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Lav Tiwari ( लव तिवारी )

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बुधवार, 29 जनवरी 2020

सरस्वती पूजा और मैं- लव तिवारी

सरस्वती महामाता वीणा पुस्तक धारणे।
मम कण्ठह वसः देवी विद्या दान करो ममः।।

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।(ऋग्वेद)
जो परम चेतना सरस्वती के रूप में  हमारी मेधा, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। ऐसी कल्याणी माँ पराम्बा ,वाग्देवी' सरस्वती' के आराधना के पर्व बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।💐💐💐🙏🙏🙏



सोमवार, 27 जनवरी 2020

फिर मुझे कोई राजनीति की पाठ पढ़ाने आया- लव तिवारी

छोटे बच्चों की तरह मुझको लुभाने आया
फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया

बड़ी फ़जीहत है अपनी इस दौर में नेताओं से
आज फिर से कोई मुझमे इंसानियत जगाने आया

रूखी सूखी खाता हुँ और चुपचाप सो जाता हूँ
स्वपन में खीर की झूठ हकीकत को मुझे बताने आया

इन्हें भी कसम दे इंसान के ईमान और वसूल की
वरना एक शख़्श ही सबके घर को जलाने आया

बड़ी खौफ है इस चुनावी दौर में कही रंजिश न हो
फिर कोई नेता हिन्दू मुसलमान के मसलो को उलझाने आया

छोटे बच्चों की तरह मुझको लुभाने आया
फिर मुझे कोई राजनीती की पाठ पढ़ाने आया

स्वरचित- लव तिवारी

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

राम तेरी गंगा मैली हो गयी- अम्रित तिवारी

शपथ: जो भी कहूंगा सरकार की कही कहूंगा, अपने ‘मन की बात’ बिल्कुल नहीं- क्योंकि, उसका पेटेंट मेरे पास नहीं है----

27 जनवरी से यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ “गंगा यात्रा” पर हैं। बलिया और बिजनौर से शुरू होने वाली दो यात्राएं कानपुर में आकर मिलेंगी और इस दौरान 26 जिलों को टच किया जाएगा।  मकसद है गंगा का सफाई अभियान। लेकिन, सावधान! इस यात्रा का मकसद गंगा की सफाई से बिल्कुल नहीं है। ‘गंगा यात्रा’ एक बहुत बड़ा आई-वॉश है। खलिहड़ भौकाल के अलावा कुछ भी नहीं। 2020 तक गंगा को साफ करने का यज्ञ जिन्होंने ठाना था, आज उन्हीं की सरकार ने बीते चार सालों में सिर्फ 25 फीसदी ही सफाई का काम काम पूरा किया है। ये मैं नहीं कहता, बल्कि खुद सरकार ने ही लोकसभा पटल पर आंकड़े पेश किए हैं। (इसलिए कोई फटीचर तर्क नहीं पेलेगा)। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2015 से 2019 तक कुल 20,000 करोड़ रुपये के फंड का मात्र 4,800 करोड़ रुपये ही “मिशन क्लिन गंगा” या कहें “नमामि गंगे” पर पर खर्च किया गया है।

 चार साल में महज 25 फीसदी काम हुआ है, तो क्या 75 फीसदी काम एक साल में हो जाएगा? उस पर भी तब जब देश में आर्थिक मंदी ऐतिहासिक स्तर पर है। IMF ने (संयोग से इसकी प्रमुख फिरंगी मूल की नहीं, बल्कि भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ हैं) ने विकास दर का आंकड़ा 4.8 फीसदी कर दिया है। ऐसे में आर्थिक-मंदी के दौर में 75 फीसदी काम हो पाएगा?  

‘इंडियास्पेंड’ की रिपोर्ट के मुताबिक जो अभी तक 4,800 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, उसका 3,700 करोड़ रुपये (अक्टूबर, 2018 तक) यानी 77% हिस्सा सिवेज़ ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करने में हुआ है। गौर करने वाली बात ये है कि 2015 में 96 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (गंदे नाले जो गंगा में गिरते हैं, उनको साफ करने के संयत्र) बनाने के लिए स्वीकृत हुए थे। लेकिन, इसमें सिर्फ 23 को बनाने का काम पूरा हुआ और अक्टूबर 2018 तक सिर्फ 44 का काम प्रगति पर दिखाया गया। 

पहले केंद्र सरकार ने गंगा को 2019 तक साफ करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन, यह डेडलाइन आगे बढ़ाई गई और 2020 तय कर दिया गया। लेकिन, आज भी जिस तरह का छीछालेदर है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि यह स्कीम अपनी डेडलाइन पर पूरी नहीं हो सकती। गंगा का पानी इस कदर प्रदूषित है और BOD (साधारण भाषा में समझे पानी में प्रदूषण की मात्रा का मानक) लेवल काफी ज्यादा है। कई एजेंसियों ने दावा किया है कि गंगा का पानी नहाने लायक तक नहीं है। 

जरूरी बात- मैं खुद बलिया का हूं. गंगा के तट से मेरा करीबी संबंध है। भइया हो, हमारे यहां का पानी घरों तक प्रदूषित है। आर्सेनिक लेवल इस कदर बढ़ा हुआ है कि पानी पीना तो दूर गांव के खेतों के लिए हानिकारक है। प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ नलों को चिन्हित किया जाता है और पानी नहीं पीने की सलाह दी जाती है। (बाकिर अरे हीत! जब पानी नहीं पीएंगे तो जीएंगे कैसे?) ये चैलेंज सिर्फ बलिया ही नहीं, बल्कि गंगा के किनारे स्थित सभी जिलों के लिए है।  

सवाल- आर्सेनिक से जो हमारे लोगों को घातक बीमारियां हुई हैं, उसका हिसाब कौन देगा? क्या सरकार मेडिकल हर्जाना भरेगी? ये सवाल एक सरकार से नहीं बल्कि सभी सरकारों से है। 

बात यूपी की- डंपट के बोल रहा हूं कि यूपी में खलिहड़ ‘भगवा लंठई’ के कुछ नहीं हो रहा है। भगवा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, लेकिन इसका पथ-भ्रष्ट रूप अपनी आंखों के सामने देख रहा हूं। सिर्फ गंगा के नाम पर जो राजनीतिक जमीन तैयार की जा रही है, वह एक पॉलिटिकल प्रोपगैंडा है। इमोशनल मार्केटिंग है। गंगा वैसे ही मैली हैं। लेकिन, मार्केटिंग के जरिए इसे खूब चीकन दिखाया जा रहा है। जैसे कोई प्रॉडक्ट आपको सात दिनों में गोरा बना देता है। वैसे ही बताया जा रहा है कि 2020 तक गंगा साफ हो जाएगी। लेकिन, इसके बरक्स जो सियासी जॉइंट पिलाई जा रही है, उसका असल असर तो नशा उतरने के बाद पता चलेगा। 

नोट- मुझे पता है आंकड़े, रिपोर्ट, सही तर्क इत्यादि अधिक लोगों को समझ नहीं आ पाएंगे। इसके लिए मैं पूर्व की सरकारों को कटघरे में खड़ा करूंगा। कंबख्तों ने अपने बच्चों को ऑक्सफोर्ड भेजा और हमारे लिए महाविद्यालयों की राजनीतिक फौज खड़ी कर डाली...।   

एक लास्ट- "माफ करना थोड़ा इधर-उधर बहक जाता हूं"

मंगलवार, 14 जनवरी 2020

मकरसंक्रांति खिचड़ी का पर्व और मैं- लव तिवारी

भारतीय धर्म और संस्कृति में 5 साही स्नान का बहुत महत्व है , मकरसंक्रांति , अमस्वा, शिव रात्रि , और बसन्त पंचमी । मकर संक्रांति को हम खिचड़ी का त्यौहार भी कहते है। पुरानी मान्यताओ के आधार पर एक गरीब ब्रम्हाण जो कई दिन से भूखा था और एक गांव में भिक्षा के दौरान उसे थोड़े थोड़े मात्रा में कई अन्य मिले । सब अन को एक साथ मिलकर उसने खिचड़ी पकाई और बाद में उसको स्प्रेम भाव से खाने बैठ गया। तभी से मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रुप मे मनाते है। और जन आदरणीय जन सम्पन्न होते हो वो ब्रम्हाण दान के साथ ब्रम्हाण भोजन भी कराते है।

