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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

Lav Tiwari On Mahuaa Chanel

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शुक्रवार, 17 जून 2016

समाज के प्रति निःस्वार्थ भाव की सेवा

शारीरिक श्रम एवं मानसिक श्रम से हमने लोगो को अपने व्यक्तिगत विकास की परिभाषा लिखते हुए देखा है , बच्चों का वह बड़ा समूह जो पाठशाला का रुपरेखा को भी नहीं देखा हो और अगर देखा भी होगा तो किताबी ज्ञान के अलावा कुछ भी नहीं, यहाँ बच्चों को ज्ञान के साथ संस्कार एवं समाज में समाज के प्रति निःस्वार्थ भाव की सेवा का जो बीज आज के इस बिगड़ते समाज को प्रवीण तिवारी Praveen Tree ने दिया है उसे देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है, गर्मी के दिनों में राहगीरों को प्याऊ के माध्यम से शीतल जल से प्यास बुझाने के साथ गरीब परिवार के बच्चों को दिन का भोजन की व्यवस्था भी,  राहगीरों और समाज को एक सन्देश की धरती पर आने का मक़सद अपना स्वार्थ ही नहीं बल्कि समाज में निःस्वार्थ सेवा भी है,

इस समाज में एक पक्ष राजनीती भी है चाहे वो किसी देश या राज्य की कोई भी पार्टी हो उसका मुख्य उदेश्य समाज के बिगड़ते रूप समाजिक व्यवस्था को सही एवं सुचारू रूप से करने की है इसका उल्टा असर है , अभी हमने माननीय प्रधानमंत्री के एक भाषण में सुना की अगर हम देश के 125 करोड़ जनता एक साथ मिल कर काम करे तो देश की एक अलग तस्वीर होगी, मैं प्रधानमंत्री जी से पूछना चाहता हु देश की जनता भी एक हो जायेगी और देश का विकास भी होगा , लेकिन क्या सारी राजनैतिक पार्टी एक हो सकती है , नहीं कभी नहीं एक तो छोड़िये भारतीय सविधान ने मुर्ख को भी एक नयी पार्टी बनाने का अधिकार है ,पार्टी बनाकर समाज को बाटने का भी , ऊपर दिए हुये तस्वीर के माध्यम से मैंने यह  कहने का प्रयास किया है कि यहाँ समाजसेवी नेता की जरुरत है न कि समाज विरोधी,
प्रस्तुति- लव तिवारी
ग़ाज़ीपुर

बुधवार, 15 जून 2016

तेज धुप गर्म मौसम और रिक्शा वाला

इस 42 से 48 डिग्री #तापमान में सड़कें जल रहीं..गर्म हवा और लूह से हाल बेहाल है.
वहीं कुछ लोग हैं जो बिना #धूप-छाँव की परवाह किये सड़क पर अपने काम में लगे हैं... धूप में जल रहे हैं...कन्धे पर फटा गमछा..और पैरों में टूटी चप्पल पहने धीरे से पूछ रहे.."कहाँ चलना है भइया.फिल्म सिटी 16 नॉएडा ."?
आइये तीस रुपया ही दिजियेगा।"

इसी बीच कोई आईफोन धारी आता है अपने ब्युटीफुल गरलफ्रेंड के साथ..और अकड़ के कहता है.."अरे..हम जनवरी में आये थे तब बीस रुपया दिए थे बे....कइसे तीस रुपया होगा" चलो पच्चीस लेना"
#गर्लफ्रेंड मुस्कराती है..मानों उनके ब्वायफ़्रेंड जी ने 5 रुपया नहीं 5 करोड़ डूबने से बचा लिया हो..वो हाथ पकड़ के रिक्शे पर बैठतीं हैं..और बहुत ही प्राउड फील करती हैं...
यही ब्वायफ़्रेंड जी जब #KFC,मैकडोनाल्ड और पिज़्ज़ा हट में उसी गर्लफ्रेंड के साथ कोल्ड काफी पीने जाते हैं.तो बैरा को 50 रुपया एक्स्ट्रा देकर चले आते हैं..
वही गर्लफ्रेंड जी अपने बवायफ्रेंड जी की इस उदारता पर मुग्ध हो जातीं हैं...वाह..कितना इंटेलिजेंट हैं न.
आदमी कितनी बारीक चीजें इग्नोर कर देता है..जाहिर सी बात है की जो बैरा को पचास दे सकता है..वो किसी गरीब बुजुर्ग #रिक्शे वाले को दस रुपया अधिक भी तो दे सकता है..
लेकिन सामन्यतया आदमी का स्वभाव इतना लचीला नहीं हो पाता..
क्योंकि अपने आप को दूसरे की जगह रखकर किसी चीज को देखने की कला हमें कभी नहीँ सिखाई गयी।
और आज सलेक्टिव संवेदनशीलता के दौर में ये सब सोचने की फुर्सत किसे है.
कई बातें हैं...बस यही कहूंगा की..इस #प्रचण्ड गर्मी में रिक्शे वालों से ज्यादा मोल भाव मत करिये..
जब बैरा को पचास देने से आप गरीब नहीं होते तो रिक्शे वाले को पांच रुपया अधिक देने से आप गरीब नहीं हो जायेंगे..कोई #गाजीपुर का लल्लन,कोई #बलिया का मुनेसर, कोई #सीवान का खेदन या फिर देश के किसी भी जगह से अपना घर-दुआर छोड़ #बेल का शरबत, दही की #लस्सी,आम का #पन्ना, और #सतुई बेच रहा है..एक सेल्फ़ी उस लस्सी वाले के साथ भी तो लिजिये।
जरा झांकिए इनकी आँखों में एक बार गौर से...
इसके पीछे..इनकी माँ बहन बेटा बेटी की हजारों उम्मीदें आपको उम्मीद से घूरती मिलेंगी..
केएफसी कोक और मैकडोनाल्ड का पैसा पता न कहाँ जाता होगा.. लेकिन आपके इस बीस रुपया के लस्सी से.और दस रुपया के बेल के शरबत से .5 रुपये के नींबू पानी से किसी खेदन का तीन साल का बबलुआ इस साल पहली बार स्कूल जाएगा.
किसी मुनेसर के बहन की अगले लगन में शादी होगी.
किसी खेदन की मेहरारू कई साल बाद अपने लिए नया पायल खरीदेगी..
इतनी गर्मी के इतनी सी संवेदना बची रहे..
हम आदमी बने रहेंगे।

