचना लव तिवारी
ग़ाज़ीपुर उत्तरप्रदेश 



हमने भी जिंदगी में क्या हासिल किया रचना ऋषिता सिंह

हमने भी जिंदगी में क्या हासिल किया
अपने ही ग़म में लोगों को शामिल किया

देवता हो न जाए यहाँ हम भी फिर
इस दफ़ा हमने पत्थर को भी दिल किया

मैं तो कमज़र्फ़ हूँ और तू है ज़की
लोगों ने मेरा सच फिर तो बातिल किया

बाख़बर थी मैं भी इश्क़ की चाल से
और फिर इश्क़ ने तेरे ग़ाफ़िल किया

आए भी तुम थे तो चोर दरवाज़े से
ये मिरी ही ख़ता तुमको दाख़िल किया

रचना- ऋषिता सिंह
युवराजपुर गाज़ीपुर उत्तर प्रदेश






बिना कुछ किये हुए कोई भी काम मुकम्मल नहीं होता- रचना नीरज कुमार मिश्रा बलिया ,

"बिना कुछ किये हुए कोई भी काम मुकम्मल नहीं होता,
बिना किसी प्रयास के किसी समस्या का हल नहीं होता,

ज़रूर उसने अटूट विश्वास किया होगा अपना समझकर,
नहीं तो बिना विश्वास किये किसी के साथ छल नहीं होता,

अगर मिली है ज़िंदगी तो किसी के परमार्थ कुछ अच्छा करो!,
मरणोपरांत जग में नाम नहीं होने पर जीवन सफ़ल नहीं होता,

तुम्हारी सफलताओं पर तुम्हारे कथित अपने ही ज़हर उगलेंगे,
आस्तीन के सांप से ज़्यादा किंग कोबरा में भी गरल नहीं होता,

अपने अधिकारों को पाने लिए तुमको स्वयं ही लड़ने पड़ेगा!,
ज़िंदगी का सफर बहुत मुश्किल होता है यह सरल नहीं होता।"

नीरज कुमार मिश्र
बलिया