विज्ञान के आधार पर हिन्दू धर्म का मात्र एक ही त्यौहार है जिसकी दिन और समय निहित है। जब सूर्य की किरणें मकर रेखा पर सीधे पड़ती है तो उस विशेष दिन को हम मकरसंक्रांति पर्व (खिचड़ी) पर्व को मनाते हैं। लड़के इस पर्व का आनंद पतंग उड़ा कर था गांव में लड़कियां खेतो में साग खा कर इस पर्व को हर्षो उल्लास से मानते/मनाती है।इसका एक वैज्ञानिक कारण यह भी है कि जब सूर्य की किरणें मकर रेखा पर पड़ती है तो वो शरीर के लिए बहुत लाभदायक होती है । शरीर पर सूर्य के प्रकाश का पड़ना बहुत उपयोगी एवम स्वस्थ वर्धक है। 

बचपन मे मैं जब गांव में रहता था तब तक इस पर्व का आनंद हमने जम कर लिए अब परदेश में इस पर्व की केवल अनौपचारिकता ही रह गयी है। खिचड़ी के दिन का इनंतेजार हम बड़े उत्सुकता से करते थे और करे भी क्यो न  सुबह सुबह दादा स्वर्गीय पंडित राम सिंहासन तिवारी जी के साथ गंगा स्नान के लिए निकल जाते थे स्नान के बाद खिचड़ी पर्व की शुरुवात दही चुरा के साथ अपने घर पर होती थी। अगर किसी विशेष व्यक्ति जन के आग्रह पर और बाबा के आदेशानुसार हमे किसी दूसरे के घर भी दही चुरा को खाने के लिए जाना पड़ता था। लोगो के द्वारा अन दान का सिलसिला भी उस दिन होता था। जिससे लोगों के स्प्रेम मुलाकात के जो आनंद मिलते थे वो अब आधुनिक जमाने मे नही के बराबर ही या थोड़े ही रह गए है। सुबह के भोजन के बाद दोपहर में लड़कों के झुंड के साथ हम खेतो में साग खाने निकल जाते थे और दिन भर साग खाने के उपरांत कुछ साग घर के लिए भी लाये जाते थे। रात्रि भोजन में खिचड़ी का सेवन कर के सो जाते थे इस तरह मकरसंक्रांति (खिचड़ी) का त्यौहार का आनन्द हम बचपन मे खूब अच्छे ढंग से करते थे।

सोमवार, 13 जनवरी 2020

आर्थिक स्थिति के आधार पर हो आरक्षण न कि जाति के आधार पर - लव तिवारी

ये हैं मुकेश। 
जाति से ब्राह्मण हैं, नाम मुकेश मिश्र है। बनारस में अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के लिए हफ्ते में तीन दिन रिक्शा चलाकर धन अर्जित करते हैं।
इनके पिता जी का देहांत हो चुका है। मुकेश जी बनारस में रहकर अपने एक छोटे भाई को पालिटेक्निक (सिविल) करवा रहे हैं। मुकेश स्वयं Net Exam निकाल चुके हैं और Economics (अर्थशास्त्र) विषय से अभी वर्तमान समय में Phd कर रहे हैं। 
जब मैंने मुकेश मिश्र से एक मुलाकात में पूछा कि--- आप की पारिवारिक दुर्दशा पर क्या कभी कोई सरकारी मदद आपको मिला है ? 
उन्होंने हँस कर मुझे जवाब दिया--- "क्या सर जी, ब्राह्मण हूं जन्म से। भीख मांग लूंगा, यह करना हमारा स्वभाव है। हमने भीख मांगकर देश का निर्माण किया है। दान ले कर दूसरे को और समाज को दान में सब कुछ दिया है। हम सरकार से अपेक्षा क्यों करें ? हम स्वाभिमान नहीं बेच सकते। हम आरक्षण के लिये गिड़गिड़ा नहीं सकते। हम मेहनत कर सकते हैं। रिक्शा चलाने में अपना स्वाभिमान समझते हैं। किसी का उपकार लेकर जीना पसन्द नहीं है।परशुराम के वंशज हैं। हम पकौड़ा तल कर अपने और अपने भाई की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं, करेंगे। आप देखियेगा, कल हम खड़े हो जायेंगे। पीएचडी पूरी कर कहीं लग जायेंगे। रिक्शा भी चलाते हैं । मेहनत से पढ़ाई भी पूरी करते हैं।पीएचडी मेरी तैयार है। टाइप वगैरह के लिये थोड़ा और रिक्शा चलाऊंगा। भाई की पढ़ाई भी पूरी होने वाली है। माता की सेवा भी करता हूं। मां को कुछ करने नहीं देता। वे बस हमें दुलार कर साहस दे देती हैं। आप तो जानते ही हैं कि भारत के अन्दर ब्राह्मण जाति का अर्थ नेताओं की नजर में सिर्फ एक गुलाम होता है। सरकार सिर्फ दलित एवं पिछड़े वर्गों के लिए कार्य करती है। मेरे साथ चलिए, मैं ऐसे हजारों ब्राह्मण नवयुवकों से आप सभी को मिला सकता हूँ जोकि बनारस जैसे धार्मिक शहर में मजदूरी कर रहे हैं और अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। सभी स्वाभिमान से अपना काम करते हैं। किसी के आगे गिड़गिड़ाते नहीं। सभी तेज हैं। किसी प्रकार के पाखंड में नहीं जीते। अपने लक्ष्य के लिये मेहनत करते हैं। कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता। आवश्यकता है लक्ष्य भेदने की। हम सब खुश हैं स्वाभिमान से जीने पर।"

रविवार, 12 जनवरी 2020

तमाम कोशिशों के वावजूद हम तुम्हे न भूल पाये- लव तिवारी

तमाम कोशिशों के वावजूद हम तुम्हे न भूल पाये।
ये कैसी जिंदगी है कि आज भी न हम संभल पाये।।

मोहब्बत इनायत और वफ़ा ये मेरी तकदीर में नही।
ये बात समझ मे आयी फिर भी न हम बदल पाये।।

उदास मन है तन्हाई में गुजरते है मेरे दिन रात।
ये सफर कैसा था जो एक दूसरे के न हम बन पाये।।

आदते अब भी सुमार तुम्हें सोच कर कुछ लिखने को।
ये मोहब्बत चीज ही ऐसी जिसे हो वो न कुछ कर पाये।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 12- जनवरी-2020

शनिवार, 11 जनवरी 2020

सब कहते है बिगड़ गए है हम- लव तिवारी

सबकी नजरों से गिर गए है हम।
जबसे तुमसे जो मिल गए है हम।।

आदते मेरी आज कल है ऐसी।
सब कहते है कि बिगड़ गए है हम।।

तुमको चाह कर क्या गुनाह किया।
लोग कहते कितने बदल गए है हम।।

तुमसे मिलने की आदते देखकर।
सबका कहना है कि क्या कर रहे है हम।।

उनको पता नही मोहब्बत की बाते
एक दूसरे बिन आज मर रहे है हम

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 12 जनवरी 2020





शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

मातृ भाषा की अपनी पहचान हिंदी दिवस विशेष- लव तिवारी

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और भाषा से उसके राष्ट्र एवं क्षेत्र की पहचान होती है। व्यक्ति विशेष की पहचान में भाषा का विशेष योगदान है फिर भाषा का अर्थ जहा एक दूसरे की बात को समझना के साथ संस्कृति और सभ्यता से भी  है। अत्याधुनिक युग मे इस भाषा का उपयोग धीरे कम होता जा रहा है हर व्यक्ति अंग्रेजी भाषा की ओर ध्यान केंद्रित कर रखा है। जैसी भाषा वैसी संस्कृति के ओर अग्रसर इस भारतीय नागरिको की मन बुद्धि भी संकुचित हो रही है।