शनिवार, 11 जून 2016

बिकाऊ मीडिया सलीम खान

सलीमखान(सलमान के पिता) द्वारा  पत्रकारोको/मिडियाको करारा थप्पड़..

आज कलम का कागज से ""
मै दंगा करने वाला  हूँ,""
.
मीडिया की सच्चाई को मै ""
नंगा करने वाला हूँ ""
.
मीडिया जिसको लोकतंत्र का ""
चौंथा खंभा होना था,""
खबरों की पावनता में ""
.
जिसको गंगा होना था ""
आज वही दिखता है हमको ""
वैश्या के किरदारों में,""
.
बिकने को तैयार खड़ा है ""
गली चौक बाजारों में""
.
दाल में काला होता है ""
तुम काली दाल दिखाते हो,""
.
सुरा सुंदरी उपहारों की ""
खूब मलाई खाते हो""
.
गले मिले सलमान से आमिर,""
ये खबरों का स्तर है,""
.
और दिखाते इंद्राणी का ""
कितने फिट का बिस्तर है ""
.
म्यॉमार में सेना के ""
साहस का खंडन करते हो,""
.
और हमेशा दाउद का""
तुम महिमा मंडन करते हो""
.
हिन्दू कोई मर जाए तो ""
घर का मसला कहते हो,""
.
मुसलमान की मौत को ""
मानवता पे हमला कहते हो""
.
लोकतंत्र की संप्रभुता पर ""
तुमने कैसा मारा चाटा है,""
.
सबसे ज्यादा तुमने हिन्दू ""
मुसलमान को बाँटा है""
.
साठ साल की लूट पे भारी ""
एक सूट दिखलाते हो,""
.
ओवैसी को भारत का तुम ""
रॉबिनहुड बतलाते हो""
.
दिल्ली में जब पापी वहशी ""
चीरहरण मे लगे रहे,""
.
तुम एश्श्वर्या की बेटी के ""
नामकरण मे लगे रहे""
.
'दिल से' दुनिया समझ रही है "'"
खेल ये बेहद गंदा है,""
.
मीडिया हाउस और नही कुछ""
ब्लैकमेलिंग का धंधा है""
.
गूंगे की आवाज बनो ""
अंधे की लाठी हो जाओ,""x
.
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो ""
और फिर से जिंदा हो जाओ

शुक्रवार, 10 जून 2016

राजनितिक पार्टियो के आधार पर बिखंडित समाज

#राजनीती  एवं राजनीतिक #पार्टियो का जो भी मतलब हो , लेकिन मेरे शब्दों में ये #समाज में #बिखण्डन करने कुछ #असामाजिक लोगों का समूह है , इस बात की पुष्टि जैसे हम और आप सभी #फेसबुक पर अच्छे दोस्तों की तरह व्यवहार करते है एक दूसरे की पोस्ट लाइक करना एवं कमेंट करना, लेकिन राजनितिक मत के आधार पर हर एक व्यक्ति का मत अलग अलग है , #ज्ञान, #नैतिक #तर्क और #सामजिक आधार पर अगर मत होतो स्वाभाविक है उसे स्वीकारा जा सकता है , लेकिन मेरे द्वारा यह देखा गया है  भाई आप यादव है तो आप समाजवादी पार्टी के कट्टर समर्थक है #ब्राम्हण , #छत्रिय है तो बीजेपी , वैश्य शूद्र है तो #बसपा, #आम आदमी पार्टी भी है एक केजरीवाल साहब की वो तो अपने को आम आदमी की सरकार मानती है लेकिन 4 गुने वेतन बृद्धि की बात अपने विधायको के पक्ष में करती है,  सविधान में नयी पार्टी के गठन में किसी व्यक्ति के शैक्षिण योग्यता का भी जिक्र नहीं है और चपरासी की भर्ती के लिए 10 वी पास होना जरुरी है सभी पार्टियो का यह उद्देश्य हर एक वर्ग में पैठ बनाया जाय,  मुझे भी मेरे कई मित्रो ने हमें मोदी भक्त की उपमा दी हुयी है, चलिए हम भी  भक्त शब्द से कोई अप्पति नहीं है , हा कभी कभी इस बात का जरूर डर लगता है की भक्त के जगह कोई और गलत शब्दों का प्रयोग न हो,
धन्यबाद
लव तिवारी

