शुक्रवार, 5 जून 2026

आने वाले समय में बहुत सारी लड़कियां शादी नहीं करेगी..।

आने वाले समय में बहुत सारी लड़कियां शादी नहीं करेगी..। 

यहां की शादी व्यवस्था वो नरक है जिसमें पढ़ा लिखा कर अपनी जवान बेटी दूसरों के घर दो और बहुत सारा पैसा भी दो..! 

लड़की कमाती है तो भी, नहीं कमाती है तो भी...! कितना बकवास सिस्टम है ये..।

बेटियों को जिस दिन पिता की संपत्ति में बराबर का हक़ मिलने लग जायेगा ( धरातल पर, सिर्फ कानून में नहीं) उस दिन ऐसे लड़कियों का मरना बंद हो जाएगा..। 

अपने बाप के घर वापिस जाने पर उसे ये नहीं लगेगा कि भाई भाभी या समाज क्या कहेगा..! 
उसे पता होगा अपने हिस्से के घर जा रही हूं वापिस..! 
उस दिन वो अपने बाप भाई का वेट भी नहीं करेगी कि वो लेने आए ससुराल से तब ही जाऊंगी...! 
नहीं रखा ससुराल या पति ने ढंग से तो खुद ही चली जाएगी..! 

ये हत्या/ आत्महत्याएं इसलिए हो रही है कि लड़कियों के पास लौटकर जाने को घर नहीं है..। 
पति चाहेगा तो ही ससुराल रह सकती है, उधर पिता माता चाहेंगे तो ही मायके रह सकती है..। खुद का चाहना कुछ है ही नहीं..। 

लड़की का घर होना सबसे ज्यादा जरूरी है..। अभी हम यहीं तक पहुंच पाए है कि लड़कियों को पढ़ा दे, नौकरी करने दे..। अभी बहुत जरूरी जो है वो ये कि उनका घर भी हो..। पिता से मिला घर (घर में हिस्सा)..। जैसे लड़कों को मिलता है..। 

लड़कों को कभी इस समस्या से नहीं  गुजरना पड़ता कि किसी और के घर जाना है, अपने फ्रेंड्स, कंफर्ट जॉन, पेरेंट्स , सिबलिंग्स......सब छोड़कर..। 
इसमें लड़कों का दोष नहीं, व्यवस्था का है..। 

इस व्यवस्था में वही लड़कियां कामयाब हो रही जिनको रणनीति आती हैं, इस सिस्टम में एडजस्ट होने की, या लाभ लेने की..। जिनकी संख्या बहुत कम हैं..। 

साधारण लड़कियों को वर्षों लग जाते नए घर, लोगों के बीच एडजस्ट होने में..। 

" पहले परिवार छोड़ना पड़ेगा, फिर फ्रेंड्स फिर करियर कॉम्प्रोमाइज और फिर मदरहुड... इतने चैलेंज के बाद कोई इंसान,  कितना ही ओरिजिनल पर्सनेलिटी में जी पाएगा..  ये सब समझ पाने के लिए ही फेमिनिज्म की जरूरत है..। "


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