बुधवार, 8 जनवरी 2020

इवेन ओड की सफलता के बाद इसे पूर्ण रूप से लागू करे केजरीवाल सरकार- लव तिवारी

01 जनवरी 2016 से even और odd नंबर वाहनों की नियम जो अब पूर्ण रूप से सफलता की तरफ अग्रसर हो रहा है , इसके लिए हम दिल्ली सरकार और केजरीवाल साहब को शुभकामनाओ के साथ तहे दिल से धन्यबाद देते है ,  उनके इस असंभव कार्य और सामाजिक निष्ठा का पूर्ण समर्थन कराते है , लेकिन कही न कही एक बात मन में हमेशा संदेह पैदा कर रही है दिल्ली पर आर्थिक बोझ और वाहनों की संख्या में इजाफा तो होना तय है,  क्यों की कुछ वयक्ति की मानसिक स्थिति और इरादे नहीं बदले है और वो नयी रणनीति की फ़िराक में है जैसा की हमने पहले पोस्ट में लिखा था कि दिल्ली में मेट्रो परिचालन के बाद कुछ दिन तक ही परिस्थिति काबू में थी बाद में सभी स्थिति पहले जैसी ही हो गयी, दिल्ली या पूरा देश किसी मोदी और केजरीवाल का न हो कर हम सभी का है , सही कार्यो का समर्थन और जिम्मेदारी हम सभी का है ,एक विचार और मेरे मन में है अगर कोई चार पहिया वाहन जिसमे उनके संख्या के आधार पर लोग बैठे हो उन वाहनों का चालान न काटे जाये और हमारा जहा तक अनुमान है सरकार को सभी लोगो से विचार करके अपने नियमो में बदलाव की भी जरुरत है 

इस पोस्ट के साथ जो तस्वीर लगाई गयी है उसका इस पोस्ट से कोई ताल्लुकात नहीं है , यह एक प्रमोशन की प्रकिया है जिससे लोगो के पास हमारी बात पहुच सके

हमारी दिल्ली , स्वस्थ दिल्ली
जय हिन्द ,जय भारत , जय दिल्ली

प्रस्तुति - लव तिवारी

मंगलवार, 7 जनवरी 2020

सामर्थ के आधार पर ही सहयोग का आस्वासन दे - लव तिवारी

एक ठंडी रात में एक अरबपति बाहर एक बूढ़े गरीब आदमी से मिला। उसने उससे पूँछा क्या तुम्हें बाहर ठंड महसूस नही हो रही है और तुमने कोई कोट भी नही पहना है?

बूढ़े ने जवाब दिया मेरे पास कोट नही है लेकिन मुझे इसकी आदत है।
अरबपति ने जवाब दिया मेरे लिए रुको मैं अभी अपने घर में प्रवेश करूंगा और तुम्हारे लिए एक कोट ले लाऊंगा।

वह बेचारा बहुत खुश हुआ और कहा कि वह उसका इंतजार करेगा। अरबपति अपने घर में घुस गया और वहां व्यस्त हो गया और गरीब आदमी को भूल गया।

सुबह उसे उस गरीब बूढ़े व्यक्ति की याद आई और वह उसे खोजने निकला लेकिन ठंड के कारण उसे मृत पाया लेकिन उसने एक चिट्ठी छोड़ी थी जिसमे लिखा था कि "जब मेरे पास कोई गर्म कपड़े नही थे, तो मेरे पास ठंड से लड़ने की मानसिक शक्ति थी।
लेकिन जब आपने मुझे मेरी मदद करने का वादा किया तो मैं आपके वादे से जुड़ गया और इसने मेरी मानसिक शक्ति को खत्म कर दिया।

अगर आप अपना वादा नही निभा सकते तो कुछ भी वादा न करें।
यह आप के लिये जरूरी नही भी हो सकता है लेकिन यह किसी और के लिए सब कुछ हो सकता है।
🙏🙏🙏

सोमवार, 6 जनवरी 2020

गैर इस्लाम से इस्लामिक देश गाम्बिया - लव तिवारी

15Dec.2015 को धर्मनिरपेक्ष देश गाम्बिया बना 57वां इस्लामिक राष्ट्र
जब 1965 में ब्रिटेन से आजाद हुआ तब इस देश में 25% मुस्लिम,
55% ईसाई व 20% में बहावी बौद्ध और हिंदू,
2000 मुस्लिम 40%,
2010 मुस्लिम 65%
2014 मुस्लिम 90%
2015 इस्लामिक देश, 
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ गाम्बिया!

राष्ट्रपति ने मुस्लिम जनसँख्या अधिक होते ही घोषित कर दिया इस्लामिक राष्ट्र..
सेकुलरिज्म तभी तक चला जबतक मुस्लिम अल्पसंख्यक थे,बहुसंख्यक होते ही लागू हुआ इस्लामिक शरिया कानून जो लोग मुसलमानों की इस मौलिक बात को नहीं समझेंगे वे हमेशा भटकते रहेंगे
मुसलमान केवल तब तक ही धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक होता है जब तक वो अल्पमत में होता हैं।ये दोनों सिद्धांत उनके लिए आस्था के बिंदु नहीं बल्कि एक हथियार हैं।वास्तव में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता इस्लाम में हराम है।आप स्वयं पता करोगे तो पाओगे की दुनिया का कोई भी मुस्लिम देश लोकतांत्रिक या धर्मनिरपेक्ष नहीं है।वे इस्लामी गणतंत्र से ऊपर नहीं उठ सकते।जैसे ही मुसलमान बहुसंख्यक होते हैं,लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता उड़ जाते हैं।इसके विपरीत जब ये अल्पमत में होते हैं तो इनको सारे अधिकार चाहिए,परंतु जैसे ही बहुसंख्यक होते हैं कट्टर इस्लामिक बन जाते हैं, जो अल्पमत वालों को जीने का भी अधिकार नहीं देते।

सारी दुनिया और भारत में कहीं भी नज़र डालिए, मेरी बात समझ आ जायेगी। दुःख इस बात का है कि अधिकांश हिंदू अभी भी इस वास्तविकता पर आँखें मूंदे रहते है।

कुछ लोग है जो इस दौर में मोदी सरकार से ही जल गये- लव तिवारी

शहर के दंगे देखकर गली के बच्चे भी डर गये।
जो रहते एक साथ, वो अपने मे ही झगड़ गये ।।

कुछ हाल ऐसा अपने मुल्क में भी है आज कल।
जो अपने थे वो आज गीता कुरान के लिए लड़ गये।।

न हुनर रही न सलीका किसी के साथ उठने बैठने की।
बच्चों में जो तहज़ीब चाहिए वो अब किताब तक रह गये।।

भूख और बेरोजगारी ये आज की नही है फसाद "लव"।
कुछ लोग है जो इस दौर में मोदी सरकार से ही जल गये।।

रचना- लव तिवारी 
दिनांक- 06- जनवरी- 2020


रविवार, 5 जनवरी 2020

आगे-आगे समाज और पीछे-पीछे सरकार चलेगी तभी गोवंश सुरक्षित होंगे- नीतीश सिंह

आगे-आगे समाज और पीछे-पीछे सरकार चलेगी तभी गोवंश सुरक्षित और किसान खुशहाल  होंगे: नीतीश सिंह 
....