गुरुवार, 9 जून 2016

तुम्हारी स्मृति - लव तिवारी

तुम्हारी स्मृति
जगमगाते शहर में बारिश का अनचाहा मौसम , जब  तुम  भीगते हुए अपने गेसुओं  को लहराते तो खूबसूरती और सादगी की एक अनमोल सी झलक मेरे ह्रदय को स्पर्श कराती हुयी आखो को एक खुशनुमा अहसास दिलाती है
लेकिन दुःख की बात यह है ये बारिश एक तरफ लहलहाते  हुए खेतो की वो मंजर जो कुछ ही दिनों बाद खलिहान का रूप देने को है , इस पर बारिश की बूदों का मतलब साफ है कि ये हमें बेबसी और उजड़े आलम के सिवाय हमारे सपनो की जो हमने पिछले कुछ  दिनों पहले खेतो को देख कर महसूस की थी  उनके न पुरे होने का अहसास दिलाती है ,
प्रस्तुति - लव तिवारी

रविवार, 5 जून 2016

भारत में राजनिति की दुर्गम स्थिति

लम्बा सफर और सफ़र के साथी मोबाइल फ़ोन और कुछ किताबे , किताबो को लेकर एक विशेष रोचक बात जहाँ में है  किताबो में जो बात है वो कही और नहीं, पुरे सफ़र किताबो के सहारे  तो नहीं गुजारी जा सकती , फिर क्या किताब के साथ मोबाइल फ़ोन का जिक्र किया था हमने, अक्सर सफ़र को रोचक और यादगार बनाने जे लिए मोबाइल फ़ोन में पुराने फिल्मो का कुछ बेहतरीन कलेक्शन होते है , आज के सफ़र में एक फ़िल्म सूत्रधार को देखने और भारतीय राजनीती की मिलती जुलती मिशाल को दर्शाती इस फ़िल्म की विशेष कहानी है

भारतीय राजनीती भी इसी तरह के सूत्रधार पर आधारित रह कर सीमट सी गयी है जैसे फ़िल्म में  कुमार जब तक राजनीती में नहीं रहता उसे देश सेवा और अपने गांव क्षेत्र का विकास चाहिए होता है लेकिन राजनीती में जाने के बाद वो भी कई साजिश और संयत्र को अंजाम देता है, वास्तविकता को दर्शाती एक जब तक कोई व्यक्ति नेता नहीं रहता उसमे देश प्रेम और सेवा की भावना होती है जैसे वो नेता बनता है उसे अपने कुर्सी और राजनीति में अपने और ऊँचे और बड़े पदों की पाने की लालसा बढ़ती जाती है, इस काम को अंजाम देने के लिए उसके द्वारा विभिन्न प्रकार के अनैतिक कार्य को अंजाम देना पड़ता है , भारतीय पूर्व प्रधानमंत्रियों में मेरे सबसे योग्य और निष्टावान वक्तित्व के दो प्रधानमंत्री मेरे आदरणीय है एक तो स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री और दूसरे माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ,  भारतीय सामाजिक व्वस्था को सही ढंग से चलने के लिए संविधान ने मुख्य रूप से  कार्यपालिका , न्यायपालिका और व्वस्थापलिका का गठन किया और जब व्वस्थापलिका का पूरा दायित्व जब भारत के ऐसे राजनीतिज्ञों के हाथ होगी जो फ़िल्म सूत्रधार जैसे कार्यो को अंजाम देगे , मैंने किसी राजनैतिक पार्टी का इस पोस्ट में नाम नहीं लिया है इस पोस्ट को अन्यथा न ले
प्रस्तुति
धन्यबाद - लव तिवारी

शनिवार, 4 जून 2016

आँखे फेर लेता है मुझको अब देख कर वो यूँ

आँखे फेर लेता है मुझको अब देख कर वो यूँ
जैसे सदियों पहले उसने, दोस्ती मुझसे तोड़ी है..

दर्द अपनों ने दिया रोज़ आज किसी गेर ने दी है तो
इतनी ताजुब क्यों हो ? ये बात कोनसी बड़ी है ?..

हज़ार दर्द हों सीने में, जी भर आया हो जीने में
फिर भी हँस देना, सभी के बस का ये कमाल थोड़ी है...

कभी स्याही हुई खत्म कभी हाथ में हुई पीड़न
पर दर्द दिल का रितिका ने, लिखनी कब छोड़ी है..




