गुरुवार, 17 अगस्त 2023

हिंदी फिल्म जगत के मशहूर गीतकार श्री इसरार अंसारी जी का संक्षिप्त परिचय एवं रचनाएं

प्रारूप
नाम : श्री इसरार अंसारी साहब
जन्मतिथि : 27-07-1983
माता का नाम :
पिता का नाम : अब्दुल मजीद
जन्म स्थान : रिहाइश मोहल्ला सय्यद वाड़ा जनपद ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश २३३००१

शैक्षिक योग्यता : चश्मे रहमत स्कूल, इंटरमीडिएट एम एच् इंटर कॉलेज गाज़ीपुर

संप्रति (पेशा) : गीतकार ( हिंदी फिल्म जगत) मुंबई

विधाएं : गीत, ग़ज़ल,
साहित्यिक गतिविधियां :
प्रकाशित कृतियां :
पुरस्कार सम्मान : -:ज़ी सिने अवार्ड्स 11 मार्च 2000
सर्वश्रेष्ठ गीतकार इसरार अंसारी - (जिंदगी मौत ना बन जाए गीत के लिए) मनोनीत

संपर्क सूत्र : 9821329610

विशेष परिचय- ग़ाज़ीपुर रिहाइश मोहल्ला सय्यद वाड़ा जाने-माने शायर श्री इसरार अंसारी साहब को कौन नहीं जानता, 90 के दशक में गुलाम अली साहब की फेमस गज़ल एल्बम हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह में दो गानों के साथ प्रसिद्धि पाए हुए श्री   अंसारी साहब अब तक सैकड़ो खूबसूरत फिल्मी गीतों को लिख चुके है।

रचना- १

ज़िंदगी मौत ना बन जाए सम्भालो यारों
खो रहा चैन-ओ-अमन हां
मुश्किलों में है वतन
सरफ़रोशी की शमा दिल में जला लो यारों
ज़िंदगी मौत ना ...

इक तरफ़ प्यार है चाहत है वफ़ादारी है
इक तरफ़ देश में धोखा है गद्दारी है
बस्तियां सहमी हुईं सहमा चमन सारा है
ग़म में क्यूं डूबा हुआ आज सब नज़ारा है
आग पानी की जगह अब्र जो बरसाएंगे
लहलहाते हुए सब खेत झुलस जाएंगे
खो रहा चैन-ओ-अमन ...

चंद सिक्कों के लिए तुम न करो काम बुरा
हर बुराई का सदा होता है अंजाम बुरा
हर बुराई का बस होता है अंजाम बुरा
ज़ुर्म वालों की कहां उम्र बड़ी है यारों
इनकी राहों में सदा मौत खड़ी है यारों
ज़ुल्म करने से सदा ज़ुल्म ही हासिल होगा
जो न सच बात कहे वो कोई बुज़दिल होगा
सरफ़रोशों ने लहू दे के जिसे सींचा है
ऐसे गुलशन को उजड़ने से बचा लो यारों
सरफ़रोशी की शमा ...

रचना- २

कच्ची दीवार हूँ ठोकर ना लगाना मुझको
अपनी नज़रों में बसा कर ना गिराना मुझको

तुम को आंखों में तसव्वुर की तरह रखता हूँ
दिल में धडकन की तरह तुम भी बसाना मुझको

बात करने में जो मुश्किल हो तुम्हें महफ़िल में
मैं समझ जाऊंगा नज़रों से बताना मुझको

वादा उतना ही करो जितना निभा सकते हो
ख़्वाब पूरा जो ना हो वो ना दिखाना मुझको

अपने रिश्ते की नज़ाकत का भरम रख लेना
मैं तो आशिक़ हूँ दिवाना ना बनाना मुझको

कच्ची दीवार हूँ ठोकर ना लगाना मुझको
अपनी नज़रों में बसा कर ना गिराना मुझको

रचना-३

आँखें भी होती है दिल की जुबां
आँखें भी होती है दिल की जुबां
बिन बोले करदेती है हालात
यह पल में बयां
आँखें भी होती
है दिल की जुबां
बिन बोले करदेती है हालात
यह पल में बयां
आँखें भी होती है दिल की जुबां

ख़ामोशी भी तो प्यार में
रखती बहुत यह असर है
कब इश्क़ होजाये यहाँ
दिल को कहाँ यह खबर है
दो दिन भी यह सिलसिले
चुप सके है कहाँ
आँखें भी होती है दिल की जुबां
आँखें भी होती है दिल की जुबां

हमे नींद आये न
जब आँखों में
बढ़ने लगे बेक़रारी
शबनम को भी छूने से जब
महसूस हो चिन्गारी
तो ऐसा क्यों लगता है
एक है ज़मीन आसमान
आँखें भी होती है दिल की जुबां
आँखें भी होती है दिल की जुबां

बिन बोले कर देती है
हालत यह पल में बयां
बिन बोले कर देती है
हालत यह पल में बयां.





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