बेसहारा गोवंश की समस्या पूरे प्रदेश में है। गोकशी पर कानूनी रोक लगने के बाद गोवंशों को गांव से निकालना दूभर हो गया। इससे गांवों में सैकड़ों बेसहारा गोवंश जुट गये। बेसहारा और बेकार जानवरों खेती-किसानी के लिए खतरा बन गये। प्रदेश सरकार ने लोक आस्था और अपनी विचारधारा के अनुरुप गोवंश को व्यक्तित्व माना और उनकी हत्या पर कानूनी रोक लगा दी।  ऐसे गोवंशों को जीवन जीने के अधिकार मिले और हिंदू आस्था की रक्षा भी हुई। सरकार ने गोवंशों की सुरक्षा, चारा और पानी का इंतजाम करने की बेशक व्यवस्था तो बनाई पर हरेक गोवंश के लिए 30 रुपये प्रतिदिन का मानक व्यवहारिक नहीं सिद्ध हो रहा। सरकारी अमला से लेकर लोग 30 रुपये में गोवंश के पेट भरने की आलोचना करते हैं।वास्तव में इतने कम पैसे में भूसे के अलावा खली, चून्नी और अन्य खाद्य की व्यवस्था नहीं हो सकेगी। 

आज सरकार ने सेस लगाकर गोवंश के लिए पैसे जुटाने की पहल तो की है, इससे जरूर कुछ राजस्व आ जाएंगे। लेकिन उत्तर प्रदेश में ही  11 लाख के करीब बेसहारा गोवंश हैं, वहीं अपने जिले में एक हिसाब से 15 हजार के करीब बेसहारा गोवंश होंगे। यदि आप प्रदेश सरकार का बजट देखेंगे तो हर वित्त वर्ष में घाटे का बजट पेश होता है। सरकार की आमदनी से ज्यादा खर्चें रहते हैं। ऐसे में सरकार को समाज के भी सहयोग की जरूरत पड़ती है। एक हिंदू होने के नाते आस्थावश सबको अपनी क्षमता के मुताबिक इस लोक कार्य में सहयोग करना चाहिए। 
जनप्रतिनिधि, व्यापारी, युवा और बड़े किसानों को सबसे पहले आगे आना चाहिए। गांव-2 में गोशाला बनाने और उसके संचालन में सहयोग करके इस व्यवस्था को दुरुस्त करनी चाहिए। अन्यथा सरकार के भरोसे न खेती बच पाएगी और न गोशाला टीक पाएंगे। 

यह फोटो : पटकनिया गांव के अस्थायी गोशाला की है।

गांव गाय गौशाला और योगी सरकार -लव तिवारी

गांव गाय और गौशाला यह एक वास्तविक विषय बना था । जिस पर योगी सरकार ने कार्यवाही करते सही दिशा निर्देश दिए है। अधिकतर अपने गांव के आदरणीय जन से बातो में एक यही सबसे बड़ी खामियां लोग बताते थे आवारा पशुओं और उनके द्वारा  खेतों के नुकसान जिससे किसानों का बुरा हाल होता था। योगी सरकार को गैर बीजपी सरकार ने बदनाम कर रखा था  इसका कारण कत्ल खानों पर सरकार के पाबन्दी से आवारा पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी । अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के जिला अधिकारियो को  सख्त निर्देश है कि सभी आवारा पशुओं को जिले के गौशाला में एकत्रित किया जाय तथा योगी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गोशाला में गायों को छुड़ाने आता है, तो उससे जुर्माना वसूला जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि गायों को चारा, पानी और सुरक्षा भी मुहैय्या कराई जाए. उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों और व्यापारियों को भी इसमें योगदान करना चाहिए. इससे पहले मंगलवार को योगी सरकार ने सड़क में घूमती आवारा गायों के लिए गोशाला बनाने के लिए नए सेस का फैसला लिया. 'गौ कल्याण सेस' का उपयोग गोशाला बनाने और उसकी देखभाल करने के लिए किया जाएगा.

मेरे द्वारा माननीय मुख्यमंत्री को एक सुझाव है गांव के अधिकतर ग्राम सभा की जमीनों पर दबंगो का कब्जा हो रखा है। बढ़ती जनसंख्या और लूट खोस की वजह से गांव के दबंग लोग वो किसी भी जाति से सम्बंध रखते हो गांव के ग्राम सभा की जमीनों पर कब्जा जमा रखा है। इन जमीनों पर पर्याप्त मात्रा में घास होती थी जिससे गांव के आवारा पशुओं का भोजन का काम इन सभी जगहों से हो जाता था। अगर गरीब या निम्न समुदाय जिसको उस जमीन की जरूरत हो अगर वो उस जमीन पर  गुजर बसर कर रहे होते है तो बात समझ मे आती है  मैंने अपने जिले के कई ऐसे गांव देखे है जहाँ अवैध रुप से सरकारी एवं ग्राम सभा की जमीनों पर लोगो द्वारा कब्जा कर रखा है
प्रस्तुति-लव तिवारी


शनिवार, 4 जनवरी 2020

छुटी जाइ जगवा के जेतना झमेल बा- गोपाल राय

अरे आइल अकेल तोहके जायके अकेल बा
छुटी जाइ  जगवा के जेतना झमेल बा
छुटी जाइ जगवा के...

कितनो तू सईहरब बाकी अंत समय आवेला
ये जिनगी के दियना फिर लुपुर झुपर ताके ला
उतने जरेला जेतना ओकरा में तेल बा
छुटी जाइ जगवा के...
अइले अकेल तोहके......

जिनगी ह स्टेशन एगो चहल पहल बा भारी
हरियर झंडी गार्ड देखवलस चले का बा तैयारी-2
सुन सुन लागेला अब त छूट गइल रेल बा
छुटी जाइ जगवा के...
अइल अकेल तोहके......

पहिला बचपन दूसरा जवानी जे पर सब अगराला
तीसरे चढल बुड़वती मनवा कांप कांप रही जाले
इहे तीन घंटा वाला जिनगी के खेल बा 
छुटी जाइ जगवा के...
अइले अकेल तोहके

इंतिहान में पास भईल जो राम राम गोहरवलस
माया ठगनी ए दुनिया पल पल नाच नचवलस
हँसे वाले एकरा में जीरो पा के फेल बा
छुटी जाइ जगवा के...
अइले अकेल तोहके

छूट जाई जगवा......
अइले अकेल तोहके

चलत बेरिया हो चलत बेरिया हमके उड़ाये चदरिया- गोपाल राय

लकड़ी जल कोयला भई कोयला जल भई राख
मैं पापन ऐसी जली कोयला भई न राख

चलत बेरिया हो चलत बेरिया हो चलत बेरिया
हमके उड़ाये चदरिया चलत बेरिया
चलत बेरिया..........4

प्राण राम जब निक्सन लागे 
निक्सन लागे निकासन लागे
उलट गई दोनु नयन पूतारिया
चलत बेरिया.....
हमके उड़ाये चदरिया....

भीतर से जब बाहर आये-2
बाहर आये हो बाहर आये
छूट गई सब महल अटरिया-2
चलत बेरिया हो....
हमके उड़ाए चदरिया....

चार जने मिल खाट उठाइहे-2
खाट उठाइहे खाट उठाइहे-2
चार जने मिल खाट उठाइहे
रोयत ले चले डगर डगरिया
चलत बेरिया हो चलत बेरिया....
हमके उड़ाए चदरिया.....

कहत कबीर सुनो भाई साधो-2
सुनो भाई साधो सुनो भाई साधो-2
कहत कबीर सुनो भाई साधु
संग चली वही सुखी लकड़िया
चलत बेरिया हो.....
हमके उड़ाये चदरिया.....

मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

ग़ाज़ीपुर के अग्रिम विकास के लिए एक ही नाम चाहिए माननीय मनोज सिन्हा- लव तिवारी

आप BJP  के समर्थक है या किसी अन्य राजनीतिक दल से BJP के खिलाफ लेकिन आप एक सांसद के रूप में मनोज सिन्हा का विकल्प ग़ाज़ीपुर में नही खोज सकते, मैन हमेशा कहा है कि आप अपने क्षेत्र के किसी विशेष और अच्छा उम्मीदवार चुनिए, जो आपकी समस्याओ को दिल्ली पहुचा सके, आपका विकास कर सके। पूर्वांचल में शायद बनारस के बाद अगर कुछ भी काम हुआ है तो वो ग़ाज़ीपुर शहर है इसका श्रेय पूर्व ग़ाज़ीपुर सासंद माननीय मनोज सिन्हा जी है जिनके द्वारा कई सड़को को नेशनल हाइवे निर्माण के रूप में केंद्र सरकार से प्रयास। और   इसके लिए हम BJP को नही नकार सकते, चाहे देश मे जो भी हो रहा हो ग़ाज़ीपुर में तो चयन बहुत ही आसान है, क्योकि दो ऐसे लोग चुनाव लड़ रहे है जिन्होंने सांसद रहते हुए अपनी सेवाएं दी है, और दोनों के कार्यो का आकलन भी आप कर सकते है।।