गुरुवार, 2 जून 2016

सुभाष चंद्र बोस नेताजी और हिटलर

एक बार नेताजी हिटलर को पहली बार मिलने जर्मनी गये, तो हिटलर के आदमियों ने उन्हें बाहर प्रतीक्षा हॉल में बैठा दिया।
नेताजी उसी दौरान बैठे बैठे किताब पढ़ने लगे।
थोड़ी देर बाद एक आदमी आया हिटलर का हम शक्ल बनकर और नेताजी के साथ बात कर के चला गया। नेता जी ने कोई भाव व्यक्त नहीं किया, थोड़ी देर के बाद दूसरा आदमी हिटलर के वेश में आकर नेताजी से हिटलर बन कर बात की।नेता जी ने उसको भी कोई भाव नहीं दिया.... इस तरह एक के बाद एक कई बार हिटलर के वेश धारण कर के उनके हमशक्ल आ के खुद को हिटलर बता कर बात करते रहे लेकिन नेताजी फिर भी बैठे बैठे किताब पढते रहे हिटलर को मिलने के लिए ( जबकि आम तौर पर दूसरे लोग हिटलर के हमशक्ल को मिलते ही, खुद हिटलर को मिलके आये हैं ऐसे भ्रम में वापस लौट आते थे).... आखिर में खुद हिटलर आया और आते ही हिटलर ने नेताजी के कंधे पर हाथ रखा.... नेताजी तुरंत बोल उठे.... हिटलर....!!!! ...
हिटलर भी आश्चर्य में पड़ गया इतने सारे मेरे हमशक्ल आये फिर भी आप मुझे कैसे पहचान गये... जब की हमारी पहले कभी कोई मुलाकात नहीं हुई।।
नेताजी ने तब जवाब दिया कि जिसकी आवाज़ से ग्रेट ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भी कांपते हैं वो सुभाष चंद्र बोस के कंधे पर हाथ रख ने कि गुस्ताखी इस दुनिया में सिर्फ हिटलर कर सकता है दुसरा कोई नहीं और ना ही हिटलर का आदमी भी।
गुलाम भारत के आजाद फौजी को हम सब का कोटि कोटि नमन
नमम उस हिन्दुस्तानी शेर को जिसेने हमारे हिंदुस्तान को आजाद कराया
जय हिन्द
वन्दे मातरम्
भारत माता की जय ।

न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की- निदा फ़ाज़ली

न जी भर के देखा न कुछ बात की

बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं
कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की

मैं चुप था तो चलती हवा रुक गई
ज़ुबाँ सब समझते हैं जज़्बात की

सितारों को शायद ख़बर ही नहीं
मुसाफ़िर ने जाने कहाँ रात की

@ निदा फ़ाज़ली

बुधवार, 1 जून 2016

बचपन की कुछ यादों के साथ -कोई लौटा दे वो मेरे बीते हुए दिन- लव तिवारी

आज वक्त के इस आइने में हमारे बीते हुए कल 90 दशक की तस्वीर चाहे कितनी ही पुरानी हो गई हो पर जब भी सामने आती है ढेर सारी यादे ताज़ा हो जाती हैं, और यदि यादे अगर बचपन की हो तो अलग ही मज़ा आता है, इन तस्वीरों में बड़े भाइयो के साथ की कुछ तस्वीर है अभी भी मुलाकात होती है हम सब में लेकिन उम्र के साथ मिलने और जीने के लहजे बदल गए फिर जिंदगी की भाग दौर में रोटी दाल की फ़िक्र भी तो है , कुछ बचपन की लाइन जैसे-“अक्कड़-बक्कड़  बम्बे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ, सौ में लगा धागा, चोर निकल के भागा” 2 मामा मामी के दुकान मामा ले आये बदाम मामी तोड़ तोड़ के खायी मामा खड़े ललचा , ये तस्वीर  भी ननिहाल की है अक्सर मामा जी को चिड़ाने वाले क्रियाकलाप भी किये जाते थे ,कितनी बार अपने सपनों का घर बनाते तो कभी गुड्डे– गुडियों की शादी कराते, कभी लडकियों की चोटी खीचकर उन्हें परेशान करते, तो उस पर पापा की वो डांटे और वो गलती पर मम्मी को मनाना, कभी बारिश में कागज़ की नाव,तो कभी राह चलते पानी में बेमतलब पैर छप-छपाना, जब याद करते है उन पालो को तो किशोर कुमार का वो गीत याद आता है- “कोई लौटा दे वो मेरे बीते हुए दिन"  सच कहूँ तो मुश्किल ही लगता है उन दिनों का लौट पाना,
प्रस्तुति - लव तिवारी

गुरुवार, 26 मई 2016

अब बारी है चाचा नेहरू के बलिदानों की

आज बारी नेहरू जी के बलिदानों की।।

प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी के भारत के लिए बहुत बलिदान दिए, जिनमे से कुछ का उल्लेख नीचे दे रहा हूँ-

1- 1947 में जब सेना कश्मीर में जीत की कगार पर थी, तो ceasefire लगा दिया, जिससे पूरा कश्मीर हमारे हाथ आते-आते रह गया।

2- कश्मीर का मुद्दा UN में ले जाना सबसे बड़ी बेवकूफी, हमारे ही देश के लोगों को हमारे देश के किसी हिस्से से बाहर कर दो, और जिहादियों और मुल्लों को बसाकर वहां जनमत संग्रह करवाओ तो क्या वो हिस्सा आपको मिलेगा क्या?

