
फिर तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो... जब मैं रूठ जाती हूँ , और तब तुम मुझे अपनी जान बताते हो , मैं तो मर ही जाती हूँ , तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो, जब मैं सोती हूँ तुम्हारे सीने पर सर रख कर , तुम पलकों पर मेरी फिर वही खवाब सजाते हो , मैं तो मर ही जाती हूँ , तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो, जब तुम मेरे गले मैं बाहे डाल देते हो,और मैं खो जाती हूँ तब तुम मेरी आँखों से उतर कर मेरे दिल मैं समां जाते हो , मैं तो मर ही जाती हूँ , तुम मुझे कैसे...