जाति की दीवार इतनी मज़बूत नही हो सकती कि यह विकास और क्षेत्र की विकास पर भारी हो।आप मुझ पर जातिवादी होने का आरोप लगा सकते है  क्यो कि मैं ब्राम्हण कुल से हूँ लेकिन आप अगर ग़ाज़ीपुर के वोटर है तो आप कृपया अपने क्षेत्र में खुले मन से जा कर देखिए आप को किसे वोट देना था और जातिवाद के भयानक भर्म में आप ने किसे वोट दिया। 1 वर्ष से ऊपर हो गये और धीरे धीरे कुछ समय बाद 5 वर्ष भी बीत जाएगा और फिर आप सभी को अहसास होगा कि मैंने या हम सब ने जो किया वो वाकई गलत था कि आप अपना वोट किसे देना चाहते थे और किसे दिया ।

प्रस्तुति- लव तिवारी
सम्पर्क सूत्र- +919458668566


प्रत्यक्ष से कई गुना ताकतवर परोक्ष, हमारे पापा की सीख -प्रवीन तिवारी पेड़ बाबा ग़ाज़ीपुर

प्रत्यक्ष से कई गुना ताकतवर परोक्ष, हमारे पापा की सीख ::--
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    सात आठ वर्ष पहले झाड़ू हमारे हथियार हुआ करता था और रोज हमारे साथ चार पाँच घंटे रहता था । बारी बारी से हम किसी न किसी गाँव की गंदी गलियों को खोजते और तबतक साफ करते रहते जबतक वह गली उस गाँव की सबसे साफसुथरी गली न बन जाए ।
उसे दौरान हमारे गाजीपुर स्थिति घर के समीप एक चौराहा भी बहुत ही गंदा हुआ करता था और हमेशा ही हमारा मन होता था कि क्यों न यहाँ भी सफाई अभियान चलाकर लोगों को इतना जागरूक कर दिया जाए कि चौराहा बिल्कुल ही साफसुथरा दिखने लगे ।
    एक दिन हम इसी विषय पर अपने पापा से चर्चा करने लगे और उनसे पूछे कि हम ऐसा क्या करें कि लोगों में चौराहे की सफाई के प्रति जागरूक बढ़े तो हमारे पापा तपाक से बोले कि तुम रोज दो बजे रात में अकेले ही जाकर सफाई में जुट जाया करो और भोर के चार बजे तक वहाँ से वापस आ जाया करो जिससे कि कोई भी तुमको सफाई करते न देख सके ।
    हमें उनकी बातों पर चिढ़ आया कि हम अभियान चलाने की बात कर रहे हैं और यह हमें अकेले ही अंधकार में जाकर सफाई करने को बोल रहे हैं । आखिर सफाई अभियान का प्रचार प्रसार कैसे होगा । उस समय न तो कैमरा होगा न ही लोग होंगे न ही मिडिया होगा ।
   फिर भी हमें उनमें श्रद्धा थी तो हम उनकी बातों को मान लिये ।
    उस वक्त दिसम्बर का महीना था और हम चालिस दिन तक चौराहे की सफाई का संकल्प ले लिए । अगले दिन झाड़ू, तगाड़ी और फावड़ा लेकर हम चौराहा पर रात के दो बजे पहुँच गए और चार बजे तक सफाई करते रहे । गंदगी बहुत ही अधिक था । इसप्रकार हमारे बीस दिनों के लगातार सफाई से चौराहा बिल्कुल ही साफ दिखने लगा । अभी भी शाम को दुकान बंद करने के दौरान दुकानदार अपने दुकान का कूड़ाकचरा अपने दुकान के बाहर ही छोड़ देते थे । लेकिन अगले दिन से वह गंदगी भी साफ । तीस दिन बीते होंगे कुछ लोग चौराहा पर रात्रि जागरण करके सफाई करने वाले को खोजने लगे । हम जब रात्रि के दो बजे पहुँच कर झाड़ू लगाना शुरू किये तो चारपाँच लोग आकर हमें घेर लिए । उस दौरान हम अपने मुँह को मोफलर से ढके थे लह लोग हमारे मोफलर को हटवाकर अस्पष्ट रूप से हमारा चेहरा देखे । फिर क्या था यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई । जब हम अगले दिन पहुँचे तो हमें कहीं भी गंदगी का नामोनिशान नहीं मिला ।
फिर भी संकल्पानुसार हम सफाई करते रहे । उतनी रात में चार पाँच लोग झाड़ू लेकर हमारा साथ देने के लिए आने लगे । धीरे धीरे यह खबर तत्कालीन जिलाधिकारी तक पहुँचा और वह अपने मद से चौराहा का सुंदरीकरण करवाए ।
   इसप्रकार हमारे पापा हमें यह एहसास दिलवाए कि प्रत्यक्ष से अधिक ताकतवर परोक्ष होता है ।
    आज हमारे पापा प्रत्यक्ष रूप से तो हमारे साथ नहीं हैं परंतु अपने दिये हुए सीख से हमें यह एहसास दिलवा रहे हैं कि वह और ताकतवर ढंग से हमारा साथ देंगे ।

रविवार, 29 दिसंबर 2019

मोहब्बत अब नही होगा मुझे कल की तरह- लव तिवारी

मोहब्बत अब नही होगा मुझे कल की तरह।
मिला जो कल मुझे न रहा हमसफ़र की तरह।।

कुछ उसकी यादें है जो जाती नही जहन से।
खुशनसीब वह है जिसका है वो हमदर्द की तरह।।

ख्वाइशें कल भी थी आज भी है और रहेगी ही ।
जाने वाले को याद रखता मैं हरपल की तरह।।

कैसी दुनिया है जो एक ख्वाब मुक्कमल न हुआ।
मेरा होकर भी मुझसे छीना गया उसे बेरहम की तरह।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 29- दिसंबर- 2019




शुक्रवार, 27 दिसंबर 2019

वो छतों पर कई पत्थर जुटाए बैठे हैं- कवि गौरव चौहान इटावा

हम गलियों प्यार के मंज़र जुटाए बैठे हैं
वो छतों पर कई पत्थर जुटाए बैठे हैं

हम यहां उलझे रहे सेकुलर के धागों में,
वो तो अलकायदा लश्कर जुटाए बैठे हैं

हमने रसखान कबीरा की पोथियाँ बाँची,
वो तो भड़काऊ मुनव्वर जुटाए बैठे हैं

हमने तहज़ीबे लखनऊ का भरम रक्खा था,
वो तो लाहौर पिशावर जुटाए बैठे हैं

गंगा जमुनी इलाहाबाद सरीखे थे हम,
वो तो बगदाद का तेवर जुटाए बैठे हैं

हम तो चुपचाप रहे राम की फतह पर भी
वो नागरिकता पे बवंडर जुटाए बैठे हैं

हम हमीदो कलाम की सजाएं तस्वीरें,
वो तो अफ़ज़ल के कलेंडर जुटाए बैठे हैं

----कवि गौरव चौहान इटावा 9557062060

हाँ, हमारे बाप का ही है हिन्दुस्तान - अनिल चौधरी

जी हाँ, हमारे बाप का है हिन्दुस्तान !

शायर राहत इंदौरी ने लिखा था....

"सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है "~

राहत इंदौरी का यह शेर इन दिनों CAA व NRC के नाम पर जेहादियों द्वारा की जा रही हिंसा के समर्थन में खूब लिखा व बोला जा रहा है।

मैं  स्वंय भी यह मानने रहा वाला हूँ कि भले ही कुछ धर्म आक्रमणकारी व आतंकवादी/आतातायी के रूप में यहां आये, बावजूद इसके, हमारी कायरतापूर्ण दरियादिली के कारण खंड खंड होने के बाद बचा भारत अब सभी जाति, धर्म, मत व पंथों का है।

लेकिन यह केवल बोलने मात्र से बात नहीं बनती, अपितु विखंडन के पश्चात बचे राष्ट्र को पुनः विखंडित करने के उद्देश्य से प्रत्यक्ष रूप में आज जो कुछ गलत घट रहा है, आप आँख मूंदकर उससे निरपेक्ष नहीं बने रह सकते।

आज के परिप्रेक्ष्य में राहत इन्दौरी के शेर का यह विस्तार समसामयिक लगता है:

“ख़फ़ा होते हैं हो जाने दो, घर के मेहमान थोड़ी हैं !
जहाँ भर से लताड़े जा चुके हैं , इनका मान थोड़ी है !!