3- नेहरू जी हैदराबाद रियासत को भारत में मिलाना ही नहीं चाहते थे। तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने हैदराबाद में सेना को भेजकर ऑपरेशन पोलो चलाया था,तब निजाम ने मज़बूरी में घुटने टेके थे, निजाम नेहरू जी के आने का इंतज़ार कर रहे थे लेकिन सरदार पटेल जी ने नेहरू का प्लेन उतरने ही नहीं दिया था। आज भी वह टेलीफोन टूटी अवस्था में संग्रहालय में रखा है जिसपर नेहरू जी ने यह सुना था कि हैदराबाद अब भारत का हिस्सा है।

4- कश्मीर में अनुच्छेद-370 लगाकर पाकिस्तान का अधिकार अधिक कर दिया। सभी नेता और वरिष्ठ जानकार लोग इस फैसले के विरोध में थे, यहाँ तक कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने भी इस फैसले का विरोध किया था, उन्होंने कहा था कि यह देशविरोधी है।

5- अक्साई चिन का बड़ा भू-भाग चीन को गिफ्ट दिया। यह तो आप सब जानते ही हैं, कर्ण के बाद दानवीर की उपाधि नेहरू जी को ही मिलनी चाहिए।

6- UN सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता चीन को मुफ़्त दे दी, एक बार फिर नेहरू जी ने दानवीर कर्ण को पीछे छोड़ने का प्रयास किया।

7- 3 चरण तक प्रधानमंत्री रहे, लेकिन बस अय्याशी की, कोई कार्य नहीं किया देश की बेहतरी और गरीबी को कम करने के लिए। कपड़े फ्रांस में धुलते थे, गर्मियां स्विट्ज़रलैंड में मनाते थे। दुनिया भर का भ्रमण कर डाला प्रधानमंत्री रहते हुए, लेकिन देश के लिए ढेला कुछ नहीं किया।

8- एक जानकार के अनुसार सड़क, बिजली और पानी की मूलभूत समस्यायें तो तभी पूरी हो जानी चाहिए थी जब नेहरू जी प्रधानमंत्री थे, ऐसा न होना दर्शाता है कि नेहरू का नेतृत्व कितना क्षीण था।

9- पाकिस्तान बनाने के लिए स्वयं को भारत रत्न दे डाला। मैंने कहा न नेहरू जी दान के मामले में दानवीर कर्ण को पीछे छोड़ना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने मुस्लिमों को एक टुकड़ा भूमि दान में दी, और उसी के लिए स्वयं को भारत रत्न दे डाला।

10- यह सर्वदा सत्य है कि नेहरू जी जबतक रहे तबतक उन्हें भारत से अधिक चिंता अपने पड़ोसियों की रही, फिर वह पाकिस्तान हो या चीन।