ये कान्हा राम की धरती है, सजदा करना ही होगा !
मेरा वतन ये मेरी माँ है, लूट का सामान थोड़ी है !!

मैं जानता हूँ, घर में बन चुके हैं सैकड़ों भेदी !
जो सिक्कों में बिक जाए वो मेरा ईमान थोड़ी है !!

मेरे पुरखों ने सींचा है लहू के कतरे कतरे से !
बहुत बांटा मगर अब बस, ख़ैरात थोड़ी है !!

जो रहजन थे उन्हें हाकिम बना कर उम्र भर पूजा !
मगर अब हम भी सच्चाई से अनजान थोड़े हैं ?  !!

बहुत लूटा फिरंगी ने, कभी बाबर के पूतों ने !
ये मेरा घर है मेरी ज़ान, मुफ्त की सराय थोड़ी है... !!

बिरले मिलते है धर्मनिरपेक्ष मुसलमां दुनिया में !
हर कोई अब्दुल हमीद और कलाम थोड़ी है  !!

कुछ तो अपने भी शामिल है वतन तोड़ने में !
अब ये कन्हैया और रविश, मुसलमान थोड़ी है !!

नहीं शामिल है तुम्हारा खून इस मिट्टी में !
ये तुम्हारे बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है !!

तस्लीमा नसरीन को सत्य घटनाओं पर आधारित 'लज्जा' उपन्यास की कहानी- अनिल चौधरी

शर्म से डूब मरना चाहिए, अगर लिखने में भी लज्जा आ रही इन घृणित पंक्तियों को पढकर भी कोई CAA का विरोध करता है तो...

तस्लीमा नसरीन को सत्य घटनाओं पर आधारित जिस 'लज्जा' उपन्यास के कारण अपने वतन से निर्वासित होना पड़ा, उसका यह अंश जरूर पढ़ें, और फिर CAA पर अपनी राय तय करें...

बेटियों के बलात्कारियों से जब माँ ने कहा "अब्दुल अली, एक-एक करके करो,,, नहीं तो वो मर जाएंगी "।

यह सच्ची घटना घटित हुई थी 8 अक्टूबर 2001 को बांग्लादेश में।

अनिल चंद्र और उनका परिवार 2 बेटियों 14 वर्षीय पूर्णिमा व 6 वर्षीय छोटी बेटी के साथ बांग्लादेश के सिराजगंज में रहता था। उनके पास जीने, खाने और रहने के लिए पर्याप्त जमीन थी।

बस एक गलती उनसे हो गयी, और ये गलती थी कि एक हिंदू होकर 14 साल व 6 साल की बेटी के साथ बांग्लादेश में रहना। एक क़ाफिर के पास इतनी जमीन कैसे रह सकती है..? यही सवाल था बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिद ज़िया के पार्टी से सम्बंधित कुछ उन्मादी लोगों का।

8 अक्टूबर के दिन..

अब्दुल अली, अल्ताफ हुसैन, हुसैन अली, अब्दुर रउफ, यासीन अली, लिटन शेख और 5 अन्य लोगों ने अनिल चंद्र के घर पर धावा बोल दिया, अनिल चंद्र को मारकर डंडो से बाँध दिया, और उनको काफ़िर कहकर गालियां देने लगे।
 
इसके बाद ये शैतान माँ के सामने ही उस 14 साल की निर्दोष बच्ची पर टूट पड़े और उस वक्त जो शब्द उस बेबस व लाचार मां के मुँह से निकले वो पूरी इंसानियत को झंकझोर देने वाले हैं।

अपनी बेटी के साथ होते इस अत्याचार को देखकर उसने कहा "अब्दुल अली,, एक एक करके करो, नहीं तो मर जाएगी, वो सिर्फ 14 साल की है।"

वो यहीं नहीं रुके,,उन माँ बाप के सामने उनकी छोटी 6 वर्षीय बेटी का भी सभी ने मिलकर ब#लात्कार किया ....उनलोगों को वहीं मरने के लिए छोडकर जाते जाते आस पड़ौस के लोगों को धमकी देकर गए की कोई इनकी मदद नहीं करेगा।

ये पूरी घटना बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी अपनी किताब “लज्जा” में लिखी, जिसके बाद से उनको अपना ही देश छोड़ना पड़ा। ये पूरी घटना इतनी हैवानियत से भरी है परन्तु आज तक भारत में किसी बुद्धिजीवी ने इसके खिलाफ बोलने की हैसियत तक नहीं दिखाई है, ना ही किसी मीडिया हाउस ने इसपर कोई कार्यक्रम करने की हिम्मत जुटाई है।

ये होता है किसी इस्लामिक देश में हिन्दू या कोई अन्य अल्पसंख्यक होने का, चाहे वो बांग्लादेश हो या पाकिस्तान।

पता नहीं कितनी पूर्णिमाओं की ऐसी आहुति दी गयी होगी बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसँख्या को 22 प्रतिशत से 8 प्रतिशत और पाकिस्तान में 15 प्रतिशत से 1 प्रतिशत पहुँचाने में।

और हिंदुस्तान में जावेद अख्तर, आमिर खान, नसीरुद्दीन शाह व हामिद अंसारी जैसे हरामखोर लोग कहते है कि हमें डर लगता है,,, जहाँ उनकी आबादी आज़ादी के बाद से लगातार बढ़ रही है।

अगर आप भी सेक्युलर हिंदु (स्वघोषित बुद्धिजीवी) हैं और आपको भी लगता है कि भारत में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं,, तो कभी बांग्लादेश या पाकिस्तान की किसी पूर्णिमा को इन्टरनेट पर ढूंढ कर देखिये !!!

मूर्खतापूर्ण ढंग से केवल संविधान की दुहाई देते हुए रूदाली रूदन करने की बजाय इन लोगों के बारे में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की राय भी पढियेगा। 

मर्जी आपकी !

मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

कुआँ और मेरा गांव युवराजपुर ग़ाज़ीपुर - लव तिवारी

गांव और कुआँ का सम्बन्ध बहुत पुराना है। कुँवा या कूप जमीन को खोदकर बनाई गई एक संरचना है जिसे जमीन के अन्दर स्थित जल को प्राप्त करने के लिये बनाया जाता है। इसे खोदकर, ड्रिल करके (या बोर करके) बनाया जाता है। बड़े आकार के कुओं से बाल्टी या अन्य किसी बर्तन द्वारा डौर और हाथ की सहायता से पानी निकाला जाता है। भारी मात्रा में जल की पूर्ति के लिए इनमें जलपम्प भी लगाये जाते है जिससे बड़ी मात्रा में खेतों की सींच कर फसल की पैदावार की जा सके। 

हमारे गांव युवराजपुर में कुआ का एक अलग महत्व था। जैसे कि हम और आप जानते है किसी व्यक्ति का बर्चस्व उसके जमीन जायदाद के साथ उसमे कुआ की प्रमुख भूमिका होती थी। अधिकतर जमीदार के  दौर उसके घर या द्वार के आसपास कुआँ का होना पाया जाता है। इसी प्रकार हमारे गांव में भी जमीदारो द्वारा भिन्न भिन्न जगहों पर कुओ की व्यवस्था की गई थी। अत्याधुनिक संसाधनों और घर मे बढ़ती जरूरतों हैंडपम्प समरसेबुल के होने के बाद इन कुओ को कोई नही पूछता और इन कुँआओ की बहुत दयनीय दसा हो गयी है।  स्वर्गीय मदन मोहन सिंह पूर्व ग्राम प्रधान द्वारा उनके कार्यकाल में गांव के अधिकत्तर कुओं की मरम्मत की गई थी जिससे कुआँ वास्तविक रूप पहले से बेहतर और अच्छी हो गयी थी। लेकिन अत्याधुनिक संसाधनों के दौर में कूआँ भी विलुप्ति  के दौर पर है। गांव में कई कुओं को भर दिया गया और जिससे उनका वास्तविक रूप भी खत्म हो गया है। कुछ कुएं आज भी है लेकिन उनका उपयोग न होने की वजह इनका पानी दूषित और गन्दा हो गया है।  मेरे घर के पास भी एक खूबसूरत कूआँ स्वर्गीय श्री अक्षयलाल बाबा के द्वारा गांव के उपयोग के लिए खोदा गया था । जिसका उपयोग हमने भी अपने बचपन काल मे बहुत किया है। 

#युवराजपुर #ग़ाज़ीपुर #उत्तर_प्रदेश 232332

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

मोदी ने मुस्लिमो के लिए सब कुछ किया फिर विरोध क्यों- लव तिवारी

परन्तु इस बार नही- मोदी है तो मुमकिन है

युद्ध मे कभी नही हारे , हम डरते हैं छलचन्दों से
हर बार पराजय पायी है , अपने घर के ही जयचंदों से

भारत मे मुसलमान को इंसान से ज्यादा वोट बैंक की राजनीति के रूप में देखा जाता है। पिछले 70 वर्ष से मुसलमान के पक्ष में फैसले कर कई राजनीतिक पार्टियों ने मुसलमान को लुभाये है और उनसे वोट बैंक की राजनीतिक भी की है। नागरिकता संसोधन बिल में भारतीय मुसलमान की कोई हानि नही है लेकिन गैर बीजपी पार्टियों को ये लगता है कि जो वोट हिन्दू जाति का हमारे साथ है अब वो भी बीजेपी के साथ होता नजर आ रहा है। क्यो की गैर बीजपी सरकार के जीत में मुस्लिमों के साथ हिन्दू वोट की पूर्ण भागीदारी है। 

उधर 2014 से मोदी सरकार ने मुस्लिमों के लिए कई ऎतिहासिक फैसले लिए जिसका जिक्र नीचे तस्वीर में प्रमाणित है । इससे गैर बीजेपी शासित प्रदेश में  न कोई  दंगा न कोई विरोध प्रकट हो रहा है। इससे ये बात स्पष्ट हो जाती है कि राजनीति के आधार पर ही और राजनीति को लेकर ही सारे काम किये जा रहें है। इन सब बातों को भारत के सभी लोग और वो मुसलमान जिन्हें भृमित किया जा रहा है उंन्हे समझना चाहिए।

एक रचना- 

2019 की 

एक अकेला पार्थ खडा है 
भारत वर्ष बचाने को।
सभी विपक्षी साथ खड़े हैं 
केवल उसे हराने को।।
भ्रष्ट दुशासन सूर्पनखा ने 
माया जाल बिछाया है।
भ्रष्टाचारी जितने कुनबे 
सबने हाथ मिलाया है।
समर भयंकर होने वाला 
आज दिखाईं देता है।
राष्ट्र धर्म का क्रंदन चारों 
ओर सुनाई देता है।।
फेंक रहें हैं सारे पांसे 
जनता को भरमाने को।
सभी विपक्षी साथ खड़े हैं 
केवल उसे हराने को।
चीन और नापाक चाहते 
भारत में अंधकार बढ़े।
हो कमजोर वहां की सत्ता 
अपना फिर अधिकार बढे।।
आतंकवादी संगठनों का 
दुर्योधन को साथ मिंला।
भारत के जितने बैरी हैं 
सबका उसको हाथ मिला।।
सारे जयचंद ताक में बैठे 
केवल उसे मिटाने को।
सभी विपक्षी साथ खड़े हैं 
केवल उसे हराने को।
भोर का सूरज निकल चुका है
 अंधकार घबराया है।।
कान्हा ने अपनी लीला में 
सबको आज फंसाया है।
कौरव की सेना हारेगी 
जनता साथ निभायेगी।
अर्जुन की सेना बनकर के 
नइया पार लगायेगी।
ये महाभारत फिर होगा 
हाहाकार मचाने को।
सभी विपक्षी साथ खड़े हैं 
केवल उसे हराने को।।
अज्ञात

प्रस्तुति- लव तिवारी
दिनांक- 21 दिसम्बर 2019

बुधवार, 18 दिसंबर 2019

पाकिस्तान में सांप्रदायिक आधार पर नागरिकता नहीं फिर क्यो हिंदू 23 से 3 प्रतिशत हो गये - लव तिवारी

पाकिस्तान में सांप्रदायिक आधार पर नागरिकता नहीं
द्विराष्ट्र सिद्धांत की व्याख्या करते हुए जिन्ना ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया था कि नागरिकता का कभी भी सांप्रदायिक आधार नहीं होगा. उन्होंने महात्मा गांधी से ये बात कही थी और पाकिस्तान में विभिन्न समुदायों को नागरिकता के समान अधिकार दिए जाने का वादा किया था. जब आज़ादी का अवसर करीब आ गया और अंतरिम सरकार का गठन हुआ, तो जिन्ना ने काउंसिल की एक मुस्लिम सीट के लिए जोगिंदर नाथ मंडल को नामित किया. आगे चलकर मंडल ने पाकिस्तान संविधान सभा के प्रथम सत्र की अध्यक्षता की और पाकिस्तान के प्रथम विधि मंत्री बने. जिन्ना का 11 अगस्त का भाषण बहुत महत्वपूर्ण है.

दुर्भाग्य जिन्ना के कुछ वर्ष शासन के बाद ही पाकिस्तान को पूर्ण मुस्लिम राष्ट्र बंनाने की मुहिम चालू हो गयी और  गैर मुस्लिम लोग जो जिन्ना के इस अधिकार से अपनी धन संपत्ति के मोह में  पाकिस्तान में रह गए उंन्हे जबरन धर्म परिवर्तन कर  मुसलमान बनाया गया  जो हिंदू है उंन्हे आज भी प्रताड़ित किया जाता है इसका उदाहरण पाकिस्तान में कुल हिन्दू की आबादी का 23 से 3% प्रतिशत का होना है। अब नागरिकता बिल को लेकर  तरह तरह के प्रश्न उठ रहे है। मेरे फ़ेसबूक में वो जो मेरे द्वारा लिखे गए बातो का विरोध करते हैं क्या वो पाकिस्तान और बांग्ला देश के गैर मुसलमान  के साथ हुए अन्याय का विरोध किया है। 

प्रस्तुति-लव तिवारी
दिनांक- 18 दिसंबर 2019

रविवार, 15 दिसंबर 2019

नोटबंदी और दारू का ठेका - लव तिवारी

एक प्रश्न की वास्तविकता क्या है
क्या राहुल गांधी और मोदी जी की मां दोबारा बैंक आएंगे ? या अभी 4 हजार खत्म नहीं हुए ।
#राजनीति #कूटनीति 

दूसरी तरफ हम तो न मोदी है न राहुल हमें जब भी जरुरत पड़ती है हम पैसे के लिए लाइन में लगते है और पैसे निकलते भी है , आज थोड़ी देर पहले ही एक रोचक घटना को अंजाम मिला ,लंबी लाइन लाइन में कुछ लोग ये कहने लगे की जाइये भाई आप पहले निकल ले हम बात समझ नहीं पाये लेकिन बाद में इस बात की पुष्टि हुई की सभी लोग 12 बजने का इंतेजार कर रहे थे लेकिन सबसे रोचक घटना तो तब घटित हुयी जब एटीएम में लम्बी लाइन लगाकर पैसे निकालते हुए एक भाई साहब ने लगभग 11.30 मिनट पर यह पूछ दिया की भैया यहाँ ठेका कहा है और अभी खुला होगा की नहीं , हमने भी तुरंत जबाब दिया भाई अशोक नगर जाओ वहाँ मिल जाएगा अनुभवहीन व्यक्ति समझ कर उसने मुझे कहा 10 बजे के बाद अशोक नगर का ठेका बन्द हो जाता है आप यूपी के ठेके की जानकारी दीजिये