Source- Whatsapp

सोमवार, 23 मई 2016

विकास की आशाओ में खोया शहर ग़ाज़ीपुर

#VoteforBJP,#VoteforDevelopment , #BJP , #Yuvrajpur #Ghazipur , #Bjputtarpradesh

#उपचुनाव #जंगीपुर #विधानसभा
राजनीती करने की भी एक हद होती है, #राजनीति मर्यादा में रह कर किया जाय तो बहुत बढ़िया, फिर लोगो को धन और झूठे वादों का प्रलोभन दिया जा रहा है, सुना है आज हमारे पैतृक गांव #युवराजपुर #ग़ाज़ीपुर में दलित बस्ती ने वोट मागने वर्तमान #सरकार के कुछ लोग पहुचे , झूठे वादों के साथ कुछ धन प्रलोभन भी दिया गया, हमने अपने पिछले पोस्ट में भी लिखा है #समाजवादी #पार्टी द्वारा दिए गए झूठे प्रलोभन में मत आये , इस #पार्टी ने वक्तिगत विकास पर जोर देकर केवल मंत्री और उनके सगे संबंधी पर के विकास पर जोर दिया है
वही भारतीय जनता पार्टी की बात करे तो वो एक सामूहिक विकास को ध्यान में रख कर , विकास के नए नए एजेंडा के साथ सभी जाति , सभी #वर्ग और सभी लोग का विकास के बारे में सोचती है, इसका जवलंत उदहारण आप के सामने है
1- #ग़ाज़ीपुर से नए ट्रेन को #दिल्ली और #मुम्बई के लिए चलाये जाने की नयी मुहीम
2- #उज्जवला के द्वारा सभी गरीब वर्गों के लिए #रसोई घर में नए #गैस कनेक्शन का वितरण , इससे वातावरण को भी #प्रदूषित होने से बचेगा
3- जैसा कि हमने पिछले पोस्ट में लिखा था किसी व्यक्ति का विकास उसके क्षेत्र का विकास होता है , इस बात की भी रुपरेखा देख लीजिये
पिछले 50 वर्षो में हमारे #देश की पृष्टभूमि पर एक अनोखा जिला ग़ाज़ीपुर अग्रेजो के ज़माने में इस जिले का एक अलग महत्व हुआ करता था उस ज़माने में यहाँ पर दो हवाई अड्डों की चालू दशा थी अंधुउ हवाई अड्डा जो ग़ाज़ीपुर गोरखपुर के मार्ग पर स्थित है और दूसरा सहबाज कुली हवाई अड्डा जो ग़ाज़ीपुर बलिया मार्ग पर स्थित है , #गुलाबजल और #अफीम की बड़े मात्रा में उत्पाद जो अब धीरे धीरे पतन को अग्रसर है
उत्तर प्रदेश के सरकार में 8 विधयाको में से जब 4 विधायको को मंत्री पद की गोपनीयता की सपथ दिलाई गयी तो एक उम्मीद की आशा ग़ाज़ीपुर को दिखने लगी थी लेकिन #मंत्री और #सरकार सामूहिक विकास को भूल कर वक्तिगत विकास की और अग्रसर दिखे और फिर वही उत्तर प्रदेश का एक #गुमनाम शहर ग़ाज़ीपुर विकास के आशाओ में खो गया , आज भी लोगों को अपने शहर का पता बताने के लिए ग़ाज़ीपुर के साथ बनारस शहर का नाम लेना पड़ता है की भैया हम लव तिवारी घर ग़ाज़ीपुर से है जो बनारस शहर के पास है
केंद्रीय में भारतीय जनता पार्टी की सरकार से एक उम्मीद की किरण आती हुयी नजर आ रही है, और ऐसा लगता है की हमें बहुत कुछ चाहिए जो पिछले सरकारो ने हमें नहीं दिया
वाराणसी ग़ाज़ीपुर से #गोरखपुर के 6 लेंन सड़क मार्ग का विकास और भी बहुत कुछ विकास अभी बाकी है जो आप समस्त ग्राम वासियो  के सहयोग से ही पूर्ण होगा
धन्यबाद
प्रस्तुति लव तिवारी
युवराजपुर गाज़ीपुर

रविवार, 22 मई 2016

यह कैसी है दिल्ली सरकार की मुहिम

कल लिखे एक  पोस्ट को  नेशनल दुनिया न्यूज पेपर के पृष्ट पर प्रकाशित किया गया
सफ़र कुछ 80 किलो मीटर का और हम और सुखविन्दर पा जी, सफ़र को आसान बनाने के लिए गुफ्तगू भी जरूर है हमने सरदार जी से पूछ बैठे किसकी सरकार आप को अच्छी लगी , और आप तो दिल्ली के हो साहब और केजरीवाल सरकार को आप ने ही तो कुर्सी दिए हो , एक #सरदार और दूसरे में टैक्सी और ऑटो ड्राईवर , बोला बस 5 साल ही केजरीवाल इसके बाद नहीं , सरदार जी बोले दिल्ली में टैक्सी नंबर की सारी गाडियो को डीजल मुक्त बनाने की दिल्ली सरकार की मुहीम हमें समझ नहीं आई , क्यों की #CNG तो केवल दिल्ली तक सीमित रहेगी  फिर हम बाहर के क्लाइंट को कैसे हैंडल करेगे और प्राइवेट गाडियो को डीजल युक्त उससे प्रदूषण भी होगा लेकिन उसे बंद कर देगा तो राजनीति कैसे होगी ,और बन्दे वोट कैसे देगे ,और दूसरी बात #देश का पहला #मुख्यमंत्री जो सबसे जादा पीटा गया है और इसके सबसे जादा मिमिक्री भी रेडियो और टीवी पर  की जाती है ,
लंबा सफ़र था #केजरीवाल और दिल्ली को छोड़ कर  देश की राजनीती पर कांग्रेस सरकार के बारे में क्या हाल है  तो साहब ने झट से बोल दिया ये तो चोरो और घूसखोरो की सरकार है अब इसके पीछे 1984 का सिख दंगा हो या फिर और कोई नाराजगी
#बीजेपी और #प्रधानमंत्री के विकास के बारे में पूछा तो सरदार जी बोले की सही नेतृत्व कर रहे अपने मोदी साहब साथ में गरीबो और निम्न वर्गो को लेकर चलने वाली सरकार है