कुछ तो बात है साहब अपनी #यूपी में जो पूरी होती नजर आ रही है अब यह सब बात करके दोस्त का खुद ही 2 3 मिनट समय नष्ट हो गया था, बाइक स्टार्ट किये निकल लिए , हम आशा करते है कि दोस्त को उनकी मदिरा जरूर मिल गयी होगी, #भारत सरकार और मोदी जी से अनुरोध है ठेके के समय में भी परिवर्तन करे ताकि मदिरापान वाले व्यक्ति को उस तरह के दिक्कत का सामना न करना पड़े, देश में जहाँ लोग अपनी दैनिक जीवन को निर्वहन करने के लिए पैसे की किल्लत से जूझ रहे है वही कुछ लोगो को मदिरापान, अय्याशी एवम फ़िजूल के  कार्य एवं कई अन्य कारकों ने पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, धन तो धनी आदमी का ही है वो उसे जैसे प्रयोग करे, जहा 500 रूपये के पुराने नोट के चलन का अंतिम दिवस है वही एटीएम वाली तस्वीर गूगल से ली गयी है रात्रि में तस्वीर लेने का कोई अवचित्य नहीं है

वही मदिरापान वाले दोस्त को जलोटा साहब की ग़ज़ल की चंद लाइन
#आँखों से पी #रुत #मस्तानी हो गयी
#जाम से पीना #रश्म #पुरानी हो गयी

धन्यबाद- #लव_तिवारी

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

क्या मैं पागल हुँ तुम्हें सोचकर या तुम्हें भी मेरे सपने आने लगे- लव तिवारी

तन्हाई ने क्या करवट ली तुम फिर मुझको याद आने लगे।
कोई भाता नही है तुम्हारे सिवा दिल को तुम मेरे धङकाने लगे।।

एक बात बताओ तुम मुझको जो मुझे हुआ क्या तुम्हें हुआ।
क्या मैं पागल हूँ तुम्हें सोचकर या तुम्हें भी मेरे सपने आने लगे।।

रचना- लव तिवारी
दिनांक- 13- दिसंबर-2019

सोमवार, 9 दिसंबर 2019

राजनिति में सक्रिय होना कोई बुरी बात नहीं , लेकिन हार कर निष्क्रिय होना ये गलत बात है- लव तिवारी

राजनिति में सक्रिय होना कोई बुरी बात नहीं , लेकिन हार कर निष्क्रिय होना ये गलत बात है, किसी भी गांव का एक ही प्रधान होता है और प्रत्याशी अनेक ,तो क्यों नहीं हारे प्रत्याशी विपक्ष का काम करके, आने वाले नए प्रधान को उसके कार्यो में सहयोग और अगर वो कार्यो के प्रति असंवैधानिक, धोखा धड़ी करता है ,तो इन कार्यो को रोके , यहाँ सब उल्टा होता है प्रत्याशी चुनाव से पहले उत्तेजित होकर गांव के विकास की राजनीती करता है और हार जाने पर द्वेष और बदले की भावना की राजनीति, और हर एक प्रत्याशी को चाहिए की वो सक्रीय होकर राजनिति में सहयोग करके गांव को विकास की एक नयी राह दे , और किसी भी छेत्र के नव निर्मित प्रधान को ये चाहिए को उन प्रत्याशी से मिले जिनकी सामाजिक गरिमा ,कार्य अनुभव, योग्यता हो ,और उनके सहयोग की भी जरुरत गांव के विकास में उपयोगी हो , साथ में ये भी पुराने प्रधानो के द्वारा किये गए अनैतिक कार्य और संसाधनों का दुरपयोग का हिसाब ले, पुरे प्रदेश और देश राजनितिक व्यवस्था चरमरा सी गयी , और नए निर्मित प्रधान केवल अपने कार्यकाल के बारे में सोचते और यह प्रक्रिया निरतंर चलती जाती है, इस प्रकार की राजनिति से केवल गांव के विकास में ही नहीं रुकावट आती है बल्कि आगे आने वाली पढ़ी भी इस प्रकार के राजनितिक दल दल में फसती जाती है, इसका दुस प्रभाव निरतंर देखने को मिलाता है ,इस पोस्ट को किसी राजनितिक पार्टी या किसी प्रत्याशी के गरिमा को आहत करने के लिए नहीं लिखा गया है ,इसका उद्देश्य जागरूकता और सामजिक ब्यवस्था को सही करना है
प्रस्तुति- लव तिवारी
+919458668566



शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

ओवरलोड वाहनों के कारण बार बार क्षतिग्रस्त वीर अब्दुल हमीद सेतु ग़ाज़ीपुर - लव तिवारी

वीर अब्दुल हमीद सेतु गाज़ीपुर का यह पक्का पुल जो पूर्व प्रधानमंत्री श्री मति इंदिरा गांधी जी के द्वारा ग़ाज़ीपुर की जनता को सौगात के रूप में दिया गया था। 10 सितम्बर 1965 में परमवीर चक्र विजेता स्वर्गीय श्री वीर अब्दुल हमीद जी के पूर्ण तिथि इस पुल का नाम वीर अब्दुल हमीद सेतु रखा गया जिसकी लंबाई लगभग 810 मीटर है । इस पक्की पुल की विशेषता (नेशनल हाईवे 97) को मुख्यरूप ग़ाज़ीपुर और बिहार के सीमा को NH 97 के माध्यम से जोड़ना । ग़ाज़ीपुर सैयदराजा मार्ग इसी हमीद सेतू की मदद से जुड़ा हुआ है । वर्तमान में आलाधिकारियों के आदेश ताक पर सुहवल एवं रजागंज पुलिस की मिली भगत से धडल्ले से जारी है ओवरलोड वाहनों का संचालन सेतु पर एक बार फिर खतरा मडरा रहा है, इस खतरा से कभी भी कोई बड़ी दुर्धटना हो सकती है और पूल क्षतिग्रस्त हो सकता है। ऐसा यह पहली बार नही है इस ओवर लोड के चक्कर मे पुल कई बार क्षतिग्रस्त चुका है। इसका दुष्परिणाम सबसे ज्यादा समीपवर्ती गांवों को जैसे- युवराजपुर पटकनिया, बवाडे मेदनीपुर रेवतीपुर सुहवल के लोंगो होता है। किसान की खेती भी इस दुष्परिणाम से कई बार प्रभावित हो चुकी है । आलू के खेती के समय पुल के क्षतिग्रस्त होने से किसानों को सही समय पर आलू को कोल्डस्टोरेज में न रखने से बहुत बड़ा नुकसान का सामना करना पड़ा था।

इस सब समस्यायों का सबसे बड़ा पुलिस थाना सुहवल और राजगंज चौकी ग़ाज़ीपुर के  कारण है। इनकी लूट खसोट के चक्कर से स्थानीय नागरिकों को बहुत नुकसान के साथ दुर्घटना का भी शिकार होना पड़ता है। इस विषय पर सरकार एवम जिले के आला अधिकारियों को इस समस्या का पूर्ण निदान अवश्य ढूढना चाहिए। और पुलिस के इस लापरवाही के प्रति उचित कार्यवाही करनी चाहिए।।

लेखक- लव तिवारी
+91-9458668566
ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश

गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

बहुत खूबसूरत जवां एक लड़की न जाने कहा से - लव तिवारी

बहुत खूबसूरत जवां एक लड़की ।
न जाने कहा से ख्यालो में आयी।।

तकल्लुफ़ की बातें बनावट नही।
न जाने वो कैसे मेरे दिल को भाई।।

वो चेहरा गुलाबी वो आँखे शराबी।
मगर उसके होंठो पर लाली थी ऐसी

न जाने कहाँ से ख्यालो में आयी 
बहुत खूबसूरत जवां एक लड़की।।

परी तो ये मैंने ये देखी नही है ।
यू लगती है मुझको परी से भी प्यारी।।

मेरे दिल की ख्वाईश तमन्ना है ऐसी।
हो जाये वो मेरे सपनों की रानी ।।

बहुत खूबसूरत.......
तकल्लुफ़= दिखवाया, बनावटी
रचना- लव तिवारी
पहली ग़ज़ल - वर्ष 2005