थोड़े देर बाद सरदार जी के मन में हमारा ही प्रश्न आप तो #उत्तरप्रदेश से है और आगामी #विधान_सभा_चुनाव_2017 में किसकी सरकार का गठन  होगा आप के प्रदेश में , मैंने सरदार जी को जो उत्तर प्रस्तुत किये उसका कुछ रूप आप सभी के सामने प्रस्तुत किया और बोला की पा जी उत्तर प्रदेश कोई छोटा प्रदेश नहीं जिसकी #राजनितिक #विश्लेषण कर सके लेकिन फिर भी आप ने मेरे प्रशनो का जबाब दिया तो हमें भी बताना जरुरी है , उत्तर प्रदेश में सरकार बसपा और सपा की क्रमशः बनती है एक बार #सपा और दूसरी बार #बसपा , और जिस प्रकार आरछण के वजह से सही व्यक्ति विशेष का चुनाव संभव नहीं उसी प्रकार सरकार की राजनीती आरछण की तरह नेताओ के #फर्जी  साजिश और झूठे वादों के कुपोषित होकर रह गयी है चुनाव के द्वारान वोट की राजनीती मूलतः #शराब , #पैसा  #जातिवाद और #परिवारवाद तक सिमित होकर रह गयी है ,इस सारे बातो का एक ही मतलब है हम कब तक दुसरो के कहने पर वोट देते रहेगे #वोट देने से पहले एक बार सोचे समझे और फिर इस विशेष #अधिकार का सही प्रयोग करे


प्रस्तुति - लव तिवारी

सबका सहयोग एक शुरुवात

सबका सहयोग एक शुरूआत
निःशुल्क प्याऊ
ग़ाज़ीपुर वाराणसी रोड पर प्याऊ की व्यवस्था ,पूरी गर्मी तक  क्षेत्र वासियो को पानी पिलाते और धर्मार्थ कार्य करते  परम पूज्य गुरु जी S N Tiwari और उनके पुत्र प्रवीण तिवारी Praveen Tree और उनके सहयोगी जन ,पिता और पुत्र दोनों लोगो की कृपा हम पर हमारे विद्यार्थी जीवन में पड़ी है गुरु जी के द्वारा हमें सिटी इण्टर कॉलेज  ग़ाज़ीपुर में गणित विषय का अध्यन और उनके पुत्र के द्वारा घर पर अध्ययन का कार्य हमारे विद्यार्थी जीवन को मिला है, आज दोनों लोगो द्वारा ग़ाज़ीपुर के गरीब बच्चों को मुफ़्त में शिक्षा के साथ समय समय पर भोजन और भीषण गर्मी में गरीब बच्चों के सहयोग से राहगीरों को शीतल जल से जलपान की व्वस्था इनकी संस्था सबका सहयोग एक शुरुवात के द्वारा की जाती है इस तरह के सामाजिक कार्य को कर शारीर को एक विशेष आनंद की प्राप्ति होती है वैसा आनंद न कही 5 स्टार होटलो में है न कही बहुत से सुख सुविधाओ से युक्त जीवन शैली में है

पिछले दिनों एक इसी तरह के पोस्ट पर एक फेसबुक महिला मित्र ने कमेंट किया था कि आप सब इस तरह के कार्यो को क्यों नहीं अंजाम देते हो वो पोस्ट मूलतः नोएडा दिल्ली एनसीआर से सबंधित था, मैं पिछले महीने मध्यप्रदेश की यात्रा पर गया था वहाँ भी रेलवे स्टेशन पर निःशुल्क और गर्मी में प्याऊ की व्वस्था थी  लेकिन अभी तक हमें दिल्ली एनसीआर में इस तरह के कार्यो का प्रारूप कही नहीं मिला क्यों की यहाँ आदमी व्यस्त है धन और शोहरत कमाने में , यहाँ किसी को अपने परिवार को तो समय ही नही है तो आप जनता और समाज में समाजसेवी बनाना  बहुत दूर की बात है, हा कुछ लोग है जो मजबूरी वश चाह कर भी इस तरह के कार्यो को अंजाम नहीं दे पाते है और वो मजबूरी प्राइवेट नौकरी ,अप्रयाप्त धन या लोगो का सहयोग न मिलाना हैं,

शनिवार, 21 मई 2016

विकास की गति में राजनितिक दल का विशेष योगदान

सफ़र कुछ 80 किलो मीटर का और हम और सुखविन्दर पा जी, सफ़र को आसान बनाने के लिए गुफ्तगू भी जरूर है हमने सरदार जी से पूछ बैठे किसकी सरकार आप को अच्छी लगी , और आप तो दिल्ली के हो साहब और केजरीवाल सरकार को आप ने ही तो कुर्सी दिए हो , एक #सरदार और दूसरे में टैक्सी और ऑटो ड्राईवर , बोला बस 5 साल ही केजरीवाल इसके बाद नहीं , सरदार जी बोले दिल्ली में टैक्सी नंबर की सारी गाडियो को डीजल मुक्त बनाने की दिल्ली सरकार की मुहीम हमें समझ नहीं आई , क्यों की #CNG तो केवल दिल्ली तक सीमित रहेगी  फिर हम बाहर के क्लाइंट को कैसे हैंडल करेगे और प्राइवेट गाडियो को डीजल युक्त उससे प्रदूषण भी होगा लेकिन उसे बंद कर देगा तो राजनीति कैसे होगी ,और बन्दे वोट कैसे देगे ,और दूसरी बात #देश का पहला #मुख्यमंत्री जो सबसे जादा पीटा गया है और इसके सबसे जादा मिमिक्री भी रेडियो और टीवी पर  की जाती है ,

लंबा सफ़र था #केजरीवाल और दिल्ली को छोड़ कर  देश की राजनीती पर कांग्रेस सरकार के बारे में क्या हाल है  तो साहब ने झट से बोल दिया ये तो चोरो और घूसखोरो की सरकार है अब इसके पीछे 1984 का सिख दंगा हो या फिर और कोई नाराजगी

#बीजेपी और #प्रधानमंत्री के विकास के बारे में पूछा तो सरदार जी बोले की सही नेतृत्व कर रहे अपने मोदी साहब साथ में गरीबो और निम्न वर्गो को लेकर चलने वाली सरकार है

थोड़े देर बाद सरदार जी के मन में हमारा ही प्रश्न आप तो #उत्तरप्रदेश से है और आगामी #विधान_सभा_चुनाव_2017 में किसकी सरकार का गठन  होगा आप के प्रदेश में , मैंने सरदार जी को जो उत्तर प्रस्तुत किये उसका कुछ रूप आप सभी के सामने प्रस्तुत किया और बोला की पा जी उत्तर प्रदेश कोई छोटा प्रदेश नहीं जिसकी #राजनितिक #विश्लेषण कर सके लेकिन फिर भी आप ने मेरे प्रशनो का जबाब दिया तो हमें भी बताना जरुरी है , उत्तर प्रदेश में सरकार बसपा और सपा की क्रमशः बनती है एक बार #सपा और दूसरी बार #बसपा , और जिस प्रकार आरछण के वजह से सही व्यक्ति विशेष का चुनाव संभव नहीं उसी प्रकार सरकार की राजनीती आरछण की तरह नेताओ के #फर्जी  साजिश और झूठे वादों के कुपोषित होकर रह गयी है चुनाव के द्वारान वोट की राजनीती मूलतः #शराब , #पैसा  #जातिवाद और #परिवारवाद तक सिमित होकर रह गयी है ,इस सारे बातो का एक ही मतलब है हम कब तक दुसरो के कहने पर वोट देते रहेगे #वोट देने से पहले एक बार सोचे समझे और फिर इस विशेष #अधिकार का सही प्रयोग करे

प्रस्तुति - लव तिवारी

बुधवार, 18 मई 2016

पंचायत चुनाव और मेरा गाँव युवराजपुर - लव तिवारी

मेरी कलाम से, पंचायत चुनाव विशेष -2015
कालक्रम में परिवारवाद की परिभाषा हो गई है। रिश्तेदारी पर आधारित पक्षपात कई लोग इसको काफी संकुचित रूप में लेते हैं। उनके अनुसार न केवल रिश्तेदारों को जिम्मेदार के पद पर बिठाया जाता है। बल्कि ऐसा करते समय उसकी अयोग्यता और  उनके पिछले आचरण सामाजिक निष्ठा को भी ध्यान मे नही रखा जाता है I हम अपने गाँव के परिवारवाद का ज़िक्र करेगे और उनके कुछ बिन्दुओ पर प्रकाश डालेगे-

1- यहा पर जितनी भी वृधा पेंशन है पहले अपने परिवार के सदस्यो को दिया जाता है, बाद मे जनता को भी नही उनके समर्थक को जिन्होने उन्हे प्रधान प्राप्ति मे सहयोग किया है

2- हॅंड पंप को भी अपने परिवार और परिवार के सदस्यो के घर और द्वार पर लगाया जाता है
3- अगर परिवार या परिवार का कोई भी सदस्य अनेतिक कार्य करता है तो उस पर उसका पूरा सहयोग किया जाता है

4-सरकारी संपतियो का पूर्ण खर्च अपने परिवार और परिवार के विकास के कार्यो मे होता है जैसे चार पहिया गाड़ी, अपने भवन निर्माण ,बॅंक बॅलेन्स इत्यादि

किसी भी जगह की राजनीति के तीन मुख्य कारण है
परिवारवाद
जातिवाद
समाजवाद
परिवार वाद का हम ज़िक्र कर चुके है जातिवाद भी अहम् मुद्दा है अपने गाँव को एक सही सरपंच की ज़रूरत है जो सही रूप से समाजवाद को परिभाषित करे,हमे इस बात की खुशी हो रही है कि हमारे बड़े इस खूली बहस मे हमारा साथ दे रहे है और कुछ ऐसी बात भी बता रहे है कि जो हमे नही पता है जैसे बाबा अजय तिवारी के द्वारा अस्पताल की बात, जो सन 1981 मे 7 बिस्तर का प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र सीधे स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकृत किया था

बाद मे माननीय पी के तिवारी जी के द्वारा एक कॉलेज भी हमे प्राप्त हुआ था जो ग्राम के वासीयो ने ज़मीन के वजह से ठुकरा दिया क्यो की किसी सार्वजनिक कम के लिए कोई अपनी ज़मीन तो देगा नही और ग्राम सभा की ज़मीन पर कुछ अराजक लोगो ने कब्जा जमाए रखा है

प्रस्तुति -लव तिवारी